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मंगलवार, 31 जनवरी 2017

पारंपरिक हिन्दू विवाह

पारंपरिक हिन्दू विवाह


आधुनिक विश्व में विवाह अब अनगिनत विकल्पों और समझौतों का विषय बन गया है. लड़का और लड़की एक-दूसरे को पसंद करते हैं और स्वेच्छापूर्वक संविदा में पड़ते हैं. उनके मध्य हुए समझौते की इति विवाह-विच्छेद या तलाक में होती है. लेकिन पारंपरिक हिन्दू विवाह पद्धति में विकल्पों या संविदा के लिए कोई स्थान नहीं है. यह दो परिवारों के बीच होनेवाला एक संबंध था जिसे लड़के और लड़की को स्वीकार करना होता था. इसके घटते ही उन दोनों का बचपना सहसा समाप्त हो जाता और वे वयस्क मान लिए जाते. इसमें तलाक के बारे में तो कोई विचार ही नहीं किया गया था.
बहुत से नवयुवक और नवयुवतियां पारंपरिक हिन्दू विवाह पद्धति के निहितार्थों और इसके महत्व को समझना चाहते हैं. आमतौर पर वे इसके बहुत से रीति-रिवाजों को पसंद नहीं करते क्योंकि इनका गठन उस काल में हुआ था जब हमारा सामाजिक ढांचा बहुत अलग किस्म का था. उन दिनों परिवार बहुत बड़े और संयुक्त होते थे. वह पुरुषप्रधान समाज था जिसमें स्त्रियाँ सदैव आश्रितवर्ग में ही गिनी जाती थीं. आदमी चाहे तो एक से अधिक विवाह कर सकता था पर स्त्रियों के लिए तो ऐसा सोचना भी पाप था. लेकिन इसके बाद भी पुरुषों पर कुछ बंदिशें थीं और वे पूर्णतः स्वतन्त्र नहीं थे: वे अपने परिवार और जातिवर्ग के नियमों के अधीन रहते थे. विवाह पद्धति के संस्कार अत्यंत प्रतीकात्मक थे और उनमें कृषि आधारित जीवनप्रणाली के अनेक बिंब थे क्योंकि कृषि अधिकांश भारतीयों की आजीविका का मुख्य साधन था. उदाहरण के लिए, पुरुष को कृषक और स्त्री को उसकी भूमि कहा जाता था. उनके संबंध से उत्पन्न होनेवाला शिशु उपज की श्रेणी में आता था. आधुनिक काल की महिलाओं को ऐसे विचार बहुत आपत्तिजनक लग सकते हैं.
हमारे सामने आज एक समस्या यह भी है कि हिन्दू विवाह का अध्ययन करते समय मानकों का अभाव दिखता है. प्रांतीयता और जातीयता के कारण उनमें बहुत सी विविधताएँ घर कर गयी हैं. राजपूत विवाह और तमिल विवाह पद्धति में बहुत अंतर दिखता है. मलयाली हिन्दू विवाह अब इतना सरल-सहज हो गया है कि इसमें वर और वधु के परिजनों की उपस्थिति में वर द्वारा उसकी भावी पत्नी के गले में एक धागा डाल देना ही पर्याप्त है. इस संस्कार में एक मिनट भी नहीं लगता, वहीं दूसरी ओर शाही मारवाड़ी विवाह को संपन्न होने में कई दिन लग जाते हैं. इसी के साथ ही हर भारतीय चीज़ में बॉलीवुड का तड़का लग जाने के कारण ऐसे उत्तर-आधुनिक विवाह भी देखने में आ रहे हैं जिनमें वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शैम्पेन की चुस्कियां ली जातीं हैं पर ज्यादातर लोगों को यह नागवार गुज़रता है.
परंपरागत रूप से, विवाह का आयोजन चातुर्मास अथवा वर्षाकाल की समाप्ति के बाद होता है. इसकी शुरुआत तुलसी विवाह से होती है जिसमें विष्णुरूपी गन्ना का विवाह लक्ष्मीरूपी तुलसी के पौधे के साथ किया जाता था. अभी भी यह पर्व दीपावली के लगभग एक पखवाड़े के बाद मनाया जाता है.
विवाह के रीति-रिवाज़ सगाई से शुरू हो जाते हैं. परंपरागत रूप से बहुत से विवाह संबंध वर और वधु के परिवार द्वारा तय किये जाते थे और लड़का-लड़की एक-दूसरे को प्रायः विवाह के दिन तक देख भी नहीं पाते थे. सगाई की यह रीति किसी मंदिर में आयोजित होती थी और इसमें दोनों पक्षों के बीच उपहारों का आदान-प्रदान होता था. आजकल पश्चिमी प्रभाव के कारण लोग दोस्तों की मौजूदगी में अंगूठियों की अदलाबदली करके ही सगाई कर लेते हैं.
सगाई और विवाह के बीच वर और वधु दोनों को उनके परिजन और मित्रादि भोजन आदि के लिए आमंत्रित करने लगते हैं क्योंकि बहुत जल्द ही वे दोनों एकल जीवन से मुक्त हो जायेंगे. यह मुख्यतः उत्तर भारत में संगीत की रस्म में होता था जो बॉलीवुड की कृपा से अब पूरे भारत में होने लगा है. संगीत की रस्म में परिवार की महिलायें नाचती-गाती हैं. यह सामान्यतः वधु के घर में होता है. लड़के को इसमें नहीं बुलाया जाता पर आजकल लड़के की माँ और बहनें वगैरह इसमें शामिल होने लगीं हैं.
विवाह की रस्में हल्दी-उबटन और मेहंदी से शुरू होती हैं. इसमें वर और वधु को विवाह के लिए आकर्षक निखार दिया जाता है. दोनों को हल्दी व चन्दन आदि का लेप लगाकर घर की महिलायें सुगन्धित जल से स्नान कराती हैं. इसका उद्देश्य यह है कि वे दोनों विवाह के दिन सबसे अलग व सुन्दर दिखें. इसके साथ ही इसमें विवाहोपरांत कायिक इच्छाओं की पूर्ति हो जाने की अभिस्वीकृति भी मिल जाती है. भारत में मेहंदी का आगमन अरब संपर्क से हुआ है. इसके पहले बहुसंख्यक हिन्दू आलता लगाकर अपने हाथ और पैरों को सुन्दर लाल रंग से रंगते थे. आजकल तरह-तरह की मेहंदी के प्रयोग से हाथों-पैरों पर अलंकरण किया जाने लगा है. वर और वधु के परिवार की महिलायें भी अपने को सजाने-संवारने में पीछे नहीं रहतीं.
वर और वधु को तैयार करने के बाद उनसे कहा जाता है कि वे अपने-अपने पितरों-पुरखों का आह्वान करें. यह रस्म विशेषकर वधु के लिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाह के बाद उसे अपने भावी पति के गोत्र में सम्मिलित होना है और अपने कुल की रीतियों को तिलांजलि देनी है.
सभी हिन्दू रीति-रिवाजों में मेहमाननवाज़ी पर बहुत जोर दिया जाता है. मेहमानों का यथोचित स्वागत किया जाता है, उनके चरण छूकर उन्हें नेग या उपहार दिए जाते हैं, और आदरपूर्वक उन्हें विदाई दी जाती है. पूजा के समय देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है, और विसर्जन के पहले भी उनकी पूजा होती है. उनसे निवेदन किया जाता है कि वे अगले वर्ष या अगले सुअवसर पर भी पधारें. विवाह के समय वर अतिथि होता है और हिन्दू परंपरा में अतिथियों को देवता का दर्जा दिया गया है. इसलिए उसका आदरसत्कार देवतातुल्य जानकार किया जाता है और उसे सबसे महत्वपूर्ण उपहार अर्थात वधु सौंप दी जाती है.
भारत के विभिन्न प्रदेशों में विवाह का समय अलग-अलग होता है. दक्षिण में विवाह की रस्में सूर्योदय के निकट पूरी की जाती हैं जबकि पूर्व में यह सब शाम के समय होता है. कागज़ की पोंगरी जैसी निमंत्रण पत्रिका वरपक्ष के घर भेजने के साथ ही विवाह की रस्मों की शुरुआत में तेजी आ जाती है. यह पत्रिका आमतौर पर वधु का भाई लेकर जाता है. ओडिशा में वधु के भाई को वर-धारा कहते हैं – वह, जो वर को घर तक लेकर आता है.
आमंत्रित अतिथिगण और वर का आगमन बारात के साथ होता है. राजपूत दूल्हे अपने साथ तलवार रखते हैं जो कभी-कभी उसकी भावी पत्नी द्वारा उसके लिए चुनी गयी होती है. इससे दो बातों का पता चलता है: यह कि पुरुष तलवार रखने के योग्य है और दूसरी यह कि वह अपनी स्त्री की रक्षा भी कर सकता है. उत्तर भारत में दूल्हे घोड़ी पर सवार होते हैं और उनका चेहरा सेहरे से ढंका होता है ताकि कोई उनपर बुरी नज़र न डाल सके. घोड़े के स्थान पर घोड़ी का प्रयोग यह दर्शाता है कि वह अपनी पत्नी को अपने अधीन रखना चाहता है. यह विचार भी आधुनिक महिलाओं को आपत्तिजनक लग सकता है. भारत के कई स्थानों में दूल्हे के साथियों को जमकर पीने और नाचने का मौका मिल जाता है. कई बाराती बड़े हुडदंगी होते हैं. वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती को बिहाने चले शिव की बारात के सदस्यों की तरह होते हैं. पीना और नाचना एकाकी जीवन की समाप्ति के अंतिम दिनों से पहले उड़ानेवाला मौजमजा है जो जल्द ही पत्नी और घर-गृहस्थी के खूंटे से बाँध दिया जाएगा और फिर उससे यह अपेक्षा नहीं की जायेगी कि वह चाहकर भी कभी मर्यादा तोड़ सके.
दूल्हे के ड्योढी पर आनेपर ससुर और सास उसे माला पहनाकर पूजते हैं. उसका मुंह मीठा किया जाता है, चरण पखारे जाते हैं. कई बार ससुर या उसका श्याला उसे अपनी बांहों में भरकर मंडप या स्टेज तक लेकर जाते हैं. इस बीच पंडित यज्ञवेदी पर अग्नि बढ़ाता है. पूरी प्रथा के दौरान अग्नि ही समस्त देवताओं का प्रतिनिधित्व करती है. वह स्त्री और पुरुष के सुमेल की साक्षी है.

