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शुक्रवार, 31 मार्च 2017

Easy Measures to Increase Income



उपाय-1
जब भी आप बैंक में पैसा जमा कराने या निकालने जाएं तो मन ही मन मां लक्ष्मी के मंत्र का जाप करते रहें। यदि लक्ष्मी मंत्र याद न हो तो विष्णु मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। ऐसा करने से लेन-देन में आपको लाभ होगा, साथ ही बैंक में जमा राशि में भी बरकत होगी। नीचे कुछ मंत्र दिए गए हैं। इनमें से किसी भी मंत्र का जाप आप कर सकते हैं।
मंत्र
1. ऊं महालक्ष्म्यै नम:
2. ऊं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:
3. ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम:
4. ऊं विष्णवे नम:
5. ऊं नमो नारायण:


उपाय-2
शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को यथाशक्ति (जितना संभव हो) चावल भगवान शिव के मंदिर ले जाएं। अब अपने दोनों हाथों में जितने चावल आ जाएं उतने शिवजी को अर्पण कर दें और भगवान शिव से धन प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें। जितने चावल के दानें शिवजी को अर्पण किए जाते हैं, उसका उतने ही हजार गुना फल मिलता है। अब बचा हुआ चावल गरीबों में बांट दें। यह इनकम बढ़ाने का अचूक उपाय है।

उपाय-3
हर शुक्रवार को तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं व नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें। इस उपाय से आपके बैंक अकाउंट में धन सदैव बढ़ता रहेगा। यदि आप किसी ऑफिस में काम करते हैं या आपकी कोई दुकान है तो आप अपने वर्क टेबल पर मोती शंख भी रखें। यह उपाय करने से निश्चित ही आपका बैंक बैलेंस बढ़ने लगेगा।
मंत्र- ऊं श्रीं श्रीं श्रीं

उपाय-4
जब किसी महीने के कृष्ण पक्ष में भरणी नक्षत्र आए तो उस दिन पानी से भरे हुए चार कलश लेकर किसी सुनसान जगह पर जाएं और वहां उन कलशों को रखकर चुपचाप चले आएं। फिर दूसरे दिन जाकर जो कलश खाली मिले, उसे घर ले आएं। शेष को वहीं छोड़ दें। खाली कलश को घर के एकांत कोने में रखकर रोज उसकी पूजा करें तो उस व्यक्ति पर लक्ष्मी प्रसन्न होकर उसी के घर में निवास करती हैं।


उपाय-5
धन प्राप्ति के उपायों में कई वस्तुओं का उपयोग भी किया जाता है, जो माता लक्ष्मी को प्रिय हैं। ऐसी ही एक वस्तु है समुद्र से निकलने वाली कौड़ियां। दिखने में यह बहुत साधारण होती है लेकिन इसका प्रभाव बहुत अधिक होता है। इसके उपायों से इनकम बढ़ने लगती है-
1. चांदी के सिक्कों के साथ यदि कौड़ियां धन स्थान पर रखी जाएं तो निश्चित ही धन लाभ होता है।
2. कौड़ियों को केसर या हल्दी से रंग कर पीले कपड़े में बांध कर तिजोरी में रखने से लाभ होता है।
3. गल्ले में, तिजोरी में या आलमारी में जहां पैसे रखते हैं वहां कौड़ियां रखने से अचानक धन लाभ होता है।

उपाय-6
बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कामों से निपटकर लक्ष्मीजी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद मूर्ति या तस्वीर की विधिवत पूजा करें। लक्ष्मीजी के चरणों पर इत्र लगाएं और इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 5 माला जप करें-
ऊँ ह्लीं ऐं क्लीं श्री:
इसके बाद किसी ब्राह्मण और कुंवारी कन्या को भोजन करवाकर उसे दक्षिणा, वस्त्र, आदि भेंट स्वरूप प्रदान करें। तत्पश्चात लक्ष्मीजी की वह मूर्ति या तस्वीर अपने पूजा स्थान या कार्यस्थल पर स्थापित कर दें। आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपकी हर समस्या का निदान हो जाएगा और धन का आगमन भी होने लगेगा।

उपाय-7
किसी गुरुवार को एक पीले रंग का रूमाल या कपड़ा लेकर किसी ऐसे मंदिर जाएं, जहां तुलसी का पौधा लगा हो। अब उस तुलसी के पौधे के आस-पास जो घास उगी हो, उसे तोड़कर पीले कपड़े या रूमाल में रखकर वापस घर ले आएं। इसको व्यापार स्थल तथा घर में रख दें। कुछ ही दिनों में व्यापार में वृद्धि तथा धन की बरकत दिखाई देने लगेगी।


उपाय-8
एक पीले कपड़े पर कुंकुम से 5 बार नीचे बताया गया मंत्र लिखें। अब इस कपड़े पर 5 कमल के फूल, 5 कौड़ी, 5 गोमती चक्र व 1 मोती शंख रखकर शुक्रवार की रात किसी लक्ष्मी मंदिर में चुपचाप रख आएं। इस उपाय से जल्दी ही आपकी इनकम का स्त्रोत स्थाई हो जाएगा और उसमें बढ़ोत्तरी भी होगी।
मंत्र- ऊं श्रीं शिवत्वं श्रीं ऊं

उपाय-9
किसी शुभ योग में रात के समय लाल वस्त्र पहन कर आसन पर बैठें। सामने दस लक्ष्मीकारक कौड़ियां रखकर एक बड़ा तेल का दीपक जला लें और प्रत्येक कौड़ी को सिंदूर से रंग हकीक माला से इस मंत्र की पांच की माला मंत्र जाप करें
मंत्र
ऊँ ह्रीं श्रीं श्रियै फट्
इस प्रयोग से लक्ष्मी शीघ्र ही प्रसन्न हो जाती है और आपके जीवन में फिर कभी धन की कमी नहीं होती।

उपाय-10
रास्ते में जाते समय या कहीं और कोई किन्नर नजर आए तो उसे अपनी इच्छा के अनुसार कुछ रुपए आदि भेंट करें। संभव हो तो उसे भोजन भी कराएं। इसके बाद उस किन्नर से आप एक सिक्का (उसके पास रखा हुआ, आपके द्वारा दिया हुआ नहीं) मांग लें। इस सिक्के को अपने गल्ले, कैश बॉक्स या धन स्थान पर रख दें। आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपकी सेविंग बढ़ जाएगी और साथ में इनकम भी।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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बुधवार, 29 मार्च 2017

महिलाओं के शरीर से जुड़े तथ्य

महिलाओं को गंध का अहसास बेहतर होता है
जन्म से ही स्त्रियों की नाक में गंध का अहसास करने वाले रिसेप्टर ज्यादा होते हैं। इसलिए वे पूरी जिंदगी पुरुषों के मुकाबले सुगंध और दुर्गंध का अहसास ज्यादा अच्छे तरीके से कर पाती हैं। इस गुण का फायदा उन्हें रसोई में भी मिलता है।

महिलाओं को स्वाद का अहसास भी बेहतर होता है
महिलाओं की जीभ को चटोरी कहा जाता है। इसकी एक वजह यह भी है कि उनकी जीभ में टेस्ट बड्स ज्यादा संख्या में होती हैं। मतलब यह कि उन्हें हर तरह के स्वाद का अहसास जल्दी और बेहतर तरीके से हो सकता है। इसीलिए तो वे जरा-सा खाना चखकर पूरा हाल बता देती हैं। यह गुण परिवार की सुरक्षा के लिए डेवलप हुआ है, ताकि रसोई की इंचार्ज महिलाएं खराब खाने को पहले ही पहचान जाएं।

