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गुरुवार, 11 अक्तूबर 2018

हथेली के ये लक्षण होते हैं धन के मामले में भाग्यशाली


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हथेली के ये लक्षण होते हैं धन के मामले में भाग्यशाली 


Palmistry for money in Hindi : हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार हथेली पर पाए जाने वाले चिन्हों व रेखाओं से जीवन में धन लाभ कब होगा व कितना होगा, इन बातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में….
Palmistry for money in Hindi
1. हथेली में जीवन रेखा सही गोलाई में हो। मस्तिष्क रेखा दो भागों में बंटी हो। त्रिकोण का चिन्ह बना हो। ऐसे तीनों लक्षण हथेली पर एक साथ पाया जाना धन के मामले में शुभ संकेत करता है। समय-समय पर अचानक धन का लाभ मिलता रहता है।
2. भाग्यरेखा हथेली के अंत स्थान यानी मणिबंध से शुुरू हो रही हो। साथ ही शनि पर्वत तक पंहुच रही हो। साथ ही भाग्य रेखा पर किसी प्रकार के अशुभ निशान न हो तो व्यवसाय में सफलता मिलने की ओर संकेत करता है। व्यवसाय से धन लाभ होने का योग बनता है।
3. जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा तीनों ही सही लंबाई में हो। तीनों रेखाओं पर अशुभ चिन्ह न हो। हथेली पर पाए जाने वाले ये दो लक्षण धन के मामले में लाभ करवाने वाले माने गए हैं। ऐसी रेखाओं के साथ जीवन रेखा से उदय होने वाली भाग्य रेखा कई भागों में बंटी हो यानी शाखायुक्त हो तब अपार धन संपदा का मालिक बनने का योग होता है।
4. हथेली भारी और फैली हुई हो। उंगलियां कोमल और नरम हो। ऐसी हथेली होने से बहुत धनवान होने का योग बनता है।
5. हथेली में शनि पर्वत यानी मध्यमा उंगली के पास आकर दो या इससे अधिक रेखाएं आकर ठहरती हैं, तो अनेक तरफ से धन और सुख लाभ करवाने वाली होती है।
6. शनि पर्वत अगर उठा हुआ हो। जीवन रेखा सही तरीके से घुमावदार हो। ये लक्षण हथेली में होने से धनवान बनाते हैं।
Palmistry for money in Hindi
7. मस्तिष्क रेखा सही स्थिति में हो यानी कि टूटी हुई और कटी हुई नहीं हो। साथ ही भाग्य रेखा की एक शाखा जीवन रेखा से निकलती हो। हथेलियां गुलाबी व मांसल हो तो करोड़ों में संपदा होने का योग बनता है।
8. उंगलियां सीधी और पतली हो। हृदय रेखा गुरु पर्वत तक जाए। भाग्य रेखा एक से अधिक हो। हथेली के ये लक्षण धन संपत्ति के मामले में लकी बनाते हैं। नौकरी करें या व्यवसाय आमदनी करोड़ों में होने का योग बनता है।
9. चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलकर शनि पर्वत पर पहुंचे और इस पर कहीं त्रिभुज का चिन्ह बन रहा हो तब व्यक्ति की आय सामान्य रहती है।
10. चंद्र पर्वत से कोई पतली रेखा अगर मस्तिष्क रेखा पर आकर रुक जाए तो व्यक्ति भावुकता के कारण अपने भाग्य की हानि करता रहता है। ऐसे व्यक्ति की आय भी सामान्य रहती है।
11. भाग्य रेखा शुरुआत में मोटी हो और बाद में पतली होती जाए और सीधे शनि पर्वत पर जाए। उंगलियां पतली और सीधी हों। हथेली पर गुरु, सूर्य, शनि, बुध चारों पर्वत अच्छी स्थिति में हो यानी कि सही तरीके से उभार लिए हो। हाथ का रंग साफ हो। तब अचानक धन लाभ होने से धनवान होने का योग बनता है।
रेखाओं और पर्वतों के हिन्दी नाम और इंग्लिश नाम
जीवन रेखा- Life Line
हृदय रेखा- Heart Line
मस्तिष्क रेखा- Head Line
सूर्य रेखा- Sun Line or Fame Line
भाग्य रेखा- Fate Line
शुक्र पर्वत- Venus Mount
चंद्र पर्वत- Moon Mount
गुरु पर्वत- Jupiter Mount
मंगल पर्वत- Mars Mount
शनि पर्वत- Saturn Mount
सूर्य पर्वत- Sun Mount
बुध पर्वत- Mercury Mount

















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मंगलवार, 27 मार्च 2018

भारत में ऐसे कई गांव हैं जिनके बारे में अजीबोगरीब कहानियां



भारत में कई गांव हैं जिनके बारे में अजब गजब कहानियां हैं और लोग इन गांवों को इन्हीं अजीबोगरीब रहस्यों से जाना जाता है।

हिमाचल प्रदेश शहर जितना अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण जाना जाता है उतना ही यहां की परंपराओं के कारण भी प्रसिद्व है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में इस दूरदराज इलाके में मलाणा गांव हैं जिसके बारे में अजीबोगरीब कहानी है। देश भर में एक यहीं गांव है जहां अकबर की पूजा होती है। यहां कोई कानून नहीं माना जाता है बल्कि गांव ने ही अपने कानून बना रखे हैं। गांव की ही एक संसद है जो सारे फैसले लेती है। इस गांव में किसी बाहरी आदमी के छूने की मनाही है। मतलब, कोई दूसरे शहर या गांव का शख्स यदि यहां के किसी आदमी को छूता है तो उस पर एक हजार का जुर्माना ठोक दिया जाता है और ये जुर्माना उस बाहरी शख्स से लिया जाता है जो छूता है।