सोमवार, 30 जनवरी 2017

मनचाही संतान के लिए यह अचूक व्रत, आजमाकर देखिए

They're looking for children unmistakable fast, try a look


अगर जातक संतानहीनता की मार से गुजर रहा हो और और सभी कोशिशों के बाद भी संतान के योग नहीं बन पा रहे हों तो केवल एक ही उपाय है। इस खास देव की पूजा-आराधना करके यदि व्रत रखा जाए तो केवल 3 महीनों में ही फल मिल जाएगा और योग्य संतान आपके आंगन में खेलने लगेगी। 
Dharmik, Pauranik, 
धार्मिक
 ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव की आराधना और उन्हें प्रसन्न करने के लिये प्रदोष व्रत का अनुष्ठान किया जाता है। यह व्रत चन्द्र मास की दोनों त्रयोदशी के दिन किया जाता है। एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है। दक्षिण भारत में प्रदोष व्रत को प्रदोषम के नाम से भी जाना जाता है। प्रदोष व्रत से कई दोष की मुक्ति और संकटों का निवारण होता है।

कहते हैं कि प्रदोष व्रत जब सोमवार को आता है तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं। मंगलवार को आने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष और शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को शनि प्रदोष कहते हैं। प्रदोष व्रत अत्यंत फलकारी होता है। संतान प्राप्ति के लिये यह व्रत किया जाता है। 

ग्रंथों के अनुसार केवल तीन महीनों से महादेव के इस व्रत को पूरी शिददत के साथ करने से संतान सुख के योग बनने लगते हैं और सौभाग्य व प्रतिष्ठा में भी बढ़ोत्तरी होती है। प्रदोष व्रत के दिन सूर्य उदय से पूर्व उठकर हो सके तो गंगा स्नान या फिर किसी नदी में स्नान करना चाहिये। अन्यथा घर में ही स्नान करके भगवान शिव की उपासना करना चाहिये।

व्रत में सिर्फ फलाहार करना चाहिये। इसके बाद सूर्यास्त से एक घंटा पहले, स्नान आदि कर श्वेत वस्त्र धारण किया जाता है। ईशान कोण की दिशा में प्रदोष व्रत की पूजा ज्यादा फलदायी होता है। पूजन स्थल को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद, गाय के गोबर से लीपकर, मंडप तैयार किया जाता है। प्रदोष व्रत कि आराधना करने के लिये कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार पूजन क्रिया की तैयारियां कर उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और भगवान शंकर का पूजन करना चाहिए।

रविवार, 29 जनवरी 2017

कभी नहाती नहीं हैं हिम्बा ट्राइब की महिलाएं, फिर भी मानी जाती है सबसे ख़ूबसूरत, जानिये इनसे जुड़े रोचक तथ्य

Interesting Facts

दुनिया में ऐसे कई ट्राइब्स हैं, जिनके काफी अनोखे रिवाज होते हैं। अफ्रीका के नार्थ नामीबिया के कुनैन प्रांत में रहने वाली हिम्बा ट्राइब की महिलाओं को नहाना मना है। फिर भी उन्हें अफ्रीका की सबसे खूबसूरत महिलाएं माना जाता है।


पानी से हाथ भी धोना है मना
कुनैन प्रांत में रहने वाले हिम्बा जनजाति में कुल 20 हजार से 50 हजार लोग हैं। हिम्बा ट्राइब की महिलाओं को अफ्रीका की सबसे खूबसूरत महिलाएं कहा जाता है। लेकिन आपको बता दें, कि इस ट्राइब की महिलाओं को नहाने की इजाजत नहीं है। इतना ही नहीं, ये महिलाएं हाथ तक धोने के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं। हालांकि, खुद को साफ-सुथरा रखने के लिए इन महिलाओं का अपना एक खास तरीका है।


खास हर्ब्स के धुंए का करती हैं इस्तेमाल
हिम्बा जनजाति की महिलाएं नहाने की जगह खास जड़ी-बूटियों को पानी में उबालकर उसके धुंए से अपनी बॉडी को फ्रेश रखती हैं। ताकि उनसे बदबू ना आए। इस हर्ब की खुशबू से इनकी बॉडी कभी ना नहाने के बाद भी अच्छी स्मेल करती है।

बॉडी पर लगाती हैं जानवर की चर्बी से बना लोशन
इस ट्राइब की महिलाएं अपनी स्किन को धूप से बचाने के लिए खास तरह के लोशन का इस्तेमाल करती हैं। ये लोशन जानवर की चर्बी और हैमाटाइट के घोल से तैयार किया जाता है। हैमाटाइट के धुल की वजह से उनके स्किन का रंग लाल हो जाता है। ये खास लोशन उन्हें कीड़ों के काटने से भी बचाता है। इन महिलाओं को रेड मैन के नाम से भी जाना जाता है।


