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शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2016

धनतेरस पर क्या खरीदे और क्या ना खरीदे



हिन्दू समाज में धनतेरस सुख-समृद्धि, यश और वैभव का पर्व माना जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देव धन्वंतरि की पूजा का बड़ा महत्त्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व के बारे में स्कन्द पुराण में लिखा है कि इसी दिन देवताओं के वैद्य धन्वंतरि अमृत कलश सहित सागर मंथन से प्रकट हुए थे, जिस कारण इस दिन धनतेरस के साथ-साथ धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है।

इसी दिन लक्ष्मी गणेश जी की मिटट्ी या चांदी या सोने की प्रतिमाएं या उनके चित्र तथा बर्तन खरीद लें और उनका प्रयोग भी इसी दिन से आरंभ कर दें। सायंकाल मुख्य द्वार पर आटे का चैमुखी दीपक बना कर, चावल या गेहूं की ढेरी पर रखें। साथ में जल, रोली, गुड़ फूल नैवेद्य रखें । इसे आज से 5 दिन हर शाम जलाएं। यह पर्व दीवाली के आगमन की सूचना देता है।

धनतेरस पर क्या खरीदे-
दीपावली से पहले धनतेरस पर घर में कुछ खास चीजें लाने से धन की प्राप्ति होती है। गणेश लक्ष्मी की मूर्ति अवश्य खरीदें। गणेश लक्ष्मी की मूर्तियों को धनतेरस के दिन घर लाने से घर में धन संपत्ति का आगमन रहता है और पूरे सालभर घर में धन और अन्न की कमी नहीं होती। धातु का सामान जैसे सोना चांदी। इस दिन सोना चांदी खरीदने से व्यक्ति के भाग्य में इजाफा होता है। धातु से बने बर्तन और गहने खरीदने के लिए धनतेरस का दिन सर्वश्रेष्ठ है। इस दिन धातु का सामान घर में लाने से घर में सदैव लक्ष्मी बनी रहती हैं।


स्फटिक का श्रीयंत्र। स्फटिक का श्रीयंत्र घर लाने से लक्ष्मी घर की ओर आकर्षित होती हैं। इसलिए धनतेरस के दिन स्फटिक का श्रीयंत्र घर लाएं और दीपावली की सांय को इसे लक्ष्मी पूजन स्थल पर रखकर इसकी पूजा करें। पूजा के बाद इस श्रीयंत्र को केसरिया कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन स्थान पर रख दें, इससे सदा वहां बरकत बनी रहेगी।

झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। दीपावली के मौके पर नई झाड़ू को घर लाएं। इससे नकारात्मक शक्तियां घर से बाहर जाएंगी और साफ सुथरे घर में लक्ष्मी का आगमन होगा। कहा जाता है कि कौड़ी को घर में रखने से उस घर में कभी भी धनाभाव नहीं रहता। इसिलए धनतेरस के दिन कौड़ी खरीद कर घर लाएं और लक्ष्मी पूजा के समय इसे भी शामिल करें।

पूजन के बाद इन कौडियों को लाल कपड़े में बांध कर तिजोरी या धन वाले स्थान पर रख दें। वहां कभी धन की कमी नहीं होगी। शंख सुख समृद्धि और शांति का प्रतीक है। इस दिन शंख को घर लाएं और इसे दीपावली पूजन के समय बजाएं। इससे घर में लक्ष्मी का आगमन होगा और घर के अनिष्ट टल जाएंगे। दीपावली के मौके पर नमक का पैकेट भी घर लेकर आएं और इसे दीपावली के दिन इस्तेमाल भी करें। कहते हैं कि नमक खरीद कर लाने से साल भर धनाभाव नहीं होता और सुख समृद्धि घर में ही टिकी रहती है।

दीपावली के दिन इसी नमक के पानी का पौंछा घर में लगाने से हमेशा के लिए दरिद्रता दूर हो जाती है। धनिया धन का प्रतीक है। इसलिए इसे धनतेरस के दिन साबुत धनिया खरीद कर लाएं और दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा के समय इसकी भी पूजा करें। दीपावली पूजन के बाद घर के आंगन या गमलों में इसे बुरक दें। यह धनदायक है। धनतेरस के दिन घर में गूंजा लाएं क्योंकि इससे धनप्राप्ति के द्वार खुल जाते हैं। गूंजा के बीज धनतेरस के दिन लाकर घर में रख दें और लक्ष्मी पूजन के समय इन्हें भी पूजा में रखें।

धनतेरस पर ना खरीदें ये सामान-
शीशे का संबंध भी राहु से है, इसकी खरीदारी से बचें। अगर शीशा खरीदें तो ध्यान रखें वह पारदर्शी अथवा धुधंला नहीं होना चाहिए।

एल्युमनियिम के बरतन न खरीदें। यह ऐसा धातु है जिस पर राहू का अधिपत्य होता है लगभग सभी शुभ ग्रह इससे प्रभावित होते हैं। इसी कारण अलुमिनियम का प्रयोग पूजा- पाठ और ज्योतिष की दृष्टि से नहीं किया जाता।


अलुमिनियम का प्रयोग वास्तुशास्त्र, स्वास्थ्य और ज्योतिष की दृष्टि से अत्यधिक हानिकारक माना जाता है।
नुकीला सामान जैसे चाकू, कैंची, छूरी और लोहे के बरतन।

दीपावली की रात इन 8 स्थानों पर जलाने चाहिए दीपक, मिलती है लक्ष्मी कृपा



दीपावली की रात लक्ष्मी को मनाने का सबसे अच्छा समय रहता है। इस रात देवी महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। इसीलिए इस रात में देवी को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय किए जाते हैं। पुराने समय से परंपरा चली आ रही है कि दीपावली की रात में 8 खास स्थानों पर दीपक लगाने से देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यहां जानिए दीपावली की रात में कहां-कहां दीपक लगाना चाहिए, जिससे पैसों से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं…


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बुधवार, 26 अक्तूबर 2016

धनतेरस के दिन लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले उपाय

माना जाता है कि धनतेरस के दिन समृद्धि प्राप्ति के लिए किया गया कोई भी उपाय ज्यादा फलदायी होता है। ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे उपाय बताएं गए है जिनके बारे में मान्यता है की इन्हें धनतेरस के दिन किसी भी शुभ समय में किया जाए तो घर में स्थिर लक्ष्मी का निवास होता है।



मंदिर में लगाएं केले के पौधे :-


धनतेरस के दिन किसी भी मंदिर में केले के दो पौधे लगाएं। इन पौधों की समय-समय पर देखभाल करते रहें। इनके बगल में कोई सुगंधित फूल का पौधा लगाएं। केले का पौधा जैसे-जैसे बड़ा होगा, आपके आर्थिक लाभ की राह प्रशस्त होगी।

मोर की मिट्टी की करे पूजा :-

धनतेरस पर यदि पूजा के समय किसी ऐसे स्थान की मिट्टी जहां मोर नाचा हो लाकर और पूजा करें। इस मिट्टी को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से घर पर हमेशा लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी।

गाय का भोजन जरूर निकालें:-


धनतेरस और दीपावली के दिन रसोई में जो भी भोजन बना हो, सर्वप्रथम उसमें से गाय के लिए कुछ भाग अलग कर दें। ऐसा करने से घर में स्थिर लक्ष्मी का निवास होगा।

चमगादड़ के पेड़ की टहनी रखे पास :-


धनतेरस के दिन किसी भी शुभ समय में किसी ऐसे पेड़ की टहनी तोड़ कर लाएं, जिस पर चमगादड़ रहते हों। इसे अपने बैठने की जगह के पास रखें, लाभ होगा।

दक्षिणावर्ती शंख में लक्ष्मी मंत्र का जप :-


धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद दक्षिणावर्ती शंख में लक्ष्मी मंत्र का जप करते हुए चावल के दाने व लाल गुलाब की पंखुड़ियां डालें। ऐसा करने से समृद्धि का योग बनेगा।
मंत्र- श्रीं

लक्ष्मी को अर्पित करें लौंग :-

धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद लक्ष्मी या किसी भी देवी को लौंग अर्पित करें। यह काम दीपावली के दिनों में रोज करें। आर्थिक लाभ होता रहेगा।

सफेद चीजों का करें दान :-

धनतेरस पर सफेद पदार्थों जैसे चावल, कपड़े, आटा आदि का दान करने से आर्थिक लाभ का योग बनता है।

सूर्यास्त के बाद न करें झाड़ू-पोंछा :-

दीपावली के दिनों में और हो सके तो रोज ही शाम को सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू-पोंछा न करें। ऐसा करने से घर में लक्ष्मी चली जाती है।

गरीब की आर्थिक सहायता करें :-

धनतेरस पर किसी गरीब, दुखी, असहाय रोगी को आर्थिक सहायता दें। ऐसा करने से आपकी उन्नति होगी।

किन्नर को धन करें दान :-

धनतेरस के दिन किसी किन्नर को धन दान करें और उसमें से कुछ रुपए वापस अनुरोध करके प्राप्त कर लें। इन रुपयों को सफेद कपड़े में लपेटकर कैश तिजोरी में रख लें, लाभ होगा।

लघु नारियल का उपाय :-

1- धन तेरस पर पूजा के समय धन, वैभव व समृद्धि पाने के लिए 5 लघु नारियल पूजा के स्थान पर रखें। उन पर केसर का तिलक करें और हर नारियल पर तिलक करते समय 27 बार नीचे लिखे मंत्र का मन ही मन जप करते रहें-

ऐं ह्लीं श्रीं क्लीं

2- 11 लघु नारियल को मां लक्ष्मी के चरणों में रखकर ऊं महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नीं च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् मंत्र की 2 माला का जप करें। किसी लाल कपड़े में उन लघु नारियल को लपेट कर तिजोरी में रख दें व दीपावली के दूसरे दिन किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। ऐसा करने से लक्ष्मी चिरकाल तक घर में निवास करती है।

3- यदि आप चाहते हैं कि घर में कभी धन-धान्य की कमी न रहे और अन्न का भंडार भरा रहे तो 11 लघु नारियल एक पीले कपड़े में बांधकर रसोई घर के पूर्वी कोने में बांध दें।

घर लाए चांदी के गणेश, चांदी की लक्ष्मी:-

लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय, व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है। इस दिन भगवान धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है।

सूखे धनिया के बीज का भी महत्व:-

ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि करता है। दीपावली के दिन इन बीजों को बाग, खेत खलिहानों में लागाया जाता है ये बीज व्यक्ति की उन्नति व धन वृ्द्धि के प्रतीक होते है।

धनतेरस के दिन करे कुबेर को प्रसन्न :-

शुभ मुहूर्त में धनतेरस के दिन धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करने के बाद निम्न मंत्र का जाप करें- इस मंत्र का जाप करने से भगवन कुबेर बहुत खुश होते हैं, जिससे धन और वैभव की प्राप्ति होती है।

“यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।”सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शास्त्रों के अनुसार दीपावली के 5 दिनों में न करें ये 7 काम



दीपावली के 5 दिनों में देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय किए जाते है, पूजा की जाती है, लेकिन इन उपायों के साथ ही कुछ सावधानियां भी रखनी जरूरी हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि दीपावली के दिनों में हमें कौन-कौन काम नहीं करना चाहिए। यदि वर्जित किए गए काम दीपावली पर किए जाते हैं तो कई उपाय करने के बाद भी लक्ष्मी कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है।






वैसे तो हर रोज सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए, लेकिन काफी लोग ऐसे हैं जो सुबह देर से ही उठते हैं। शास्त्रों के अनुसार दीपावली के दिनों में ब्रह्म मुहूर्त में ही उठ जाना चाहिए। जो लोग इन दिनों में सूर्योदय के बाद तक सोते रहते हैं, उन्हें महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है।

माता-पिता और बुजुर्गों का अपमान न करें


दीपावली पर इस बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी भी परिस्थिति में कोई अधार्मिक काम न हो। माता-पिता एवं बुजुर्गों का सम्मान करें। जो लोग माता-पिता का अनादर करते हैं, उनके यहां देवी-देवताओं की कृपा नहीं होती है और दरिद्रता बनी रहती है। किसी को धोखा ना दें। झूठ न बोलें। सभी से प्रेम पूर्वक व्यवहार करें।

घर में गंदगी न रखें


दीपावली पर घर में गंदगी नहीं होना चाहिए। घर का कोना-कोना एकदम साफ एवं स्वच्छ होना चाहिए। किसी भी प्रकार की बदबू घर में या घर के आसपास नहीं होनी चाहिए। सफाई के साथ ही घर को महकाने के लिए सुगंधित पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है।

क्रोध न करें


दीपावली पर क्रोध नहीं करना चाहिए और जोर चिल्लाना भी अशुभ रहता है। जो लोग इन दिनों क्रोध करते हैं या जोर से चिल्लाते हैं, उन्हें लक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है। घर में शांत, सुखद एवं पवित्र वातावरण बनाए रखना चाहिए। लक्ष्मी ऐसे घरों में निवास करती हैं जहां शांति रहती है।

शाम के समय न सोएं

कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर दिन में या शाम के समय सोना नहीं चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बीमार है, वृद्ध है या कोई स्त्री गर्भवती है तो वह दिन में या शाम को सो सकती हैं, लेकिन स्वस्थ व्यक्ति को दिन में या शाम को सोना नहीं चाहिए। शास्त्रों के अनुसार जो लोग ऐसे समय में सोते हैं, वे निर्धन बने रहते हैं।

