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सोमवार, 2 मई 2016

कौनसे जानवरों को खाना खिलाने से रहती है बरकत

किन जानवरों को खाना खिलाने से रहती है बरकत, ये है रहस्य



सनातन धर्म के कई ग्रंथों में माना गया है कि जानवरो की हरकतों और उनके आचरण का कुछ ना कुछ प्रभाव जरूर होता है। पुराणों में भी इस बारे बहुत कुछ कहा गया है।क्या आप जानते हैं गाय, कुत्ता, कौआ और चींटी क्यों हिंंदू धर्म में महत्वपूर्ण माने गए हैं। इनको अन्न देने से क्या लाभ होगा? आखिर क्या है इसका रहस्य।


चींटी का रहस्य
विश्वभर में चींटियों की लगभग 14000 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। ये 1 मिलीमीटर से लेकर 4 सेंटीमीटर तक की लंबाई की होती हैं।चींटी के बारे में वैज्ञानिकों ने कई रहस्य उजागर किए हैं। चींटियां आपस में बातचीत करती हैं, वे नगर बनाती हैं और भंडारण करना जानती हैं। हमारे इंजीनियरों से कहीं ज्यादा बेहतर होती हैं ‍चींटियां। चींटियों का नेटवर्क दुनिया के अन्य नेटवर्क्स से कहीं बेहतर होता है। ये मिलकर एक पहाड़ को काटने की क्षमता रखती हैं। चींटियां शहर को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। वे पेड़ और झाड़ी आदि के आसपास मरे हुए छोटे-छोटे जीवों को खाकर उन्हें खत्म करती हैं।

साथ ही, गंदगी को दूर कर, उनके द्वारा हो सकने वाली बीमारी के भय को खत्म करती हैं। चींटियों को आटा डालने की परंपरा प्राचीनकाल से ही चली आ रही है। चींटियों को चीनी मिला आटा डालते रहने से व्यक्ति हर तरह के बंधन से मुक्त हो जाता है। हजारों चींटियों को रोजाना भोजन देने से चींटियां उस व्यक्ति को पहचानकर उसके लिए अच्छे भाव रखने लगती हैं और उसको वे दुआ देने लगती हैं। चींटियों की दुआ का असर आपको हर संकट से बचा सकता है।

चीटियों के शकुन
- लाल चींटियों की कतार मुंह में अंडे दबाए निकलते देखना शुभ है। सारा दिन शुभ और सुखद बना रहता है।
- जो चींटी को आटा देते हैं और छोटी-छोटी चिड़ियों को चावल देते हैं, वे वैकुंठ जाते हैं।
- कर्ज से परेशान लोग चींटियों को चीनी और आटा डालें। ऐसा करने पर कर्ज जल्दी खत्म हो जाता है।


गाय का रहस्य
गाय को हिंदू धर्म में सबसे पूजनीय पशु माना गया है। दरअसल, मान्यता के अनुसार 84 लाख योनियों का सफर करके आत्मा अंतिम योनि के रूप में गाय बनती है। गाय लाखों योनियों का वह पड़ाव है, जहां आत्मा विश्राम करके आगे की यात्रा शुरू करती है।

गाय के शकुन
- गाय का कोई अपशकुन नहीं होता। जिस जमीन पर मकान बनाना हो, वहां 15 दिन के लिए गाय-बछड़ा बांधने से वह जगह पवित्र हो जाती है। भू-भाग से बहुत-सी आसुरी शक्तियों का नाश हो जाता है।
- गाय में सकारात्मक ऊर्जा का भंडार होता है।
- गाय का रास्ता रोकना शुभ कहा गया है।
- गाय-बछड़े का एक साथ दिखना सफलता का प्रतीक है।
- घर के आसपास गाय होने का मतलब है कि आप सभी तरह के संकटों से दूर रहकर सुख और समृद्धिपूर्वक जीवन जी रहे हैं।
- गाय के पास जाने से ही संक्रामक रोग कफ, सर्दी-खांसी व जुकाम खत्म हो जाता है।
- अचानक गाय का पूंछ मार देना भी शुभ है। काली चितकबरी गाय का ऐसा करना तो और भी शुभ कहा गया है।
- पंचगव्य कई रोगों में लाभदायक है। पंचगव्य का निर्माण गाय के दूध, दही, घी, मूत्र, गोबर द्वारा किया जाता है। पंचगव्य से शरीर की रोग निरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगों को दूर किया जाता है। ऐसा कोई रोग नहीं है जिसका इलाज पंचगव्य से न किया जा सके।