पानी से हाथ तक नहीं धोती हैं ये महिलाएं

पानी की जगह अपनी बॉडी पर खास तरह का पेस्ट लगाती हैं महिलाएं

हिम्बा ट्राइब की महिलाओं की गिनती अफ्रीका की सबसे खूबसूरत महिलाओं में की जाती है

लेकिन इनके अजीबोगरीब तरीकों की वजह से दुनिया की नजर में आई थीं यहां की महिलाएं

नहाने की जगह खास हर्ब्स के धुंए से अपनी बॉडी को महकाती हैं ये महिलाएं

हेमटाइट डस्ट और जानवर की चर्बी से बना पेस्ट अपनी बॉडी पर लगाती हैं महिलाएं

इस पेस्ट की वजह से इनकी बॉडी का रंग लाल हो जाता है

ये पेस्ट महिलाओं को धूप और कीड़ों के काटने से बचाता है

शनिवार, 28 जनवरी 2017

समुद्र शास्त्र के अनुसार आपकी हंसी भी बताती है आपका नेचर


Interesting Facts
According to scripture also tells you your laugh ocean Nature


हंसना मनुष्य का स्वभाविक गुण है। हंसने से न सिर्फ खून बढ़ता है बल्कि इंसान की उम्र भी बढ़ती है। हर मनुष्य के हंसने का तरीका दूसरे से भिन्न होता है। कोई जोर से हंसता है तो कोई मंद-मंद मुस्कुराता है। समुद्र शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के हंसने के तरीके पर गौर किया जाए तो उसके स्वभाव के बारे में काफी कुछ जाना जा सकता है। इसी ग्रंथ के अनुसार आज हम आपको बता रहे हैं मनुष्य की हंसी के अनुरूप उसका नेचर कैसा हो सकता है।



खिलखिलाकर हंसने वाले लोग सहनशील, दयालु, सभी का अच्छा सोचने वाले तथा पढाई-लिखाई में आगे होते हैं। ऐसे लोग किसी को धोखा नहीं देते तथा अच्छे प्रेमी होते हैं।


ठहाका मारकर ऊंचे स्वर में हंसने वाले लोग अपने जीवन में सफल होते हैं। यदि ऐसी हंसी के साथ चेहरा व्यंगपूर्ण हो तो उनमे अहंकार की भावना भी होती है।

रुक-रुक कर हंसने या एक ही विषय पर कुछ देर बाद तक हंसने वाले लोगों की मानसिक शक्ति कमजोर होती है। ऐसे लोग हर काम में असफल रहते हैं।


जिन लोगों की मुस्कान शांत होती है वे अपने मन की प्रसन्नता को व्यक्त करते है तथा गंभीर, धैर्यवान, शांतिप्रिय, विश्वासी, ज्ञानी एवं स्थिर प्रवति के होते हैं।

घोड़े के समान हिनहिना कर हंसने वाले लोग धूर्त, अहंकारी, कपटी तथा निक्कमे होते हैं। ये लोगों का फायदा उठाने में माहिर होते हैं। इन पर आसानी से विश्वास नहीं किया जा सकता।



शुक्रवार, 27 जनवरी 2017

समझें अशुभ इशारें और ये करें उपचार


Jyotish Upay
ज्योतिष में शुभ और अशुभ वेला का खासा महत्व है। ऐसे में अशुभ संकेतों को पहचाकर उनका परिहार यानी उपचार करके ही आगे बढना ठीक रहता है। आइए जानें संकेत और उनके उपचार।

किसी शुभ कार्य पर जाते समय यदि बिल्ली रास्ता काट जाए तो घर वापस आकर या थोड़ा विश्राम कर आगे जाएं। ऐसा ग्रह-नक्षत्रों का अशुभ समय टालने के लिए किया जाता है। 
आकाश में तारे टूटते दिखाई दें तो स्वास्थ्य खराब होने की सूचना होती है। नौकरी में खतरा और आर्थिक तंगी का भी संकेत माना जाता है। सावधानी बरतें।

यदि किसी शुभ काम पर जाते समय कोई दुष्ट प्रकृति वाला, व्याभिचारी या अन्यायी, व्याभिचारिणी सामने आ जाए तो कार्य सफल नहीं होता।


शुभ कार्य के लिए विचार चल रहा हो तब यदि छिपकली की आवाज सुनाई दे तो काम में विफलता मिलती है। समय टालकर चलें।

यदि घर में किसी देवता की मूर्ति टूट जाए या चित्र जल जाए तो गंभीर कष्ट हो सकता है। निवारण के लिए रामरक्षास्तोत्र अथवा दुर्गा मां की आराधना करें।

कुत्ते का रोना या सियार के रोने से रिश्तेदार, पड़ोसी या मोहल्ले में कष्ट (मृत्यु) की आशंका रहती है।



ये उपाय करें मिलेगा सभी समस्याओं से छुटकारा, बरसेगी खुशियां

 These steps will get rid of all the problems, shall obtain joy

भारतीय ज्योतिष पद्वति की तरह ही अब दुनिया में चीनी फेंगशुई पद्वति भी खासी लोकप्रिय होती जा रही है। आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप अपने जीवन में धन की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं, साथ ही अपनी लाइफ से गायब हुई उस खुशी को भी दोबारा पा सकते हैं। 

कोई
 भी जातक ऑफिस में किसी भी तरह की समस्‍या से परेशान हो तो वह ऑफिस में अपनी सीट के पीछे पहाड़ों की तस्वीर टांगें। इससे उनका आत्मविश्वास तो वापस आएगा ही साथ अन्‍या लोगों का सपोर्ट भी मिलने लगेगा।

फेंगशुई के अनुसार खुली खिड़की की तरफ बैठना आपकी ओर आने वाली सकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। खिड़कियों का खुला रहना जरूरी है लेकिन उनकी तरफ बैठने से आपका आत्मविश्वास जाता है और समस्याएं आती नहीं हैं। 

फेंगशुई कहता है कि घर के बाहर घोड़े की नाल टांगने से सुख-समृद्धि और संपन्नता में बढ़ोत्तरी होती है। यह धातु से बनी होती है इसलिए इसे पूर्वी या दक्षिण पूर्वी दिशा में नहीं टांगना चाहिए। घोड़े के नाल की आकार वाली भूमि खरीदना भी फायदेमंद होता है।
खाली दीवार की तरफ मुंह करके बैठने से आपको अकेलापन महसूस हो सकता है। आपको भविष्य में होने वाली सभी नकारात्मक घटनाएं दिखने लगती हैं, जिसके परिणामस्वरूप आप खुद को तनाव में आ जाते हैं। 

फेंगशुई के अनुसार बैंबू या बांस दीर्घ आयु का परिचायक है। साथ ही प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बांस आपके लिए सपोर्ट का काम करता है। इसलिए आपको अपने घर में बांस, या बांस की तस्वीर अवश्य लगानी चाहिए।

फेंगशुई के अनुसार किसी भी प्रकार का कैलेंडर या घड़ी दरवाजे के अगले या पिछले भाग पर नहीं टांगनी चाहिए। अगर कोई ऐसा करता है तो घर के भीतर रहने वाले सदस्यों की आयु पर इसका असर पड़ता है। 

सुबह पूजा करने के बाद व्यक्ति को अपने घर में गायत्री मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। धार्मिक संगीत का घर में गूंजना घर में खुशहाली लाता है।

घर या बेडरूम की अलमारियों को कभी खुला नहीं रखना चाहिए। अगर किताबों की अलमारी खुली है, तो यह नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है, साथ ही घर में बीमारी का खतरा भी बढ़ता है। 

घर का पश्चिमी कोना, रचनात्मकता और बच्चों की खुशहाली से जुड़ा है। इस कोने में बच्चों की तस्वीर टांगने से घर में खुशियां आती हैं।

फेंगशुई के अंतर्गत पानी को पैसों से जोड़ा जाता है। अगर आपके घर में पानी के नल के लगातार बहते रहते हैं तो उन्हें तुरंत ठीक करवाना चाहिए। यह धन के फिजूल खर्च को दर्शाते हैं। 

नारंगी और नींबू का पेड़ संपन्नता को दर्शाते हैं। घर के भीतर नारंगी का पौधा लगाना एक अच्छा विकल्प है। बैठक का दक्षिण-पूर्वी भाग धन का सूचक है। इस कोने में मनी प्लांट का पेड़ लगाने से आय में वृद्धि हो सकती है।