वाद-विवाद न करें

इन दिनों में इस बात का भी ध्यान रखें कि घर में किसी भी प्रकार का कलह या झगड़ा नहीं होना चाहिए। घर-परिवार के सभी सदस्य प्रेम से रहें और खुशी का माहौल बनाकर रखें। जिन घरों में झगड़ा या कलह होता है, वहां देवी की कृपा नहीं होती है। घर के साथ ही बाहर भी इस बात का ध्यान रखें कि किसी से वाद-विवाद या झगड़ा ना करें।

नशा न करें

शास्त्रों के अनुसार इन दिनों में किसी भी प्रकार का नशा करना वर्जित किया गया है। जो लोग दीपावली के दिन नशा करते हैं, वे हमेशा दरिद्र रहते हैं। नशे की हालत में घर की शांति भंग हो सकती है और सभी सदस्यों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। इससे बचना चाहिए। अन्यथा वाद-विवाद हो सकते हैं और लक्ष्मी पूजा भी ठीक से नहीं हो पाती है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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सोमवार, 24 अक्तूबर 2016

लक्ष्मी और दरिद्रा की कहानी

लक्ष्मी और दरिद्रा की कहानी
story of Lakshmi Dridra


 दरिद्रा दैवी लक्ष्मी की बड़ी बहन है एक दिन की बात है लक्ष्मी और दरिद्रा स्वर्ग के नंदन वन में भृमण क्र रही थी स्फटिक की मणियो से स्वर्ग के फर्श बने थे नंदन वन की शोभा देखते ही बनती थी  घूमते हुए लक्ष्मी एक जगह स्फटिक मणि में अपना ही प्रतिबिम्ब देखकर ठगी सी खड़ी रह गई उन्हें अपनी सुंदरता ने इतना मगन किया कि वे वहाँ कब से खड़ी है इसका उन्हें भान ही नहीं रहा बड़ी बहन  दरिद्रा देवी के उलहाने ने उनका ध्यान भंग किया  दरिद्रा नई पूछा - लक्ष्मी क्या तुम अपने आप को बहुत सुंदर समझती हो ,लक्ष्मी ने कोई उतर नहीं दिया । इससे  दरिद्रा का क्रोध और भी भड़क गया । दरिद्रा देवी भी सुंदर थी उन्होंने लक्ष्मी को डाँटते हुए कहा -  लक्ष्मी तुम यह बात मान लो की तुम मुझसे कम सुंदर हो । लक्ष्मी ने हा नहींकी और कहा कि हम दोनों ही दो पक्ष बन गये है । इसलिए निर्णय तो कोई तीसरा ही कर  सकता है । तीसरा व्यक्ति निर्णायक के रूप में कोन हो सकता है , दरिद्रा के पूछने पर लक्ष्मी ने नारायण के महल की इशारा किया कि नारायण से ही निर्णय लिया जाए । दरिद्रा देवी ने इस बात पर असहमति व्यक्त की और कहा की तुम उनकी पत्नी हो,वे तो निर्णय तुम्हारे पक्ष में ही देंगे ।

इतने में दोनों ने आकाश में देखा कि देव ऋषि नारद विणा को एक हाथ में थामे,गगन मार्ग से कही जा रहे है। दरिद्रा देवी ने नारद  को आवाज दी । नारद सामने खड़े थे उन्होंने दोनों देवियों को प्रणाम किया । दरिद्रा देवी ने नारद से पूछा लक्ष्मी और मुझमे कोण सुंदर है ? नारद ने छन भर रुककर उतर दिया मुझे आपका आदेश स्वीकार है । मेरा अनुरोध है कि मेरे निर्णय में सहायता के लिए आप दोनों सामने खड़े कल्पव्रक्ष तक जाकर वापस आओ,तब तक मई अपना निर्णय कर लूंगा। दोनों ने  कल्पव्रक्ष तक चहल कदमी की । थोड़ी देर में वापस आ गई । दोनों निर्णय की प्रतीक्षा में देव ऋषि के सामने खड़ी थी ।

 आपने निर्णय लिया दरिद्रा ने पूछा ?
नारद बोले - निर्णय प्रस्तुत है, आज्ञा हो तो कहु । आज्ञा है
 कहो - दरिद्रा देवी की आवाज में खनक थी
नारद ने कहा  - मैने आप दोनों को कल्पव्रक्ष तक जाते और आते बड़े ध्यान से देखा । मुझे निर्णय करने में कोई कठिनाई नहीं हुई, देवी  दरिद्रा मैने  देखा की जाते समय आप सुंदर दिख रही थी । आते समय मैने देखा कि देवी लक्ष्मी सुंदर लग रही थी । बात भी सच थी कि दरिद्रता जाती हुई अच्छी लगती है और लक्ष्मी आती हुई अच्छी लगती है ।



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जानिए किस रंग की बांसुरी को कहां रखने से मिलता है क्या फल



बांसुरी भगवान कृष्ण की प्रिय होने के कारण बहुत ही पवित्र मानी जाती है। पवित्र होने के साथ-साथ वास्तु में भी बांसुरी का खास स्थान माना जाता है। अलग-अलग रंग और प्रकार की बांसुरी अलग-अलग फल देने वाली मानी जाती है। अपने मनोकामना पूरी करने के लिए हर किसी को अपनी इच्छा के अनुसार बांसुरी रखनी चाहिए। आइए जानते है कौन-सी इच्छा पूरी करने के लिए किस रंग या प्रकार की बांसुरी रखनी चाहिए-






1. जिन लोगों को मनचाही नौकरी पाने की इच्छा हो उन्हें अपने कमरे में मेन गेट के पास पीली बांसुरी रखनी चाहिए।


2. व्यापार में वृद्धि और धन लाभ पाने के लिए दूकान के गल्ले या घर की तिजोरी में चांदी की बांसुरी रखना अच्छा माना जाता है।

3. घर के मंदिर में मोर पंख लगी बांसुरी रखने से घर-परिवार के अटके काम पूरे होने की संभावनाएं बनने लगती है।


4. अपने बिस्तर के पास या तकिये के नीचे लाल बांसुरी रखने से मनचाहे साथी से विवाह के योग बनने लगते हैं।

5. संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले जोड़े को अपने बेडरूम में हरी बांसुरी रखनी चाहिए। उसे इस तरह रखें की सभी को दिखाई न दें।


6. नया व्यापार शुरू करने की इच्छा रखने वालों को अपने कपड़ों की अलमारी में लकड़ी की बांसुरी रखनी चाहिए।

7. कठिन और अहम परीक्षा में सफलता पाने के लिए स्टूडेंट्स के कमरे में सफ़ेद बांसुरी रखना सबसे अच्छा होता है।


8. लंबें समय से चल रही बीमारी को खत्म करने या बीमारियों से बचे रहने के किचन में गोल्डन बांसुरी रखना अच्छा होता है।

9. घर-परिवार में चल रहे क्लेश या सदस्यों के बीच मतभेद खत्म करने के लिए एक ही रंग की दो बांसुरियां घर के हॉल में रखना शुभ होता है।

10. परिवार या व्यापार को नेगेटिविटी से बचाए रखने के लिए काले रंग से सजी बांसुरी घर या दुकान की छत पर टांग देनी चाहिए।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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वास्तु शास्त्र के अनुसार नहीं करनी चाहिए ये 5 चीजें गिफ्ट



हम सभी हर शुभ अवसर पर एक दूसरे को उपहार (Gift) देते है। चाहे वो शादी हो, बर्थडे पार्टी हो, कोई फेस्टिवल हो या अन्य कोई अवसर। हर शख्स अपनी शुभकामनाओं और अच्छी भावना से ही गिफ्ट देता है। लेकिन, फेंगशुई और वास्तु में 5 ऐसी चीजों के बारे में कहा गया है कि जिन्हें गिफ्ट देने से लोगों के आपसी संबंधों पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है, साथ ही उन्हें धन के नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है।



पानी से सम्बंधित चीज़ें या शो-पीस
अक्सर लोग पानी बहने वाले शो पीस जैसे आइटम गिफ्ट में देते हैं। वास्तु के अनुसार, ऐसी चीज़ों को गिफ्ट के तौर पर देने से सामने वाले इंसान को पैसों की कमी या आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


अपने प्रोफेशन से सम्बंधित चीज़ें
किसी भी अवसर पर अपने प्रोफेशन से सम्बंधित चीज़ें बिल्कुल भी गिफ्ट नहीं करनी चाहिए। दूकान या अपने प्रोफेशन से जुडी चीज़ें गिफ्ट देने पर मनुष्य को कारोबार में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

भगवान की मूर्तियां या तस्वीर
वास्तु के अनुसार भगवन की मूर्तियों और तस्वीरों को गिफ्ट नहीं करना चाहिए। इन्हें रखने और इनकी पूजा करने का एक विधान होता है। इसलिए इन्हें खुद ही खरीदना चाहिए।


नुकीली चीज़ें
वास्तु के अनुसार, नुकीली चीज़ें जैसे पेननाइफ, चाकू, कैंची, तलवार आदि किसी को भी गिफ्ट करने से गिफ्ट देने वाले और लेने वाले के लिए बेडलक बढ़ता है।

रूमाल
किसी भी अवसर पर रूमाल भी गिफ्ट नहीं करना चाहिए। वास्तु के अनुसार, रूमाल गिफ्ट करने से लोगों के बीच में नेगेटीविटी फैलती है और रिश्तों पर बुरा असर पड़ता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शनिवार, 22 अक्तूबर 2016

जानिए राशि अनुसार (नाम के पहले अक्षर से) जातक की ख़ास 15 बातें



नाम के पहले अक्षर का काफी अधिक महत्व बताया गया है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है, उसी राशि के अनुसार नाम का पहला अक्षर निर्धारित किया जाता है। चंद्र की स्थिति के अनुसार ही हमारी नाम राशि मानी जाती है। सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग अक्षर बताए गए हैं।नाम के पहले अक्षर से राशि मालूम होती है और उस राशि के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य से जुड़ी कई जानकारी प्राप्त की जा सकती है।




यहां जानिए किस राशि के अंतर्गत कौन-कौन से नाम अक्षर आते हैं, किस राशि के व्यक्ति का स्वभाव कैसा है और किस राशि के लोगों की क्या विशेषता है… सभी 12 राशि के लोगों की 15-15 खास बातें…
मेष- चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ

राशि स्वरूप: मेंढा जैसा, राशि स्वामी- मंगल।



1. राशि चक्र की सबसे प्रथम राशि मेष है। जिसके स्वामी मंगल है। धातु संज्ञक यह राशि चर (चलित) स्वभाव की होती है। राशि का प्रतीक मेढ़ा संघर्ष का परिचायक है।

2. मेष राशि वाले आकर्षक होते हैं। इनका स्वभाव कुछ रुखा हो सकता है। दिखने में सुंदर होते है। यह लोग किसी के दबाव में कार्य करना पसंद नहीं करते। इनका चरित्र साफ -सुथरा एवं आदर्शवादी होता है।


3. बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी होते हैं। समाज में इनका वर्चस्व होता है एवं मान सम्मान की प्राप्ति होती है।

4. निर्णय लेने में जल्दबाजी करते है तथा जिस कार्य को हाथ में लिया है उसको पूरा किए बिना पीछे नहीं हटते।


5. स्वभाव कभी-कभी विरक्ति का भी रहता है। लालच करना इस राशि के लोगों के स्वभाव मे नहीं होता। दूसरों की मदद करना अच्छा लगता है।

6. कल्पना शक्ति की प्रबलता रहती है। सोचते बहुत ज्यादा हैं।


7. जैसा खुद का स्वभाव है, वैसी ही अपेक्षा दूसरों से करते हैं। इस कारण कई बार धोखा भी खाते हैं।

8. अग्नितत्व होने के कारण क्रोध अतिशीघ्र आता है। किसी भी चुनौती को स्वीकार करने की प्रवृत्ति होती है।

9. अपमान जल्दी भूलते नहीं, मन में दबा के रखते हैं। मौका पडने पर प्रतिशोध लेने से नहीं चूकते।

10. अपनी जिद पर अड़े रहना, यह भी मेष राशि के स्वभाव में पाया जाता है। आपके भीतर एक कलाकार छिपा होता है।

11. आप हर कार्य को करने में सक्षम हो सकते हैं। स्वयं को सर्वोपरि समझते हैं।

12. अपनी मर्जी के अनुसार ही दूसरों को चलाना चाहते हैं। इससे आपके कई दुश्मन खड़े हो जाते हैं।

13. एक ही कार्य को बार-बार करना इस राशि के लोगों को पसंद नहीं होता।

14. एक ही जगह ज्यादा दिनों तक रहना भी अच्छा नहीं लगता। नेतृत्व छमता अधिक होती है।

15. कम बोलना, हठी, अभिमानी, क्रोधी, प्रेम संबंधों से दु:खी, बुरे कर्मों से बचने वाले, नौकरों एवं महिलाओं से त्रस्त, कर्मठ, प्रतिभाशाली, यांत्रिक कार्यों में सफल होते हैं।
वृष- ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

राशि स्वरूप- बैल जैसा, राशि स्वामी- शुक्र।

राशि परिचय

1. इस राशि का चिह्न बैल है। बैल स्वभाव से ही अधिक पारिश्रमी और बहुत अधिक वीर्यवान होता है, साधारणत: वह शांत रहता है, किन्तु क्रोध आने पर वह उग्र रूप धारण कर लेता है।

2. बैल के समान स्वभाव वृष राशि के जातक में भी पाया जाता है। वृष राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है।