महिलाएं ज्यादा भावुक होती हैं
संभवत: यही एक फैक्ट है, जो जगजाहिर है। सालभर में महिलाएं 30 से 60 बार तक रो डालती हैं, जबकि पुरुष 6 से 12 बार। इस भावुकता के चलते महिलाओं के दिल का गुबार निकल जाता है और उन्हें सेहत संबंधी फायदे मिलते हैं।

महिलाएं रंग ज्यादा अच्छी तरह पहचानती हैं
पुरुष लाल-पीला-हरा-नीला जैसे रंग जानते हैं, जबकि महिलाएं लाल या नीले जैसे रंगों के भी दसियों शेड्स में अंतर कर सकती हैं। यह भी मानव इतिहास के हजारों सालों में धीरे-धीरे विकसित हुआ गुण है। इससे खतरों को पहचानने में मदद मिलती है।

इसलिए ज्यादा लचीला होता है शरीर
महिलाओं की मसल्स हल्की और ज्यादा लचीली होती हैं। कुदरत ने उन्हें यह खूबी इसलिए दी है, ताकि उनका शरीर प्रेगनेंसी के दौरान आराम से बदल सके और चाइल्ड डिलेवरी के बाद आसानी से रिकवर भी कर सके। महिलाओं के एस्ट्रोजन हॉर्मोन के कारण उनकी मसल्स में यह खूबी होती है। यही वजह है कि लड़कियां ज्यादा अच्छी जिम्नास्ट होती हैं। इसके अलावा उनकी गर्दन भी ज्यादा फ्लेक्सिबल होती है। वे अपनी गर्दन ज्यादा घुमा सकती हैं।

महिलाओं के बाल इसलिए होते हैं रेशमी
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के बालों की मोटाई आधी ही होती है। उनके बाल चिकने भी होते हैं। यही वजह है कि स्त्रियों के बाल रेशमी और मुलायम लगते हैं। यही नहीं, किसी महिला के बालों की क्वालिटी से उसकी रिप्रोडक्शन क्षमता का पता भी चलता है। यानी बालों की क्वालिटी जितनी अच्छी होगी, महिला द्वारा सेहतमंद बच्चे को जन्म देने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।

महिलाएं ज्यादा दर्द सहन कर सकती हैं
महिलाओं में दर्द के रिसेप्टर अधिक होते हैं। इसका मतलब है कि उन्हें दर्द का अहसास जल्दी और ज्यादा होता है। इसके बावजूद वे ज्यादा दर्द सहन कर सकती हैं। यही वजह है कि महिलाएं सिरदर्द, बदन दर्द होते हुए भी काम करती रहती हैं।


नींद में भी एक्टिव रहता है दिमाग
जागते रहने की तुलना में नींद में महिलाओं की दिमागी एक्टिविटीज सिर्फ 10 प्रतिशत ही कम होती हैं। इसका अर्थ है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का ब्रेन सोते समय भी काम करता रहता है। इस खासियत के चलते औरतें छोटे बच्चों की बेहतर देखभाल कर पाती हैं। आपने देखा होगा कि आधी रात को भी शिशु की हल्की-सी आवाज से मां की नींद तुरंत खुल जाती है।

उनका दिल तेजी से धड़कता है
महिलाओं का दिल ज्यादा मजबूत माना जाता है। वह मर्दों के दिल के मुकाबले छोटा होता है। महिलाओं के दिल का एवरेज वजन 118 ग्राम होता है, जबकि पुरुषों के दिल का वजन इससे 60 ग्राम ज्यादा होता है। महिला का दिल पुरुष के मुकाबले ज्यादा तेजी से धड़कता है।

महिलाएं गहरा जुड़ाव महसूस करती हैं
दिल लगा लेना वाक्य महिलाओं पर सटीक बैठता है। वे किसी भी रिश्ते में अधिक गहरा जुड़ाव महसूस करती हैं। उनके दिमाग में ऐसे हिस्से ज्यादा डेवलप होते हैं, जो अफेक्शन का अहसास कराते हैं। इसलिए महिलाएं किसी भी रिश्ते को अच्छे ढंग से निभाती हैं।

महिलाएं इसलिए ज्यादा बोलती हैं
औरतों के दिमाग में स्पीच और वर्ड प्रोसेसिंग के लिए दो सेंटर होते हैं, जबकि मर्दों के दिमाग में ऐसा एक ही सेंटर होता है। इसी कारण महिलाएं तेजी से और साफ-साफ बोल सकती हैं। उनके पास नॉनवर्बल इशारे भी पुरुषों की तुलना में दुगने होते हैं। यानी वे बिना बोले भी बहुत कुछ कह सकती हैं।

महिलाएं कम फैट बर्न करती हैं
महिलाओं के शरीर में भीतरी अंग छोटे होते हैं। यही कारण है कि अगर महिला और पुरुष दोनों बैठे हों, तो महिला का शरीर कम कैलोरी बर्न करेगा। मातृत्व की तैयारी के लिए उनके शरीर में फैट जमा करने की प्रवृत्ति भी होती है।

ऊंचे सुर ज्यादा अच्छी तरह सुनती हैं महिलाएं
महिलाएं हायर फ्रिक्वेंसी की आवाज, यानी ऊंचे सुर ज्यादा साफ-साफ सुन सकती हैं। यह भी उन्हें बच्चे पालने में मदद करता है, क्योंकि बच्चों के रोने की आवाज हायर फ्रिक्वेंसी की होती है। इसलिए माताएं अपने बच्चे का रोना तुरंत पहचान जाती हैं और उसके पास पहुंच जाती हैं।

महिलाओं की स्किन ज्यादा सेंसेटिव होती है
महिलाआें की स्किन पुरुषों के मुकाबले ज्यादा पतली और सेंसेटिव होती है। उन्हें स्पर्श का अहसास भी अच्छी तरह होता है। इसीलिए वे बारीक चीजों को छूकर पहचान जाती है। टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन के कारण मर्द मोटी स्किन वाले होते हैं।

महिलाएं अपनी पलकें ज्यादा झपकती हैं
पुरुषों की तुलना में महिलाओं की पलकें दो गुना तक ज्यादा झपकती हैं। पुरुषों को लगता है कि पलकें झपकना महिलाओं की अदा है, जबकि वे स्वाभाविक रूप से ऐसा करती हैं। इसके चलते उनकी आंखों में लुब्रिकेशन ज्यादा होता है और उन्हें ड्राई आई की समस्या कम सताती है। हालांकि मीनोपॉज के बाद हॉर्मोनल बदलाव से उन्हें यह समस्या हो सकती है।


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सोमवार, 27 मार्च 2017

दांत भी बताते है आपके स्वभाव के बारे में



1. जिन स्त्रियों के दांत थोड़े बाहर की ओर निकले हुए होते है, वे बहुत बोलती हैऔर अपनी बात मनवाने में माहिर होती है। इसी कारण परिवार वालों से इनकी कम बनती है। ये कभी हंसमुख तो कभी गुस्सैल हो जाती है।

2. जिसके दांत सीधे और सपाट रेखा में होते हैं, वह धनवान होता हैं। ऐसे लोग किसी की नौकरी नहीं करते। अपने परिचितों व रिश्तेदारों के प्रति इनका स्वभाव बहुत अच्छा होता है। इन्हें दिखावा करना पसंद होता है।

3. सफ़ेद व सुन्दर दांत वाले व्यक्ति किस्मत वाले होते हैं। ये सभी से जल्दी घुल-मिल जाते हैं। ये इमोशनल किस्म के लोग होते है जो जल्दी ही किसी पर भी भरोसा कर लेते हैं। इस कारण इन्हें कभी-कभी धोखा भी खाना पड़ता है।


