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मंगलवार, 8 मार्च 2016

सोमवार से पंचक शुरू, 11 मार्च तक भूल कर भी न करें ये काम





सोमवार से पंचक शुरू, 11 मार्च तक भूल कर भी न करें ये काम




भारतीय ज्योतिष में मुहूर्त की गणना करते समय पंचक तथा भद्रा को अशुभ माना जाता है। इस सप्ताह पंचक 7 मार्च, सोमवार की दोपहर 01.30 से पंचक शुरू होकर 11 मार्च, शुक्रवार की शाम 07.21 तक रहेगा।

सोमवार से शुरू होने के कारण यह राज पंचक योग बना रहा है। शास्त्रानुसार राज पंचक अत्यन्त ही शुभ माना गया है परन्तु पंचक दोष होने के कारण इसमें कुछ विशेष काम नहीं किए जाते हैं।

किसे कहते हैं पंचक

ज्योतिष शास्त्र में पांच नक्षत्रों के समूह को पंचक कहते हैं। ये नक्षत्र हैं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार चंद्रमा अपनी माध्यम गति से 27 दिनों में सभी नक्षत्रों का भोग कर लेता है। इसलिए प्रत्येक माह में लगभग 27 दिनों के अंतराल पर पंचक नक्षत्र आते रहते हैं।

(1) रोग पंचक
रविवार को शुरू होने वाला पंचक को रोग पंचक कहा जाता है। इसके प्रभाव से शारीरिक और मानसिक परेशानियां होती हैं। इस पंचक में किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।

(2) राज पंचक
सोमवार को शुरू हुआ पंचक राज पंचक कहलाता है। ये अति शुभ पंचक माना जाता है। इस समय शुरू किए गए सभी कार्यों में सुनिश्चित सफलता मिलती है। इस समय राजकार्य तथा जमीन-जायदाद से जुड़े कार्य करना शुभ रहता है।




(3) अग्नि पंचक
मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इस पंचक के दौरान किसी भी तरह का निर्माण करना अशुभ रहता है। वरन यह समय मुकदमेबाजी तथा कोर्ट कचहरी के लिए अतिउपयुक्त माना जाता है।

(4) मृत्यु पंचक
शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। जैसाकि नाम से ही जाहिर होता है, इस पंचक के दौरान किसी भी तरह का कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए अन्यथा मरण तुल्य कष्ट होता है।

(5) चोर पंचक
शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। यह पंचक भी अशुभ ही माना जाता है। विशेष तौर पर इस समय लेन-देन, व्यापार, किसी भी तरह के सौदे या नई यात्रा शुरू नहीं करनी चाहिए अन्यथा धन और समय की हानि होती है।


पंचक में आरंभ कर सकते हैं हवन-पूजन

जनसामान्य में एक बहुप्रचलित धारणा बन चुकी है कि पंचकों के दौरान हवन-पूजन या फिर देव विसर्जन नहीं करना चाहिए। यह मान्यता पूर्णतया गलत है, शास्त्रों में पंचक के दौरान शुभ कार्यों के लिए कहीं भी निषेध नहीं बताया गया है, हालांकि किसी बड़े अनुष्ठान को आरंभ करने के लिए अवश्य ज्योतिषियों की राय लेने की आवश्यकता बताई गई है। यदि पंचक में नवरात्रि हो तो आप राहुकाल समय का निषेध करते हुए अभिजित मुहूर्त (बुधवार को छोड़कर) में अपनी पूजा आरंभ कर सकते हैं। केवल कुछ विशेष कार्यों को ही पंचक के दौरान न करने की सलाह विद्वानों द्वारा दी जाती है।



पंचक में कभी न करें ये पांच काम

पंचक में चारपाई बनवाना, दक्षिण दिशा की यात्रा करना, शव का अंतिम संस्कार करना, घर की छत डालना तथा आग्नेय सामग्री एकत्रित करना आदि कार्य नहीं करने चाहिए। इनसे धनहानि तथा भाग्यहानि होने का खतरा रहता है।

ऐसे दूर करें पंचक दोष

(1) घर में किसी की मृत्यु होने पर शव दाह एक आवश्यक काम है परन्तु पंचक काल होने पर शव दाह करते समय पांच अलग पुतले बनाकर उन्हें भी अवश्य जलाएं। अन्यथा उस घर, या स्थान पर पांच लोगों की मृत्यु होने का योग बनता हैं।
(2) लकड़ी का समान खरीदना जरूरी हो तो खरीद लेवें परन्तु पंचक काल समाप्त होने पर मां गायत्री का हवन अवश्य कराए, इससे पंचक दोष दूर हो जाता है|
(3) पंचक काल में अगर दक्षिण दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो तो यात्रा से पहले किसी हनुमान मंदिर में फल चढा कर आर्शीवाद लें।
(4) पंचकों में मकान पर छत डलवाने के पहले वहां मौजूद मजदूरों को मिठाई बांटें, उसके बाद ही छत डलवाने का कार्य आरंभ करें।
(5) पंचक में यदि पलंग या चारपाई लेना अति जरूरी हो तो उसे खरीद लें परन्तु उसका उपयोग पंचक की समाप्ति के बाद ही करें।





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