3. इसके अन्तर्गत कृत्तिका नक्षत्र के तीन चरण, रोहिणी के चारों चरण और मृगशिरा के प्रथम दो चरण आते हैं।

4. इनके जीवन में पिता-पुत्र का कलह रहता है, जातक का मन सरकारी कार्यों की ओर रहता है। सरकारी ठेकेदारी का कार्य करवाने की योग्यता रहती है।

5. पिता के पास जमीनी काम या जमीन के द्वारा जीविकोपार्जन का साधन होता है। जातक अधिकतर तामसी भोजन में अपनी रुचि दिखाता है।

6. गुरु का प्रभाव जातक में ज्ञान के प्रति अहम भाव को पैदा करने वाला होता है, वह जब भी कोई बात करता है तो स्वाभिमान की बात करता है।

7. सरकारी क्षेत्रों की शिक्षा और उनके काम जातक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

8. किसी प्रकार से केतु का बल मिल जाता है तो जातक सरकार का मुख्य सचेतक बनने की योग्यता रखता है। मंगल के प्रभाव से जातक के अंदर मानसिक गर्मी प्रदान करता है।

9. कल-कारखानों, स्वास्थ्य कार्यों और जनता के झगड़े सुलझाने का कार्य जातक कर सकता है, जातक की माता के जीवन में परेशानी ज्यादा होती है।

10. ये अधिक सौन्दर्य प्रेमी और कला प्रिय होते हैं। जातक कला के क्षेत्र में नाम करता है।

11. माता और पति का साथ या माता और पत्नी का साथ घरेलू वातावरण मे सामंजस्यता लाता है, जातक अपने जीवनसाथी के अधीन रहना पसंद करता है।

12. चन्द्र-बुध जातक को कन्या संतान अधिक देता है और माता के साथ वैचारिक मतभेद का वातावरण बनाता है।

13. आपके जीवन में व्यापारिक यात्राएं काफी होती हैं, अपने ही बनाए हुए उसूलों पर जीवन चलाता है।

14. हमेशा दिमाग में कोई योजना बनती रहती है। कई बार अपने किए गए षडयंत्रों में खुद ही फंस भी जाते हैं।

15. रोहिणी के चौथे चरण के मालिक चन्द्रमा हैं, जातक के अंदर हमेशा उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहती है, वह अपने ही मन का राजा होता है।
मिथुन- का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

राशि स्वरूप- स्त्री-पुरुष आलिंगनबद्ध, राशि स्वामी- बुध।

1. यह राशि चक्र की तीसरी राशि है। राशि का प्रतीक युवा दम्पति है, यह द्वि-स्वभाव वाली राशि है।

2. मृगसिरा नक्षत्र के तीसरे चरण के मालिक मंगल-शुक्र हैं। मंगल शक्ति और शुक्र माया है।

3. जातक के अन्दर माया के प्रति भावना पाई जाती है, जातक जीवनसाथी के प्रति हमेशा शक्ति बन कर प्रस्तुत होता है। साथ ही, घरेलू कारणों के चलते कई बार आपस में तनाव रहता है।

4. मंगल और शुक्र की युति के कारण जातक में स्त्री रोगों को परखने की अद्भुत क्षमता होती है।

5. जातक वाहनों की अच्छी जानकारी रखता है। नए-नए वाहनों और सुख के साधनों के प्रति अत्यधिक आकर्षण होता है। इनका घरेलू साज-सज्जा के प्रति अधिक झुकाव होता है।

6. मंगल के कारण जातक वचनों का पक्का बन जाता है।

7. गुरु आसमान का राजा है तो राहु गुरु का शिष्य, दोनों मिलकर जातक में ईश्वरीय ताकतों को बढ़ाते हैं।

8. इस राशि के लोगों में ब्रह्माण्ड के बारे में पता करने की योग्यता जन्मजात होती है। वह वायुयान और सेटेलाइट के बारे में ज्ञान बढ़ाता है।

9. राहु-शनि के साथ मिलने से जातक के अन्दर शिक्षा और शक्ति उत्पादित होती है। जातक का कार्य शिक्षा स्थानों में या बिजली, पेट्रोल या वाहन वाले कामों की ओर होता है।

10. जातक एक दायरे में रह कर ही कार्य कर पाता है और पूरा जीवन कार्योपरान्त फलदायक रहता है। जातक के अंदर एक मर्यादा होती है जो उसे धर्म में लीन करती है और जातक सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अपने को रत रखता है।

11. गुरु जो ज्ञान का मालिक है, उसे मंगल का साथ मिलने पर उच्च पदासीन करने के लिए और रक्षा आदि विभागों की ओर ले जाता है।

12. जातक अपने ही विचारों, अपने ही कारणों से उलझता है। मिथुन राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, जो चन्द्रमा की निर्णय समय में जन्म लेते हैं, वे मिथुन राशि के कहे जाते हैं।

13. बुध की धातु पारा है और इसका स्वभाव जरा सी गर्मी-सर्दी में ऊपर नीचे होने वाला है। जातकों में दूसरे की मन की बातें पढऩे, दूरदृष्टि, बहुमुखी प्रतिभा, अधिक चतुराई से कार्य करने की क्षमता होती है।

14. जातक को बुद्धि वाले कामों में ही सफलता मिलती है। अपने आप पैदा होने वाली मति और वाणी की चतुरता से इस राशि के लोग कुशल कूटनीतिज्ञ और राजनीतिज्ञ भी बन जाते हैं।

15. हर कार्य में जिज्ञासा और खोजी दिमाग होने के कारण इस राशि के लोग अन्वेषण में भी सफलता लेते रहते हैं और पत्रकार, लेखक, मीडियाकर्मी, भाषाओं की जानकारी, योजनाकार भी बन सकते हैं।
कर्क- ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

राशि स्वरूप- केकड़ा, राशि स्वामी- चंद्रमा।

1. राशि चक्र की चौथी राशि कर्क है। इस राशि का चिह्न केकड़ा है। यह चर राशि है।

2. राशि स्वामी चन्द्रमा है। इसके अन्तर्गत पुनर्वसु नक्षत्र का अन्तिम चरण, पुष्य नक्षत्र के चारों चरण तथा अश्लेषा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।

3. कर्क राशि के लोग कल्पनाशील होते हैं। शनि-सूर्य जातक को मानसिक रूप से अस्थिर बनाते हैं और जातक में अहम की भावना बढ़ाते हैं।

4. जिस स्थान पर भी वह कार्य करने की इच्छा करता है, वहां परेशानी ही मिलती है।

5. शनि-बुध दोनों मिलकर जातक को होशियार बना देते हैं। शनि-शुक्र जातक को धन और जायदाद देते हैं।

6. शुक्र उसे सजाने संवारने की कला देता है और शनि अधिक आकर्षण देता है।

7. जातक उपदेशक बन सकता है। बुध गणित की समझ और शनि लिखने का प्रभाव देते हैं। कम्प्यूटर आदि का प्रोग्रामर बनने में जातक को सफलता मिलती है।

8. जातक श्रेष्ठ बुद्धि वाला, जल मार्ग से यात्रा पसंद करने वाला, कामुक, कृतज्ञ, ज्योतिषी, सुगंधित पदार्थों का सेवी और भोगी होता है। वह मातृभक्त होता है।

9. कर्क, केकड़ा जब किसी वस्तु या जीव को अपने पंजों को जकड़ लेता है तो उसे आसानी से नहीं छोड़ता है। उसी तरह जातकों में अपने लोगों तथा विचारों से चिपके रहने की प्रबल भावना होती है।

10. यह भावना उन्हें ग्रहणशील, एकाग्रता और धैर्य के गुण प्रदान करती है।

11. उनका मूड बदलते देर नहीं लगती है। कल्पनाशक्ति और स्मरण शक्ति बहुत तीव्र होती है।

12. उनके लिए अतीत का महत्व होता है। मैत्री को वे जीवन भर निभाना जानते हैं, अपनी इच्छा के स्वामी होते हैं।

13. ये सपना देखने वाले होते हैं, परिश्रमी और उद्यमी होते हैं।

14. जातक बचपन में प्राय: दुर्बल होते हैं, किन्तु आयु के साथ साथ उनके शरीर का विकास होता जाता है।

15. चूंकि कर्क कालपुरुष की वक्षस्थल और पेट का प्रतिधिनित्व करती है, अत: जातकों को अपने भोजन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
सिंह- मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

राशि स्वरूप- शेर जैसा, राशि स्वामी- सूर्य।

1. सिंह राशि पूर्व दिशा की द्योतक है। इसका चिह्न शेर है। राशि का स्वामी सूर्य है और इस राशि का तत्व अग्नि है।

2. इसके अन्तर्गत मघा नक्षत्र के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तराफाल्गुनी का पहला चरण आता है।

3. केतु-मंगल जातक में दिमागी रूप से आवेश पैदा करता है। केतु-शुक्र, जो जातक में सजावट और सुन्दरता के प्रति आकर्षण को बढ़ाता है।

4. केतु-बुध, कल्पना करने और हवाई किले बनाने के लिए सोच पैदा करता है। चंद्र-केतु जातक में कल्पना शक्ति का विकास करता है। शुक्र-सूर्य जातक को स्वाभाविक प्रवृत्तियों की तरफ बढ़ाता है।

5. जातक का सुन्दरता के प्रति मोह होता है और वे कामुकता की ओर भागता है। जातक में अपने प्रति स्वतंत्रता की भावना रहती है और किसी की बात नहीं मानता।

6. जातक, पित्त और वायु विकार से परेशान रहने वाले लोग, रसीली वस्तुओं को पसंद करने वाले होते हैं। कम भोजन करना और खूब घूमना, इनकी आदत होती है।

7. छाती बड़ी होने के कारण इनमें हिम्मत बहुत अधिक होती है और मौका आने पर यह लोग जान पर खेलने से भी नहीं चूकते।

8. जातक जीवन के पहले दौर में सुखी, दूसरे में दुखी और अंतिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है।

9. सिंह राशि वाले जातक हर कार्य शाही ढंग से करते हैं, जैसे सोचना शाही, करना शाही, खाना शाही और रहना शाही।

10. इस राशि वाले लोग जुबान के पक्के होते हैं। जातक जो खाता है वही खाएगा, अन्यथा भूखा रहना पसंद करेगा, वह आदेश देना जानता है, किसी का आदेश उसे सहन नहीं होता है, जिससे प्रेम करेगा, उस मरते दम तक निभाएगा, जीवनसाथी के प्रति अपने को पूर्ण रूप से समर्पित रखेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी का आना इस राशि वाले को कतई पसंद नहीं है।

11. जातक कठोर मेहनत करने वाले, धन के मामलों में बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। स्वर्ण, पीतल और हीरे-जवाहरात का व्यवसाय इनको बहुत फायदा देने वाले होते हैं।

12. सरकार और नगर पालिका वाले पद इनको खूब भाते हैं। जातकों की वाणी और चाल में शालीनता पाई जाती है।

13. इस राशि वाले जातक सुगठित शरीर के मालिक होते हैं। नृत्य करना भी इनकी एक विशेषता होती है, अधिकतर इस राशि वाले या तो बिलकुल स्वस्थ रहते है या फिर आजीवन बीमार रहते हैं।

14. जिस वारावरण में इनको रहना चाहिए, अगर वह न मिले, इनके अभिमान को कोई ठेस पहुंचाए या इनके प्रेम में कोई बाधा आए, तो यह बीमार रहने लगते है।

15. रीढ़ की हड्डी की बीमारी या चोटों से अपने जीवन को खतरे में डाल लेते हैं। इस राशि के लोगों के लिये हृदय रोग, धड़कन का तेज होना, लू लगना और आदि बीमारी होने की संभावना होती है।
कन्या- ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

राशि स्वरूप- कन्या, राशि स्वामी- बुध।

1. राशि चक्र की छठी कन्या राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है। इस राशि का चिह्न हाथ में फूल लिए कन्या है। राशि का स्वामी बुध है। इसके अन्तर्गत उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण, चित्रा के पहले दो चरण और हस्त नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।

2. कन्या राशि के लोग बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी होते हैं। भावुक भी होते हैं और वह दिमाग की अपेक्षा दिल से ज्यादा काम लेते हैं।

3. इस राशि के लोग संकोची, शर्मीले और झिझकने वाले होते हैं।

4. मकान, जमीन और सेवाओं वाले क्षेत्र में इस राशि के जातक कार्य करते हैं।

5. स्वास्थ्य की दृष्टि से फेफड़ों में शीत, पाचनतंत्र एवं आंतों से संबंधी बीमारियां जातकों मे मिलती हैं। इन्हें पेट की बीमारी से प्राय: कष्ट होता है। पैर के रोगों से भी सचेत रहें।

6. बचपन से युवावस्था की अपेक्षा जातकों की वृद्धावस्था अधिक सुखी और ज्यादा स्थिर होता है।

7. इस राशि वाल पुरुषों का शरीर भी स्त्रियों की भांति कोमल होता है। ये नाजुक और ललित कलाओं से प्रेम करने वाले लोग होते हैं।

8. ये अपनी योग्यता के बल पर ही उच्च पद पर पहुंचते हैं। विपरीत परिस्थितियां भी इन्हें डिगा नहीं सकतीं और ये अपनी सूझबूझ, धैर्य, चातुर्य के कारण आगे बढ़ते रहते है।

9. बुध का प्रभाव इनके जीवन मे स्पष्ट झलकता है। अच्छे गुण, विचारपूर्ण जीवन, बुद्धिमत्ता, इस राशि वाले में अवश्य देखने को मिलती है।

