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सोमवार, 31 जुलाई 2017

काम-धंधे में बरकत लाते हैं ये चमत्कारी उपाय




ज्योतिष के अनुसार अच्छे व्यवसाय और जॉब के लिए कुछ खास उपाय व्यापार में परेशानी के व्यावारिक कठिनाइयों के साथ-साथ ज्योतिषिक परेशानी या दोष भी होता है। अगर किसी गृह का प्रभाव ग़लत हो या आपके घर, ऑफिस या दुकान में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो जाए तो व्यापार और धंधे में हानि होने लगती है। यहां पर व्यापार में सफलता के उपाय दिए जा रहे हैं जो निश्चित ही आपको कारोबार में लाभ पहुचाएंगे।

आप गोमती चक्र के प्रयोग से व्यापार में उन्नति के लिए अचूक टोटका कर सकते हैं. इसके लिए विषम मात्रा में गोमती चक्र लेकर ( 3,5,7 आदि) उन्हें चांदी के किसी तार में पीरों दें। इसके बाद इसके किसी पारदर्शी थैली लेकर उसमे डाल दें. आप इसे किसी साफ़ कपड़े में भी लपेटकर रख सकते हैं। इन गोमती चक्रों को अपने जेब डालकर रखें। ये व्यापार व कारोबार में वृद्धि के अंतर्गत बहुत ही असरदार टोटका है। इस टोटके का प्रयोग आपको चारो तरफ़ से सफलता दिलाएगा। इससे आपकी धन संबंधी सभी मुश्किलें हल होंगी| अगर आप अपने व्यापार में शानदार सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो इस उपाय को ज़रूर करें।


शुक्ल पक्ष में गुरुवार के दिन आप हल्दी और केसर से 12 गोमती चक्रों पर तिलक लगाकर एक कपड़े में बांध कर रख दें। इसके बाद इस कपड़े को अपने दुकान या व्यापार के जगह की चौखट पर रख दें। ये व्यापार व कारोबार में वृद्धि के उपाय में सरल लेकिन जल्दी ही परिणाम देने वाला उपाय है| अगर आपके पास समय का अभाव है तो ये छोटा सा व्यापार वृद्धि का टोटका ज़रूर करें। रोली और कपूर को साथ में जलाएं और जलने के बाद जो राख बचे उसे अपने कार्यस्थल पर रखें। इस उपाय से आपको धन से संबंधित अच्छा लाभ मिलेगा| जहां पर भी आपका कार्यस्थल हो वहां प्रवेश करने से पहले अपना दाहिने हाथ ज़मीन पर लगाकर फिर मस्तक पर या ह्रदय पर लगाएं। ये आसन सा दिखने वाला प्रयोग आपको असीम लाभ दिलाने वाला है। ये व्यापार व कारोबार में वृद्धि के उपाय के अंतर्गत बहुत आसन उपाय है।


अगर आपको लगातार व्यापार में हानि उठानी पड़ रही है तो सबसे पहले यह देखें की आपके घर में झाड़ू का स्थान कहां है और कैसा है? झाड़ू को माँ लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है ऐसे में झाड़ू का गलत प्रयोग व्यापार में हानि का कारण हो सकता है। अपने घर में सफाई करने के बाद झाड़ू को ऐसे स्थान पर रखें कि किसी भी बाहर वाले व्यक्ति की नज़र इस पर नही पड़े| ये हमेशा याद रखें कि घर में जिस तरह की ऊर्जा होगी उस घर में उसी तरह के परिणाम प्राप्त होंगे। अगर आपका घर सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण है तो आपके घर में धन की आवक हमेशा बनी रहेगी।


आपको अपने घर में प्रेम का वातावरण निर्मित करने की कोशिश करनी चाहिए, जिस घर में शांति होती है उस घर में लक्ष्मी देवी का प्रवेश सहज ही हो जाता है| इसके लिए लक्ष्मी नारायण के मंदिर में हर शुक्रवार गुड़ चना बाटें। मंदिर में लक्ष्मी मन की प्रतिमा के सम्मुक महकदार अगरबत्ती जलाएं और प्रार्थना करें। ये आसन उपाय आपको हर तरफ़ से सम्रद्धि दिलाएगा| अगर आप अपने व्यापार में स्थायी लाभ चाहते हैं तो कुत्ता, गाय और कौवों को रोटी ज़रूर खिलाएं। रोटियों में थोड़ा घी और मीठा पदार्थ लगा कर खिलाएं। ये व्यापार में उन्नति के लिए अचूक टोटका हैं। इसके प्रयोग से आपके घर में धन की आवक हमेशा बनी रहेगी|

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रविवार, 30 जुलाई 2017

भारत के बारे में कुछ अनसुने रहस्य

भारत के बारे में कुछ अनसुने रहस्य 


1.भारत ने अपने आखिरी 100000 वर्षों के इतिहास में किसी भी देश पर हमला

नहीं किया है।


2.जब कई संस्कृतियों में 5000 साल पहले घुमंतू वनवासी थे, तब भारतीयों ने
सिंधु घाटी (सिंधु घाटी सभ्यता) में हड़प्पा संस्कृति की स्थापना की।
3.भारत का अंग्रेजी में नाम ‘इंडिया’ इं‍डस नदी से बना है, जिसके आस पास की
घाटी में आरंभिक सभ्‍यताएं निवास करती थी। आर्य पूजकों में इस इंडस नदी
को सिंधु कहा।

4.ईरान से आए आक्रमणकारियों ने सिंधु को हिंदु की तरह प्रयोग किया।
‘हिंदुस्तान’ नाम सिंधु और हिंदु का संयोजन है, जो कि हिंदुओं की भूमि के
संदर्भ में प्रयुक्त होता है।

5.शतरंज की खोज भारत में की गई थी।

6.बीज गणित, त्रिकोण मिति और कलन का अध्‍ययन भारत में ही आरंभ हुआ था।
‘स्‍थान मूल्‍य प्रणाली’ और ‘दशमलव प्रणाली’ का विकास भारत में 100 बी सी
में हुआ था।

7.विश्‍व का प्रथम ग्रेनाइट मंदिर तमिलनाडु के तंजौर में बृहदेश्‍वर मंदिर
है। इस मंदिर के शिखर ग्रेनाइट के 80 टन के टुकड़ों से बने हैं। यह भव्‍य
मंदिर राजाराज चोल के राज्‍य के दौरान केवल 5 वर्ष की अवधि में (1004 ए
डी और 1009 ए डी के दौरान) निर्मित किया गया था।
8.भारत विश्‍व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और विश्‍व का छठवां सबसे बड़ा देश तथा
प्राचीन सभ्‍यताओं में से एक है।

9.सांप सीढ़ी का खेल तेरहवीं शताब्‍दी में कवि संत ज्ञान देव द्वारा तैयार
किया गया था इसे मूल रूप से मोक्षपट कहते थे। इस खेल में सीढियां वरदानों
का प्रतिनिधित्‍व करती थीं जबकि सांप अवगुणों को दर्शाते थे। इस खेल को
कौडियों तथा पांसे के साथ खेला जाता था। आगे चल कर इस खेल में कई बदलाव
किए गए, परन्‍तु इसका अर्थ वहीं रहा अर्थात अच्‍छे काम लोगों को स्‍वर्ग
की ओर ले जाते हैं जबकि बुरे काम दोबारा जन्‍म के चक्र में डाल देते हैं।

10.भारत में विश्‍व भर से सबसे अधिक संख्‍या में डाक खाने स्थित हैं।
भारतीय रेल देश का सबसे बड़ा नियोक्ता है। यह दस लाख से अधिक लोगों को
रोजगार प्रदान करता है।

11.विश्‍व का सबसे प्रथम विश्‍वविद्यालय 700 बी सी में तक्षशिला में
स्‍थापित किया गया था। इसमें 60 से अधिक विषयों में 10,500 से अधिक छात्र
दुनियाभर से आकर अध्‍ययन करते थे। नालंदा विश्‍वविद्यालय चौथी शताब्‍दी
में स्‍थापित किया गया था जो शिक्षा के क्षेत्र में प्राचीन भारत की
महानतम उपलब्धियों में से एक है।

