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सोमवार, 28 नवंबर 2016

काली हल्दी के अचूक ज्योतिष उपाय

Astrology black infallible measure of turmeric

Astrology

हल्दी की एक प्रजाति ऐसी भी होती है, जिसका उपयोग ज्योतिषीय उपायों में किया जाता है, वह है काली हल्दी। काली हल्दी को धन व बुद्धि का कारक माना जाता है। काली हल्दी अनेक तरह के बुरे प्रभाव को कम करती है, लेकिन इसके पहले इसे सिद्ध करना पड़ता है। काली हल्दी को सिद्धि करने की विधि इस प्रकार है-



काली हल्दी को सिद्धि करने की विधि
किसी भी पक्ष (शुक्ल या कृष्ण) की अष्टमी तिथि की सुबह सूर्यादय से पहले उठकर स्नान कर पवित्र हो जाएं। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। ऐसा स्थान चुनें, जहां से सूर्यदर्शन में बाधा न आती हो। इसके बाद काली हल्दी की गठान की पूजा धूप-दीप से करें।


इसके बाद सामने रखी काली हल्दी की गठान को नमस्कार कर भगवान सूर्यदेव के मंत्र ओम ह्रीं सूर्याय नम: का 108 बार लाल चंदन की माला सेजाप करें। यह प्रयोग अगली अष्टमी तिथि तक रोज करें। इस अष्टमी तिथि पर उपवास रखें व ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इस तरह काली हल्दी की गठान सिद्ध हो जाती है। इसका उपयोग विभिन्न ज्योतिषीय उपायों में किया जाता है।

Interesting Facts


काली हल्दी के अचूक ज्योतिष उपाय


1.काली हल्दी के 7 से 9 दाने बनाएं। उन्हें धागे में पिरोकर धूप, गूगल या लोबान से शोधन (थोड़ी देर इन दानों को इनके धुएं में रख कर) करने के बाद पहन लें। जो भी व्यक्ति इस तरह की माला पहनता है, वह ग्रहों के दुष्प्रभावों, टोने- टोटके व नजर के प्रभाव से सुरक्षित रहता है।

2. यदि आप किसी भी नए कार्य के लिए जा रहे हैं, तो काली हल्दी का टीका लगाकर जाने से उस कार्य में सफलता मिलने के योग बढ़ जाते हैं।


3.यदि किसी व्यक्ति या बच्चे को नजर लग गई है, तो एक काले कपड़े में काली हल्दी की गठान बांधकर 7 बार उसके ऊपर से उतार कर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। जल्दी ही नजर उतर जाएगी।

4. यदि परिवार में कोई व्यक्ति निरंतर बीमार रहता है, तो किसी गुरुवार को आटे के दो पेड़े बनाकर उसमें गीली चने की दाल के साथ गुड़ और थोड़ी सी पिसी काली हल्दी को दबाकर रोगी व्यक्ति के ऊपर से 7 बार उतार कर गाय को खिला दें। इससे लाभ मिलेगा।


5. यदि आपके पास पैसा नहीं टिकता तो शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को चांदी की डिब्बी में काली हल्दी, नागकेसर व सिंदूर को साथ में रखकर देवी लक्ष्मी की तस्वीर के सामने रख दें। थोड़ी देर बाद इस डिब्बी को अपने लॉकर या कैश बॉक्स में रख दें। इससे बरकत बनी रहेगी।

6. यदि बिजनेस में नुकसान हो रहा है तो एक पीले कपड़े में काली हल्दी, 11 गोमती चक्र, चांदी का सिक्का व 11 कौड़ियां बांधकर 108 बार ऊं नमो भगवते वासुदेव नमः का जाप कर धन रखने के स्थान पर रखने से बिजनेस में सफलता मिलने लगती है।

7.यदि आपका बिजनेस मशीनों से संबंधित है और आए दिन मशीनें खराब हो जाती हैं, तो काली हल्दी को पीसकर उसमें केसर व गंगा जल मिलाकर मशीनों पर स्वास्तिक का चिह्न बना दें। इस उपाय से मशीनें जल्दी खराब नहीं होंगी।

8. सिद्ध की हुई काली हल्दी की गठान को एक काले कपड़े में लपेटकर घर के मुख्य द्वार के बार टांग दें। इससे आपके घर को किसी की नजर नहीं लगेगी। साथ ही घर में सुख-शांति बनी रहेगी।

शनिवार, 26 नवंबर 2016

Not forget to bring these things into the house on Saturday

Jyotish Not forget to bring these things into the house on Saturday

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार को घर में इन चीजों को बिलकुल नहीं लाना चाहिए, खरीदना नहीं चाहिए नहीं तो खासा अपयश उठाना पडता है।
लोहे का सामान-
भारतीय समाज में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है कि शनिवार को लोहे का बना सामान नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि शनिवार को लोहे का सामान क्रय करने से शनि देव कुपित होते हैं। इस दिन लोहे से बनी चीजों के दान का विशेष महत्व है। लोहे का सामान दान करने से शनि देव की कोप दृष्टि निर्मल होती है और घाटे में चल रहा व्यापार मुनाफा देने लगता है। इसके अतिरिक्त शनि देव यंत्रों से होने वाली दुर्घटना से भी बचाते हैं।

कोई सा भी तेल-
इस दिन तेल खरीदने से भी बचना चाहिए। हालांकि तेल का दान किया जा सकता है। काले श्वान को सरसों के तेल से बना हलुआ खिलाने से शनि की दशा टलती है। ज्योतिष के अनुसार, शनिवार को सरसों या किसी भी पदार्थ का तेल खरीदने से वह रोगकारी होता है।

नमक भी नहीं खरीदें-
नमक हमारे भोजन का सबसे अहम हिस्सा है। अगर नमक खरीदना है तो बेहतर होगा शनिवार के बजाय किसी और दिन ही खरीदें। शनिवार को नमक खरीदने से यह उस घर पर कर्ज लाता है। साथ ही रोगकारी भी होता है।

कैंची लाती है रिश्तों में तनाव-
कैंची ऐसी चीज है जो कपड़े, कागज आदि काटने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है। पुराने समय से ही कपड़े के कारोबारी, टेलर आदि शनिवार को नई कैंची नहीं खरीदते। इसके पीछे यह मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई कैंची रिश्तों में तनाव लाती है। इसलिए अगर आपको कैंची खरीदनी है तो किसी अन्य दिन खरीदें।

काले तिल बनते हैं बाधा-
सर्दियों में काले तिल शरीर को पुष्ट करते हैं। ये शीत से मुकाबला करने के लिए शरीर की गर्मी को बरकरार रखते हैं। पूजन में भी इनका उपयोग किया जाता है। शनि देव की दशा टालने के लिए काले तिल का दान और पीपल के वृक्ष पर भी काले तिल चढ़ाने का नियम है, लेकिन शनिवार को काले तिल कभी न खरीदें। कहा जाता है कि इस दिन काले तिल खरीदने से कार्यों में बाधा आती है।

काले जूते लाते हैं असफलता-
शरीर के लिए जितने जरूरी वस्त्र हैं, उतने ही जूते भी। खासतौर से काले रंग के जूते पसंद करने वालों की तादाद आज भी काफी है। अगर आपको काले रंग के जूते खरीदने हैं तो शनिवार को न खरीदें। मान्यता है कि शनिवार को खरीदे गए काले जूते पहनने वाले को कार्य में असफलता दिलाते हैं।

झाड़ू लाती है दरिद्रता-
झाड़ू घर के विकारों को बुहार कर उसे निर्मल बनाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। झाड़ू खरीदने के लिए शनिवार को उपयुक्त नहीं माना जाता। शनिवार को झाड़ू घर लाने से दरिद्रता का आगमन होता है।

अनाज पीसने की चक्की-
इसी प्रकार अनाज पीसने के लिए चक्की भी शनिवार को नहीं खरीदनी चाहिए। माना जाता है कि यह परिवार में तनाव लाती है और इसके आटे से बना भोजन रोगकारी होता है।

स्याही दिलाती है अपयश-
विद्या मनुष्य को यश और प्रसिद्धि दिलाती है और उसे अभिव्यक्त करने का सबसे बड़ा माध्यम है कलम। कलम की ऊर्जा है स्याही। कागज, कलम और दवात आदि खरीदने के लिए सबसे श्रेष्ठ दिन गुरुवार है। शनिवार को स्याही न खरीदें। यह मनुष्य को अपयश का भागी बनाती है।

शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

Interesting Facts

Interesting Facts

1. 90% लोग अपने टूथब्रश पर पेस्ट लगाने के बाद उसे गीला करते हैं.

2. आमतौर पर किसी खास इंसान का भेजा हुआ एक ही संदेश आपको तुंरत स्ट्रेस से छुटकारा दिला सकता है और आपके मूड को ठीक कर सकता है.

3. आप मकड़‍ियों को कभी पैर से मत कुचलिए क्योंकि आपके पैर के नीचे अगर मादा मकड़ी हुई तो उसके अंडे आपके जूते में चिपककर पूरे घर में फैल जाएंगे.

4. ज्यादातर खाड़ी के देशों में गैस पानी की बॉटल से ज्यादा सस्ती होती है.

5. आप जितने खुश होंगे उतनी कम नींद में आपका काम चल जाएगा, दुख में आपका ज्यादा सोने का मन करता है.


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6. एक आदमी की चलने की गति अपनी बीवी और गर्लफ्रेंड के लिए 7 प्रतिशत तक धीरे हो जाती है जबकि यही गति किसी आदमी के साथ चलने पर बढ़ जाती है.

7. च्युंइगम आपके दिमाग को स्थिर रखने के साथ-साथ उसे सही तरीके से काम करने में भी मदद करती है.

8. डेनियल रेडक्लिफ (हैरी पॉटर) ने 80 से ज्यादा छड़ियां तोड़ी थीं, क्योंकि वह उन्हें ड्रमस्टिक्स की तरह इस्तेमाल करते थे.

9. अगर आप किसी को लगातार सपनों में देख रहे हैं इसका मतलब है कि वो आपको बहुत ज्यादा याद कर रहे हैं.


10. सपने बुरी यादों और विचारों को शांत करते हैं.

11. बीयर से नहाना आपकी त्वचा को कोमल बनाता है.

12. डरावनी फिल्में देखने से आप सबसे ज्यादा कैलोरी जलाते हैं अन्य किसी तरह की फिल्मों के मुकाबले में.

13. सपनों को याद रखना कठिन होता है क्योंकि दिमाग का वह हिस्सा जो लंबी चीजों को याद रखता है, नींद के समय बंद हो जाता है.

14. कॉकरोच छह पैरों वाला एक ऐसा कीट है जो एक सेकंड में एक मीटर की दूरी तय कर लेता है.


15. फिल्म अभिनेता ब्रूस ली असल जिदंगी में बेहद ही तेज फाइटर थे। उनके मूव्ज इतने तेज होते थे कि उनके लिए फिल्म की शूटिंग के समय फिल्म धीरे करना पड़ती थी ताकि दर्शक उनके फाइट सीन और उनके मूव्ज को देख सकें.

16. हमारी हड्डियां स्टील की धातु से पांच गुना मजबूत होती है.

17. एक बांस का पेड़ 24 घंटे में 3 फीट तक बढ़ता है.

18. जर्मन देश की एक रिसर्च टीम के अनुसार, सोमवार के दिन हार्ट अटैक का खतरा हफ्ते के दूसरे दिनों की तुलना में अधिक होता है.