4. जिस व्यक्ति के दांतों के बीच थोड़ी दूरी होती है, वह दूसरों के पैसों पर ऐश करने वाले हो सकते हैं। ऐसे लोगों को पैतृक संपति भी मिल जाती है और ये जीवन भर उसी पर निर्भर रहते है। ये बहुत खर्चीले होते हैं।

5. जिन लोगों के दांत हल्के काले होते है, वो बहुत चतुराई से अपना काम निकालते है, ये झगड़ालू स्वभाव के भी होते हैं। ऊपर से दिखने में ये जेंटलमेन लगते हैं, लेकिन अंदर से बहुत ही स्वार्थी होते हैं।

6. जिन लोगों के दांत पीले या हल्के लाल रंग के होते है, खुशमिजाज होते हैं। इन पर भरोसा किया जा सकता हैं। इन्हें लोगों से मिलना और हंसना-हंसाना अच्छा लगता है।

7. काले व आड़े-टेड़े दांत वाले व्यक्ति पहले अपने बारे में सोचते है। अपना हित साधने के लिए ये किसी से भी दोस्ती कर लेते हैं और मतलब निकलते ही उसे छोड़ देते हैं। ये लालची स्वभाव के भी होते है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शुक्रवार, 24 मार्च 2017

ये है दुनिया के 5 सबसे रहस्मय खजाने, जो भी खोजने गया वो वापस नहीं आया



ये है दुनिया के 5 सबसे रहस्मय खजाने, जो भी खोजने गया वो वापस नहीं आया



दुनिया के सबसे हॉन्टेट प्लेसेज में शुमार 5 पांच ऐसी जगहें हैं जहां अकूत खजाने भरे पड़े हैं, लेकिन ये बेहद डरावने हैं। माना जाता है कि इन रहस्यमय खजानों को खोजने में कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके अलावा कई लोगों को खजाने का कुछ हिस्सा भी मिला, लेकिन वो जिंदा नहीं लौट सके।



द अंबेर रूम का निर्माण 1707 ईस्वी में पर्सिया में किया गया था। यह एक पूरी तरह से एक सोने का चेंबर है। 1941 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नाजियों ने इस पर कब्जा कर लिया था। इस खजाने को सुरक्षित रखने के लिए इसे अलग-अलग भागों में बांट दिया। इसके बाद 1943 में इसे एक म्यूजियम में प्रदर्शन के लिए रखा गया। लेकिन आश्चर्य तो यहां है कि उसके बाद ये पूरा चेंबर ही गायब हो गया। इसके बाद आज तक चेंबर का पता नहीं चला और जो इसकी तलाश में गए उनकी मौत हो गई।..

ओक आइलैंड (oak island) के रहस्य को सबसे 1795 में कुछ लड़कों द्वारा उजागर किया गया था। इन लड़कों को कनाडा के नोवा स्कोटिया तट के पास एक छोटे से द्वीप पर हल्की रोशनी दिखी थी। इसके बाद जब ये वहां पहुंचे तो उन्होंने पाया कि किसी ने यहां खुदाई की है। इसके बाद जब इन्हीं लड़कों ने वहां और खुदाई की तो उन्हें लकड़ी और नारियल की परतें मिली। इन लड़कों को यहां एक पत्थर भी मिला जिस पर लिखा था कि 40 फीट की गहराई पर दो मिलियन पाउंड गड़े हैं। इसके बाद बहुत से लोगों ने इस खजाने को खोजने के कोशिश की और आज भी खोज कर रहे हैं, लेकिन किसी को अभी तक कुछ नहीं मिला। बल्कि खजाना खोजते समय अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है।...

अमरीका के दक्षिण-पश्चिम इलाके में सोने की खदान (the lost dutchman mine) थी। 1510-1524 के बीच स्पेन के फ्रांसिस्को वास्क डी कोरोनाडो ने इस खदान को खोजने की कोशिश की। इस खजाने को खोजने के लिए उन्होंने जिन लोगों को इस काम में लगाया उनकी एक के बाद एक मौत हो गई। हालांकि यहां 1845 में डॉन मिगुएल पेराल्टा को कुछ सोना मिला, लेकिन स्थानीय अपाचे आदिवासियों ने उनको मौत के घाट उतार डाला। 1931 में इसी खजाने को खोजने के चक्कर में एडोल्फ रूथ लापता हो गए और इसके 2 साल बाद उनका कंकाल मिला था। 2009 में भी डेनवर निवासी जेस केपेन ने यह खजाना खोजने की कोशिश की थी लेकिन 2012 में उनका शव मिला।

मैक्सिको के राष्टपति बेनिटो जुआरेज ने 1864 अपने सैनिकों को खजाने के साथ सेन फ्रांसिस्को भेजा था। इसमें सोने के सिक्के और कीमती जेवरात भरे थे। इसके बाद एक सैनिक की रास्ते मौत हो गई तो बाकी सैनिकों इस खजाने को रास्ते में ही गाड़ दिया। सैनिकों को ऐसा करते हुए डियागो मोरेना ने देख लिया था और उसने बाद में इस खजाने को निकाला और दूसरी जगह गाड़ दिया। लेकिन इसके कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि डियागो की मौत के बाद एक दोस्त जीसस मार्टिनेज ने इस खजाने को पाना चाहा लेकिन उसकी भी मौत हो गई। 1885 में बास्क शेफर्ड को इस खजाने का कुछ हिस्सा मिला था, लेकिन वो ही बाद में उसकी मौत का कारण बना। इसके बाद 1939 में इस खजाने की खुदाई की गई, लेकिन कुछ भी नहीं मिला। इस खजाने को खोजने के वालों में से 9 लोगों की मृत्यु हो गई।


अमरीका में मिलफोर्ड के पास एक छोटा द्वीप (charles island) है। लेकिन इस द्वीप को शापित माना जाता है। कहा जाता है कि 1721 में मैक्सिकन सम्राट गुआजमोजिन का खजाना चोरी कर चोरों ने इस द्वीप पर छुपा दिया था। इसके बाद 1850 में कुछ लोग यहां पर खजाने की तलाश में आए लेकिन उनकी भी मौत हो गई। इसके बाद जो भी इस खजाने को खोजने गया उसकी मौत हो गई।






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गुरुवार, 23 मार्च 2017

These miraculous signs are indicative of receipts

धनप्राप्ति के संकेत देते है ये चमत्कारी लक्षण

प्रकृति कई बार धनप्राप्ति के संकेत देती है लेकिन हम उनको प्रहचान नहीं पाते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे ही संकेतों के बारे में जो लक्ष्मी (धन) आगमन के बारे में हमें पहले से ही सूचित कर देते हैं।

1- अगर आपके शरीर के दाहिने भाग में या सीधे हाथ में लगातार खुजली हो, तो समझ लेना चाहिए कि आपको धन लाभ होने वाला है।
2- यदि कोई सपने में देखे कि उस पर कानूनी मुकदमा चलाया जा रहा है, जिसमें वह निर्दोष छूट गया है, तो उसे अतुल धन संपदा की प्राप्ति होती है।
3- लेन-देन के समय यदि पैसा आपके हाथ से छूट जाए, तो समझना चाहिए कि धन लाभ होने वाला है।
4- जो व्यक्ति सपने में मोती, मूंगा, हार, मुकुट आदि देखता है, उसके घर में लक्ष्मी स्थाई रूप से निवास करती है।

