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शनिवार, 24 जून 2017

आजमाएं ये आसान उपाय,श्रीगणेश करेंगे हर वास्तु समस्या दूर


घर या कार्यस्थल के किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की प्रतिमा या चित्र लगाने से भी लाभ मिलता है। लेकिन प्रतिमा लगाते समय ध्यान रखें कि इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में नहीं हो।


घर में अगर वास्तु दोष है तो बिना किसी तोड़-फोड़ के श्रीगणेशजी को स्थापित और वंदन कर वास्तुदोषों को कम या खत्म किया जा सकता है।



- यदि घर के मुख्य द्वार पर एकदंत की प्रतिमा या चित्र लगाया गया है तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह गणेशजी की प्रतिमा इस प्रकार लगाए कि दोनों गणेशजी की पीठ एक दूसरे से मिलती हो।



- इस प्रकार से दूसरी प्रतिमा या चित्र लगाने से वास्तु दोषों का शमन होता है। जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर घी मिश्रित सिंदूर से स्वास्तिक दीवार पर बनाने से भी वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है।




- घर या कार्यस्थल के किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की प्रतिमा या चित्र लगाने से भी लाभ मिलता है। लेकिन प्रतिमा लगाते समय ध्यान रखें कि इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में नहीं हो।




- घर में बैठे गणेशजी और कार्यस्थल पर खड़े गणपतिजी का चित्र लगाना लाभकारी होता है। लेकिन ध्यान रखें कि खड़े गणेशजी के दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए हों। इससे कार्यों में स्थिरता आती है।


भवन के ब्रह्म स्थान अर्थात केंद्र में, ईशान कोण और पूर्व दिशा में सुखकर्ता की मूर्ति अथवा चित्र लगाना शुभ रहता है। लेकिन टॉयलेट अथवा ऐसे स्थान पर गणेशजी का चित्र नहीं लगाएं।




यदि खिड़कियां रखना आवश्यक हो तो इन दोनों दिशाओं में छोटी व कम खिड़कियां होनी चाहिए। पश्चिम में खिड़की को पूरी पश्चिमी दीवार छोड़कर वायव्य कोण में रखा जाना चाहिए।










- दक्षिण दिशा की दीवार में आग्नेय कोण में खिड़की रखना ज्यादा शुभफलदायी होता है। इससे सूर्य की सायंकालीन हानिकारक रश्मियों का प्रवेश भवन में नहीं हो पाता।











- भवन में खिड़कियों की स्थिति इस प्रकार होनी चाहिए जिनसे ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन भवन में आ सके। इसके लिए यथासंभव पूर्व व उत्तर दिशा की खिड़कियों के बाहर की तरफ छोटे पौधे लगाएं, जबकि पश्चिम व दक्षिण की खिड़कियों के बाहर बड़े पेड़ लगाएं।











- एक कक्ष में खिड़कियों की संख्या दो से अधिक संख्या नहीं होनी चाहिए। भवन में खिड़कियों की संख्या सम हो विषम नहीं।

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