10. शिक्षा और जीवन में सफलता के कारण लज्जा और संकोच तो कम हो जाते हैं, परंतु नम्रता तो इनका स्वाभाविक गुण है।

11. इनको अकारण क्रोध नहीं आता, किंतु जब क्रोध आता है तो जल्दी समाप्त नहीं होता। जिसके कारण क्रोध आता है, उसके प्रति घृणा की भावना इनके मन में घर कर जाती है।

12. इनमें भाषण व बातचीत करने की अच्छी कला होती है। संबंधियों से इन्हें विशेष लाभ नहीं होता है, इनका वैवाहिक जीवन भी सुखी नहीं होता। यह जरूरी नहीं कि इनका किसी और के साथ संबंध होने के कारण ही ऐसा होगा।

13. इनके प्रेम सम्बन्ध प्राय: बहुत सफल नहीं होते हैं। इसी कारण निकटस्थ लोगों के साथ इनके झगड़े चलते रहते हैं।

14. ऐसे व्यक्ति धार्मिक विचारों में आस्था तो रखते हैं, परंतु किसी विशेष मत के नहीं होते हैं। इन्हें बहुत यात्राएं भी करनी पड़ती है तथा विदेश गमन की भी संभावना रहती है। जिस काम में हाथ डालते हैं लगन के साथ पूरा करके ही छोड़ते हैं।

15. इस राशि वाले लोग अपरिचित लोगों मे अधिक लोकप्रिय होते हैं, इसलिए इन्हें अपना संपर्क विदेश में बढ़ाना चाहिए। वैसे इन व्यक्ति की मैत्री किसी भी प्रकार के व्यक्ति के साथ हो सकती है।
तुला- रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

राशि स्वरूप- तराजू जैसा, राशि स्वामी- शुक्र।

1. तुला राशि का चिह्न तराजू है और यह राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, यह वायुतत्व की राशि है। शुक्र राशि का स्वामी है। इस राशि वालों को कफ की समस्या होती है।

2. इस राशि के पुरुष सुंदर, आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। आंखों में चमक व चेहरे पर प्रसन्नता झलकती है। इनका स्वभाव सम होता है।

3. किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते, दूसरों को प्रोत्साहन देना, सहारा देना इनका स्वभाव होता है। ये व्यक्ति कलाकार, सौंदर्योपासक व स्नेहिल होते हैं।

4. ये लोग व्यावहारिक भी होते हैं व इनके मित्र इन्हें पसंद करते हैं।

5. तुला राशि की स्त्रियां मोहक व आकर्षक होती हैं। स्वभाव खुशमिजाज व हंसी खनखनाहट वाली होती हैं। बुद्धि वाले काम करने में अधिक रुचि होती है।

6. घर की साजसज्जा व स्वयं को सुंदर दिखाने का शौक रहता है। कला, गायन आदि गृह कार्य में दक्ष होती हैं। बच्चों से बेहद जुड़ाव रहता है।

7. तुला राशि के बच्चे सीधे, संस्कारी और आज्ञाकारी होते हैं। घर में रहना अधिक पसंद करते हैं। खेलकूद व कला के क्षेत्र में रुचि रखते हैं।

8. तुला राशि के जातक दुबले-पतले, लम्बे व आकर्षक व्यक्तिव वाले होते हैं। जीवन में आदर्शवाद व व्यवहारिकता में पर्याप्त संतुलन रखते हैं।

9. इनकी आवाज विशेष रूप से सौम्य होती हैं। चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान छाई रहती है।

10. इन्हें ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करना बहुत भाता है। ये एक अच्छे साथी हैं, चाहें वह वैवाहिक जीवन हो या व्यावसायिक जीवन।

11. आप अपने व्यवहार में बहुत न्यायवादी व उदार होते हैं। कला व साहित्य से जुड़े रहते हैं। गीत, संगीत, यात्रा आदि का शौक रखने वाले व्यक्ति अधिक अच्छे लगते हैं।

12. लड़कियां आत्म विश्वास से परिपूर्ण होती हैं। आपके मनपसंद रंग गहरा नीला व सफेद होते हैं। आपको वैवाहिक जीवन में स्थायित्व पसंद आता है।

13. आप अधिक वाद-विवाद में समय व्यर्थ नहीं करती हैं। आप सामाजिक पार्टियों, उत्सवों में रुचिपूर्वक भाग लेती हैं।

14. आपके बच्चे अपनी पढ़ाई या नौकरी आदि के कारण जल्दी ही आपसे दूर जा सकते हैं।

15. एक कुशल मां साबित होती हैं जो कि अपने बच्चों को उचित शिक्षा व आत्म विश्वास प्रदान करती हैं।
वृश्चिक- तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

राशि स्वरूप- बिच्छू जैसा, राशि स्वामी- मंगल।

1. वृश्चिक राशि का चिह्न बिच्छू है और यह राशि उत्तर दिशा की द्योतक है। वृश्चिक राशि जलतत्व की राशि है। इसका स्वामी मंगल है। यह स्थिर राशि है, यह स्त्री राशि है।

2. इस राशि के व्यक्ति उठावदार कद-काठी के होते हैं। यह राशि गुप्त अंगों, उत्सर्जन, तंत्र व स्नायु तंत्र का प्रतिनिधित्व करती है। अत: मंगल की कमजोर स्थिति में इन अंगों के रोग जल्दी होते हैं। ये लोग एलर्जी से भी अक्सर पीडि़त रहते हैं। विशेषकर जब चंद्रमा कमजोर हो।

3. वृश्चिक राशि वालों में दूसरों को आकर्षित करने की अच्छी क्षमता होती है। इस राशि के लोग बहादुर, भावुक होने के साथ-साथ कामुक होते हैं।

4. शरीरिक गठन भी अच्छा होता है। ऐसे व्यक्तियों की शारीरिक संरचना अच्छी तरह से विकसित होती है। इनके कंधे चौड़े होते हैं। इनमें शारीरिक व मानसिक शक्ति प्रचूर मात्रा में होती है।

5. इन्हें बेवकूफ बनाना आसान नहीं होता है, इसलिए कोई इन्हें धोखा नहीं दे सकता। ये हमेशा साफ-सुथरी और सही सलाह देने में विश्वास रखते हैं। कभी-कभी साफगोई विरोध का कारण भी बन सकती है।

6. ये जातक दूसरों के विचारों का विरोध ज्यादा करते हैं, अपने विचारों के पक्ष में कम बोलते हैं और आसानी से सबके साथ घुलते-मिलते नहीं हैं।

7. यह जातक अक्सर विविधता की तलाश में रहते हैं। वृश्चिक राशि से प्रभावित लड़के बहुत कम बोलते होते हैं। ये आसानी से किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं। इन्हें दुबली-पतली लड़कियां आकर्षित करती हैं।

8. वृश्चिक वाले एक जिम्मेदार गृहस्थ की भूमिका निभाते हैं। अति महत्वाकांक्षी और जिद्दी होते हैं। अपने रास्ते चलते हैं मगर किसी का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते।

9. लोगों की गलतियों और बुरी बातों को खूब याद रखते हैं और समय आने पर उनका उत्तर भी देते हैं। इनकी वाणी कटु और गुस्सा तेज होता है मगर मन साफ होता है। दूसरों में दोष ढूंढने की आदत होती है। जोड़-तोड़ की राजनीति में चतुर होते हैं।

10. इस राशि की लड़कियां तीखे नयन-नक्ष वाली होती हैं। यह ज्यादा सुन्दर न हों तो भी इनमें एक अलग आकर्षण रहता है। इनका बातचीत करने का अपना विशेष अंदाज होता है।

11. ये बुद्धिमान और भावुक होती हैं। इनकी इच्छा शक्ति बहुत दृढ़ होती है। स्त्रियां जिद्दी और अति महत्वाकांक्षी होती हैं। थोड़ी स्वार्थी प्रवृत्ति भी होती हैं।

12. स्वतंत्र निर्णय लेना इनकी आदत में होते है। मायके परिवार से अधिक स्नेह रहता है। नौकरीपेशा होने पर अपना वर्चस्व बनाए रखती हैं।

13. इन लोगों काम करने की क्षमता काफी अधिक होती है। वाणी की कटुता इनमें भी होती है, सुख-साधनों की लालसा सदैव बनी ही रहती है।

14. ये सभी जातक जिद्दी होते हैं, काम के प्रति लगन रखते हैं, महत्वाकांक्षी व दूसरों को प्रभावित करने की योग्यता रखते हैं। ये व्यक्ति उदार व आत्मविश्वासी भी होते है।

15. वृश्चिक राशि के बच्चे परिवार से अधिक स्नेह रखते हैं। कम्प्यूटर-टीवी का बेहद शौक होता है। दिमागी शक्ति तीव्र होती है, खेलों में इनकी रुचि होती है।
धनु- ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

राशि स्वरूप- धनुष उठाए हुए, राशि स्वामी- बृहस्पति।

1. धनु द्वि-स्वभाव वाली राशि है। इस राशि का चिह्न धनुषधारी है। यह राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है।

2. धनु राशि वाले काफी खुले विचारों के होते हैं। जीवन के अर्थ को अच्छी तरह समझते हैं।

3. दूसरों के बारे में जानने की कोशिश में हमेशा करते रहते हैं।

4. धनु राशि वालों को रोमांच काफी पसंद होता है। ये निडर व आत्म विश्वासी होते हैं। ये अत्यधिक महत्वाकांक्षी और स्पष्टवादी होते हैं।

5. स्पष्टवादिता के कारण दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचा देते हैं।

6. इनके अनुसार जो इनके द्वारा परखा हुआ है, वही सत्य है। अत: इनके मित्र कम होते हैं। ये धार्मिक विचारधारा से दूर होते हैं।

7. धनु राशि के लड़के मध्यम कद काठी के होते हैं। इनके बाल भूरे व आंखें बड़ी-बड़ी होती हैं। इनमें धैर्य की कमी होती है।

8. इन्हें मेकअप करने वाली लड़कियां पसंद हैं। इन्हें भूरा और पीला रंग प्रिय होता है।

9. अपनी पढ़ाई और करियर के कारण अपने जीवन साथी और विवाहित जीवन की उपेक्षा कर देते हैं। पत्नी को शिकायत का मौका नहीं देते और घरेलू जीवन का महत्व समझते हैं।

10. धनु राशि की लड़कियां लंबे कदमों से चलने वाली होती हैं। ये आसानी से किसी के साथ दोस्ती नहीं करती हैं।

11. ये एक अच्छी श्रोता होती हैं और इन्हें खुले और ईमानदारी पूर्ण व्यवहार के व्यक्ति पसंद आते हैं। इस राशि की स्त्रियां गृहणी बनने की अपेक्षा सफल करियर बनाना चाहती है।

12. इनके जीवन में भौतिक सुखों की महत्ता रहती है। सामान्यत: सुखी और संपन्न जीवन व्यतीत करती हैं।

13. इस राशि के जातक ज्यादातर अपनी सोच का विस्तार नहीं करते एवं कई बार कन्फयूज रहते हैं। एक निर्णय पर पंहुचने पर इनको समय लगता है एवं यह देरी कई बार नुकसान दायक भी हो जाती है।

14. ज्यादातर यह लोग दूसरों के मामलों में दखल नहीं देते एवं अपने काम से काम रखते हैं।

15. इनका पूरा जीवन लगभग मेहनत करके कमाने में जाता है या यह अपने पुश्तैनी कार्य को ही आगे बढाते हैं।
मकर- भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

राशि स्वरूप- मगर जैसा, राशि स्वामी- शनि।

1. मकर राशि का चिह्न मगरमच्छ है। मकर राशि के व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होते हैं। यह सम्मान और सफलता प्राप्त करने के लिए लगातार कार्य कर सकते हैं।

2. इनका शाही स्वभाव व गंभीर व्यक्तित्व होता है। आपको अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है।

3. इन्हें यात्रा करना पसंद है। गंभीर स्वभाव के कारण आसानी से किसी को मित्र नहीं बनाते हैं। इनके मित्र अधिकतर कार्यालय या व्यवसाय से ही संबंधित होते हैं।

4. सामान्यत: इनका मनपसंद रंग भूरा और नीला होता है। कम बोलने वाले, गंभीर और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों को ज्यादा पसंद करते हैं।

5. ईश्वर व भाग्य में विश्वास करते हैं। दृढ़ पसंद-नापसंद के चलते इनका वैवाहिक जीवन लचीला नहीं होता और जीवनसाथी को आपसे परेशानी महसूस हो सकती है।

6. मकर राशि के लड़के कम बोलने वाले होते हैं। इनके हाथ की पकड़ काफी मजबूत होती है। देखने में सुस्त, लेकिन मानसिक रूप से बहुत चुस्त होते हैं।

7. प्रत्येक कार्य को बहुत योजनाबद्ध ढंग से करते हैं। गहरा नीला या श्वेत रंग प्रधान वस्त्र पहने हुए लड़कियां इन्हें बहुत पसंद आती हैं।

8. आपकी खामोशी आपके साथी को प्रिय होती है। अगर आपका जीवनसाथी आपके व्यवहार को अच्छी तरह समझ लेता है तो आपका जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होता है।

9. आप जीवन साथी या मित्रों के सहयोग से उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।

10. मकर राशि की लड़कियां लम्बी व दुबली-पतली होती हैं। यह व्यायाम आदि करना पसंद करती हैं। लम्बे कद के बाबजूद आप ऊंची हिल की सैंडिल पहनना पसंद करती हैं।