5- जिसे स्वप्न में कुम्हार घड़ा बनाता हुआ दिखाई देता है, उसे बहुत धन लाभ होता है।
6- दीपावली के दिन यदि कोई किन्नर संज-संवर कर दिखाई दे, तो अवश्य ही धन लाभ होता है। ये धन लाभ अप्रत्याशित रूप से होता है।
7- सोकर उठते ही सुबह-सुबह कोई भिखारी मांगने आ जाए, तो समझना चाहिए कि आपके द्वारा दिया गया पैसा (उधार) बिना मांगे ही मिलने वाला है। इसलिए भिखारी को अपने द्वार से कभी खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।
8- यदि कोई सपने में स्वयं को कच्छा पहनकर कपड़े में बटन लगाता देखता है, तो उसे धन के साथ मान-सम्मान भी मिलता है।

9- यदि कोई स्वप्न में किसी को चेक लिखकर देता है, तो उसे विरासत में धन मिलता है तथा उसके व्यवसाय में भी वृद्धि होती है।
10- गुरुवार के दिन कुंवारी कन्या पीले वस्त्रों में दिख जाए, तो इसे भी शुभ संकेत मानना चाहिए। ये भी धन लाभ होने के संकेत है।
11- अगर आप धन संबंधित काम के लिए कहीं जाने के लिए कपड़े पहन रह हैं और उसी समय आपकी जेब से पैसे गिरें, तो यह आपके लिए धन प्राप्ति का संकेत है।
12- यदि कोई सपने में दियासलाई जलाता है, तो उसे अनपेक्षित रूप से धन की प्राप्ति होती है।

9- यदि कोई स्वप्न में किसी को चेक लिखकर देता है, तो उसे विरासत में धन मिलता है तथा उसके व्यवसाय में भी वृद्धि होती है।
10- गुरुवार के दिन कुंवारी कन्या पीले वस्त्रों में दिख जाए, तो इसे भी शुभ संकेत मानना चाहिए। ये भी धन लाभ होने के संकेत है।
11- अगर आप धन संबंधित काम के लिए कहीं जाने के लिए कपड़े पहन रह हैं और उसी समय आपकी जेब से पैसे गिरें, तो यह आपके लिए धन प्राप्ति का संकेत है।
12- यदि कोई सपने में दियासलाई जलाता है, तो उसे अनपेक्षित रूप से धन की प्राप्ति होती है।

17- जो व्यक्ति सपने में फल-फूलों का भक्षण करता है, उसे धन लाभ होता है। जो स्वप्न में ध्रुमपान करता है, उसे भी धन प्राप्ति होती है।
18- कुत्ता यदि अचानक धरती पर अपना सिर रगड़े और यह क्रिया बार-बार करे तो उस स्थान पर गढ़ा धन होने की संभावना होती है।
19- यदि यात्रा करते समय किसी व्यक्ति को कुत्ता अपने मुख में रोटी, पूड़ी या अन्य कोई खाद्य पदार्थ लाता दिखे, तो उस व्यक्ति को धन लाभ होता है।
20- यदि कोई यात्री घर को लौट रहा हो और गधा उसके बाईं ओर रेंके तो उसे थोड़े समय बाद धन लाभ होता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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बुधवार, 22 मार्च 2017

लाल किताब के 13 टोटके, उपाय करते ही दिखता है असर



लाल किताब के 13 टोटके, उपाय करते ही दिखता है असर


व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे सभी कर्मों का फल उसके भाग्य के रूप में मिलता है। अच्छे कर्मों पर अच्छा तथा बुरे कर्मों पर बुरा भाग्य बनता है। हालांकि ज्योतिष के कुछ विशेष उपायों (तांत्रिक टोने-टोटकों सहित) को अपना कर व्यक्ति अपने भाग्य में कुछ हद तक परिवर्तन कर सकता है परन्तु पूरी तरह बदलना केवल ईश्वर कृपा और अच्छे कर्मों से ही संभव हो पाता है। इस पोस्ट में हम आपके लिए लाएं हैं ऐसे ही कुछ विशेष टोने-टोटके जो आपके भाग्य को पूरी तरह तो नहीं बदल सकते परन्तु आपकी समस्या का तुरंत निराकरण अवश्य कर देंगे, 


रोगों से मुक्ति पाने के लिए

(1) कोई असाध्य रोग हो जाए तथा दवाईयां काम करना बंद कर दें तो पीडि़त व्यक्ति के सिरहाने रात को एक तांबे का सिक्का रख दें तथा सुबह इस सिक्के को किसी श्मशान में फेंक दें। दवाईयां असर दिखाना शुरू कर देंगी और रोग जल्दी ही दूर हो जाएगा।
(2) यदि व्यक्ति चिड़चिढ़ा हो रहा है तथा बात-बात पर गुस्सा हो रहा है तो उसके ऊपर से राई-मिर्ची उसार कर जला दें। तथा पीडि़त व्यक्ति को उसे देखते रहने के लिए कहें।
(3) सुबह कुल्ला किए बिना पानी, दूध अथवा चाय न पिएं। साथ ही उठते ही सबसे पहले सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों के दर्शन करें। इससे स्वास्थ्य तो सही रहेगा ही, भाग्य भी चमक उठेगा।
(4) यदि किसी के साथ बार-बार दुर्घटना होती हैं तो शुक्ल पक्ष (अमावस्या के तुरंत बाद का पहला) के प्रथम मंगलवार को 400 ग्राम दूध से चावल धोकर बहती नदी अथवा झरने में प्रवाहित करें। यह उपाय लगातार सात मंगलवार करें, दुर्घटना होना बंद हो जाएगा।
(5) यदि कोई पुराना रोग ठीक नहीं हो रहा हो तो गोमती चक्र को लेकर एक चांदी की तार में पिरोएं तथा पलंग के सिरहाने बांध दें। रोग जल्दी ही पीछा छोड़ देगा।
(6) सूर्य जब मेष राशि में प्रवेश करें तो नीम की नवीन कोपलें, गुड़ व मसूर के साथ पीस कर खाने से व्यक्ति पूरे वर्ष निरोग तथा स्वस्थ रहता है।

धन की प्राप्ति के लिए

(1) सोमवार को शिव-मंदिर में जाकर दूध मिश्रित जल शिवलिंग पर चढ़ाएं तथा रूद्राक्ष की माला से 'ऊँ सोमेश्वराय नम:' का 108 बार जप करें। साथ ही पूर्णिमा को जल में दूध मिला कर चन्द्रमा को अध्र्य देकर व्यवसाय में उन्नति की प्रार्थना करें, तुरन्त ही असर दिखाई देगा।
(2) यदि बेहद कोशिशों के बाद भी घर में पैसा नहीं रूकता है तो एक छोटा सा उपाय करें। सोमवार या शनिवार को थोड़े से गेहूं में 11 पत्ते तुलसी तथा 2 दाने केसर के डाल कर पिसवा लें। बाद में इस आटे को पूरे आटे में मिला लें। घर में बरकत रहेगी और लक्ष्मी दिन दूना रात चौगुना बढऩे लगेगी।
(3) घर में लक्ष्मी के स्थाई वास के लिए एक लोहे के बर्तन में जल, चीनी, दूध व घी मिला लें। इसे पीपल के पेड़ की छाया के नीचे खड़े होकर पीपल की जड़ में डाले। इससे घर में लक्ष्मी का स्थाई वास होता है।
(4) घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए एक मिट्टी के सुंदर से बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के लाल कपड़े में बांधकर रखें। इसके बाद बर्तन को गेहूं या चावल के भर कर घर के वायव्य (उत्तर-पश्चिम) कोने में रख दें। ऐसा करने से घर में धन का कभी कोई अभाव नहीं रहेगा।