उत्तरप्रदेश में एक गांव की पूरी दुनिया में चर्चाएं है। यह गांव अपनी एक खासियत की वजह से पूरे देश में पहचाना जाता है। इस गांव का नाम है सलारपुर खालसा जो अमरोहा जनपद के जोया विकास खंड क्षेत्र का एक छोटा सा गांव है। इस गांव की जनसंख्या 3500 है। इस गांव के टमाटर सबसे ज्यादा प्रसिद्व है। बताया जाता है कि इस गांव में टमाटर की खेती बडे पैमाने पर होती है। देश का शायद ही कोई कोना होगा, जहां पर सलारपुर खालसा की जमीन पर पैदा हुआ टमाटर न जाता हो।

राजस्थान के जैसलमेर में भी एक गांव भुतहा है जिसका नाम कुलधरा गांव है। वैसे तो ये टूरिस्ट स्पॉट है लेकिन भूतों के भय से 170 साल से वीरान पडा है। रात को यहां कोई नहीं आता है। कहते हैं यहां पालीवाल ब्राह्मणों की आवाजें सुनाई देती हैं।\

पंजाब के जालंधर शहर उप्पलां नाम से एक गांव है। इस गांव की सबसे खास बात यह है कि गांव के लोगों की पहचान पानी की टंकियों से जाना जाता है। यहां के मकानों की छतों पर आम वाटर टैंक नहीं है, बल्कि यहां पर शिप, हवाई जहाज, घोडा, गुलाब, कार, बस आदि अनेकों आकर की टंकिया है। इस गांव के अधिकतर लोग पैसा कमाने लिए विदेशों में रहते है। गांव में खास तौर पर एनआरआईज की कोठियां में छत पर इस तरह की टंकिया रखी है। अब कोठी पर रखी जाने वाली टंकियों से उसकी पहचानी जा रही हैं।

केरल के मलप्पुरम जिले में कोडिन्ही नाम से एक गांव है। जहां जुडवा जोडे बडी तादाद में है। इसे ट्विंस विलेज के नाम से जाना जाता है। विश्वस्तर पर एक हजार बच्चों में चार जुड़वां होते हैं लेकिन यहां ये प्रतिशत काफी ज्यादा है। यहां एक हजार बच्चों में 45 बच्चे जुडवां होते हैं।

कर्नाटक के शिमोगा शहर के दस किलोमीटर दूर एक गांव है जिसका नाम है मुत्तुरू गांव। इसगांव के लोग केवल संस्कृत में ही बात करते हैं। बच्चों की सारी शिक्षा दीक्षा संस्कृत में ही की जाती है

साईं बाबा के दरबार से तो सब परिचित हैं। इनके पास ही है शनि शिंगणापुर, जो महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में पडता है। यहां शनि का प्रसिद्ध मंदिर हैं। इस गांव में कभी चोरी नहीं होती है। इसलिए गांव के किसी घर में दरवाजे नहीं होते। कहा जाता है कि शनि देव गांव की रक्षा करते हैं।

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सोमवार, 19 मार्च 2018

सुख-समृद्धि पाने के लिए कुछ खास उपाय

सुख-समृद्धि पाने के लिए कुछ खास उपाय


सुख-समृद्धि पाने के लिए ज्योतिष और वास्तु के नियमों का पालन करने से लाभ मिल सकता है। वास्तु में धन संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए कुछ खास उपाय--

1. भगवान कुबेर और सूर्य देव की कृपा पाने के लिए सोते समय अपना सिर ऐसे रखें कि उठते समय आपके पैर पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर न हो।

2. न‌ियम‌ित रूप से उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय सूर्य का मंत्र 'ऊँ आद‌ित्याय नमः' मंत्र का जप करें।

3. हर द‌िन अपने इष्ट देव की पूजा करें। अगर समय कम हो तो धूप-दीप जलाकर थोड़ी देर उत्तर या पूर्व द‌िशा की ओर मुंह करके ध्यान करें।

4. पूजन के समय तांबे के बर्तन में जल भरकर रखें और उसे पूजा के बाद घर के हर भाग में छ‌िड़क दें। इससे पॉजिटिव एनर्जीबनी रहती है।

5. देवी देवताओं पर चढाए गए फूल और हार सूख जाने पर घर में नहीं रहने दें, इसे जल में प्रवाह‌ित कर देना चाह‌िए।

6. बीमारियों और परेशानियों से बचने के लिए भोजन हमेशा उत्तर की ओर मुंह करके करना चाह‌िए।

7. भोजन हमेशा किचन में ही करना चाहिए, इससे राहु का अशुभ प्रभाव कम होता है। बेडरूम और ब‌िस्तर पर भोजन करने से नेगेटिव प्रभाव पड़ता है।

8. हर द‌िन भोजन बनाते समय पहली रोटी गाय के ल‌िए और अंत‌िम रोटी कुत्ते के ल‌िए न‌िकालकर रख दें। इससे ग्रहों के अशुभ प्रभाव खत्म हो जाते हैं।

9. न‌ियम‌ित तुलसी के पौधे को जल दें और शाम के समय दीपक जलाएं। इससे घर पर हमेशा लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

