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बुधवार, 25 अक्तूबर 2017

कुछ शुभ अशुभ संकेत


 कुछ चीज़े ऎसी होती हैं जो शुभ और अशुभ का संकेत देती हैं जैसे घर से बाहर निकलते वक़्त यदि बिल्ली रास्ता काट जाए तो काम सफल नही होता हैं, वेसे ही कही सारी बातें ऎसी भी हैं जो शुभ समाचार का संकेत देती हैं तो आइए जानते हैं कुछ शुभ अशुभ बातों के बारे मे। 


नाल :-
शनिवार के दिन सडक पर काले घोडे की नाल मिले तो उसकी अंगुठी बनवाकर धारण करने पर शनि का प्रकोप कम हो जाता है। इस प्रकार की नाल को अपने घर के दरवाजे के ऊपर मध्य में लगा देना शुभ माना गया है। शकुन शास्त्रानुसार ऎसे घर में लक्ष्मी सदा विराजती है।

यज्ञोपवीत :-
यदि यज्ञोपवीत धारण कर रखा है तो नियमों का पालन करें। नहीं करते हैं तो उतारकर कुएं में डाल दे। नियम पालन न करते हुए यज्ञोपवीत का धारण करना अशुभ फल देता है।

लंगूर :-
काले मुंहवाला लंगूर सुबह-सुबह दिखना अशुभ कहा गया है। ऎसा बन्दर दिखाई पडे और कोई शुभ कार्य करना हो तो गंगाजल छिडक लें। अशुभ न होगा।

अंडा :-
घर से बाहर निकलते समय अंडा दिखने कार्य के लिए जाना है , वह सफल होता है। मार्ग में कुछ दूरी पर फुटा अंडा या छिलके मिलें या दिखें तो कार्य न बनना और कार्य में असफलता का संकेत है।

अग्नि :-
घर से बाहर निकलतक ही अग्नि दिखाई पडे तो कार्य सर्वोत्तम ढंग से सफल होने का शकुन है। लेकिन अंगारे मात्र दिखना अपशकुन है।

अपान वायु :-
घर से बाहर कदम रखते ही अपान वायु का निकलना अच्छा शकुन है , और यह कार्य लाभ का लक्षण है । किसी का हंस पडना या मुस्करा देना इस फल को नष्ट कर देता है । ऎसा कहा गया है ।

कटहल :-
मार्ग में कोई कटहल ले जाता दिखे तो शुभ शकुन माना गया है। पर वह कटहल कटा हुआ नहीं होना चहिए।

चिडिया :-
चिडिया की बीट सिर पर गिरना शुभ पर कबूतर की बीट गिरना अशुभ माना गया है

नाग :-
नाग मारना अशुभ है। नाग का जोडा देखना शुभ है। उसी समय दूर जाना भी शुभ है। अधिक देर रूकने पर खतरा है। जोडा सांपों को देखते ही तत्काल भाग जाने की बात शकुन शास्त्र में भी कही गई है।

नागशुद्धि :-
फलित ज्योतिष के अनुसार नया घर या मकान बनवाने में नागों की स्थिति पर विचार किया जाता है। कहा जाता है कि भादों, क्वार, कार्तिक इन तीन महीनों में नागों का सिर पूरब की ओर अगहन, पूस तथा माघ में दक्षिण की ओर फाल्गुन चैत्र , बैशाख में पश्चिम की ओर जेठ , आषाढ, सावन में उत्तर की ओर रहता है । आरम्भ में नींव डालते समय यदि नागों के मस्तक पर आघात पडा तो मकान बनवाने वाले की मृत्यु हो जाती है। पेट पर आघात पडना शुभ समझा जाता है।

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सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

Reeti -Rivaaj va Rasmen

रीति -रिवाज व रस्में

1. लगभग हर समुदाय और धर्म की दुल्हन शादी के बाद अगर अपने बाएं पैर को पहले बढाकर अपने ससुराल में प्रवेश करती है तो इससे कहीं ना कहीं अपशगुन माना जाता है और दाहिने पैर के जरिए ही घर में प्रवेश करने को शगुन माना जाता है.

2. ऐसा माना जाता है कि शादी में फेरों के बाद दुल्हन अपनी जिस सहेली अथवा रिश्तेदार के सिर पर अपना कलीरा तोड़ती है तो उस रिश्तेदार अथवा सहेली की शादी जल्दी होने के योग बन जाते हैं.

3. भारत में लगभग हर धर्म में ही दुल्हन का चेहरा शादी के समय ढका जाता है या उसके चेहरे के आगे एक पर्दा डाल दिया जाता है. ऐसा माना जाता है कि ऐसा करना उसे बुरी नजर और दुर्भाग्य से बचाता है. क्योंकि शादी की दुल्हन को दुनिया की सबसे सुंदर स्त्री माना जाता है और इसीलिए उसे किसी की नजर ना लगे या फिर कोई उसकी तरफ गलत नजर ना डालें इसलिए उसका चेहरा ढक दिया जाता है.

4. कई हिंदू परिवार में लड़की की सगाई होने के बाद और शादी होने से पहले उसे एक छोटा चाकू अपने पास रखने के लिए दिया जाता है. इसका अर्थ यह माना जाता है की लड़की बुरी नजर और दुर्भाग्य से बची रहेगी तथा जरूरत पड़ने पर वह अपनी रक्षा भी कर सकेगी.

5. भारतीय रीति-रिवाजों के अनुसार अगर शादी वाले दिन बारिश हो जाती है तो इसे बहुत ही ज्यादा शुभ माना जाता है और यह माना जाता है कि यह शादी अवश्य ही सफल होगी. यह बात अलग है कि बारिश होने से व्यवस्थाएं खराब हो सकती है.

6. आमतौर पर भारतीय शादियों में लड़की पक्ष वालों की तरफ से लड़के पक्ष को अपनी तरफ से कुछ राशि अथवा तोहफे दिए जाते हैं, जिसे दहेज कहा जाता है. लेकिन मुस्लिम समाज में इसका उल्टा है इसमें लड़के वालो की तरफ से लड़की वालों को एक विशेष रकम दी जाती है जिसे मेंहर कहा जाता है.

7. भारत के पंजाबी समुदाय में विवाह के समय लड़कियां चूड़ा पहनती हैं, इनका रंग लाल और सफेद होता है जो उन्हें कई महीनों तक पहनना होता है. कहा जाता है कि यह चूड़ा सौभाग्य और वृद्धि का संकेत है जिससे ससुराल में खुशहाली और वृद्धि आती है.

8. ईसाई धर्म में भी कुछ विशेष परंपराएं होती है. इसमें एक रिवाज होता है जिसमें दुल्हन की सहेलियां और मेहमान उसे चारों तरफ से घेर कर रखते हैं और उसे तरह-तरह के उपहार दिए जाते हैं. इसके बदले में दुल्हन उन्हें गुलाबी रंग का केक खिलाती है जिसके अंदर एक अंगूठी छुपी होती है. कहते हैं कि जिस लड़की के हिस्से में वह अंगूठी वाला केक आ जाता है उसकी शादी जल्दी ही हो जाती है.