गुरुवार, 26 जनवरी 2017

घर में सुख शांति के लिए आजमाए ये सरल उपाय


Interesting Facts

हर इंसान चाहता है कि मेरे घर में सुख-शांति हमेशा बनी रही। लोग बहुत परेशान होते हुए भी कुछ नहीं समझ पाते की हमें अब क्या करना चाहिए। खबर यह है कि गृहस्थ व्यक्ति हमेशा कामना करता है कि उसके घर मे शांति हो, लेकिन उसके प्रयासों के बाद भी कोई न कोई बात ऎसी हो जाती है, जो उसके मन को अशांत कर देती है ऎसे में उसके कारणों की खोज परोक्ष रूप में करनी चाहिए। लहसुन की गांठ घर में रखने से सर्प कभी घर में प्रवेश नहीं करता।

हर इंसान चाहता है कि मेरे घर में सुख-शांति हमेशा बनी रही। लोग बहुत परेशान होते हुए भी कुछ नहीं समझ पाते की हमें अब क्या करना चाहिए। खबर यह है कि गृहस्थ व्यक्ति हमेशा कामना करता है कि उसके घर मे शांति हो, लेकिन उसके प्रयासों के बाद भी कोई न कोई बात ऎसी हो जाती है, जो उसके मन को अशांत कर देती है ऎसे में उसके कारणों की खोज परोक्ष रूप में करनी चाहिए। लहसुन की गांठ घर में रखने से सर्प कभी घर में प्रवेश नहीं करता।


यदि आपके घर में प्रतिदिन कभी भी किसी भी चीज की संपन्नता स्थिर नहीं रह पाती है तो अपने घर में महालक्ष्मी शंख को रखें, शाम में यंत्र को एकटक निहारते हुए श्रीं श्रीयेयै नम: का नियमित जप करें। जितनी अधिक संख्या में कर सकते हैं, उतना ही अच्छा है।

यदि आपके घर में प्रतिदिन कोई न कोई मुसीबत आती है और आपको लगात है कि कोई आप पर तंत्र-मंत्र करवाता है तो आप किसी भी शुक्लपक्ष के सोमवार को नवदुर्गा यंत्र को घर के मुख्य द्वार पर लगाकर रोज 21 बार ऊँ ह्रीं दुर्गायै नम:


गीता के 11वें अध्याय के 36वें श्लोक को गत्ते पर लाल स्याही से लिखकर टांग देने से घर की समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं। जिस घर में नियमित रूप से अथवा प्रत्येक शुक्रवार को श्रीसूक्त या श्रीलक्ष्मी सूक्त पाठ होता है। उस घर में सदा लक्ष्मी का वास होता है।
















बुधवार, 25 जनवरी 2017

रोचक सामान्य ज्ञान प्रश्न

रोचक सामान्य ज्ञान प्रश्न 


नल सरोवर बर्ड सेंट्यूरी कहाँ पर स्थित है । 
गुजरात ।
यूनाइटिड नेशन फ्लैग का रंग क्या है ।
नीला ।
यू. एन. यूनिवर्सिटी फॉर पीस कहाँ पर स्थित है ।
कॉस्टारिका ।
रूबल किस देश की मुद्रा है ।
यू. एन. की कौन सी एजेंसी बच्चों के लिए काम करती है 
यूनिसेफ ।
 इंडियन मिलिट्री अकेडमी कहाँ पर स्थित है ।
देहरादून । 
कमिस्ट्री का जनक किसे कहा जाता है ।
जबीर इब्न हय्यन । 
कार्बन डाई ऑक्साइड की खोज किसने की थी ।
जोज़फ़ ब्लैक ।
बैटरी की खोज किसने की थी ।
अलेजेंड्रा वोल्टा ।
10 कोणार्क का मंदिर किसने बनवाया था ।
नर्सिम्हा-I
11 विश्व का सबसे गरीब देश कौन सा है
भूटान ।
12 डब्ल्यू. टी. ओ. का मुख्यालय कहाँ स्थित है ।
जेनेवा में (स्वीज़रलेंड) ।
13 गीता रहस्य के रचयिता कौन हैं ।
बी. जी. तिलक ।
14 सोडियम मेटल को किस के अंदर रखा जाता है । 
किरोसीन ।

रोचक बातें

                          रोचक बातें 

1. इंसान खाना निगलते वक्त सांस नहीं ले सकते।
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2. महिलाओं को वे आदमी ज्यादा अच्छे लगते हैं जिन्हें महिलाओं से जुडी खास बाते याद रहती हैं।
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3. शापिंग करते वक्त पैसे बचाने का तरीका है कि आप किसी भी चीज को हाथ न लगाएं। किसी चीज को छूने से आपके द्वारा उसे खरीदने की संभावना बढ़ जाती है
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4. अगर आप अलार्म की धुन वही रखें जो कि आपके मोबाइल की रिंगटोन है तो आपको उठने में आसानी होगी।
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5. 90 प्रतिशत लोग अपने टूथब्रश पर पेस्ट लगाने के बाद उसे गीला करते हैं।
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6. सारी रात जागकर बिताने पर आप 161 कैलोरी जला देते हैं।
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7. सच बोलते वक्त हाथ के मूवमेंट्स ज्यादा होते हैं जबकि झूठ बोलने पर हाथ एक ही जगह पर बने रहते हैं।
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8. रात में देर तक जागने वाले लोग जल्दी सोने वाले लोगों के मुकाबले ज्यादा इंटेलीजेंट होते हैं।
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9. अगर आप किसी के दाहिने कान की तरफ से मदद मांगेंगे तो आपको मदद मिलने की संभावना बढ जाती है।

सोमवार, 23 जनवरी 2017

लाल किताब : 5 दिन के 5 उपाय बदल देंगे आपकी तकदीर

Astrology

अपने ग्रहों को अनुकूल बनाने के लिए व्यक्ति हर संभव काम करता है। ऐसे में लाल किताब और ज्योतिषियों के अनुसार 5 दिन में अगर 5 चुनींदा उपाय किए जाएं तो प्रतिकूल ग्रह भी अनुकूल होने लगते हैं। 

कोई भी जातक अगर पूर्णिमा के दिन नारियल को चमकीले कपड़े में बांधकर अपने पूजा घर या तिजोरी में रख ले तो न केवल धन-वृद्धि होती है बल्कि घर में शांति और सम्पन्नता भी आती है।

हर महीने जब भी आपको वेतन मिले, बैंक में आए या कैश मिले उसमें से कुछ पैसे पूजाघर में लाकर रखें। ऐसा करने से भी धन आगमन के योग बनेंगे बल्कि कुबेर और मां लक्ष्मी की भी पूरी मेहरबानी बनी रहती है।

अगर आपके घर में लगातार नुकसान हो रहा हो, कोई भी काम रूकने लगा हो तो देखें कि कहीं आपके घर में कोई ख़राब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तो नहीं रखा है। कहते हैं कि घर में बिजली का खराब सामान रखने और कभी-कभी लीकेज पानी भी बुरे ग्रहों को बुलाता है। ऐसे में नल के पानी को बिल्कुल भी खुला न छोड़ें।

अगर कोई भी जातक शनिवार को घर से मकड़ी के जाले हटाता है या घर की साफ-सफाई करता है तो लक्ष्मी जी का घर में आगमन होने लगता है। घर में कभी भी शाम को झाडू ना दें और ना ही पौंछा लगाएं।

जातक यह भी ध्यान रखे कि घर में जितने दरवाजे हों, उनमें वह लगातार तेल डालता रहे। कोई दरवाजा खोलते समय आवाज़ न करे। कुछ ही दिनों में आपको फायदा दिखने लगेगा।

शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

इस मंदिर में मूर्तियां बोलती हैं, वैज्ञानिक भी हैं हैरान

The temple sculptures speak, scientists are puzzled


मंदिर तो आपने बहुत देखे होंगे लेकिन हम आपको बता रहे हैं ऐसे मंदिर के बारे में जहां की मूर्तियां साक्षात इंसानों की तरह बातें करती हैं। कुछ लोगों को यह पहले वहम लगता था लेकिन अब वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि मंदिर परिसर में किसी के भी नहीं होने पर शब्द गूंजते रहते हैं।

तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध बिहार के इकलौते राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में साधकों की हर मनोकामना पूरी होती है। इस मंदिर की सबसे अनोखी मान्यता यह है कि निस्तब्ध निशा में यहां स्थापित मूर्तियों से बोलने की आवाजें आती हैं।