19. हमारे सोलर सिस्टम में सभी ग्रह Anti-Clockwise घूमते हैं परंतु शुक्र एक ऐसा ग्रह है जो घड़ी की सूई की दिशा में घूमता है.

20. आप चाहे जितने भी स्ट्रांग हों पर कोई एक इंसान होगा जो आपको कमजोर बना सकता है.

21. जरूरत से कम नींद आपको निराशा, शराबखोरी और सेक्स करने की इच्छा की तरफ धकेलती है.

गुरुवार, 24 नवंबर 2016

काफी प्रभावशाली है गोमती चक्र



गोमती चक्र एक ऐसा पत्थर है जिसका उपयोग तंत्र क्रियाओं में किया जाता है। यह बहुत ही साधारण सा दिखने वाला पत्थर है लेकिन इसका असर बहुत प्रभावशाली है। इसके कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं-
1- यदि बार-बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांधकर कमर में बांध दें, तो गर्भ गिरना बंद हो जाता है।
2- यदि कोई कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पांव रखकर जाए तो उस दिन कोर्ट-कचहरी में सफलता प्राप्त होती है।
3- यदि शत्रु बढ़ गए हों तो जितने अक्षर का शत्रु का नाम है उतने गोमती चक्र लेकर उस पर शत्रु का नाम लिखकर उन्हें जमीन में गाड़ दें तो शत्रु परास्त हो जाएंगे।
4- यदि पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में हलूं बलजाद कहकर फेंद दें, मतभेद समाप्त हो जाएगा।
5- प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें। निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे।
6- व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चौखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है।
7- यदि गोमती चक्र को लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है। 
8- गोमती चक्र को होली के दिन थोड़ा सिंदूर लगाकर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुए जलती हुई होली में फेंक दें। आपकी शत्रु भी मित्र बन जाएगा।
9- अगर कोई व्यक्ति होली के दिन 7 गोमती चक्र को सवा मीटर कपड़े में बांधकर अपने पूरे परिवार के ऊपर से ऊतारकर किसी बहते जल में फेंक दें तो यह एक तरह से आपके परिवार की तांत्रिक रक्षा कवच का कार्य करेगा।
10- चार गोमती चक्र को अगर रोगी के बिस्तर के साथ बांध दें तो कुछ ही दिनों में रोगी स्वस्थ होने लगेगा। रोगी के पूर्ण स्वस्थ होने पर इन्हें सुबह के वक्त पीपल के पेड़ के नीचे गाढ़ दें।
11- यदि 11 गोमती चक्र को पीले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में इस दिन रखें तो वर्ष भर तिजोरी भरी रहेगी।
12- तीन गोमती चक्र को जेब में रखकर किसी मुकद्में या प्रतियोगिता के लिए जाएं तो निश्चित ही सफलता मिलेगी।

बुधवार, 23 नवंबर 2016

जानें शादी में चावल फेंकने की रस्‍म का महत्‍व

Learn the importance of the ritual of throwing rice at weddings





शादी, कई सारे रीति-रिवाजों के साथ की जाती है। ऐसा नहीं कि ये सब सिर्फ भारत में ही होता है बल्कि अन्‍य देशों में भी कई सारी रस्‍में होती हैं। लेकिन बहुत सारी रस्‍में सिर्फ निभा लेते हैं और उनके पीछे के तर्क को नहीं जानते हैं।

क्‍या आपने कभी सोचा है कि शादी के दौरान चावल फेंकने की रस्‍म को क्‍यूं निभाया जाता है। क्‍या इसका कोई वैज्ञानिक कारण है या ये सिर्फ एक रीति ही है। आइए हम डालते हैं इस पर एक नज़र:




पहला कारण -
रोम में यह बहुत ही पुरानी रीति है। यह दर्शाता है कि नवविवाहितों के जीवन में खुशियां आएं और वो हमेशा सम्‍पन्‍न रहें।




दूसरा कारण -
वर और वधू को संतान की प्राप्ति हो और उनका भाग्‍य हमेशा उनका साथ दे।




तीसरा कारण -
भारत ही नहीं बल्कि अन्‍य देशों में भी चावल को फेंकने की रस्‍म को निभाया जाता है। मानते हैं कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है।




चौथा कारण -
भारत में चावल को हल्‍दी के साथ फेंका जाता है या वधू की झोली में डाला जाता है। मानते हैं कि इससे जीवन में समृद्धि आती है।




जिन इलाकों या देश में चावल का प्रचलन नहीं हैं वहां सूरजमूखी के बीज, बर्ड सीड आदि को फेंका जाता है। कई स्‍थानों पर अंडे से भी ऐसा किया जाता है। ये थोड़ा अजीब है लेकिन ऐसा होता है। अब आपका अपनी शादी में क्‍या फेंकने का विचार है... अंडा या चावल।

If your chest will be filled every night just the job

vastu tips

जब हम आर्थिक तंगी से गुजर रहे होते हैं, परेशानी में होते हैं या फिर हमारा कोई काम नहीं बन रहा होता है तो हमारे जेहन में बस यहीं विचार उठता रहता है कि कैसे भी, किसी भी तरह से बस ये समस्या दूर हो जाए। सोचते रहते हैं कि काश कोई ऐसा उपाय हो जो इस परेशानी से निजात दिला दे।







ऐसे में आज हम आपको ऐसा ही एक उपाय बता रहे हैं तो आपकी आर्थिक परेशानियों को खत्म करने में आपकी मदद करेगा। वास्तु शास्त्र के मुताबिक अगर आप हर रोज रात के वक्त इस काम को करेंगे तो आप न केवल अपनी आर्थिक तंगी से छुटकारा पा सकेंगे बल्कि आपकी तिजोरी में धन-दौलत से भर जाएगी। वास्तु शास्त्र के जानकारों के मुताबिक अगर आप हर रोज रात के 3 बजे से लेकर 5 बजे के बीच में उठकर घर के उस स्थान पर जाएं जहां से आप खुले आकाश को साफ-साफ देख सकते हों।
 Interesting Facts, 

खुले आसमान के नीचे पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके आसमान को देखते हुए मां लक्ष्मी को ध्यान करें। दोनों हाथ जोड़कर माता लक्ष्मी की प्रार्थना करें और उनसे अपनी समस्या बताएं। माता लक्ष्मी की प्रार्थना करने के बाद दोनों हाथों को नीचे करके हथेलियों को अपने मुंह पर फेर लें। ऐसा करने से कुछ दिनों में ही आपकी समस्या दूर हो जाएगी और मां लक्ष्मी की कृपा आप पर होने लगेगी।

इसके अलावा अपने मंदिर में थोड़ा बदलाव करें। चूकिं मां लक्ष्मी उत्तर दिशा में वास करती हैं, इसलिए आप माता लक्ष्मी की तस्वीर या फिर श्री रूप उत्तर दिशा की ओर स्थापित करें। इससे उत्तर दिशा सक्रिय होगी और घर में धन का आगमन होगा।


सोमवार, 21 नवंबर 2016

चुटकी भर नमक से हो सकते हैं चमत्कार

Interesting Facts

कहते हैं कि नमक के प्रयोग से नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट किया जा सकता है। कुछ खास उपायों से जीवन में सबकुछ अच्छा हो सकता है। आइए जानें कुछ खास उपाय-
वास्तुदोष को खत्म करने के लिए कांच की कटोरी में नमक डाल कर शौचालय और स्नान घर में रखें। नमक और कांच राहु की वस्तुएं होने के कारण उनके नकारात्मक प्रभाव को समाप्त करते हैं। राहु को नेगेटिव एनर्जी और कीट-कीटाणुओं का भी सूचक माना जाता है। ये घर के सुख, धन और स्वास्थ्य को प्रभाविओत करते हैं।

vastu


कांच के पात्र में नमक डालकर घर के किसी भी कोने में रख दें। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। राहु, केतु की दशा या मन में बुरे विकचार और डर उत्पन्न होने पर यह उपाय लाभकारी सिद्ध होता है।

टुकड़े वाले नमक को लाल रंग के वस्त्र में बांधकर पोटली बनाकर घर के मेन गेट पर लटकाने से बुरी शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर सकती। व्यापार में प्रगति के लिए कार्यस्थल के मुख्य द्वार पर अौर लॉकर के ऊपर पोटली लटकाने से लाभ मिलता है।

jyotish

रात्रि से पूर्व पानी में चुटकी भर नमक मिलाकर हाथ-पांव धोने से चिंताअों से छुटकारा मिलता है और अच्छी नींद आती है। राहु एवं केतु के अमंगल प्रभाव भी नष्ट होते हैं

रात्रि से पूर्व पानी में चुटकी भर नमक मिलाकर हाथ-पांव धोने से चिंताअों से छुटकारा मिलता है और अच्छी नींद आती है। राहु एवं केतु के अमंगल प्रभाव भी नष्ट होते हैं

मूलांक से जानें बच्चों के करियर की दिशा


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अंक ज्योतिष में मूलांक जन्म तारीख के अनुसार 1 से 9 माने जाते हैं। प्रत्येक अंक व्यक्ति का मूल स्वभाव दिखाता है। बच्चे का मूल स्वभाव जानकर ही माता-पिता उसे सही तालीम दे सकते हैं। आइए, जानें कैसा है आपके बच्चे का स्वभाव।

मूलांक 1 (1, 10 19, 28) : ये बच्चे क्रोधी, जिद्दी व अहंकारी होते हैं। अच्छे प्रशासनिक अधिकारी बनते हैं। ये तर्क के बच्चे हैं अत: डाँट-डपट नहीं सहेंगे। इन्हें तर्क से नहीं, प्यार से समझाएँ।
मूलांक 2 (2, 11, 20, 29) : ये शांत, समझदार, भावुक व होशियार होते हैं। माता-पिता की सेवा करते हैं। जरा सा तेज बोलना इन्हें ठेस पहुँचाता है। इनसे शांति व समझदारी से बात करें।
मूलांक 3 (3, 12, 21,30) : ये समझदार, ज्ञानी व घमंडी होते हैं। अच्छे सलाहकार बनते हैं। इन्हें समझाने के लिए पर्याप्त कारण व ज्ञान होना जरूरी है।
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मूलांक 4 (4, 13, 22) : बेपरवाह, खिलंदड़े व कारस्तानी होते हैं। रिस्क लेना इनका स्वभाव होता है। इन्हें अनुशासन में रखना जरूरी है। ये व्यसनाधीन हो सकते हैं।
मूलांक 5 (5, 14, 23) : बुद्धिमान, शांत, आशावादी होते हैं। रिसर्च के कामों में रूचि लेते हैं। इनके साथ धैर्य से व शांति से बातचीत करें।

मूलांक 6 (6, 15, 24) : हँसमुख, शौकीन मिजाज व कला प्रेमी होते हैं। ‘ मस्त रहो’ पर जीते हैं। इन्हें सही संस्कार व सही दिशा-निर्देश जरूरी है।
मूलांक 7 (7, 16, 25) : भावुक, निराशावादी, तनिक स्वार्थी मगर तीव्र बुद्धि के होते हैं। व्यसनाधीन जल्दी होते हैं। कलाकार हो सकते हैं। इन्हें कड़े अनुशासन व सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है।
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मूलांक 8 (8, 17, 26) : तनिक स्वार्थी, भावुक, अति व्यावहारिक, मेहनती व व्यापार बुद्धि वाले होते हैं। जीवन में देर से गति आती है। इन्हें सतत सहयोग व अच्छे साथियों की जरूरत होती है।
मूलांक 9 (9, 18, 27) : ऊर्जावान, शैतान व तीव्र बुद्धि के विद्रोही होते हैं। माता-पिता से अधिक बनती नहीं है। प्रशासन में कुशल हो