ससुराल में सुखी रहने के लिए

(1) साबुत काले उड़द में हरी मेहंदी मिलाकर जिस दिशा में वर-वधू का घर हो, उस और फेंक दें, दोनों के बीच परस्पर प्रेम बढ़ जाएगा और दोनों ही सुखी रहेंगे।
(2) यदि कन्या 7 साबुत हल्दी की गांठें, पीतल का एक टुकड़ा, थोड़ा सा गुड लेकर ससुराल की तरफ फेंक दें तो वह कन्या को ससुराल में सुख ही सुख मिलता है।
(3) शादी के बाद जब कन्या विदा हो रही हो तो एक लोटे में गंगाजल, थोड़ी सी हल्दी, एक पीला सिक्का लेकर कन्या के सिर के ऊपर से 7 बार उसार कर उसके आगे फेंक दें। उसका वैवाहिक जीवन सदा सुखी रहेगा। 











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गुरुवार, 16 मार्च 2017

इन चीजों का दान करना चाहिए

इन चीजों का दान करना चाहिए

दान के तीन प्रकार बताये गए हैं। निःस्वार्थ भाव से बिना किसी लोभ-लालच के किया गया दान सात्विक, फल प्राप्ति की आशा से किया गया दान राजस तथा श्रद्धा भाव के बिना कुपात्र को किया गया दान तामस प्रकृति का होता है। तीनों प्रकार के दान में सात्विक दान सर्वश्रेष्ठ होता है। वैसे तो दान कहीं भी और किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु धार्मिक एवं तीर्थस्थल, मंदिर, गौशाला, गुरुद्वारा, पूजा या धर्मस्थल आदि पर दान देना विशेष शुभ माना गया है। क्योंकि इन स्थानों पर मन एवं ह्रदय के इष्टदेव में रम जाने से अहंभाव नहीं आता हा जो कि दान की सार्थकता के लिए आवश्यक है।




दान के लिए उचित अवसर की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। जब भी ह्रदय में दान की भावना जागृत हो, तत्काल उसे पूरा करना चाहिए। परिवार में किसी नए सदस्य का जन्म होने, जन्म दिवस या विवाह समारोह होने, पूर्णिमा, संक्रांति, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, त्रयोदशी संस्कार अथवा श्राद्ध कर्म के समय किया गया दान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है।

मृत्यु का आभास होने पर भी किया दान इहलोक के साथ परलोक के लिए भी कल्याणकारी माना गया है। दान हमेशा सुपात्र को ही दिया जाना चाहिए। कुपात्र एवं अयोग्य व्यक्ति को अशुभ फल देने वाला होता है। विद्वान, वेदपाठी, धर्मनिष्ठ, सत्यनिष्ठ और सांसारिक विरक्त व्यक्ति क पूर्ण श्रद्धा के साथ सां करने से दान का प्रभाव और फल कई गुना अधिक सार्थक हो जाता है।




किसी जरूरतमंद, भूख-प्यास से व्याकुल याचक को उसकी ज़रुरत के अनुसार कोई उपयोगी वास्तु, वस्त्र, खाद्यान, भोजन आदि का दान भी शुभ माना गया है। नवग्रहों उस ग्रह से संबंधित वार क करना अधिक शुभ है। दान रविवार क, चंद्र का सोमवार को, मंगल मंगलवार को, बुध का बुधवार को, गुरु का ,शुक्र का शुक्रवार को तथा शनि ग्रह शनिवार को ही करना चाहिए। नवग्रहों के अशुभ प्रभाव को शुभ करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में अशुभ ग्रहों से संबंधित वस्तुओं का दान किया जा सकता है।

वस्तुओं का दान करते समय कुछ धन भी श्रद्धापूर्वक देना चाहिए। सूर्य ग्रह के लिए लाल-पीला वस्त्र, गेहूं, तांबा, माणिक्य, मसूर की दाल, लाल पुष्प या फल, लाल चंदन, स्वर्ण आदि का दान किया जा सकता है। चंद्र के लिए श्वेत वस्त्र, दूध, दही, शंख, मोती, चांदी, चीनी, चावल, मंगल के लिए स्वर्ण, गुड़, सिंदूरी वस्त्र, मूंगा, लाल मिठाई लाल मसूर, लाल गेहूं, तांबा, रक्त चंदन, बुध के लिए स्वर्ण, पन्ना, कांसा, हरा वस्त्र, हरा फल, हरी मूंग, और गुरु ग्रह के लिए पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, पुखराज या सुनैला, धान, गौघृत, धार्मिक पुस्तक, स्वर्ण, शहद आदि का दान किया जा सकता है




इसी तरह शुक्र गृह का दोष निवारण करने के लिए चावल, घी, हीरा, कपूर, चीनी, मिश्री, दही, श्वेत चंदन, श्वेत वस्त्र, शनि के लिए काला वस्त्र, साबुत उरद की दाल, लोहा, काले चने, काले फल, नीलम, भैंसा, काले तिल, सरसों का तेल, काला कंबल जूते, राहु के लिए तलवार, गौमेद, लोहा, कंबल, स्वर्ण मिश्रित नाग, तांबे का बर्तन, काली सरसों, राई, शीशा केतु के लिए सात प्रकार के अनाज, काजल, स्वर्ण, चांदी या तांबे का सर्प, लहसुनिया रत्न, मिठाई, कस्तूरी, ऊनी वस्त्र आदि का दान किया जा सकता है।





शनिवार, 11 मार्च 2017

गर्भवती महिलाओं को किन जगहों पर नहीं जाना चाहिए?


गर्भवती महिलाओं को किन जगहों पर नहीं जाना चाहिए?


गर्भवती महिला को बच्चे के जन्म से पहले अनेक सावधानियां रखनी होती हैं। जिससे बच्चे के जन्म के बाद जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ्य रहें। इसलिए हमारे यहां बच्चे के जन्म के पूर्व की भी अनेक परंपराएं हैं जिनका गर्भवती महिला को पालन करना होता है। ऐसी ही एक परंपरा है कि गर्भवती स्त्री को सातवें महीने के बाद नदी व नाले पार नहीं करना चाहिए या उनके पास नहीं जाना चाहिए ताकि माता और उसके गर्भ में पल रहा शिशु दोनों की सुरक्षा और सेहत अच्छी बनी रहे।


आजकल के अधिकांश लोग इस परंपरा का पालन नहीं करते हैं, क्योंकि वे इसे सिर्फ अंधविश्वास मानते हैं। मगर ये मान्यता अंधविश्वास नहीं है। दरअसल, इसके पीछे कुछ कारण छुपे हैं। ऐसा माना जाता है कि नदी और नाले जैसे जो क्षेत्र रहते हैं वहां नकारात्मक ऊर्जा का निवास होता है। इसलिए श्मशान भी नदी के किनारे बनाए जाते हैं और ऐसे स्थानों पर ही तंत्र साधना की जाती है।जब कोई स्त्री गर्भवती होती है तो उसके शरीर में बहुत सारे परिवर्तन होते हैं। उनका शरीर सामान्य से अधिक संवेदनशील होता है।

ऐसे में नदी या नाले को पार करने से या उनके पास जाने से होने वाले बच्चे पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा इसका एक अन्य कारण यह भी है कि एक बार जब गोद भराई करके होने वाले शिशु की मां को मायके भेज दिया जाता है तो वो वहां अच्छे से आराम करे और यात्राएं ना करे ताकि होने वाली संतान स्वस्थ्य हो क्योंकि सातवे महीने के बाद गर्भवती महिलाओं को यात्रा करने पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।


एक ही गौत्र में क्यों नहीं करते हैं शादी?


