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गुरुवार, 16 जून 2016

इन 4 को तुरंत छोड़ देना चाहिए, नहीं तो पड़ सकते हैं मुसीबत में


हिंदू धर्म ग्रंथों में नैतिक शिक्षा के साथ-साथ लाइफ मैनेजमेंट के अनेक सूत्र भी छिपे हैं। ये ग्रंथ सालों पहले हमारे पूर्वजों ने लिखे थे, लेकिन इसमें बताए गए लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र आज भी प्रासंगिक हैं। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित संक्षिप्त गरुड़ पुराण अंक में भी जीवन प्रबंधन से जुड़े अनेक सूत्र बताए गए हैं।
इस ग्रंथ में ये भी बताया गया है कि किन स्थानों व लोगों को तुरंत छोड़ देना चाहिए, नहीं तो आगे जाकर आप किसी मुसीबत में फंस सकते हैं। आज हम आपको इसी के बारे में बता रहे हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार दुष्टजनों से व्याप्त देश, उपद्रवग्रस्त निवास भूमि, कृपण राजा व मायावी मित्र का परित्याग तुरंत कर देना चाहिए। जानिए ये किस प्रकार हमारे लिए मुसीबत बन सकते हैं-


दुष्टजनों से व्याप्त देश

गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस देश में दुष्ट लोग निवास करते हैं, वो देश तुरंत छोड़ देना चाहिए क्योंकि दुष्ट लोग स्वभाव से लोभी व निष्ठुर होते हैं। ऐसे लोग अपने थोड़े से फायदे के लिए आपका बड़ा नुकसान कर सकते हैं। ऐसे देश में रहने पर आपको जान और माल दोनों का ही नुकसान हो सकता है।

उपद्रवग्रस्त निवास भूमि

उपद्रवग्रस्त निवास भूमि से अर्थ है वह स्थान जहां आए दिन कोई घटना-दुर्घटना होती रहती है। यदि आप ऐसे स्थान पर रहते हैं तो तुरंत ऐसे स्थान को छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर चले जाने चाहिए क्योंकि ऐसे स्थान पर रहना भी खतरे से खाली नहीं है। ऐसे स्थान पर आपके साथ कभी भी कुछ बुरा हो सकता है। अत: उपद्रवग्रस्त निवास भूमि को तुरंत ही छोड़ देने में ही भलाई समझना चाहिए।

कृपण राजा

कृपण यानी कुटिल व दुष्ट। जिस देश का राजा कुटिल हो, वह देश भी तुरंत छोड़ देना चाहिए क्योंकि ऐसा राजा हमेशा अपनी प्रजा के हित से पहले स्वयं का हित साधता है। ऐसी स्थिति में वह कई बार प्रजा विरोधी निर्णय भी ले लेता है, जिसके कारण प्रजा को किसी न किसी रूप में नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे राजा के देश में अराजकता भी फैल सकती है, जिसके कारण सज्जन लोगों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जिस देश में कुटिल राजा का राज हो, उसे तुरंत ही छोड़ देना चाहिए।

मायावी मित्र

मायावी यानी चालाक। इस प्रकार के मित्र सबसे पहले स्वयं के बारे में ही सोचते हैं। ऐसे मित्र अपने निजी स्वार्थ के लिए किसी का नुकसान करने से भी नहीं चूकते। ऐसे लोगों से मित्रता रखने का सबसे बड़ा नुकसान ये हो सकता है कि ज़रुरत पडऩे पर ये आपसे हरसंभव मदद ले सकते हैं, लेकिन जब आपको इनकी मदद की आवश्यकता होती है, उस समय ये आपकी मदद नहीं करते। इसलिए इस प्रकार के मित्रों का त्याग तुरंत कर देने में ही भलाई है।
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