12.आयुर्वेद मानव जाति के लिए ज्ञात सबसे आरंभिक चिकित्‍सा शाखा है। शाखा
विज्ञान के जनक माने जाने वाले चरक में 2500 वर्ष पहले आयुर्वेद का समेकन
किया था।
13.भारत 17वीं शताब्‍दी के आरंभ तक ब्रिटिश राज्‍य आने से पहले सबसे
सम्‍पन्‍न देश था। क्रिस्‍टोफर कोलम्‍बस भारत की सम्‍पन्‍नता से आकर्षित
हो कर भारत आने का समुद्री मार्ग खोजने चला और उसने गलती से अमेरिका को
खोज लिया।

14.नौवहन की कला और नौवहन का जन्‍म 6000 वर्ष पहले सिंध नदी में हुआ था।
दुनिया का सबसे पहला नौवहन संस्‍कृ‍त शब्‍द नव गति से उत्‍पन्‍न हुआ है।
शब्‍द नौ सेना भी संस्‍कृत शब्‍द नोउ से हुआ।

15. भास्‍कराचार्य ने खगोल शास्‍त्र के कई सौ साल पहले पृथ्‍वी द्वारा सूर्य
के चारों ओर चक्‍कर लगाने में लगने वाले सही समय की गणना की थी। उनकी
गणना के अनुसार सूर्य की परिक्रमा में पृथ्‍वी को 365.258756484 दिन का
समय लगता है।

16. भारतीय गणितज्ञ बुधायन द्वारा ‘पाई’ का मूल्‍य ज्ञात किया गया था और
उन्‍होंने जिस संकल्‍पना को समझाया उसे पाइथागोरस का प्रमेय करते हैं।
उन्‍होंने इसकी खोज छठवीं शताब्‍दी में की, जो यूरोपीय गणितज्ञों से काफी
पहले की गई थी।

17. बीज गणित, त्रिकोण मिति और कलन का उद्भव भी भारत में हुआ था। चतुष्‍पद
समीकरण का उपयोग 11वीं शताब्‍दी में श्री धराचार्य द्वारा किया गया था।

18. ग्रीक तथा रोमनों द्वारा उपयोग की गई की सबसे बड़ी संख्‍या 106 थी जबकि
हिन्‍दुओं ने 10*53 जितने बड़े अंकों का उपयोग (अर्थात 10 की घात 53), के
साथ विशिष्‍ट नाम 5000 बीसी के दौरान किया। आज भी उपयोग की जाने वाली
सबसे बड़ी संख्‍या टेरा: 10*12 (10 की घात12) है।
19. वर्ष 1896 तक भारत विश्‍व में हीरे का एक मात्र स्रोत था।


20.बेलीपुल विश्‍व‍ में सबसे ऊंचा पुल है। यह हिमाचल पर्वत में द्रास और
सुरु नदियों के बीच लद्दाख घाटी में स्थित है। इसका निर्माण अगस्‍त 1982
में भारतीय सेना द्वारा किया गया था।

21. सुश्रुत को शल्‍य चिकित्‍सा का जनक माना जाता है। लगभग 2600 वर्ष पहले
सुश्रुत और उनके सहयोगियों ने मोतियाबिंद, कृत्रिम अंगों को लगना, शल्‍य
क्रिया द्वारा प्रसव, अस्थिभंग जोड़ना, मूत्राशय की पथरी, प्‍लास्टिक
22. सर्जरी और मस्तिष्‍क की शल्‍य क्रियाएं आदि की।


23. भारत से 90 देशों को सॉफ्टवेयर का निर्यात किया जाता है।
भारत में 4 धर्मों का जन्‍म हुआ – हिन्‍दु, बौद्ध, जैन और सिक्‍ख धर्म और
जिनका पालन दुनिया की आबादी का 25 प्रतिशत हिस्‍सा करता है।
जैन धर्म और बौद्ध धर्म की स्‍थापना भारत में क्रमश: 600 बी सी और 500 बी
सी में हुई थी।

24. इस्‍लाम भारत का और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है।
भारत में 3,00,000 मस्जिदें हैं जो किसी अन्‍य देश से अधिक हैं, यहां तक
कि मुस्लिम देशों से भी अधिक।

25. भारत में सबसे पुराना यूरोपियन चर्च और सिनागोग कोचीन शहर में है। इनका
निर्माण क्रमश: 1503 और 1568 में किया गया था।


26. विश्‍व में सबसे बड़ा धार्मिक भवन अंगकोरवाट, हिन्‍दु मंदिर है जो
कम्‍बोडिया में 11वीं शताब्‍दी के दौरान बनाया गया था।

27. तिरुपति शहर में बना विष्‍णु मंदिर 10वीं शताब्‍दी के दौरान बनाया गया
था, यह विश्‍व का सबसे बड़ा धार्मिक गंतव्‍य है। रोम या मक्‍का धार्मिक
स्‍थलों से भी बड़े इस स्‍थान पर प्रतिदिन औसतन 30 हजार श्रद्धालु आते
हैं और लगभग 6 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्रति दिन चढ़ावा आता है।
सिक्‍ख धर्म का उद्भव पंजाब के पवित्र शहर अमृतसर में हुआ था। यहां
प्रसिद्ध स्‍वर्ण मंदिर की स्‍थापना 1577 में गई थी।

28. वाराणसी, जिसे बनारस के नाम से भी जाना जाता है, एक प्राचीन शहर है जब
भगवान बुद्ध ने 500 बी सी में यहां आगमन किया और यह आज विश्‍व का सबसे
पुराना और निरंतर आगे बढ़ने वाला शहर है।

29. भारत द्वारा श्रीलंका, तिब्‍बत, भूटान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश के
3,00,000 से अधिक शरणार्थियों को सुरक्षा दी जाती है, जो धार्मिक और
राजनैतिक अभियोजन के फलस्‍वरूप वहां से निकल गए हैं।

30. माननीय दलाई लामा तिब्‍बती बौद्ध धर्म के निर्वासित धार्मिक नेता है, जो
उत्तरी भारत के धर्मशाला में अपने निर्वासन में रह रहे हैं।

31. युद्ध कलाओं का विकास सबसे पहले भारत में किया गया और ये बौद्ध धर्म
प्रचारकों द्वारा पूरे एशिया में फैलाई गई।

32. योग कला का उद्भव भारत में हुआ है और यह 5,000 वर्ष से अधिक  समय से
मौजूद है। 

33. निश्‍चेतक का उपयोग भारतीय प्राचीन चिकित्‍सा विज्ञान में भली भांति
ज्ञात था। शारीरिकी, भ्रूण विज्ञान, पाचन, चयापचय, शरीर क्रिया विज्ञान,
इटियोलॉजी, आनुवांशिकी और प्रतिरक्षा विज्ञान आदि विषय भी प्राचीन भारतीय
ग्रंथों में पाए जाते हैं।

34. दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट का मैदान हिमाचल प्रदेश के चायल नामक स्‍थान
पर है। इसे समुद्री सतह से 2444 मीटर की ऊंचाई पर भूमि को समतल बना कर
1893 में तैयार किया गया था।

शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

अक्षरों का आपके जीवन पर प्रभाव




*- यदि किसी व्यक्ति के नाम में D, M, T अक्षरों का दुहराव हो तो वो लोग काफी मेहनती होते हैं। ऐसे लोगों को खुद का व्यापार शुरू करना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इन्हें अपने खुद के बिज़नस में काफी सफलता मिलती है।

*- अगर आपके नाम में E, N, H, X अक्षरों का दुहराव है तो आपके जीवन में काफी पैसा होगा। आपको धन के सम्बन्ध में कभी चिंता करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। लेकिन ऐसे लोग अजीब तरह के और केयरलेस होते हैं।

*- अगर किसी व्यक्ति के नाम में V, U, W अक्षरों का दुहराव हो रहा हो तो ऐसे लोगों को मानवता का मतलब पता होता है। ऐसे लोग अपनी जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटते हैं। इन लोगों का जुड़ाव अपने परिवार के काफी ज्यादा होता है। इनका भाग्य भी अच्छा होता है।