10.सूर्योदय और सूर्यास्त के समय नहीं सोना चाह‌िए। ऐसा करना कई तरह के दुखों और परेशानियों का कारण बनता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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सोमवार, 26 फ़रवरी 2018

होली के कुछ खास टोने टोटके

होली के कुछ खास टोने टोटके 


होली का दिन तांत्रिक क्रियाओं के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इस दिन अभिमंत्रित और आमंत्रित कर जडी-बूटी घर लाई जाती है। कई प्रकार के मंत्रों की सिद्धियां भी की जाती हैं। होली की पूजा मुख्यत: भगवान विष्णु (नरसिंह अवतार) को ध्यान में रखकर की जाती है। घर के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में देशी घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अवश्य चढाना चाहिए। होली की ग्यारह परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है, कष्ट दूर होते हैं।

होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपड़े में बांधकर काले तिल रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल दें। यदि पहले से ही कोई टोटका होगा तो वह भी खत्म हो जाएगा। होली दहन के समय सात गोमती चक्र लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्णश्रद्धा व विश्वास के साथ गोमती चक्र दहन में डाल दें।

होली दहन के दूसरे दिन होली की राख को घर लाकर उसमें थोड़ी सी राई एवं नमक मिलाकर रख लें। इस प्रयोग से भूतप्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती है। होली के दिन से शुरु होकर बजरंग बाण का 40 दिन तक नियमित पाठ करनें से हर मनोकामना पूर्ण होगी। यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति नहीं हो रही हो, तो 21 गोमती चक्र लेकर होली दहन के दिन रात्रि में शिवलिंग पर चढा दें। नवग्रह बाधा के दोष को दूर करने के लिए होली की राख से शिवलिंग की पूजा करें तथा राख मिश्रित जल से स्नान करें।

होली वाले दिन किसी गरीब को भोजन अवश्य करायें। होली की रात्रि को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाकर पूजा करें एवं भगवान से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से बाधा निवारण होता है। यदि बुरा समय चल रहा हो तो होली के दिन पेंडुलम वाली नई घडी पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाएं। परिणाम स्वयं देखे।

राहु का उपाय- एक नारियल का गोला लेकर उसमे अलसी का तेल भरकर उसी में थोडा सा गुड़ डालें। फिर उस नारियल के गोले को राहु से ग्रस्त व्यक्ति अपने शारीर के अंगो से स्पर्श करवाकर जलती हुई होलिका में डाल दे। पूरे वर्ष भर राहु से परेशानी की संभावना नहीं रहेगी। मनोकामना की पूर्ति हेतु होली के दिन से शुरू करके प्रतिदिन हनुमान जी को पांच लाल पुष्प चढ़ाएं, मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी।

होली की प्रात: बेलपत्र पर सफेद चंदन की बिंदी लगाकर अपनी मनोकामना बोलते हुए शिवलिंग पर सच्चे मन से अर्पित करें। बाद में सोमवार को किसी मंदिर में भोलेनाथ को पंचमेवा की खीर अवश्य चढ़ाएं, मनोकामना पूरी होगी। स्वास्थ्य लाभ हेतु मृत्यु तुल्य कष्ट से ग्रस्त रोगी को छुटकारा दिलाने के लिए जौ के आटे में काले तिल एवं सरसों का तेल मिला कर मोटी रोटी बनाएं और उसे रोगी के ऊपर से सात बार उतारकर भैंस को खिला दें। यह क्रिया करते समय ईश्वर से रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें।

व्यापार लाभ के लिए होली के दिन गुलाल के एक खुले पैकेट में एक मोती शंख और चांदी का एक सिक्का रखकर उसे नए लाल कपड़े में लाल मौली से बांधकर तिजोरी में रखें, व्यवसाय में लाभ होगा। होली के अवसर पर एक एकाक्षी नारियल की पूजा करके लाल कपड़े में लपेट कर दुकान में या व्यापार स्थल पर स्थापित करें। साथ ही स्फटिक का शुद्ध श्रीयंत्र रखें। उपाय निष्ठापूर्वक करें, लाभ में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होगी।

धनहानि से बचाव के लिए होली के दिन मुख्य द्वार पर गुलाल छिडक़ें और उस पर द्विमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय धनहानि से बचाव की कामना करें। जब दीपक बुझ जाए तो उसे होली की अग्नि में डाल दें। यह क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, धन हानि से बचाव होगा। दुर्घटना से बचाव के लिए होलिका दहन से पूर्व पांच काली गुंजा लेकर होली की पांच परिक्रमा लगाकर अंत में होलिका की ओर पीठ करके पांचों गुन्जाओं को सिर के ऊपर से पांच बार उतारकर सिर के ऊपर से होली में फेंक दें।

होली के दिन प्रात: उठते ही किसी ऐसे व्यक्ति से कोई वस्तु न लें, जिससे आप द्वेष रखते हों। सिर ढक कर रखें। किसी को भी अपना पहना वस्त्र या रुमाल नहीं दें। इसके अतिरिक्त इस दिन शत्रु या विरोधी से पान, इलायची, लौंग आदि न लें। ये सारे उपाय सावधानीपूर्वक करें, दुर्घटना से बचाव होगा। आत्मरक्षा हेतु किसी को कष्ट न पहुंचाएं, किसी का बुरा न करें और न सोचें। आपकी रक्षा होगी।
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शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार शुभ और अशुभ



पौराणिक शास्त्रों के अनुसार शुभ और अशुभ के बारे में कई बार हम पढ़ते आए हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं वास्तुशास्त्र के अनुसार भी कुछ ऐसे संकेत हैं, जिन्हें बेहद अशुभ माना जाता है। दरअसल इन संकेतों का दिखना बताता है कि जिस काम को आप करने जा रहे हैं, वह असफल रहेगा और साथ ही ये आपके आने वाले बुरे समय की ओर भी इशारा करते हैं। चलिए जानें, कौन से है वह अशुभ संकेत...

