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शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

तिलिस्मी मंदिर पल भर में होता है गायब और फिर..

भारत धर्म, भक्ति, अध्यात्म और साधना का देश है। यहां प्राचीन काल से मंदिरों का विशेष महत्व है। हमारे देश में सभी धर्मों के लोग एक साथ शांतिपूर्वक रहते है। यहां कई मंदिर ऐसे हैं, जहां विस्मयकारी चमत्कार भी होते बताए जाते हैं। जहां आस्थावानों के लिए वे चमत्कार दैवी कृपा हैं, तो अन्य के लिए कौतूहल और आश्चर्य का विषय। यहां की भौगोलिक स्थिति, जलवायु और विविध संस्कृति को देखने के लिए ही विश्व के कोने-कोने से पर्यटक आते हैं। वैसे अपनी भारत यात्रा के दौरान पर्यटकों को जो चीज सबसे ज्यादा पसंद आती है तो वह हैं भारत की प्राचीनतम मंदिर।






गुजरात के कावी में स्तंभेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यह अद्भुत और अविश्वसनीय है, लेकिन सच है कि यह मंदिर पल भर के लिए ओझल हो जाता है और फिर थोड़ी देर बाद अपने उसी जगह वापिस भी जाता है। अपने आप में अजूबा यह मंदिर अरब सागर के बिल्कुल सामने है और वडोदरा से 40 मील की दूरी पर है। आप इस मंदिर की यात्रा तभी कर सकते हैं जब समुद्र में ज्वार कम हो। ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है।मंदिरों की बनावट, विशेषता, महत्व और इतिहास आदि जानने के लिए ही पर्यटक बार-बार भारत की ओर रुख करते हैं। इनमें से कई मंदिर तो ऐसे भी हैं जो कई हजारों साल पुराने हैं और जिनके बारे में जानना पर्यटकों के लिए कौतुहल का विषय है।

इस स्थान पर महिसागर नदी का सागर से संगम होता है। गुजरात स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि और हर अमावस्या पर मेला लगता है। हर साल प्रदोष, पूनम और ग्यारस को पूरी रात यहां चारों प्रहर पूजा-अर्चना होती है। जहां दूर-दूर से श्रद्धालु शिवशंभु के जलाभिषेक का आलौकिक दृश्य देखने यहां आते हैं। कहते हैं स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में स्वयं शिवशंभु विराजते हैं इसलिए समुद्र देवता स्वयं उनका जलाभिषेक करते हैं।

हमेशा ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है और यह परंपरा सदियों से सतत चली आ रही है। समुद्र के बीच में स्थित होने की वजह से मंदिर की खूबसूरती देखने लायक है। समुद्र के बीच स्थित होने के कारण न केवल इस मंदिर का सौंदर्य बढ़ता है बल्कि एक अनोखी घटना भी देखने को मिलती है।





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