कार्यक्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा लाने के वास्तु उपाय

vastu

अगर आपको वास्तुशास्त्र में विश्वास है तो उसके सिद्धांतों को अपनाकर आप सुखी रह सकते हैं। यह शास्त्र कहता है कि पैसा और अन्य कीमती चीजों को उत्तर दिशा की ओर मुख वाली वाली अलमारी में रखना चाहिए। वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ गौरव मित्तल ने कार्यक्षेत्र में समृद्धि लाने के लिए वास्तु से संबंधित कुछ सुझाव दिए हैं, जो इस प्रकार हैं :

* पैसे और कीमती चीजों को उत्तर की ओर रखी अलमारी में रखना चाहिए।
* कार्यालय में मालिक की सीट के पीछे मंदिर नहीं होना चाहिए।

मालिक को पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठना चाहिए। पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके भी बैठा जा सकता है, लेकिन दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके कभी नहीं बैठना चाहिए।

* कार्यालय के मालिक की सीट के पीछे मजबूत दीवार होनी चाहिए।
* मालिक का डेस्क आयताकार होना चाहिए।

vastu
फैक्ट्री या कार्यालय का केंद्र स्थान (ब्रह्म स्थान) खाली होना चाहिए। वहां कोई भारी वस्तु भूलकर भी नहीं रखें।
* मैनेजर, अधिकारियों और निदेशकों के बैठने की सीट की व्यवस्था कार्यालय परिसर के दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए।

फैक्ट्री या कार्यालय का केंद्र स्थान (ब्रह्म स्थान) खाली होना चाहिए। वहां कोई भारी वस्तु भूलकर भी नहीं रखें।
* मैनेजर, अधिकारियों और निदेशकों के बैठने की सीट की व्यवस्था कार्यालय परिसर के दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए।

शकुन शास्त्र- जानिए गाय से जुड़े शकुन-अपशकुन

Interesting Facts
भविष्य में होने वाली घटनाओं को कई माध्यमों से जाना जा सकता है। जिसमें से एक महत्वपूर्ण और सरल माध्यम होता है पशु-पक्षी। गाय भी उनमें से एक है। गाय हिंदू धर्म में पूजनीय हैं। शकुन शास्त्र के अनुसार, सफर पर जाते समय गाय अपनी हरकतों से हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत देती हैं। हालांकि अब शहरों में गाय पालने जैसे काम हो नहीं पाते हैं या गाय का दिखना भी मुश्किल होता है, ऐसे में ये संकेत कारगर नहीं लगते, ऋषियों द्वारा ये संकेत तब बताए गए थे जब परिस्थितियां बहुत अलग थीं। फिर भी अगर हमें सफर पर निकलते समय गाय दिखती है, तो उससे हम कुछ बातों का अंदाजा लगा सकते हैं।



जानिए गाय से जुड़े कुछ शकुन व अपशकुन के बारे में –

1. सफर करते समय यदि बांई ओर से गाय की आवाज सुनाई दे तो यह शुभ माना जाता है।

2. रात के समय अगर गाय हुंकार भरती या पुकारती है, तो यह ही शुभ शकुन माना जाता है।

3. इसके उलट अगर किसी को गाय आधी रात में रंभाती या रोती हुई दिखाई दे, तो सफर में डराने वाली परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।


Shakun 

4. यात्रा पर जा रहे व्यक्ति को गाय अपने खुरों से जमीन खुरचती दिखाई दे तो आने वाले समय में उसे बीमारी का सामना करना पड़ सकता है।

5. अगर यात्रा पर जाते समय गाय रोती हुई दिखाई दे, तो यात्री को मृत्यु के समान कष्ट होने की आशंका रहती है।


6. यात्री को गाय अपने बछड़े से मिलने के लिए रंभाती दिखाई दे, तो उसकी सभी इच्छाएं पूरी होने के योग बनते हैं।

7. जब गाय के ऊपर बहुत सारी मक्खियां बैठी हुई दिखाई दें, तो अच्छी वर्षा होने की संभावना मानी जाती है।

vastu
8. यात्रा करते समय यदि किसी व्यक्ति को दोनों ओर भैंस दिखाई दे, तो यात्री की मृत्यु होने का भय रहता है।

9. यदि किसी व्यक्ति को सांड अपनी बांई ओर से दाहिना ओर जाता हुआ दिखाई दे तो यह शुभ शकुन माना जाता है।

10. यदि किसी व्यक्ति को यात्रा पर जाते समय सांड अपने सींग या खुर से जमीन खोदता हुआ दिखाई दे तो यह भी शुभ शकुन माना जाता है।

बुधवार, 16 नवंबर 2016

धन और ऐश्वर्य के लिए करें इन पेडों की पूजा

For riches and glory of these trees worship

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ विशेष पेड़-पौधों की पूजा करने से हमारी कुंडली के दोष तो दूर होते ही हैं साथ ही जीवन की अनेक परेशानियों से छुटकारा भी मिल सकता है। आइये जानते है किन पेड़-पौधों की पूजा से हमें क्या फायदा हो सकता है।
तुलसी– जिस घर में रोज़ तुलसी के पौधे की पूजा होती है, देवी लक्ष्मी उस घर को छोड़कर कहीं नहीं जाती। वहां हमेशा सुख-समृधि बनी रहती है।
पीपल– हिन्दू धर्म में पीपल को पूजनीय वृक्ष माना गया है। इसकी पूजा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है, साथ ही भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होती है।

नीम– इसकी पूजा करने से कुंडली के सभी दोष दूर होतेहैं व रोगों से छुटकारा भी मिलता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
बरगद– इसे बड़ व वट वृक्ष भीकहते है। इसकी पूजा से महिलाओं का सौभाग्य अखंड रहता हैं व संतान संबंधी समस्याएं भी दूर होती है। ये बहुत ही पवित्र पेड़ है।

आंवला– इस पेड़ की पूजा से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और पूजा करने वाले को धन संबंधी कोई समस्या नहीं होती। उसे हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।
बिल्व– इस पेड़ के पत्ते व फल भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं। इसकी पूजा से नौकरी में प्रमोशन के योग बनते हैं व अकाल मृत्यु से रक्षा होती हैं।

अशोक– इस की पूजा से सभी प्रकार के रोग-शोक दूर होतेहैं व पारिवारिक जीवन सुखी होता है। किसी विशेष कामना पूर्ति के लिए भी इसकी पूजाकी जाती है।
केला– जिन लोगों की कुंडलीमें गुरु संबंधित दोष होते हैं, वे यदि इस पेड़ की पूजा करें तो उन्हें लाभ होता है। इसकी पूजा से विवाह के योग भी शीघ्र बनते हैं।

शमी– इस पेड़ की पूजा से शत्रुओं पर विजय मिलती हैं व कोर्ट केस में सफलता मिलने के योग बनते हैं। दशहरे पर इसकी विशेष पूजा की जाती है।
लाल चन्दन– सूर्य से संबंधित गृह दोष दूर करने के लिए लाल चंदन के पेड़ की पूजा विधि-विधान से करनी चाहिए। इससे प्रमोशन होने के योग भी बनते हैं।

चमत्कारिक भूतेश्वर नाथ शिवलिंग – हर साल बढ़ती है इसकी लम्बाई

Bhuteshwar wondrous Nath Shiva - its length is increasing every year

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मरौदा गांव में घने जंगलों बीच एक प्राकर्तिक शिवलिंग है जो की भूतेश्वर नाथ के नाम से प्रसिद्ध है। यह विशव का सबसे बड़ा प्राकर्तिक शिवलिंग है। सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है की यह शिवलिंग अपने आप बड़ा और मोटा होता जा रहा है। यह जमीन से लगभग 18 फीट उंचा एवं 20 फीट गोलाकार है। राजस्व विभाग द्वारा प्रतिवर्ष इसकी उचांई नापी जाती है जो लगातार 6 से 8 इंच बढ रही है।


इस शिवलिंग के बारे में बताया जाता है कि आज से सैकडो वर्ष पूर्व जमीदारी प्रथा के समय पारागांव निवासी शोभासिंह जमींदार की यहां पर खेती बाडी थी। शोभा सिंह शाम को जब अपने खेत मे घुमने जाता था तो उसे खेत के पास एक विशेष आकृति नुमा टीले से सांड के हुंकारने (चिल्लानें) एवं शेर के दहाडनें की आवाज आती थी। अनेक बार इस आवाज को सुनने के बाद शोभासिंह ने उक्त बात ग्रामवासियों को बताई।

ग्राम वासियो ने भी शाम को उक्त आवाजे अनेक बार सुनी। तथा आवाज करने वाले सांड अथवा शेर की आसपास खोज की। परतु दूर दूर तक किसी जानवर के नहीं मिलने पर इस टीले के प्रति लोगो की श्रद्वा बढने लगी। और लोग इस टीले को शिवलिंग के रूप में मानने लगे। इस बारे में पारा गावं के लोग बताते है कि पहले यह टीला छोटे रूप में था। धीरे धीरे इसकी उचाई एवं गोलाई बढती गई। जो आज भी जारी है। इस शिवलिंग में प्रकृति प्रदत जललहरी भी दिखाई देती है। जो धीरे धीरे जमीन के उपर आती जा रही है।




यहीं स्थान भुतेश्वरनाथ, भकुरा महादेव के नाम से जाना जाता है। इस शिवलिंग का पौराणिक महत्व सन 1959 में गोरखपुर से प्रकाषित धार्मिक पत्रिका कल्याण के वार्षिक अंक के पृष्ट क्रमांक 408 में उल्लेखित है जिसमें इसे विश्व का एक अनोखा महान एवं विशाल शिवलिंग बताया गया है।



यह भी किंवदंती है कि इनकी पूजा बिंदनवागढ़ के छुरा नरेश के पूर्वजों द्वारा की जाती थी। दंत कथा है कि भगवान शंकर-पार्वती ऋषि मुनियों के आश्रमों में भ्रमण करने आए थे, तभी यहां शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गए।

घने जंगलों के बीच स्तिथ होने के बावजूद यहाँ पर सावन में कावड़ियों का हुजूम उमड़ता है। इसके अलावा शिवरात्री पर भी यहाँ विशाल मेला भरता है।

मंगलवार, 15 नवंबर 2016

Know then prosperity, where to place the water, according to the architectural



पानी का बर्तन रसोई के उत्तर-पूर्व या पूर्व में भरकर रखें। घर में पानी सही स्थान पर और सही दिशा में रखने से परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य अनुकूल रहता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

पानी का स्थान ईशान कोण है अतः पानी का भण्डारण अथवा भूमिगत टैंक या बोरिंग पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा में होनी चाहिए। पानी को ऊपर की टंकी में भेजने वाला पंप भी इसी दिशा में होना चाहिए।


दक्षिण-पूर्व, उत्तर-पश्चिम अथवा दक्षिण-पश्चिम कोण में कुआं अथवा ट्यूबवेल नहीं होना चाहिए। इसके लिए उत्तर-पूर्व कोण का स्थान उपयुक्त होता है। इससे वास्तु का संतुलन बना रहता है।