Interesting Facts
मध्य-रात्रि में जब लोग यहां से गुजरते हैं तो उन्हें आवाजें सुनाई पड़ती हैं। मंदिर के इस बात की पुष्टि भी करते हैं। नगर के कई लोगों ने भी रात में मंदिर से बुदबुदाने की आवाज सुनने की बात कही है। ऐसा लगता है मानो मूर्तियां आपस में बातें करती हैं। इस बात को जांचने के लिए वैज्ञानिकों के एक दल ने वहां रिसर्च किया, जिसमें यह निकलकर आया कि वहां कोई भी नहीं होने पर शब्दि तैरते रहते हैं।




वैज्ञानिकों ने माना है कि मंदिर में कुछ ना कुछ तो अजीब घटित होता ही है। वैज्ञानिक भी इस बात को लेकर हैरान हैं। इस मंदिर की स्थापना लगभग 400 वर्ष पहले की गई थी। इस मंदिर में कलश स्थापना का विधान नहीं है। तंत्र साधना से ही यहा माता की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। तांत्रिक कारणों से ही यहां कलश स्थापित नहीं होता है।

गुरुवार, 19 जनवरी 2017

लाल किताब : इन उपायों के बाद "बुरे दिन" बदलने लगेंगे "अच्छे दिनों" में



 Red Book: Since these measures "Bad Day" will replace the "good days"

tone totke

कई बार होता है कि दुर्भाग्य आपका पीछा ही नहीं छोडता। कोई भी काम पूरा नहीं होता, हर काम अटकता चला जाता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका दुर्भाग्य, सौभाग्य में बदल जाए तो ये करें उपाय-

लाल किताब के अनुसार बरगद के पत्ते को गुरु पुष्य या रवि पुष्य योग में लाकर उस पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर के पूजाघर में रखकर पूजा करना शुरू कर दें।

घर के मुख्य द्वार के ऊपर भगवान श्रीगणेश की दो मुंह की प्रतिमा या चित्र इस प्रकार लगाएं कि उनका एक मुख घर के बाहर और एक घर के अंदर रहे। उस प्रतिमा पर प्रतिदिन सुबह दूर्वा अवश्य अर्पित करें।




कोई भी धन संबंधी कार्य सोमवार एवं बुधवार को करें। मंगलवार को किसी को पैसा देने या लेने से बचें।




नए कार्य, व्यवसाय, नौकरी, रोजगार आदि शुभ कार्यों के लिए जाते समय घर की कोई महिला एक मुठ्ठी काले उड़द उस व्यक्ति के ऊपर से उतार कर भूमि पर छोड़ दे तो हर कार्य में सफलता मिलेगी।




गरीब, असहाय, रोगी व किन्नरों की सहायता दान स्वरूप अवश्य करें। यदि संभव हो तो किन्नरों को दिए पैसे में से एक सिक्का वापस लेकर अपने कैश बॉक्स या लॉकर में रखें। इससे बहुत लाभ होगा।




रवि पुष्य नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में बहेड़े की जड़ या एक पत्ता तथा शंखपुष्पी की जड़ लाकर घर में रखें और लगातार उसकी पूजा करें। आपके बुरे दिन अच्छे दिनों में बदलने लगेंगे।

बुधवार, 18 जनवरी 2017

Unfortunately the luck will change, adopted the 7 tricks


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हर इंसान को अपने अच्छे और बुरे सभी कर्मों का फल उसके भाग्य के रूप में मिलता। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति अपने अच्छे कर्मों से ही भाग्य बदल सकते है। भाग्य ईश्वर का रचा नहीं बल्कि इंसान का रचा होता है। मतलब जैसे कर्म हम करते है भाग्य वैसा ही हो जाता है। 

हालांकि ज्योतिष के कुछ विशेष उपायों (तांत्रिक टोने-टोटकों से) को अपनाकर अपना भाग्य में परिवर्तन किया जा सकता। भाग्य को पूरी तरह बदलता तो हमारे सब में नहीं लेकिन कुछ विशेष टोने-टोटको से आपने भाग्य को कुछ हद तक बदल सकते है। 

Astrology

 शादी के बाद जब कन्या विदा हो रही हो तो एक लोटे में गंगाजल, थोड़ी सी हल्दी, एक पीला सिक्का लेकर कन्या के सिर के ऊपर से 7 बार उसार कर उसके आगे फेंक दें। उसका वैवाहिक जीवन सदा सुखी रहेगा।

यदि कन्या 7 साबुत हल्दी की गांठें, पीतल का एक टुकड़ा, थोड़ा सा गुड लेकर ससुराल की तरफ फेंक दें तो वह कन्या को ससुराल में सुख ही सुख मिलता है।

 साबुत काले उड़द में हरी मेहंदी मिलाकर जिस दिशा में वर-वधू का घर हो, उस और फेंक दें, दोनों के बीच परस्पर प्रेम बढ़ जाएगा और दोनों ही सुखी रहेंगे।

 यदि किसी के साथ बार-बार दुर्घटना होती हैं तो शुक्ल पक्ष (अमावस्या के तुरंत बाद का पहला) के प्रथम मंगलवार को 400 ग्राम दूध से चावल धोकर बहती नदी अथवा झरने में प्रवाहित करें। यह उपाय लगातार सात मंगलवार करें, दुर्घटना होना बंद हो जाएगा। 

यदि कोई पुराना रोग ठीक नहीं हो रहा हो तो गोमती चक्र को लेकर एक चांदी की तार में पिरोएं तथा पलंग के सिरहाने बांध दें। रोग जल्दी ही पीछा छोड़ देगा।

कोई असाध्य रोग हो जाए तथा दवाईयां काम करना बंद कर दें तो पीडि़त व्यक्ति के सिरहाने रात को एक तांबे का सिक्का रख दें तथा सुबह इस सिक्के को किसी शमशान में फेंक दें। दवाईयां असर दिखाना शुरू कर देंगी और रोग जल्दी ही दूर हो जाएगा।

घर में लक्ष्मी के स्थाई वास के लिए एक लोहे के बर्तन में जल, चीनी, दूध व घी मिला लें। इसे पीपल के पेड़ की छाया के नीचे खड़े होकर पीपल की जड़ में डाले। इससे घर में लक्ष्मी का स्थाई वास होता है।

मंगलवार, 17 जनवरी 2017

Body signs (symptoms Maritime) more than women characterized



 Body signs (symptoms Maritime) more than women characterized

ऋषि पाराशर ने सामुद्रिक लक्षणों के आधार पर स्त्रयों के शरीर पर मंगल और अशुभ चिन्ह बताए हैं। उनमें से कुछ शुभ चिन्हों के बारे में हम यहां चर्चा करेंगे।

तिल: 
आमतौर से पुरूष के शरीर के दाएं अंगों पर तिल शुभ माना जाता है। स्त्रयों के बाएं अंग पर तिल शुभ माना जाता है। हर अंग पर तिलों के अलग-अलग प्रभाव माने गए हैं। ऎसा माना जाता है कि भगवान शंकर ने माता पार्वती को यह रहस्य बताए थे। भौहों के मध्य में तिल या ललाट के मध्य में रक्तवर्ण तिल राज्यप्रद माना गया है तथा गाल पर तिल हो तो नित्य मिष्ठान और भोजन प्राप्त होते हैं। नाक पर तिल या लाल चिन्ह हो तो वह राजपत्नी होती है। यदि नाक पर काले रंग का दाग हो तो विधवा हो जाती है या निन्दित होती है। नाभि के नीचे स्त्री और पुरूष के सब चिन्ह शुभ माने गए हैं। कान, गाल या कंठ पर तिल हो तो प्रथम संतान पुत्र होती है। जिसके जांघ में तिल होता है उसको दु:ख मिलता है।

