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सोमवार, 10 जुलाई 2017

लक्ष्मी को मनाने के लिए ऐसे करें श्रीयंत्र को सिद्ध


श्री यंत्र का निर्माण सिद्ध मुहूर्त में ही किया जाता है। गुरुपुष्य योग, रविपुष्य योग, नवरात्रि, धन-त्रयोदशी, दीपावली, शिवरात्रि, अक्षय तृतीया आदि श्रीयंत्र निर्माण और स्थापन के श्रेष्ठ मुहूर्त हैं। शुभ अवसरों पर श्री यंत्र की पूजा का विधान है। सुविख्यात श्रीयंत्र भगवती त्रिपुर सुंदरी का यंत्र है। इसे यंत्रराज के नाम से जाना जाता है। श्रीयंत्र में देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति तथा विकास का प्रतीक होने के साथ मानव शरीर का भी द्योतक है।
श्रीयंत्र सर्वाधिक लोकप्रिय प्राचीन यन्त्र है, इसकी अधिष्ठात्री देवी स्वयं श्रीविद्या अर्थात त्रिपुर सुन्दरी हैं और उनके ही रूप में इस यन्त्र की मान्यता है। यह बेहद शक्तिशाली ललितादेवी का पूजा चक्र है। इसको त्रैलोक्य मोहन अर्थात तीनों लोकों का मोहन यन्त्र भी कहते हैं।

ऐसे करें श्रीयंत्र को सिद्ध
कोई अच्छा सा दिन देख लें या शुक्ल पक्ष के शुक्रवार का चयन करें । श्रीयन्त्र को गंगा जल से धो लें और अपने मंदिर में रख कर माता लक्ष्मी का ध्यान लगाते हुए `ओम श्रीँ` मंत्र का जाप करें। ये कम से कम 21 माला आपको करनी हैं और यह पांच दिन तक करना है। उसके बाद ये यन्त्र सिद्ध होता है। हालांकि ऐसा तभी करें, जब आपको कोई योग्य जानकार ना मिल रहा हो, क्योंकि योग्य व्‍यक्ति से ही सिद्ध कराना अच्छा रहता है। उसके बाद यंत्र को अपने मंदिर में स्थापित करे या जहां भी आप चाहते हैं, दुकान या ऑफिस में रख दें। नित्य इन मन्त्रों से श्रीयंत्र की पूजा कर सकते हैं। ध्यान रहे, श्रीयन्त्र की जितनी पूजा होती है, उतना ही बल मिलता है। श्रीयंत्र मंत्र यह है - श्री महालक्ष्म्यै नमः श्री ह्रीं क्लीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

कब करें श्रीयंत्र स्थापना
श्री यंत्र का निर्माण सिद्ध मुहूर्त में ही किया जाता है। गुरुपुष्य योग, रविपुष्य योग, नवरात्रि, धन-त्रयोदशी, दीपावली, शिवरात्रि, अक्षय तृतीया आदि श्रीयंत्र निर्माण और स्थापन के श्रेष्ठ मुहूर्त हैं। शुभ अवसरों पर श्री यंत्र की पूजा का विधान है। सुविख्यात श्रीयंत्र भगवती त्रिपुर सुंदरी का यंत्र है। इसे यंत्रराज के नाम से जाना जाता है। श्रीयंत्र में देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति तथा विकास का प्रतीक होने के साथ मानव शरीर का भी द्योतक है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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