अन्य दिशा में कुआं या ट्यूबवेल हो, तो उसे भरवा दें और यदि भरवाना संभव न हो, तो उसका उपयोग न करें। नहाने का कमरा पूर्व दिशा में शुभ होता है।



ध्यान रखें, घर के किसी नल से पानी नहीं रिसना चाहिए अन्यथा..भुखमरी की स्थिति पैदा हो सकती है।



ओवर हेड टैंक उत्तर और वायव्य कोण के बीच होना चाहिए। टैंक का ऊपरी भाग गोल होना चाहिए।

चाल से जानें व्यक्ति का स्वभाव और चरित्र

Learn the tricks of the person's nature and character

ज्योतिष के अनुसार किसी भी व्यक्ति की चाल अनजाने में ही उसका व्यक्तित्व दर्शाती है। यदि आप किसी व्यक्ति के चलने के तरीके को ध्यान से देखें तो आप उसका स्वभाव जान सकते हैं।
हाथ में मोबाइल या पर्स को थोड़ा आगे करके चलने वाले लोग अक्सर दिखावटी स्वभाव के होते हैं। ऐसे लोग बातचीत में माहिर होते हैं। ये लोग घूमने-फिरने का विशेष शौक रखने वाले होते हैं।
ये लोग भौतिक सुखों को जुटाना ही अपने जीवन का लक्ष्य मानते हैं।




धीरे-धीरे चलने वाले लोग मक्कार होते हैं। इन लोगों में बहुत अहंभाव होता है। ये लोग अपने नष्ट करते हैं। एकाकी जीवन इन्हें बहुत ज्यादा पसंद होता है। इनको दिखावा करना अच्छा लगता है।
एक हाथ जेब में डालकर चलने वाले लोग प्राय: शक्की स्वभाव और झक्की प्रवृति के होते हैं। ये अपनी छोटी-छोटी बातें भी छिपाकर नहीं रख पाते हैं। ये व्यक्ति बहुत ही साधारण जीवन व्यापन करते हैं। ये लोग एक नम्बर के आलसी, कामचोर और दगाबाज भी होते हैं।




जो लोग गर्दन एक ही दिशा में रखकर और सीना तानकर तेजी से चलते हैं। वो लोग स्वभाव से जल्दबाज होते हैं। ये लोग बहुत सफाई से झूठ बोलने वाले होते हैं। किसी भी स्थिति से अपने आप को बचाना खुब अच्छी तरह आता है।
जो व्यक्ति कंधे झुकाकर चलते हैं वे लोग किसी भी कार्य को करने में हमेशा आगे रहते है लेकिन उन्हें अपनी मेहनत के अनुसार सफलता नहीं मिल पाती। ये लोग अपनी पूरी जिन्दगी भैतिक सुविधाओं को जुटाने में लगा देते हैं।




हाथ को तानकर और ऊंची गर्दन रखकर जो लोग चलते हैं वे मेहनती होते हैं। ऐसे लोग सबके दुख में काम आने वाले ऐसे व्यक्ति विशाल हृदय वाले होते हैं।
हाथ ज्यादा हिलाकर चलने वाले लोग सारी जिन्दगी अल्हड़पन का जीवन व्यतीत करते हैं। ये लोग बहुत चौक्कने होते हैं। स्त्रियों का इस तरह चलना उनकी कार्य कुशलता बताता है।
कंधे लटकाकर चलने वाले व्यक्ति प्राय: मानसिक रूप से दबाव महसूस करते हैं कि इन्हे अपने तन का होश ही नहीं रहता।




जो लोग दोनों टांगे चौड़ीकर के चलने व्यक्ति दो प्रकार की श्रेणियों में अधिक देखें जाते हैं या तो वे बहुत उच्च श्रेणी के होते हैं या बहुत निम्र श्रेणी के होती हैं।

शुक्रवार, 11 नवंबर 2016

घर में सुख-समृद्धि के लिए इन बातों का रखे विशेष ध्यान



नियम-कायदे यूं तो व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार गढ़ता है लेकिन ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्रों की मानें तो कुछ काम शास्त्रोक्त ही शुभ रहते हैं।
कर्ज का लेन-देन
रविवार, मंगलवार, संक्रांति दिवस, वृद्धि नामक योग और हस्त नक्षत्र के दिन कर्जा नहीं लेना चाहिए। इन दिनों कर्ज वापस करना शुभ होता है। बुधवार के दिन किसी को ऋण या धन नहीं देना चाहिए।


नाम राशि विचार
सभी मांगलिक कार्य मुहूर्त, यात्रा, दिनमान, ग्रह-गोचर, दिनदशा के लिए जन्म राशि से ही विचार करना चाहिए। प्रचलित (बोलते) नाम से ग्रामवास, घर, न्यायालय कार्य, रजिस्ट्री, पुलिस आदि कार्यों के लिए विचार करना शास्त्र सम्मत है।
सुख-शांति के लिए
सुबह के खाने की प्रथम रोटी गाय और अंतिम रोटी कुत्ते को देने से घर में सुख-शांति आती है। समुद्री झाग (समुद्र फेन) पानी में मिलाकर पोंछा लगाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।


धन लाभ
मेष लग्न में जन्मे व्यक्तियों को आर्थिक सम्पन्नता एवं स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रतिदिन ओम हृीं श्रीं शुक्राय नम:’ मंत्र का जप करना चाहिए।
स्मरण शक्ति के लिए
सरस्वती यंत्र को छह मुखी रुद्राक्ष के साथ गले में धारण करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। छह मुखी रुद्राक्ष के स्वामी कार्तिकेय और संचालक ग्रह शुक्र है। वे विद्या व ज्ञान के प्रदाता हैं।


शुभ यात्रा
रविवार को यात्रा करनी हो तो दही, शक्कर, इलायची खाकर। सोम को खीर, मंगल को दलिया, गुड़। बुध को दूध, गुरुवार को दही, शुक्र्र को दूध या दही की लस्सी, शनि को उड़द, तिल से बने पदार्थ खाकर यात्रा करना शुभ होता है।


देव मंदिर में परिक्रमा
विष्णु भगवान के मंदिर की चार बार, शंकर जी की आधी बार, देवी की एक बार, सूर्यदेव की सात बार और गणेशजी के मंदिर में तीन परिक्रमा करने का शास्त्रोक्त विधान है। देव स्तुति देवों को प्रसन्न करने के लिए एकाग्रचित्त और शांत मन से पाठ करने चाहिए।


गुरुवार, 10 नवंबर 2016

फेंगशुई टिप्स (Fengshui Tips) – घर में जरूर रखें ये 6 चीजें, मानी जाती हैं भाग्यशाली



फेंगशुई (चीन का वास्तु) के अनुसार धन और सुख-शांति बढ़ाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। इन्हें अपनाने से घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है, साथ ही स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है। यहां जानिए फेंगशुई की 6 ऐसी चीजें, जिन्हें घर में रखना शुभ रहता है…


1. भाग्यशाली तीन टांगों वाला मेंढक (Three Legged Frog)



तीन टांगों वाला मेंढक बहुत भाग्यशाली माना जाता है। फेंगशुई के अनुसार मुंह में सिक्के लिए हुए तीन टांगों वाले मेंढक की उपस्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसे अपने घर के भीतर मुख्य दरवाजे के आसपास रखना चाहिए। मेंढक को रसोई या शौचघर के भीतर ना रखें। ऐसा करना दुर्भाग्य को आमंत्रित करता है।


2. समृद्धि के देवता हैं लाफिंग बुद्धा (Laughing Bhddha)



अगर आपको आर्थिक सफलता पाना है तो लॉफिंग बुद्धा निश्चित ही आपकी मदद करेगा। अपने लिविंग रूम में मुख्य द्वार से तिरछी दिशा में एक लाफिंग बुद्धा बैठा दें। ऐसा करने पर घर में सुख और समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। ध्यान रखें लॉफिंग बुद्धा मुख्य द्वार के एकदम सामने न रखें। बुद्धा समृद्धि के देवता हैं। इनकी मुस्कान में ही समृद्धि है।


3. गोल्डन फिश (Golden Fish)




फेंगशुई की मान्यता है कि घर में मछलियां रखने से सौभाग्य बढ़ता है। ये धन, मान-सम्मान में वृद्धि करने का एक कारगर उपाय है। गोल्डन फिश अपने शयनकक्ष, रसोईघर अथवा शौचघर में कभी न रखें। मछली घर को अपने ड्रॉइंगरूम में रखें।

4. ड्रैगन का जोड़ा (Dragon Pair)



फेंगशुई के अनुसार ड्रैगन का जोड़ा समृद्धि का प्रतीक है। इनके पैर के पंजों के मोती सबसे ज्यादा उर्जा संजोए हुए होते हैं। फेंगशुई में ड्रैगन को चार दिव्य प्राणियों में गिना जाता है। ड्रैगन येंग यानी पुरुषत्व, हिम्मत और बहादुरी का प्रतीक है, इसमें अपार शक्ति होती है। डबल ड्रैगन को यूं तो किसी भी दिशा में रखा जा सकता है, लेकिन पूर्व दिशा में रखना सबसे ज्यादा लाभदायक है। चीनी संस्कृति और फेंगशुई में ड्रैगन को बहूत सम्मान दिया जाता है और इसे शुद्ध मानते हैं।

5. समृद्धि लेकर आते हैं तीन सिक्के (Three coins)



फेंगशुई के अनुसार घर के दरवाजे में लाल रिबन से बंधे सिक्के लटकाने से घर में धन और समृद्धि आती है। ध्यान रखें सिर्फ तीन सिक्के ही लगाएं और वह भी दरवाजे के अंदर की ओर। बाहर सिक्के लगाने से लक्ष्मी द्वार पर ही ठहर जाती हैं। सिक्के हमेशा मुख्य दरवाजे पर ही लगाना चाहिए।

6. खुशहाली का प्रतीक कछुआ (Tortoise)



फेंगशुई में कछुए को शुभ माना जाता है। इसे घर में रखने से कामयाबी के साथ धन-दौलत और खुशहाली भी आती है। कछुए को ऑफिस या मकान की उत्तर दिशा में रखना चाहिए। ध्यान रखें कछुए को जब भी रखें तो उसका चेहरा अंदर की ओर होना चाहिए तभी दिशा शुभ होगी। इसे कभी जोड़े में न रखें।

भगवान विष्णु ने देवकी और वसुदेव के घर क्यों लिया कृष्णावतार

Devaki and Vasudeva, Krishna's house, why did Lord Vishnu


स्वायम्भुवमन्वन्तर में जब माता देवकी का पहला जन्म हुआ था, उस समय उनका नाम ‘पृश्नि’ तथा वसुदेव ‘सुतपा’ नामक प्रजापति थे। दोनों ने संतान प्राप्ति की अभिलाषा से सूखे पत्ते खाकर और कभी हवा पीकर देवताओं का बारह हजार वर्षों तक तप किया।



इन्द्रियों का दमन करके दोनों ने वर्षा, वायु, धूप, शीत आदि काल के विभिन्न गुणों को सहन किया और प्राणायाम के द्वारा अपने मन के मल धो डाले। उनकी परम तपस्या, श्रद्धा और प्रेममयी भक्ति से प्रसन्न होकर श्रीविष्णु उनकी अभिलाषा पूर्ण करने के लिए उनके सामने प्रकट हुए और उन दोनों से कहा:——-** कि ‘तुम्हारी जो इच्छा हो माँग लो।’


