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बुधवार, 22 नवंबर 2017

पत्नी को रखना चाहिए इन बातों का खास ध्यान



1- जो स्त्री अपने पति को बाहर से आते देख अन्न, जल आदि से उसकी सेवा करती है, मीठे वचन बोलती है, वह तीनों लोकों को संतुष्ट कर देती है। पतिव्रता स्त्री के पुण्य पिता, माता और पति के कुलों की तीन-तीन पीढिय़ों के लोग स्वर्गलोक में सुख भोगते हैं।

2- रजोनिवृत्ति के बाद शुद्धता पूर्वक स्नान करके सबसे पहले अपने पति का चेहरा देखना चाहिए, अन्य किसी का नहीं। अगर पति न हो तो भगवान सूर्य देव के दर्शन करना चाहिए।

3- पतिव्रता स्त्रियों को चरित्रहीन स्त्रियों के साथ बात नहीं करनी चाहिए। पति से द्वेष रखने वाली स्त्री का कभी आदर नहीं करना चाहिए। कभी अकेले नहीं खड़ा रहना चाहिए।

4- पतिव्रता स्त्री को अपने पति की आज्ञा के बिना कहीं नहीं जाना चाहिए। पति के बिना मेले, उत्सव आदि का भी त्याग करना चाहिए यानी नहीं जाना चाहिए। पति की आज्ञा के बिना व्रत-उपवास भी नहीं करना चाहिए।


5- पतिव्रता स्त्री को प्रसन्नतापूर्वक घर के सभी कार्य करना चाहिए। अधिक खर्च किए बिना ही परिवार का पालन-पोषण ठीक से करना चाहिए। देवता, पितर, अतिथि, सेवक, गाय व भिक्षुक के लिए अन्न का भाग दिए बिना स्वयं भोजन नहीं करना चाहिए।

6- धर्म में तत्पर रहने वाली स्त्री को अपने पति के भोजन कर लेने के बाद ही भोजन करना चाहिए। जब पति खड़ा हो तो पत्नी को भी खड़ा रहना चाहिए। उसकी आज्ञा के बिना बैठना नहीं चाहिए। पति के सोने के बाद सोना चाहिए और जागने से पहले जाग जाना चाहिए।


7- रजस्वला होने पर पत्नी को तीन दिन तक अपने पति को मुंह नहीं दिखाना चाहिए अर्थात उससे अलग रहना चाहिए। जब तक वह स्नान करके शुद्ध न हो जाए तब तक अपनी कोई बात भी पति के कान में नहीं पडऩे देना चाहिए।

8- मैथुन काल के अलावा किसी अन्य समय पति के सामने धृष्टता यानी दु:साहस नहीं करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री को ऐसा काम करना चाहिए, जिससे पति का मन प्रसन्न रहे। ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे कि पति के मन में विषाद उत्पन्न हो।


9- पति की आयु बढऩे की अभिलाषा रखने वाली स्त्री को हल्दी, रोली, सिंदूर, काजल, मांगलिक आभूषण, केशों को संवारना, हाथ-कान के आभूषण, इन सबको अपने से दूर नहीं करना चाहिए यानी पति की प्रसन्नता के लिए सज-संवरकर रहना चाहिए।

10- पतिव्रता स्त्री को सुख और दु:ख दोनों ही स्थिति में अपने पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए। यदि घर में किसी वस्तु की आवश्यकता आ पड़े तो अचानक ये बात नहीं कहनी चाहिए बल्कि पहले अपने मधुर वचनों से उसे पति को प्रसन्न करना चाहिए, उसके बाद ही उस वस्तु के बारे में बताना चाहिए।


11- पति बूढ़ा या रोगी हो गया हो तो भी पतिव्रता स्त्री को अपने पति का साथ नहीं छोडऩा चाहिए। जीवन के हर सुख-दु:ख में पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए। अपने पति की गुप्त बात किसी को नहीं बताना चाहिए।

12- पत्नी को बिना सिंगार किए अपने पति के सामने नहीं जाना चाहिए। जब पति किसी कार्य से परदेश गया हो तो उस समय सिंगार नहीं करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री को कभी अपने पति का नाम नहीं लेना चाहिए। पति के भला-बुरा कहने पर भी चुप ही रहना चाहिए।

