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शनिवार, 19 मार्च 2016

भारत के इस हिस्से में नवरात्रि नहीं, होली पर होती है रामलीला



भारत के इस हिस्से में नवरात्रि नहीं, होली पर होती है रामलीला





उत्तर प्रदेश के बरेली महानगर के बीचोंबीच अवस्थित मोहल्ला बडी बमनपुरी में होली के इस मौसम में डेढ सौ साल से फाल्गुन शुक्ल नवमी से आयोजित की जाने वाली एक अनोखी रामलीला आजकल श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बनी हुई है। मुस्लिम संतों के सक्रिय सहयोग और समर्थन से 1861 में स्थानीय नागरिकों ने होली के बढ़ते हुड़दंग को रोकने और उसे एक धार्मिक माहौल देने के लिये यह रामलीला शुरू की थी। यह रामलीला हर साल फाल्गुन शुक्ल नवमी को प्रारम्भ होकर चैत्र कृष्ण द्वादशी तक आयोजित की जाती है।



रामलीला के दौरान निकलती है भगवान राम की बारात

इस रामलीला के दौरान खास होली के दिन शहर से होकर भगवान श्रीराम की बारात निकाली जाती है। बारात के साथ ठेलों पर रंग भरे ड्रम रहते हैं जिनसे लोग एक दूसरे को सराबोर करते चलते हैं। संत तुलसीदास कृत रामचरित मानस को आधार बनाकर शुरू की गई 18 दिन तक चलने वाली इस रामलीला के दौरान खरदूषण, मेघनाद और कुंभकर्ण के वध और पुतलादहन के बाद कृष्ण पक्ष की दशमी को रावण वध के साथ दशहरा आयोजित किया जाता है। बाद में श्रीराम की शोभायात्रा भरत मिलाप और श्रीराम राजतिलक के बाद लीला सम्पन्न होती है।



इस साल पताका पूजन और राम जन्म के साथ आज शुरू हो रही है। इसमें 22 मार्च को धनुष यज्ञ 23 मार्च को राम बारात और 24 मार्च को नृसिंह भगवान की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस अनोखी रामलीला में रावण वध एवं दशहरा दो अप्रैल को होगा। इसके बाद तीन अप्रैल को भरत मिलाप प्रसंग को मंचन होगा। श्रीराम राज्याभिषेक के साथ इस साल चार अप्रैल को रामलीला का समापन होगा।



रामायण की सभी घटनाएं दिखाई जाती है इस रामलीला में

चैत्र मास में रावण वध के सम्बन्ध में स्कंद पुराण के धर्मारण्य महात्म्य में दी गई कथा के अनुसार राम-रावण युद्ध माघ शुक्ल द्वितीया से लेकर चैत्र कृष्ण चतुर्दशी तक 87 दिन तक चला। लक्ष्मण मूर्छा के कारण बीच में केवल 15 दिन संग्राम बंद रहा और शेष 72 दिन तक दोनों पक्षों में युद्ध हुआ था। इस पौराणिक कथा के अनुसार माघ शुक्ल प्रतिपदा को अंगद जी दूत बनकर रावण के दरबार में गए। इसके बाद द्वितीया को सीताजी को माया से उनके पति के कटे हुए मस्तक का दर्शन कराया गया और उस दिन से अष्टमी तक राक्षसों और वानरों के बीच घमासान युद्ध हुआ।



स्कंद पुराण के अनुसार माघ कृष्ण नवमी से चार दिन तक कुंभकर्ण ने घोर युद्ध किया और बहुत से वानरों को मार डाला। अंत में श्री रामजी के हाथों कुंभकर्ण मारा गया। बाद में फाल्गुन शुक्ल द्वादशी से चैत्र चतुदर्शी तक 18 दिनों तक युद्ध करके श्रीराम ने रावण को मार डाला और अमावस्या के दिन रावण आदि राक्षसों के दाह संस्कार किए गए। जाने-माने रामायणविद आचार्य हंसादत्त त्रिपाठी भी रावण वध का वास्तविक समय चैत्र मास में ही बताते हैं।



मुस्लिम संतों ने दिलवाई थी रामलीला को मान्यता

उनके अनुसार पौराणिक साक्ष्यों के मद्देनजर रंग और उमंग के पर्व होली में बढ़ते हुड़दंग को एक धार्मिक माहौल देने के लिये बमनपुरी मोहल्ले में रामलीला का मंचन शुरू किया गया था। बडी बमनपुरी मोहल्ले में रहने वाले बुजुर्गों के अनुसार शुरू में इलाके के अनेक प्रभावशाली लोगों ने अंग्रेजों के जमाने में जब रामलीला का मंचन रोकने की कोशिश की तब मुस्लिम संत आला हजरत इमाम अहमद रजा खां की गवाही के बाद ही रामलीला को सरकारी मान्यता मिली थी।

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