तब उन दोनों ने भगवान श्रीहरि जैसा पुत्र माँगा। भगवान विष्णु उन्हें तथास्तु कहकर अन्तर्धान हो गये।

वर देने के बाद भगवान ने शील, स्वभाव, उदारता आदि गुणों में अपने जैसा अन्य किसी को नहीं देखा। ऐसी स्थिति में भगवान ने विचार किया कि मैंने उनको वर तो दे दिया कि मेरे-सदृश्य पुत्र होगा, परन्तु इसको मैं पूरा नहीं कर सकता; क्योंकि संसार में वैसा अन्य कोई है ही नहीं।


किसी को कोई वस्तु देने की प्रतिज्ञा करके पूरी ना कर सके तो उसके समान तिगुनी वस्तु देनी चाहिए। ऐसा विचारकर भगवान ने स्वयं उन दोनों के पुत्र के रूप में तीन बार अवतार लेने का निर्णय किया।

इसलिए भगवान जब प्रथम बार उन दोनों के पुत्र हुए, उस समय वे ‘पृश्निगर्भ’ के नाम से जाने गये।


दूसरे जन्म में माता पृश्नि ‘अदिति’ हुईं और सुतपा ‘कश्यप’ हुए।

उस समय भगवान ‘वामन’ के रूप में उनके पुत्र हुए।


फिर द्वापर में उन दोनों का तीसरा जन्म हुआ। इस जन्म में वही अदिति ‘देवकी’ हुईं और कश्यप ‘वसुदेवजी’ हुए और अपने वचन को सच करने के लिए भगवान विष्णु ने उनके पुत्र के रूप में श्रीकृष्णावतार लिया।




मंगलवार, 8 नवंबर 2016

अंग फडकने से लगा सकते हैं भावी10 घटनाओं का अंदाजा

The beats can foresee future events part 10


समुद्र शास्त्र के अनुसार इंसान का शरीर बेहद संवेदनशील होता है और उसके पास ऐसी ताकत है जो होने वाली घटना को पहले ही भांप ले। हो सकता है आपको यकीन ना हो लेकिन समुद्र शास्त्र की सहायता से आप इंसान के फड़कते हुए अंगों को जानकर उसके साथ भविष्य में होने वाली घटना को जान सकते हैं।


1. समुद्र शास्त्र के अनुसार पुरुष के शरीर का अगर बायां भाग फड़कता है तो भविष्य में उसे कोई दुखद घटना झेलनी पड़ सकती है। वहीं अगर उसके शरीर के दाएं भाग में हलचल रहती है तो उसे जल्द ही कोई बड़ी खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। जबकि महिलाओं के मामले में यह उलटा है, यानि उनके बाएं हिस्से के फड़कने में खुशखबरी और दाएं हिस्से के फड़कने पर बुरी खबर सुनाई दे सकती है।


2. किसी व्यक्ति के माथे पर अगर हलचल होती है तो उसे भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है वहीं कनपटी के पास फड़कन पर धन लाभ होता है।

3. अगर व्यक्ति की दाईं आंख फड़कती है तो यह इस बात का संकेत है कि उसकी सारी इच्छाएं पूरी होने वाली हैं और अगर उसकी बाईं आंख में हलचल रहती है तो उसे जल्द ही कोई अच्छी खबर मिल सकती है। लेकिन अगर दाईं आंख बहुत देर या दिनों तक फड़कती है तो यह लंबी बीमारी की तरफ इशारा करता है।

4. अगर इंसान के दोनों गाल एक साथ फड़कते हैं तो इससे धन लाभ की संभावना बढ़ जाती है।

5. अगर किसी इंसान के होंठ फड़क रहे है तो इसका अर्थ है उसके जीवन में नया दोस्त आने वाला है।

6. अगर आपका दाया कन्धा फड़कता है तो यह इस बात का संकेत है कि आपको अत्याधिक धन लाभ होने वाला है। वहीं बाएं कंधे के फड़कने का संबंध जल्द ही मिलने वाली सफलता से है। परंतु अगर आपके दोनों कंधे एक साथ फड़कते हैं तो यह किसी के साथ आपकी बड़ी लड़ाई को दर्शाता है।


7. अगर आपकी हथेली में हलचल होती है तो यह यह इस बात की ओर इशारा करता है कि आप जल्द ही किसी बड़ी समस्या में घिरने वाले हैं और अगर अंगुलियां फड़कती है तो यह इशारा करता है कि किसी पुराने दोस्त से आपकी मुलाकात होने वाली है।

8. अगर आपकी दाई कोहनी फड़कती है तो यह इस बात की तरफ इशारा करता है कि भविष्य में आपकी किसी से साथ बड़ी लड़ाई होने वाली है। लेकिन अगर बाईं कोहनी में फड़कन होती है तो यह बताता है कि समाज में आपकी प्रतिष्ठा और ओहदा बढ़ने वाला है।

9. पीठ के फड़कने का अर्थ है कि आपको बहुत बड़ी समस्याओं को झेलना पड़ सकता है।

10. दाई जांघ फड़कती है तो यह इस बात को दर्शाता है कि आपको शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा और बाईं जांघ के फड़कने का संबंध धन लाभ से है।

सोमवार, 7 नवंबर 2016

मस्तक रेखाओं से जानिए कितनी हो सकती है आपकी उम्र



सामुद्रिक शास्त्र में मस्तक के 3 प्रकार बताए गए हैं, जो इस प्रकार हैं-
उन्नत मस्तक- ऐसा मस्तक सामान्य से थोड़ा उठा हुआ और चिकना होता है। इस पर रेखाएं स्पष्ट नजर आती हैं।
सामान्य मस्तक-ऐसा मस्तक चेहरे के अनुरूप होता है। इस पर रेखाएं आसानी से नजर आ जाती हैं।
निम्न मस्तक- ये सामान्य से थोड़ा अंदर की ओर धंसा रहता है। हल्का का काला होने के कारण इस पर रेखाएं साफ नजर नहीं आतीं।

मस्तक रेखाओं के फलादेश


1. जिस व्यक्ति के माथे पर 2 पूर्ण रेखाएं होती हैं, उसकी उम्र लगभग 60 वर्ष हो सकती है। यह रेखा बहुत स्पष्ट हो तो ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में बहुत धन व नाम कमाता है। रेखा कटी हुई हो तो ऐसे लोग अपने जीवन में बहुत दुःख देखते हैं।

2. सामान्य माथे पर 3 शुभ रेखाएं हो तो ऐसा व्यक्ति करीब 75 वर्ष की आयु प्राप्त करता है। इनका जीवन सुखी होता है।


3. सामान्य माथे पर 5 उत्तम रेखाएं हों तो ऐसे व्यक्ति की उम्र 100 वर्ष तक हो सकती है। इन्हें जीवन का हर सुख मिलता है।

4. उन्नत मस्तक पर 5 से अधिक रेखाएं हों तो व्यक्ति की आयु मध्यम, मस्तक निम्न श्रेणी का हो तो व्यक्ति अल्पायु होता है।


5. माथे पर यदि कोई रेखा न हो तो ऐसे व्यक्ति को 25 से 40 वर्ष की आयु में बहुत परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।

6. माथे की कोई 2 रेखाएं आपस में स्पर्श करती हैं तो ऐसे व्यक्ति की आयु करीब 60 वर्ष हो सकती है।





वास्तु के अनुसार जानिए किस काम के लिए कौन-सी दिशा होती है शुभ



वास्तु शास्त्र में ऊर्जा का विशेष महत्त्व है। वास्तु शास्त्र में हर दिशा का संबंध किसी न किसी खास ऊर्जा से माना जाता है इसलिए वास्तु के अनुसार, काम की दिशा भी हमारी सफलता-असफलता का कारण बन सकती है। इसलिए वास्तु में हर काम के लिए एक निश्चित दिशा का महत्व माना जाता है। यदि वास्तु के इन नियमों का पालन किया जाए तो मनुष्य को हर काम में सफलता मिलती है। आइए जानते है वास्तु के अनुसार कौनसे काम के लिए कौनसी दिशा होती है शुभ:-


1. पढाई करते समय विद्यार्थी का मुंह पूर्व दिशा की ओर हो तो यह सबसे अच्छा माना जाता है।


2. घर के मंदिर में पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना शुभ होता है। यदि ऐसा संभव न हो तो मुंह पूर्व दिशा की ओर भी रख सकते हैं।

3. दुकान या ऑफिस में काम करते समय वहां के मुखिया का मुंह हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इससे काम में हमेशा सफलता मिलती है।


4. खाना बनाते समय ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि खाना बनाने वाले का मुंह पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर हो।

5. सोते समय दक्षिण दिशा की ओर सिर होना चाहिए। इसके अलावा किसी भी अन्य दिशा में सिर करके सोना अशुभ माना जाता है।


6. खाना खाते समय मुंह पूर्व और उत्तर दिशा की ओर होना सबसे अच्छा होता है। इससे शरीर को भोजन से मिलने वाली ऊर्जा पूरी तरह से मिलती है।

7. किसी भी नए काम की शुरुआत उत्तर दिशा की ओर मुंह रखकर ही करनी चाहिए। उत्तर दिशा को सफलता की दिशा माना जाता है।


8. घर में टी.वी. ऐसी जगह लगाना चाहिए कि टी.वी. देखते हुए घर के सदस्यों का चेहरा दक्षिण या उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर हो।

9. घर की उत्तर ओर दक्षिण दिशा की ओर मेन गेट नहीं बनाना चाहिए, न ही इन दिशाओं में बालकनी होनी चाहिए। अगर ऐसा हो तो उन पर हमेशा पर्दा लगाकर रखें।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शनिवार, 5 नवंबर 2016

रोज़ मेकअप करने वाली लड़कियों को ध्‍यान रखनी चाहिये ये बातें



कुछ लोग कहते हैं कि अगर मेकअप का रोज़ इस्तेमल किया जाए तो यह त्वचा के लिए हानिकारक होता है। लेकिन अगर आप त्वचा की अच्छे से देखभाल करती हैं और सही मेकअप का इस्तेमल करती हैं तो आपको यह परेशानी नहीं होगी।


आज हम आपको कुछ ऐसी ही स्किन केयर टिप्स देने जा रहें हैं। इन स्किन केयर टिप्स को रोज़ अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आप मेकअप के हानिकारक प्रभाव से अपनी स्किन को बचाया जा सकता है। तो आइये जानते हैं ऐसी ही कुछ खास टिप्स।


1. क्लेन्ज़ किसी भी तरह का मेकअप करने से पहले आप अपने चेहरे को अच्छे से साफ़ करें। इससे आपके चेहरे पर लगी गन्दगी अच्छे से साफ़ हो जाती है और मेकअप लगाने से आपको कोई नुक्सान नहीं होगा।


2. मॉइस्चराइज़ जो भी मेकअप आप करें और वह अच्छा लगे इसके लिए जरुरी हैं कि आपकी त्वचा मॉइस्चराइज़ लगे। त्वचा अगर अच्छे से मॉइस्चराइज़ होगी तो आपका मेकउप बिलकुल नेचुरल लगेगा।