वास्तुशास्त्र के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि जिस भी घर में प्रचूर मात्रा में काली चींटियां झुंड में आती हैं, वहां धन वर्षा होने लगती है। लेकिन अगर यह चींटियां काली ना होकर लाल हैं तो यह बड़े नुकसान के होने का संकेत है। इसके साथ ही अगर आपके घर में दीमक आ गई है या मधुमक्खी ने अपना छत्ता बना लिया है तो यह दर्शाता है कि गृहस्वामी को कोई असहनीय शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है।

अगर आपका घर बहुत पथरीली या टेढ़ी-मेढ़ी जमीन पर बना हुआ है तो यह इस बात का संकेत है कि घर में रहने वाले लोगों को हर समय किसी ना किसी परेशानी का सामना पड़ सकता है। इसके साथ ही अगर घर में अचानक से ही काले चूहों का आना-जाना शुरू हो जाए या उनकी संख्या में अचानक से वृद्धि हो तो यह आने वाली विपत्तियों की ओर इशारा करता है।

भवन-निर्माण के लिए अगर आप किसी भूमि की खुदाई कर रहे हैं और वहां कोई मृत जीव, खासकर सर्प दिख जाए यह अशुभ है। यह दर्शाता है कि बुरा समय आपके बहुत नजदीक है। वहीं अगर भूमि की खुदाई करते हुए राख या हड्डी जैसी वस्तुएं मिलती हैं तो यह पहचान है कि आपके ऊपर कोई अनजाना खतरा मंडरा रहा है। जिसके लिए आपको जल्द ही शांति पूजा करवा लेनी चाहिए।

भवन-निर्माण के लिए अगर आप किसी भूमि की खुदाई कर रहे हैं और वहां कोई मृत जीव, खासकर सर्प दिख जाए यह अशुभ है। यह दर्शाता है कि बुरा समय आपके बहुत नजदीक है। वहीं अगर भूमि की खुदाई करते हुए राख या हड्डी जैसी वस्तुएं मिलती हैं तो यह पहचान है कि आपके ऊपर कोई अनजाना खतरा मंडरा रहा है। जिसके लिए आपको जल्द ही शांति पूजा करवा लेनी चाहिए।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

महाशिवरात्रि पर महादेव को मनाने के कुछ उपाय

महाशिवरात्रि पर महादेव को मनाने के कुछ उपाय

महाशिव रात्रि अपने आप में विशेषकर पुण्यदायक साधना पर्व है क्योंकि शिव वही है, जिन्होंने रावण को अटूट बल दिया। मार्कण्डेय को अपना कर यमराज से मुक्ति दिलवाई। परशुराम को बलशाली बनाया और समस्त दीन-दुखियों, दरिद्र प्राणियों, संकटग्रस्त जीवों, लावारिसों आदि समस्त प्राणियों के जीवन की रक्षा कर उन्‍हें समृद्ध बनाते हैं।

शिव का अर्थ मंगलमय और मंगलदाता है। शिव के इस मंगलमय रूप की उपासना समस्त जातकों, सिद्धों और साधकों के लिए मंगलमय है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से साधुओं को मोक्ष प्राप्ति, रोगियों को रोगों से मुक्ति, सभी साधकों को मनवांछित फल प्राप्ति होती है। भगवान शिव की पूजा गृहस्थ जातकों के लिए जरूरी कही जा सकती है। इस दिन पूजा करने से गृहस्थ जीवन में चल रहा मतभेद, पूर्व गृहस्थ सुख, अखंड सौभाग्य की प्राप्ति आदि शुभ फलों की प्राप्ति होती है। भगवान शिव कई रूपों में जातक की मनोकामना पूरी करते है। वहीं महामृत्युंजय रूप में शिव अनेक रोगों का भी हरण करते हैं। शिव एक मात्र ऐसे परमबह्म हैं, जो साधक की कामना से क्षण भर में प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्राप्ति का वर दे देते हैं।

शारीरिक पीड़ा, अकाल मृत्यु दूर करने के लिए
अनेक जातकों की कुंडली में कुछ ऐसे अशुभ योग होते हैं, जिनके कारण उनकी आकस्मिक मृत्यु या उन्हें आकस्मिक मृत्युतुल्य कष्ट होता है। ऐसी स्थिति में शिवपूजा से ही समस्त बाधाओं का निवारण किया जा सकता है। शिवरात्रि के दिन शिव भगवान की प्रतिमा और महामृत्युंजय यंत्र को लाल रंग के वस्त्र पर बिछाकार रखें, उसके बाद विधि-विधान से उसकी पूजा अर्चना कर इस मंत्र का जाप करें- ओम हौं जूं: स: ओम भूर्भव: स्व: ओम त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम् पुष्टिवद्र्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्युर्मुक्षीय मामृतात्। ओम स: भूर्भव: भू: ओम स: जूं: हौम ओम । मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 