9. पुराने समय में केरल में एक विशेष शादी का चलन था. वैसे तो यह शादी नकली शादी मानी जाती थी लेकिन यह ज्योतिषिय तौर तरीकों पर आधारित होती थी तथा विशेष कामों के लिए ही इस नकली शादी का आयोजन किया जाता था और शादी के बाद दूल्हा और दुल्हन अपने-अपने घर वापस चले जाते थे तथा शादी को बाद में नकार दिया जाता था.

10. भारतीय परंपराओं में मंगला स्नान का सदा से ही विशेष महत्व रहा है. हम आपको मंगला सनान के बारे में संक्षेप में बता देते हैं कि सूर्य की पहली किरण के साथ ही जो स्नान किया जाता है उसे मंगला स्नान कहते हैं और कुछ लोग इसे शुद्धि स्नान भी कहते है. शादी के बाद कई भारतीय समाजों में दूल्हा और दुल्हन को विशेष मंगला स्नान करवाया जाता है जिससे शादी के रीती रिवाज शुरू हो जाते हैं.शादी की रसमें

11. सिख धर्म के लोग जब शादी होने के बाद दुल्हन अपने ससुराल आती है तो ससुराल में दूल्हे की बहने एक लम्बी साड़ी में कई गांठे लगा देती है और वह गांठे दूल्हा दुल्हन को खोलने के लिए दी जाती है. यह माना जाता है कि जितनी जल्दी दूल्हा और दुल्हन इन गांठो को खोल देंगे उनके जीवन में उतनी ही जल्दी और उतनी ही ज्यादा खुशहाली आएगी.

12. आमतौर पर भारत में विदाई के समय लड़की की आंखों में आंसू आ ही जाते हैं लेकिन समय के साथ-साथ यह एक परंपरा भी हो गई है और इस परंपरा को लोगों ने अपने अपने अनुसार कई अर्थ भी दे दिए हैं. जैसे कि कहा जाता है की विदाई के समय दुल्हन जितना रोएगी, शादी के बाद जिंदगी में उसे कभी रोना नहीं होगा.

13. गुजराती समाज में शादी के वक्त एक विचित्र परंपरा निभाई जाती है. इस परंपरा के अनुसार दुल्हन की मां दूल्हे की नाक को पकड़ती है और उसे इस बात का एहसास दिलाया जाता है कि वह अपनी जान से ज्यादा प्यारी बेटी की जिम्मेदारी उसे सौप रहे हैं तथा भविष्य में उसकी बेटी की खुशियों और उसकी आवश्यकताओं को पूरा करना उसकी जिम्मेदारी है.

14. सिखों में शादी से एक रात पहले एक विशेष रस्म निभाई की जाती है जिसे “वतना” कहते हैं. वैसे यह रस्म केवल सिख ही नहीं बल्कि लगभग हर हिंदू शादी में की जाती है. शादी की इस रस्म के अनुसार घर की औरतें लड़की के शरीर पर हल्दी और बेसन का लेप लगाती है तथा पारंपरिक गाने गाती है.

15. इस परंपरा का बहुत ही ज्यादा विशेष महत्व मना गया है. हल्दी में आकर्षण का गुण सदा से ही माना गया है तथा हल्दी एवं बेसन लगाने से त्वचा में तो निखार आता ही है तथा बीमारी में भी बचाव होता है तथा दूल्हे दुल्हन के बीच में आकर्षण भी बढ़ता है.

16. हिंदू परंपराओं में जब लड़की अपने ससुराल में कदम रखती है तो वह घर की दहलीज पर ही वह चावल से भरे एक कलश को अपने पैरों से गिरा कर प्रवेश करती है, इसका अर्थ यह रहता है की आने वाली लड़की के पैर इतने शुभ हो की दुर्भाग्य की रेखाएं मिट जाएं और घर में धन धान्य बना रहे.

17. मंगला स्नान केवल हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि मुस्लिम धर्म में भी किया जाता है. मुस्लिम धर्म में इसे एक शुद्धि स्नान की तरह किया जाता है. इसमें निकाह से पहले दुल्हन को घर की औरते गाने और संगीत के साथ स्नान करवाती है तथा इसे एक त्यौहार की तरह ही मनाया जाता है.

18. इसाई धर्म में एक विशेष विश्वास माना जाता है, इस विश्वास के अनुसार अगर शादी के वक्त दुल्हन को मकड़ा दिख जाए तो उसकी शादीशुदा जिंदगी में खुशहाली आती है और पति पत्नी के बीच मनमुटाव नहीं होता.सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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रविवार, 15 अक्तूबर 2017

धनतेरस के दिन समृद्धि प्राप्ति उपाय

Dhanteras ke upay


धनतेरस के दिन समृद्धि प्राप्ति के लिए किया गया कोई भी उपाय ज्यादा फलदायी होता है। ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे उपाय बताएं गए है जिन्हें यदि धनतेरस के दिन किसी भी शुभ समय में किया जाए तो घर में स्थिर लक्ष्मी का निवास होता है। आइये जानते है धनतेरस को करने योगय कुछ ऐसे ही उपाय-

लक्ष्मी को अर्पित करें लौंग : धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद लक्ष्मी या किसी भी देवी को लौंग अर्पित करें। यह काम दीपावली के दिनों में रोज करें। आर्थिक लाभ होता रहेगा।

सफेद चीजों का करें दान : धनतेरस पर सफेद पदार्थों जैसे चावल, कपड़े, आटा आदि का दान करने से आर्थिक लाभ का योग बनता है।

सूर्यास्त के बाद न करें झाड़ू-पोंछा : दीपावली के दिनों में और हो सके तो रोज ही शाम को सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू-पोंछा न करें। ऐसा करने से घर में लक्ष्मी चली जाती है।

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गरीब की आर्थिक सहायता करें : धनतेरस पर किसी गरीब, दुखी, असहाय रोगी को आर्थिक सहायता दें। ऐसा करने से आपकी उन्नति होगी।

किन्नर को धन करें दान : धनतेरस के दिन किसी किन्नर को धन दान करें और उसमें से कुछ रुपए वापस अनुरोध करके प्राप्त कर लें। इन रुपयों को सफेद कपड़े में लपेटकर कैश तिजोरी में रख लें, लाभ होगा।

मंदिर में लगाएं केले के पौधे : धनतेरस के दिन किसी भी मंदिर में केले के दो पौधे लगाएं। इन पौधों की समय-समय पर देखभाल करते रहें। इनके बगल में कोई सुगंधित फूल का पौधा लगाएं। केले का पौधा जैसे-जैसे बड़ा होगा, आपके आर्थिक लाभ की राह प्रशस्त होगी।