3. मेकअप हटाए हमेशा याद रखें सोने से पहले मेकअप हटा दें, क्योंकि ज्यादातार परेशानी तभी होती हैं जब आप काफी देर तक मेकअप लगा कर रखती हैं। या फिर मेकअप लगाए हुए सो जाती हैं।


4. सीरम सीरम या फेस आयल उनके लिए बहुत जरुरी हैं जो मेकअप करते हैं यह त्वचा को नमी देता हैं और सूखने से बचाता हैं।


5. नाइट क्रीम हानिकारक सूरज की किरणों से हुए नुक्सान से नाइट क्रीम आपकी त्वचा को बचती है। यही नहीं मेकअप के हानिकारक प्रभाव से भी आपकी त्वचा सुरक्षित रहती है।


6. डे क्रीम दिन के वक़्त अच्छे एसपीएफ़ की डे क्रीम आपने मेकअप के साथ लगाए जिससे आपकी त्वचा को सूरज की किरणों से ज्यादा नुक्सान ना हो पाये।


7. एक्स्फोलीऐशन अगर आप चाहती हैं कि आपका मेकअप और अच्छा लगे तो आप अपनी त्वचा को एक्स्फोलीऐट करें इससे आप डेड स्किन हट जायेगी और आपकी त्वचा और चमकदार दिखेगी।


8. आई क्रीम आँखों के नीचे की त्वचा बहुत नाज़ुक और पतली होती है, यही कारण हैं इसे ज्यादा हाइड्रेशन की जरूरत होती है। इसीलिए हमेशा मेकअप करने से पहले आई क्रीम का इस्तेमाल करे।

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पूजन में ये 8 चीजें सीधे जमीन पर नहीं रखनी चाहिए



अच्छे और सुखी जीवन के लिए शास्त्रों के अनुसार कई ऐसे नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है। यहां जानिए ब्रह्मवैवर्तपुराण में बताए गए ऐसे काम जो कभी नहीं करना चाहिए। जो लोग ये काम करते हैं, उनके घर-परिवार में दरिद्रता बढ़ने लगती है।



इन चीजों को जमीन पर न रखें

1. दीपक, 2. शिवलिंग, 3. शालग्राम (शालिग्राम), 4. मणि, 5. देवी-देवताओं की मूर्तियां, 6. यज्ञोपवीत (जनेऊ), 7. सोना और 8. शंख, इन 8 चीजों को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इन्हें नीचे रखने से पहले कोई कपड़ा बिछाएं या किसी ऊंचे स्थान पर रखें।
इन तिथियों पर ध्यान रखें ये बातें

हिन्दी पंचांग के अनुसार किसी भी माह की अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दशी और अष्टमी तिथि पर स्त्री संग, तेल मालिश और मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए।

सुबह उठते ही ध्यान रखें ये बातें

स्त्री हो या पुरुष, सुबह उठते ही इष्टदेव का ध्यान करते हुए दोनों हथेलियों को देखना चाहिए। इसके बाद अधिक समय तक बिना नहाए नहीं रहना चाहिए। रात में पहने हुए कपड़ों को शीघ्र त्याग देना चाहिए।
इनका अनादर नहीं करना चाहिए

हमें किसी भी परिस्थिति में पिता, माता, पुत्र, पुत्री, पतिव्रता पत्नी, श्रेष्ठ पति, गुरु, अनाथ स्त्री, बहन, भाई, देवी-देवता और ज्ञानी लोगों का अनादर नहीं करना चाहिए। इनका अनादर करने पर यदि व्यक्ति धनकुबेर भी हो तो उसका खजाना खाली हो जाता है। इन लोगों का अपमान करने वाले व्यक्ति को महालक्ष्मी हमेशा के लिए त्याग देती हैं।

रविवार को ध्यान रखें ये बातें

रविवार के दिन कांस्य के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए। इस दिन मसूर की दाल, अदरक, लाल रंग की खाने की चीजें भी नहीं खाना चाहिए।
तय तिथि पर पूरा करना चाहिए दान का संकल्प

यदि हमने किसी को दान देने का संकल्प किया है तो इस संकल्प को तय तिथि पर किसी भी परिस्थिति में पूरा करना चाहिए। दान देने में यदि एक दिन का विलंब होता है तो दुगुना (दोगुणा) दान देना चाहिए। यदि एक माह का विलंब होता है तो दान सौगुना हो जाता है। दो माह बितने पर दान की राशि सहस्त्रगुनी यानी हजार गुना हो जाती है। अत: दान के लिए जब भी संकल्प करें तो तय तिथि पर दान कर देना चाहिए। अकारण दान देने में विलंब नहीं करना चाहिए।

दिन के समय न करें समागम

दिन के समय और सुबह-शाम पूजन के समय स्त्री और पुरुष को समागम नहीं करना चाहिए। जो लोग यह काम करते हैं, उन्हें महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं होती है। कई प्रकार के रोगों का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से स्त्री और पुरुष, दोनों को आंख और कान से जुड़े रोग हो सकते हैं। साथ ही, इसे पुण्यों का विनाश करने वाला कर्म भी माना गया है।
घर में प्रवेश करते समय ध्यान रखें ये बातें

हम जब भी कहीं बाहर से लौटकर घर आते हैं तो सीधे घर में प्रवेश नहीं करना चाहिए। मुख्य द्वार के बाहर ही दोनों पैरों को साफ पानी से धो लेना चाहिए। इसके बाद ही घर में प्रवेश करें। ऐसा करने पर घर की पवित्रता और स्वच्छता बनी रहती है।

पुरुषों को ध्यान रखनी चाहिए ये बात

पुरुषों को कभी भी पराई स्त्रियों को बुरी नजर से नहीं देखना चाहिए। कभी भी मल-मूत्र को भी नहीं देखना चाहिए। ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार ये काम विनाश की ओर ले जाते हैं। इनसे दरिद्रता बढ़ती है।
स्त्रियां को ध्यान रखनी चाहिए ये बातें

जो स्त्रियां अपने पति को डांटती हैं, सताती हैं, पति की आज्ञा का पालन नहीं करती हैं, सम्मान नहीं करती हैं, उनके पुण्य कर्मों का क्षय होता है। ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार जो स्त्रियां वाणी द्वारा दुख पहुंचाती हैं वे अगले जन्म में कौए का जन्म पाती हैं। पति के साथ हिंसा करने वाली स्त्री का अगला जन्म सूअर के रूप में होता है।
ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए

किसी बुरे चरित्र वाले इंसान के साथ एक स्थान पर सोना, खाना-पीना, घूमना-फिरना वर्जित किया गया है। क्योंकि किसी व्यक्ति के साथ बात करने से, शरीर को छूने से, एक स्थान पर सोने से, साथ भोजन करने से, एक-दूसरे के गुणों और दोष आपस में संचारित अवश्य होते हैं। जिस प्रकार पानी पर तेल की बूंद गिरते ही वह फैल जाती है, ठीक उसी प्रकार बुरे चरित्र वाले व्यक्ति के संपर्क में आते ही बुराइयां हमारे अंदर प्रवेश कर जाती हैं।
ब्रह्मवैवर्तपुराण का परिचय

यह पुराण वैष्णव पुराण है। इस पुराण के केंद्र में भगवान श्रीहरि और श्रीकृष्ण हैं। यह चार खंडों में विभाजित है। पहला खंड ब्रह्म खंड है, दूसरा प्रकृति खंड है, तीसरा गणपति खंड है और चौथा श्रीकृष्ण जन्म खंड है। इस पुराण में श्रेष्ठ जीवन के लिए कई सूत्र बताए गए हैं।


Fatcs About Pushya Nakshatra



सभी नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को बहुत शुभ माना जाता है। आज हम आपको पुष्य नक्षत्र से जुड़ी ऐसी खास बातें बता रहे हैं, जो बहुत कम लोग जानते हैं। ये हैं पुष्य नक्षत्र से जुड़ी 10 खास बातें-


1. पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग सर्वगुण संपन्न, भाग्यशाली तथा विशेष होते हैं। दिखने में यह सुंदर, स्वस्थ, सामान्य कद-काठी के तथा चरित्र में विद्वान, चपल, स्त्रीप्रिय व बोल-चाल में चतुर होते हैं। इस नक्षत्र में जन्में लोग जनप्रिय और नियम पर चलने वाले होते हैं तथा खनिज पदार्थ, पेट्रोल, कोयला, धातु, पात्र, खनन संबंधी कार्य, कुएं, ट्यूबवेल, जलाशय, समुद्र यात्रा, पेय पदार्थ आदि में क्षेत्रों में सफलता हासिल करते हैं।



2.प्राचीन काल से ही ज्योतिषी 27 नक्षत्रों के आधार पर गणनाएं कर रहे हैं। इनमें से हर एक नक्षत्र का शुभ-अशुभ प्रभाव मनुष्य के जीवन पर पड़ता है। नक्षत्रों के इन क्रम में आठवें स्थान पर पुष्य नक्षत्र को माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी वस्तु बहुत लंबे समय तक उपयोगी रहती है तथा शुभ फल प्रदान करती है, क्योंकि यह नक्षत्र स्थाई होता है।

3.पुष्य को नत्रक्षों का राजा भी कहा जाता है। यह नक्षत्र सप्ताह के विभिन्न वारों के साथ मिलकर विशेष योग बनाता है। इन सभी का अपना एक विशेष महत्व होता है। रविवार, बुधवार व गुरुवार को आने वाला पुष्य नक्षत्र अत्यधिक शुभ होता है। ऋग्वेद में इसे मंगलकर्ता, वृद्धिकर्ता, आनंद कर्ता एवं शुभ कहा गया है।


4. हिंदू पंचांग के हर महीने में अपने क्रम के अनुसार विभिन्न नक्षत्र चंद्रमा के साथ संयोग करते हैं। जब यह क्रम पूर्ण हो जाता है तो उसे एक चंद्र मास कहते हैं। इस प्रकार हर महीने में पुष्य नक्षत्र का शुभ योग बनता है। दीपावली के पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र इसलिए खास माना जाता है, क्योंकि दीपावली के लिए की जाने वाली खरीदी के लिए यह विशेष शुभ होता है जिससे कि जो भी वस्तु इस दिन आप खरीदते हैं वह लंबे समय तक उपयोग में रहती है।

5. नक्षत्रों के संबंध में एक कथा भी हमारे धर्म ग्रंथों में मिलती है। उसके अनुसार ये 27 नक्षत्र भगवान ब्रह्मा के पुत्र दक्ष प्रजापति की 27 कन्याएं हैं, इन सभी का विवाह दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा के साथ किया था। चंद्रमा का विभिन्न नक्षत्रों के साथ संयोग पति-पत्नी के निश्चल प्रेम का ही प्रतीक स्वरूप है। इस प्रकार चंद्र वर्ष के अनुसार, महीने में एक दिन चंद्रमा पुष्य नक्षत्र के साथ भी संयोग करता है।


6. पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं जो सदैव शुभ कर्मों में प्रवृत्ति करने वाले, ज्ञान वृद्धि एवं विवेक दाता हैं तथा इस नक्षत्र का दिशा प्रतिनिधि शनि हैं जिसे ‘स्थावर’ भी कहते हैं जिसका अर्थ होता है स्थिरता। इसी से इस नक्षत्र में किए गए कार्य चिर स्थायी होते हैं।

