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रविवार, 15 जनवरी 2017

क्या आप जानते है क्यूं लेते है अग्नि के सात फेरे!


Interesting Facts


अग्नि पृथ्वी पर सूर्य की प्रतिनिधि है। सूर्य जगत की आत्मा तथा विष्णु का रूप है। अत: अग्नि के समक्ष फेरे लेेने का अर्थ है- परमात्मा के समक्ष फेेरे लेना। अग्नि ही वह माध्यम है जिसके द्वारा यज्ञीय आहुतियां प्रदान करके देवताओं को पुष्ट किया जाता है। 

इस प्रकार अग्नि के रूप में समस्त देवताओं को साक्षी मानकर पवित्र बंधन में बंधने का विधान धर्म शास्त्रों में किया गया है।

वैदिक नियमानुसार, विवाह के समय चार फेरों का विधान है। इनमें से पहले तीना फेरों मेें कन्या आगे चलती है जबकि चौथे फेरे में वर आगे होता है। ये चार फेरे चार पुरूषार्थो- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के प्रतीक हैं।

इस प्रकार तीन फेरों द्वारा तीन पुरूषार्थो में कन्या पत्नी की प्रधानता है जबकि चौथे फेरे द्वारा मोक्ष मार्ग पर चलते समय पत्नी को वर का अनुसरण करना पडता है। यहां इस बात को स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि अपवादों से नियम नहीं बना करते।



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