मोर की मिट्टी की करे पूजा : धनतेरस पर यदि पूजा के समय किसी ऐसे स्थान की मिट्टी जहां मोर नाचा हो लाकर और पूजा करें। इस मिट्टी को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से घर पर हमेशा लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी।
गाय का भोजन जरूर निकालें: धनतेरस और दीपावली के दिन रसोई में जो भी भोजन बना हो, सर्वप्रथम उसमें से गाय के लिए कुछ भाग अलग कर दें। ऐसा करने से घर में स्थिर लक्ष्मी का निवास होगा।

चमगादड़ के पेड़ की टहनी रखे पास :धनतेरस के दिन किसी भी शुभ समय में किसी ऐसे पेड़ की टहनी तोड़ कर लाएं, जिस पर चमगादड़ रहते हों। इसे अपने बैठने की जगह के पास रखें, लाभ होगा।


दक्षिणावर्ती शंख में लक्ष्मी मंत्र का जप : धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद दक्षिणावर्ती शंख में लक्ष्मी मंत्र का जप करते हुए चावल के दाने व लाल गुलाब की पंखुड़ियां डालें। ऐसा करने से समृद्धि का योग बनेगा।
मंत्र- श्रीं

लघु नारियल का उपाय : धन तेरस पर पूजा के समय धन, वैभव व समृद्धि पाने के लिए 5 लघु नारियल पूजा के स्थान पर रखें। उन पर केसर का तिलक करें और हर नारियल पर तिलक करते समय 27 बार नीचे लिखे मंत्र का मन ही मन जप करते रहें- ऐं ह्लीं श्रीं क्लीं
11 लघु नारियल को मां लक्ष्मी के चरणों में रखकर ऊं महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नीं च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् मंत्र की 2 माला का जप करें। किसी लाल कपड़े में उन लघु नारियल को लपेट कर तिजोरी में रख दें व दीपावली के दूसरे दिन किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। ऐसा करने से लक्ष्मी चिरकाल तक घर में निवास करती है।
यदि आप चाहते हैं कि घर में कभी धन-धान्य की कमी न रहे और अन्न का भंडार भरा रहे तो 11 लघु नारियल एक पीले कपड़े में बांधकर रसोई घर के पूर्वी कोने में बांध दें।

घर लाए चांदी के गणेश, चांदी की लक्ष्मी: लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय, व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है। इस दिन भगवान धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है।

सूखे धनिया के बीज का भी महत्व: ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि करता है। दीपावली के दिन इन बीजों को बाग, खेत खलिहानों में लागाया जाता है ये बीज व्यक्ति की उन्नति व धन वृ्द्धि के प्रतीक होते है।

धनतेरस के दिन करे कुबेर को प्रसन्न : शुभ मुहूर्त में धनतेरस के दिन धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करने के बाद निम्न मंत्र का जाप करें- इस मंत्र का जाप करने से भगवन कुबेर बहुत खुश होते हैं, जिससे धन और वैभव की प्राप्ति होती है।

“यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।”सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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दिवाली पर लक्ष्मी जी को खुश करने के उपाय

हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का सबसे अधिक महत्तव है। इस पर्व पर धन की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की लिए उनका पूजन किया जाता है। यदि इस दिन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में सही विधि-विधान से लक्ष्मी का पूजन कर लिया जाए तो अगली दीपावली तक लक्ष्मी कृपा से घर में धन और धान्य की कमी नहीं आती है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जो दीपावली के दिन करने पर बहुत जल्दी लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त की जा सकती है। यहां लक्ष्मी कृपा पाने के लिए 51 उपाय बताए जा रहे हैं और ये उपाय सभी राशि के लोगों द्वारा किए जा सकते हैं। यदि आप चाहे तो इन उपायों में से कई उपाय भी कर सकते हैं या सिर्फ कोई एक उपाय भी कर सकते हैं।

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1. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गांठ भी रखें। पूजन पूर्ण होने पर हल्दी की गांठ को घर में उस स्थान पर रखें, जहां धन रखा जाता है।


2. दीपावली के दिन यदि संभव हो सके तो किसी किन्नर से उसकी खुशी से एक रुपया लें और इस सिक्के को अपने पर्स में रखें। बरकत बनी रहेगी।


3. दीपावली के दिन घर से निकलते ही यदि कोई सुहागन स्त्री लाल रंग की पारंपरिक ड्रेस में दिख जाए तो समझ लें आप पर महालक्ष्मी की कृपा होने वाली है। यह एक शुभ शकुन है। ऐसा होने पर किसी जरूरतमंद सुहागन स्त्री को सुहाग की सामग्री दान करें।

4. दीपावली की रात में लक्ष्मी और कुबेर देव का पूजन करें और यहां दिए एक मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें।
मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रववाय, धन-धान्यधिपतये धन-धान्य समृद्धि मम देहि दापय स्वाहा।

5. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटी बजाना चाहिए। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता बाहर चली जाती है। मां लक्ष्मी घर में आती हैं।

6. महालक्ष्मी के पूजन में गोमती चक्र भी रखना चाहिए। गोमती चक्र भी घर में धन संबंधी लाभ दिलाता है।


7. दीपावली पर तेल का दीपक जलाएं और दीपक में एक लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें। किसी मंदिर हनुमान मंदिर जाकर ऐसा दीपक भी लगा सकते हैं।

8. रात को सोने से पहले किसी चौराहे पर तेल का दीपक जलाएं और घर लौटकर आ जाएं। ध्यान रखें पीछे पलटकर न देखें।


9. दीपावली के दिन अशोक के पेड़ के पत्तों से वंदनद्वार बनाएं और इसे मुख्य दरवाजे पर लगाएं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाएगी।

10. किसी शिव मंदिर जाएं और वहां शिवलिंग पर अक्षत यानी चावल चढ़ाएं। ध्यान रहें सभी चावल पूर्ण होने चाहिए। खंडित चावल शिवलिंग पर चढ़ाना नहीं चाहिए।


11. अपने घर के आसपास किसी पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय दीपावली की रात में किया जाना चाहिए। ध्यान रखें दीपक लगाकर चुपचाप अपने घर लौट आए, पीछे पलटकर न देखें।

12. यदि संभव हो सके तो दीपावली की देर रात तक घर का मुख्य दरवाजा खुला रखें। ऐसा माना जाता है कि दिवाली की रात में महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के घर जाती हैं।

13. महालक्ष्मी के पूजन में पीली कौड़ियां भी रखनी चाहिए। ये कौडिय़ा पूजन में रखने से महालक्ष्मी बहुत ही जल्द प्रसन्न होती हैं। आपकी धन संबंधी सभी परेशानियां खत्म हो जाएंगी।

14. दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा करते समय एक थोड़ा बड़ा घी का दीपक जलाएं, जिसमें नौ बत्तियां लगाई जा सके। सभी 9 बत्तियां जलाएं और लक्ष्मी पूजा करें।

15. दीपावली की रात में लक्ष्मी पूजन के साथ ही अपनी दुकान, कम्प्यूटर आदि ऐसी चीजों की भी पूजा करें, जो आपकी कमाई का साधन हैं।

16. लक्ष्मी पूजन के समय एक नारियल लें और उस पर अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि अर्पित करें और उसे भी पूजा में रखें।

17. दीपावली के दिन झाड़ू अवश्य खरीदना चाहिए। पूरे घर की सफाई नई झाड़ू से करें। जब झाड़ू का काम न हो तो उसे छिपाकर रखना चाहिए।

18. इस दिन अमावस्या रहती है और इस तिथि पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने पर शनि के दोष और कालसर्प दोष समाप्त हो जाते हैं।

19. प्रथम पूज्य श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित करें। दूर्वा की 21 गांठ गणेशजी को चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। दीपावली के शुभ दिन यह उपाय करने से गणेशजी के साथ महालक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।

20. दीपावली से प्रतिदिन सुबह घर से निकलने से पहले केसर का तिलक लगाएं। ऐसा हर रोज करें, महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी।

21. यदि संभव हो सके तो दीपावली पर किसी गरीब व्यक्ति को काले कंबल का दान करें। ऐसा करने पर शनि और राहु-केतु के दोष शांत होंगे और कार्यों में आ रही रुकावटें दूर हो जाएंगी।

22. महालक्ष्मी के पूजन में दक्षिणावर्ती शंख भी रखना चाहिए। यह शंख महालक्ष्मी को अतिप्रिय है। इसकी पूजा करने पर घर में सुख-शांति का वास होता है।

23. महालक्ष्मी के चित्र का पूजन करें, जिसमें लक्ष्मी अपने स्वामी भगवान विष्णु के पैरों के पास बैठी हैं। ऐसे चित्र का पूजन करने पर देवी बहुत जल्द प्रसन्न होती हैं।

24. दीपावली के पांचों दिनों में घर में शांति बनाए रखें। किसी भी प्रकार का क्लेश, वाद-विवाद न करें। जिस घर में शांति रहती है वहां देवी लक्ष्मी हमेशा निवास करती हैं।

25. दीपावली पर ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करते समय नहाने के पानी में कच्चा दूध और गंगाजल मिलाएं। स्नान के बाद अच्छे वस्त्र धारण करें और सूर्य को जल अर्पित करें। जल अर्पित करने के साथ ही लाल पुष्प भी सूर्य को चढ़ाएं। किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज का दान करें। अनाज के साथ ही वस्त्र का दान करना भी श्रेष्ठ रहता है।

26. दीपावाली पर श्रीसूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। रामरक्षा स्तोत्र या हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी किया जा सकता है।

27. महालक्ष्मी को तुलसी के पत्ते भी चढ़ाने चाहिए। लक्ष्मी पूजा में दीपक दाएं, अगरबत्ती बाएं, पुष्य सामने व नैवेद्य थाली में दक्षिण में रखना श्रेष्ठ रहता है।

28. महालक्ष्मी के मंत्र: ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम:, इस मंत्र का जप करें। मंत्र जप के लिए कमल के गट्टे की माला का उपयोग करें। दीपावली पर कम से कम 108 बार इस मंत्र का जप करें।

29. दीपावली से यह एक नियम रोज के लिए बना लें कि सुबह जब भी उठे तो उठते ही सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों का दर्शन करना चाहिए।

30. दीपावली पर श्रीयंत्र के सामने अगरबत्ती व दीपक लगाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठें। फिर श्रीयंत्र का पूजन करें और कमलगट्टे की माला से महालक्ष्मी के मंत्र: ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम: का जप करें।

31. किसी में मंदिर झाड़ू का दान करें। यदि आपके घर के आसपास कहीं महालक्ष्मी का मंदिर हो तो वहां गुलाब की सुगंध वाली अगरबत्ती का दान करें।

32. घर के मुख्य द्वार पर कुमकुम से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। द्वार के दोनों ओर कुमकुम से ही शुभ-लाभ लिखें।

33. लक्ष्मी पूजन में सुपारी रखें। सुपारी पर लाल धागा लपेटकर अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि पूजन सामग्री से पूजा करें और पूजन के बाद इस सुपारी को तिजोरी में रखें।

34. दीपावली के दिन श्वेतार्क गणेश की प्रतिमा घर में लाएंगे तो हमेशा बरकत बनी रहेगी। परिवार के सदस्यों को पैसों की कमी नहीं आएगी।

35. यदि संभव हो सके तो इस दिन किसी तालाब या नदी में मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं। शास्त्रों के अनुसार इस पुण्य कर्म से बड़े-बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं।

36. घर में स्थित तुलसी के पौधे के पास दीपावली की रात में दीपक जलाएं। तुलसी को वस्त्र अर्पित करें।

37. स्फटिक से बना श्रीयंत्र दीपावली के दिन बाजार से खरीदकर लाएं। श्रीयंत्र को लाल वस्त्र में लपेटकर तिजोरी में रखें। कभी भी पैसों की कमी नहीं होगी।

38. दीपावली पर सुबह-सुबह शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। जल में यदि केसर भी डालेंगे तो श्रेष्ठ रहेगा।

39. जो लोग धन का संचय बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें तिजोरी में लाल कपड़ा बिछाना चाहिए। इसके प्रभाव से धन का संचय बढ़ता है। महालक्ष्मी का ऐसा फोटो रखें, जिसमें लक्ष्मी बैठी हुईं दिखाई दे रही हैं।

40. उपाय के अनुसार दीपावली के दिन 3 अभिमंत्रित गोमती चक्र, 3 पीली कौडिय़ां और 3 हल्दी गांठों को एक पीले कपड़ें में बांधें। इसके बाद इस पोटली को तिजोरी में रखें। धन लाभ के योग बनने लगेंगे।

41. यदि धन संबंधियों परेशानियों का सामना कर रहे हैं तो किसी भी श्रेष्ठ मुहूर्त में हनुमानजी का यह उपाय करें।

42. उपाय के अनुसार किसी पीपल के वृक्ष एक पत्ता तोड़ें। उस पत्ते पर कुमकुम या चंदन से श्रीराम का लिखें। इसके बाद पत्ते पर मिठाई रखें और यह हनुमानजी को अर्पित करें। इस उपाय से भी धन लाभ होता है।

43. एक बात का विशेष ध्यान रखें कि माह की हर अमावस्या पर पूरे घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई की जानी चाहिए। साफ-सफाई के बाद घर में धूप-दीप-ध्यान करें। इससे घर का वातावरण पवित्र और बरकत देने वाला बना रहेगा।

