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मंगलवार, 14 जून 2016

जीवन में मिलती रहेंगी खुशियां, ध्यान रखें ये बातें

आजकल खुश रहने की खूब बातेें की जाती हैं। यह बात सबको समझ में आ चुकी है कि 15-20 साल बाद खुशी जिंदगी के बाजार का सबसे महंगा प्रोडक्ट होगी। जिन्हें खुशी को स्थायी बनाना है, उन्हें शांति का मतलब समझना होगा वरना अस्थायी खुशी तो आसानी से मिलती रहेगी। हमारे ऋषि-मुनियों ने बड़ी सुंदर बात कही है कि खुश रहना है तो बहुत अधिक उठापटक न करते हुए बस, दो काम करो। पहला जब-जो करो, जमकर करो। खुद को शत-प्रतिशत उसमें झोंक दो। यदि नौकरी कर रहे हों तो जमकर सेवक बन जाओ। घर में माता-पिता हों तो शत-प्रतिशत माता-पिता बने रहो। दूसरी बात उन्होंने कही कि जीवन में खुशी साधन-सुविधा, धन-दौलत से ही नहीं मिलती। यह मन में उतार लें कि यदि जीवन में चुनौतियां आएं तो भी खुशी मिल सकती है। चुनौतियां कभी किसी की खत्म नहीं होंगी।
जिस युग में भगवान ने अवतार लिया उन्हें भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बुरा आदमी जब चुनौतियां देता है तो परेशानियां और बढ़ जाती हैं। आपका संबंध किसी से भी हो, भगवान और शैतान सभी में मिल जाएंगे। शैतान का मतलब ही चुनौती है, भगवान का मतलब ही समाधान है। धार्मिक लोग यह गलतफहमी दूर कर लें कि भक्त होने से, भगवान को मानने से चुनौतियां, समस्याएं नहीं आएंगी। आप तब भी दुखी रह सकते हैं और आपको खुश रहने के मंत्र खुद ढूंढ़ने पड़ेंगे। इसलिए यदि खुश रहना है तो जो तैयारियां हमारे ऋषि-मुनियों ने कीं, पीर-पैगंबर और अवतारों ने जो आचरण किया उन्हें हम भी अपना लें। जो भीतर से तैयार है वह स्थायी खुशी पाएगा। जिसकी तैयारी केवल बाहरी है उसके जीवन में खुशी आएगी और जाएगी। खुश रहने के मौके खुद ढूंढ़िए। दूसरों पर आधारित रहकर खुश रहने की तैयारी किसी नए दुख को आमंत्रण होगा।
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