व्यापार बाधा की समाप्ति के लिए 
अक्सर यह देखने में आता है कि किसी जातक का अच्छा चलता हुआ व्यवसाय रूक जाता है। कभी-कभी व्यवसाय में विशेष हानि हो जाती है। इन समस्त समस्याओं का निवारण शिवरात्रि के दिन शिव के आशीर्वाद स्वरूप से ही हो जाता है। इसके लिए व्यापार वृद्धि यंत्र लगाकर पूजा करें। इस मंत्र की एक माला का जाप करें। ओम हृीं क्लीं नित्य दर्शनाय क्लीं हृीं ओम । माला जपने के बाद व्यापार वृद्धि यंत्र को व्यापार क्षेत्र में स्थापित करें।

मानसिक बाधा, चिंता दूर करने के लिए 
आज के दौर में ज्यादातर लोग डिप्रेशन, मानसिक चिंता और सिरदर्द जैसे कई रोगों से परेशान रहते हैं। मानसिकता का संकीर्ण होना किसी कार्य में मन नहीं लगना, दिन भर व्यर्थ में घूमना। इस तरह के विकारों से बचने के लिए शिव पूजा करना अति श्रेष्ठ होता है। इसके लिए पारद शिवलिंग की पूजा करें। उसके बाद निम्न मंत्र की एक माला का जाप करें। ओम सदाशिव भव फट। एक माला जप करने के बाद पारद शिवलिंग को पूजाकक्ष में स्थापित करें। नित्य प्रति शिवपूजा करें। ऐसा करने से अशुभ फलों से निवारण संभव होता है। 

मुकदमेबाजी और कलह से छुटकारा 
कभी-कभी अनायास ही कुछ लोग मुकदमेबाजी में फंस जाते हैं। केसबाजी में कई लोगों को कभी-कभी बेहद तकलीफ भी उठानी पड़ती है। पारिवारिक या पैतृक सम्पत्ति के लिए घर में कलह होता है, मुकदमेबाजी होती है। यदि कोई जातक इस तरह की भयानक समस्या से पीडि़त हो तो पांचमुखी रूद्राक्ष की माला का प्रयोग करके निम्न मंत्र से शिव की पूजा करना अतिश्रेष्ठ होता है। ओम क्रीं नम: शिवाय क्रीं । इस मंत्र की माला जप पांचमुखी रूद्राक्ष माला से करें और फिर उसे गले में धारण करें। सभी अशुभ फलों में कमी होकर शुभ फल प्राप्त होंगे।




कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए 
कालसर्प दोष की मुक्ति के लिए शिवरात्रि के दिन भोर के समय शिवमंदिर में जाकर शिवलिंग पर सबसे पहले दूध और फिर जल से स्नान करवाएं। शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। पूजा की आखिर में धतूरा चढ़ाते हुए निम्न मंत्र की एक माला का जाप करें। नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गराय महेश्वराय, नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नम: शिवाय। इससे कालसर्प के अशुभ दोष से मुक्ति मिलती है। 

इच्छित कार्य की पूर्ति के लिए 
मनोकामना पूरी करने के लिए शिवरात्रि के दिन हल्दी की तीन पुडिय़ा बनाएं। शिव-पार्वती की तस्वीर के सामने अपनी समस्या के निवारण के लिए संकल्प करें। उसके बाद एक पुडिय़ा पार्वती माता के चरणों में रखें। दूसरी पुडिय़ा को जल में प्रवाहित करें। तीसरी पुडिय़ा हमेशा अपने पास रखें। ऐसा करने से निश्चित रूप से समस्त इच्छित कार्यो की पूर्ति होगी। इच्छा पूर्व होने के बाद पार्वती मां के चरणों में रखी पुडिय़ा और स्वयं के पास रखी पुडिय़ा, दोनों को मिलाकर जल में प्रवाहित करें।










बुधवार, 31 जनवरी 2018

चंद्रग्रहण 2018 किन 9 राशि के जातक पर भारी पड़ेगा



Chandra Grahan 2018: आज साल 2018 का पहला चंद्रग्रहण हो रहा है। आज के इस चंद्रग्रहण पर एक विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन 176 साल बाद पुष्य नक्षत्र का योग बन रहा है। साथ ही इस दिन चांद सामान्य से 14 प्रतिशत बड़े आकार में और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिखाई देगा। इस ग्रहण से 12 राशियों पर अलग-अलग असर पड़ेगा। लेकिन 9 राशियों पर इसका असर ज्यादा रहेगा। आइए जानते हैं किन 9 राशि के जातक पर भारी पड़ेगा यह चंद्रग्रहण-

1. मिथुन- मिथुन राशि के जातक को आज के दिन थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। आज आपको पैसों की तंगी से परेशान होना पड़ सकता है। आर्थिक निवेश करने के लिए आज का समय अनुकूल नहीं है। किसी जरुरी काम से बाहर जा सकते हैं लेकिन वह काम पूरा नहीं हो पाएगा।

2. कर्क – कर्क राशि के जातक को आज सावधान रहना होगा। आज वाहन चलाते समय सावधानी अधिक बरतें। आज के दिन आपको चोट लग सकती है या किसी अन्य बीमारी की चपेट में आ सकते हैं इसलिए आज इन बातों का ध्यान रखें। जल्दबाजी से बचें।


3. सिंह – चंद्र ग्रहण से सिंह राशि के जातक को आर्थिक परेशानी हो सकती है। मानसिक परेशानी हो सकती है। परिवार में अशांति का माहौल रहेगा। किसी के साथ झगड़ा हो सकता है। आर्थिक नुकसान हो सकता है।