44. सप्ताह में एक बार किसी जरूरतमंद सुहागिन स्त्री को सुहाग का सामना दान करें। इस उपाय से देवी लक्ष्मी तुरंत ही प्रसन्न होती हैं और धन संबंधी परेशानियों को दूर करती हैं। ध्यान रखें यह उपाय नियमित रूप से हर सप्ताह करना चाहिए।

45. यदि कोई व्यक्ति दीपावली के दिन किसी पीपल के वृक्ष के नीचे छोटा सा शिवलिंग स्थापित करता है तो उसकी जीवन में कभी भी कोई परेशानियां नहीं आएंगी। यदि कोई भयंकर परेशानियां चल रही होंगी वे भी दूर हो जाएंगी। पीपल के नीचे शिवलिंग स्थापित करके उसकी नियमित पूजा भी करनी चाहिए। इस उपाय से गरीब व्यक्ति भी धीरे-धीरे मालामाल हो जाता है।

46. पीपल के 11 पत्ते तोड़ें और उन पर श्रीराम का नाम लिखें। राम नाम लिखने के लिए चंदन का उपयोग किया जा सकता है। यह काम पीपल के नीचे बैठकर करेंगे तो जल्दी शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। राम नाम लिखने के बाद इन पत्तों की माला बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें।

47. कलयुग में हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माने गए हैं। इनकी कृपा प्राप्त करने के लिए कई प्रकार उपाय बताए गए हैं। यदि पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए तो यह चमत्कारी फल प्रदान करने वाला उपाय है।

48. शनि दोषों से मुक्ति के लिए तो पीपल के वृक्ष के उपाय रामबाण हैं। शनि की साढ़ेसाती और ढय्या के बुरे प्रभावों को नष्ट करने के लिए पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाकर सात परिक्रमा करनी चाहिए। इसके साथ ही शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक भी लगाना चाहिए।

49. दीपावली से एक नियम हर रोज के लिए बना लें। आपके घर में जब भी खाना बने तो उसमें से सबसे पहली रोटी गाय को खिलाएं।

50. शास्त्रों के अनुसार एक पीपल का पौधा लगाने वाले व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार को कोई दुख नहीं सताता है। उस इंसान को कभी भी पैसों की कमी नहीं रहती है। पीपल का पौधा लगाने के बाद उसे नियमित रूप से जल अर्पित करना चाहिए। जैसे-जैसे यह वृक्ष बड़ा होगा आपके घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती जाएगी, धन बढ़ता जाएगा। पीपल के बड़े होने तक इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए तभी आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त होंगे।

51. दीपावली पर लक्ष्मी का पूजन करने के लिए स्थिर लग्न श्रेष्ठ माना जाता है। इस लग्न में पूजा करने पर महालक्ष्मी स्थाई रूप से घर में निवास करती हैं।-पूजा में लक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र और श्रीयंत्र रखना चाहिए। यदि स्फटिक का श्रीयंत्र हो तो सर्वश्रेष्ठ रहता है। एकाक्षी नारियल, दक्षिणावर्त शंख, हत्थाजोड़ी की भी पूजा करनी चाहिए।

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शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

धनतेरस के दिन क्यों होती है लक्ष्मी जी की पूजा



धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि के दिन पूरी श्रद्धा व विश्वास के साथ मनाया जाता है। धनवन्तरि के अलावा इस दिन, देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की भी पूजा करने की मान्यता है। इस दिन के बारे में एक दूसरी कहानी भी प्रचलित है।

एक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे तब लक्ष्मीजी ने भी उनसे साथ चलने का आग्रह किया। तब विष्णु जी ने कहा कि यदि मैं जो बात कहूं तुम अगर वैसा ही मानो तो फिर चलो। तब लक्ष्मीजी उनकी बात मान गईं और भगवान विष्णु के साथ भूमंडल पर आ गईं। कुछ देर बाद एक जगह पर पहुंच कर भगवान विष्णु ने लक्ष्मीजी से कहा कि जब तक मैं न आऊं तुम यहां ठहरो। मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत आना। विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी के मन में कौतुहल जागा कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या रहस्य है, जो मुझे मना किया गया है और भगवान स्वयं चले गए।

लक्ष्मीजी से रहा न गया और जैसे ही भगवान आगे बढ़े लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं। कुछ ही आगे जाने पर उन्हें सरसों का एक खेत दिखाई दिया जिसमें खूब फूल लगे थे। सरसों की शोभा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार करने के बाद आगे बढ़ीं। आगे जाने पर एक गन्ने के खेत से लक्ष्मीजी गन्ने तोड़कर रस चूसने लगीं।

उसी क्षण विष्णु जी आए और यह देख लक्ष्मीजी पर नाराज होकर उन्हें शाप दे दिया कि मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था, पर तुम न मानी और किसान की चोरी का अपराध कर बैठी। अब तुम इस अपराध के जुर्म में इस किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो। ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए। तब लक्ष्मीजी उस गरीब किसान के घर रहने लगीं।

एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तब तुम जो मांगोगी मिलेगा। किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया। पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया। लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया। किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए। फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं।

विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया। तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है, यह तो चंचला हैं, कहीं नहीं ठहरतीं। इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके। इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं। तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है। किसान हठपूर्वक बोला कि, नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूंगा।

तब लक्ष्मीजी ने कहा कि हे किसान तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं वैसा करो। कल तेरस है। तुम कल घर को लीप-पोतकर स्वच्छ करना। रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना और सायंकाल मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपए भरकर मेरे लिए रखना, मैं उस कलश में निवास करूंगी। किंतु पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी। इस एक दिन की पूजा से वर्ष भर मैं तुम्हारे घर से नहीं जाऊंगी। यह कहकर वह दीपकों के प्रकाश के साथ दसों दिशाओं में फैल गईं। अगले दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कथानुसार पूजन किया। उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया।

इसी वजह से हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मीजी की पूजा होने लगी।


घर के लिए वास्तु टिप्स

 Vastu Tips

घर के लिए वास्तु टिप्स 

 घर के बाहर या अंदर आशीर्वाद मुद्रा में देवी-देवता की मूर्ति अथवा चित्र लगाएं। ध्यान रहे, उनका मुंह भवन के बाहर की तरफ हो। सिर्फ गणेश का मुंह भवन के भीतर होना चाहिए क्योंकि गणेश के पीछे दरिद्रता रहती है।
 घर के ड्राइंगरूम में मोर, बंदर, शेर, गाय, मृग आदि के चि‍त्र या मूर्ति रूप में किसी एक का जोड़ा रखें जिसका मुंह एक-दूसरे की तरफ हो तथा मुंह घर के अंदर हो, शुभ रहेगा।