हिंदू धर्म में शादी से पहले गौत्र मिलान और कुंडली मिलान की भी परंपरा है कुछ लोग इस प्रथा को अंधविश्वास मानकर टाल देते हैं तो कुछ लोग इसे सही मानते हैं। दरअसल, यह कोई अंधविश्वास नहीं है। इसके पीछे धार्मिक कारण ये है कि एक ही गौत्र या कुल में विवाह होने पर दंपत्ति की संतान अनुवांशिक दोष के साथ पैदाहोती है।

ऐसे दंपत्तियों की संतान में एक सी विचारधारा, पसंद, व्यवहार आदि में कोई नयापन नहीं होता। ऐसे बच्चों में रचनात्मकता का अभाव होता है। विज्ञान द्वारा भी इस संबंध में यही बात कही गई है कि सगौत्र शादी करने पर अधिकांश ऐसे दंपत्ति की संतानों में अनुवांशिक दोष यानी मानसिक विकलांगता, अपंगता, गंभीर रोग आदि जन्मजात ही पाए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार इन्हीं कारणों से सगौत्र विवाह पर प्रतिबंध लगाया था।



दुल्हन के लिए लाल रंग ही खास क्यों?

हिंदू शादियों में दूल्हा-दुल्हन को काले कपड़े नहीं पहनने दिए जाते हैं, क्योंकि ये मान्यता है कि काला रंग अशुभ होता है। दुल्हन की हर चीज में लाल रंग को अधिक महत्व दिया जाता है। अधिकतर लोग इसे अंधविश्वास मानकर इस बात को नहीं मानते हैं, क्योंकि आजकल अनेक रंगो के वेडिंग ड्रेस फैशन में है इसलिए शादी में दूल्हा- दुल्हन और उनके रिश्तेदार भी इस बात को अंधविश्वास मानकर टाल देते हैं।

लेकिन ज्योतिष के अनुसार भी शुभ काम व शादी में लाल, पीले और गुलाबी रंगों को अधिक मान्यता दी जाती है, क्योंकि लाल रंग सौभाग्य का प्रतीक है। इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य यह है कि लाल रंग ऊर्जा का स्त्रोत है। साथ ही, ये सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है। इसके विपरीत जब नीले, भूरे और काले रंगों की मनाही करते हैं क्योंकि ये रंग नैराश्य का प्रतीक है और ऐसी भावनाओं को शुभ कामों में नहीं आने देना चाहिए। जब पहले ही कोई नकारात्मक विचार मन में जन्म ले लेंगे तो रिश्ते का आधार मजबूत नहीं हो सकता। इसलिए शादी में दुल्हन के लिए लाल रंग खास माना गया है।



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शुक्रवार, 10 मार्च 2017

पति से प्रेम करने वाली महिलाएं इन 4 कार्यों को करने से बचें

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1. गरुड़ पुराण के नियम
इसमें कोई संदेह नहीं है कि हिन्दू ग्रंथ एवं शास्त्रों में मनुष्य के जानने योग्य काफी जानकारी उल्लिखित है। यदि मनुष्य चाहे तो इस प्रत्येक जानकारी को अपने जीवन में अमल कर सफलता के कदम चूम सकता है। जीवन को सही मार्ग दिखाने से लेकर सुख-शांति भी दिलाती हैं शास्त्रों की ये बातें।

2. पत्नियों के लिए नियम



आज हम आपको गरुड़ पुराण की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी से परिचित कराने जा रहे हैं। यह जानकारी विशेष तौर से उन महिलाओं के लिए है जो विवाहित हैं और अपने पति के प्रति कुछ कर्तव्य निभाने की आस्था रखती हैं।

3. गरुड़ पुराण में दर्ज नियम



हम आपको गरुड़ पुराण में दर्ज कुछ विशेष नियम बताने जा रहे हैं जिन्हें हर महिला को अपने वैवाहिक जीवन पर लागू करना चाहिए, ताकि उन्हें पति का सम्पूर्ण प्रेम एवं सम्मान हासिल हो सके और दोनों का वैवाहिक जीवन सुखी बीते।

4. पति या प्रेमी से अधिक दूर ना रहें



गरुड़ पुराण के अनुसार एक पत्नी को अपने पति से या एक प्रेमिका को अपने प्रेमी से अधिक दिनों तक दूर नहीं रहना चाहिए। क्योंकि जीवनसाथी से दूरी स्त्री को मानसिक रूप से कमजोर बनाती है।

5. अधिक दूरी ना बनाये



पति और पत्नी दोनों ही एक-दूजे के लिए समर्पित रहते हैं, दोनों के लिए यह साथ बेहद महत्वपूर्ण है। एक-दूसरे से दूर रहना उनके लिए सामाजिक परेशानियां भी उत्पन्न करता है। इसी तरह से प्रेमी-प्रेमिका के रिश्ते को भी मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों का साथ बेहद आवश्यक है।


6. बुरे चरित्र के लोगों से बचें



स्त्रियों को ऐसे लोगों से सम्पर्क या मित्रता नहीं बनानी चाहिए जिनका चरित्र बुरा हो, क्योंकि ‘सेब के ढेर में पड़ा एक खराब सेब, बाकी सभी सेबों को भी खराब कर देता है’। बुरे व्यक्ति के स्वभाव का असर उस महिला पर भी हो जाता है।

7. ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में ना आए



इसके अलावा ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में ना आए जो आपके पति के विरुद्ध हो। जो आपके पति के बारे में बुरा बोलता हो, उसकी निंदा करता हो और उसे हानि पहुंचाने की भी कोशिश करे। ऐसे लोगों की बुरी नीयत को पहचानकर उनसे दूरी बनाना ही पत्नी के लिए सही है।

8. अपनों का तिरस्कार ना करें



मीठा बोलने वाली और सबका भला सोचने वाली स्त्री ही गुणी स्त्री कहलाती है और ऐसी ही स्त्री की ओर आकर्षित होते हैं पुरुष। लेकिन कई बार अपनों की बातों के चलते जब ठेस पहुंचती है तो मुख से कटु वचन आना स्वाभाविक है। परंतु जो स्त्री खुद के क्रोध पर नियंत्रण करती है वही समाज में मिसाल कायम करती है।

9. पराए घर में ज्यादा देर ना ठहरें



अपना घर अपना ही होता है और वहीं रहने से सबसे अधिक सम्मान प्राप्त होता है। यह केवल कहने वाली बात नहीं है, बल्कि सामाजिक रूप से जांच-परखा उदाहरण है। इसलिए कहते हैं कि एक स्त्री को पराए घर में अधिक समय नहीं रहना चाहिए।

10. मान-सम्मान



जो मान-सम्मान वह अपने घर में पाती है, जिस प्रकार की जायज स्वतंत्रता उसे अपने घर में है, वह उसे पराए घर में कभी हासिल नहीं होगी। इसके अलावा पराए घर में अधिक रुकने से समाज में वह निंदा की पात्र भी बनती है।

बुधवार, 8 मार्च 2017

होली दहन की लपट बताती है, कैसा रहेगा आने वाला


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शकुन शास्त्र में होलिका दहन के समय वायु प्रवाह की दिशा से जन जीवन पर पडने वाले प्रभावों का फलित निर्णय किया जाता है तथा आगामी वर्ष कैसा रहेगा, इसका निष्कर्ष भी निकाला जाता है।

दिशा के अनुसार होली की लौ (झल) का फलाफल शकुन शास्त्र में इस प्रकार बताया गया है।

पूर्व दिशा की ओर - सुखद
आग्नेय की ओर - आगजनी कारक
दक्षिण दिशा की ओर - दुर्भिक्ष एवं पशु पीडाकारक
नैऋत्य - फसल हानि
पश्चिम - सामान्यतया तेजीप्रद
वायव्य - चक्रवात, पवनवेग, आंधीकारक
उत्तर एवं ईशान कोण में - मेघगाज, अच्छी बारिश की सूचक

चारों दिशाओं में धूमने पर - संकट का परिचायक। होली की झल ऊंचे आकाश को जाए तथा वायु शांत हो तो उत्पाद सूचक है। यदि इस दिन मेघ गाज, बारिश, आंघी तथा तेज वायु वेग हो, तो आगामी वर्ष में धन-धान्य, गल्ला, कार्य व्यवसाय तथा व्यापार में लाभ होता है।



मंगलवार, 7 मार्च 2017

भीम में कैसे आया 10 हज़ार हाथियों का बल?