4. तुला – तुला राशि के लिए ग्रहण ठीक नहीं होगा। किसी काम को पूरा करने के लिए आज आपको अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। पारिवारिक समस्याएं हो सकती है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। मानसिक तनाव से ग्रस्त रहेंगे।

5. वृश्चिक – ग्रहण के प्रभाव से आपको परेशानी हो सकती है। आपके कार्य में बाधा आ सकती है। गलतफहमी का शिकार हो सकते हैं। भाग्य के भरोसे रहने से काम में देरी या असफल हो सकते हैं।


6. धनु – ग्रहण से धनु राशि के जातक को काम में अनेक चुनौतियां का सामना करना पड़ सकता है। आज आकस्मिक धन हानि हो सकती है। कानूनी मामलों में परेशानी हो सकती है या मुश्किलें में घिर सकते हैं।

7. मकर – मकर राशि के जातक पर ग्रहण का असर उनके दांपत्य जीवन पर पड़ेगा। नौकरी में समस्याएं आ सकती है। कारोबार में नुकसान हो सकता है। आर्थिक परेशानी आ सकती है। जीवनसाथी के साथ मनमुटाव हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।

8. कुंभ – कुंभ राशि के जातक की आज सेहत खराब हो सकती है। आर्थिक तंगी से परेशान होना पड़ सकता है। कार्य में अधिक परिश्रम करना पड़ेगा।

9. मीन – आज आपके खर्चे बढ़ सकते हैं। नौकरी में कार्यभार बढ़ सकता है। आर्थिक नुकसान हो सकता है। किसी से वाद-विवाद होने की संभावना है। किसी से विश्वासघात मिल सकता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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मंगलवार, 30 जनवरी 2018

अष्टभुजा धाम इस मंदिर में बिना सिर वाली मूर्तियों की होती है पूजा



उत्तरप्रदेश के एक ऐसे मंदिर के बारे में, जहां देवी-देवताओं की ज्यादातर मूर्तियों पर सिर ही नहीं है। वैसे तो लोग खंडित मूर्तियों की पूजा नहीं करते हैं, लेकिन यहां इन मूर्तियों को 900 सालों से संरक्षित किया जा रहा है और इनकी पूजा भी की जाती है।

यह मंदिर उत्तरप्रदेश की राजधानी से 170 किमी दूर प्रतापगढ़ के गोंडे गांव में स्तिथ है। यह मंदिर लगभग 900 साल पुराना हैं। अष्टभुजा धाम मंदिर की मूर्तियों के सिर औरंगजेब ने कटवा दिए थे। शीर्ष खंडित ये मूर्तियां आज भी उसी स्थिति में इस मंदिर में संरक्षित की गई हैं।

ASI के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, मुगल शासक औरंगजेब ने 1699 ई. में हिन्दू मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया था। उस समय इसे बचाने के लिए यहां के पुजारी ने मंदिर का मुख्य द्वार मस्जिद के आकार में बनवा दिया था, जिससे भ्रम पैदा हो और यह मंदिर टूटने से बच जाए।

मुगल सेना इसके सामने से लगभग पूरी निकल गई थी, लेकिन एक सेनापति की नजर मंदिर में टंगे घंटे पर पड़ गई। फिर सेनापति ने अपने सैनिकों को मंदिर के अंदर जाने के लिए कहा और यहां स्थापित सभी मूर्तियों के सिर काट दिए गए। आज भी इस मंदिर की मूर्तियां वैसी ही हाल में देखने को मिलती हैं।

मंदिर की दीवारों, नक्काशियां और विभिन्न प्रकार की आकृतियों को देखने के बाद इतिहासकार और पुरातत्वविद इसे 11वीं शताब्दी का बना हुआ मानते हैं। गजेटियर के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण सोमवंशी क्षत्रिय घराने के राजा ने करवाया था। मंदिर के गेट पर बनीं आकृतियां मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर से काफी मिलती-जुलती हैं।

इस मंदिर में आठ हाथों वाली अष्टभुजा देवी की मूर्ति है। गांव वाले बताते हैं कि पहले इस मंदिर में अष्टभुजा देवी की अष्टधातु की प्राचीन मूर्ति थी। 15 साल पहले वह चोरी हो गई। इसके बाद सामूहिक सहयोग से ग्रामीणों ने यहां अष्टभुजा देवी की पत्थर की मूर्ति स्थापित करवाई।

इस मंदिर के मेन गेट पर एक विशेष भाषा में कुछ लिखा है। यह कौन-सी भाषा है, यह समझने में कई पुरातत्वविद और इतिहासकार फेल हो चुके हैं। कुछ इतिहासकार इसे ब्राह्मी लिपि बताते हैं तो कुछ उससे भी पुरानी भाषा का, लेकिन यहां क्या लिखा है, यह अब तक कोई नहीं समझ सका।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

समस्याओं को दूर करने के ज्योतिषीय उपाय

समस्याओं को दूर करने के ज्योतिषीय उपाय 


व्यक्ति के जीवन में कुछ न कुछ समस्याएं जरूर रहती हैं। कभी कोई समस्या जल्दी खत्म हो जाती है तो कोई समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। कुछ लोग इसे अपना दुर्भाग्य समझने लगते हैं। इन समस्याओं का निदान छोटे-छोटे ज्योतिषीय उपाय करने से हो सकता है। जरूरत है तो बस उन पर पूरी तरह विश्वास करने की। आज हम आपको ऐसे ही छोटे-छोटे उपायों के बारे में बता रहे हैं जो आपके दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकते हैं।

