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सोमवार, 24 अक्तूबर 2016

लक्ष्मी और दरिद्रा की कहानी

लक्ष्मी और दरिद्रा की कहानी
story of Lakshmi Dridra


 दरिद्रा दैवी लक्ष्मी की बड़ी बहन है एक दिन की बात है लक्ष्मी और दरिद्रा स्वर्ग के नंदन वन में भृमण क्र रही थी स्फटिक की मणियो से स्वर्ग के फर्श बने थे नंदन वन की शोभा देखते ही बनती थी  घूमते हुए लक्ष्मी एक जगह स्फटिक मणि में अपना ही प्रतिबिम्ब देखकर ठगी सी खड़ी रह गई उन्हें अपनी सुंदरता ने इतना मगन किया कि वे वहाँ कब से खड़ी है इसका उन्हें भान ही नहीं रहा बड़ी बहन  दरिद्रा देवी के उलहाने ने उनका ध्यान भंग किया  दरिद्रा नई पूछा - लक्ष्मी क्या तुम अपने आप को बहुत सुंदर समझती हो ,लक्ष्मी ने कोई उतर नहीं दिया । इससे  दरिद्रा का क्रोध और भी भड़क गया । दरिद्रा देवी भी सुंदर थी उन्होंने लक्ष्मी को डाँटते हुए कहा -  लक्ष्मी तुम यह बात मान लो की तुम मुझसे कम सुंदर हो । लक्ष्मी ने हा नहींकी और कहा कि हम दोनों ही दो पक्ष बन गये है । इसलिए निर्णय तो कोई तीसरा ही कर  सकता है । तीसरा व्यक्ति निर्णायक के रूप में कोन हो सकता है , दरिद्रा के पूछने पर लक्ष्मी ने नारायण के महल की इशारा किया कि नारायण से ही निर्णय लिया जाए । दरिद्रा देवी ने इस बात पर असहमति व्यक्त की और कहा की तुम उनकी पत्नी हो,वे तो निर्णय तुम्हारे पक्ष में ही देंगे ।

इतने में दोनों ने आकाश में देखा कि देव ऋषि नारद विणा को एक हाथ में थामे,गगन मार्ग से कही जा रहे है। दरिद्रा देवी ने नारद  को आवाज दी । नारद सामने खड़े थे उन्होंने दोनों देवियों को प्रणाम किया । दरिद्रा देवी ने नारद से पूछा लक्ष्मी और मुझमे कोण सुंदर है ? नारद ने छन भर रुककर उतर दिया मुझे आपका आदेश स्वीकार है । मेरा अनुरोध है कि मेरे निर्णय में सहायता के लिए आप दोनों सामने खड़े कल्पव्रक्ष तक जाकर वापस आओ,तब तक मई अपना निर्णय कर लूंगा। दोनों ने  कल्पव्रक्ष तक चहल कदमी की । थोड़ी देर में वापस आ गई । दोनों निर्णय की प्रतीक्षा में देव ऋषि के सामने खड़ी थी ।

 आपने निर्णय लिया दरिद्रा ने पूछा ?
नारद बोले - निर्णय प्रस्तुत है, आज्ञा हो तो कहु । आज्ञा है
 कहो - दरिद्रा देवी की आवाज में खनक थी
नारद ने कहा  - मैने आप दोनों को कल्पव्रक्ष तक जाते और आते बड़े ध्यान से देखा । मुझे निर्णय करने में कोई कठिनाई नहीं हुई, देवी  दरिद्रा मैने  देखा की जाते समय आप सुंदर दिख रही थी । आते समय मैने देखा कि देवी लक्ष्मी सुंदर लग रही थी । बात भी सच थी कि दरिद्रता जाती हुई अच्छी लगती है और लक्ष्मी आती हुई अच्छी लगती है ।



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