13- पति के बुलाने पर तुरंत उसके पास जाना चाहिए और पति जो आदेश दे, उसका प्रसन्नतापूर्वक पालन करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री को घर के दरवाजे पर अधिक देर तक नहीं खड़ा रहना चाहिए।
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शनिवार, 18 नवंबर 2017

सुखी जीवन के लिए कुछ वास्तु टिप्स

Vastu Tips


वास्तु दोष के कारण जीवन कष्टमय हो सकता है। यहां हम सुखी जीवन के लिए कुछ वास्तु टिप्स बता रहे हैं।

घर के आगे का भाग टूटा हुआ, प्लास्टर उखड़ा हुआ, दीवारों में दरार हों अथवा दीवारें खराब हों तो उस घर की महिलाओं में मानसिक अशांति, डिप्रेशन, तनाव या दूसरी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए घर के भाग हमेशा सही दशा में रखना जरूरी है।

पति-पत्नी के बीच प्रगाढ़ संबंधों को बनाये रखने के लिए सोने के कमरे में बतख का जोड़ा अवश्य रखना चाहिए। जिस स्थान पर बतख का जोड़ा रखा जाए वहां पर्याप्त प्रकाश होना जरूरी है।

घर में चेहरा देखने वाले शीशा के लिए उपयुक्त स्थान पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार है। छत या फर्श में शीशा नहीं लगवाना चाहिए। सोने के कमरे में शीशायुक्त ड्रेसिंग टेबल को इस तरह रखें कि उसमें सोते समय प्रतिबिम्ब न दिखाई दे अन्यथा पति-पत्नी में संबंध तनावपूर्ण बने रहेंगे।

उत्तर दिशा जल तत्व का प्रतीक है। इस दिशा में घर की महिलाओं के रहने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए वरना उनमें मानसिक तनाव और दूसरे रोग सकते हैं।

सोने के कमरे में पलंग को दक्षिण दिशा की दीवार से लगाकर इस प्रकार रखें कि सोते समय सिरहाना पश्चिम या दक्षिण दिशा में हो। ऐसा करने से घर के स्वामी को सुख एवं आरोग्य लाभ मिलता है। उत्तर दिशा में सिर करके सोना ह्रदय रोग का कारण हो सकता है।

दक्षिण दिशा में पानी की निकासी के लिए नालियां होने से घर के मालिक को कष्ट, रोग एवं समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए घर की निकास नालिया सदैव उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए।


घर का मुख्य दरवाजा अंदर के अन्य दरवाजों की तुलना में बड़ा होना चाहिए। इसके विपरीत होने से घर के मालिक को आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। समाधान के लिए घर के द्वार पर घंटियों की झालर, क्रिस्टल बॉल या लाल रंग का फीता लगाना चाहिए।

घर की छत पर बीम हो तो उसके नीचे बैठना, सोना, पढ़ना-लिखना या अन्य काम करना मानसिक तनाव और क्लेश को जन्म देता है। बचाव के लिए छत पर बीम के दोनों साइड में एक-एक लकड़ी की बांसुरी लटका देनी चाहिए।

बच्चों की पढ़ाई के लिए घर में उपयुक्त दिशा पूर्व या उत्तर होती है। इस दिशा की तरफ मुख करके पढ़ने वाले बच्चों की स्मरणशक्ति और बुद्धि का स्तर बेहतर रहता है। पढ़ने के कमरे की दीवारों में हल्का पीला, हल्का गुलाबी, हल्का हरा या हल्का आसमानी रंग किया जा सकता है।


भोजन करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। दक्षिण की ओर मुख करके भोजन करना स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देता है।

घर में किचन और बाथरूम का आमने-सामने या आसपास होना वास्तु दोष है। इससे नकारात्मक ऊर्जा आती है। बचाव के लिए बाथरूम में कांच के बर्तन में थोड़ा नमक रखकर उसे हर सप्ताह बदलते हुए पुराने नमक को जल में बहा देना चाहिए।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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मंगलवार, 14 नवंबर 2017