11. पारंपरिक मूल्यों पर विश्वास करने वाली होती हैं। छोटे-छोटे वाक्यों में अपने विचारों को व्यक्त करती हैं।

12. दूसरों के विचारों को अच्छी तरह से समझ सकती हैं। इनके मित्र बहुत होते हैं और नृत्य की शौकिन होती हैं।

13. इनको मजबूत कद कठी के व्यक्ति बहुत आकर्षित करते हैं। अविश्वसनीय संबंधों में विश्वास नहीं करती हैं।

14. अगर आप करियर वुमन हैं तो आप कार्य क्षेत्र में अपना अधिकतर समय व्यतीत करती हैं।

15. आप अपने घर या घरेलू कार्यों के विषय में अधिक चिंता नहीं करती हैं।
कुंभ- गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

राशि स्वरूप- घड़े जैसा, राशि स्वामी- शनि।

1. राशि चक्र की यह ग्यारहवीं राशि है। कुंभ राशि का चिह्न घड़ा लिए खड़ा हुआ व्यक्ति है। इस राशि का स्वामी भी शनि है। शनि मंद ग्रह है तथा इसका रंग नीला है। इसलिए इस राशि के लोग गंभीरता को पसंद करने वाले होते हैं एवं गंभीरता से ही कार्य करते हैं।

2. कुंभ राशि वाले लोग बुद्धिमान होने के साथ-साथ व्यवहारकुशल होते हैं। जीवन में स्वतंत्रता के पक्षधर होते हैं। प्रकृति से भी असीम प्रेम करते हैं।

3. शीघ्र ही किसी से भी मित्रता स्थपित कर सकते हैं। आप सामाजिक क्रियाकलापों में रुचि रखने वाले होते हैं। इसमें भी साहित्य, कला, संगीत व दान आपको बेहद पसंद होता हैं।

4. इस राशि के लोगों में साहित्य प्रेम भी उच्च कोटि का होता है।

5. आप केवल बुद्धिमान व्यक्तियों के साथ बातचीत पसंद करते हैं। कभी भी आप अपने मित्रों से असमानता का व्यवहार नहीं करते हैं।

6. आपका व्यवहार सभी को आपकी ओर आकर्षित कर लेता है।

7. कुंभ राशि के लड़के दुबले होते हैं। आपका व्यवहार स्नेहपूर्ण होता है। इनकी मुस्कान इन्हें आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करती है।

8. इनकी रुचि स्तरीय खान-पान व पहनावे की ओर रहती है। ये बोलने की अपेक्षा सुनना ज्यादा पसंद करते हैं। इन्हें लोगों से मिलना जुलना अच्छा लगता है।

9. अपने व्यवहार में बहुत ईमानदार रहते हैं, इसलिये अनेक लड़कियां आपकी प्रशंसक होती हैं। आपको कलात्मक अभिरुचि व सौम्य व्यक्तित्व वाली लड़कियां आकर्षित करती हैं।

10. अपनी इच्छाओं को दूसरों पर लादना पसंद नहीं करते हैं और अपने घर परिवार से स्नेह रखते हैं।

11. कुंभ राशि की लड़कियां बड़ी-बड़ी आंखों वाली व भूरे बालों वाली होती हैं। यह कम बोलती हैं, इनकी मुस्कान आकर्षक होती है।

12. इनका व्यक्तित्व बहुत आकर्षक होता है, किन्तु आसानी से किसी को अपना नहीं बनाती हैं। ये अति सुंदर और आकर्षक होती हैं।

13. आप किसी कलात्मक रुचि, पेंटिग, काव्य, संगीत, नृत्य या लेखन आदि में अपना समय व्यतीत करती हैं।

14. ये सामान्यत: गंभीर व कम बोलने वाले व्यक्तियों के प्रति आकर्षित होती हैं।

15. इनका जीवन सुखपूर्वक व्यतित होता है, क्योंकि ये ज्यादा इच्छाएं नहीं करती हैं। अपने घर को भी कलात्मक रूप से सजाती हैं।
मीन- दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

राशि स्वरूप- मछली जैसा, राशि स्वामी- बृहस्पति।

1. मीन राशि का चिह्न मछली होता है। मीन राशि वाले मित्रपूर्ण व्यवहार के कारण अपने कार्यालय व आस पड़ोस में अच्छी तरह से जाने जाते हैं।

2. आप कभी अति मैत्रीपूर्ण व्यवहार नहीं करते हैं। बल्कि आपका व्यवहार बहुत नियंत्रित रहता है। ये आसानी से किसी के विचारों को पढ़ सकते हैं।

3. अपनी ओर से उदारतापूर्ण व संवेदनाशील होते हैं और व्यर्थ का दिखावा व चालाकी को बिल्कुल नापसंद करते हैं।

4. एक बार किसी पर भी भरोसा कर लें तो यह हमेशा के लिए होता है, इसीलिये आप आपने मित्रों से अच्छा भावानात्मक संबंध बना लेते हैं।

5. ये सौंदर्य और रोमांस की दुनिया में रहते हैं। कल्पनाशीलता बहुत प्रखर होती है। अधिकतर व्यक्ति लेखन और पाठन के शौकीन होते हैं। आपको नीला, सफेद और लाल रंग-रूप से आकर्षित करते हैं।

6. आपकी स्तरीय रुचि का प्रभाव आपके घर में देखने को मिलता है। आपका घर आपकी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

7. अपने धन को बहुत देखभाल कर खर्च करते हैं। आपके अभिन्न मित्र मुश्किल से एक या दो ही होते हैं। जिनसे ये अपने दिल की सभी बातें कह सकते हैं। ये विश्वासघात के अलावा कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं।

8. मीन राशि के लड़के भावुक हृदय व पनीली आंखों वाले होते हैं। अपनी बात कहने से पहले दो बार सोचते हैं। आप जिंदगी के प्रति काफी लचीला दृटिकोण रखते हैं।

9. अपने कार्य क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिये परिश्रम करते हैं। आपको बुद्धिमान और हंसमुख लोग पसंद हैं।

10. आप बहुत संकोचपूर्वक ही किसी से अपनी बात कह पाते हैं। एक कोमल व भावुक स्वभाव के व्यक्ति हैं। आप पत्नी के रूप में गृहणी को ही पसंद करते हैं।

11. ये खुद घरेलू कार्यों में दखलंदाजी नहीं करते हैं, न ही आप अपनी व्यावसायिक कार्य में उसका दखल पसंद करते हैं। आपका वैवाहिक जीवन अन्य राशियों की अपेक्षा सर्वाधिक सुखमय रहता है।

12. मीन राशि की लड़कियां भावुक व चमकदार आंखों वाली होती हैं। ये आसानी से किसी से मित्रता नहीं करती हैं, लेकिन एक बार उसकी बातों पर विश्वास हो जाए तो आप अपने दिल की बात भी उससे कह देती हैं।

13. ये स्वभाव से कला प्रेमी होती हैं। एक बुद्धिमान व सभ्य व्यक्ति आपको आकर्षित करता है। आप शांतिपूर्वक उसकी बात सुन सकती हैं और आसानी से अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं करती हैं।

14. अपनी मित्रता और वैवाहिक जीवन में सुरक्षा व दृढ़ता रखना पसंद करती हैं। ये अपने पति के प्रति विश्वसनीय होती है और वैसा ही व्यवहार अपने पति से चाहती हैं।

15. आपको ज्योतिष आदि में रुचि हो सकती है। आपको नई-नई चीजें सीखने का शौक होता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2016

500 साल पुराना यह बरगद का पेड़, कहलाता है मौत का पेड़



पंजाब के जिला फतेहगढ़ साहिब के चरोटी कलां गांव में एक एेसा बरगद है जिसकी जड़ें जिस खेत में जाती हैं वहां किसान खेती बंद कर देते हैं। इतना ही नहीं लोगों की मान्यता है कि अगर कोई इस पेड़ की जड़ें काटता है तो उसकी या उसके परिवार के किसी न किसी सदस्य की मौत हो जाती है। यह जगह चंडीगढ़ से करीब 40 किमी दूर है। यहां के लोगों ने बताया कि सालों से इस मान्यता के चलते खेती पर संकट बना हुआ है। कोई भी इस पेड़ को काटने की हिम्मत नहीं करता।




लोग बरगद के पेड़ को ही समर्पित कर देते हैं अपने खेत

गांव वालों के मुताबिक बरगद का यह पेड़ सैकड़ों साल पुराना है जो लगातार बढ़ रहा है। गांव वाले बताते हैं कि पहले तो हमें इस पेड़ की इस तरह की कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन, जब एक किसान के खेत में इस पेड़ के जड़ें पहुंची तो उसने वो काट दीं, कुछ ही दिनों बाद उसकी मौत हो गई। इसे श्रद्धा कहें या अंधविश्वास लेकिन गांव वाले इसे काटने की भूल नहीं करते बल्कि चुपचाप अपनी जमीन छोड़ देते हैं जिस जगह ये पेड़ उगा है।

ये है मान्यता



बरगद के पेड़ के समीप शिव का मंदिर है। लोगों का कहना है कि सैकड़ों साल पहले इस जगह पर एक संत आए थे जिन्होंने संतान प्राप्ति के लिए एक किसान को भस्म दी थी। उसकी पत्नी ने से इसे खाने से मना कर दिया। उस किसान ने यह भस्म संत को लौटाना चाही तो संत ने भस्म लेने से मना कर दिया। किसान ने भस्म को जमीन पर रख दिया। कहते हैं इसी स्थान पर एक बरगद का पौधा उग आया जो सदियों से विराट रूप धारण करता जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि यहां पर सच्चे मन मन्नत करने पर इंसान की हर मुराद पूरी होती है।



दूर से बरगद के पेड़ का दृश्य

क्या कहते हैं गांव के लोग

गांव के लोगों का कहना है कि बरगद का यह पेड़ पांच सौ साल से अधिक पुराना है। उनका कहना है कि इस पेड़ की जड़ें जिस किसी के खेत में जाती है वह खेत को छोड़ देता है। गांव के अस्सी वर्षीय बजूर्ग करनैल सिंह ने इस पेड़ की मान्यता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अनहोनी और मौत के डर से इस पेड़ को कोई नहीं काटता। इसके बढ़ने पर भूमि को छोड़ देना ही गांव के लोगों के हित में है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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यह कहलाता है ‘स्वर्ग का दरवाजा’



दुनियाभर में कई ऐसे अमेजिंग प्लेसेस हैं, जिनके बारे में जानकर हैरत होती है। ऐसी जगहें लोगों को भी खूब लुभाती हैं। इनमें से कुछ को जहां इंसानों ने अपनी मेहनत बनाया है, वहीं कुछ को नेचर ने अपने अंदाज में गढ़ा है।




ऐसा ही एक प्लेस चीन का तियानमेन माउंटेन है, जो वहां का प्रमुख टूरिस्ट अट्रैक्शन भी है। दरअसल, 1518 मीटर ऊंचे (लगभग 5 हजार फीट) इस पहाड़ पर दुनिया की सबसे ऊंची गुफा है। इस गुफा को स्वर्ग का दरवाजा भी कहा जाता है।



बताया जाता है कि 253 ईस्वी में पहाड़ का कुछ हिस्सा टूट गया, जिससे इस गुफा का निर्माण हुआ था। इसकी लंबाई 196 फीट, ऊंचाई 431 फीट तथा चौड़ाई 187 फीट है।



लगभग 5 हजार फीट की ऊंचाई पर होने की वजह से ये गुफा बादलों के बीच घिरा रहता है। संभवत: इस कारण से लोग इसे स्वर्ग का दरवाजा कहने लगे।




टूरिस्ट यहां जाने के लिए सड़क के अलावा केबल वे का उपयोग भी करते हैं। दुनिया का सबसे लंबा (24459 फीट) और ऊंचाई पर बने इस केबल वे का नाम गिनीज बुक्स ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।



केबल वे और सड़कों से उतरने के बाद लोग 999 सीढ़ियां चढ़कर गुफा तक पहुंचते हैं। ताओ फिलॉसिफी के मुताबिक, ये 999 स्टेप सुप्रीम नंबर है और सम्राट का प्रतीक है।




20वीं शताब्दी में तियानमेन माउंटेन के पास एक वाटरफॉल भी था, जो कि सिर्फ 15 मिनट के लिए ही दिखाई देता था। इसके बाद गायब हो जाता था। इसका पानी 1500 मीटर की ऊंचाई से सीधे नीचे गिरता था। हालांकि, अब इस वाटरफॉल का कोई नामोनिशान नहीं है।



वहीं, इस माउंटेन के बारे में ये भी कहा जाता है कि यहां पर काफी खजाने छुपे हुए हैं। इसे ढूंढने की कोशिश भी कई लोगों ने की, लेकिन वे असफल रहे। यहां बौद्ध मठ भी है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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गुरुवार, 20 अक्तूबर 2016

Here is what Kartik Snan value, method and benefits


 हमारे धर्म शास्त्रों में अशांति, पाप आदि से बचने के कई उपाय बताए गए हैं। उन्हीं में से कार्तिक मास में किया गया स्नान व व्रत भी एक है। स्कंद पुराण आदि अनेक धर्म ग्रंथों में कार्तिक मास के स्नान व व्रत की महिमा बताई गई है। कार्तिक में पूरे माह ब्रह्ममुहूर्त में किसी नदी, तालाब, नहर या पोखर में स्नान कर भगवान की पूजा किए जाने का विधान है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, कलियुग में कार्तिक मास में किए गए व्रत, स्नान व तप को मोक्ष प्राप्ति का बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार-