7. पुष्य नक्षत्र अपने आप में अत्यधिक प्रभावशील एवं मानव का सहयोगी माना गया है। पुष्य नक्षत्र शरीर के अमाशय, पसलियां व फेफड़ों को विशेष रूप से प्रभावित करता है। पुष्य नक्षत्र शुभ ग्रहों से प्रभावित होकर इन अंगों को दृढ़, पुष्ट तथा निरोगी बनाता है। जब यह नक्षत्र दुष्ट ग्रहों के प्रभाव में होता है तब इन अंगों को बीमार व कमजोर करता है।


8. हिंदू पंचांग के अनुसार, जब पूर्ण चंद्रमा चित्रा नक्षत्र से संयोग करता है तो उस महीने को हम चैत्र नाम कहते हैं। इसी तरह जब पूर्ण चंद्रमा पुष्य नक्षत्र से संयोग करता है वह मास पौष नाम से जाना जाता है। इस तरह पुष्य नक्षत्र साल के 12 महीनों में से एक का निर्धारण करता है।

9. प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के सिरे पर बहुत से बारीक तारे हैं जो कांति वृत्त के अत्यधिक समीप हैं। मुख्य रूप से इस नक्षत्र के तीन तारे हैं जो एक तीर (बाण) की आकृति के समान आकाश में दिखाई देते हैं। इसके तीर की नोक कई बारीक तारा समूहों के गुच्छ (पुंज) के रूप में दिखाई देती है।

10. आकाश में इसका गणितीय विस्तार 3 राशि 3 अंश 20 कला से 3 राशि 16 अंश 40 कला तक है। यह नक्षत्र विषुवत रेखा से 18 अंश 9 कला 56 विकला उत्तर में स्थित है। इस नक्षत्र में शिल्प, चित्रकला, पढ़ाई व वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इसमें मंदिर निर्माण, घर निर्माण आदि काम भी शुभ माने गए हैं।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

तिलिस्मी मंदिर पल भर में होता है गायब और फिर..

भारत धर्म, भक्ति, अध्यात्म और साधना का देश है। यहां प्राचीन काल से मंदिरों का विशेष महत्व है। हमारे देश में सभी धर्मों के लोग एक साथ शांतिपूर्वक रहते है। यहां कई मंदिर ऐसे हैं, जहां विस्मयकारी चमत्कार भी होते बताए जाते हैं। जहां आस्थावानों के लिए वे चमत्कार दैवी कृपा हैं, तो अन्य के लिए कौतूहल और आश्चर्य का विषय। यहां की भौगोलिक स्थिति, जलवायु और विविध संस्कृति को देखने के लिए ही विश्व के कोने-कोने से पर्यटक आते हैं। वैसे अपनी भारत यात्रा के दौरान पर्यटकों को जो चीज सबसे ज्यादा पसंद आती है तो वह हैं भारत की प्राचीनतम मंदिर।






गुजरात के कावी में स्तंभेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यह अद्भुत और अविश्वसनीय है, लेकिन सच है कि यह मंदिर पल भर के लिए ओझल हो जाता है और फिर थोड़ी देर बाद अपने उसी जगह वापिस भी जाता है। अपने आप में अजूबा यह मंदिर अरब सागर के बिल्कुल सामने है और वडोदरा से 40 मील की दूरी पर है। आप इस मंदिर की यात्रा तभी कर सकते हैं जब समुद्र में ज्वार कम हो। ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है।मंदिरों की बनावट, विशेषता, महत्व और इतिहास आदि जानने के लिए ही पर्यटक बार-बार भारत की ओर रुख करते हैं। इनमें से कई मंदिर तो ऐसे भी हैं जो कई हजारों साल पुराने हैं और जिनके बारे में जानना पर्यटकों के लिए कौतुहल का विषय है।

इस स्थान पर महिसागर नदी का सागर से संगम होता है। गुजरात स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि और हर अमावस्या पर मेला लगता है। हर साल प्रदोष, पूनम और ग्यारस को पूरी रात यहां चारों प्रहर पूजा-अर्चना होती है। जहां दूर-दूर से श्रद्धालु शिवशंभु के जलाभिषेक का आलौकिक दृश्य देखने यहां आते हैं। कहते हैं स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में स्वयं शिवशंभु विराजते हैं इसलिए समुद्र देवता स्वयं उनका जलाभिषेक करते हैं।

हमेशा ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है और यह परंपरा सदियों से सतत चली आ रही है। समुद्र के बीच में स्थित होने की वजह से मंदिर की खूबसूरती देखने लायक है। समुद्र के बीच स्थित होने के कारण न केवल इस मंदिर का सौंदर्य बढ़ता है बल्कि एक अनोखी घटना भी देखने को मिलती है।





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काली मिर्च के दाने संवार देंगे आपकी किस्मत



ज्योतिष के उपायों में तरह-तरह की चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। जीवनमंत्र पर कई चीजों के उपाय बताए गए हैं। यहां आज जानिए काली मिर्च के किस उपाय से धन की कमी दूर हो सकती है।
यदि आप मालामाल होना चाहते हैं तो काली मिर्च के 5 दानों का यह उपाय करें। उपाय के अनुसार काली मिर्च के 5 दाने लें और उन्हें अपने सिर पर से 7 बार वार लें। इसके बाद किसी चौराहे पर खड़े होकर या किसी सुनसान स्थान पर चारों दिशाओं में 4 दाने फेंक दें।





इसके बाद 5वें दाने को ऊपर आसमान की ओर फेंक दें। यह एक टोटका है और इसके लिए ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति यह उपाय करता है उसके लिए अचानक धन प्राप्ति के योग बनते हैं।




इस उपाय से कई लाभ हैं। जैसे यदि किसी बुरी नजर के कारण आपकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है तो वह दोष भी दूर हो जाएगा। इस उपाय से बुरी नजर भी उतर जाती है।

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गुरुवार, 3 नवंबर 2016

चौथ माता मंदिर, सवाई माधोपुर, राजस्थान- ये है चौथ माता का सबसे बड़ा मंदिर



चौथ माता मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की स्थापना 1451 में वहां के शासक भीम सिंह ने की थी। 1463 में मंदिर मार्ग पर बिजल की छतरी और तालाब का निर्माण कराया गया।



चौथ माता मंदिर

इस मंदिर में दर्शन के लिए राजस्थान से ही नहीं अन्य राज्यों से भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं। नवरात्र के दौरान यहां होने वाले धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व है। करीब एक हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान चौथ माता जन-जन की आस्था का केन्द्र है।


चौथ माता

शहर से 35 किमी दूर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह मंदिर राजस्थान के शहर के आस-पास का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। मंदिर सुंदर हरे वातावरण और घास के मैदान के बीच स्थित है।



मंदिर परिसर में बना प्रवेश द्वार

सफेद संगमरमर के पत्थरों से स्मारक की संरचना तैयार की गई है। दीवारों और छत पर जटिल शिलालेख के साथ यह वास्तुकला की परंपरागत राजपूताना शैली के लक्षणों को प्रकट करता है।


मंदिर जाने के लिए चढ़ाई करते लोग

मंदिर तक पहुंचने के लिए 700 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। देवी की मूर्ति के अलावा, मंदिर परिसर में भगवान गणेश और भैरव की मूर्तियां भी दिखाई पड़ती हैं।



मंदिर परिसर

हाड़ौती क्षेत्र के लोग हर शुभ कार्य से पहले चौथ माता को निमंत्रण देते हैं। प्रगाढ़ आस्था के कारण बूंदी राजघराने के समय से ही इसे कुल देवी के रूप में पूजा जाता है।


चौथ माता मंदिर

माता के नाम पर कोटा में चौथ माता बाजार भी है। कोई संतान प्राप्ति तो कोई सुख-समृद्धि की कामना लेकर चौथ माता के दर्शन को आता है। मान्यता है कि माता सभी की इच्छा पूरी करती हैं।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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वेंडी- एक डॉगी, जो बोलती है हूबहू इंसानो की तरह



क्या आपने कभी किसी कुत्ते को इंसानों की तरह बात करते हुए सुना है? शायद नहीं सुना होगा तो बता दें कि हाल ही में आईटीवी पर प्रसारित हुए ब्रिटेन गॉट टैलेंट में मिस वेंडी नाम की ऐसी ही एक डॉगी सामने आई है। ये न सिर्फ यस और नो में हर बात का जवाब देती है, बल्कि मजाक करने के साथ-साथ गाना भी गाती है। आपको जानकर भले ही हैरत हो रही होगी, लेकिन ये सच है।




बता दें कि ब्रिटेन गॉट टैलेंट शो में पेरिस के रहने वाले मार्क मेट्रल अपना शो परफॉर्म करने गए थे। इस परफॉर्मेंस में उन्होंने अपने डॉगी मिस वेंडी को भी शामिल किया था। इस दौरान वेंडी से वे जो भी पूछते थे, वह उसका जवाब देती थी।

यहां तक जब मार्क ने अपने बारे में पूछा कि क्या वे मूर्ख हैं? इसका जवाब वेंडी ने हां में दिया। मार्क जो भी पूछते उसका जवाब वेंडी देती थी। शो के चारों जज वेंडी को हैरत से देख रहे थे। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि कोई डॉगी इस तरह से बात कर सकती है। शो के निर्णायकों में से किसी ने वेंडी के इस टैलेंट को इनक्रेडिबल तो किसी ने इतिहास करार दिया। अपने परफॉर्मेंस से वेंडी सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है।


सोशल मीडिया पर हो रहा है विरोध

शो के निर्णायकों को वेंडी का ये परफॉर्मेंस भले ही अच्छा लगा हो, लेकिन सोशल मीडिया पर इसको लेकर खूब विरोध हो रहा है। ज्यादातर लोगों का कहना है कि ये धोखा है, किसी मशीन के सहारे कुत्ते से बुलवाया गया है, वहीं किसी का कहना है कि बहुत बुरा बर्ताव करने के बाद ही ये डॉगी ऐसा बोल रही है, जबकि कुछ लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं। हालांकि, इस संदर्भ में ब्रॉडकास्टिंग रेगुलेटर ऑफकॉम के पास जहां 21 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, वहीं इस शो को प्रसारित करने वाले आईटीवी के पास भी 35 शिकायतें आ चुकी हैं।


इस तरह से हो सकता है धोखा

वहीं, शिकायत करने वाले लोगों का कहना है कि डॉगी वेंडी के फेस पर नकली चेहरा लगा दिया गया, जिसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है। मार्क ने भी इसी तरह की ट्रिक का इस्तेमाल किया होगा। हालांकि अभी तक ऐसी कोई जालसाज़ी पकड़ में नहीं आई है।








बरहाल हक़ीक़त चाहे जो कुछ भी हो पर इस डॉगी को बोलते देखना किसी आश्चर्य से काम नहीं है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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बुधवार, 2 नवंबर 2016

स्त्री हो या पुरुष, ये 5 काम करने से रूठ जाती हैं देवी लक्ष्मी



वर्तमान समय में हर कोई चाहता है कि देवी लक्ष्मी की कृपा उस पर बनी रहे क्योंकि जिस पर भी देवी लक्ष्मी की कृपा होती है उसके पास जीवन की हर सुख-सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। जीवन का हर सुख उसे प्राप्त होता है। यही कारण है कि लोग देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नित नए उपाय करते हैं।