मंदिर-मठ आदि अक्सर पहाड़ों पर ही क्यों मौज़ूद होते हैं

मंदिर-मठ आदि अक्सर पहाड़ों पर ही क्यों मौज़ूद होते हैं


1. पर्वतीय क्षेत्र

पर्वतीय क्षेत्र
जब भी हमें छुट्टियों का समय मिलता है तो हम निकल जाते हैं कहीं घूमने-फिरने। यदि आप भारतीय जमीन पर रहते हैं तो अधिकतम लोग छुट्टियां मिलते ही किसी पर्वतीय क्षेत्र में जाना पसंद करते हैं।

2. हरा-भरा माहौल

हरा-भरा माहौल
जहां आसपास हरियाली हो, सुंदर पहाड़ हो और आसपास ऐसी जगहें बनी हों जहां रुक कर प्रकृति का आनंद उठाया जाए। और जब भारत जैसे देश में हम पर्वतीय क्षेत्र की बात करते हैं हिमाचल प्रदेश जैसा अच्छा स्थान नहीं हो सकता। यह वह स्थान है जहां पहुंचने पर शायद हर किसी के मुंह से एक बार ‘जन्नत’ शब्द तो जरूर निकलता होगा।

3. मौका पाते ही जाते हैं हम

मौका पाते ही जाते हैं हम
स्कूल, कॉलेज या ऑफिस से यदि 2-3 दिन की राहत भी मिल जाए तो सुंदर पहाड़ियों पर समय काटने के लिए काफी होती हैं। चलिए आप ही बताएं यदि आपको यह मौका मिले तो आप हिमाचल जैसे पर्वतीय क्षेत्र में किस तरह से छुट्टियां मनाते हैं?

4. आप क्या करते हैं?

आप क्या करते हैं?
किसी प्रसिद्ध जगह पर जाकर, पर्वतों से संबंधित कुछ रोचक एक्टीविटीज करके या फिर जैसे कि कुछ लोग हिमाचल के आसपास धार्मिक स्थानों के दर्शन करते हैं वैसे? खैर आप हिमाचल में किसी धार्मिक स्थल के मकसद से जाएं या ना जाएं लेकिन फिर भी आपको रास्ते में कई धार्मिक स्थान मिल जाएंगे।

5. धार्मिक स्थल

धार्मिक स्थल
कुछ तो ऐतिहासिक होंगे, लेकिन कुछ ऐतिहासिक ना होकर भी लोगों की मान्यता एवं श्रद्धा के अनुसार बनाए गए हैं। रास्ते से गुजरते हुए शायद आपको हर 2 किलोमीटर के अंतर पर कोई ना कोई धार्मिक स्थल, जैसे कि छोटे-छोटे मंदिर, मान्यता पर आधारित धार्मिक पीठ, इत्यादि।

6. यहीं क्यों!

यहीं क्यों!
लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि हिमालय जैसे इलाके में ही यह मंदिर-पीठ इत्यादि क्यों बनाए जाते हैं? भारी मात्रा में धार्मिक स्थल इन्हीं क्षेत्रों में क्यों पाए जाते हैं? शायद आपको यह बात अजीब लग रही हो लेकिन यह सच है कि भारत में यदि किसी जगह अधिकतम धार्मिक स्थल हैं तो वह हिमालय में ही हैं।

7. एक सवाल

एक सवाल
परंतु ऐसा क्यों! किसी भी अन्य राज्य की तुलना में पर्वतीय क्षेत्र में ही सबसे अधिक मंदिर-पीठ होने का क्या महत्व है? प्रसिद्ध कवि रविंद्र नाथ टैगोर ने अपनी एक पुस्तक ‘साधना- दि रियलायज़ेशन ऑफ लाइफ’ में इसी मुद्दे को उठाया है।

8. साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान

साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान
उन्होंने बताया कि भारत में जब-जब साधना एवं भक्ति के लिए जगह की खोज की जाती है, तो किसी शांत, हरियाली से भरे माहौल को ही चुना जाता है। एक ऐसे स्थान को चुनने पर तवज्जो दी जाती है जहां आसपास का शांत पर्यावरण मन एवं दिमाग को शांति पहुंचाए।

9. हर किसी के लिए सही

हर किसी के लिए सही
लेकिन टैगोर ने यह भी बताया कि यह बात केवल भारतीय सीमा तक ही लागू नहीं होती। उन्होंने बताया कि क्रिश्चियनिटी में भी गिरिजाघर एवं मोनास्ट्री के लिए ऐसी ही हरी-भरी जगहों का चयन किया जाता है।