*- अगर किसी व्यक्ति के नाम में A, I, J, Y, Q अक्षरों का दुहराव है तो इसका मतलब यह है कि वह व्यक्ति काफ़ी महत्वकांक्षी है और उसे अपनी आज़ादी से काफी प्रेम है।

*- जिन लोगों के नाम में B, R, K अक्षर रिपीट हो रहा है ऐसे लोग काफी संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों के मन में हमेशा असुरक्षा की भावना रहती है।

*- अगर आपके नाम में C, G, S, L अक्षरों का दुहराव है तो आप समझ जाइये कि आप बहुत अच्छे इंसान हैं। ऐसा माना जाता है कि ऐसे लोगों का स्वाभाव काफी अच्छा होता है। इसी के बल पर यह जल्दी ही सबके चहेते बन जाते हैं साथ ही ये काफी हुनरमंद होते हैं।

*- अगर आपके नाम में O, Z अक्षरों का दुहराव है तो आप जीवन में काफी धार्मिक व्यक्ति रहेंगे साथ ही आपका पढ़ाई-लिखाई में काफी मन लगेगा। ये लोग जो एक बार ठान लेते हैं, बिना किये मानते नहीं हैं।

*- जिस व्यक्ति के नाम में P, F अक्षर का दुहराव होता है, उन लोगों को बिज़नस में काफी सफलता मिलती है। इन लोगों का दिमाग बिज़नस करने के लिए ही बना होता है। अपने इसी गुण की वजह से ये लोग आगे चलकर काफी बड़े आदमी बनते हैं।

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गुरुवार, 27 जुलाई 2017

Rochak Jankariya, Interesting Facts



Rochak Jankariya, Interesting Facts


1. मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अगर आपकी दोस्ती 7 साल से ज़्यादा टिक गई है तो संभावित है कि वो ज़िंदगीभर रहेगी.

2. पढ़ते, लिखते या पढ़ाई करते वक़्त म्यूज़िक सुनें. आप बेहतर ध्यान लगा पाएंगे.

3. पुरूष 3 दिन के बाद ही प्यार में पड़ जाते हैं, लेकिन महिलाएं कम से कम 18 डेट्स लेती हैं.

4. Philophobia उस अवस्था को कहते हैं जब आपको प्यार में पड़ने से डर लगने लगता हैं.

5. जो महिलाएं ऑनलाइन विडियो गेम खेलती हैं, वो अपनी रिलेशनशिप से ज़्यादा खुश रहती है.


6. करीब 1,59,635 लोगों की मृत्यु उसी दिन होगी, जिस दिन आपकी.

7. किसी को 20 सेकंड तक झप्पी देने से ऑक्सीटोसिन स्रावित होता है जो आपको किसी पर ज़्यादा विश्वास करने के लिए प्रेरित करता है.

8. कपल जितना ज़्यादा समय एक दूसरे के साथ रहेंगे उतना कम “I Love You” बोलेंगे.

9. सुबह 3:00 से 4:00 बजे के बीच आपका शरीर सबसे कमज़ोर होता हैं. यही कारण है कि ज़्यादातर लोगों की नींद में मृत्यु इसी समय होती हैं.

10. जो लोग अपने दुःख को हंसी के पीछे छुपाते हैं, उन्हें “Eccedentesiast” कहते हैं

11. ज़्यादातर लोग रात के समय ज़्यादा भावुक हो कर अपने दिल का हाल बताते हैं, लेकिन SMS के ज़रिये.

12. प्यार में डूबे दो लोग जब एक दूसरे की आंखों में देखते हैं तो उनकी धड़कनें भी मिल जाती हैं.


13. Lethologica उस अवस्था को कहते हैं जब आप किसी एक शब्द को याद नहीं कर पाते हैं और दिन भर उसी के बारे में सोचते रहते हैं.

14. जब आप किसी से पैदल चलते हुए बात करते हैं तो थोड़ी देर बाद आपके कदम अपने आप सिंक्रोनाइज हो जाते हैं.

15. बुरी लिखावट से परेशान हैं? मत होइए, क्योंकि बुद्धिमान लोगो का दिमाग तेज चलता हैं, जिसके कारणवश वो जल्दी-जल्दी लिखते हैं. इसलिए बुरी लिखावट आती हैं.

16. एक मनोवैज्ञानिक शोध कहता है कि जब आप सिंगल होते हैं, तो हर जगह आपको खुश कपल्स दिखेंगे, लेकिन जब आप रिलेशनशिप में होते हैं, तब आपको खुश सिंगल ज्यादा दिखेंगे.

17. ये वाक्य पढ़ने के बाद जिस इंसान का ख्याल आपके दिमाग में सबसे पहले आएगा, वो आपको बहुत प्रिय हैं.
1. यह ‘Ayam Cemani’ नाम का चिकन है. ये इंडोनेशिया की एक बहुत ही दुर्लभ चिकन प्रजाति है. इसका हर अंग काला है. मतलब, पंख से लेकर टाँगो तक, नाखूनों से लेकर जीभ तक, मीट से लेकर हड्डियों तक सब कुछ बिल्कुल काला है. इसके चिकन की कीमत $1999 (1.30 लाख) से $2500 (1.62 लाख) तक है. ऐसा ही एक मुर्गा मध्यप्रदेश में भी है जिसका नाम KadakNath है.

2. मोबाइल बनाने वाले ग्राहम बेल ने ‘hello’ की बज़ाय ‘ahoy’ शब्द का सुझाव दिया था. लेकिन उनकी बात पर किसी ने ध्यान ही नही दिया.


3. प्राकृतिक गैस बिना गंध की होती है. स्मेल तो जान बूझकर एड की जाती है ताकि लिकेज़ होने पर पता चल सकें.

4. पिछले 100 सालों में ‘impossible’ शब्द यूज करने में 50% की गिरावट आई है.

5. चीन की फिल्मों और टीवी में टाइम ट्रेवल की घटनाएँ बैन है.


6. 2013 में, न्यूज़ीलैंड में एक ऐसा बैक्टीरिया पाया गया जिस पर आज तक की किसी एंटीबायोटिक का कोई असर नही हुआ.

7. जो महिलाएँ बच्चे ना पैदा करने वाली गोलियाँ खाती है वो दूसरी महिलाओं की तुलना में 32% ज्यादा पलक झपकाती है.

8. ‘The Statue of Liberty’ ने 879 नंबर का जूता पहन रखा है.

9. यदि आप पाइनएप्पल का एक टुकड़ा मुँह में रखोगे तो ये आपको ही खाना शुरू कर देगा. क्योकिं इसमें एक ऐसा प्रोटीन होता है जो मांस को घटाता है.

10. 100 बार हंसना दिन में 15 मिनट साइकिल चलाने के बराबर है.

11. Coca-Cola दुनिया में दूसरा सबसे ज्यादा समझा जाने वाला शब्द है Ok के बाद.

12. 90% ऐसे जीव-जंतु जो पानी में 1500 फुट से नीचे रहते है वो चमकदार होते है.

13. यदि आपके साथ एक कुत्ता है तो इस बात के 3 गुना ज्यादा चांस है कि आपको लड़की का फोन नंबर मिल ही जाएगा.


14. शहद का एक चम्मच, 12 मधुमक्खियों का जिंदगीभर का काम है.

15. हर दिन करीब 2 अरब 25 करोड़ काॅफी के कप पीएँ जाते है.

16. बर्फ भी एक खनिज़ है, बिल्कुल हीरे और नमक की तरह.

17. सेक्स करने के 5 से 8 दिन बाद महिला प्रेग्नेंट (गर्भवती) हो जाती है.

18. 2006 में एक महिला ने हवाई जहाज़ में पाद मार दिया और फिर उसकी स्मेल को तुरंत खत्म करने के लिए माचिस जला दी. हुआ ये कि जहाज की आपातकालीन लैंडिग करानी पड़ी.

19. ‘Minnie and Micky mouse’ की जो असली आवाज है उन्होनें असल जिंदगी में शादी कर ली.

