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मंगलवार, 3 मई 2016

10 भारतीय परंपराएं

10 भारतीय परंपराएं जो अनूठी होने के साथ उपयोगी भी हैं


भारत अपने आप में एक अनूठा देश है जहां हर चीज को धर्म और समाज के साथ जोड़ दिया गया है। हालांकि ऊपर से देखने पर इनका कोई विशेष महत्व नहीं दिखाई पड़ता परन्तु सूक्ष्म रूप से ये हमें मानसिक, शारीरिक तथा आध्यात्मिक रूप से प्रभावित करते हैं। इसी कारण से हमारे पूर्वजों ने कुछ ऐसे धार्मिक नियम बनाएं जो सामाजिक रूप से समाज में उपयोगी तो थे ही, साथ में हमारे शरीर पर भी उनका अच्छा असर होता है। आइए जानते हैं ऐसी ही 10 परम्पराओं के बारे में...

पुरुषों के सिर पर चोटी क्यों

यदि आप यह मानते हैं कि सिर्फ भारतीय पुरुष ही चोटी रखते हैं तो सबसे पहले यह जान लें कि अन्य एशियाई देशों यथा चीन, कोरिया तथा जापान में भी पुरुषों के सिर पर चोटी रखने की परंपरा है। इसके पीछे भी एक वैज्ञानिक कारण बताया जाता है। सुश्रुत ऋषि के अनुसार सिर हमारे सिर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां सहस्त्रार चक्र में शरीर की सभी नसें आकर मिलती है जिसे ब्रह्मरंध्र भी माना गया है। इसी ब्रह्मरंध्र को जागृत करने के लिए पुरुषों में शिखा बंधने की परंपरा शुरू हुई। शिखा रखने से मस्तिष्क का यह हिस्सा सक्रिय हो जाता है और हमारी शक्तियों को बढ़ा देता है।

भारतीय व्रत क्यों करते हैं

आयुर्वेद में बताया गया है कि हमारा शरीर प्रकृति द्वारा बनाई गई स्वसंचालित मशीन है जो 24 घंटे, सातों दिन मृत्यु तक लगातार बिना रूके काम करती रहती है। हमारा पाचन संस्थान भी इसी का एक हिस्सा है। लगातार भोजन करने और उसे पचाने से हमारे पाचन संस्थान पर दबाव पड़ता है जिससे उसमें टॉक्सिक पदार्थ पैदा हो जाते हैं। सप्ताह में एक दिन व्रत करने पर हमारा पेट स्वयं ही इन पदार्थों को बाहर निकाल देता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार नियमित रूप से व्रत करने के कई फायदे हैं, शोध के अनुसार व्रत करने से कैंसर, कार्डियोवस्कुलर डिजीडेज, डायबिटीज, पाचन संबंधी बीमारियां दूर रहती हैं।

भारतीय व्रत क्यों करते हैं

आयुर्वेद में बताया गया है कि हमारा शरीर प्रकृति द्वारा बनाई गई स्वसंचालित मशीन है जो 24 घंटे, सातों दिन मृत्यु तक लगातार बिना रूके काम करती रहती है। हमारा पाचन संस्थान भी इसी का एक हिस्सा है। लगातार भोजन करने और उसे पचाने से हमारे पाचन संस्थान पर दबाव पड़ता है जिससे उसमें टॉक्सिक पदार्थ पैदा हो जाते हैं। सप्ताह में एक दिन व्रत करने पर हमारा पेट स्वयं ही इन पदार्थों को बाहर निकाल देता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार नियमित रूप से व्रत करने के कई फायदे हैं, शोध के अनुसार व्रत करने से कैंसर, कार्डियोवस्कुलर डिजीडेज, डायबिटीज, पाचन संबंधी बीमारियां दूर रहती हैं।

भारतीय व्रत क्यों करते हैं

आयुर्वेद में बताया गया है कि हमारा शरीर प्रकृति द्वारा बनाई गई स्वसंचालित मशीन है जो 24 घंटे, सातों दिन मृत्यु तक लगातार बिना रूके काम करती रहती है। हमारा पाचन संस्थान भी इसी का एक हिस्सा है। लगातार भोजन करने और उसे पचाने से हमारे पाचन संस्थान पर दबाव पड़ता है जिससे उसमें टॉक्सिक पदार्थ पैदा हो जाते हैं। सप्ताह में एक दिन व्रत करने पर हमारा पेट स्वयं ही इन पदार्थों को बाहर निकाल देता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार नियमित रूप से व्रत करने के कई फायदे हैं, शोध के अनुसार व्रत करने से कैंसर, कार्डियोवस्कुलर डिजीडेज, डायबिटीज, पाचन संबंधी बीमारियां दूर रहती हैं।


भारतीय व्रत क्यों करते हैं

आयुर्वेद में बताया गया है कि हमारा शरीर प्रकृति द्वारा बनाई गई स्वसंचालित मशीन है जो 24 घंटे, सातों दिन मृत्यु तक लगातार बिना रूके काम करती रहती है। हमारा पाचन संस्थान भी इसी का एक हिस्सा है। लगातार भोजन करने और उसे पचाने से हमारे पाचन संस्थान पर दबाव पड़ता है जिससे उसमें टॉक्सिक पदार्थ पैदा हो जाते हैं। सप्ताह में एक दिन व्रत करने पर हमारा पेट स्वयं ही इन पदार्थों को बाहर निकाल देता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार नियमित रूप से व्रत करने के कई फायदे हैं, शोध के अनुसार व्रत करने से कैंसर, कार्डियोवस्कुलर डिजीडेज, डायबिटीज, पाचन संबंधी बीमारियां दूर रहती हैं।

हम पीपल की पूजा क्यों करते हैं

यदि उपयोग की दृष्टि पीपल का पेड़ आम व्यक्ति के लिए साधारण हो सकता है परन्तु आयुर्वेद के अनुसार इसका दवाईयों में बहुत प्रयोग होता है। परन्तु पीपल का पेड़ ही एक ऐसा पेड़ है जो रात में भी ऑक्सीजन का निर्माण करता है। पीपल के इसी गुण के चलते हिंदू इसे भगवानस्वरूप मानते हैं तथा इसकी पूजा करते हैं।

हम पीपल की पूजा क्यों करते हैं

यदि उपयोग की दृष्टि पीपल का पेड़ आम व्यक्ति के लिए साधारण हो सकता है परन्तु आयुर्वेद के अनुसार इसका दवाईयों में बहुत प्रयोग होता है। परन्तु पीपल का पेड़ ही एक ऐसा पेड़ है जो रात में भी ऑक्सीजन का निर्माण करता है। पीपल के इसी गुण के चलते हिंदू इसे भगवानस्वरूप मानते हैं तथा इसकी पूजा करते हैं।

हम नाक और कान क्यों छिदवाते हैं

भारतीय महिलाओं में प्रचलित इस परंपरा का संबंध पूरी तरह से शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। भारतीय चिकित्साशास्त्रियों के अनुसार कान और नाक की कुछ नसों का सीधे दिमाग के सोचने वाले प्रतिक्रिया करने वाले भाग से संबंध होता है। नाक-कान छिदवाने से दिमांग की इन नसों पर दबाव पड़ता है जिससे मस्तिष्क की अतिसक्रियता समाप्त होकर नियंत्रण में आती है।


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