हिंदू धर्म ग्रंथों में भी देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के अनेक उपाय व रूठने के कई कारण बताए गए हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार आगे बताए गए 5 काम करने से देवी लक्ष्मी मनुष्य तो क्या स्वयं भगवान विष्णु का भी त्याग कर देती हैं। इसलिए इन 5 कामों से बचना चाहिए। ये काम इस प्रकार हैं-

श्लोक


कुचैलिनं दन्तमलोपधारिणं ब्रह्वाशिनं निष्ठुरवाक्यभाषिणम्।
सूर्योदये ह्यस्तमयेपि शायिनं विमुञ्चति श्रीरपि चक्रपाणिम्।।

अर्थात्- 1. मैले वस्त्र पहनने वाले, 2. दांत गंदे रखने वाले, 3. ज्यादा खाने वाले, 4. निष्ठुर (कठोर) बोलने वाले, 5. सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सोने वाले स्वयं विष्णु भगवान हों तो उन्हें भी देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं।


आगे की स्लाइड्स में जानिए इन 5 काम करने वालों को देवी लक्ष्मी क्यों त्याग देती हैं-

1. मैले कपड़े पहनना


गरुड़ पुराण के अनुसार मैले वस्त्र यानी गंदे कपड़े पहनने वालों को देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं। कहने का तात्पर्य है कि यदि आप साफ-स्वच्छ रहेंगे तो लोग आपसे मिलने-जुलने में संकोच नहीं करेंगे। आपकी जान-पहचान बढ़ेगी। यदि आप कोई व्यापार करते हैं तो जान-पहचान बढ़ने से आपके व्यापार में भी इजाफा होगा। अगर आप नौकरी करते हैं कि आपकी स्वच्छता देखकर मालिक भी खुश रहेगा।

इसके विपरीत यदि आप गंदे कपड़े पहनेंगे तो लोग आपसे दूरी बनाए रखेंगे। कोई आपसे बात करना पसंद नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में आपका व्यापार ठप्प हो सकता है और यदि आप नौकरी करते हैं तो मालिक आपको इस अवस्था में देखकर नौकरी से भी निकाल सकता है। अतः गंदे कपड़े नहीं पहनना चाहिए।


2. दांत गंदे रखने वाले

जिन लोगों के दांत गंदे रहते हैं, देवी लक्ष्मी उन्हें भी छोड़ देती हैं। यहां दांत गंदे रहने का सीधा अर्थ आपके स्वभाव व स्वास्थ्य से है। जो लोग अपने दांत ठीक से साफ नहीं करते, वे कोई भी काम पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से नहीं कर पाते। इससे उनके आलसी स्वभाव के बारे में पता चलता है। अपने आलसी स्वभाव के कारण ऐसे लोग अपनी जिम्मेदारी भी ठीक से नहीं निभा पाते।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यदि देखें तो जिसके दांत गंदे होते हैं, उसका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता क्योंकि गंदे दांतों के कारण उन्हें पेट से संबंधित अनेक रोग हो सकते हैं। अतः गंदे दांत होने से व्यक्ति के आलसी व रोगी होने की संभावना सबसे अधिक रहती है। इसलिए देवी लक्ष्मी गंदे दांत वाले लोगों का त्याग कर देती हैं।

3. ज्यादा खाने वाले

जो लोग अपनी जरूरत से अधिक भोजन करते हैं वो निश्चित तौर पर अधिक मोटे होते हैं। मोटा शरीर उन्हें परिश्रम करने से रोकता है, वहीं ऐसे शरीर के कारण उन्हें अनेक प्रकार की बीमारियां भी घेर लेती हैं। ऐसे लोग परिश्रम से अधिक भाग्य पर भरोसा करते हैं। जबकि देवी लक्ष्मी ऐसे लोगों के पास रहना पसंद करती हैं जो अपने परिश्रम के बल पर ही आगे बढ़ने की काबिलियत रखते हैं। मोटा शरीर लोगों को अधिक आलसी बना देता है। इसलिए ज्यादा खाने वाले लोगों को देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं। अतः जरूरत से अधिक नहीं खाना चाहिए।

4. निष्ठुर (कठोर) बोलने वाले

जो लोग बिना किसी बात या छोटी-छोटी बातों पर दूसरों पर चीखते-चिल्लाते हैं, उन्हें अपशब्द कहते हैं। ऐसे लोगों को भी देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं। जो लोग इस प्रकार का व्यवहार अपने जान-पहचान वाले, नौकर या अपने अधीन काम करने वालों के साथ करते हैं उनका स्वभाव बहुत ही क्रूर होता है। इनके मन में किसी के प्रति प्रेम या दया नहीं होती।

जिन लोगों के मन में प्रेम या दया का भाव न हो वो कभी दूसरों की मदद नहीं करते और जो लोग दूसरों की मदद नहीं करते, देवी लक्ष्मी उन्हें पसंद नहीं करती। मन में प्रेम व दया हो तो ही भगवान का आशीर्वाद बना रहता है। इसलिए निष्ठुर यानी कठोर बोलने वालों लोगों को देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं।

5. सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सोने वाले

सूर्योदय व सूर्यास्त का समय भगवान का स्मरण करने तथा शारीरिक व्यायाम के लिए निश्चित किया गया है। सूर्योदय के समय योग, प्राणायाम व अन्य कसरत करने से शरीर स्वस्थ रहता है। इस समय वातावरण में शुद्ध आक्सीजन रहती है, जो फेफड़ों को स्वस्थ रखती हैं। इसके अतिरिक्त सूर्योदय के समय मंत्र जाप कर भगवान का स्मरण करने से भी अनेक फायदे मिलते हैं। अतः सूर्योदय होने से पहले ही उठ जाना चाहिए।

सूर्यास्त के समय भी हल्का-फुल्का व्यायाम किया जा सकता है। ये समय भगवान के पूजन के लिए नियत हैं। जो लोग सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सोते हैं, वे निश्चित तौर पर आलसी होते हैं। अपने आलसी स्वभाव के कारण ही ऐसे लोग जीवन में कोई सफलता अर्जित नहीं कर पाते। यही कारण है कि सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सोने वाले लोगों को देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं।



गंधर्वसेन मंदिर,गंधर्वपुरी- जहां चूहे लगाते हैं इच्छाधारी नाग की परिक्रमा



इस बार हम आपको एक ऐसे मंदिर में ले जा रहे हैं, जिसका अपना ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी है और जिससे जुड़े हैं कई चमत्कार। यह है राजा गंधर्वसेन की नगरी गंधर्वपुरी का गंधर्वसेन मंदिर। यह सिंहासन बत्तीसी की एक ‘कहानी’ का स्थान है




भारत की प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी गंधर्वपुरी के गंधर्वसेन मंदिर के गुंबद के नीचे एक ऐसा स्थान है, जिसके बीचोबीच बैठता है पीले रंग का एक इच्छाधारी नाग, जिसके चारों ओर दर्जनों चूहे परिक्रमा करते हैं। आखिर क्यों इस रहस्य को कोई आज तक नहीं जान पाया।

गांव के लोग इसे नागराज का ‘चूहापाली’ स्थान कहते हैं और इस स्थान को हजारों वर्ष पुराना बताते हैं। कहते हैं कि नाग और चूहे आज तक नहीं द‍िखे, लेकिन परिक्रमा पथ पर चूहों की सैकड़ों लेंड‍ियां और उसके बीचोबीच नाग की लेंडी पाई जाती है। गांव वालों ने उस स्थान को कई बार साफ कर दिया, लेकिन न मालूम वे लेंडियां कहां से आ जाती हैं।



इस प्राचीन मंदिर में राजा गंधर्वसेन की मूर्ति स्थापित है। मालवा क्षत्रप गंधर्वसेन को गर्धभिल्ल भी कहा जाता था। वैसे तो राजा गंधर्वसेन के बारे में कई किस्से-कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन इस स्थान से जुड़ी उनकी कहानी अजीब ही है। ग्रामीणों का मानना है कि यहां पर राजा गंधर्वसेन का मंदिर सात-आठ खंडों में था। बीचोबीच राजा की मूर्ति स्थापित थी। अब राजा की मूर्ति वाला मंदिर ही बचा है, बाकी सब काल कवलित हो गए।

यहां के पुजारी महेश कुमार शर्मा से पूछा गया कि चूहे इच्छाधारी नाग की परिक्रमा लगाते हैं इस बात में कितनी सचाई है, तो उनका कहना था कि यहां नाग की बहुत ही ‘प्राचीन बाम्बी’ है और आसपास जंगल और नदी होने की वजह से कई नाग देखे गए हैं, लेकिन इस मंदिर में चूहों को देखना मुश्किल ही है, फिर भी न जाने कहां से चूहों की लेंडी आ जाती हैं, जबकि ऊपर और नीचे साफ-सफाई रखी जाती है। हम हमारे पूर्वजों से सुनते आए हैं कि इस मंदिर की रक्षा एक इच्छाधारी नाग करता है।


यहां के स्थानीय निवासी कमल सोनी और केदारसिंह कुशवाह बताते हैं कि हम बचपन से ही चूहापाली के इस चमत्कार को देखते आए हैं। हमारे बुजुर्ग बताते हैं कि यहां इस बाम्बी में एक इच्छाधारी पीला नाग रहता है, जो हजारों वर्ष पुराना है। उसकी लम्बी-लम्बी मूंछें हैं और वह लगभग 12 से 15 फीट का है। हमारे ही गांव के रमेशचंद्र झालाजी ने वह नाग देखा था। बहुत किस्मत वालों को ही वह दिखाई देता है।

शेरसिंह कुशवाह, विक्रमसिंह कुशवाह और केदारसिंह कुशवाह का कहना है कि हमारा घर मंदिर के निकट है। रोज ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर से घंटियों की कभी-कभार आवाज सुनी गई है। अमावस्या और पूर्णिमा के दिन अक्सर ऐसा होता है कि जब मंदिर का ताला खोला जाता है तो पूजा-आरती के पूर्व ही मंदिर अंदर से साफ-सुथरा मिलता है और ऐसा लगता है जैसे किसी ने पूजा की हो।


जिस तरह इस मंदिर में चूहे नाग की परिक्रमा करते हैं वैसे ही यहां की नदी सोमवती भी इस मंदिर का गोल चक्कर लगाते हुए कालीसिंध में जा मिली है।

जब हमने गंधर्वपुरी गांव के सरपंच विजयसिंह चौहान से इस संबंध में बात की तो उनका भी यही कहना था कि चूहापाली में सैकड़ों सालों से यह चल रहा है। यहां परिक्रमा के अवशेष पाए जाते हैं, लेकिन आज तक किसी ने देखा नहीं। गांव के बड़े-बूढ़ों से सुनते आए हैं।


यह एक प्राचीन नगरी है और यहां आस्था की बात पर ग्रामीणजन कहते हैं कि गंधर्वसेन के मंदिर में आने वाले का हर दुख मिटता है। जो भी यहां आता है उसको शांति का अनुभव होता है। यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना है। इसका गुंबद परमारकाल में बना है, लेकिन नींव और मंदिर के स्तंभ तथा दीवारें बौद्धकाल की मानी जाती हैं। राजा गंधर्वसेन उज्जैन के राजा विक्रमादित्य और भर्तृहरि के पिता थे।

अब यह आपको तय करना है कि क्या वाकई यह चमत्कार है या अंधविश्वास।





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