Adsense responsive

शनिवार, 2 जुलाई 2016

ऐसे पंचमुखी बने सभी युगों के हनुमान जी

हनुमान जी इन्हे सभी युगों का मालिक माना जाता है, फिर चाहे वो सतयुग हो या द्वापरयुग। लेकिन कभी सोचा है कि हनुमान जी पंचमुखी कैसे बने, हनुमान जी के पंचमुखी रूप के पीछे भी एक कहानी है।

अहिरावण जिसे रावण का मायावी भाई माना जाता था, जब रावण परास्त होने कि स्थिति में था, तब उसने अपने मायावी भाई का सहारा लिया और रामजी की सेना को निंद्रा में डाल दिया। इस पर जब हनुमान जी राम और लक्ष्मण को पाताल लोक लेने गए तो उनकी भेट उनके मकरपुत्र से हुई। 

मकर पुत्र को परास्त करने के बाद उन्हें पाताल लोक में 5 जले हुए दिए दिखे, जिसे बुझाने पर अहिरावण का नाश होना था। 

इस स्थिति में हनुमान जी ने, उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख। इस रूप को धरकर उन्होंने वे पांचों दीप बुझाए तथा अहिरावण का वध कर राम,लक्ष्मण को उस से मुक्त किया। इस प्रकार हनुमान जी को पंचमुखी कहलाया जाने लगा।
सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

उपरोक्त पोस्ट से सम्बंधित सामान्य ज्ञान की जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

उपचार सम्बंधित घरेलु नुस्खे जानने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

देश दुनिया, समाज, रहन - सहन से सम्बंधित रोचक जानकारियाँ  देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें