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गुरुवार, 31 अगस्त 2017

पैर के शेप से जाने स्वभाव

पैर के शेप से जाने स्वभाव

शरीर के अंगों तथा लक्षणों के आधार पर भविष्यवाणी की थोड़ी सी जानकारी होने से आप किसी भी व्यक्ति के स्वभाव, आदतों और उसके भाग्य के बारे में काफी हद तक अंदाजा लगा सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ छोटी बातों पर ध्यान देना होता है, जैसे की हाथों की शेप, पैरों की शेप, चेहरे की शेप या आदमी के माथे की रेखाएं आदि। इनका मामूली जानकारी भी आपको एक अच्छा खासा ज्योतिषी बना देता है। इस क्रम में पैरों की शेप से दूसरे आदमी का व्यवहार, भविष्य तथा आचार-विचार को समझने का तरीका बताया जा रहा है.
पैर की बनावट से जानिये किसी का भी स्वाभाव पैर में अंगूठे के पास वाली उंगली अंगूठे तथा अन्य सभी उंगलियों से भी अधिक लंबी हो.

यदि किसी के पैर में अंगूठे के पास वाली उंगली अंगूठे तथा अन्य सभी उंगलियों से भी अधिक लंबी हो, तो ऐसा व्यक्ति स्वभावत ऊर्जाशाली होता है। ये लोग थकना जानते ही नहीं वरन इन्हें हमेशा कुछ न कुछ करना भाता है। कई बार तो ये लोग इतनी अधिक स्फूर्ति और तेजी के साथ काम करते हैं, कि लोग इन्हें मशीन भी कहने लगते हैं।
पैर का केवल अंगूठा लंबा हो, तथा बाकी उंगलियां छोटी या बराबरकेवल अंगूठा लंबा हो, तथा बाकी उंगलियां छोटी या बराबर

यदि किसी के पैर का केवल अंगूठा लंबा हो, तथा बाकी उंगलियां छोटी या बराबर हो तो, ये लोग बहुत ही शांति और आराम से काम करने वाले होते हैं। ये बड़े ही आराम से किसी भी समस्या को सुलझा सकते हैं, और अपने विरोधियों को भी निपटा देते हैं।
अंगूठे के पास वाली उंगली सबसे बड़ी तथा अन्य उंगलियां छोटी


अगर दुनिया के सबसे अच्छे योजनाकारों के पैरों की शेप देखी जाए, तो पता लगेगा कि उनकी अंगूठे के पास वाली उंगली सबसे बड़ी तथा अन्य उंगलियां छोटी होती हैं। ये हर काम को बड़े ही सूक्ष्म तरीके से प्लान करते हैं और इनकी योजनाएं सफल भी होती हैं। शारीरिक रूप से ये थोड़े अक्षम हो सकते हैं, परन्तु मानसिक रूप से ये बड़े ही सक्षम होते हैं।
जिन लोगों के पैर में अंगूठा तथा पास की दो उंगलियां समान होपैर में अंगूठा तथा पास की दो उंगलियां समान हो

जिन लोगों के पैर में अंगूठा तथा पास की दो उंगलियां समान हो, और बाकी उंगलियां छोटी हों तो ऐसे आदमी मेहनती, नम्र तथा जिम्मेदार होते हैं। ये बिना वजह किसी विवाद में नहीं पड़ते, न ही किसी को परेशान करना इनकी आदत होती है। जीवनसाथी के रूप में ऐसे आदमी का मिलना एक तरह से सौभाग्य ही मानना चाहिए।
किसी के पैरे में अंगूठे से घटते क्रम में उंगलियां हो तो .पैरे में अंगूठे से घटते क्रम में उंगलियां हो तो .

यदि किसी के पैरे में अंगूठे से घटते क्रम में उंगलियां हो तो ऐसे लोग दूसरों पर अधिकार जमाने वाले होते हैं। ये चाहते हैं कि दूसरे इनकी कही हर बात को माने तथा इनकी हर बात का दूसरे लोग सम्मान करें, चाहे वो गलत ही हो। जीवनसाथी के रूप में यदि पति-पत्नी दोनों के पैरों की शेप ऐसी हो तो दोनों के बीच जल्द ही तलाक हो जाता है, या दोनों किसी न किसी अन्य संबंध में प्रवृत्त हो जाते हैं।

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सोमवार, 28 अगस्त 2017

हनुमानजी के चमत्कारी उपाय


हनुमानजी के चमत्कारी उपाय

आप हनुमानजी के भक्त हैं और पैसों की समस्याओं से मुक्ति पाना चाहते हैं तो यहां चमत्कारी उपाय बताए जा रहे है। बजरंग बली के पूजन में साफ-सफाई और पवित्रता का खास ध्यान रखना अनिवार्य है। जब भी पूजा करें तब हमें मन से और तन से पवित्र होना चाहिए। हनुमानजी के लिए मंगलवार और शनिवार बहुत खास दिन हैं। इन दो दिनों में की गई हनुमान पूजा विशेष फल देने वाली होती है।




1. अगर आपको कड़ी मेहनत के बाद भी किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता नहीं मिल पा रही है तो किसी हनुमान मंदिर जाएं और नींबू का ये उपाय करें।
उपाय के अनुसार अपने साथ एक नींबू और 4 लौंग लेकर जाएं। इसके बाद मंदिर में हनुमानजी के सामने नींबू के ऊपर चारों लौंग लगा दें। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें या हनुमानजी के मंत्रों का जप करें।
मंत्र जप के बाद हनुमानजी से सफलता दिलवाने की प्रार्थना करें और वह नींबू अपने साथ रखकर कार्य करें। मेहनत के साथ ही कार्य में सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।




2. सुबह-सुबह पीपल के कुछ पत्ते तोड़ लें और उन पत्तों चंदन या कुमकुम से श्रीराम नाम लिखें। इसके बाद इन पत्तों की एक माला बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें।




3. किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।




4. यदि आपके कार्यों में बार-बार बाधाएं आ रही हैं या धन प्राप्त करने में देरी हो रही है या किसी की बुरी नजर बार-बार लगती है तो नारियल का यह उपाय करें।
उपाय के अनुसार किसी सिद्ध हनुमान मंदिर में जाएं और अपने साथ एक नारियल लेकर जाएं। मंदिर में हनुमानजी की प्रतिमा के सामने नारियल को अपने सिर पर सात बार वार लें। इसके साथ हनुमान चालीसा का जप करते रहें। सिर पर वारने के बाद नारियल हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।




5. यदि आप मालामाल होना चाहते हैं तो रात के समय दीपक का यह उपाय करें। रात में किसी हनुमान मंदिर जाएं और वहां प्रतिमा के सामने में चौमुखा दीपक लगाएं। चौमुखा दीपक यानी दीपक चार ओर से जलाना है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा प्रतिदिन करेंगे तो बहुत ही जल्द बड़ी-बड़ी परेशानियां भी आसानी से दूर हो जाएंगी।




6. यदि आपके कार्यों में परेशानियां अधिक आ रही हैं और बनते हुए काम भी बिगड़ जाते हैं तो शनिवार को यह उपाय करें।
उपाय के अनुसार आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान आदि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद घर से एक नींबू अपने साथ लें और किसी चौराहे पर जाएं।
अब वहां नींबू के दो बराबर टुकड़ें करें। एक टुकड़े को अपने से आगे की ओर फेंकें और दूसरे टुकड़े को पीछे की ओर। इस समय आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
नींबू के टुकड़े फेंकने के बाद आप अपने काम पर जा सकते हैं या पुन: घर लौटकर आ सकते हैं।




7. हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। जो भी व्यक्ति हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।




8. हनुमानजी के मंदिर में 1 नारियल पर स्वस्तिक बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें।




9. अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की प्रतिमा पर चोला चढ़वाएं। ऐसा करने पर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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गुरुवार, 24 अगस्त 2017

गणेश जी की स्थापना करते वक़्त ध्यान रखे ये बातें



हर साल भाद्रपक्ष के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है की इस दिन भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। इसी दिन से श्रीगणेश के 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुवात होती है। इन दिनों हर कोई भगवान श्रीगणेश की मूर्ति घर-दुकान में स्थापित कर, उनकी पूजा-अर्चना करता है। भगवान श्री गणेश की मूर्ति की स्थापना करते वक़्त कुछ बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। यहां हम आपको कुछ ऐसी ही आवश्यक बातों के बारे में बता रहे है।

किस जगह कैसी मूर्ति रखना होगा शुभ
घर में भगवान गणेश की बैठी मुद्रा में और दुकान या ऑफिस में खड़े गणपति की मूर्ति या तस्वीर रखना बहुत ही शुभ माना जाता है।

मूर्ति रखते समय ध्यान रखें ये बात
घर या दुकान में गणेश मूर्ति रखते समय ध्यान रखें की उनके दोनों पैर ज़मीन का स्पर्श करते हुए हों। इससे कामों में स्थिरता और सफलता आती है।


ख़ास होती है सिंदूरी रंग की प्रतिमा
सर्व मंगल की कामना करने वालों को सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना करनी चाहिए। ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती है।

किस ओर हो श्रीगणेश की सूंड
श्रीगणेश की मूर्ति या चित्र में इस बात का ध्यान रखें की उनकी सूंड बाएं हाथ की और घुमी हुई हो। दाएं हाथ की और घुमी हुई सूंड वाले गणेश जी हठी होते हैं।


श्री गणेश के साथ जरूर हो ये दो चीज़ें
घर में श्री गणेश का चित्र लगाते समय ध्यान रखें कि चित्र में मोदक और चूहा अवश्य हो। इससे घर में बरकत रहती है।

मेन गेट पर इस तरह लगाएं श्रीगणेश की तस्वीर
घर के मेन गेट पर गणपति की दो मूर्ति या चित्र लगाने चाहिए। उन्हें ऐसे लगाएं कि दोनों गणेशजी की पीठ मिली रहे। ऐसा करने से सभी वास्तु दोष खत्म हो जाते है।


इस तरह कर सकते है वास्तुदोष का अंत
घर का जो हिस्सा वास्तु के अनुसार सही न हो, वहां घी मिश्रित सिंदूर से श्रीगणेश स्वरुप स्वास्तिक दीवार पर बनाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होने लगता है।