20. छोटे जानवर, (जैसे: गिलहरी, चूहा etc.) मनुष्य से कम सेंसिटिव होते है. कम सेंसिटिव मतलब उनको टच करने पर थोड़ी देर से पता चलता है.

21. रिसर्च के मुताबिक, पीरियड के दर्द में viagra (वियाग्रा) खाने से दर्द कम होता है. और इसका कोई side-effects भी नही है.

22. आज तक जितनी आत्महत्याएँ हुई है, उनमें से ज्यादातर बुधवार को हुई है.

23. Charles Darwin (जिसने बताया था कि इंसान बंदर की औलाद है) ने हर उस जानवर को खाया जिसकी उसने खोज की थी.

24. आपकी 2 करोड़ 50 लाख सेल मर गई, जब तक आपने ये वाक्य पढ़ा.

25. करीब 1 अरब लोग आज भी भूखे ही सोएंगे. मेरी आपसे एक गुज़ारिश है कि खाने को बर्बाद न करें. उतना ही लो थाली में, कि व्यर्थ ना जाएँ नाली में.
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हर किसी को सफलता दिला सकते हैं ये 6 उपाय



हर किसी को सफलता दिला सकते हैं ये 6 उपाय




गरुड़ पुराण में कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जो किसी को भी जीवन में सफलता दिला सकती है। गरुड़ पुराण के एक शलोक के अनुसार, जिस किसी को भी अपने जीवन में उन्नति की इच्छा हों, उन्हें इन 6 की हमेशा पूजा-अर्चना करनी चाहिए।


श्लोक-
विष्णुरेकादशी गंगा तुलसीविप्रधेवनः।
असारे दुर्गसंसारे षट्पदी मुक्तिदायिनी।।

1. भगवान विष्णु
गरुड़ पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु अपने भक्तों के सभी दुःखों को खत्म करके उनके जीवन में सुख-शांति प्रदान करते हैं। जो मनुष्य रोज अपने दिन की शुरुआत भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करके करता है, उसे अपने काम में सफलता मिलती है। ध्यान रखें भगवान की पूजा करने से पहले स्नान आदि करके शुद्ध हो जाएं।

2. एकादशी-व्रत
ग्रंथों और पुराणों में एकादशी व्रत को सबसे श्रेष्ठ बताया गया है। पुराणों के अनुसार, जो मनुष्य प्रत्येक एकादशी को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखता है, उसे निश्चित ही इसका शुभ फल मिलता है। व्रत करने के अलावा एकादशी के दिन जुआ खेलना, शराब पीना, हिंसा करना आदि काम वर्जित हैं। इसलिए, एकदाशी पर व्रत करने के साथ ही इन कामों से दूर रहें।

3. गंगा नदी
गंगा नदी को सभी नदियों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। हर किसी को गंगा नदी को देव तुल्य मान कर, हमेशा उसकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। किसी भी रूप में गंगा का अपमान न करें। इस बातों का ध्यान रखने वाले मनुष्य को निश्चित ही अपने हर काम में सफलता मिलती है।

4. तुलसी
तुलसी भगवान का ही एक रूप है। तुलसी को अपने घर में लगाना, रोज उसे जल देना और उसकी पूजा करना शुभ माना जाता है। हर किसी को रोज भगवान विष्णु के प्रसाद में तुलसी पत्र रखना चाहिए और विष्णु पूजा के बाद तुलसी पूजा करनी चाहिए।

5. पंडित या ज्ञानी
पंडितों या ज्ञानी मनुष्य को सम्मान का पात्र समझना चाहिए। कई लोग इनका मजाक उढ़ाते हैं, जो कि बहुत ही गलत माना जाता है। जो मनुष्य ज्ञानी लोगों का सम्मान करता है और उनकी बताई बातों का पालन अपने जीवन में करता है, वह हर परेशानी का सामना आसानी से कर लेता है और हर काम में सफल होता है।

6. गाय
गाय को हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है। गाय को शरीर के अलग-अलग भागों में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है। जो मनुष्य गाय को देव तुल्य मान कर उसकी पूजा-अर्चना करता है, उसकी सभी परेशानियों का अंत हो जाता है। साथ ही गाय की पूजा करने और उसे भोजन खिलाने से मनुष्य को अपने जाने-अनजाने किए गए पापों से भी मुक्ति मिल जाती है।

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मंगलवार, 25 जुलाई 2017

ये उपाय करने से आपके बिगड़े सारे काम बनेगे

Jyotish Upay


1. अगर आपको कड़ी मेहनत के बाद भी किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता नहीं मिल पा रही है तो किसी हनुमान मंदिर जाएं और नींबू का ये उपाय करें।
उपाय के अनुसार अपने साथ एक नींबू और 4 लौंग लेकर जाएं। इसके बाद मंदिर में हनुमानजी के सामने नींबू के ऊपर चारों लौंग लगा दें। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें या हनुमानजी के मंत्रों का जप करें।
मंत्र जप के बाद हनुमानजी से सफलता दिलवाने की प्रार्थना करें और वह नींबू अपने साथ रखकर कार्य करें। मेहनत के साथ ही कार्य में सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।

2. सुबह-सुबह पीपल के कुछ पत्ते तोड़ लें और उन पत्तों चंदन या कुमकुम से श्रीराम नाम लिखें। इसके बाद इन पत्तों की एक माला बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें।


3. किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

4. यदि आपके कार्यों में बार-बार बाधाएं आ रही हैं या धन प्राप्त करने में देरी हो रही है या किसी की बुरी नजर बार-बार लगती है तो नारियल का यह उपाय करें।
उपाय के अनुसार किसी सिद्ध हनुमान मंदिर में जाएं और अपने साथ एक नारियल लेकर जाएं। मंदिर में हनुमानजी की प्रतिमा के सामने नारियल को अपने सिर पर सात बार वार लें। इसके साथ हनुमान चालीसा का जप करते रहें। सिर पर वारने के बाद नारियल हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।

5. यदि आप मालामाल होना चाहते हैं तो रात के समय दीपक का यह उपाय करें। रात में किसी हनुमान मंदिर जाएं और वहां प्रतिमा के सामने में चौमुखा दीपक लगाएं। चौमुखा दीपक यानी दीपक चार ओर से जलाना है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा प्रतिदिन करेंगे तो बहुत ही जल्द बड़ी-बड़ी परेशानियां भी आसानी से दूर हो जाएंगी।




6. यदि आपके कार्यों में परेशानियां अधिक आ रही हैं और बनते हुए काम भी बिगड़ जाते हैं तो शनिवार को यह उपाय करें।
उपाय के अनुसार आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान आदि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद घर से एक नींबू अपने साथ लें और किसी चौराहे पर जाएं।
अब वहां नींबू के दो बराबर टुकड़ें करें। एक टुकड़े को अपने से आगे की ओर फेंकें और दूसरे टुकड़े को पीछे की ओर। इस समय आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
नींबू के टुकड़े फेंकने के बाद आप अपने काम पर जा सकते हैं या पुन: घर लौटकर आ सकते हैं।

7. हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। जो भी व्यक्ति हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।




8. हनुमानजी के मंदिर में 1 नारियल पर स्वस्तिक बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें।

9. अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की प्रतिमा पर चोला चढ़वाएं। ऐसा करने पर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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रविवार, 23 जुलाई 2017

पुरुषों का सीना बताता है उनके भाग्य के बारे में

पुरुषों का सीना बताता है उनके भाग्य के बारे में

आपने  अभी तक औरतों के शरीर कके बारे में बहुत से तथ्य जाने किन्तु आज हम आपको बताते है कि समुद्र शास्त्र पुरुषों से जुड़े तथ्यों के बारे में हमें क्या बताता है l
आज हम चर्चा करते है मर्दों की शारीरिक संरचना और बनावट के बारे में कुछ ऐसे तथ्यों को लेकर जो आपको पुरुषों के व्यक्तित्व और भाग्य के बारे में बताते है l
पुरुषों का व्यक्तित्व और भाग्य उनके सीने की बनावट पर बहुत कुछ निर्भर करता हैं,तो जानते हैं कि कैसे मर्दों की किस प्रकार की छाती किस प्रकार के भाग्य का संकेत देती है –