भीम में कैसे आया 10 हज़ार हाथियों का बल?




पाण्डु पुत्र भीम के बारे में माना जाता है की उसमे दस हज़ार हाथियों का बल था जिसके चलते एक बार तो उसने अकेले ही नर्मदा नदी का प्रवाह रोक दिया था।  लेकिन भीम में यह दस हज़ार हाथियों का बल आया कैसे इसकी कहानी बड़ी ही रोचक है।
कौरवों का जन्म हस्तिनापुर में हुआ था जबकि पांचो पांडवो का जन्म वन में हुआ था।  पांडवों के जन्म के कुछ वर्ष पश्चात पाण्डु का निधन हो गया। पाण्डु की मृत्यु के बाद वन में रहने वाले साधुओं ने विचार किया कि पाण्डु के पुत्रों, अस्थि तथा पत्नी को हस्तिनापुर भेज देना ही उचित है। इस प्रकार समस्त ऋषिगण हस्तिनापुर आए और उन्होंने पाण्डु पुत्रों के जन्म और पाण्डु की मृत्यु के संबंध में पूरी बात भीष्म, धृतराष्ट्र आदि को बताई। भीष्म को जब यह बात पता चली तो उन्होंने कुंती सहित पांचो पांण्डवों को हस्तिनापुर बुला लिया।
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हस्तिनापुर में आने के बाद पाण्डवों केवैदिक संस्कार सम्पन्न हुए। पाण्डव तथा कौरव साथ ही खेलने लगे। दौडऩे में, निशाना लगाने तथा कुश्ती आदि सभी खेलों में भीम सभी धृतराष्ट्र पुत्रों को हरा देते थे। भीमसेन कौरवों से होड़ के कारण ही ऐसा करते थे लेकिन उनके मन में कोई वैर-भाव नहीं था। परंतु दुर्योधन के मन में भीमसेन के प्रति दुर्भावना पैदा हो गई। तब उसने उचित अवसर मिलते ही भीम को मारने का विचार किया।
दुर्योधन ने एक बार खेलने के लिए गंगा तट पर शिविर लगवाया। उस स्थान का नाम रखा उदकक्रीडन। वहां खाने-पीने इत्यादि सभी सुविधाएं भी थीं। दुर्योधन ने पाण्डवों को भी वहां बुलाया। एक दिन मौका पाकर दुर्योधन ने भीम के भोजन में विष मिला दिया। विष के असर से जब भीम अचेत हो गए तो दुर्योधन ने दु:शासन के साथ मिलकर उसे गंगा में डाल दिया। भीम इसी अवस्था में नागलोक पहुंच गए। वहां सांपों ने भीम को खूब डंसा जिसके प्रभाव से विष का असर कम हो गया। जब भीम को होश आया तो वे सर्पों को मारने लगे। सभी सर्प डरकर नागराज वासुकि के पास गए और पूरी बात बताई।
तब वासुकि स्वयं भीमसेन के पास गए। उनके साथ आर्यक नाग ने भीम को पहचान लिया। आर्यक नाग भीम के नाना का नाना था। वह भीम से बड़े प्रेम से मिले। तब आर्यक ने वासुकि से कहा कि भीम को उन कुण्डों का रस पीने की आज्ञा दी जाए जिनमें हजारों हाथियों का बल है। वासुकि ने इसकी स्वीकृति दे दी। तब भीम आठ कुण्ड पीकर एक दिव्य शय्या पर सो गए।
जब दुर्योधन ने भीम को विष देकर गंगा में फेंक दिया तो उसे बड़ा हर्ष हुआ। शिविर के समाप्त होने पर सभी कौरव व पाण्डव भीम के बिना ही हस्तिनापुर के लिए रवाना हो गए। पाण्डवों ने सोचा कि भीम आगे चले गए होंगे। जब सभी हस्तिनापुर पहुंचे तो युधिष्ठिर ने माता कुंती से भीम के बारे में पूछा। तब कुंती ने भीम के न लौटने की बात कही। सारी बात जानकर कुंती व्याकुल हो गई तब उन्होंने विदुर को बुलाया और भीम को ढूंढने के लिए कहा। तब विदुर ने उन्हें सांत्वना दी और सैनिकों को भीम को ढूंढने के लिए भेजा।
उधर नागलोक में भीम आठवें दिन रस पच जाने पर जागे। तब नागों ने भीम को गंगा के बाहर छोड़ दिया। जब भीम सही-सलामत हस्तिनापुर पहुंचे तो सभी को बड़ा संतोष हुआ। तब भीम ने माता कुंती व अपने भाइयों के सामने दुर्योधन द्वारा विष देकर गंगा में फेंकने तथा नागलोक में क्या-क्या हुआ, यह सब बताया। युधिष्ठिर ने भीम से यह बात किसी और को नहीं बताने के लिए कहा।















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सोमवार, 6 मार्च 2017

हर काम में सफलता पाने के लिए करें ये पांच काम



जीवन में कई बार ऐसे कुयोग बनने लगते हैं कि कोई भी काम चाहकर भी पूरे नहीं हो पाते। सभी कामों में पूर्णता और सफलता पाने के लिए घर से निकलने से पहले अगर ये पांच काम कर लिए जाएं तो सफलता आपके कदम चूम सकती है।

घर से शुभ कार्य के लिए बाहर निकल रहे हों तो थोडा गुड खाकर पानी पीना शुभ होता है। इससे कार्य में बाधा नहीं आती और जिस कार्य के लिए बाहर जा रहे है वह पूरा हो जाता है।


शुभ कार्य के लिए घर से बाहर निकलते वक़्त 2 मिनट का समय निकाल कर घर के मंदिर या भगवान की मूर्ति के सामने माथा जरुर टेके। इससे कार्य में बाधाएं नहीं आती और कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होता है।

शुभ कार्य के लिए घर से निकलने से पहले एक बर्तन में पक्षियों के लिए दाना पानी निकाल कर रख दे या किसी गाय या कुत्ता जो भी जीव दिखे उसको रोटी खिलाकर बाहर निकलने से कार्य पूर्ण होने के साथ सफलता भी मिलती है।




हिन्दू धर्म में कुछ शब्दों को घर से निकलते वक़्त बोलने से शुभ मानते है, जैसे दही मच्छी, विजयभवः, श्री गणेशाय नम, सब शुभ हो, और मंगल यात्रा हो. इसलिए शुभ कार्य के लिए घर से बाहर निकलते वक़्त यह जरुर बोल कर भेजे।

शुक्रवार, 3 मार्च 2017

हनुमानजी की पूजा कब और कैसे करें!