1. लगातार धन हानि हो रही हो और असफलता पीछा नहीं छोड़ रही हो तो परेशान व्यक्ति के सिर से पैर तक एक लाेटा पानी 7 बार उतारें। कर पानी सहीत वो लोटा श्मशान में गाड़ दें।
2. किसी काम के लिए घर से निकलते वक्त पहले विपरीत यानी उल्टी दिशा में 4 कदम चलें।
3. सोमवार या शुक्रवार को मछलियों के लिए आटे की गोलियां बना कर नदी या तालाब में डालें
4. रोज हनुमान जी की मूर्ति के बाएं पैर का सिंदूर सिर पर लगाएं। रोज न हो पाए तो मंगलवार और शनिवार को करें।
5. सरसों के तेल में मीठे भजिए तलें और गरीबों को बांट दें।
6. अपने खाने की थाली में से एक रोटी गाय और एक कुत्ते के लिए निकालें।
7. आधे सुखे नारियल में चीनी भरकर कच्ची जमीन में दबा दें। सारी परेशानियां खत्म हो जाएंगी।जिस बर्तन से घर के लोग पानी पीते हैं उसमें से थोड़ा-सा पानी लेकर उसमें गंगा जल मिलाकर घर के चारों कोनों में छींट दें। बचा हुआ पानी घर के बीच वाले स्थान पर डाल दें। ये उपाय सूर्योदय के समय करें।


शनिवार, 13 जनवरी 2018

लोहडी क्यों और कब मनाई जाती है इसकी कुछ रोचक बाते

लोहडी क्यों और कब मनाई जाती है इसकी कुछ रोचक बाते


 लोहडी को पंजाबी और हरियाणवी लोग बहुत उल्लास से मनाते हैं। पारंपरिक तौर पर लोहडी फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुडा एक विशेष त्यौहार है। यह मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति की पूर्वसंध्या पर इस त्यौहार का उल्लास रहता है। इन दिनों देशभर में पतंगों का ताता लगा रहता हैं। देश में भिन्न-भिन्न मान्यताओं के साथ इन दिनों त्योहार का आनंद लिया जाता है। इस दिन सभी अपने घरों और चौराहों के बाहर लोहड़ी जलाते हैं। आग का घेरा बनाकर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाते हुए रेवड़ी, मूंगफली और लावा खाते हैं। इस दिन सब एक-दूसरे से मिलकर इस खुशी को बाटते है।

कब मनाया जाता हैं लोहडी का त्योहार
लोहडी पौष माह की अंतिम रात को एवम मकर संक्राति की सुबह तक मनाया जाता हैं यह 12 अथवा 13 जनवरी को प्रति वर्ष मनाया जाता हैं। इस साल 2018 में यह त्यौहार 13 जनवरी, दिन शनिवार को मानाया जायेगा।

कैसे मनाते हैं लोहड़ी--
पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुडा एक विशेष त्यौहार है। इस दिन अलाव जलाकर उसके इर्दगिर्द डांस किया जाता है। लउके भांगडा करते है और लडकियां और महिलाएं गिद्धा करती है। इस दिन विवाहिता पुत्रियों को मां के घर से त्योहार (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है। वहीं, जिन परिवारों में लडक़े का विवाह होता है या जिन्हें पुत्र प्राप्ति होती है, उनसे पैसे लेकर मुहल्ले या गांव भर में बच्चे ही रेवड़ी बांटते हैं।

क्यों मनाया जाता लोहडी है-
यह त्योहार सर्दियों के जाने और बंसत के आने का संकेत है। इसलिए लोहड़ी की रात सबसे ठंडी मानी जाती है। इस दिन पंजाब में अलग ही रौनक देखने को मिलती है। लोहड़ी को फसलों का त्योहार भी कहते हैं क्योंकि इस दिन पहली फसल कटकर तैयार होती है। पवित्र अग्नि में कुछ लोग अपनी रवि फसलों को अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से फसल देवताओं तक पहुंचती है।

कहां से आया लोहड़ी शब्द--
अनेक लोग मानते हैं कि लोहड़ी शब्द लोई (संत कबीर की पत्नी) से उत्पन्न हुआ था, लेकिन कई लोग इसे तिलोडी से उत्पन्न हुआ मानते हैं, जो बाद में लोहडी हो गया। वहीं, कुछ लोग यह मानते है कि यह शब्द लोह’ से उत्पन्न हुआ था, जो चपाती बनाने के लिए प्रयुक्त एक उपकरण है।

पौराणिक एवम एतिहासिक कथा--
पुराणों के आधार पर इसे सती के त्याग के रूप में प्रतिवर्ष याद करके मनाया जाता हैं। कथानुसार जब प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के पति महादेव शिव का तिरस्कार किया था और अपने जामाता को यज्ञ में शामिल ना करने से उनकी पुत्री ने अपनी आपको को अग्नि में समर्पित कर दिया था। उसी दिन को एक पश्चाताप के रूप में प्रति वर्ष लोहडी पर मनाया जाता हैं और इसी कारण घर की विवाहित बेटी को इस दिन तोहफे दिये जाते हैं और भोजन पर आमंत्रित कर उसका मान सम्मान किया जाता हैं। इसी खुशी में श्रृंगार का सामान सभी विवाहित महिलाओ को बांटा जाता हैं।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शनिवार, 6 जनवरी 2018