10. सुखमय स्थान

सुखमय स्थान
यह जगहें आत्मा को सुख प्रदान करती है, प्रकृति का यह रूप हमारी आत्मा को परमात्मा से मिलाने में सहायक सिद्ध होता है। शायद इसीलिए प्राचील काल से अब तक जब-जब ऋषि-मुनियों के मन में तपस्या का ख्याल आया है उन्होंने हिमालय की सुंदर वादियों की ओर ही रुख किया है।

11. हर किसी के लिए परफेक्ट

हर किसी के लिए परफेक्ट
पर आप इस गहतफहमी में ना रहिए कि केवल ऋषि-मुनि ही ऐसी वादियों पर जाकर परमात्मा से मिलने वाले सुख को प्राप्त करते हैं। स्वयं हम भी जब इन सुंदर वादियों में प्रवेश करते हैं तो अपने दिमाग को शांत पाते हैं। हमारी आंखें एक अजब-सी ठंडक को महसूस करती हैं और यही ठंडक हमारी आत्मा को शांत करती है।

गुरुवार, 9 नवंबर 2017

जन्म वार के अनुसार स्वभाव और भविष्य


ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति का जन्म जिस वार को होता है, उस वार के कारक ग्रह का प्रभाव भी जीवनभर बना रहता है। ज्योतिष के अनुसार रविवार का कारक ग्रह सूर्य है, सोमवार का कारक ग्रह चंद्र है, मंगलवार का मंगल, बुधवार का बुध, गुरुवार का गुरु, शुक्रवार का शुक्र और शनिवार का कारक ग्रह शनि है। यहां जानिए आपके जन्म वार के अनुसार स्वभाव और भविष्य से जुड़ी कुछ बातें…

सोमवार – सोमवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति हंसमुख और मीठा बोलने वाले होते थे। सुख हो या दुःख हमेशा सामान्य रहते है। ग्यानी, कलाकार और बहादुर होते हैं। ये लोग कफ संबंधी रोगों से परेशान रहते हैं। बीमारियों के कारण कमजोरी बनी रहती हैं। इन्हें जीवन में सभी सुख सुविधाएं प्राप्त होती हैं।

उपाय – शिवलिंग पर दूध अर्पित करें।

मंगलवार – जिन लोगों का जन्म मंगलवार को हुआ है, वे उग्र स्वभाव के होते हैं। इसी कारण इनका अपने आसपास रहने वाले कई लोगों से वाद-विवाद होता रहता हैं। इन्हें खून और त्वचा से सम्बंधित रोग हो सकते हैं। इनके जीवन में परेशानियां आती जाती रहती हैं।
उपाय – हनुमानजी को सिंदूर और बना हुआ पान चढ़ाएं।

बुधवार – बुधवार को जन्म लेने वाले लोग धर्म- ध्यान लगाने वाले होते हैं। ये बुद्धिमान और मीठा बोलने वाले होते हैं। माता-पिता से विशेष प्रेम रखते हैं। इन्हें शरीर की अपेक्षा दिमाग से सम्बंधित कामों में अधिक लाभ होता है। इन्हें मुर्ख बनाना आसान काम नहीं है।

उपाय- श्री गणेश को 11 दूर्वा की गाँठ हर बुधवार अर्पित करें।

गुरुवार – जिन लोगों का जन्म गुरुवार को हुआ है, वे बुद्धिमान और साहसी होते हैं। ये लोग किसी भी मुश्किल समय का सामना बड़ी ही समझदारी के साथ करते हैं। इन लोगों के मित्र अच्छी संगत वाले होते हैं। मित्रों की और से सदैव प्रसन्न रहते हैं। इन लोगों को भाग्य का साथ भी मिलता हैं।
उपाय – गुरुवार को चने की दाल, बेसन के लड्डू का भोग शिवजी को लगाएं।

शुक्रवार – शुक्रवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति हंसमुख और बुद्धिमान होते हैं। अपनी बातचीत से दूसरों को प्रभावित करते हैं। सहनशीलता के कारण कठिन समय का सामना भी बहुत ही अच्छे ढंग से कर लेते हैं। कला के क्षेत्र में ये लोग ख़ास मुकाम हासिल करते हैं।