 1-समतल सीना

समुद्र शास्त्र के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जिन पुरुषों के सीने समतल होते हैं वो आर्थिक दृष्टि से बहुत संपन्न होते हैं किन्तु ऐसे लोग सामाजिक रूप से भावुक न होकर व्यवहारिक होते हैंl ऐसे मर्दों में मौलिकता की कमी अक्सर देखने को मिलती है l


2-उभरा हुआ सीना

जो पुरुष उभरे हुए सीने के स्वामी होते है वो हर तरह की सुख समृधि से संपन्न होते हैं और साथ ही बहुत साहसी और पराक्रमी भी होते हैं l


3-बाल वाला सीना


जैसा कि सर्वविदित है कि पुरुषों की छाती के बाल हर महिला को अपनी और आकर्षित करते हैं लेकिन इसके साथ ही यह बात भी सही हैं कि सीने में बाल होना शुभ लक्षण माना जाता हैंlजिन पुरुषों के सीने में बाल होते हैं वह स्वाभाव से दयालु और भाग्यशाली भी होते हैंl
वही जिन मर्दों के सीने में बाल नहीं होते वह विश्वासपात्र नहीं होते हैंl

4-चौंडा सीना

जिन पुरुषों का सीना चौड़ा होता हैं वे साहसी होते है और अपना मुकाम अपने दम पर हासिल करते हैंl वहीं जिनका सीना एक तरफ से छोटा होता हैं वैसे पुरुष बहुत चालाक और दिखावेबाज़ होते हैंl


5-कठोर सीना

जिन पुरुषों का सीना कठोर होता हैं उन्हें हर प्रकार का सुख मिलता हैं लेकिन ऐसे पुरुष सिर्फ अपने बारे में ही सोचने वाले होते हैंl वहीँ ऊँचे सीने वाले मर्द के साथ अकाल मृत्यु का खतरा लगा रहता हैंl

शनिवार, 22 जुलाई 2017

श्रावण अमावस्या 23 जुलाई की करें यह खास पूजा



शास्त्रों में लिखा है कि सावन के महीने में महादेव की पूरे मनोयोग से पूजा करने से कई जन्मा सुधर जाते हैं। लेकिन हम आपको बता रहे हैं ऐसा सुखद रहस्यं जिसका बहुत ही कम लोगों पता होगा। शिव पुराण के अनुसार सावन के महीने में अमावस्याख की रात यदि भोलेनाथ की चारों प्रहरों में पूजा की जाए तो न केवल लक्ष्मीे हमेशा आपके निवास पर चिरकाल तक रहेगी बल्कि कुबेर का भी डेरा यही हो जाएगा।

सावन मास चातुर्मास के अंदर रहता है। इसमें भिक्षु, संन्यासी, मुनि, वैरागी, स्थविर और ब्राह्मण-क्षत्रिय सभी कुटिया में वास करते हैं। वैदिक अनुष्ठान चातुर्मास की शुरुआत सावन से ही होती है। ऐसे में ध्यान ही एकमात्र कर्म है और मन ही साधक का एकमात्र संगी। मन वश में रहे तो कोई परेशानी नहीं। तब बाहर अविराम वर्षा चले, फुर्राट वाली वर्षा हो, झड़ी लगी हो या धारासार वर्षण हो रहा हो, पर योगी का मन न इनसे विकल होता है और न ही प्रमत्त। सावन की बरखा में वह भीतर-भीतर मन पर हंस की तरह आसन जमाए अविचल और अविकल भाव से ईश्वर की लीला को देखता रहता है और सांसारिक सुख को महासुख में बदलकर भोगता है। श्रावण में संन्यासी अपनी चेतना को रूप लोक से ऊपर अरूप-लोक में स्थित करने की चेष्टा करता है। वस्तुत: सावन आने-जाने वाला काल मात्र नहीं बल्कि यह तो पूरी तरह से हमारी आध्यात्मिक संस्कृति में रचा-बसा है।




अमावस्या पर चार प्रहर की पूजा
प्रथम प्रहर में संकल्प लेकर दूध से स्नान तथा ओम हृीं ईशानाय नम: मंत्र का जप करें। द्वितीय प्रहर में दही स्नान कराकर ओम हृीं अघोराय नम: का जप करें। तृतीय प्रहर में घी स्नान एवं ओम हृीं वामदेवाय नम: और चतुर्थ प्रहर में शहद स्नान एवं ओम हृीं सद्योजाताय नम: मंत्र का जाप करें। रात्रि के चारों प्रहरों में भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने से जागरण, पूजा और उपवास तीनों पुण्य कर्मों का एक साथ पालन हो जाता है। इस दिन प्रात: से प्रारंभ कर संपूर्ण रात्रि शिव महिमा का गुणगान करें और बिल्व पत्रों से पूजा अर्चना करें। रुद्राष्टाध्यायी पाठ, महामृत्युंजय जप, शिव पंचाक्षर मंत्र आदि के जप करने का विशेष महत्व है। शिवार्चन में शिव महिम्न स्तोत्र, शिव तांडव स्तोत्र, शिव पंचाक्षर स्तोत्र, शिव मानस पूजा स्तोत्र, शिवनामावल्याष्टक स्तोत्र, दारिद्रय दहन स्तोत्र आदि के पाठ करने का महत्व
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बुधवार, 19 जुलाई 2017

रामायण काल के 10 प्रमुख मायावी राक्षस



रामायण काल में कई मायावी राक्षस हुए है, जिन्होंने रामायण में अलग-अलग समय पर अपनी खास भूमिका निभाई थी। इस स्टोरी में हम रामायण काल के ऐसे ही 10 राक्षसों के बारे में बताएंगे जिनका वर्णन वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस में पाया जाता है।

1. रावण (Ravan) : –रावण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ ब्रह्मज्ञानी और बहु-विद्याओं का जानकार था। राक्षसों के प्रति उसके लगाव के चलते उसे राक्षसों का मुखिया घोषित कर दिया गया था। रावण ने लंका को नए सिरे से बसाकर राक्षस जाति को एकजुट किया और फिर से राक्षस राज कायम किया। उसने लंका को कुबेर से छीना था। उसे मायावी इसलिए कहा जाता था कि वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था। उसके पास एक ऐसा विमान था, जो अन्य किसी के पास नहीं था। इस सभी के कारण सभी उससे भयभीत रहते थे।

2.कालनेमि (Kalnemi) : – कालनेमि राक्षस रावण का विश्वस्त अनुचर था। यह भयंकर मायावी और क्रूर था। इसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक थी। रावण ने इसे एक बहुत ही कठिन काम सौंप दिया था। जब राम-रावण युद्ध में लक्ष्मण को शक्ति लगने से वे बेहोश हो गए थे, तब हनुमान को तुरंत ही संजीवनी लाने का कहा गया था। हनुमानजी जब द्रोणाचल की ओर चले तो रावण ने उनके मार्ग में विघ्न पैदा करने के लिए कालनेमि को भेजा। कालनेमि ने अपनी माया से तालाब, मंदिर और सुंदर बगीचा बनाया और वह वहीं एक ऋषि का वेश धारण कर मार्ग में बैठ गया। हनुमानजी उस स्थान को देखकर वहां जलपान के लिए रुकने का मन बनाकर जैसे ही तालाब में उतरे तो तालाब में प्रवेश करते ही एक मगरी ने उसी समय हनुमानजी का पैर पकड़ लिया। हनुमानजी ने उसे मार डाला। फिर उन्होंने अपनी पूंछ से कालनेमि को जकड़कर उसका वध कर दिया।