भगवान शिव को क्यों कहते है नीलकंठ

भगवान शिव को क्यों कहते है नीलकंठ

भगवान शिव का ध्यान करने से ही एक ऐसी छवि उभरती है जिसमें वैराग है। इस छवि के हाथ में त्रिशूल, वहीं दूसरे हाथ में डमरु, गले में सांप और सिर पर त्रिपुंड चंदन लगा हुआ है। किसी भी शिव मंदिर या मूर्ति में भगवान शिव के पास ये चार चीजें हमेशा मिलती हैं। कई सवाल इसके साथ जुड़े हैं कि भगवान शिव के साथ ही ये सब चीजें प्रकट हुई थी। इन सवालों का ये भी उत्तर हो सकता है कि समय के साथ और अलग-अलग घटनाओं के साथ भगवान शिव के साथ ये सब जुड़ता गया हो। भगवान शिव की जटाओं में अर्ध चंद्रमा, सिर से निकलती गंगा आदि ऐसी कितनी बातें हैं जो भगवान शिव को रहस्यमयी बनाती हैं। इसी के साथ भगवान शिव का कंठ नीला पाया जाता है और उन्हें नीलकंठ नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव के नीले कंठ वाले बनने के पीछे एक कथा प्रचलित है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि क्षीरसागर के मंथन के समय कई महत्वपूर्ण वस्तुएं प्रकट हुई थी जैसे कल्पवृक्ष, कामधेनु गाय आदि प्रकट हुए और उन्हें देवों और राक्षसों के बीच बांटा गया। क्षीरसागर से अमृत प्राप्त होने पर देवताओं ने चलाकी से उसे ले लिया था। मंथन के दौरान सागर में से भयंकर विष निकला, ये इतना शक्तिशाली था कि उसकी एक बूंद से पूरा संसार नष्ट हो सकता था। इससे सभी देवता और राक्षस डर गए और उनमें प्राण बचाने के लिए खलबली मच गई थी। इसका हल पाने के लिए सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना करी।

संसार की समस्या से निपटने के लिए भगवान शिव ने विष का पान कर लिया। इस विष को गले से नीचे ना जाने देने के लिए माता पार्वती भगवान शिव के गले में विराजमान हो गई। जिसके कारण भगवान शिव का गला नीला हो गया और उसके बाद से उन्हें नीलकंठ के नाम से जाना जाने लगा। संपूर्ण मानव जाति की रक्षा के लिए भगवान शिव ने विष को ग्रहण कर लिया था।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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धन की कमी दूर करने के उपाय



शास्त्रानुसार प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रात: दस बजे पीपल वृक्ष पर मां लक्ष्मी का फेरा लगता है। इसलिए जो व्यक्ति आर्थिक रूप से परेशान हो, वो इस समय पीपल के वृक्ष के पास जाये, उसका पूजन करें, जल चढ़ाये और लक्ष्मी जी की उपासना करे और कम-से-कम कोई भी एक लक्ष्मी मंत्र की एक माला करके आएं।
किसी भी शुभ मुहूर्त या अक्षय तृतीया या पूर्णिमा या दीपावली या किसी अन्य मुहूर्त में सुबह जल्दी उठें। सभी आवश्यक कार्यों से निवृत्त होकर लाल रेशमी कपड़ा लें। अब उस लाल कपड़े में चावल के 21 दानें रखें। ध्यान रहें चावल के सभी 21 दानें पूरी तरह से अखंडित होना चाहिए यानि कोई टूटा हुआ दान न रखें। उन दानों को कपड़े में बांध लें। इसके बाद धन की देवी माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजन करें। पूजा में यह लाल कपड़े में बंधे चावल भी रखें। पूजन के बाद यह लाल कपड़े में बंधे चावल अपने पर्स में छुपाकर रख लें। ऐसा करने पर कुछ ही समय में धन संबंधी परेशानियां दूर होने लगेंगी।

ध्यान रखें कि पर्स में किसी भी प्रकार की अधार्मिक वस्तु कतई न रखें। इसके अलावा पर्स में चाबियां नहीं रखनी चाहिए।
सिक्के और नोट अलग-अलग व्यस्थित ढंग से रखे होने चाहिए। किसी भी प्रकार की अनावश्यक वस्तु पर्स में न रखें। इन बातों के साथ ही व्यक्ति को स्वयं के स्तर भी धन प्राप्ति के लिए पूरे प्रयास करने चाहिए।

पैसों का कोई जुगाड़ न बन रहा हो तथा घर में दरिद्रता का वास हो तो एक पानी भरे घड़े में राई के पत्ते डालकर इस जल को अभिमंत्रित करके जिस भी किसी व्यक्ति को स्नान कराया जाएगा उसकी दरिद्रता रोग नष्ट हो जाते हैं।

किसी भी सप्ताह के रविवार को एक गिलास दूध का तांत्रिक उपाय करेंगे तो आप पैसों का सुख प्राप्त करने लगेंगे। यह तांत्रिक उपाय करने के लिए आपको रविवार की रात को सोते समय 1 गिलास में दूध भरकर अपने सिर के पास रखकर सोना है। इसके लिए ध्यान रखें कि नींद में दूध ढुलना नहीं चाहिए। सुबह उठने के बाद नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद इस दूध को किसी बबूल के पेड़ की जड़ में डाल दें। ऐसा हर रविवार की रात की करें। यह एक तांत्रिक उपाय है और इससे आपके ऊपर लगी बुरी नजर दूर होगी। नकारात्मक शक्तियों का असर खत्म होगा और कार्यों में सफलता मिलने लगेगी। पैसों की कमी दूर हो जाएगी।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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