न कार्तिकसमो मासो न कृतेन समं युगम्।
न वेदसदृशं शास्त्रं न तीर्थं गंगा समम्।।

अर्थात- कार्तिक के समान दूसरा कोई मास नहीं, सत्ययुग के समान कोई युग नही, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है।

कार्तिक मास में स्नान का धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक महत्व भी है। वर्षा ऋतु के बाद जब आसमान साफ होता है और सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी तक आती है ऐसे में प्रकृति का वातावरण शरीर के अनुकूल होता है। प्रात:काल उठकर नदी में स्नान करने से ताजी हवा शरीर में स्फूर्ति का संचार करती है। इस प्रकार के वातावरण से कई शारीरिक बीमारियां अपने आप ही समाप्त हो जाती हैं।


इस विधि से करें कार्तिक मास में नदी स्नान
पुराणों में कार्तिक मास को स्नान, व्रत व तप की दृष्टि से मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है। स्कंदपुराण के अनुसार, कार्तिक महीने में किया गया स्नान व्रत भगवान विष्णु की पूजा के समान कहा गया है। कार्तिक मास में स्नान किस प्रकार किया जाए, इसका वर्णन शास्त्रों में इस प्रकार लिखा है-

तिलामलकचूर्णेन गृही स्नानं समाचरेत्।
विधवास्त्रीयतीनां तु तुलसीमूलमृत्सया।।
सप्तमी दर्शनवमी द्वितीया दशमीषु च।
त्रयोदश्यां न च स्नायाद्धात्रीफलतिलैं सह।।


अर्थात- कार्तिक व्रती (व्रत रखने वाला) को सबसे पहले गंगा, विष्णु, शिव तथा सूर्य का स्मरण कर नदी, तालाब या पोखर के जल में प्रवेश करना चाहिए। उसके बाद नाभिपर्यन्त (आधा शरीर पानी में डूबा हो) जल में खड़े होकर स्नान करना चाहिए।

गृहस्थ व्यक्ति को काला तिल तथा आंवले का चूर्ण लगाकर स्नान करना चाहिए परंतु विधवा तथा संन्यासियों को तुलसी के पौधे की जड़ में लगी मृत्तिका (मिट्टी) को लगाकर स्नान करना चाहिए। सप्तमी, अमावस्या, नवमी, द्वितीया, दशमी व त्रयोदशी को तिल एवं आंवले का प्रयोग वर्जित है।


इसके बाद व्रती को जल से निकलकर शुद्ध वस्त्र धारणकर विधि-विधानपूर्वक भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। यह ध्यान रहे कि कार्तिक मास में स्नान व व्रत करने वाले को केवल नरक चतुर्दशी (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) को ही तेल लगाना चाहिए। शेष दिनों में तेल लगाना वर्जित है।

निरोगी बनाता है कार्तिक मास
धर्म शास्त्रों में प्रत्येक ऋतु व मास का अपना विशेष महत्व बताया गया है। धर्म ग्रंथों में कार्तिक मास के बारे में लिखा है कि यह महीना स्नान, तप व व्रत के लिए सर्वोत्तम है। यह मास सिर्फ धार्मिक कार्यों के लिए ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी काफी लाभदायक है। स्कंदपुराण के वैष्णव खंड में कार्तिक मास के महत्व के विषय में कहा गया है-

रोगापहं पातकनाशकृत्परं सद्बुद्धिदं पुत्रधनादिसाधकम्।
मुक्तेर्निदांन नहि कार्तिकव्रताद् विष्णुप्रियादन्यदिहास्ति भूतले।।
(स्कंदपुराण. वै. का. मा. 5/34)

अर्थात- कार्तिक मास आरोग्य प्रदान करने वाला, रोगविनाशक, सद्बुद्धि प्रदान करने वाला तथा मां लक्ष्मी की साधना के लिए सर्वोत्तम है।

वैज्ञानिक कारण
कार्तिक मास को रोगनाशक कहने के पीछे का वैज्ञानिक कारण इस मास का अनुकूल वातावरण है। वर्षा ऋतु में आसमान बादलों से ढंका रहता है। ऐसे में कई सूक्ष्मजीव पनपते हैं और रोग फैलाते हैं। इसके बाद जब शरद ऋतु आती है तो आसमान साफ हो जाता है और सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर आती हैं, जिससे रोगाणु समाप्त हो जाते हैं और मौसम स्वास्थ्य के लिए अनुकूल हो जाता है। ताजी हवा, सूर्य की पर्याप्त रोशनी आदि शरीर को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती है। यही कारण है कि कार्तिक मास में सुबह नदी स्नान का विशेष महत्व धर्म शास्त्रों में लिखा है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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बुधवार, 19 अक्तूबर 2016

Ajab Gjab interesting News

दुनिया का सबसे पुराना वृक्ष: क्या आप दुनिया के सबसे पुराने वृक्ष की उम्र का अंदाजा लगा सकता है यह कोई 100 या 200 साल पुराना नही बल्कि 9,500 साल पुराना है। स्वीडन में उगे “ओल्ड तजिक्को” नाम के इस वृक्ष की उम्र लगभग साढ़े नौ हजार वर्ष है। इस वृक्ष को भूविज्ञानी कुल्लमन द्वारा खोजा गया है।

कोकरोच डायनासौर से पहले पृथ्वी पर जन्में थे: कोकरोच जो कि हम आम तौर पर अपने घरों में देखते हैं इनका इतिहास मनुष्य ही नहीं बल्कि डायनासौर से भी पुराना है माना जाता है कि कोकरोच डायनासौर से लगभग 12 करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जन्में थे ये वर्ष कितने अधिक हैं इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि मनुष्य का सम्पूर्ण ज्ञात इतिहास मात्र कुछ लाख वर्ष का ही है।

दुनिया के हर 100 में 2 लोगों की आँखे हरी हैं: हो सकता है आपने कभी किसी व्यक्ति की आँखे हरी देखी होंगी यद्दपि ज्यादातर ये काली या भूरी होती हैं लेकिन विश्व की जनसँख्या में यदि प्रतिशत निकाला जाए तो दुनिया के 2 प्रतिशत लोग हरी आँखों के साथ जन्म लेते हैं।

कैंडी क्रश का पागलपन: कैंडी क्रश नामक गेम आपने खेली हो या ना खेली हो लेकिन आपने इसका नाम अवश्य सूना होगा। फेसबुक पर इस गेम के आने वाले निवेदन से लगभग सभी फेसबुक उपयोगकर्ता परेशान रहते हैं लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि वर्तमान में कैंडी क्रश खेलने वाले लोगों  की संख्या कनाडा की कुल जनसँख्या से भी ज्यादा है।

चीता की रफ़्तार: चीता के बारे में रोचक यह है कि वह रफ़्तार बहुत तेजी से पकड़ता है यदि वह खड़ा है तो उसकी रफ़्तार शून्य है लेकिन मात्र तीन सेकंड के समय में चीता 60 मील प्रति घंटे की रफ़्तार पकड़ सकता है। औसत वाहन चीते से तेज दौड़ सकते हैं लेकिन उन्हें यह रफ्तार पकड़ने में चीते से ज्यादा समय लगेगा।

आपके सिर में बालों की संख्या: आमतौर पर कहावतें बनाई जाती हैं कि सिर के बाल तथा अन्तरिक्ष में तारों को गिनना नामुमकिन है लेकिन ऐसा नही है तारों को गिनना भले ही नामुमकिन हो बालों को गिनना मुमकिन है यदि आप झड़ रहे बालों की समस्या से परेशान नही हैं तो आपके सिर में करीब 85,000 से लेकर 1,50,000 बाल हैं यदि आपको संदेह हैं तो बेशक आप इन्हें गिन सकते हैं।

एक मात्र स्तनपायी जो कूद नही सकता: आपने लगभग प्रत्येक जानवर को कूदते हुए देखा होगा लेकिन क्या कभी आपने हाथी को कूदते हुए देखा है? नही ना... आपको शायद जानकर हैरानी हो कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले स्तनपायी जीवों में हाथी ही एक ऐसा स्तनपायी जो कूद नही सकता। अपनी मस्तिष्क की जिज्ञासा शांत करने हेतु आप स्वयं जाकर देख सकते हैं।

पृथ्वी में छेद कर आर-पार निकलना: यद्दपि वास्तव में यह सम्भव नही है परन्तु यदि आप पृथ्वी के आर-पार छेद कर सकने में सक्षम हो जाते हैं तब एक तरफ से अन्दर जाकर गुरुत्वाकर्षण बल की गति से चलकर दूसरी तरफ निकलने में आपको 42 मिनट (लगभग पौने घंटे) का समय लगेगा और सम्भव है कि आपको ऑक्सीजन लेकर या यात्रा करणी पड़े।

महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेटर बनने से पूर्व फुटबॉल गोलकीपर थे: आज के समय में भारतीय क्रिकेट के महत्वपूर्ण व सफल कप्तान के रूप में पहचान बनाने वाले महेंद्र सिंह धोनी वास्तव में फुटबॉल गोलकीपर थे फुटबॉल के कोच ने उन्हें क्रिकेट में भेजा उसके बाद धोनी अपनी ही विकेट-कीपिंग से वे प्रभावित हो गए तथा उनके सफल क्रिकेट करियर की शुरुआत हुई।

महिलाओं द्वारा कपड़ों का चयन करने में लगने वाला समय: महिलाएं कपड़ों के चयन में बहुत अधिक सोच विचार करती हैं। शोध के अनुसार ये सामने आया कि औसत महिलाएं अपने बेशकीमती जीवन का एक वर्ष मात्र अपने कपड़ों का चयन करने में गुज़ार देती हैं। इसके उल्ट अपने जीवन का लगभग इतना ही बेशकीमती समय पुरुष उन्हें घूरने में बिता देते हैं।

प्रत्येक दिन औसतन 12 नव-बच्चे किसी और माँ-बाप को सौंप दिए जाते हैं: जब किसी अस्पताल में बच्चे का जन्म होता है तब बच्चे को एक निश्चित चिकित्सा क्रिया से गुजरना पड़ता है तत्पश्चात बच्चे को माँ-बाप को सौंपा जाता है कभी कभी इस चिकित्सा क्रिया में बच्चे बदल जाते हैं क्योंकि अस्पताल में एक ही समय में एक से ज्यादा बच्चों का जन्म होता है। माँ बाप भी बच्चे को स्वीकार कर लेते हैं क्योंकि उन्हें पता ही नही होता कि उनका बच्चा कैसा दिखाई देता है। इसी उलझन में यह पाया गया कि विश्व में प्रत्येक दिन लगभग 12 बच्चे दुसरे माँ-बाप को दे दिए जाते हैं। यह गलती ना हो इसके लिए बहुत से आधुनिक तरीके अपनाए जाने लगे हैं जैसे: बच्चे के हाथ में माता-पिता के नाम की एक चिट लटकाना।

हाथों के नाखून; पैरों के नाखूनों की अपेक्षा अधिक तेजी से बढ़ते हैं: क्या अपने यह कभी महसूस किया है कि आप हाथों के नाखून हर हफ्ते काटते होंगे जबकि पैरों के नाखून एक हफ्ते में काटने लायक नही बढ़ते वास्तव में यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि हाथों के नाखून पैरों के नाखूनों की अपेक्षा चार गुना अधिक तेजी से बढ़ते हैं।

घड़ी विज्ञापनों में 10 बजकर दस मिनट का समय: यदि आपने कभी गौर किया होगा तो आप देखेंगे कि जब भी कभी घड़ी का विज्ञापन आता है तब घड़ी का समय 10 बजकर 10 मिनट ही दिखाया जाता है। इसके पीछे का कारण यह है कि घड़ी के बीच में निर्माता का नाम छपा होता है तथा 10:10 का समय एक हँसता हुआ काल्पनिक चेहरा बनाता है। इसमें विज्ञापनकर्ताओं का मत है कि 10:10 के समय में लोगों को घड़ी निर्माता हँसता हुआ दिखाई देता है।

जींस पेंट में छोटी जेब होने का कारण: आप जींस पेंट पहनते होंगे या कभी आपने जींस पेंट देखी होगी तो आपने ये ध्यान अवश्य दिया होगा कि पेंट में जेब के ऊपर एक छोटी सी जेब होती है जो अमूमन दायीं तरफ (या दोनों तरफ) होती है। इसका कोई काम नही होता फिर भी यह प्रत्येक जींस में लगाई जाती है। कुछ लोग इसे फैशन का कारण मानते हैं लेकिन ऐसा नही है वास्तव में यह जेब घड़ी डालने के लिए बनाई गई है। क्योंकि जब जींस बनी थी तब हाथ पर बाँधने वाली घड़ी को जेब में डालने का प्रचलन था इसीलिए घड़ी के लिए एक विशेष जेब का प्रबंध किया गया जो आज भी जारी हैं हालाँकि अब इसका इस्तेमाल नही होता क्योंकि घड़ियों का स्थान मोबाइल ने ले लिया है।