सुख-शांति के लिए घर लाए सफ़ेद मूर्ति
घर या दुकान में सुख-शांति, समृद्धि की इच्छा रखने वालों को सफ़ेद रंग के विनायक की मूर्ति या तस्वीर लगानी चाहिए।

घर में यहां जरूर लगाएं श्रीगणेश का चित्र
घर के ब्रह्म स्थान यानी केंद्र में और पूर्व दिशा में मंगलकारी श्री गणेश की मूर्ति या चित्र जरूर लगाना चाहिए। ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है।



बुधवार, 23 अगस्त 2017

श्रीगणेश की रोचक बातें

श्रीगणेश की रोचक बातें


 श्रीगणेश से जुड़ी कुछ ऐसी ही गुप्त व रोचक बातें बता रहे हैं।


1- शिवमहापुराण के अनुसार माता पार्वती को श्रीगणेश का निर्माण करने का विचार उनकी सखियां जया और विजया ने दिया था। जया-विजया ने पार्वती से कहा था कि नंदी आदि सभी गण सिर्फ महादेव की आज्ञा का ही पालन करते हैं। अत: आपको भी एक गण की रचना करनी चाहिए जो सिर्फ आपकी आज्ञा का पालन करे। इस प्रकार विचार आने पर माता पार्वती ने श्रीगणेश की रचना अपने शरीर के मैल से की।

2- शिवमहापुराण के अनुसार श्रीगणेश के शरीर का रंग लाल और हरा है। श्रीगणेश को जो दूर्वा चढ़ाई जाती है वह जडऱहित, बारह अंगुल लंबी और तीन गांठों वाली होना चाहिए। ऐसी 101 या 121 दूर्वा से श्रीगणेश की पूजा करना चाहिए।


3- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माता पार्वती ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुण्यक नाम व्रत किया था, इसी व्रत के फलस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण पुत्र रूप में माता पार्वती को प्राप्त हुए।

4- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जब सभी देवता श्रीगणेश को आशीर्वाद दे रहे थे तब शनिदेव सिर नीचे किए हुए खड़े थे। पार्वती द्वारा पुछने पर शनिदेव ने कहा कि मेरे द्वारा देखने पर आपके पुत्र का अहित हो सकता है लेकिन जब माता पार्वती के कहने पर शनिदेव ने बालक को देखा तो उसका सिर धड़ से अलग हो गया।


5- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जब शनि द्वारा देखने पर माता पार्वती के पुत्र का मस्तक कट गया तो भगवान श्रीहरि गरूड़ पर सवार होकर उत्तर दिशा की ओर गए और पुष्पभद्रा नदी के तट पर हथिनी के साथ सो रहे एक गजबालक का सिर काटकर ले आए। उस गजबालक का सिर श्रीहरि ने माता पार्वती के मस्तक विहिन पुत्र के धड़ पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया।

6- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक बार किसी कारणवश भगवान शिव ने क्रोध में आकर सूर्य पर त्रिशूल से प्रहार किया। इस प्रहार से सूर्यदेव चेतनाहीन हो गए। सूर्यदेव के पिता कश्यप ने जब यह देखा तो उन्होंने क्रोध में आकर शिवजी को श्राप दिया कि जिस प्रकार आज तुम्हारे त्रिशूल से मेरे पुत्र का शरीर नष्ट हुआ है, उसी प्रकार तुम्हारे पुत्र का मस्तक भी कट जाएगा। इसी श्राप के फलस्वरूप भगवान श्रीगणेश के मस्तक कटने की घटना हुई।


7- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक बार तुलसीदेवी गंगा तट से गुजर रही थी, उस समय वहां श्रीगणेश भी तप कर रहे थे। श्रीगणेश को देखकर तुलसी का मन उनकी ओर आकर्षित हो गया। तब तुलसी ने श्रीगणेश से कहा कि आप मेरे स्वामी हो जाइए लेकिन श्रीगणेश ने विवाह करने से इंकार कर दिया। क्रोधवश तुलसी ने श्रीगणेश को विवाह करने का श्राप दे दिया और श्रीगणेश ने तुलसी को वृक्ष बनने का।


8- शिवमहापुराण के अनुसार श्रीगणेश का विवाह प्रजापति विश्वरूप की पुत्रियों सिद्धि और बुद्धि से हुआ है। श्रीगणेश के दो पुत्र हैं इनके नाम क्षेत्र तथा लाभ हैं।

9- शिवमहापुराण के अनुसार जब भगवान शिव त्रिपुर का नाश करने जा रहे थे तब आकाशवाणी हुई कि जब तक आप श्रीगणेश का पूजन नहीं करेंगे तब तक तीनों पुरों का संहार नहीं कर सकेंगे। तब भगवान शिव ने भद्रकाली को बुलाकर गजानन का पूजन किया और युद्ध में विजय प्राप्त की।

10- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक बार परशुराम जब भगवान शिव के दर्शन करने कैलाश पहुंचे तो भगवान ध्यान में थे। तब श्रीगणेश ने परशुरामजी को भगवान शिव से मिलने नहीं दिया। इस बात से क्रोधित होकर परशुरामजी ने फरसे से श्रीगणेश पर वार कर दिया। वह फरसा स्वयं भगवान शिव ने परशुराम को दिया था। श्रीगणेश उस फरसे का वार खाली नहीं होने देना चाहते थे इसलिए उन्होंने उस फरसे का वार अपने दांत पर झेल लिया, जिसके कारण उनका एक दांत टूट गया। तभी से उन्हें एकदंत भी कहा जाता है।

11- महाभारत का लेखन श्रीगणेश ने किया है ये बात तो सभी जानते हैं लेकिन महाभारत लिखने से पहले उन्होंने महर्षि वेदव्यास के सामने एक शर्त रखी थी इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। शर्त इस प्रकार थी कि श्रीगणेश ने महर्षि वेदव्यास से कहा था कि यदि लिखते समय मेरी लेखनी क्षणभर के लिए भी न रूके तो मैं इस ग्रंथ का लेखक बन सकता हूं।

तब महर्षि वेदव्यास जी ये शर्त मान ली और श्रीगणेश से कहा कि मैं जो भी बोलूं आप उसे बिना समझे मत लिखना। तब वेदव्यास जी बीच-बीच में कुछ ऐसे श्लोक बोलते कि उन्हें समझने में श्रीगणेश को थोड़ा समय लगता। इस बीच महर्षि वेदव्यास अन्य काम कर लेते थे।


12- गणेश पुराण के अनुसार छन्दशास्त्र में 8 गण होते हैं- मगण, नगण, भगण, यगण, जगण, रगण, सगण, तगण। इनके अधिष्ठाता देवता होने के कारण भी इन्हें गणेश की संज्ञा दी गई है। अक्षरों को गण भी कहा जाता है। इनके ईश होने के कारण इन्हें गणेश कहा जाता है, इसलिए वे विद्या-बुद्धि के दाता भी कहे गए हैं।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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सोमवार, 21 अगस्त 2017

vastu tips

vastu tips


घर में बना हुआ मंदिर उस घर में रहने वाले सदस्यों के सकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख केन्द्र बिन्दु होता है। वास्तुशास्त्रके अनुसार पूजा का घर हमेशा ईशान कोण में होना चाहिए। इसके अलावा घर के मंदिर में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।




घर के मंदिर में एक ही भगवान की दो तस्वीरें या मूर्तियां नहीं होनी चाहिए। शास्त्रों मे ऐसा होने से शुभ कार्य को करने में परेशानियां आती है,इसलिए जहां तक संभव हो एक भगवान की एक ही तस्वीर लगाएं।




घर का पश्चिम और दक्षिण कोना वास्तुशास्त्र के नियम से अशुभ फल का कारण माना जाता है इसलिए पूजा घर पूर्व या उत्तर दिशा में ही होना चाहिए।




घर का पूजा का स्थान न तो शौचालय के पास बना होना चाहिए और ना ही रसोई घर में। इसके अलावा सीढ़ियो के नीचे कभी भी भूलकर भी मंदिर नहीं बनवाना चाहिए।


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शनिवार, 19 अगस्त 2017

जीवन को सुखमय बनाने के लिए उपाय



 प्रतिकूल ग्रहों को अनुकूल बनाने और आपके बुरे समय को आपके पक्ष में करने का काम करने लगते हैं। 
 जातक को तंत्र और मंत्र की मदद लेनी चाहिए और अपने जीवन को सुखमय बनाने के लिए कुछ खास प्रयास करने चाहिए। ये प्रयास आपके प्रतिकूल ग्रहों को अनुकूल बनाने और आपके बुरे समय को आपके पक्ष में करने का काम करने लगते हैं। 

घर की सुख शांति बनाए रखने के लिए काले कुत्ते को जो भगवान भैरव का वाहन माना जाता हैं उसे सरसों के तेल मे लगी रोटी और उसमे थोडा सा काली उडद की दाल मिलाकर खिलाए तो बहुत अनुकूलता होगी पर यह शनिवार को करना कहीं जयादा लाभदायक हैं।

मंगलवार को बंदरों को चने खिलाना, ऐसा करने से भी घर मे सुख शांति बनी रहती है और सम्पन्नता भी आने लगती है।
जीवन मे कठिनाइयां यदि बहुत बढ़ने लगे तो बिना देरी किए जिस पानी से आप स्नान करते हों उसमें 100 ग्राम काले तिल डालकर स्नान करना शुरु कर दें। महज 21 या 41 दिनों में आपको महसूस होने लगेगा कि सब कुछ ठीक होने लगा है।

जीवन की अनेकों समस्याएं लगातार सामने आती रहती हैं। ऐसे में हताश होने की बजाए किसी भी अमावस्या को किसी गरीब व्यक्ति को भोजन कराने और उसे वस्त्र और दक्षिणा देने से आपके सिर पर लगा पितृदोष दूर होता है और परलोक में बैठे आपके पितृ आपसे प्रसन्न होकर सुखी रहने का आशीर्वाद देने लगते हैं।

हर परिवार के कोई कुल देव या कुलदेवी होते हैं। कुछ लोगों को छोड़ दें तो त्यौहारों के अलावा उन्हें कोई भी याद नहीं करता। कहते हैं किसी भी काम पर जाने से पहले यदि विधिवत उनकी पूजन हो तो। उनका काम सफल होने लगता है और सफलता का मार्ग खुलने लगता है।

वास्तु के अनुसार छत पर और ईशान दिशा मे काम मे न आने वाली वस्तुए नहीं रखना चाहिये क्योंकि ईशान दिशा का बहुत आधिक महत्त्व हैं, पर रखना ही पड़ जाए तो उसे दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए, ऐसा करने से से वाधाए कम होगी और लाभ की अवस्था बनने लगेगी।


यदि आप अपने विस्तर मे इस तरह से शयन करते हैं कि आपका सिर पूर्व दिशा की ओर और आपके पैर पश्चिम दिशा कि ओर रहते हो तो आध्यत्मिक अनुकूलता पाने के लिए यह अनुकूल उपाय होगा। इसी तरह सिर यदि दक्षिण की तरफ और उत्तर दिशा मे पैर कर के सोने से धन लाभ की स्थिति बनती हैं, पर इसके ठीक उलटे सोने से मानसिक चिंताए कहीं अधिक होने लगती हैं।

एक बात और, जब भी कभी घर से बाहर निकलें तो घर की कोई भी महिला एक मुट्ठी काले उडद या राई को उस व्यक्ति के सिर पर तीन बार घुमाकर जमीन पर डाल दे, तो जिस कार्य के लिए जा रहे हैं उसमें सफलता मिलनी सौ फीसदी तय हो जाती है।

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बुधवार, 16 अगस्त 2017

-: रोचक जानकारी :-


 -: रोचक जानकारी :-


1 :- आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर आप अपनी आदतें बदल सकते है और निशचित रूप से आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देगी !

2 :- एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जानें के बाद दूसरा सपना देखने के हौसले को ज़िंदगी कहते है !!!

3 :- वो सपने सच नहीं होते जो सोते वक्त देखें जाते है, सपने वो सच होते है जिनके लिए आप सोना छोड़ देते है…

4 :- सफलता का चिराग परिश्रम से जलता है !!!

5 :- जिनके इरादे बुलंद हो वो सड़कों की नहीं आसमानो की बातें करते है…

6 :- सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं…

7 :- मैं तुरंत नहीं लेकिन निश्चित रूप से जीतूंगा…

8 :- *सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगें लोग…*

9 :- आशावादी हर आपत्तियों में भी अवसर देखता है और निराशावादी बहाने !!!

10 :- आप में शुरू करने की हिम्मत है तो, आप में सफल होने के लिए भी हिम्मत है…

11:- जीवन में वो ही व्यक्ति असफल होते है, जो सोचते है पर करते नहीं ।

12 :- भगवान के भरोसे मत बैठिये क्या पता भगवान आपके भरोसे बैठा हो…

13 :- सफलता का आधार है सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास !!!

14 :- अतीत के ग़ुलाम नहीं बल्कि भविष्य के निर्माता बनो…

15 :- मेहनत इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे…

16 :- कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बढ़ना पड़ता है, लोग तो पीछे तब आते है जब हम कामयाब होने लगते है.

17 :- छोड़ दो किस्मत की लकीरों पे यकीन करना, जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज़ है…

18 :- यदि हार की कोई संभावना ना हो तो जीत का कोई अर्थ नहीं है…

19 :- समस्या का नहीं समाधान का हिस्सा बने…

20 :- जिनको सपने देखना अच्छा लगता है उन्हें रात छोटी लगती है और जिनको सपने पूरा करना अच्छा लगता है उनको दिन छोटा लगता है

21 :- सच्चाई वो दिया है जिसे अगर पहाड़ की चोटी पर भी रख दो तो बेशक रोशनी कम करे पर दिखाई बहुत दूर से भी देता है.

22 :- संघर्ष में आदमी अकेला होता है, सफलता में दुनिया उसके साथ होती है ! जिस जिस पर ये जग हँसा है उसी उसी ने इतिहास रचा है.

23 :- खोये हुये हम खुद है और ढूढ़ते ख़ुदा को है !!!

24 :- कामयाब लोग अपने फैसले से दुनिया बदल देते है और नाकामयाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल लेते है…

25 :- भाग्य को और दूसरों को दोष क्यों देना जब सपने हमारे है तो कोशिशें भी हमारी होनी चाहियें !!!

26 :- यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सिखा देती है !!!

27 :- झूठी शान के परिंदे ही ज्यादा फड़फड़ाते है तरक्की के बाज़ की उड़ान में कभी आवाज़ नहीं होती…

28 :- समस्या का सामना करें, भागे नहीं, तभी उसे सुलझा सकते हैं…

29 :- परिवर्तन से डरना और संघर्ष से कतराना मनुष्य की सबसे बड़ी कायरता है.

30 :- सुंदरता और सरलता की तलाश चाहे हम सारी दुनिया घूम के कर लें लेकिन अगर वो हमारे अंदर नहीं तो फिर सारी दुनिया में कहीं नहीं है.

31 :- ना किसी से ईर्ष्या ना किसी से कोई होड़, मेरी अपनी मंज़िलें मेरी अपनी दौड़…

32 :- ये सोच है हम इंसानों की कि एक अकेला क्या कर सकता है, पर देख ज़रा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है !!!

33 :- लगातार हो रही असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए क्योंकि कभी कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है…

34 :- जल्द मिलने वाली चीजें ज्यादा दिन तक नहीं चलती और जो चीजें ज्यादा दिन तक चलती है वो जल्दी नहीं मिलती है.

35 :- इंसान तब समझदार नहीं होता जब वो बड़ी बड़ी बातें करने लगे, बल्कि समझदार तब होता है जब वो छोटी छोटी बातें समझने लगे…

36 :- सेवा सभी की करना मगर आशा किसी से भी ना रखना क्योंकि सेवा का वास्तविक मूल्य नही दे सकते है,

37 :- मुश्किल वक्त का सबसे बड़ा सहारा है “उम्मीद” !! जो एक प्यारी सी मुस्कान दे कर कानों में धीरे से कहती है “सब अच्छा होगा” !!

38 :- दुनिया में कोई काम असंभव नहीं, बस हौसला और मेहनत की जरुरत है !!!

39 :- वक्त आपका है चाहे तो सोना बना लो और चाहे तो सोने में गुजार दो, दुनिया आपके उदाहरण से बदलेगी आपकी राय से नहीं…

40 :- बदलाव लाने के लिए स्वयं को बदले…

41 :- सफल व्यक्ति लोगों को सफल होते देखना चाहते है, जबकि असफल व्यक्ति लोगों को असफल होते देखना चाहते है…

42 :- घड़ी सुधारने वाले मिल जाते है लेकिन समय खुद सुधारना पड़ता है !!!

43 :- दुनिया में सब चीज मिल जाती है केवल अपनी ग़लती नहीं मिलती…

44 :- क्रोध और आंधी दोनों बराबर… शांत होने के बाद ही पता चलता है की कितना नुकसान हुवा…

45 :- चाँद पे निशान लगाओ, अगर आप चुके तो सितारों पे तो जररू लगेगा !!!
46 :- गरीबी और समृद्धि दोनों विचार का परिणाम है…

47 :- पसंदीदा कार्य हमेशा सफलता, शांति और आनंद ही देता है…

48 :- जब हौसला बना ही लिया ऊँची उड़ान का तो कद नापना बेकार है आसमान का…

49 :- अपनी कल्पना को जीवन का मार्गदर्शक बनाए अपने अतीत को नहीं…

50 :- समय न लागओ तय करने में आपको क्या करना है, वरना समय तय कर लेगा की आपका क्या करना है.

51 :- अगर तुम उस वक्त मुस्कुरा सकते हो जब तुम पूरी तरह टूट चुके हो तो यकीन कर लो कि दुनिया में तुम्हें कभी कोई तोड़ नहीं सकता !!!

52 :- कल्पना के बाद उस पर अमल ज़रुर करना चाहिए। सीढ़ियों को देखते रहना ही पर्याप्त नहीं है, उन पर चढ़ना भी ज़रुरी है।

53 :- हमें जीवन में भले ही हार का सामना करना पड़ जाये पर जीवन से कभी नहीं हारना चाहिए…

54 :- सीढ़ियां उन्हें मुबारक हो जिन्हें छत तक जाना है, मेरी मंज़िल तो आसमान है रास्ता मुझे खुद बनाना है !!!

55 :- हजारों मील के सफ़र की शुरुआत एक छोटे कदम से होती है…

56 :- मनुष्य वही श्रेष्ठ माना जाएगा जो कठिनाई में अपनी राह निकालता है ।

57 :- पुरुषार्थ से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है…

58 :- प्रतिबद्ध मन को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, पर अंत में उसे अपने परिश्रम का फल मिलेगा ।

59 :- असंभव समझे जाने वाला कार्य संभव करके दिखाये, उसे ही प्रतिभा कहते हैं ।

60 :- आने वाले कल को सुधारने के लिए बीते हुए कल से शिक्षा लीजिए…

61 :- जो हमेशा कहे मेरे पास समय नहीं है, असल में वह व्यस्त नहीं बल्कि अस्त-व्यस्त है ।

62 :- कठिनाइयाँ मनुष्य के पुरुषार्थ को जगाने आती हैं…

63 :- क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है ।

64 :- आपका भविष्य उससे बनता है जो आप आज करते हैं, उससे नहीं जो आप कल करेंगे…

65 :- बन सहारा बे सहारों के लिए बन किनारा बे किनारों के लिए, जो जिये अपने लिए तो क्या जिये जी सको तो जियो हजारों के लिए ।

66 :- चाहे हजार बार नाकामयाबी हो, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ लगे रहोगे तो अवश्य सफलता तुम्हारी है…

67 :- खुद की तरक्की में इतना समय लगा दो, कि किसी और की बुराई का वक्त ही ना मिले !!!

68 :- प्रगति बदलाव के बिना असंभव है, और जो अपनी सोच नहीं बदल सकते वो कुछ नहीं बदल सकते…

69 :- खुशी के लिए काम करोगे तो ख़ुशी नहीं मिलेगी, लेकिन खुश होकर काम करोगे, तो ख़ुशी और सफलता दोनों ही मिलेगी ।

70 :- पराजय तब नहीं होती जब आप गिर जाते हैं, पराजय तब होती है जब आप उठने से इनकार कर देते हैं ।
71 :- मन बुद्ध जैसा और दिल बच्चों जैसा होना चाहिए
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मंगलवार, 15 अगस्त 2017

जन्माष्टमी पर करें ये खास उपाय


धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन यदि कुछ खास उपाय किए जाएं तो न केवल धन प्राप्ति के प्रबल योग बनने लगेंगे बल्कि सभी मनोकामनाएं भी पूरी होंगी।

इस दिन अल सुबह दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करें। यह उपाय हर शुक्रवार को करें। इस उपाय को करने वाले जातक से मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं। यही नहीं इस उपाय को करने से सभी मस्त मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है।

15 अगस्त को जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जी के मंदिर में जटा वाला नारियल और कम से कम 11 बादाम चढ़ाएं । ऐसी मान्यता है कि जो जातक जन्माष्टमी से शुरूआत करके कृष्ण मंदिर में लगातार सत्ताइस दिन तक जटा वाला नारियल और बादाम चढ़ाता है उसके सभी कार्य सिद्ध होते है, उसको जीवन में किसी भी चीज़ का आभाव नहीं रहता है।

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई, साबुदाने अथवा चावल की खीर यथाशक्ति मेवे डालकर बनाकर उसका भोग लगाएं उसमें चीनी की जगह मिश्री डालें एवं तुलसी के पत्ते भी अवश्य डालें। इससे भगवान द्वारकाधीश की कृपा से ऐश्वर्य प्राप्ति के योग बनते है।


जन्माष्टमी की रात को 12 बजे जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था उस समय भगवान श्री कृष्ण का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करने से भगवान द्वारकाधीश की कृपा से जीवन में स्थाई रूप से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

जन्माष्टमी के दिन प्रात: स्नान आदि करने के बाद किसी भी राधा-कृष्ण मंदिर में जाकर प्रभु श्रीकृष्ण जी को पीले फूलों की माला अर्पण करें। इससे आर्थिक संकट दूर होने लगते है धन लाभ के योग प्रबल होते है।


भगवान श्रीकृष्ण को पीतांबर धारी भी कहलाते हैं, पीतांबर धारी का अर्थ है जो पीले रंग के वस्त्र पहनने धारण करता हो। इसलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन किसी मंदिर में भगवान के पीले रंग के कपड़े, पीले फल, पीला अनाज व पीली मिठाई दान करने से भगवान श्रीकृष्ण व माता लक्ष्मी दोनों प्रसन्न रहते हैं, उस जातक को जीवन में धन और यश की कोई भी कमी नहीं रहती है।

कई बार काफी कोशिशों के बाद व्यापार, नौकरी में मनवाँछित सफलता नहीं मिल पाती है इसलिए जन्माष्टमी के दिन अपने घर में सात कन्याओं को घर बुलाकर उन्हें खीर या सफेद मिठाई खिलाकर कोई भी उपहार दें । ऐसा उसके बाद पांच शुक्रवार तक लगातार करें। इसे करने से माँ लक्ष्मी की कृपा से व्यापार, कारोबार में मनवाँछित सफलता मिलती है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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सोमवार, 14 अगस्त 2017

जन्माष्टमी पर इस विधि से करें पूजा,शुभ मुहूर्त

कल (15 अगस्त, मंगलवार) श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है व विशेष पूजा भी की जाती है। जो भी भक्त सच्चे मन से व्रत रखता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह मोह-माया के बंधन से मुक्त हो जाता है। यदि यह व्रत किसी विशेष कामना के लिए किया जाए तो वह कामना भी शीघ्र ही पूरी हो जाती है।

जन्माष्टमी पर सर्वार्थसिद्धि योग
उज्जैन के पंचांगकर्ता एवं ज्योतिषाचार्य पं.श्यामनारायण व्यास के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी पर सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। जो सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर शुरू होने के साथ रात 2 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। मंगलवार को सर्वार्थसिद्धि योग होने से इस दिन खरीदारी करना शुभ रहेगा। संभवत: यह पहला मौका होगा जब लोग कृष्ण जन्म उत्सव पर पूजन-अर्चन के साथ खरीदारी भी करेंगे। कृतिका नक्षत्र व मंगल के संयोग में बाजार से भूमि, गहने, बर्तन और इलेक्ट्रानिक आयटम्स की खरीदी श्रेष्ठ होगी।

14 को भी मनाई जाएगी जन्माष्टमी
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं.आनंदशंकर व्यास के अनुसार, शिव को मानने वाले शैव, विष्णु यानी कृष्ण को मानने वाले वैष्णव कहलाते हैं। शैव मत वाले एक दिन पहले रात में पर्व मनाते हैं जबकि वैष्णव उदियात तिथि के बाद। इसलिए दोनों के पर्व दो दिन तक मनते हैं। शैव मत अनादिकाल से है, जबकि वैष्णव मत 500 वर्ष से। शैव मत अनुसार 14 अगस्त की रात अष्टमी तिथि लगने पर कृष्ण जन्म मनेगा। वहीं वैष्णव मंदिरों में 15 अगस्त की रात कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।



इस विधि से करें श्रीकृष्ण की पूजा
जन्माष्टमी की सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि करने के बाद सभी देवताओं को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके व्रत का संकल्प लें (जैसा व्रत आप कर सकते हैं वैसा संकल्प लें यदि आप फलाहार कर व्रत करना चाहते हैं तो वैसा संकल्प लें और यदि एक समय भोजन कर व्रत करना चाहते हैं तो वैसा संकल्प लें)।
इसके बाद माता देवकी और भगवान श्रीकृष्ण की सोने, चांदी, तांबा, पीतल अथवा मिट्टी की (यथाशक्ति) मूर्ति या चित्र पालने में स्थापित करें। भगवान श्रीकृष्ण को नए वस्त्र अर्पित करें। पालने को सजाएं। इसके बाद सोलह उपचारों से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी आदि के नाम भी बोलें। अंत में माता देवकी को अर्घ्य दें। भगवान श्रीकृष्ण को फूल अर्पित करें।
रात में 12 बजे के बाद श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं। पालने को झूला करें। पंचामृत में तुलसी डालकर व माखन मिश्री का भोग लगाएं। आरती करें और रात्रि में शेष समय स्तोत्र, भगवद्गीता का पाठ करें। दूसरे दिन पुन: स्नान कर जिस तिथि एवं नक्षत्र में व्रत किया हो, उसकी समाप्ति पर व्रत पूर्ण करें।

शुभ मुहूर्त
सुबह 10.30 से दोपहर 12 बजे तक- लाभ
दोपहर 12 से 01.30 बजे तक- अमृत
दोपहर 03 से शाम 04.03 बजे तक- शुभ
शाम 07.30 से रात 09 बजे तक- लाभ
मध्य रात्रि पूजा- 12:10 से 12:40 बजे तक



भगवान श्रीकृष्ण की आरती
आरती कुंजविहारी की। श्रीगिरधर कृष्णमुरारी की।।
गले में बैजंतीमाला, बजावै मुरली मधुर वाला।
श्रवन में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। श्री गिरधर ..
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली,
लतन में ठाढ़े बनमाली।
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सो झलक,
ललित छवि स्यामा प्यारी की। श्री गिरधर ..
कनकमय मोर-मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसे,
गगन सो सुमन राशि बरसै,
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालनी संग,
अतुल रति गोपकुमारी की। श्री गिरधर ..
जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा,
स्मरन ते होत मोह-भंगा,
बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अध कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की। श्री गिरधर ..
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृन्दावन बेनू,
चहूं दिसि गोपी ग्वाल धेनू,
हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव-फंद,
टेर सुनु दीन भिखारी की। श्री गिरधर ..
आरती कुंजबिहारी की। श्री गिरधर कृष्णमुरारी की।



अच्युताष्टक
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे ।१।
अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम्
इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दनं संदधे ।२।
विष्णवे जिष्णवे शङ्खिने चक्रिणे रुक्मिनीरागिणे जानकीजानये
वल्लवीवल्लभायाऽर्चितायात्मने कंसविध्वंसिने वंशिने ते नम: ।३।
कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे
अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक ।४।
राक्षसक्षोभित: सीतया शोभितो दण्डकारण्यभूपुण्यताकारण:
लक्ष्मणेनान्वितो वानरै: सेवितोऽगस्त्यसंपूजितो राघव: पातु माम् ।५।
धेनुकारिष्टकोऽनिष्टकृद्द्वेषिणां केशिहा कंसहृद्वंशिकावादक:
पूतनाकोपक: सूरजाखेलनो बालगोपालक: पातु माम् सर्वदा ।६।
विद्युदुद्धयोतवानप्रस्फुरद्वाससं प्रावृडम्भोदवत्प्रोल्लसद्विग्रहम्
वन्यया मालया शोभितोर:स्थलं लोहितांघ्रिद्वयं वारिजाक्षं भजे ।७।
कुञ्चितै: कुन्तलैभ्र्राजमानाननं रत्नमौलिं लसत् कुण्डलं गण्डयो:
हारकेयूरकं कङ्कणप्रोज्ज्वलं किङ्किणीमञ्जुलं श्यामलं तं भजे ।८।
अच्युतस्याष्टकं य: पठेदिष्टदं प्रेमत: प्रत्यहं पुरुष: सस्पृहम्
वृत्तत: सुंदरं कर्तृ विश्वंभरं तस्य वश्यो हरिर्जायते सत्वरम् ।९।



श्रीकृष्ण स्तुति
नमो विश्वस्वरूपाय विश्वस्थित्यन्तहेतवे।
विश्वेश्वराय विश्वाय गोविन्दाय नमो नम:॥१॥
नमो विज्ञानरूपाय परमानन्दरूपिणे।
कृष्णाय गोपीनाथाय गोविन्दाय नमो नम:॥२॥
नम: कमलनेत्राय नम: कमलमालिने।
नम: कमलनाभाय कमलापतये नम:॥३॥
बर्हापीडाभिरामाय रामायाकुण्ठमेधसे।
रमामानसहंसाय गोविन्दाय नमो नम:॥४॥
कंसवशविनाशाय केशिचाणूरघातिने।
कालिन्दीकूललीलाय लोलकुण्डलधारिणे॥५॥
वृषभध्वज-वन्द्याय पार्थसारथये नम:।
वेणुवादनशीलाय गोपालायाहिमर्दिने॥६॥
बल्लवीवदनाम्भोजमालिने नृत्यशालिने।
नम: प्रणतपालाय श्रीकृष्णाय नमो नम:॥७॥
नम: पापप्रणाशाय गोवर्धनधराय च।
पूतनाजीवितान्ताय तृणावर्तासुहारिणे॥८॥
निष्कलाय विमोहाय शुद्धायाशुद्धवैरिणे।
अद्वितीयाय महते श्रीकृष्णाय नमो नम:॥९॥
प्रसीद परमानन्द प्रसीद परमेश्वर।
आधि-व्याधि-भुजंगेन दष्ट मामुद्धर प्रभो॥१०॥
श्रीकृष्ण रुक्मिणीकान्त गोपीजनमनोहर।
संसारसागरे मग्नं मामुद्धर जगद्गुरो॥११॥
केशव क्लेशहरण नारायण जनार्दन।
गोविन्द परमानन्द मां समुद्धर माधव॥१२॥






मधुराष्टकं
मधुराष्टकंअधरम मधुरम वदनम मधुरमनयनम मधुरम हसितम मधुरम।
हृदयम मधुरम् गमनम् मधुरम्, मधुराधिपतेर अखिलम मधुरम॥१॥
वचनं मधुरं, चरितं मधुरं, वसनं मधुरं, वलितं मधुरम् ।
चलितं मधुरं, भ्रमितं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥२॥
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुर:, पाणिर्मधुर:, पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं, सख्यं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥३॥
गीतं मधुरं, पीतं मधुरं, भुक्तं मधुरं, सुप्तं मधुरम् ।
रूपं मधुरं, तिलकं मधुरं, मधुरधिपतेरखिलं मधुरम् ॥४॥
करणं मधुरं, तरणं मधुरं, हरणं मधुरं, रमणं मधुरम् ।
वमितं मधुरं, शमितं मधुरं, मधुरधिपतेरखिलं मधुरम् ॥५॥
गुञ्जा मधुरा, माला मधुरा, यमुना मधुरा, वीची मधुरा ।
सलिलं मधुरं, कमलं मधुरं, मधुरधिपतेरखिलं मधुरम् ॥६॥
गोपी मधुरा, लीला मधुरा, युक्तं मधुरं, मुक्तं मधुरम् ।
दृष्टं मधुरं, शिष्टं मधुरं, मधुरधिपतेरखिलं मधुरम् ॥७॥
गोपा मधुरा, गावो मधुरा, यष्टिर्मधुरा, सृष्टिर्मधुरा।
दलितं मधुरं, फलितं मधुरं, मधुरधिपतेरखिलं मधुरम् ॥८॥॥
इति श्रीमद्वल्लभाचार्यविरचितं मधुराष्टकं सम्पूर्णम् ॥
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पारंपरिक हिन्दू विवाह रीति-रिवाजों


आधुनिक विश्व में विवाह अब अनगिनत विकल्पों और समझौतों का विषय बन गया है. लड़का और लड़की एक-दूसरे को पसंद करते हैं और स्वेच्छापूर्वक संविदा में पड़ते हैं. उनके मध्य हुए समझौते की इति विवाह-विच्छेद या तलाक में होती है. लेकिन पारंपरिक हिन्दू विवाह पद्धति में विकल्पों या संविदा के लिए कोई स्थान नहीं है. यह दो परिवारों के बीच होनेवाला एक संबंध था जिसे लड़के और लड़की को स्वीकार करना होता था. इसके घटते ही उन दोनों का बचपना सहसा समाप्त हो जाता और वे वयस्क मान लिए जाते. इसमें तलाक के बारे में तो कोई विचार ही नहीं किया गया था.

बहुत से नवयुवक और नवयुवतियां पारंपरिक हिन्दू विवाह पद्धति के निहितार्थों और इसके महत्व को समझना चाहते हैं. आमतौर पर वे इसके बहुत से रीति-रिवाजों को पसंद नहीं करते क्योंकि इनका गठन उस काल में हुआ था जब हमारा सामाजिक ढांचा बहुत अलग किस्म का था. उन दिनों परिवार बहुत बड़े और संयुक्त होते थे. वह पुरुषप्रधान समाज था जिसमें स्त्रियाँ सदैव आश्रितवर्ग में ही गिनी जाती थीं. आदमी चाहे तो एक से अधिक विवाह कर सकता था पर स्त्रियों के लिए तो ऐसा सोचना भी पाप था. लेकिन इसके बाद भी पुरुषों पर कुछ बंदिशें थीं और वे पूर्णतः स्वतन्त्र नहीं थे: वे अपने परिवार और जातिवर्ग के नियमों के अधीन रहते थे. विवाह पद्धति के संस्कार अत्यंत प्रतीकात्मक थे और उनमें कृषि आधारित जीवनप्रणाली के अनेक बिंब थे क्योंकि कृषि अधिकांश भारतीयों की आजीविका का मुख्य साधन था. उदाहरण के लिए, पुरुष को कृषक और स्त्री को उसकी भूमि कहा जाता था. उनके संबंध से उत्पन्न होनेवाला शिशु उपज की श्रेणी में आता था. आधुनिक काल की महिलाओं को ऐसे विचार बहुत आपत्तिजनक लग सकते हैं.

हमारे सामने आज एक समस्या यह भी है कि हिन्दू विवाह का अध्ययन करते समय मानकों का अभाव दिखता है. प्रांतीयता और जातीयता के कारण उनमें बहुत सी विविधताएँ घर कर गयी हैं. राजपूत विवाह और तमिल विवाह पद्धति में बहुत अंतर दिखता है. मलयाली हिन्दू विवाह अब इतना सरल-सहज हो गया है कि इसमें वर और वधु के परिजनों की उपस्थिति में वर द्वारा उसकी भावी पत्नी के गले में एक धागा डाल देना ही पर्याप्त है. इस संस्कार में एक मिनट भी नहीं लगता, वहीं दूसरी ओर शाही मारवाड़ी विवाह को संपन्न होने में कई दिन लग जाते हैं. इसी के साथ ही हर भारतीय चीज़ में बॉलीवुड का तड़का लग जाने के कारण ऐसे उत्तर-आधुनिक विवाह भी देखने में आ रहे हैं जिनमें वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शैम्पेन की चुस्कियां ली जातीं हैं पर ज्यादातर लोगों को यह नागवार गुज़रता है.

परंपरागत रूप से, विवाह का आयोजन चातुर्मास अथवा वर्षाकाल की समाप्ति के बाद होता है. इसकी शुरुआत तुलसी विवाह से होती है जिसमें विष्णुरूपी गन्ना का विवाह लक्ष्मीरूपी तुलसी के पौधे के साथ किया जाता था. अभी भी यह पर्व दीपावली के लगभग एक पखवाड़े के बाद मनाया जाता है.

विवाह के रीति-रिवाज़ सगाई से शुरू हो जाते हैं. परंपरागत रूप से बहुत से विवाह संबंध वर और वधु के परिवार द्वारा तय किये जाते थे और लड़का-लड़की एक-दूसरे को प्रायः विवाह के दिन तक देख भी नहीं पाते थे. सगाई की यह रीति किसी मंदिर में आयोजित होती थी और इसमें दोनों पक्षों के बीच उपहारों का आदान-प्रदान होता था. आजकल पश्चिमी प्रभाव के कारण लोग दोस्तों की मौजूदगी में अंगूठियों की अदलाबदली करके ही सगाई कर लेते हैं.

सगाई और विवाह के बीच वर और वधु दोनों को उनके परिजन और मित्रादि भोजन आदि के लिए आमंत्रित करने लगते हैं क्योंकि बहुत जल्द ही वे दोनों एकल जीवन से मुक्त हो जायेंगे. यह मुख्यतः उत्तर भारत में संगीत की रस्म में होता था जो बॉलीवुड की कृपा से अब पूरे भारत में होने लगा है. संगीत की रस्म में परिवार की महिलायें नाचती-गाती हैं. यह सामान्यतः वधु के घर में होता है. लड़के को इसमें नहीं बुलाया जाता पर आजकल लड़के की माँ और बहनें वगैरह इसमें शामिल होने लगीं हैं.

विवाह की रस्में हल्दी-उबटन और मेहंदी से शुरू होती हैं. इसमें वर और वधु को विवाह के लिए आकर्षक निखार दिया जाता है. दोनों को हल्दी व चन्दन आदि का लेप लगाकर घर की महिलायें सुगन्धित जल से स्नान कराती हैं. इसका उद्देश्य यह है कि वे दोनों विवाह के दिन सबसे अलग व सुन्दर दिखें. इसके साथ ही इसमें विवाहोपरांत कायिक इच्छाओं की पूर्ति हो जाने की अभिस्वीकृति भी मिल जाती है. भारत में मेहंदी का आगमन अरब संपर्क से हुआ है. इसके पहले बहुसंख्यक हिन्दू आलता लगाकर अपने हाथ और पैरों को सुन्दर लाल रंग से रंगते थे. आजकल तरह-तरह की मेहंदी के प्रयोग से हाथों-पैरों पर अलंकरण किया जाने लगा है. वर और वधु के परिवार की महिलायें भी अपने को सजाने-संवारने में पीछे नहीं रहतीं.

वर और वधु को तैयार करने के बाद उनसे कहा जाता है कि वे अपने-अपने पितरों-पुरखों का आह्वान करें. यह रस्म विशेषकर वधु के लिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाह के बाद उसे अपने भावी पति के गोत्र में सम्मिलित होना है और अपने कुल की रीतियों को तिलांजलि देनी है.

सभी हिन्दू रीति-रिवाजों में मेहमाननवाज़ी पर बहुत जोर दिया जाता है. मेहमानों का यथोचित स्वागत किया जाता है, उनके चरण छूकर उन्हें नेग या उपहार दिए जाते हैं, और आदरपूर्वक उन्हें विदाई दी जाती है. पूजा के समय देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है, और विसर्जन के पहले भी उनकी पूजा होती है. उनसे निवेदन किया जाता है कि वे अगले वर्ष या अगले सुअवसर पर भी पधारें. विवाह के समय वर अतिथि होता है और हिन्दू परंपरा में अतिथियों को देवता का दर्जा दिया गया है. इसलिए उसका आदरसत्कार देवतातुल्य जानकार किया जाता है और उसे सबसे महत्वपूर्ण उपहार अर्थात वधु सौंप दी जाती है.