3 .ताड़का (Tadka) : –ताड़का के पिता का नाम सुकेतु यक्ष और पति का नाम सुन्द था। सुन्द एक राक्षस था इसलिए यक्ष होते हुए भी ताड़का राक्षस कहलाई। अगस्त्य मुनि के शाप के चलते इसका सुंदर चेहरा कुरूप हो गया था इसलिए उसने ऋषियों से बदला लेने की ठानी थी। वह आए दिन अपने पुत्रों के साथ मुनियों को सताती रहती थी। अयोध्या के पास स्थित सुंदर वन में अपने पति और दो पुत्रों सुबाहु और मारीच के साथ रहती थी। उसी वन में विश्वामित्र सहित अनेक ऋषि-मुनि तपस्या करते थे। ये सभी राक्षसगण हमेशा उनकी तपस्या में बाधाएं खड़ी करते थे। विश्वामित्र एक यज्ञ के दौरान राजा दशरथ से अनुरोध कर एक दिन राम और लक्ष्मण को अपने साथ सुंदर वन ले गए। राम ने ताड़का का और विश्वामित्र के यज्ञ की पूर्णाहूति के दिन सुबाहु का भी वध कर दिया था। राम के बाण से मारीच आहत होकर दूर दक्षिण में समुद्र तट पर जा गिरा।

4 .मारीच (Marich) : – राम के तीर से बचने के बाद ताड़का पुत्र मारीच ने रावण की शरण ली। मारीच लंका के राजा रावण का मामा था। जब शूर्पणखा ने रावण को अपने अपमान की कथा सुनाई तो रावण ने सीताहरण की योजना बनाई। देवी सीता का हरण करन के लिए रावण से मारीच के कहां कि तुम एक सुंदर हिरण का रूप धारण कर लो, जिसके सींग रत्नमय प्रतीत हो। शरीर भी चित्र-विचित्र रत्नों वाला ही प्रतीत हो। ऐसा रूप बनाओ कि सीता मोहित हो जाए। अगर वे मोहित हो गईं तो जरूर वो राम को तुम्हें पकड़ने भेजेंगी। इस दौरान मैं उसे हरकर ले जाऊंगा। मारीच ने रावण के कहे अनुसार ही कार्य किया और रावण अपनी योजना में सफल रहा। इधर राम के बाण से मारीच मारा गया।





5. कुंभकर्ण (Kumbhakarna) : – यह रावण का भाई था, जो 6 महीने बाद 1 दिन जागता और भोजन करके फिर सो जाता, क्योंकि इसने ब्रह्माजी से निद्रासन का वरदान मांग लिया था। युद्ध के दौरान किसी तरह कुंभकर्ण को जगाया गया। कुंभकर्ण ने युद्ध में अपने विशाल शरीर से वानरों पर प्रहार करना शुरू कर दिया इससे राम की सेना में हाहाकार मच गया। सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए राम ने कुंभकर्ण को युद्ध के लिए ललकारा और भगवान राम के हाथों कुंभकर्ण वीरगति को प्राप्त हुआ।

6. कबंध (Kabandha) – सीता की खोज में लगे राम-लक्ष्मण को दंडक वन में अचानक एक विचित्र दानव दिखा, जिसका मस्तक और गला नहीं थे। उसकी केवल एक ही आंख ही नजर आ रही थी। वह विशालकाय और भयानक था। उस विचित्र दैत्य का नाम कबंध था। कबंध ने राम-लक्ष्मण को एकसाथ पकड़ लिया। राम और लक्ष्मण ने कबंध की दोनों भुजाएं काट डालीं। कबंध ने भूमि पर गिरकर पूछा- आप कौन वीर हैं? परिचय जानकर कबंध बोला- यह मेरा भाग्य है कि आपने मुझे बंधन मुक्त कर दिया। कबंध ने कहा- मैं दनु का पुत्र कबंध बहुत पराक्रमी तथा सुंदर था। राक्षसों जैसी भीषण आकृति बनाकर मैं ऋषियों को डराया करता था इसीलिए मेरा यह हाल हो गया था।


7. विराध (Viradha) :- विराध दंडकवन का राक्षस था। सीता और लक्ष्मण के साथ राम ने दंडक वन में प्रवेश किया। वहां पर उन्हें ऋषि-मुनियों के कई आश्रम दिखें। वहां के ऋषियों ने उन्हें एक राक्षस के उत्पात की जानकारी दी। । उसे ब्रह्माजी से यह वर प्राप्त है कि किसी भी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र न तो उसकी हत्या ही कर सकती है और न ही उसके अंग छिन्न-भिन्न कर सकते हैं। राम और लक्ष्मण ने उससे घोर युद्ध किया और उसे हर तरह से घायल कर दिया। फिर उसकी भुजाएं भी काट दीं। तभी राम बोले- लक्ष्मण! वरदान के कारण यह दुष्ट मर नहीं सकता इसलिए यही उचित है कि हमें भूमि में गड्ढा खोदकर इसे बहुत गहराई में गाड़ देना चाहिए। लक्ष्मण गड्ढा खोदने लगे और राम विराध की गर्दन पर पैर रखकर खड़े हो गए। तब विराध बोला- हे प्रभु! मैं तुम्बुरू नाम का गंधर्व हूं। कुबेर ने मुझे राक्षस होने का शाप दिया था। मैं शाप के कारण राक्षस हो गया था। आज आपकी कृपा से मुझे उस शाप से मुक्ति मिल रही है। राम और लक्ष्मण ने उसे उठाकर गड्ढे में डाल दिया और गड्ढे को पत्थर आदि से बंध कर दिया।

8. & 9. खर और दूषण (Khar and Dushan) : – ये दोनों रावण के सौतेले भाई थे। ऋषि विश्रवा की 2 और पत्नियां थीं। खर पुष्पोत्कटा से और दूषण वाका से उत्पन्न हुए थे जबकि कैकसी से रावण का जन्म हुआ था। खर-दूषण को भगवान राम ने मारा था। खर और दूषण के वध की घटना रामायण के अरण्यक कांड में मिलती है। शूर्पणखा की नाक काट देने के बाद वह खर और दूषण के पास गई थी। खर और दूषण ने अपनी- अपनी सेना तैयार कर वन में रह रहे राम और लक्ष्मण पर हमला कर दिया था, लेकिन दोनों भाइयों ने मिलकर अकेले ही खर और दूषण का वध कर दिया।

10. मेघनाद (Meghnad) : – मेघदाद को इंद्रजीत भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने स्वर्ग पर आक्रमण करके उस पर अपना अधिकार जमा लिया था। मेघनाद बहुत ही शक्तिशाली और मायावी था। रावण के पुत्रों में मेघनाद सबसे पराक्रमी था। माना जाता है कि जब इसका जन्म हुआ तब इसने मेघ के समान गर्जना की इसलिए यह मेघनाद कहलाया। मेघनाद ने युवावस्था में दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की सहायता से ‘सप्त यज्ञ’ किए थे और शिव के आशीर्वाद से दिव्य रथ, दिव्यास्त्र और तामसी माया प्राप्त की थी। मेघनाथ का वध भगवान लक्ष्मण ने एक दिव्य बाण से किया था। बाण मेघनाद का सिर काटते हुए आकश में दूर तक लेकर चला गया।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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आज भी हनुमान जी धरती पर

ये सबूत गवाह है की आज भी हनुमान जी धरती पर है और इस खास मन्त्र के जाप से वो हो जाते है प्रगट


ये बात तो सब जानते है की कलियुग में एकमात्र हनुमान जी ऐसे देवता है जो धरती पर है, पर सवाल ये उठता है की अगर वो धरती पर है तो कहा क्योंकि मूर्ति में तो आप हर देवता के दर्शन करते है l हम आज ये बताने जा रहे है की पवनपुत्र हनुमान सिर्फ मूर्ति में ही नहीं हकीक़त में धरती में विराजमान है और ऐसा माना जाता है की वो हिमालय के जंगलो में वास करते है !