 दक्षिण दिशा में घोड़ा (अश्व) रखना सर्वोत्तम है।

स्फटिक के शिवलिंग की पूजा करें। स्फटिक असली हो तो प्रभाव में वृद्धि होगी।

 भवन निर्माण में दरवाजे और खिड़कियां सम संख्या में हों तथा सीढ़ियां विषम संख्या में हों।

टॉयलेट और किचन एक पंक्ति (कतार) में या आमने-सामने होना दोषकारक है।

घर में गणेशजी की एक से अधिक मूर्ति हो तो कोई फर्क नहीं, परंतु पूजा एक ही गणेशजी की हो। घर में गणपति की मूर्ति, रंगोली, स्वस्तिक या ॐ का चिह्न बुरी आत्माओं के प्रभाव को नियंत्रित करता है।

असली स्फटिक बॉल, श्रीयंत्र, पिरामिड या कटिंग बॉल को आप कहीं भी रख सकते हैं। (श्रीयं‍त्र को केवल घर के मंदिर में रखें।)
धन-समृद्धि के लिए धन की पेटी (कैश बॉक्स) में तीन सिक्के रखें, जो भाग्य की अभिवृद्धि में सहायक होंगे।

 घोड़े की नाल पश्चिमी देशों तथा हमारे देश में भी बहुत भाग्यशाली और शुभ मानी जाती है। अपनी सुरक्षा और सौभाग्य के लिए इसे अपने घर के मुख्य द्वार के ऊपर चौखट के बीच में लगा सकते हैं।

बीम के नीचे बिंदु चिप्स लगाकर बीम के दोष को दूर कर सकते हैं।

संपत्ति तथा सफलता के लिए अपने बैठक कक्ष में पिरामिड को उत्तर-पूर्व में रखें।
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बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

दीपावली पर करें सरल उपाय



धार्मिक शास्त्रों व ज्योतिष में पीतल के पात्रों का बहुत महत्व बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सुवर्ण व पीतल की ही भांति पीला रंग देवगुरु बृहस्पति को संबोधित करता है तथा ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार पीतल पर देवगुरु बृहस्पति का आधिपत्य होता है।

बृहस्पति ग्रह की शांति हेतु पीतल का उपयोग किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह शांति व ज्योतिष अनुष्ठानों में दान हेतु भी पीतल के बर्तन दिए जाते हैं। इस वर्ष दीपावली 19 अक्टूबर 2017, गुरुवार के दिन आ रही है, अत: इस दिन लक्ष्मी पूजन में अगर पीतल के बर्तनों का उपयोग किया जाए तो निश्चित ही आपके जीवन के समस्त परेशानियां दूर होंगी तथा सौभाग्य की प्राप्ति होकर जीवन अनंत सुख-समृद्धियों से भरा रहेगा।

तो आइए इस दीपावली पर करें निम्न सरल उपाय, निश्चित ही आपकी किस्मत चमकेगी और जीवन के सभी कष्टों की समाप्ति भी होगी।

1. लक्ष्मी की प्राप्ति हेतु वैभवलक्ष्मी का पूजन कर पीतल के दीये में शुद्ध घी का दीपक करें।

2. दुर्भाग्य से मुक्ति पाने हेतु पीतल की कटोरी में दही भरकर कटोरी समेत पीपल के नीचे रखें।

3. सौभाग्य प्राप्ति हेतु पीतल के कलश में चना दाल भरकर विष्णु मंदिर में चढ़ाएं।

4. भाग्योदय हेतु पीतल की कटोरी में चना दाल भिगोकर रातभर सिरहाने रखें व सुबह चना दाल पर गुड़ रखकर गाय को खिलाएं।

5. अटूट धन प्राप्ति हेतु भगवान श्रीकृष्ण पर शुद्ध घी से भरा पीतल का कलश चढ़ाकर निर्धन विप्र को दान करें।

सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

कार्तिक मास में क्या करें, क्या न करें



कार्तिक मास लगते ही पूर्णिमा से लेकर कार्तिक उतरते की पूर्णिमा तक प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व ही पवित्र नदियों गंगा, यमुना, गोदावरी आदि में स्नान करके तुलसी, पीपल, बरगद, आंवला आदि वृक्षों पर जल अर्पित करने की परंपरा है। इसके अलावा पांच ईंट या पांच पत्थर के टुकड़ों को रखकर पथवारी बनाते हैं, जिसकी जल, मौली, रोली, चंदन, अक्षत, फल,प्रसाद, धूप, दीपक आदि से पूजा की जाती है। कार्तिक मास में प्रतिदिन व्रत रखकर रात्रि में तारों को अर्घ्य देकर भोजन किया जाता है। अंतिम दिन सुराही, भोजन,वस्त्र, धन आदि का दान बड़े-बुजुर्गों को करके उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

कार्तिक मास में क्या करें, क्या न करें --

चूंकि कार्तिक मास को पवित्र और भक्ति भाव से पूर्ण माना गया है, इसलिए इस मास में कोई भी अपवित्र या वर्जित कार्य नहीं करना चाहिए। इस मास में नमक, शहद, इत्र, गजरे आदि के प्रयोग से बचना चाहिए।

अकारण ही रोना या विलाप करना तथा घर में कलह करना निषिद्ध माना गया है। क्षमाशीलता, विनम्रता, दयाभाव, संतोष, सत्यवादिता जैसे सद्गुणों को अपनाकर शुद्ध ह्रदय भाव के साथ जीवन बिताना चाहिए।

कार्तिक मास में शैया पर शयन न करके धरती पर ही शयन करना उचित रहता है। इस मास में जौ, तिल का तेल, आंवला, श्री खंड और तुलसी दल का सेवन करना अच्छा माना गया है।

कार्तिक मास में प्रतिदिन तुलसी का पूजन, विष्णु और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ, आंवला और कदली वृक्ष को जल से सींचना तथा सात परिक्रमा देना और ॐ विष्णवे नमः मंत्र का जप करना भी शुभ फलदायी होता है।

कार्तिक मास में देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन विष्णु भगवान चार मास की निद्रा से जागते हैं, इसलिए इस दिन व्रत और तुलसी विवाह का विशेष महत्व है।

इस मास में उत्तर पूर्व भारत में सूर्य षष्टी का पर्व भी होता है। यह पर्व आस्था, विश्वास एवं संकल्प से जुड़ा है तथा शरीर और मन, दोनों की पवित्रता को बनाये रखने वाला है।