भारत के विभिन्न प्रदेशों में विवाह का समय अलग-अलग होता है. दक्षिण में विवाह की रस्में सूर्योदय के निकट पूरी की जाती हैं जबकि पूर्व में यह सब शाम के समय होता है. कागज़ की पोंगरी जैसी निमंत्रण पत्रिका वरपक्ष के घर भेजने के साथ ही विवाह की रस्मों की शुरुआत में तेजी आ जाती है. यह पत्रिका आमतौर पर वधु का भाई लेकर जाता है. ओडिशा में वधु के भाई को वर-धारा कहते हैं – वह, जो वर को घर तक लेकर आता है.

आमंत्रित अतिथिगण और वर का आगमन बारात के साथ होता है. राजपूत दूल्हे अपने साथ तलवार रखते हैं जो कभी-कभी उसकी भावी पत्नी द्वारा उसके लिए चुनी गयी होती है. इससे दो बातों का पता चलता है: यह कि पुरुष तलवार रखने के योग्य है और दूसरी यह कि वह अपनी स्त्री की रक्षा भी कर सकता है. उत्तर भारत में दूल्हे घोड़ी पर सवार होते हैं और उनका चेहरा सेहरे से ढंका होता है ताकि कोई उनपर बुरी नज़र न डाल सके. घोड़े के स्थान पर घोड़ी का प्रयोग यह दर्शाता है कि वह अपनी पत्नी को अपने अधीन रखना चाहता है. यह विचार भी आधुनिक महिलाओं को आपत्तिजनक लग सकता है. भारत के कई स्थानों में दूल्हे के साथियों को जमकर पीने और नाचने का मौका मिल जाता है. कई बाराती बड़े हुडदंगी होते हैं. वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती को बिहाने चले शिव की बारात के सदस्यों की तरह होते हैं. पीना और नाचना एकाकी जीवन की समाप्ति के अंतिम दिनों से पहले उड़ानेवाला मौजमजा है जो जल्द ही पत्नी और घर-गृहस्थी के खूंटे से बाँध दिया जाएगा और फिर उससे यह अपेक्षा नहीं की जायेगी कि वह चाहकर भी कभी मर्यादा तोड़ सके.

दूल्हे के ड्योढी पर आनेपर ससुर और सास उसे माला पहनाकर पूजते हैं. उसका मुंह मीठा किया जाता है, चरण पखारे जाते हैं. कई बार ससुर या उसका श्याला उसे अपनी बांहों में भरकर मंडप या स्टेज तक लेकर जाते हैं. इस बीच पंडित यज्ञवेदी पर अग्नि बढ़ाता है. पूरी प्रथा के दौरान अग्नि ही समस्त देवताओं का प्रतिनिधित्व करती है. वह स्त्री और पुरुष के सुमेल की साक्षी है.
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शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

काली हल्दी के काफी उपयोगी और लाभकारक टोटके


काली हल्दी के काफी उपयोगी और लाभकारक टोटके
दुनिया में कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिनको अपनाने से आपकी जिदंगी की दशा और दिशा दोनों बदल सकती है। ऐसी ही एक है काली हल्दी। तंत्र शास्त्र में इसे अचूक हथियार माना गया है। कहते हैं कि काली हल्दीी के टोटकों का असर कभी खाली नहीं जाता। काली हल्दी बड़े काम की है। वैसे तो काली हल्दी का मिल पाना थोड़ा मुश्किल है, किन्तु फिर भी यह पंसारी की दुकानों में मिल जाती है। यह हल्दी काफी उपयोगी और लाभकारक है। कुछ खास उपयोग हैं इसके-


यदि किसी के पास धन आता तो बहुत किन्तु टिकता नहीं है, उन्हे यह उपाय अवश्य करना चाहिए। शुक्लपक्ष के प्रथम शुक्रवार को चांदी की डिब्बी में काली हल्दी, नागकेशर व सिन्दूर को साथ में रखकर मां लक्ष्मी के चरणों से स्पर्श करवा कर धन रखने के स्थान पर रख दें। यह उपाय करने से धन रूकने लगेगा।

यदि आपके व्यवसाय में निरन्तर गिरावट आ रही है, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरूवार को पीले कपड़े में काली हल्दी, 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र, चांदी का सिक्का व 11 अभिमंत्रित धनदायक कौड़ियां बांधकर 108 बार ऊँ नमो भगवते वासुदेव नमः का जाप कर धन रखने के स्थान पर रखने से व्यवसाय में प्रगतिशीलता आ जाती है।




यदि परिवार में कोई व्यक्ति निरन्तर अस्वस्थ्य रहता है, तो प्रथम गुरूवार को आटे के दो पेड़े बनाकर उसमें गीली चीने की दाल के साथ गुड़ और थोड़ी सी पिसी काली हल्दी को दबाकर रोगी व्यक्ति के उपर से 7 बार उतार कर गाय को खिला दें। यह उपाय लगातार 3 गुरूवार करने से आश्चर्यजनक लाभ मिलेगा।

यदि आपका व्यवसाय मशीनों से सम्बन्धित है, और आये दिन कोई मॅहगी मशीन आपकी खराब हो जाती है, तो आप काली हल्दी को पीसकर केशर व गंगा जल मिलाकर प्रथम बुधवार को उस मशीन पर स्वास्तिक बना दें। यह उपाय करने से मशीन जल्दी खराब नहीं होगी।

दीपावली के दिन पीले वस्त्रों में काली हल्दी के साथ एक चांदी का सिक्का रखकर धन रखने के स्थान पर रख देने से वर्ष भर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।




यदि कोई व्यक्ति मिर्गी या पागलपन से पीडि़त हो तो किसी अच्छे मूहूर्त में काली हल्दी को कटोरी में रखकर लोबान की धूप दिखाकर शुद्ध करें। तत्पश्चात एक टुकड़ें में छेद कर धागे की मद्द से उसके गले में पहना दें और नियमित रूप से कटोरी की थोड़ी सी हल्दी का चूर्ण ताजे पानी से सेंवन कराते रहें। अवश्य लाभ मिलेगा।

यदि किसी व्यक्ति या बच्चे को नजर लग गयी है, तो काले कपड़े में हल्दी को बांधकर 7 बार उपर से उतार कर बहते हुये जल में प्रवाहित कर दें।

किसी की जन्मपत्रिका में गुरू और शनि पीडि़त है, तो वह जातक यह उपाय करें- शुक्लपक्ष के प्रथम गुरूवार से नियमित रूप से काली हल्दी पीसकर तिलक लगाने से ये दोनों ग्रह शुभ फल देने लगेंगे।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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बुधवार, 9 अगस्त 2017

मोर पंख चमत्कारिक असर



हिन्दू संस्कृति के अंतर्गत प्रचलित मोर पंख का अधिक महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण के मस्तक पर सजने वाला मोर पंख माँ लक्ष्मी को भी अतिप्रिय है। भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का वाहन भी मोर है। प्राचीन ऋषि-मुनि मोर पंख की कलम से साहित्य एवं ग्रंथों की रचना करते थे। मोर पंख से बना पंखा या झाडू कई मंदिरों में देखी जा सकती है।

दरअसल मोर पंख में एक विशेष प्रकार का विद्युत चुंबकीय गुण होता है, जो नकारात्मक उर्जा को दूर रखकर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है। इसलिए कई इलाकों में आज भी बच्चों या बड़ों की नजर उतारने के लिए मोर पंख से बनी झाडू को सिर के आसपास क्लॉक वाइज, एंटी क्लॉक वाइज घुमाया जाता है। ग्रामीण भाषा में नजर उतारने की इस प्रक्रिया को झाड़ फूंक जरूर कहा जाता है, लेकिन यह अपने चुंबकीय गुण के कारण संबंधित व्यक्ति की नकारात्मक उर्जा को दूर करने का काम करता है।

मोर पंख वास्तु दोष दूर करने के साथ ही ग्रहों के दुष्प्रभाव भी कम करता है। घर में मोर पंख होना शुभ माना जाता है। कई लोगों के घरों के पूजा स्थान में मोर पंख रखा मिल जाएगा और जिन घरों में कृष्ण की पूजा होती है वहां तो मोर पंख मिल ही जाएगा।

मोर पंख चमत्कारिक असर दिखाता है
घर, दुकान या व्यापारिक प्रतिष्ठान का वास्तु दोष दूर करने में मोर पंख चमत्कारिक असर दिखाता है। यदि वास्तु दोष है और तोड़फोड़ करके उसे ठीक करना संभव नहीं है तो मोर पंख दोष दूर कर सकता है। आपको बस इतना करना है कि घर या दुकान के मुख्य द्वार पर तीन मोर पंख लगा दीजिए। ध्यान रखे द्वार पर यह ऐसी जगह लगाया जाए, जिसके नीचे से परिवार के सदस्य होकर गुजरे। इससे वास्तु दोष दूर होगा और संपत्ति में वृद्धि होने लगेगी।

सात मोर पंख लगाएं
यदि किसी परिवार में पति-पत्नी के बीच बिलकुल न बनती हो। बात-बात पर झगड़ा होता हो। मनमुटाव बना रहता हो तो बेडरूम में उत्तरी दीवार पर सात मोर पंख लगाएं। इसे बेडरूम में ऐसी जगह भी लगाया जा सकता है जहां इस पर सफेद बल्ब की रोशनी पड़ती हो। इससे पति-पत्नी में प्रेम बढ़ेगा और उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल होगा।

कालसर्प दोष दूर करने की भी शक्ति
मोर पंख कालसर्प दोष दूर करने की भी शक्ति रखता है। जिस व्यक्ति को कालसर्प दोष है वह सात मोर पंख सोमवार के दिन अपने तकिए की खोल में रख दे। प्रतिदिन उसी तकिए पर सोए। कालसर्प दोष शांत होगा और जीवन में तरक्की के रास्ते खुलेंगे।