त्रेतायुग के अंत में जब भगवान् राम बैकुंठ धाम को पधार गए थे उस वक़्त कोई था जो कलियुग के अंत तक धरती पर भगवान् राम की भक्ति और जन कल्याण हेतु रुका l कलियुग में एकमात्र भगवान् बजरंग बली है जिनका अस्तित्व आपको इस धरातल पर मिलेगा जो आपको बताएगा की हिन्दू धर्म कितना प्राचीन और महत्वपूर्ण है l
आप जो अब पढने जा रहे है वो न ही सिर्फ दिलचस्प है बल्कि अविश्वसनीय भी, इसे पढने और जानने के बाद आपका भगवान् के प्रति श्रधा व विश्वास और दृढ होगा….जय बजरंग बली !
आगे जानिये की रामायण काल खत्म होते ही हनुमान जी  कहा और किस जगह साक्षात भ्रमण करते रहे और उन्होंने कौन सा ऐसा मन्त्र दिया जिसके जाप से वो स्वयं प्रगट हो जाते है पर उस मन्त्र के जाप के लिए भी आपको 2 शर्ते पूरी करनी पड़ती है, और आज के वक़्त को देखते हुए हर किसी में इतना सामर्थ्य नहीं की वो ये दो शर्ते पूरी कर पाए अगर वो शर्ते या नियम कोई पूरी करता है तो वो प्रजाति श्री लंका के जंगलो में रहती है और हर ४१ साल बाद उनकी पीढ़ी हनुमान जी के दर्शन प्राप्त करती है l 
बजरंग बली अमर है उन्हें वरदान है की वो इस कलियुग में धरती पर राम भक्तो के कल्याण के लिए रहेंगे जहाँ कही भी राम कथा और राम कीर्तन होगा वो वो वहां अदृश्य रूप से प्रस्तुत रहेंगे l लेकिन ये तो बात हुई अदृश्यता की अब बात करते है उनके साक्षात् स्वरूप की l त्रेतायुग के बाद जब द्वापरयुग आया जिसमे भगवान् कृष्ण के काल के समय भी कई जगह हनुमान जी का प्रसंग सुनने को मिला l कलियुग में सन 1300 में संत माधवाचार्य के आश्रम में हनुमान जी का आगमन हुआ था उसके बाद सन 1600 वो तुलसीदास जी को रामायण का हिंदी अनुवाद लिखने के लिए कहने आये थे, यहाँ पर सिलसिला थमा नहीं रामदास स्वामी , राघवेन्द्र स्वामी, श्री सत्य साईं बाबा इन सब ने पवनपुत्र हनुमान के साक्षात्कार किये है l
आगे जानिये की श्री लंका में वो कौन सी कम्युनिटी है जो आधुनिकीकरण से खुद को काटे रखा और और अपने पूर्वजो द्वारा निर्देश दिए हुए नियमो से बजरंग बली का आवाहन करती है ! 

धरती पर जहा जहा भी हनुमान ने विचरण किया वहा पर उनके चरण चीन्ह देखे जा सकते है l 


ये है वो मंदिर जो बजरंग बली के रहने के स्थान के नाम से जाना जाता है, यह स्थान तमिलनाडू राज्य के रामेश्वरम के  नज़दीक गंद्मादना पर्वत पर स्थित है और ऐसा माना जाता है की ये ही वो स्थान है जो हनुमान जी का रेजिडेंस प्लेस कहलाता है l
क्या आप ये जानते है की वो आज भी लोगो की मदद करने के लिए आते है पर अदृश्य रहते है, दृश्य सिर्फ एक ख़ास समुदाय के लोगो को है जो श्री लंका के जंगलो में रहते है l हनुमान जी ने एक मन्त्र दिया था उन लोगो को जिसके ज़रिये वो पवनपुत्र हनुमान का आवाहन करेंगे और उनके दर्शन प्राप्त कर सकेंगे पर उस मन्त्र का कोइ दुरूपयोग न करे इसके लिए हनुमान जी ने 2 शर्ते या कहे नियम रखे जिसका सही अर्थ केवल इसी प्रजाति के लोग ही समझते है 

कालतंतु कारेचरन्ति एनर मरिष्णु , निर्मुक्तेर कालेत्वम अमरिष्णु




ये वो चमत्कारी मन्त्र है जिसके पाठ और जाप से आप पवनपुत्र हनुमान के दर्शन प्राप्त कर सकते है l 
मन्त्र तो आपको पता चल गया लेकिन इसमें 2 नियम महत्वपूर्ण रखते है जो अनिवार्य है

पहली ये की आपकी अंतरात्मा को ये ज्ञात हो की उसका क्या सम्बन्ध है बजरंग बली से अर्थात वो एक भक्त का रिश्ता रखता है या शिष्य का या भाई बंधू सम्बन्ध का l सिर्फ इस मन्त्र को आजमाने के लिए ही नहीं आप उच्चारण कर सकते l


दूसरी कंडीशन ये की जिस जगह पर आप इस मन्त्र का उचारण कर रहे होंगे वहा से तकरीबन 980 मीटर की दूरी पर केवल वही मनुष्य उपस्थित होंगे जिन्होंने पहली औपचारिकता पूरी करी हो l अर्थात अगर वहा पर कोई मनुष्य उपस्थित भी हो तो केवल वो जिसकी अंतरात्मा को बजरंग बली से क्या सम्बन्ध है पता हो l
आगे जानिये की पवनसुत हनुमान ने किसकी सेवा से प्रसन्न होकर ये मन्त्र वरदान स्वरूप दिया और आज भी वो लोग जब हनुमान जी का आवाहन करते है तो आखिरी बार वो कब आये थे l

श्री लंका में एक जगह है पिदुरुथालागला जहाँ के पिदुरु पर्वत के जंगलो में एक विशेष जनजाति के लोग रहते है जिनके पूर्वजो को हनुमान जी ने ये मन्त्र वरदान स्वरूप दिया था l 


भगवान् राम के जाने के बाद हनुमान जी जंगलो में विचरण करते रहे और ऐसे ही जंगलो में वास करते रहे l


उन दिनों हनुमान जी लंका की और चले गये थे जहा रावन का भाई विभीषण राज करता था, उस वक़्त उन्होंने जंगलो में ही रहना शुरू कर दिया था जहा के कुछ समुदाय के लोगो ने उनकी सेवा करी l 


उनकी सेवा से प्रसन्न होकर पवनपुत्र ने जाते जाते कहा ” मै तुम्हारी सेवा से प्रसन्न हुआ फलस्वरूप मै तुम्हे एक मन्त्र वरदान स्वरूप देता हूँ “


कालतंतु कारेचरन्ति एनर मरिष्णु , निर्मुक्तेर कालेत्वम अमरिष्णु

“जब भी तुम्हे मेरे दर्शन प्राप्त करना हो इस मन्त्र का जाप करना और मै एक प्रकाश की तीर्व्गति के सामान तुम तक पहुच जाऊंगा


परन्तु मन्त्र प्राप्त करने के बाद उस समुदाय के मुखिया ने चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा की “प्रभु हम इस मन्त्र को सुरक्षित रखेंगे परन्तु अगर इसे किसी ने प्राप्त कर के दुरूपयोग करना चाहां तब क्या होगा ”