पुरुष महिला की शर्ट (कमीज) में अंतर: पुरुषों तथा महिलाओं के लिए बनाई गई शर्ट लगभग एक जैसी होती है एक नज़र में इनमें किसी भी प्रकार का अंतर समझ पाना असंभव प्रतीत होता है लेकिन ऐसा नही है। यदि आप गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि पुरुषों की शर्ट के बटन दायीं तरफ होते हैं जबकि महिलाओं की शर्ट के बटन बायीं तरफ होते हैं इसके पीछे कोई विशेष वैज्ञानिक तथ्य नही है परन्तु माना जाता है कि इसका कारण है महिलाओं को नौकरानियों द्वारा तैयार करने की परम्परा जो प्राचीन समय में प्रचलित थी जिसमें दासियों के हाथ की तरफ से बटन सीधे पड़ते थे जबकि पुरुष स्वयं तैयार होते थे तथा स्वयं अपने बटन बंद करते थे। हालाँकि इस प्रकार के बहुत से कारण प्रचलित हैं परन्तु वास्तव में यह सिर्फ एक पहचान देने के लिए किया गया अंतर माना जाता है।

लेफ्ट-राईट हैंडेड लोगों से सबंधित कुछ तथ्य: सिर्फ मनुष्य ही नही बल्कि कुत्ते और बिल्ली जैसे जानवर भी दायें या बायें हाथ से कार्य करते हैं जैसे: शरीर को खुजलाना। माना जाता है कि दायें हाथ से काम करने वाले व्यक्ति बायें हाथ से काम करने वालों की अपेक्षा लगभग 9 साल ज्यादा जीते हैं तथा इस दुनिया में 100 में से 10 व्यक्ति बायें हाथ से कार्य करते हैं। शोध के अनुसार औसत लेफ्ट हैंडेड लोगों की बुद्धि अधिक तीव्र होती है इसके अतिरिक्त शोध बताते हैं निजी लड़ाई के चलते अधिकतर लेफ्ट हैंडेड लोग उन हथियारों से चोटिल हो जाते हैं जो राईट हैंडेड लोगों के लिए बनाए गए होते हैं।

इन्टरनेट की विशालता: आज के समय में इन्टरनेट इतना विशाल हो चुका है कि यदि आप इन्टरनेट पर उपस्थति प्रत्येक वेबसाइट को मात्र एक मिनट ब्राउज करेंगे तो विश्व की सभी वेबसाइट को खंगालने में आपका ये जीवन प्रयाप्त नही होगा और ना ही इससे अगला जीवन क्योंकि यह कार्य पूर्ण करने के लिए आपको 31 हज़ार वर्ष लगेंगे और ये वर्ष दिन ब दिन बढ़ते ही जा रहे हैं क्योंकि हर रोज़ लाखो की संख्या में वेबसाइट रजिस्टर की जाती हैं। इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति सभी वेबसाइट के सभी पन्ने खंगालने का बीड़ा उठाए तो इसके लिए उसे छ: करोड़ दशक का समय लगेगा। सरल शब्दों में इन्टनेट ज्ञान का एक विशाल सागर बन चुका है और यह पृष्ठ जिसे आप पढ़ रहें हैं उसी सागर की एक बूँद है।

मनुष्य के मस्तिष्क की विशालता: मनुष्य का मस्तिष्क कोई सामान्य वस्तु नही है आप इन्टरनेट पर मुफ्त में जानकारी देने वाले विकिपीडिया के बारे में तो जानते ही होंगे विकिपीडिया पर आज लगभग प्रत्येक जानकारी अलग अलग भाषाओँ में मौजूद है आप अपने दिमाग की क्षमता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी से पाँच गुना अधिक जानकारी संजोने की क्षमता आपके मस्तिष्क में है।

मरने के पश्चात आपके शरीर में पनप रहा जीवन: जब मनुष्य की मृत्यु हो जाती है तत्पश्चात भी वह एंजाइम जिन्होंने मनुष्य द्वारा खाया गया भोजन पचाया था जीवित रहते हैं तथा जब व्यक्ति को मरे 3 दिन हो जातें है तब ये एंजाइम स्वयं के जीवन हेतु मनुष्य के शरीर को ही खाना शुरू कर देते हैं।

हम शाम के मुकाबले सुबह लगभग 1 सेंटी मीटर अधिक लम्बे होते हैं: हमारा शरीर हड्डियों से बना है जो एक दुसरे के ऊपर टिक्की हुई हैं तथा इसके आलावा ये एक दुसरे के बीच में इतना फ़ासला बनाए रखती हैं ताकि हिलते हुए पहली हड्डी का प्रभाव दूसरी हड्डी पर ना आए। सारा दिन चलने से व भार उठाने से हड्डियाँ एक दुसरे से सटना शुरू कर देती हैं जो कि एक नगण्य सा अंतर होता है परन्तु सभी हड्डियों को मिलाकर यह अन्तर लगभग 1 सेंटीमीटर के लगभग हो जाता है। इसीलिए सुबह की अपेक्षा शाम को व्यक्ति की लम्बाई लगभग एक सेंटीमीटर कम हो जाती है। तत्पश्चात रात भर सोने व सुबह अंगडाई लेने से हड्डियाँ पुन: अपनी सामान्य अवस्था में आ जाती हैं।

तारे वास्तव में वहाँ है ही नही जहाँ ये हमें दिखाई देते हैं: रात में हम तारों को देखते हैं तथा बचपन से देखते आ रहे हैं इनकी अवस्था पर हमें विशवास कर लिया है परन्तु वास्तव में तारे उस स्थान पर होते ही नही जहाँ ये हमें दिखाई देते हैं ये तो वह आभासी प्रकाश है जो हज़ारों वर्ष पूर्व उस तारे ने छोड़ा था तथा आज हमारी आँखों की रेटिना तक पहुँच पाया है। समझने के लिए उदाहरण लीजिए: मान लीजिए एक तारा हमसे 50 प्रकाश वर्ष दूर है तथा भारत की आजादी के वर्ष 1947 को उसमें एक भयंकर विस्फोट हुआ तथा चमक उत्पन्न हुई अब इस चमक से उत्पन्न प्रकाश ने 1947 में तारे के पास से चलना शुरू किया तो लगभग पचास वर्ष पश्चात् यह चमक हमें वर्ष 1997 में दिखाई देगी।

पृथ्वी का वायुमंडल जिसमें हम रहते हैं उसका विस्तार: पृथ्वी के गुरुवाकर्षण बल के कारण ही पृथ्वी के साथ इसका वायुमंडल जैसे कि हवा, गैसें, बादल इत्यादि जुड़े हुए हैं लेकिन आपको ये जानकार हैरानी होगी कि यदि हम पृथ्वी को एक सेब मान ले तो पृथ्वी के वायुमंडल का विस्तार मात्र उसके छिलके की मोटाई के समान होगा। इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि सेब जैसी पृथ्वी पर मनुष्य जैसे जीव को देखने के लिए अत्यधिक शक्तिशाली माइक्रोस्कोप की आवश्यकता पड़ेगी। और तब भी आप भाग्यशाली ही होंगे यदि आपने मनुष्य को देख लिया।

दुनिया की पहली फोटो लेने में लगा था 8 घंटे का समय: दुनिया का जो सबसे पहला कैमरा था उससे यदि आपको अपनी फोटो खिंचवानी थी तो आपको 8 घंटे उसके सामने बैठना पड़ता। यद्दपि यह नामुमकिन जैसा लगता है क्योंकि एक व्यक्ति आठ घंटे तक एक ही मुद्रा में नही बैठे सकता इसीलिए दुनिया की पहली फोटो गर्मियों के मौसम में बिल्डिंग्स तथा आसमान की खिंची गई थी यह इतनी साफ़ नही थी लेकिन प्रथम बार 1826 में फ्रांस के जोसफ नेइप्स द्वारा खिंची गई इस फोटो को खिंच कर जोसफ को जादू जैसा महसूस हुआ कि कैसे सामने का एक नज़ारा बिना किसी कलम कागज़ के हू ब हू पृष्ठ पर उतारा जा सकता है। वर्तमान में यही समय घटकर बहुत ही कम रह गया है क्योंकि आज आप एक सेकंड में 20 हज़ार के करीब फोटो खींच सकते हैं।

उँगलियों के निशान: आप ये तो जानते ही होंगे कि हर इंसान की उँगलियों के निशान अलग अलग होते हैं यहाँ तक कि यदि दो जुड़वाँ भाई हैं जिनकी शक्ल एक दुसरे से शत प्रतिशत मिलती है की उँगलियों के निशान भी अलग अलग होते हैं। मनुष्य की उँगलियों के साथ साथ मनुष्य की जीभ के निशान भी अद्वितीय होते हैं ऐसे ही जानवरों में भी होता है कुत्ते के नाक पर बने निशान भी किसी अन्य से नही मिलते। मनुष्य की उँगलियों के निशान मिटाना असंभव होता है हो सकता है कि आप कोई ऐसा काम कर रहे हो जिसमें आपके हाथ घिसावट करते हैं जैसे कि बर्तन साफ़ करना इत्यादि में आपकी उँगलियों के निशान कुछ समय के लिए मिट सकते हैं लेकिन जब आप यह काम छोड़ेंगे ये पुन: उभर कर आपकी उँगलियों पर आ जाएंगे। ये निशान इंसान का पीछा कभी नही छोड़ते यदि कोई अपराधी तेज़ाब या जलाकर भी इन्हें मिटाना चाहे तब भी कुछ दिनों बाद ये पुन: उभर आते हैं।

शहद हजारों साल बाद भी खराब नही होता: शहद जो कि मधुमक्खी द्वारा पचाया गया व एकत्रित किया गया उनका अपना भोजन होता है इंसान के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है तथा महंगा भी। इसीलिए ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन आमदनी का एक स्त्रोत है। पर क्या आप जानते हैं कि हज़ारों वर्ष पश्चात भी शहद खराब नही होता यह तथ्य उस समय सच साबित हो गया जब इजिप्ट के पिरामिडों में एक बादशाह (फैरो) की कब्र से शहद निकला जो कि हजारों साल पुराना था जब यह शहद खोजी वैज्ञानिको द्वारा चखा गया तो उन्होंने पाया कि इसके स्वाद में किसी भी तरह का कोई अन्तर नही था यद्दपि वर्षो तक पड़ा रहने के कारण यह ठोस हो गया था तथा इसे गर्म करने की आवश्यकता थी।

पेन्सिल की लिखने की क्षमता: आप जो पेन्सिल प्रयोग करते हैं उनमें से औसतन की लम्बाई एक समान होती है तथा बीच में एक लैड होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यदि आप पेन्सिल से एक विशाल कागज़ पर सीधी रेखा खींचेंगे तो इसकी लम्बाई लगभग 35 किलो मीटर होगी जो कि भारत के कुछ जिलों के मध्य बीच दूरी के समान है। इसके अतिरिक्त यदि अंग्रेजी के शब्दों में इसे गिना जाए तो लगभग 50 हजार अंग्रेजी शब्द लिख पाने की क्षमता आपकी पेन्सिल की लैड में होती है।

तित्ल्लियाँ अपने पैरों से स्वाद चखती हैं: तितलियों को अपने भोजन या फूल इत्यादि के रस का स्वाद महसूस करने के लिए सिर्फ उस पर खड़ा होना होता है क्योंकि उनकी स्वाद महसूस करने क्षमता उनके पैरों में होती है यही कारण है कि जब आप ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि अक्सर तितलियाँ फूलों पर बैठती हैं तथा उड़ जाती है फिर अन्य फूल बैठती हैं तथा उड़ जाती है जब तक कि उन्हें अपनी चाह के अनुसार फूल नही मिल जाता दरअसल वे अलग अलग फूलों पर खड़ी होकर उनका स्वाद देखती हैं। जब उन्हें किसी फूल का स्वाद पसंद आता है तभी वे उसका रस चूसती हैं। इसी प्रकार ये अन्य भोजन के साथ करती हैं।

अल्बर्ट आइंस्टीन के अंतिम शब्द: किसी भी बुद्धिजीवी के जीवन के अंतिम शब्द सदैव प्रेरणा का स्त्रोत बनते रहे हैं इसी तरह अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी मरने से पूर्व कुछ अंतिम शब्द कहे थे परन्तु दुर्भाग्य से किसी ने भी उनके वे शब्द नही सुने सिवाय एक नर्स के जो उनके अंतिम समय में उनके पास खड़ी थी और दुर्भाग्य की बात ये थी कि उस नर्स को जर्मन नही आती थी जिस कारण उनके वे अंतिम शब्द राज़ बन गए।

हंस का प्रेम में प्राण देना: हंस जो कि सफेद रंग का एक पक्षी होता है तथा विवेक और शांत स्वभाव का प्रतीक है भी मनुष्य की भांति अपने प्रेमी की मृत्यु से दुखी होता है। कोई भी हंस अपने जीवन में दूसरा जोड़ा नही बनाता ये ही कारण है कि हंस के जोड़े में से किसी एक के मर जाने के पश्चात दूसरा साथी भी दुःख में अपने प्राण त्याग देता है।

सोने तथा याददास्त में सबंध: सारा दिन काम करते रहना, कुछ ना कुछ पढ़ते रहना या कोई जानकारी हासिल करते रहना ही तेज मस्तिष्क का आधार नही है बल्कि इसके लिए आपको अपने दिमाग को आराम देना होगा। विभिन्न प्रकार के शोध बताते हैं कि जब हम निन्द्राव्स्था में होते हैं तभी हमारा मस्तिष्क ज्ञान को हमारे मस्तिष्क में संजोने का काम करता है तथा यदि हम कुछ पढने के बाद कुछ मिनट का आराम करें या नींद ले सकें तो हम किसी भी जानकारी अधिक स्पष्टता से याद रख सकते हैं व जरूरत करने पर इस्तेमाल कर सकते हैं। इतना ही नही सोना व्यक्ति की रचनात्मकता (क्रिएटिविटी) को भी बढ़ाता है।

