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बुधवार, 2 मार्च 2016

चाणक्य नीतिः 10 बातें जिन्हें ध्यान रखने पर नहीं आता बुरा समय



चाणक्य नीतिः 10 बातें जिन्हें ध्यान रखने पर नहीं आता बुरा समय




 चाणक्य ने राजनीतिक दूरदर्शिता तथा कूटनीति के बल पर एक सामान्य से बालक चंद्रगुप्त को पूरे भारतवर्ष का सम्राट बना दिया था। उन्होंने अपने जीवन के अनुभूत प्रयोगों को एक पुस्तक का रूप देकर 'अर्थशास्त्र' की रचना की। इस ग्रंथ में लिखी गई बातों पर मनन करने तथा उनका पालन करने से व्यक्ति अपने आपको न केवल दुर्भाग्य और बुरे समय से बचा सकता है वरन बड़ी ही सरलता से सफलता की नई ऊंचाईयों को भी प्राप्त कर सकता है।

चाणक्य नीतिः वह पत्नी जो पर पुरुष में रूचि रखती है, उसके लिए उसका पति ही उसका शत्रु है।
जो चोर रात को काम करने निकलता है, चन्द्रमा ही उसका शत्रु है।
भिखारी कंजूस आदमी का दुश्मन होता है, एक अच्छा सलाहकार एक मूर्ख आदमी का शत्रु है।

चाणक्य नीतिः स्त्री (यहाँ लम्पट स्त्री अभिप्रेत है) का ह्रदय पूर्ण नहीं है वह बंटा हुआ है, जब वह एक आदमी से बात करती है तो दुसरे की ओर वासना से देखती है और मन में तीसरे को चाहती है।



चाणक्य नीतिः मूर्ख को लगता है की वह हसीन लड़की उसे प्यार करती है, वह उसका गुलाम बन जाता है और उसके इशारो पर नाचता है, जबकि वह उससे धन पर आसक्त होती है।


चाणक्य नीतिः जब आदमी में शक्ति नहीं रह जाती वह साधू हो जाता है, जिसके पास दौलत नहीं होती वह ब्रह्मचारी बन जाता है, रुग्ण भगवान् का भक्त हो जाता है, तथा जब औरत बूढी होती है तो पति के प्रति समर्पित हो जाती है।

चाणक्य नीतिः ये आठों कभी दुसरो का दुःख नहीं समझ सकते...
(1) राजा (2) वेश्या (3) यमराज (4) अग्नि (5) चोर (6) छोटा बच्चा (7) भिखारी और (8) कर वसूल करने वाला
चाणक्य नीतिः जो व्यक्ति राजा से, अग्नि से, धर्म गुरु से और स्त्री से बहुत परिचय बढ़ाता है वह विनाश को प्राप्त होता है। जो व्यक्ति इनसे पूर्ण रूप से अलिप्त रहता है, उसे अपना भला करने का कोई अवसर नहीं मिलता। इसलिए इनसे सुरक्षित अंतर रखकर सम्बन्ध रखना चाहिए।

चाणक्य नीतिः जिस प्रकार एक गाय का बछड़ा, हजारो गायो में अपनी माँ के पीछे चलता है उसी तरह कर्म आदमी के पीछे चलते है। 

चाणक्य नीतिः ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन में आनंद आता है, गायों को ताज़ी कोमल घास खाने में, पत्नी को पति के सान्निध्य में, क्षत्रियो को युद्ध में आनंद आता है।

चाणक्य नीतिः जिसे दौलत, अनाज और विद्या अर्जित करने में और भोजन करने में शर्म नहीं आती वह सुखी रहता है।

चाणक्य नीतिः वह ब्राह्मण जो भगवान् के मूर्ति की सम्पदा चुराता है और वह अध्यात्मिक गुरु जो दुसरे की पत्नी के साथ समागम करता है और जो अपना गुजारा करने के लिए कुछ भी और सब कुछ खाता है वह चांडाल है।
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