तलुआ: 
स्त्री के तलुए चिकने, मुलायम, पुष्ट तथा सम हों अर्थात् न छोटे हों न ब़डे हों, पसीने रहित हों और गरम हों तो सुख भोगने वाली होती है। कटे-फटे, रूखे, मांसहीन तलुए दु:ख देने वाले होते हैं। तलुए में शंख, स्वस्तिक, चक्र, कमल, ध्वज, मत्स्य या छाते के चिन्ह हों तो वह रानी और सुख भोगने वाली होती है परन्तु तलुए में सांप, चूहा, कौआ या विचित्र चिन्ह हो तो दु:ख भोगने वाली और धनहीन होती है।

नाखून:
 लाल, चिकने, ऊंचे और गोल नाखून से सुख मिलता है तथा फटे और काले नाखून से दु:ख मिलता है

अंगूठा: 
पैर का अंगूठा उन्नत, पुष्ट और गोल हो तो सुखदायक, टेढ़ा, छोटा और चिपटा हो तो दु:ख देने वाला होता है

पैर की अंगुली: 
कोमल, घनी, गोल और पुष्ट अंगुली सुख देने वाली तथा लम्बी तथा पतली अंगुली अशुभ मानी गई है।

स्त्री या पुरूष की छोटी अंगुली अल्पायु, छोटी-ब़डी अंगुलियां हों तो स्वभाव दोष और कपट आता है, चिपटी अंगुली दासकर्म कराती है और छिद्र वाली अंगुली धनहीन बनाती है। अंगुली एक-दूसरे पर चढ़ी हो तो विधवा होकर दूसरे के आश्रित हो जाती है।

चाल: 
जिस स्त्री के चलने से पीछे से मार्ग में धूल उ़डे वह अपने सभी कुलों को कलंकित करने वाली होती है। यदि किसी स्त्री की कनिष्ठा अंगुली भूमि का स्पर्श ना करे तो वह एक पति का नाश कर दूसरा पति करती है। इसी भांति पैर का पृष्ठ भाग ऊंचा, पसीना रहित, पुष्ट, चिकना और कोमल हो तो वह रानी होती है अगर विपरीत हो तो दरिद्रता आती है। रोम सहित पैर का ऊपर का भाग या मांसहीन हो तो उसे अशुभ माना गया है। पैर का पिछला भाग यानि ऎ़डी समान हो तो शुभ माना गया है अगर यह भाग मोटा हो तो अशुभ, ऊंचा हो तो निन्दित और लम्बा हो तो दु:ख लाने वाला होता है।

कटि (कमर):-
चौबीस अंगुल कटि और ऊंचा नितम्ब सौभाग्यदायक माना गया है। अगर कटि प्रदेश टेढ़ा, चपटा, लम्बा मांसरहित हो, छोटा हो और रोमयुक्त हो तो अशुभ माना गया है और वैधव्य देने वाला होता है।

नाभि प्रदेश: 
स्त्री की नाभि गहरी, दाहिनी तरफ घूमी हुई तो सब सुख देने वाली मानी गई है। ऊपर को उठी हुई ग्रंथि तथा वामावर्त वाली नाभि अशुभ फल देने वाली होती है।

कुक्षि: 
ऊंची कुक्षि संतानोत्पत्ति में बाधक है। कुक्षि में बल या आवर्त (भंवर) उसे नौकरी करा सकता है। हथेली: मध्य में ऊंची, अंगुली मिलाने से छिद्रहीन, कोमल और थो़डी रेखाओं वाली हो तो बहुत सुख भोगने वाली होती है।

कुछ अन्य स्त्री लक्षण: 
स्त्री के जन्म के समय लग्न और चंद्रमा दोनों समराशि में हों तो उसे अत्यन्त शुभ और स्त्रयोचित लक्षण देने वाला माना जाता है। ऎसी स्त्री सुशीला, रूपवती और देहसुख वाली होती है। यदि लग्न और चंद्रमा दोनों विषम राशि में हों तो वह कन्या पुरूष के सदृश्य स्वभाव और पुरूषोचित कार्य करने वाली होती है। यदि इन पर पाप ग्रहों की दृष्टि या योग हो तो वह दुर्गुणों में बदल जाती है। अगर चंद्रमा बलवान हों तो उसके गुण अधिक होने चाहिएं और लग्न बलवान हों तो उसके गुण अधिक होने चाहिएं।

2, 4, 6, 8, 10 और 12 को सम राशियां माना जाता है तथा 1, 3, 5, 7, 9 और 11 को विषम राशियां माना जाता है। सप्तम भाव मे कोई भी ग्रह नहीं हो और उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि नहीं हो तो पति की सफलता सीमित हो जाती है। सप्तम भाव में यदि चर राशि हो तो उस स्त्री का पति देशाटन करता रहता है। सप्तम भाव में सूर्य हो तो उसे त्याग दिया जाता है, 

कैसे पाएं भरपूर धन! आजमाएं ये 9 तरीके

रात-दिन मेहनत करके इतना धन तो अर्जित किया जा सकता है कि अपना और अपने परिवार का अच्छी तरह भरण-पोषण हो जाए परन्तु लाखों-करोडों की दौलत तो केवल भाग्य से ही मिलती है। अनेक अतियोग्य, मेधावी और मेहनती व्यक्ति जीवन भर छोटी-मोटी नौकरी ही करते रहते हैं, छोटा सा मकान बनाने तक का उनका सपना पूरा नहीं हो पाता।

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दूसरी तरफ अनेक मूर्ख और अयोग्य व्यक्ति लाखों रूपए प्रतिमाह अर्जित कर रहे हैं और इसका एकमात्र कारण यही है कि धन की देवी लक्ष्मीजी की उन पर भरपूर कृपा है। भगवती लक्ष्मी की कृपा और भरपूर धन प्राप्त करने हेतु अनेक टोने-टोटके, गंडे-तावीज, अंगूठियां और रत्न ही नहीं बडी-बडी तांत्रिक साधनाएं तक प्राचीनकाल से ही संपूर्ण विश्व में प्रचलित रही हैं। हमारे धर्म में दीपावली पूजन के साथ ही कई प्रकार के यन्त्रों, पूजाओं और मंत्रों की साधना प्राचीनकाल से होती रही है, तो इस्लाम में भी इस प्रकार के अनेक नक्श और तावीज हैं। इनमें से पूर्ण प्रभावशाली और साधना में एकदम आसान कुछ टोने-टोटके और यन्त्र-मन्त्र इस प्रकार हैं।







शक्तिशाली टोटके---
दान करने से धन घटता नहीं ,बल्कि जितना देते हैं उसका दस गुना ईश्वर हमें देता है।
आयुर्वेद में वर्णित "त्रिफला" का एक घटक "बहेडा" सहज सुलभ फल है।

इसका पेड बहुत बडा, महुआ के पेड जैसा होता है। रवि-पुष्य के दिन इसकी जड और पत्ते लाकर उनकी पूजा करें, तत्पश्चात् इन्हें लाल वस्त्र में बांधकर भंडार, तिजोरी या बक्स में रख दें। यह टोटका भी बहुत समृद्धिशाली है।

पुष्य-नक्षत्र के दिन शंखपुष्पी की जड घर लाकर, इसे देव-प्रतिमाओं की भांति पूजें और तदनन्तर चांदी की डिब्बी में प्रतिष्ठित करके, उस डिब्बी को धन की पेटी, भण्डार घर अथवा बक्स-तिजोरी में रख दें। यह टोटका लक्ष्मीजी की कृपा कराने में अत्यन्त समर्थ प्रमाणित होता है।




धन प्रापि्त के लिए दस नमस्कार मंत्र--
इनमें से किसी भी एक मंत्र का चयन करके सुबह, दोपहर और रात्रि को सोते समय पांच-पांच बार नियम से उसका स्तवत करें। मातेश्वरी लक्ष्मीजी आप पर परम कृपालु बनी रहेंगी।
ओम धनाय नम:
ओम नारायण नमो नम:
ओम धनाय नमो नम:
ओम नारायण नम:
ओम लक्ष्मी नम:
ओम प्राप्ताय नम:
ओम लक्ष्मी नमो नम:
ओम प्राप्ताय नमो नम:
ओम लक्ष्मी नारायण नम:
ओम लक्ष्मी नारायण नमो नम:




धन प्राप्ति हेतु तावीज
यहां चार आसान यंत्र हैं। इनमें से किसी भी एक को कागज पर स्याही से अथवा भोजपत्र पर अष्टगंध से अंकित करके धूप-दीप से पूजा करें। चांदी के तावीज में यंत्र रखकर मातेश्वरी का ध्यान करते हुए इसे गले में धारण करें और ऊपर दिए गए किसी मंत्र का नियम से स्तवन भी करते रहें।

संसार में सभी व्यक्ति भरपूर धन चाहते हैं और यही कारण है कि मातेश्वरी लक्ष्मी की कृपाएं प्राप्त करने के लिए बडे-बडे अनुष्ठान करते ही रहते हैं। बडे भाग्य से मिलती हैं लक्ष्मीजी की कृपाएं। यही कारण है कि इन सामान्य यंत्रों ओर यंत्रों के पश्चात् आगे परम शक्तिशाली मंत्र, यंत्र और तांत्रिक प्रयोग इस अध्याय में दिए जा रहे हैं।




धनप्राप्ति के नौ सुगम मंत्र
1. ओं लक्ष्मी वं, श्री कमला धरं स्वाहा। इस मंत्र की सिद्धि एक लाख बीस हजार मंत्र जप से होती है। इसका शुभारम्भ वैशास मास में स्वाति नक्षत्र में करें तो उत्तम रहेगा। जप के बाद हवन भी करें।

2. ओं सचि्चदा एकी ब्र ह्नीं सचि्चदीक्रीं ब्र। इस मंत्र के एक लाख जप से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

3. ओं ह्रीं ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं श्रीं क्रीं क्री क्रीं स्थिरां स्थिरां ओं। इसकी सिद्धि 110 मंत्र नित्य जपन से 41 दिनों में संपन्न होती है। माला मोती की और आसन काले मृग का होना चाहिए। साधना कांचनी वृक्ष के नीचे करनी चाहिए।

4. ओम नमो ह्नीं श्रीं क्रीं श्रीं क्लीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी ममगृहे धनं चिंता दूरं करोति स्वाहा। प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर एक माला (108 मंत्र) का नित्य जप करें तो लक्ष्मी की सिद्धि होती है।




5. ओम नमो पद्मावती पद्यनतने लक्ष्मीदायिनी वांछ भूत प्रेत विन्ध्यवासिनी सर्व शत्रुसंहारिणीदुर्जन मोहिनी ऋद्धि सिद्धि वृद्धि कुरू-कुरू स्वाहा। ओम नम: क्लीं श्रीं पद्मावत्यै नम:।
इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए साधना के समय लाल वस्त्रों को प्रयोग करना चाहिए और पूजा में प्रयुक्त होने वाली सभी पूजन-सामग्री को रक्त वर्ण का बनाना होता है। इसकी साधना अर्द्धरात्रि के समय करनी पडती है। इसका शुभारम्भ शनिवार या रविवार से उपयुक्त रहता है। 108 बार नित्यप्रति जप करें। छारछबीला, गोरोचन, कपूर, गुग्गुल और कचरी को मिलाकर मटर के बराबर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। जप के बाद नित्यप्रति इन गोलियों से 108 आहुतियां देकर हवन करना चाहिए। इस साधना को 22 दिन तक निरन्तर करना चाहिए। तभी लक्ष्मीजी की कृपा प्राप्त होती है




6. ओम नमो पद्मावती पद्मनेत्र बज्र बज्रांकुश प्रत्यक्ष भवति।
इस मंत्र की सिद्धि के लिए लगातार 21 दिन तक साधना करनी होती है। इस साधना को आधी रात के समय करना आवश्यक है। साधना के समय मिट्टी का दीपक बनाकर जलाएं। जप के लिए मिट्टी के मनकों की माला बनाएं और नित्यप्रति एक माला अर्थात् 108 मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप किया जाए तो लक्ष्मी देवी प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती है।




7. ओम नम: भगवते पद्मद्मात्य ओम पूर्वाय दक्षिणाय पश्चिमाय उत्तराय अन्नपूर्ण स्थ सर्व जन वश्यं करोति स्वाहा।
प्रात: काल स्नानादि सभी कार्यो से निवृत्त होकर 108 मंत्र का जप करें और अपनी दुकान अथवा कारखाने में चारों कोनों में 10-10 बार मंत्र का उच्चारण करने हुए फंूक मारें। इससे व्यापार की परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी और हानि के स्थान पर लाभ की दृष्टि होने लगेगी।




8. ओम नम: काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिये व्याली चार बीर भैरों चौरासी बात तो पूजूं मानए मिठाई अब बोली कामी की दुहाई।
इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद प्रात: काल स्नान, पूजन, अर्जन आदि से निवृत्त होकर पूर्व की ओर मुख करके बैठें और सुविधा अनुसार 7, 14, 21, 28, 35, 42 अथवा 49 मंत्रों का जप करें। इस प्रक्रिया से थोडे दिनों नौकरी अथवा व्यापार के शुभारम्भ की व्यवस्था हो जाएगी।




9. ओम नम: भगवती पद्मावती सर्वजन मोहिनी सर्वकार्य वरदायिनी मम विकट संकटहारिणीय मम मनोरथ पूरणी मम शोक विनाशिनी नम: पद्मावत्यै नम:।
इस मंत्र की सिद्धि करने के बाद मंत्र का प्रयोग किया जाए तो नौकरी अथवा व्यापार की व्यवस्था हो जाएगी। उसमें आने वाले विघ दूर हो जाएंगे। धूप-दीप आदि से पूजन करके प्रात: दोपहर और सायंकाल तीनों संख्याओं मे एक-एक माला का मंत्र जप करें।




सोमवार, 16 जनवरी 2017

जानिए, क्यों चढाया जाता है सूर्य को जल

Find out why the sun is filled with water
सूर्य ग्रहों के स्वामी हैं। ये पंचदेवों में एक हैं। जीवन को व्यवस्था सूर्य से ही मिलती है। पुराणों में सूर्योपासना को सर्वरोगों को हरने वाली कहा गया है। हिंदू संस्कृति में अƒर्यदान (जल देना) सामने वाले के प्रति श्रद्धा और आस्था प्रकट का प्रतीक है। स्नानदि के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देने का अर्थ है जीवन में संतुलन को आमांत्रित करना। 

जहां स्नान के लिए नदी या सरोवर उपलब्ध हैं, वहां सचैल (गले वस्त्रों के साथ ही) सूर्य को अर्य देते हुए आज भी देखा जा सकता है। अर्य देते समय सूर्य के नामों का उच्चारण करने का विघान है। शास्त्रनुसार प्रात: पूर्व की ओर मुख करके सूर्य को अर्य देना चाहिए, जबकि सायं पश्चिम की ओर।

Dharmik


धार्मिक मान्यता के अनुसार,सूर्य को अर्घ्य दिए बिना अन्न ग्रहण करना पाप है। मान्यता है कि सूर्य को अर्घ्य देते सूर्य गिरने वाले जलकण वज्र बनकर राक्षसों का विनाश करते हैं। रोग ही तो राक्षस हैं। अर्घ्य की विधि को देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि जल के संस्पर्श से सूर्य की रश्मियां किस प्रकार सात रंगों में बंट जाती हैं और उनका प्रभाव अर्घ्य प्रदान करने पर किस तरह से पडता है । 

इस सत्य को तो स्वीकार करना ही पडेगा कि जो रोगाणु सामान्यतया उबालने और शुष्कीकरण जैसी विशिष्ट क्रियाओं से नहीं मरते, उन्हे सूर्य-किरणें निर्मूल कर नष्ट कर देती हैं। सूर्य को अर्घ्य देने वाले की नेत्र ज्योति क्षीण नहीं होती,ऎसा आयुर्वेद ग्रंथों में कहा गया हैं।

रविवार, 15 जनवरी 2017

जानिए, क्यों कुतरते हैं नाखून!