हनुमान जी, हिन्दू धर्म के महत्त्वपूर्ण ग्रंथ रामायण में एक पौराणिक चरित्र है। शिव पुराण के अनुसार हनुमान जी को, भगवान शिव का दसवां अवतार माना जाता है। साधारणतया हनुमान प्रतिमा को चोला चढ़ाते हैं। हनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए मंगलवार को तथा शनि महाराज की साढ़े साती, अढैया, दशा, अंतरदशा में कष्ट कम करने के लिए शनिवार को चोला चढ़ाया जाता है।





साधारणतया मान्यता इन्हीं दिनों की है, लेकिन दूसरे दिनों में रवि, सोम, बुध, गुरु, शुक्र को चढ़ाने का निषेध नहीं है। चोले में चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर प्रतिमा पर लेपन कर अच्छी तरह मलकर, रगडक़र चांदी या सोने का वर्क चढ़ाते हैं।

इस प्रक्रिया में कुछ बातें समझने की हैं। पहली बात चोला चढ़ाने में ध्यान रखने की है। अछूते (शुद्ध) वस्त्र धारण करें। दूसरी नख से शिख तक (सृष्टि क्रम) तथा शिख से नख तक संहार क्रम होता है। सृष्टि क्रम यानी पैरों से मस्तक तक चढ़ाने में देवता सौम्य रहते हैं। संहार क्रम से चढ़ाने में देवता उग्र हो जाते हैं। यह चीज श्रीयंत्र साधना में सरलता से समझी जा सकती है। यदि कोई विशेष कामना पूर्ति हो तो पहले संहार क्रम से, जब तक कि कामना पूर्ण न हो जाए, पश्चात सृष्टि क्रम से चोला चढाया जा सकता है। ध्यान रहे, पूर्ण कार्य संकल्पित हो। सात्विक जीवन, मानसिक एवं शारीरिक ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।हनुमानजी के विग्रह का पूजन एवं यंत्र पूजन में काफी असमानताएं हैं। प्रतिमा पूजन में सिर्फ प्रतिमा का पूजन तथा यंत्र पूजन में अंग देवताओं का पूजन होता है। हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण सर्वसाधारण के लिए सरल उपाय हैं। सुन्दरकांड का पाठ भी अच्छा है, समय जरूर अधिक लगता है। हनुमानजी के काफी मंत्र उपलब्ध हैं।

आवश्यकता के अनुसार चुनकर साधना की जा सकती है। शाबर मंत्र भी हैं, लेकिन इनका प्रयोग गुरुदेव की देखरेख में करना उचित है। एकदम जादू से कोई सिद्धि नहीं मिलती अत: धैर्य, श्रद्धा, विश्वास से करते रहने पर देवकृपा निश्चित हो जाती है।शास्त्रों में लिखा है- ‘जपात् सिद्धि-जपात् सिद्धि’ यानी जपते रहो, जपते रहो, सिद्धि जरूर प्राप्त होगी। कलयुग में साक्षात देव हनुमानजी हैं। हनुमानजी की साधना से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष सभी होते हैं। इति

गुरुवार, 2 मार्च 2017

शनिवार को भूलकर भी ना करें ये काम वरना हो जाएंगे कंगाल

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हिंदु धर्म में कहा जाता है कि शनिवार को ये ना करो वो ना करों ऐसी कई तरह की बातें आपने कई लोगों के मुंह से सुना होगा। साथ ही यह भी कहा जाता है कि शनि देव जिससे खुश होते हैं उसे राजा बना देते हैं और जिससे नाराज हो जाएं, वह रंक बन जाता है। इसलिए गलती से भी शनि भगवान को नाराज नहीं करना चाहिए। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे काम जिन्हें भूलकर भी शनिवार के दिन नहीं करना चाहिए। आज के दिन आप अपने घर में ऐसी कोई वस्तु ना लाए जिससे आप कंगाल हो सकत जाए।



नमक
शनिवार के दिन भूलकर भी नमक ना खरीदें। कहते हैं कि शनिवार के दिन नमक खरीदने से घर पर कर्ज बढ़ता है।


काली वस्तु
शनिवार को काली चीजों से दूर रहना चाहिए। इस दिन गलती से भी काले जूते ना खरीदें। जो लोग इस दिन काले जूते खरीद के पहनते हैं उन्हें काम में असफलता मिलती है।

काला तिल
शनिवार को काला तिल नहीं खरीदना चाहिए। काला तिल खरीदने से कार्यों में बाधा आती है और काम नहीं होते।





लोहा
इस दिन लोहा खरीदने से बचें। लोहे का सामान खरीद कर आप शनि देव को नाराज कर सकते हैं।

झाडू
इस दिन झाडू भी नहीं खरीदना चाहिए। इस दिन झाड़ू खरीदने से घर में दरिद्रता आती है।




सरसों का तेल
इस दिन सरसों का तेल भी ना खरीदें। शनिवार के दिन तेल दान करना चाहिए लेकिन इसे खरीदना नहीं चाहिए।

लकड़ी से बनी वस्तु
लकड़ी या लकड़ी से बना कोई सामान भी शनिवार के दिन नहीं खरीदना चाहिए। इस दिन लकड़ी खरीदना अशुभ माना जाता है।

बुधवार, 1 मार्च 2017

यहां मुसीबत आने से पहले इस मूर्ति से बहने लगते हैं आंसू



हिमाचल प्रदेश के चप्पे-चप्पे पर देवी देवताओं का वास है। देवभूमि के नाम से विख्यात इस प्रदेश में देवी देवताओं से कई रोचक बातें भी जुड़ी हुई हैं। ऐसी ही एक रोचक कड़ी शक्तिपीठों में से एक बज्रेश्वरी देवी माता मंदिर कांगड़ा से भी जुड़ी है। इस मंदिर में देवी के साथ भगवान भैरव की भी एक चमत्कारी मूर्ति है। कहते हैं जब भी इस जगह पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो भैरव की मूर्ति से आंसू और पसीना बहने लगता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां पर ये चमत्कार कई बार देखा है।



विपत्ती आने पर मूर्ति से बहने लगते हैं आंसु
मंदिर परिसर में ही भगवान लाल भैरव का भी मंदिर है। यहां विराजे भगवान लाल भैरव की यह मूर्ति करीब पांच हजार वर्ष पुरानी बताई जाती है। कहते हैं कि जब भी कांगड़ा पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो इस मूर्ति की आंखों से आंसू और शरीर से पसीना निकलने लगता है। तब मंदिर के पुजारी विशाल हवन का आयोजन कर मां से आने वाली आपदा को टालने का निवेदन करते हैं और यह बज्रेश्वरी शक्तिपीठ का चमत्कार और महिमा ही है कि आने वाली हर आपदा मां के आशीर्वाद से टल जाती है। बताया जाता है कि ऐसा यहां कई बार हुआ है।।


कई बार देखा गया है भैरव मूर्ति का चमत्कार
स्थानीय लोगों के अनुसार, भैरव की यह मूर्ति बहुत पुरानी है। कहते हैं कि वर्ष 1976-77 में इस मूर्ति में आंसू व शरीर से पसीना निकला था। उस समय कांगड़ा बाजार में भीषण अग्निकांड हुआ था। काफी दुकानें जल गई थीं। उसके बाद से यहां ऐसी विपत्ति टालने के लिए हर वर्ष नवंबर व दिसंबर के मध्य में भैरव जयंती मनाई जाती है। उस दौरान यहां पाठ व हवन होता है। यह मूर्ति मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही बाईं तरफ है।



यहां गिरा था देवी सती कादाहिना वक्ष
कांगड़ा का बज्रेश्वरी शक्तिपीठ देवी के 51 शक्तिपीठों में से मां की वह शक्तिपीठ हैं जहां सती का दाहिना वक्ष गिरा था और जहां तीन धर्मों के प्रतीक के रूप में मां की तीन पिंडियों की पूजा होती है। मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित पहली और मुख्य पिंडी मां बज्रेश्वरी की है। दूसरी मां भद्रकाली और तीसरी और सबसे छोटी पिंडी मां एकादशी की है।