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मंगलवार, 18 अक्तूबर 2016

श्री राम और देवी सीता के 48 चरण चिन्ह



श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदासजी ने मुख्य रूप से श्रीराम के पैर के 4 ही चिन्हों का वर्णन किया है- ध्वज, वज्र, अंकुश, कमल , किंतु अन्य पवित्र ग्रंथों को मिलाकर देखा जाए तो 48 पवित्र चिन्ह मिलते हैं। दक्षिण पैर में 24 चिन्ह और वाम पैर में 24 चिन्ह ।




दिलचस्प तथ्य यह भी है कि जो चिन्ह श्रीराम के दक्षिण पैर में हैं वे भगवती सीता के वाम पैर में हैं। और जो चिन्ह राम जी के वाम पैर में हैं वे सीता जी के दक्षिण पैर में हैं। और अदभुत रहस्य यह है कि श्री राम जी के उदर पे नाभि के पास तीन रेखायें हैं जिन्हें त्रिवेली कहते हैं। वही तीन रेखायें (त्रिवेली) सीता जी की पीठ पर हैं।



दोहा— रेखा त्रय सुन्दर उदर नाभी रूचिर गंभीर ।



श्रीराम जी के दक्षिण पैर के शुभ चिन्ह –

ऊर्ध्व रेखा, स्वस्तिक , अष्टकोण, श्री लक्षमीजी,हल,मूसल , सर्प, शर, अम्बर,कमल, रथ, बज्र, यव, कल्पवृक्ष, अंकुश, ध्वजा, मुकुट, चक्र, सिंहासन, यमदंड, चामर, छत्र, नर (पुरूष), जयमाला


श्रीरामजी के वाम पैर के शुभ चिन्ह –

सरयू, गोपद, भूमि-पृथ्वी, कलश, पताका, जम्बूफल, अर्ध चन्द्र, शंख, षट्कोण, त्रिकोण, गदा, जीवात्मा, बिन्दु
शक्ति, सुधाकुण्ड, त्रिवली, मीन-ध्वज, पूर्ण चन्द्रमा, वीणा, वंशी-वेणु, धनुष, तुणीर, हंस, चंद्रिका
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