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गुरुवार, 16 जून 2016

बच्चों के अच्छे संस्कार और जीवन के लिए ध्यान रखें ये बातें

परिवार का सबसे महत्वपूर्ण भाग हैं बच्चे। जो बच्चे परिवारों में ठीक से पलेंगे, संस्कारी होकर समाज में जाएंगे, वे समाज और राष्ट्र के लिए गौरव बनेंगे। किसी ने ठीक कहा है और हमारे ऋषिमुनि भी यही कहते थे कि बच्चों के साथ कभी-कभी बच्चा होना पड़ता है। अध्यात्म की दृष्टि से बच्चों के लालन-पालन में दो चीजें ध्यान रखनी चाहिए। ये दो चीजें हैं खान-पान। बच्चे क्या खा रहे हैं और क्या पी रहे हैं, इससे उनका व्यक्तित्व बनता है।
कबीर लिख गए हैं कि
जैसा भोजन खाइये, तैसा ही मन होय।
जैसा पानी पीजिये, तैसी बानी होय।।
इसका अर्थ यही है कि जैसा भोजन करोगे, वैसे ही मन का निर्माण होगा और जैसा जल पियोगे, वैसी वाणी होगी।
शुद्ध-सात्विक आहार तथा पवित्र जल से मन और वाणी पवित्र होते हैं। इसी प्रकार जो जैसी संगति करता है, उसका जीवन वैसा ही बन जाता है।
जल शरीर में ऑक्सीजन लेकर जाता है। पानी पीते समय अपने आप यह प्राणायाम की क्रिया बन जाती है। बच्चों को सिखाया जाना चाहिए कि जल हमेशा बैठकर और शांति से पीना चाहिए।
दूरदर्शिता, याददाश्त और चरित्र, खानपान पर निर्भर है। इसलिए बच्चों के साथ उनके स्वाद पर नजर रखनी चाहिए।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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