बच्चे/ व्यस्क व्यक्ति दोनों की हड्डियों की संख्या में अंतर: मनुष्य के जन्म के समय शरीर में 270 हड्डियाँ होती हैं जो व्यक्ति के व्यस्क होते होते घटकर 206 रह जाती हैं। वास्तव में शरीर से किसी प्रकार की हड्डी समाप्त नही होती बल्कि कुछ हडियाँ आपस में जुड़ जाती हैं ये ही कारण है कि व्यस्क व्यक्ति की अपेक्षा एक शिशु का शरीर अधिक लचीला होता है।

मच्छर द्वारा चूसा गया रक्त: जब कोई मादा मच्छर रक्त चूसती है तो इसकी अधिक से अधिक मात्रा उसके अपने शरीर के भार से लगभग डेढ़ गुना अधिक हो सकती है। अर्थात मच्छर द्वारा चूसे गए खून का भार मिलाकर मच्छर का भार पहले से ढ़ाई गुना बढ़ जाता है ये ही कारण है कि रक्त चूसने के बाद इसे तीव्रता से उड़ने में परेशानी होती है इसी कारण रक्त चूस चुके मच्छर को आसानी से मारा जा सकता है।

इन्सान के मरने पर सबसे पहले व सबसे बाद में नष्ट होने वाली ज्ञानेन्द्रियाँ:मनुष्य की मृत्यु होते ही उसकी सभी ज्ञानेन्द्रियाँ एक साथ नष्ट नही होती बल्कि सभी के नष्ट होने में कुछ समय लगता है। सर्वप्रथम मनुष्य की दृष्टि व छूअन को महसूस करने की क्षमता नष्ट होती है अर्थात मरने की क्रिया में शरीर के सून पड़ने जैसी स्थिति होती है तथा कुछ भी दिखाई नही देता। इन सब के विपरीत सुनने की क्षमता सबसे अंत में नष्ट होती है इसी कारण मृत्यु के बाद भी कुछ समय तक मनुष्य को सुनाई देता है।
विद्यालय की बसों का रंग पीला होने का कारण: आपने देखा होगा कि विद्यालय की बसों का रंग ज्यादातर पीला होता है यद्दपि ज्यादातर बुद्धिजीवियों को इसका कारण पता होगा लेकिन फिर भी आपको बता दें कि मनुष्य का मस्तिष्क पीले रंग के प्रति अधिक संवेदनशील होता है तथा छोटे बच्चे जो कि ध्यान केन्द्रित कर पाने में इतने सक्षम नही होते के लिए बसों का रंग पीला होता है ताकि बच्चों का मस्तिष्क उनका ध्यान बस की ओर केन्द्रित करने में सहायता कर सके।

बिल गेट्स की दौलत: दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार माइक्रोसॉफ्ट के मालिक व संस्थापक बिल गेट्स के पास इतनी दौलत है कि अगर वे रोजाना 10 लाख रूपये भी खर्च करें तो अपनी सारी दौलत को लुटाने के लिए उन्हें 218 वर्ष लगेंगे। जो कि उनके इस जीवन में संभव नही है। यद्दपि यह एक पैमाना मात्र है तथा व्यापार में उठा-पटक के चलते यह सम्पति कम या ज्यादा होती रहती हैं।

उत्तरी कोरिया के 28 हेयर कट: उत्तरी कोरिया के लोगों को 28 हेयर कट के अतिरिक्त किसी भी अन्य तरह का हेयर कट रखने की छूट नही है। वहाँ के लोगों को सरकार द्वारा मंजूर किए गए 28 हेयर कट में से किसी एक को ही चुनना होता है।

प्रकाश की गति: आपसे यदि प्रश्न किया जाए तो कि प्रकाश की गति क्या है तब आप इसका सीधा सा उत्तर 3 लाख किलोमीटर/ सेकंड देंगे यदपि यह सही के लगभग है परन्तु सटीक नही है। वास्तव में प्रकाश की गति 2,99,792 होती है अर्थात 3 लाख से 208 किलोमीटर/सेकंड कम। तथा 208 किलोमीटर/सेकंड की रफ़्तार जिसे हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं वह कुछ ही पलों में हमें संसार के किसी भी कोने तक पहुंचा सकने में सक्षम होती है।

एक कुत्ते के पीछे दो देशों का युद्ध: वर्ष 1925 में एक अजीब घटना घटित हुई जब ग्रीस देश का एक आवारा कुत्ता भटकते-भटकते बुल्गारिया का बॉर्डर पार कर गया। इस घटना को “आवारा कुत्ते के कारण हुआ युद्ध” करार भी दिया जाता है। दरअसल इस कुत्ते के पीछे ग्रीस देश का एक सैनिक दौड़ा व बुल्गारिया की सीमा पार कर गया तथा बुल्गारिया के सैनिक जो कि सीमा पर तैनात थे; ने ग्रीस के उस सैनिक पर गोली चला दी। सैनिक की मृत्यु के बाद दोनों देशों में तनाव की स्थति उत्पन्न हो गई जो युद्ध का कारण बनी।

माचिस से पूर्व हुई थी सिगरेट लाइटर की खोज: माचिस की खोज से पूर्व ही सिगरेट लाइटर की खोज हो चुकी थी ये बात थोड़ी अजीब लग सकती है परन्तु यदि मनुष्य अपने इतिहास का ओर झांक कर देखे तो पता चलता है कि पत्थरों को रगड़ कर आग जलाना इंसान ने सबसे पहले सीखा था। यहीं से लाइटर का उपाय आया अंतर सिर्फ ये था कि पत्थरों से आग जलाते समय मनुष्य सूखी घास इत्यादि को इंधन के रूप में प्रयोग करता था जबकि लाइटर में ठोस इंधन की जगह द्रव इंधन ने ले ली थी इसी कारण लाइटर बनाना माचिस बनाने से ज्यादा सरल था क्योंकि वह क्रिया पहले से ही सीखी जा चुकी थी जिसका बाद में विकास कर ओर सरल बनाया गया। माचिस के विकास के पश्चात महसूस किया गया कि लाइटर की अपेक्षा माचिस से आग जलाना सस्ता व सरल था इसी कारण यह लोकप्रिय हो गया।

छीकने के वैज्ञानिक तथ्य: छीकना एक आम सी क्रिया लगती है परन्तु इससे सबंधित बहुत से ऐसे तथ्य है जो आपको अचंभित कर देंगे सर्वप्रथम छीकने के बाद ईश्वर का नाम लेना जिसकी आज आपको आदत पड़ चुकी है; के पीछे का वैज्ञानिक तथ्य यह है कि छीकते समय आपके दिल की धड़कन एक मिली सेकंड के लिए रूक जाती है तथा फिर से स्वचालित होती है मान्यता है कि इसे एक पूर्ण जन्म के रूप में देखा जाता है। भारतीय समाज में अंधविश्वास घर कर चुके हैं हालाँकि अब आधुनिक समय में अंधविश्वासों का स्तर गिर रहा है परन्तु आज भी बहुत से गाँवों में आप देखेगे कि यदि किसी ने छीक दिया तो कुछ क्षणों तक कोई नया कार्य शुरू नहीं किया जाता क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। यह अंधविश्वास उपरोक्त लिखित वैज्ञानिक तथ्य का ही एक दुष्प्रभाव है जो कि लोगों द्वारा गलत तरीके से लिया गया है। कुछ अन्य वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार यदि आप छींकते समय अपनी आँखे खुली रखने की कोशिश करेंगे तो आपकी आँख का आईबॉल (डेला) तिड़क सकता है इसीलिए छीकते हुए किसी भी प्रकार की असहज कोशिश नही करनी चाहिए क्योंकि छीकते समय वायु बड़ी ही तीव्र गति से बाहर आती है यदि आप इसे रोकने का प्रयत्न करेंगे या बहुत ही अधिक जोर से छीकेंगे तो हो सकता है आप अपनी पसली तुडवा बैठें।

क्या चमगादड़ गुफा से निकलते हुए हमेशा बाएं (लेफ्ट) तरफ मुड़ते हैं: यह प्रश्न आपके मस्तिष्क में भी आया होगा क्योंकि लगभग हर एक रोचक जानकारी से सबंधित पृष्ठ व किताब के पन्नो पर आपको इस प्रश्न का उत्तर हाँ में ही मिला होगा परन्तु अधिकतर बुद्धिजीवी इसे एक मिथक मानते हैं। यह चमगादड़ की कोई विशेष आदत नही होती परन्तु यह अवश्य है कि जब भी कोई चमगादड़ का झुण्ड किसी स्थान से बाहर निकलता है तो वे सभी एक दूसरे के पीछे चलते हैं इसी कारण यदि प्रथम चमगादड़ बाएं तरफ मुड़ी तो लगभग सभी चमगादड़ बाएँ तरफ ही मुडेंगी यह सत्य है। परन्तु गुफा से निकलते समय सदैव बाएँ तरफ ही मुड़ेगी यह सत्य नही है। क्योंकि चमगादड़ किसी भी दिशा में मुड़ सकने व सीधी उड़ सकने में सक्षम होती हैं। इसके अतिरिक्त चमगादड़ के बारे में वैज्ञानिक तथ्य यह है कि यह एक अकेला ऐसा स्तनपायी है जो मात्र रक्त चूस कर अपना पेट भरता है शोध बताते हैं कि 100 चमगादड़ एक वर्ष में 25 गायों का रक्त चूस सकते हैं।

विश्व का सबसे छोटा युद्ध सिर्फ 38 मिनट का था: 27 अगस्त 1986 की सुबह लगभग 9 बजे इंग्लैंड तथा जंजीबार सल्तनत (जो कि एक पूर्वी अफ्रीकन द्वीप था) के मध्य युद्ध हुआ। इस युद्ध का कारण था ब्रिटिश समर्थक सुलतान हमद बिन थुवानी की मृत्यु के पश्चात उसके उत्तराधिकारी के तौर पर सुलतान खालिद बिन के स्थान पर हमद बिन मुहम्मद को उत्तराधिकार दिलाना जो ब्रिटिशों का विश्वास पात्र था। ब्रिटिश नौसेना ने 38 मिनट में ही बिट अल हुकुम पैलेस को नष्ट कर दिया तथा फलस्वरूप जंजीबार को आत्मसमर्पण करना पड़ा।

फेसबुक के प्रथम तीन अकाउंट: फेसबुक के बारे में तो आप सभी जानते होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि फेसबुक पर बने पहले तीन अकाउंट है ही नही। इस पर बना चौथा अकाउंट इसके संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का है। माना जाता है कि प्रथम तीन अकाउंट ठीक नही बने थे जो इसके संस्थापक ने स्वयं के लिए बनाने का प्रयास किया था इसी कारण उन्हें डिलीट कर दिया गया उस समय मार्क को भी नही पता था कि उनकी ये सामान्य सी गलतियाँ आज आप इस पेज के माध्यम से पढ़ रहे होंगे।

फेसबुक की प्रसिद्धि सबंधित तथ्य: फेसबुक वेबसाइट इतनी अधिक प्रसिद्धि को प्राप्त कर चुकी है कि आज विश्व का हर 7 वां व्यक्ति फेसबुक पर आभासी रूप से विद्यमान है। जिनमें महिलाओं का प्रतिशत ज्यादा है। फेसबुक दिन प्रतिदिन और अधिक लोकप्रिय होती जा रही है। इसीलिए आने वाले समय में उपयोगकर्ताओं का प्रतिशत बढेगा। यदि वेबसाइट रैंक चेकर अलेक्सा की माने तो फेसबुक के उपयोग कर्ता देशों में अमेरिका के बाद भारत का स्थान आता है फेसबुक पर 100 में से 10 उपयोगकर्ता भारतीय हैं।

दुनिया का सबसे छोटा देश मात्र 0.2 वर्ग मील का: इटालियन भाषा को आधिकारिक रूप से अपनाने वाला वेटिकन सिटी दुनिया का सबसे छोटा देश है इसका विस्तार आधे वर्ग किलो मीटर में भी नही है 0.44 वर्ग किलोमीटर का यह देश लगभग 872 के करीब लोगों को रहने के लिए स्थान देता है जबकि इनमें से एक भी इस देश का स्थायी नागरिक नही है। मात्र 110 एकड़ में फैले इस देश की मुद्रा यूरो है।

सपनों में आने वाले चेहरे मस्तिष्क नही बनाता: हमारा मस्तिष्क स्वप्न में नया चेहरा नही बना सकता जो भी अजीबो गरीब चेहरे या स्थान आपको अपने सपने में दिखाई देते हैं वो आपके द्वारा जीवन में कभी ना कभी देखे जा चुके होते हैं चाहे वे आपको याद हो या ना हों। सपनों के बारे में एक अजीब बात ये है कि आपको सपने का अंत तो याद रह सकता है लेकिन आपका सपना कहाँ से शुरू हुआ यह कभी याद नही रहेगा।

पर्वतों की ऊँचाई 15000 फीट से ज्यादा होना असंभव है: पृथ्वी पर उपस्थित कोई भी पर्वत कभी भी 15000 मीटर से ऊँचा नही हो सकता क्योंकि इससे अधिक होने पर गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव अत्यधिक हो जाएगा यही कारण है कि विश्व में पर्वत चोटियाँ 14000 से 15000 फीट तक तो होती हैं परन्तु 15 हजार फीट से ज्यादा ऊँची एक भी चोटी नही है।
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