चिंतित मुखिया की बाते सुनकर हनुमान जी ने उत्तर दिया की “इसे मन्त्र को जाप करने से पहले उस व्यक्ति के मेरे से सम्बन्ध पता होना अनिवार्य है “
यानी अगर कोई भी इस मन्त्र को जपता है तो वो ये दो औपचारिकताये पूरी करेगा l
लेकिन उस व्यक्ति की चिंता अभी समाप्त नहीं होती वो आगे और प्रश्न करता है जिसके फलस्वरूप उनके वंशज आज इसका लाभ उठाते है जिसे पूरी दुनिया से स्वीकार किया है 
मुखिया ने कहा “प्रभु आप ने हमे आत्मज्ञान से परिपूर्ण किया परन्तु हमारे आने वाली पीढी का क्या हम तो जान गये की हम कौन है हमारा पूर्व जन्म क्या था हम किस लिए जन्मे है और मर कर कहा जायेंगे लेकिन आने वाली पीढ़ी तो ये नहीं जानती होगी की उसका आपसे क्या सम्बन्ध है तो क्या उन्हें आत्म ज्ञान की प्राप्ति नहीं होगी “
आगे जाने फिर क्या कहा भगवान् ने ….
हनुमान जी ने कहा “मै वचन देता हूँ की मै हर 41 साल बाद इस तुम्हारे समुदाय के पास आऊंगा और उन्हें आत्मज्ञान दूंगा l वक़्त के अंत तक केवल तुम्हारी प्रजाति होगी जो इस मन्त्र का जाप करने में सक्षम होगी और मेरे दर्शन प्राप्त कर सकेगी ”  l
ये लोग आज भी  पिदुरु पर्वत के जंगलो में वास करते है और हाल ही में ये तब चर्चा का विषय बने जब इन्हें कुछ अजीबो गरीब कार्य करते देखे गए l
आगे जानिए की वो कौन से कार्य है 
ये वो लोग हो जो आज की आधुनिक दुनिया से खुद को काटे है यानी इनका अब की दुनिया से कोई वास्ता नहीं l जब इस बात का पता लगया गया की वो क्या अजीबो गरीब कार्य है जिसे उन्हें करते देखा गया तो उन्होंने बताया की वो है “चरण पूजा” जी ये वो तब करते है जब हनुमान जी साक्षात् उनके सामने प्रगट होते है l अब इससे अंदाज़ा लगाये की जिन्होंने ये काम उन्हें करते देखा वो हनुमान जी को नहीं देख पाए उन्हें लगा की ये आखिर किसके साथ कर रहे है l
इसका मतलब आप या हम जैसे आम प्राणियों को उनके दर्शन इतने आसानी से प्राप्त नहीं होंगे l
हैरानी की बात ये की 2014 में उन्हें ये करते पाया गया ….आगे जानिये पूरी कहानी 
27 मई 2014 ये वो दिन था जब उन लोगो ने 41 साल बाद हनुमान जी के दर्शन प्राप्त किये थे और उनसे आत्मज्ञान प्राप्त किया था l अंदाजा लगा लीजिये की अब पुनह ये वक़्त 2055 में दौहराया जाएगा जब वो दोबारा इस समुदाय के लोगो को ज्ञान देने आयेंगे l इसका अर्थ ये भी है की अगर इनमे से किसी को भी हनुमान जी के दर्शन प्राप्त करने होते है तो वो इस मन्त्र का जाप करके उन्हें बुलाता है l सबसे दिलचस्प बात ये की इस समुदाय का मुखिया एक बुक बनाता है जिसमे वो हनुमान जी के आगमन से लेकर उनके शब्द, उनकी क्रियाँए, उनके उपदेश सब कुछ लिखता है l
आगे जानिये 2014 में जब वो आये थे तब क्या क्या नोट किया यहाँ के समुदाय के मुखिया ने l 
ये एक बहुत ही लम्बी किताब बन चुकी है जिस पर अब सेतु एशिया नामक धार्मिक संसथान इस पर शोध कर रहा है और अब तक 6 महीने में वो इस किताब में से केवल 3 अध्याय को ही समझ पाए है जिसमे बताया गया है की जब हनुमान जी यहाँ आते है तो क्या क्या करते है यानि इस किताब में वो शब्द है जो इस समुदाय का मुखिया लिखता है l
वो तीन अध्याय

भगवान् हनुमान जी का आगमन 

इसमें उल्लेख किया गया है की पिछले साल हनुमान जी को पिदुरु के पर्वतों में देखा गया और उन्होंने एक नवजात शिशु के पूर्व जन्म के बारे में जो दो माताओं द्वारा उत्पन्न हुआ कहानी बताई l 

दूसरा अध्याय 

हनुमान जी के साथ शहद निकालना 

अगले दिन हनुमान जी जंगल के समुदाय के लोगो के साथ शहद निकालने गये जो की बेहद रोचक था l

 






तीसरा अध्याय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उन्होंने श्लोक का अर्थ बताया है 

समय के जाल में भगवान् हनुमान 

इस अध्याय में हनुमान जी ने श्लोक का पूरा सार बताया है जो वक़्त को परिभाषित करता है भगवान् की परिभाषा में, आप और हम जब टाइम की बात करते है तो हमे घडी याद आती है लेकिन हनुमान जी ने श्लोक कालतंतु कारेचरन्ति एनर मरिष्णु का अर्थ समझाते हुए कहा वो जो समय के तार के जाल में चलता है l

पूरी दुनिया को इंतज़ार है की आगे का अध्याय कब लोगो के सामने आये जिससे वो भी इस मन्त्र के औपचारिकताये को पूरा करके हनुमान जी के दर्शन प्राप्त कर सके l 




मंगलवार, 18 जुलाई 2017

इस बार रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण

श्रावण शुक्ल पूर्णिमा यानी 7 अगस्त 2017 सोमवार को रक्षाबंधन पर इस बार खंडग्रास चंद्रग्रहण का योग बन रहा है। रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण और भद्रा का योग बनने के कारण लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि श्रावणी उपाकर्म कब किया जाए और राखी कब बांधी जाए। 

भद्रा की समाप्ति और चंद्र ग्रहण का सूतक लगने के बीच के समय में रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म और श्रवण पूजन करना शुभ रहेगा। 

चंद्र ग्रहण का 7 अगस्त की रात्रि 10 बजकर 40 मिनट पर प्रारंभ उज्जैन की श्री विक्रमादित्य पंचांग के अनुसार खंडग्रास चंद्र ग्रहण का 7 अगस्त की रात्रि 10 बजकर 40 मिनट पर प्रारंभ होगा। इसका मध्य काल 11 बजकर 39 मिनट पर होगा तथा मोक्ष मध्यरात्रि में 12 बजकर 35 मिनट पर होगा। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि 1 घंटा 55 मिनट रहेगी। ग्रहण का सूतक काल 7 अगस्त की दोपहर 1 बजकर 40 मिनट से प्रारंभ हो जाएगा। भद्रा 7 अगस्त को दोपहर 11.29 बजे तक रहेगी।
 इसलिए रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म और श्रवण पूजन प्रातः 11.30 से दोपहर 1.39 के मध्य संपन्न करें। ऐसे समझें ग्रहण का स्पर्श: रात्रि 10.40 बजे ग्रहण का मध्य: रात्रि 11.39 बजे ग्रहण का मोक्ष: रात्रि 12.35 बजे कुल अवधि : 1 घंटा 55 मिनट मकर राशि, श्रवण नक्षत्र में होगा चंद्रग्रहण 7 और 8 अगस्त की मध्यरात्रि में हो रहा यह चंद्रग्रहण भारत समेत एशिया के अधिकांश देशों, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय देशों, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों में दिखाई देगा। यह चंद्रग्रहण मकर राशि और श्रवण नक्षत्र में होगा। इसलिए अलग-अलग राशियों पर ग्रहण का अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा।
 ग्रहण के प्रभाव से मेष, सिंह, कन्या, वृश्चिक और मीन ये पांच राशियों की किस्मत चमकने वाली है। इन राशियों वाले लोग यदि बेरोजगार हैं तो इन्हें उच्च पद वाली नौकरी मिलेगी। अविवाहित हैं तो विवाह पक्का हो जाएगा, संतान नहीं है तो संतान की प्राप्ति होगी और यदि धन की कमी से जूझ रहे हैं तो धन की प्राप्ति होगी। ग्रहण मिश्रित फलदायी वृषभ, कर्क और धनु राशि वालों के लिए ग्रहण मिश्रित फलदायी रहेगा। यानी उनके कुछ काम अच्छे होंगे तो कुछ में बाधाएं भी आएंगी। चूंकि ग्रहण मकर राशि पर है इसलिए मकर के साथ मिथुन, तुला और कुंभ राशियां बुरे प्रभाव से गुजरेंगी। इन राशि वालों को मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ेगा। स्वास्थ्य खराब होगा, धन की हानि होने के संकेत हैं। इन राशि वाले भगवान शिव की विशेष आराधना पूजा करें। 

ग्रहण काल में ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करना सभी राशि वालों के लिए शुभ रहेगा। ग्रहण काल में ये काम न करें शास्त्रों में ग्रहण काल के दौरान कुछ कार्यों को न करने के निर्देश दिए गए हैं। वे काम हैं ग्रहण काल में भोजन न करें। गर्भवती स्त्रियां बाहर न निकलें, उन पर चंद्र की छाया बिलकुल न पड़े इस बात का ध्यान रखें। सहवास न करें, झूठ न बोलें। निद्रा का त्याग करें। चोरी न करें। किसी भी प्रकार के पाप कर्म से दूर रहें और ग्रहण काल में शिव या गायत्री मंत्र का जाप करते रहें।