कुत्ते का रहस्य
कुत्ते को भगवान भैरव का सेवक माना जाता है। कुत्ते को भोजन देने से वे प्रसन्न होते हैं और हर तरह के आकस्मिक संकटों से भक्त की रक्षा करते हैं। मान्यता है कि कुत्ते को प्रसन्न रखने से वो आपके आसपास यमदूत को भी नहीं फटकने देता है। कुत्ते को देखकर हर तरह की आत्माएं दूर भागने लगती हैं। दरअसल, कुत्ता एक ऐसा प्राणी है, जो भविष्य में होने वाली घटनाओं और ईथर माध्यम (सूक्ष्म जगत) की आत्माओं को देखने की क्षमता रखता है। कुत्ता कई किलोमीटर तक की गंध सूंघ सकता है। इसलिए कुत्ते को एक रहस्यमय प्राणी माना गया है।


कुत्ते से जुड़े शकुन
कुत्ते के भौंकने और रोने को अपशकुन माना जाता है। उसके भौंकने के कई कारण होते हैं उसी तरह उसके रोने के भी कई कारण होते हैं, लेकिन अधिकतर लोग भौंकने या रोने का कारण नकारात्मक ही लेते हैं।
- शकुन शास्त्र के अनुसार कुत्ते का घर के चारों ओर उछल कूद करना अपशकुन या अद्‍भुत घटना कहा गया है।
- सूत्र-ग्रंथों में भी कुत्ते को अपवित्र माना गया है। इसके स्पर्श व दृष्टि से भोजन अपवित्र हो जाता है। इस धारणा का कारण भी कुत्ता का यम से संबंधित होना है।
- शुभ काम के समय यदि कुत्ता रास्ता रोकता है तो विषमता और अनिश्चय प्रकट होते हैं।
- कुत्ते को रोजाना भोजन देने से जहां दुश्मनों का डर मिट जाता है।
- यदि संतान की प्राप्ति नहीं हो रही हो तो काले कुत्ते को पालने से संतान की प्राप्ति होती है।
- ज्योतिषी के अनुसार केतु का प्रतीक है कुत्ता। कुत्ता पालने या कुत्ते की सेवा करने से केतु का अशुभ प्रभाव खत्म हो जाता है।


कौए का रहस्य
पुराणों की कथा के अनुसार इस पक्षी ने अमृत का स्वाद चख लिया था। इसलिए मान्यता हैँ इस पक्षी की कभी स्वाभाविक मृत्यु नहीं होती। बीमारी और वृद्धावस्था से भी इसकी मौत नहीं होती है। इसकी मृत्यु आकस्मिक रूप से ही होती है। जिस दिन किसी कौए की मृत्यु हो जाती है उस दिन उसका कोई साथी भोजन नहीं करता है। कौआ अकेले में भी भोजन कभी नहीं खाता, वह किसी साथी के साथ ही मिल-बांटकर भोजन ग्रहण करता है।कौए को भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पहले से ही आभास हो जाता है।

कौए के शकुन
- शनि को प्रसन्न करना हो तो कौवों को भोजन कराना चाहिए।
- माना जाता है घर की मुंडेर पर कौवा बोले तो मेहमान जरूर आते हैं।
- कौवा घर की उत्तर दिशा में बोले तो घर में लक्ष्मी आती है।
- पश्चिम दिशा में बोले तो मेहमान आते हैं।
- पूर्व में बोले तो शुभ समाचार आता है।
- दक्षिण दिशा में बोले तो बुरा समाचार आता है।
- कौए को भोजन कराने से शत्रु का नाश होता।

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