मोर पंख लक्ष्मी का प्रतीक
अगर छोटा बच्चा जिद्दी है तो उसे प्रतिदिन मोर पंख से हवा देने पर उसकी जिद शांत होगी। बार-बार बच्चे को नजर लग जाती है तो भी यह प्रयोग करें, बच्चा बुरी नजर से बचा रहेगा। मोर पंख को लक्ष्मी का प्रतीक भी माना गया है। अपने घर के पूजा स्थान में लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा के पास एक मोर पंख रखें। प्रतिदिन पूजा के समय मोर पंख का स्पर्श कर देवी लक्ष्मी का ध्यान करें। जल्द ही धन-संपत्ति आगमन का मार्ग खुलने लगेगा।

नवग्रहों की शांति के लिए मोर पंख का प्रयोग
नवग्रहों की शांति के लिए मोर पंख का प्रयोग किया जाता है। घर के उत्तर या उत्तर-पूर्वी कोने में मोर पंख होने से नवग्रह की पीड़ा कम होती है।मोर पंख घर में होने से जहरीले जानवर, सर्प, छिपकली, गिरगिट, जहरीले कीड़े आदि नहीं आते।
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मंगलवार, 8 अगस्त 2017

जानिए आदतों से जुड़ी जानकारी



हमारी आदतों का संबंध हमारे भविष्य और हमें प्राप्त होने वाले सुख-दुख से भी है। आदतें बता देती हैं कि हमारी सोच कैसी है और हमारा स्वभाव कैसा है। इसीलिए आदतों को व्यक्तित्व का दर्पण भी कहा जाता है। ग्रंथों में कुछ सामान्य आदतें ऐसी बताई गई हैं जो शुभ हैं और कुछ सामान्य आदतें अशुभ भी हैं। यहां जानिए आदतों से जुड़ी जानकारी, हमें किस आदत को बदलना चाहिए और किस आदत को बनाए रखना चाहिए…


1. बाथरूम को गंदा ही छोड़ देना
यदि कोई व्यक्ति नहाने के बाद बाथरूम में अपने कपडे इधर-उधर फेंक देता है तो यह अच्छी आदत नहीं है। साथ ही, यदि कोई व्यक्ति बाथरूम को गंदा रखता है और नहाने के बाद उसकी सफाई नहीं करता है तो चंद्र के कारण अशुभ फल प्राप्त होते हैं। अत: नहाने के बाद बाथरूम को गंदा न छोड़े, बल्कि गंदगी को भी साफ कर देना चाहिए और फर्श पर फैले पानी को भी निकाल देना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने पर शरीर का तेज बढ़ता है और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

2. पैर घसीटकर चलना
यदि कोई व्यक्ति पैर घसीटकर चलता है तो ये आदत अच्छी नहीं मानी गई है। इस आदत के कारण राहु से अशुभ फल मिलते हैं।


3. जूंठी थाली छोड़कर उठ जाना
खाना खाने के बाद जूंठी थाली या बर्तन छोड़कर उठ जाना भी अच्छी आदत नहीं है। ऐसा काम करने वाले लोगों को स्थाई सफलता प्राप्त नहीं हो पाती है। ये लोग मेहनत अधिक कर लें, तब भी संतोषजनक फल प्राप्त नहीं कर पाते हैं। यदि खाना खाने के बाद जूंठे बर्तनों को सही स्थान पर रखा जाए तो शनि और चंद्र के दोष दूर होते हैं। साथ ही, लक्ष्मी की प्रसन्नता मिलती हैं।

4. घर लौटकर हाथ-मुंह धोना
हम जब भी कहीं बाहर से घर आते तो मुंह और पैरों को शीतल जल से धो लेना चाहिए। ऐसा करने पर हमारी थकान भी दूर होती है और चिड़चिड़ापन भी कम होता है। दिमाग को शांति मिलती है।


5. घर के मंदिर को साफ रखना
यदि हम घर के मंदिर को एकदम साफ और व्यस्थित रखते हैं तो यह शुभ आदत है। ऐसा करने पर सभी देवी-देवताओं के साथ ही सभी नौ ग्रह शुभ फल प्रदान करते हैं। देवी लक्ष्मी कृपा बनाए रखती हैं।

6. देर रात तक जागना
यदि कोई व्यक्ति देर रात तक अकारण ही जागता है तो चंद्र ग्रह अशुभ फल प्रदान करता है। ऐसे लोगों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। देर रात तक जागने और सुबह देर से उठने पर स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


7. मेहमान को शीतल जल देना
यदि हमारे घर में कोई मेहमान आए तो उसके घर में प्रवेश करते ही शीतल पेय जल अवश्य देना चाहिए। इस आदत से राहु के दोष दूर होते हैं। कालसर्प दोष या राहु से संबंधित अन्य कोई दोष हो तो इस आदत से कई शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं।

8. जूते-चप्पल इधर-उधर फेंकना
यदि कोई व्यक्ति बाहर से घर आते ही जूते-चप्पल इधर-उधर फेंक देता है तो यह आदत शत्रु भय बढ़ाने वाली है। शास्त्रों के अनुसार घर में बेतरतीब रखे हुए हुए जूते-चप्पल शत्रुओं को बलवान बनाते हैं। साथ ही, इस आदत के कारण मान-सम्मान में भी कमी आती है।

9. किचन अव्यवस्थित रखना
यदि किसी घर में रसोई अव्यस्थित रहती है और सही समय पर साफ-सफाई नहीं होती है तो मंगल ग्रह के दोषों में वृद्धि होती है। यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो घर में सदैव रसोई को साफ और व्यस्थित रखना चाहिए।

10. हर रोज पेड़-पौधों को जल अर्पित करना
यदि आप बुध, सूर्य, शुक्र और चन्द्रमा से दोषों को दूर करना चाहते हैं तो हर रोज पेड़-पौधों को पानी देना चाहिए। पेड़-पौधों की देखभाल करने वाले व्यक्ति को कई प्रकार के शुभ फल प्राप्त होते हैं। ये उपाय करने वाले लोगों को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

11. बिस्तर अव्यवस्थित रखना
यदि किसी घर में बिस्तर अव्यवस्थित रहते हैं और चादर गंदी रहती है तो यह अशुभ प्रभाव बढ़ाने वाली आदत है। जिन घरों में इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता है, वहां रहने वाले लोगों की दिनचर्या भी अव्यवस्थित ही होती है। वे लोग कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाते हैं।

12. जोर-जोर से बोलना
यदि किसी व्यक्ति की आदत जोर-जोर से बोलने की है तो उसे शनि के कोप का सामना करना पड़ता है। शनि ऐसे लोग से नाराज हो जाते हैं जो जोर-जोर से, चीख-चीखकर बात करते हैं, व्यर्थ की बातें करते हैं।

13. नशा करना
शराब, सिगरेट या किसी अन्य मादक चीजों का नशा करने वाले लोग राहु के कारण परेशानियों का सामना करते हैं। इनके जीवन में मानसिक तनाव सदैव बना रहता है। काम में आसानी से सफलता नहीं मिलती है।

14. पैरों की सफाई को नजरअंदाज करना
अक्सर लोग चेहरे की सफाई पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन पैरों की सफाई को नजरअंदाज कर देते हैं। यह अच्छी बात नहीं है। पैरों की सफाई पर भी पूरा ध्यान दिया जाना चाहिए। नहाते समय पैरों को भी अच्छी तरह धोना चाहिए।

15. वृद्धजनों का अपमान करना
यदि कोई व्यक्ति किसी वृद्धजनों का अपमान करता है, उनका मजाक बनाता है तो इस आदत के कारण घर की बरकत खत्म होती है। अत: घर के सभी बड़ों का मान-सम्मान बनाए रखना चाहिए। जिन घरों में वृद्धजन खुश रहते हैं, वहां सभी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।

16. इधर-उधर थूकने की आदत
इधर-उधर, कहीं पर भी थूकने की आदत, अशुभ असर देने वाली होती है। इस आदत से यश, मान-सम्मान नष्ट होता है। ऐसे लोगों को यदि मान-सम्मान मिल भी जाता है तो वह अधिक समय तक टिकता नहीं है। लक्ष्मी के कोप का सामना करना पड़ सकता है। अत: इधर-उधर थूकने से बचना चाहिए, इस काम लिए निर्धारित स्थान का ही उपायोग करना चाहिए।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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किन राशियों पर रहेगा ग्रहण का प्रभाव



यह चंद्रग्रहण सोमवार को घटित होने से चूडामणि चंद्रग्रहण कहा जायेगा। शास्त्रों में इस ग्रहण का स्नान,जाप, दान, पूजा,हवनादि का बहुत महत्व मन गया है | तत्फलं कोटिगुनितं घेय चूड़ामणौ ग्रहे।

किन राशियों पर रहेगा ग्रहण का प्रभाव
यह खण्डग्रास चंद्रग्रहण श्रवण नक्षत्र तथा मकर राशि में होने से इस राशि व नक्षत्र में उत्पन्न जात को कुछ विशेष कष्टप्रद रहेगा। इनके अतिरिक्त जलीय जीवों, राजनेताओं, प्रतिष्ठित व्यक्तियों के परिवार जनों व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, मंत्रशास्त्रियों, औषध निर्माताओं,आयुध-शस्त्र, जीवियों, सैनिकों, वृद्ध जनों को नानाविध कष्टों का सामना करना पड़ता है| अतः इस राशि- नक्षत्र वाले जातकों को चन्द्र, राहू व राशि स्वामी शनि के यथाआवश्यक जप,दान आदि करना हितकर रहेगा




अन्य राशि वाले जातकों के लिए ग्रहण का फल
मेष राशि के जातकों के लिए सुख व शुभद रहेगा। वृषभ के मान-सम्मान में गिरावट आ सकती है। मिथुन को शारीरिक कष्ट की है आशंका, कर्क राशि के जातकों के लिए दाम्पत्य जीवन में कष्ट का सामना करना पड सकता है। वहीं सिंह के लिए यह समय कार्यसिद्धि का होगा। कन्या के जातकों के लिए थोडा चिंता और तनाव देने वाला हो सकता है। तुला राशि वालों को रोग और भय का सामना करना पड सकता है। वृश्चिक के लिए धनलाभ की रहेगी असीम संभावना। वहीं धनु के लिए हानि का सामाना करना पड सकता है। मकर राशि वालों पर भी यह ग्रहण थोडा भारी पड सकता है। इसमें इन्हें चोट और भय का डर रहेगा। कुंभ के लिए धनहानि हो सकती है। मीन राशि वालों को धन और लाभवृद्धि की बढोतरी की संभावना रहेगी। सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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रविवार, 6 अगस्त 2017