कार्तिक मास का है खास महत्व
कार्तिक मास को रोगनाशक, सद्बुद्धि, मुक्ति, पुत्र-पौत्र, और धन-धान्य आदि प्रदान करने वाला मास बताया गया है। इस मास में गंगा स्नान, दान, जप-तप, यज्ञ, हवं, अनुष्ठान आदि करने से मनुष्य को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस मास में भगवान विष्णु, लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती, हनुमान जी, धन्वंतरि, माता दुर्गा आदि की पूजा आराधना से सभी प्रकार के ऋणों मुक्ति मिलती है तथा सभी देवी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कार्तिक मास में देव मंदिर, जल स्थान, देव वृक्ष, अंडकार वाले स्थान आदि पर दीप जलाने, भूमि पर शयन करने, साधू-संतों की सेवा करने, अखाद्य पदार्थों का सेवन न करने और पवित्र जीवन व्यतीत करना अत्यंत ही शुभ फलदायी होता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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गुरुवार, 5 अक्तूबर 2017

कार्यक्षेत्र में समृद्धि लाने के लिए वास्तु



अगर आपको वास्तुशास्त्र में विश्वास है तो उसके सिद्धांतों को अपनाकर आप सुखी रह सकते हैं। यह शास्त्र कहता है कि पैसा और अन्य कीमती चीजों को उत्तर दिशा की ओर मुख वाली वाली अलमारी में रखना चाहिए। वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ गौरव मित्तल ने कार्यक्षेत्र में समृद्धि लाने के लिए वास्तु से संबंधित कुछ सुझाव दिए हैं, जो इस प्रकार हैं :

 पैसे और कीमती चीजों को उत्तर की ओर रखी अलमारी में रखना चाहिए।
 कार्यालय में मालिक की सीट के पीछे मंदिर नहीं होना चाहिए।
 मालिक को पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठना चाहिए। पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके भी बैठा जा सकता है, लेकिन दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके कभी नहीं बैठना चाहिए।
 कार्यालय के मालिक की सीट के पीछे मजबूत दीवार होनी चाहिए।
 मालिक का डेस्क आयताकार होना चाहिए।
 फैक्ट्री या कार्यालय का केंद्र स्थान (ब्रह्म स्थान) खाली होना चाहिए। वहां कोई भारी वस्तु भूलकर भी नहीं रखें।
 मैनेजर, अधिकारियों और निदेशकों के बैठने की सीट की व्यवस्था कार्यालय परिसर के दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
 वास्तु के अनुसार, अकाउंट डिपार्टमेंट को दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए।
 कार्यालय परिसर में रिसेप्शन उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए।
 मार्केटिंग डिपार्टमेंट को उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थापित करना चाहिए।

बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

शरद पूर्णिमा के उपाय



5 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा है। शास्त्रों के अनुसार हर पूर्णिमा वाले को प्रात: स्नानोपरान्त पीपल के वृक्ष के नीचे जाकर लक्ष्मी मां का पूजन करें क्योंकि मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीपल के पेड़ पर लक्ष्मी मां आती है|

मां की पूजा करने के बाद उन्हें आमंत्रित करें अपने घर में स्थान ग्रहण करने के लिए | आप पर हमेशा लक्ष्मी मां की मेहरबानी बनी रहेगी इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करें| ऐसा करने पर मन को असीम शांति मिलेगी और आपके कष्ट दूर होंगे|

पूर्णिमा को हल्दी और पानी का पेस्ट बनाकर अपने घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक और ओम बनाएं हर 
इस दिन मिश्री डाल कर साबूदाने की खीर बनाएं और भोग लगाएं।

मां लक्ष्मी को की कृपा से धन की प्राप्ति होगी | मोती शंख पर केसर से स्वास्तिक बनाएं 108 अक्षत लेकर एक एक अक्षत महालक्ष्मी मंत्र बोलकर चढ़ाएं...फिर उस अक्षत को लाल कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी या कैश बॉक्स में रखें। मंत्र है- ओम श्रीं ओम , ओम ह्रीं ओम महालक्ष्मये नम :।

चावल चंद्रमा का प्रतीक और शंख लक्ष्मी स्वरुप है। ये उपाय आप रात 9 बजे से लेकर आधी रात 12:30 तक कर सकते हैं। घर में लक्ष्मी के स्थायी निवास के लिये, पूर्णिमा की शाम से लेकर सुबह तक अखंड दीप जलायें।

चंद्रलोक में मां लक्ष्मी दीप रुप में विराजमान हैं। अखंड दीप की रोशनी से मां लक्ष्मी खिंची चली आयेंगी।

लक्ष्मी के तांत्रिक उपाय में आप छोटे नारियल की पूजा करके उसे पूजा स्थान पर स्थापित करें। अष्ट लक्ष्मी पर 8 कमल चढ़ाकर महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ने से भी मां लक्ष्मी निर्धनों के जीवन में प्रवेश करती हैं।

दक्षिणावर्ती शंख से मां लक्ष्मी का अभिषेक करें और धूप,दीप ,फूल से पूजा करें, दक्षिणावर्ती शंख भी पूर्णिमा के दिन ही प्रकट हुआ था। श्रीसूक्त का पाठ करने से भी मिलता है धन।

पूर्णिमा को लक्ष्मी सहस्त्रनाम, लक्ष्मी अष्टोत्र नावामली ,सिद्धिलक्ष्मी कवच, श्रीसूक्त, लक्ष्मी सूक्त, महालक्ष्मी कवच, कनकधारा के पाठ से भी आपको मां लक्ष्मी की कृपा मिलेगी।

पूर्णिमा को आंवला की पूजा से भी लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है। चांदनी रात में रखे आंवले में औषधीय शक्ति भी आती है।

पूर्णिमा पर महालक्ष्मी को खीर, छुहाड़े की खीर, मेवे की खीर का भोग लगायें। गाय के दूध में महालक्ष्मी का वास है, इसीलिये उन्हें खीर बहुत प्रिय है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

भारत के अनोखे रीति रिवाज



 
आग पर चलने का रिवाज
आपको बता दें कि यह रिवाज तमिलनाडु में निभाया जाता है जहां पर अंगारों पर लोग चलते हैं। यह माना जाता है कि महाभारत रामायण मैं भी इस प्रकार की प्रक्रियाओं को निभाया जाता था। इस रिवाज को निभाने के लिए 2 से 3 महीने का अभ्यास किया जाता है और उसके बाद इस प्रक्रिया को बड़े जोर शोर से निभाया जाता है।

बालों को खींचकर निकालने का रिवाज
इस प्रक्रिया को केश लोचन कहा जाता है और यह मुख्य तौर पर जैन समाज में की जाती है। जैन समाज में जब भी किसी व्यक्ति को धर्म गुरु की उपाधी दी जाती है तो उसके बालों को खींच-खींच कर सर से निकाला जाता है। यह बेहद ही दर्दनाक प्रक्रिया है लेकिन फिर भी इसे एक रिवाज के तौर पर किया जाता है। यह माना जाता है कि आप अपने दर्द को सह कर ही ऊपर उठ सकते हैं।