Interesting Facts

क्या आप खुद के नाखून दांतों से कुतरते रहना?
कोई बीमारी है या फिर कुछ और?
दुनिया के पांच अरब लोगों में से लगभग 60 करो़ड लोग नाखून चबाने की आदत से मजबूर हैं, भले ही मखौल बनते रहें?
मनोवैज्ञानिकों की मानें तो दरअसल ऎसा कुछ नहीं है, जब कोई इंसान परेशान या बोर होने लगता है तो नाहक ही बेचारे मासूम नाखून खुद-ब-खुद दांतों तले आ जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है- यह एक सहज प्रवृत्ति है, बच्चो को बचपन से सिखाया जाता है कि नाखून चबाना गलत है। ऎसा करने पर बराबर के उम्र वालों के बीच भी मजाक बनता है। ब़डे भी फटकार लगाते हैं, बावजूद तमाम टोका-टोकी के भी बच्चे इस आदत को लेकर चौकन्ने नहीं हो पाते और ब़डी उम्र तक आदत बरकरार रहती है।




मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि नेल बाइटिंग दरअसल बच्चों और युवाओं में मानसिक तनाव और ऑवसेसिव कंपलसिव डिसऑर्डर का लक्षण है। वे सचेत करते हैं, नेल बाइटिंग से गंभीर किस्म की संक्रामक बीमारियों का खतरा तो रहता ही है, दूसरे नाखून का मूल आकार भी हमेशा के लिए बदशक्ल हो सकता है।




हाल ही इस पर एक गंभीर शोध और सर्वे हुआ है, जो बताता है नाखून चबाने की आदत का एक दूसरा पहलू भी है। नाखून चबाने की आदत का कुंडली और ग्रहों से सीधा रिश्ता है। क्या कोई ग्रह किसी इंसान को ऎसा करने को बाध्य करता है। क्या इंसान की हर आदतों का सरोकर किसी न किसी ग्रह से है?







दरअसल नाखून चबाना आपके व्यक्तित्व की अस्थिरता को जाहिर करता है। ऎसे लोग जब किसी उलझन में होते हैं और उलझन को सुलझाने का सिरा पक़ड में नहीं आ रहा होता तो अपने नाखूनों को चबाने लगते हैं। ऎसा करते वक्त दरअसल वे अपनी खीज ही निकालते हैं।







दरअसल नाखून चबाना आपके व्यक्तित्व की अस्थिरता को जाहिर करता है। ऎसे लोग जब किसी उलझन में होते हैं और उलझन को सुलझाने का सिरा पक़ड में नहीं आ रहा होता तो अपने नाखूनों को चबाने लगते हैं। ऎसा करते वक्त दरअसल वे अपनी खीज ही निकालते हैं।







आंक़डे बताते हैं कि नाखून कुतरने की आदत से सबसे ज्यादा तंग 14 से 25 साल के युवा हैं। इनमें 34 फीसदी संख्या ल़डकियों की और 66फीसदी संख्या ल़डकों की है। हैरानी की बात तो यह है कि सर्वे रिपोर्ट इस तथ्य और सोच को झुठलाती है। नाखून चबाना ल़डकी की फितरत का हिस्सा है। सर्वे में शामिल कुल लोगों में 14 से 25 के दरम्यान युवाओं की 76फीसदी हिस्सेदारी रही।

कुण्डली के ग्रह
इस स्थिति को ज्योतिष के आइने से देखें तो ग्रहों की चालों के सामने बेबस इंसान के खुद को दुरूस्त करने की पहल आवश्यक हो जाती है। नाखून चबाने की आदत परिवार से मिली विरासत भी हो सकती है। यानि ग्रहों की चाल आपकी संतति को भी प्रभावित कर रही है।

क्या आप जानते है क्यूं लेते है अग्नि के सात फेरे!


Interesting Facts


अग्नि पृथ्वी पर सूर्य की प्रतिनिधि है। सूर्य जगत की आत्मा तथा विष्णु का रूप है। अत: अग्नि के समक्ष फेरे लेेने का अर्थ है- परमात्मा के समक्ष फेेरे लेना। अग्नि ही वह माध्यम है जिसके द्वारा यज्ञीय आहुतियां प्रदान करके देवताओं को पुष्ट किया जाता है। 

इस प्रकार अग्नि के रूप में समस्त देवताओं को साक्षी मानकर पवित्र बंधन में बंधने का विधान धर्म शास्त्रों में किया गया है।

वैदिक नियमानुसार, विवाह के समय चार फेरों का विधान है। इनमें से पहले तीना फेरों मेें कन्या आगे चलती है जबकि चौथे फेरे में वर आगे होता है। ये चार फेरे चार पुरूषार्थो- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के प्रतीक हैं।

इस प्रकार तीन फेरों द्वारा तीन पुरूषार्थो में कन्या पत्नी की प्रधानता है जबकि चौथे फेरे द्वारा मोक्ष मार्ग पर चलते समय पत्नी को वर का अनुसरण करना पडता है। यहां इस बात को स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि अपवादों से नियम नहीं बना करते।



शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

Vastu tips for prosperity and happiness in the home kitchen

vastu tips

रसोई का वास्तु : House Kitchen (घर में रसोई) का Vastu (वास्तु) खराब होने पर उसका सबसे खराब असर उस घर की Housewife (गृहणी) पर पड़ता है जो कि अपना अधिकतम समय रसोई में ही बिताती है। ऐसे में Kitchen (रसोई) को बनाते समय Vaastu Shaastra (वास्तु शास्त्र) के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। इससे न केवल घर वरन घर में रहने वाली महिलाओं का स्वास्थ्य सही रहता है और घर में Good Luck (सौभाग्य) का आगमन होता है। सामान्य तौर पर रसोई में इन वास्तु नियमों का ध्यान रखना चाहिएः



रसोई को हमेशा घर के दक्षिण-पूर्व यानि अग्निकोण दिशा में ही बनवाना चाहिए। यदि इस कोण में रसोई बनाना संभव न हो तो Aerial Angle (उत्तर-पश्चिम) पर बनवा सकते हैं। साथ ही चूल्हा का स्थान भी रसोई के अग्नि कोण में ही रखना चाहिए।
इसके अलावा रसोई में पानी का घड़ा, Water Purifier आदि रसोई की ईशान कोण (उत्तर-पूर्वी दिशा) में होना चाहिए। परन्तु इस दिशा में सिंक न बनवाएं, अन्यथा घर में बिन बुलाई आपत्तियां आती रहती हैं। साथ ही रसोई से लगा हुआ कोई जल स्त्रोत नहीं होना चाहिए। रसोई के बाजू में बोर, कुआँ, Making The Bathroom (बाथरूम बनवाना) Avoid करें, सिर्फ Washing Space दे सकते हैं।
रसोई की दक्षिण दिशा में कभी भी कोई दरवाजा या खिड़की नहीं होने चाहिए। बाकी तीनों दिशाओं में खिड़की तथा दरवाजे रखे जा सकते हैं। खिड़की व दरवाजों का पूर्व व उत्तर दिशा में होना सबसे बेहतर रहता है। खिड़की भी पर्याप्त बड़ी होनी चाहिए ताकि रसोई में बाहर की ताजी हवा आ सकें.
रसोई बनवाते समय ध्यान रखना चाहिए वहां सूर्य की रोशनी तथा हवा के Ventilation(वायु-संचालन) का पूरा इंतजाम हो। रसोई में चूल्हे की गर्म हवा निकालने के लिए भी Ventilators (वायु-प्रवाहक) होना चाहिए।
रसोई में कभी भी Mirror (शीशे) का प्रयोग नहीं होना चाहिए। इससे घर में Home Tribulation (गृह-क्लेश) का वातावरण बनता है।
घर की रसोई में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। इससे घर से Negative Energy (नकारात्मक ऊर्जा) दूर होकर Positive Energy (सकारात्मक ऊर्जा) आती है। साथ ही घर में पितृदेव भी प्रसन्न रहकर अपना आर्शीवाद देते हैं।