विज्ञान से जुड़े कुछ अनसुने तथ्य


REET 2017-18 25,000 TEACHER VACANCY FOR THIRD TEACHER IN RAJASTHAN




विज्ञान से जुड़े कुछ अनसुने तथ्य 

1. आम तौर पर कक्षा  में पढ़ाया जाता है कि प्रकाश की गति 3 लाख किलोमीटर प्रति सैकेंड होती है। पर असल में यह गति 2,99,792 किलोमीटर प्रति सैकेंड होती है। यह 1,86,287 मील प्रति सैकेंड के बराबर होती है। 

2. हर एक सैकेंड में 100 बार आसमानी बिजली धरती पर गिरती है। 

3. हर साल आसमानी बिजली से 1000 लोग मारे जाते हैं। 

4. अक्टुम्बर 1992 में लंदन के जितना बड़ा बर्फ का टुकड़ा अंटार्टिका से टूट कर अलग हो गया था। 

5. प्रकाश को धरती की यात्रा करने के लिए सिर्फ 0.13 सैकेंड लगेगें। 

6. अगर हम प्रकाश की गति से अपनी नजदीकी गैलैक्सी पर जाना चाहे तो हमें 20 साल लगेगें। 

7. हवा तब तक आवाज नही करती जब यह किसी वस्तु के विपरीत न चले। 

8. अगर किसी एक आकाश गंगा के सारे तारे नमक के दाने जितने हो जाए तो वह पूरा का पूरा ओलंपिक स्विमिंग पूल भर सकते हैं।  

9. क्विक सिल्वर या पारा ऐसी एकमात्र धातु है, जो तरल अवस्था में रहती है और इतनी भारी होती है कि इस पर लोहा भी तैरता है।

10. जब पानी से बर्फ बन रही होती तो लगभग 10% पानी तो उड़ ही जाता है। इसलिए ही हमारे
फ्रिज में ट्रे पर पानी जमा हो जाता है। 






11. दुनिया के सबसे महंगे पदार्थ की कीमत सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। इसका नाम जानने के बाद आप ये सोंच भी नहीं सकेंगे कि वाकई में इसकी कीमत इतनी ज्यादा होगी। आपमें से ज्यादातर लोग इसे सोना, चांदी या हीरा मान रहे होंगे। अगर ऐसा है तो आपको गलतफहमी में है। दुनिया की सबसे महंगा पदार्थ एंटीमैटर (प्रतिपदार्थ) है। प्रतिपदार्थ पदार्थ का एक ऐसा प्रकार है जो प्रतिकणों जैसे पाजीट्रान, प्रति-प्रोटान, प्रति-न्युट्रान में बना होता है। ये प्रति-प्रोटान और प्रति- न्युट्रान प्रति क्वार्कों मे बने होते हैं। इसकी कीमत सुनकर आपके होश उड़ जायेंगे। 1 ग्राम प्रतिपदार्थ को बेचकर दुनिया के 100 छोटे-छोटे देशों को खरीदा जा सकता है। जी हां,1 ग्राम प्रतिपदार्थ की कीमत 31 लाख 25 हजार करोड़ रुपये है। नासा के अनुसार,प्रतिपदार्थ धरती का सबसे महंगा मैटीरियल है। 1 मिलिग्राम प्रतिपदार्थ बनाने में 160 करोड़ रुपये तक लग जाते हैं। जहां यह बनता है, वहां पर दुनिया की सबसे अच्छी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। इतना ही नहीं नासा जैसे संस्थानों में भी इसे रखने के लिए एक मजबूत सुरक्षा घेरा है। कुछ खास लोगों के अलावा प्रतिपदार्थ तक कोई भी नहीं पहुंच सकता है। दिलचस्प है कि प्रतिपदार्थ का इस्तेमाल अंतरिक्ष में दूसरे ग्रहों पर जाने वाले विमानों में ईधन की तरह किया जा सकता है।

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12. विश्व की सबसे भारी धातु ऑस्मियम है। इसकी 2 फुट लंबी, चौड़ी व ऊँची सिल्ली का वज़न एक हाथी के बराबर होता है।

13. नाभिकीय भट्टियों में प्रयुक्त गुरु-जल विश्व का सबसे महँगा पानी है। इसके एक लीटर का मूल्य लगभग 13,500 रुपये होता है।

14. शरीर पर लगाए जाने वाले सुगंधित पाउडर को टैल्कम पाउडर इसलिए कहते हैं क्योंकि वह ‘टैल्क’ नामक पत्थर से बनाया जाता है।

15. वैज्ञानिकों ने बताया है कि मुर्गी अंड़े से पहले आई थी क्योंकि वह प्रोटीन जो अंड़ो के सेल्स को बनाता है केवल मुर्गियों में ही पाया जाता है।

16. 1894 में जो सबसे पहला कैमरा बना था उससे आपको अपनी फोटो खिचवाने के लिए उसके सामने 8 घंटे तक बैठना पड़ेगा। 

17. नील आर्मस्ट्राँग ने सबसे पहले अपना बाँया पैर चँद्रमा पर रखा था और उस समय उनके दिल की धड़कन 156 बार प्रति मिनट थी। 

18. अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात तारा "केनिस मिजोरिस" है। यह इतना बड़ा है कि इसमें 7,000,000,000,000,000 पृथ्वियां समा सकती हैं।  दुसरे शब्दों में अगर पृथ्वी का आकार एक मटर के दाने जितना कर दिया जाए तो "केनिस मिजोरिस" का व्यास 3 किलोमीटर होगा। 

19. सूर्यमंडल के बाहर सबसे पहले खोजा जाने वाला ग्रह 1990 में खोजा गया था. हमारे ब्रह्माण्ड में लगभग 40,121 ग्रह हैं , पर अभी तक सिर्फ 800 ग्रह ही खोजे गए हैं। 

20. जैसा कि ऊपर बताया गया है कि सबसे बड़ा ज्ञात तारा केनिस मिजोरिस है इसका अर्धव्यास हमारे सुर्य से 600 गुना ज्यादा है जबकि वजन(द्रव्यमान) सिर्फ 30 गुना ज्यादा। 

21. हमारे सुर्यमंडल पर सबसे ऊँची चोटी ओलंपस मॉन्स है जो कि मंगल ग्रह पर स्थित है। इसके आधार का घेराव लगभग 600 किलोमीटर है ओर इसकी ऊँचाई 26 किलोमीटर है। माउंट ऐवरेस्ट की ऊँचाई 8.848 किलोमीटर है। 

22. बृहस्पति का गेनीमेड चंन्द्रमा सुर्यमंडल में एकलौती वस्तु है जो कि किसी ग्रह से बड़ी है।गेनीमेड का आकार बुद्ध ग्रह से ज्यादा है। 

23. किसी तारे की मौत एक सुपरनोवा धमाके से होती है। इस धमाके के कारण पैदा होने वाली उर्जा हमारे सुर्य के जीवन काल दौरान पैदा होने वाली ऊर्जा से कई लाख गुना ज्यादा होती है। 

24. हम नंगी आँख से रात को लगभग 6,000 तारों को देख सकते हैं। अगर हम दुरबीन का प्रयोग करें तो 50,000 देख सकते हैं। जबकि हमारी आकाशगंगा में 400 तारें हैं। 

25. न्युट्रॉन तारे इतने घने होते हैं कि उनका आकार तो एक गोल्फ बॉल जितना होता है मगर द्रव्यमान(वज़न) 90 अरब किलोग्राम होता है। 

26. अगर धरती का आकार एक मटर जितना कर दें तो बृहस्पति इससे 300 मीटर दूर होगा और प्लूटो 2.5 किलोमीटर। मगर प्लूटो आपको दिखेगा नहीं क्योंकि तब इसका आकार एक बैक्टेरिया जितना होगा। 

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बुधवार, 2 अगस्त 2017

अजब - गजब दुनिया

अजब - गजब दुनिया 


1.क्या आप जानते हैं कि कहने को तो सब जीव जंतु के खून का रंग लाल होता है पर टिड्डी एक ऐसा कीट है जिसका रक्त का रंग सफ़ेद होता है। 


2.तितली की स्वाद ग्रंथि उसके पिछले पैरों में होती है। 



3.हाथी के दांत दो या तीन बार नहीं पूरे जीवन काल में यह छः बार निकलते हैं। 

4.शहद आपको अच्छा लगता है पर इसको इकठ्ठा करने में सिर्फ़ एक पाउंड शहद बनाने में बीस लाख फूलों से पराग इकठ्ठा करती है मधुमखी।  

5.खटमल तीन सालों तक बिना भोजन किए जीवित रह सकता है।  


6.क्या यह किसी और के लिए संभव है किसी भी पक्षी का दसवां अंडा सभी नौ अण्डों से बड़ा होता है यह बहुत बार देखा गया है।  



7.सभी पक्षी पेड़ पोधों के साथ धरती पर बैठते उड़ते रहते हैं ..पर हीरल चिडिया एक ऐसी चिडिया है जो कभी भी किसी भी अवस्था में कहीं नही बैठती है। 


8.क्या आप जानते हैं कि फ्रांसीसी लोगो का प्रिय भोजन है मेंढक की टाँगे फ्रांस को अपनी खपत का अधिकतर भाग आयत करना पड़ता है। बीते दशक में सम्पूर्ण यूरोप में 6200 तन मेढक की टाँगे आयत की गयी।  इस में 44 % फ्रांस 42बेल्जियम और लक्ज़मबर्ग और 24इटली द्वारा खरीदी गयी और बाकी तुर्की, चीन व अन्य देश से भी फ्रांस 3000 से 4000 टन मेंढक की टाँगे आयत करता है।  अकेले भारत वर्ष ने सिर्फ़ 1861 में साढ़े चार हजार टन मेढक की टाँगे निर्यात करी थी।
   जिनसे हमें लगभग एक करोड़ डालर की विदेशी मुद्रा मिली थी। यह निर्यात इतना बढ़ गया था कि कोलकाता के आस पास के क्षेत्र  से मेंडक के समूल नष्ट  हो गए थे और अंत में 1869  में देश में मेंढक की टांगो के निर्यात पर रोक लगानी पड़ी। 







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