बच्चों को छत पर से फेंकना
यह रिवाज महाराष्ट्र और कर्नाटक में काफी प्रचलित है लेकिन यह बच्चों की जिंदगी के लिए बेहद ही खतरनाक है। इस रिवाज के अनुसार बच्चों को छत पर से फेंका जाता है। आपको बता दें कि बाबा उमर दरगाह जो कि शोलापुर के पास है वहां पर इस प्रकार के रिवाज को निभाया जाता है। ऐसा ही रिवाज श्री संकेश्वर टेंपल कर्नाटक में भी होता है कई बार इस प्रकार की प्रक्रिया पर सवालिया निशान भी उठे मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जानवरों से विवाह का रिवाज़
पूरे भारत में इस प्रकार की प्रक्रिया निभाई जाती है कहीं पर इसे मंगल दोष हटाने के लिए किया जाता है तो कहीं पर भूत पिशाच हटाने के लिए। लेकिन यह प्रक्रिया आपको पूरे देश में कई राज्यों में देखने के लिए मिल जाएगी। इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी जानवर से इंसान की शादी करा दी जाती है और यह माना जाता है कि आपके सारे दोष उस जानवर पर आ जाएंगे। कभी हम यह सुनते हैं कि मेंढक से शादी कराई गई तो कभी मुर्गे से यहां तक कि पेड़ से भी लोगों की शादी करा दी जाती है।

बानी उत्सव आंध्र प्रदेश
यह एक विचित्र प्रकार का उत्सव है जिसमें लोग एक दूसरे को डंडों से पीटते हैं। इस प्रक्रिया में कई लोगों की जान भी चली जाती है लेकिन यह उत्सव देवरागट्टू टेंपल में किया जाता है।

अपने शरीर को छेदना
तमिलनाडु जिले में भगवान मुरगन की आराधना में यह एक विशेष प्रकार का रिवाज निभाया जाता है जिसमें लोग अपने शरीर को सुईयों और सलाखों से छेद लेते हैं। यह बेहद ही दर्दनाक रिवाज है लेकिन लोग इसे निभाते हैं।

सर पर नारियल तुड़वाने का रिवाज
यह बात सुनकर ही आपको बेहद दुख हो रहा होगा लेकिन यह रिवाज तमिलनाडु में निभाया जाता है जिसमें लोग अपने सर पर नारियल तुड़वाते हैं। यह नारियल यहां के पुजारी इन लोगों के सर पर तोड़ते हैं और यह माना जाता है कि जिसके सर पर नारियल टूट गया वह बेहद ही भाग्यशाली है।

हुक के सहारे खुद को लटकाना
यह खतरनाक उत्सव केरल में मनाया जाता है जिसके अंदर इंसान अपनी चमड़ी के अंदर हुक फसाकर उससे लटकता है यह उत्सव मुख्य तौर पर Garuda थुकं नामक जगह पर मनाया जाता है और यह भगवान विष्णु और काली माता की आराधना के दौरान किया जाता है।

गायों से खुद को कुचलवाना
एक विशेष प्रकार की पूजा है जो मध्यप्रदेश में की जाती है दिवाली के अगले दिन भीवडावाद गांव के लोग गायों को सजा कर उन्हें एक साथ भगाते हैं और उनके नीचे लेट जाते हैं। गाय इन्हें कुचल कर आगे निकल जाती हैं और यह माना जाता है कि जिस व्यक्ति पर से गाय निकल गयी है उसे भगवान का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है लेकिन इस प्रक्रिया में कई लोगों की जानें भी जाती है।

अग्नि खेली रिवाज
यह विशेष प्रकार का रिवाज बैंगलोर में निभाया जाता है जिस में आग लगी हुई रस्सियों को लोग अपने शरीर पर मारते हैं इसमें कई लोग दुर्घटना का शिकार भी होते हैं।


रविवार, 1 अक्तूबर 2017

तोरण मारने की रस्म कैसे शुरू हुई

REET 2017-18 25,000 TEACHER VACANCY FOR THIRD TEACHER IN RAJASTHAN


हिन्दू समाज में शादी में तोरण मारने की एक आवश्यक रस्म है, जो सदियों से चली आ रही है। लेकिन अधिकतर लोग नहीं जानते कि यह रस्म कैसे शुरू हुई। इसके पीछे एक गहरा राज है जो बहुत कम लोगों को ही पता है-

प्राचीन दंत कथा के अनुसार कहा जाता है कि तोरण नाम का एक राक्षस था, जो शादी के समय दुल्हन के घर के द्वार पर तोते का रूप धारण कर बैठ जाता था। जब दूल्हा द्वार पर आता तो वह उसके शरीर में प्रवेश कर दुल्हन से स्वयं शादी रचाकर उसे परेशान करता था।

एक बार एक साहसी और चतुर राजकुमार की शादी के वक्त जब दुल्हन के घर में प्रवेश कर रहा था अचानक उसकी नजर उस राक्षसी तोते पर पड़ी और उसने तुरंत तलवार से उसे मार गिराया और शादी संपन्न की। बताया जाता है कि उसी दिन से ही तोरण मारने की परंपरा शुरू हुई।

आपने कभी गौर किया हो तो आपको पता लगेगा कि इस रस्म में दुल्हन के घर के दरवाजे पर लकड़ी का तोरण लगाया जाता है, जिस पर एक तोता (राक्षस का प्रतीक) होता है। बगल में दोनों तरफ छोटे तोते होते हैं। दूल्हा शादी के समय तलवार से उस लकड़ी के बने राक्षस रूपी तोते को मारने की रस्म पूर्ण करता है।

गांवों में तोरण का निर्माण खाती करता है, लेकिन आजकल बाजार में बने बनाए सुंदर तोरण मिलते हैं, जिन पर गणेशजी व स्वास्तिक जैसे धार्मिक चिह्न अंकित होते हैं और दूल्हा उन पर तलवार से वार कर तोरण (राक्षस) मारने की रस्म पूर्ण करता है।
इसे रखें ध्यान
शास्त्रों के अनुसार तोरण पर तोते का रूप रखे का स्वेरूप होना लेकिन इन दिनों तोते की जगह गणेशजी या धार्मिक चिन्हों को बना दिया जाता है। दूल्हा भी तोरण की जगह उन पर ही बार करता है। कहते हैं भारतीय समाज में तलाक के मामले बढने के पीछे भी यही कारण है। विद्वानों को इस बात को समझकर प्रचारित-प्रसारित करना चाहिए। एक तरफ हम शादी में गणेश पूजन कर उनको रिद्धि-सिद्धि सहित शादी में पधारने का निमंत्रण देते हैं और दूसरी तरफ तलवार से वार कर उनका अपमान करते हैं, यह उचित नहीं है। तोरण की रस्म पर ध्यान रखकर परंपरागत राक्षसी रूपी तोरण ही लाकर रस्म निभाएं।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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