उपाय – हर शुक्रवार शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाना चाहिए।

शनिवार – जिन लोगों का जन्म शनिवार को हुआ हैं, वे कृषि, व्यापार या तकनिकी क्षेत्र में अधिक लाभ प्राप्त करते हैं। इन्हें छोटी आयु में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं। इन लोगों को मित्रता में सावधान रहने की आवश्यकता होती हैं। माता-पिता, भाई-बहनों की ओर से सुख प्राप्त नहीं हो पाता हैं।
उपाय – हर शनिवार शनिदेव के नाम पर तेल का दान करें।

रविवार – रविवार को जन्म लेने वाले लोगो को भाग्य का साथ मिलता है। इनकी आयु भी अधिक रहती है और ये कम बोलना पसंद करते है। ये लोग कला और शिक्षा के क्षेत्र में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। साथ ही, इनकी रुची धर्म में भी रहती है। घर-परिवार के सदस्यों को खुश रखने का प्रयास करते हैं।
उपाय- सूर्य को रोज़ जल चढ़ाना चाहिए।
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भारत में शादी से जुड़ी कुछ अजब-गजब परंपरायें

भारत में शादी से जुड़ी कुछ अजब-गजब परंपरायें



भारत विभन्नताओं का देश है,कहा जाता है कि हर सौ मीटर पर यहां बोली और रिवाज बदल जाते हैं। इतना अलग होते हुए भी यह देश प्यार और एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। आपको पता है कि अलग-अलग जाति और धर्म को मानने वाले इस देश में शादी को लेकर भी बड़ी अजीब-अजीब और अलग-अलग परंपरायें हैं। 

शादी की अजब-गजब परंपरायें और रीति-रिवाज आईये आपको बताते हैं ऐसी ही भारत की कुछ अजब-गजब परंपराओं के बारे में... 
1. वर का पानी: हिंदू शादियों में कई जगह शादी होने से पहले दुल्हन को वर का पानी यानी कि दूल्हे का नहाया हुआ पानी भेजा जाता है ताकि दुल्हन उस पानी से नहा सके और जीवन भर दूल्हे के ऊपर आने वाली हर मुसीबत को खुद पहले झेलने के लिए तैयार रहे। 



2. बारात जाने से पहले मां का गुस्सा: हिंदू शादियों में कहीं-कहीं पर बारात जाने से पहले लड़के की मां लड़के से नाराज होकर बारात ले जाने रोकती है और कहती है कि वो कुएं में कूद जायेगी, वो तब तक गुस्सा रहती है जब तक उसका बेटा उससे वादा नहीं कर लेता कि पत्नी के आने के बाद भी वो उसका पूरा ख्याल रखेगा। फिलहाल .ह परंपरा है जो वक्त के साथ नये रूप में चल रही है क्योंकि अब कुआं तो हर जगह मिलता नहीं है इसलिए लड़के की मां अब बाल्टी के पानी और कटोरे में पानी का प्रयोग कर लेती है। 

3. झाड़ू देना: कुछ जगहों पर लड़की की शादी के बक्से के साथ झाडू रखने का रिवाज है, ताकि लक्ष्मी उसके साथ हमेशा रहें। 

4. जूठी सुपाड़ी: हिंदू शादियों में कुछ जगह दूल्हे को दुल्हन की जूठी उस सुपाड़ी को खाने को दिया जाता है जो कि वो सुबह से मुंह पर रखी होती है, ताकि जूठा खाने से प्यार बढ़े। 


5. पुड़ी पर पैर रखना: कुछ जगहों पर जब दुल्हन शादी करके ससुराल आती है तो उसे पूड़ियों पर से पैर रखकर गुजरना होता है, इसके पीछे यह माना जाता है कि लड़की के आने से घर-भर हमेशा भरा रहेगा।

6. एमपी के कुछ आदिवासी परिवारों में शादी से पहले लड़के वाले लड़की के घर पर सांप वाली पेटी पहुंचाते है और लड़की वाले उस पेटी को जंगल में छोड़ आते हैं, ऐसा करने के पीछे माना जाता है कि लड़की को अपनाने वाले लड़के अपने घर से हर जहर को निकाल देते हैं,ताकि लड़की का जीवन खुशहाल रहे।
7. पहाड़ी इलाकों में रिवाज है कि लड़का, लड़की के पैर का नाखून छूकर कसम खाता है कि वो उसके नाखून तक की रक्षा करेगा।

8. शादी के बाद पहली रात में जब लड़के-लड़की मिलते हैं तो उनके तकिये के नीचे चाकू रखा जाता है ताकि दोनों का रिश्ता नजर लगने से बचे।

9. कुछ जगह मंडप में लड़के-लड़की को रक्षा धागा बांधा जाता है ताकि दोनों को नजर ना लगे लेकिन जब तक धागा दोनों के हाथ में होता है तब तक दोनों एक-दूसरे का चेहरा भी नहीं देख सकते।


10. बंगाल के कुछ इलाकों में दुल्हन को दूध से और दूल्हे को तेल की मालिश दी जाती है ताकि शादी के बाद दुल्हन अपने वैवाहिक जीवन में दूध जैसी पौष्टिकता और ताजगी लाये और दूल्हा अपने रिश्ते में विश्वास लाये।



11. राजस्थान की शादियों में कुछ जगह शादी के बाद दुल्हन अपने पति को छड़ी से मारती है, यह प्रथा पति के धैर्य का टेस्ट लेने के लिए होता है।


12. बिहार में कुछ जगहों की शादियों में जब दुल्हन घर आती है तो उसके सामने पीतल की थालियां रख दी जाती हैं और यह थालियां पारिवारिक सदस्यों के नाम की होती हैं, दुल्हन से कहा जाता है कि वो इन्हें बिना आवाज किये उठाये अगर गलती से किसी के नाम की थाली में आवाज आ जाती है तो कहा जाता है कि भविष्य में उस व्यक्ति से दुल्हन का टकराव होगा।


13. मध्य भारत में कहीं-कहीं सास, बहू को छड़ी से मारती है यह देखने के लिए कि बहू के अंदर कितना धैर्य है?


सोमवार, 6 नवंबर 2017

सुबह इनको देखें आपका पूरा दिन हर्षपूर्ण बीतेगा



सुबह-सवेरे जागते ही यदि शंख, घंटा, भक्ति संगीत आदि का स्वर सुनाई दे तो अत्यंत शुभ होता है। मान लीजिए कि आपका पूरा दिन हर्षपूर्ण बीतेगा।
यदि आंखें खोलते ही सबसे पहले दही या दूध से भरे पात्र पर निगाह पड़े तो भी शुभ समझा जाता है।
अगर अल सुबह कोई भिखारी मांगने आ जाए तो यह समझिये कि आपका फंसा हुआ या उधार दिया हुआ धन आपको शीघ्र ही वापस मिलेगा।
यदि घर से किसी कार्य से बाहर जाते हुए तो आपके सामने सुहागन स्त्री अथवा गाय आ जाए तो कार्य में पूर्ण सफलता मिले का योग बनता है।
किसी कार्य से जाते हुए आपके सामने कोई व्यक्ति गुड़ ले जाता हुआ दिखे तो बहुत अधिक लाभ होता है।
यदि रास्ते में कोई प्राणी सुन्दर फूल या हरी घास लेकर जाता मिले या आपको किसी दुकान में यह नज़र आ जाये तो बहुत शुभ होता है।
यदि जाते समय मार्ग में कोई भी स्त्री/पुरुष दूध या पानी से भरा बर्तन लेकर दिख जाये तो यह बहुत ही शुभ शकुन होता है।
यात्रा में जाते समय यदि प्रभु की आरती ,भजन आदि सुनाई दे तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है, आपकी यात्रा के सफल होने के पूरे योग हैं।
यदि मार्ग में हंसता खेलता हुआ बालक और फल फूल बेचने वाला कोई नज़र आ जाये तो आपको निसंदेह लाभ की प्राप्ति होगी ।
किसी भी कार्य के लिए जाते समय जब आप कपड़े पहने और आपकी जेब से पैसे गिर जाएं तो यह धन प्राप्ति का संकेत है। और यदि कपड़े उतारते समय भी ऐसा ही हो तो भी यह शुभ शकुन होता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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