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सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

आप पुरानी यादें भूलते जा रहे हैं?



आप पुरानी यादें भूलते जा रहे हैं?


क्या आपको कभी ऐसा महसूस हुआ कि आप पुरानी यादें भूलते जा रहे हैं?ये यादें किसी भी तरह की हो सकती हैं - अचरज में डालने वाला कोई दृश्य, या फ़िल्म का कोई सीन, या कोई लतीफ़ा, या फिर कोई गाना ही सही.ऐसा अकसर होता है कि जब आप उसे याद करने की कोशिश करते हैं तो कुछ स्पष्ट तौर पर याद नहीं आता, कुछ धुंधली सी यादें ही सामने आती हैं.कुछ घटनाओं के धुंधले नज़ारे या फिर बातचीत की कुछ पंक्तियां....इससे कई बार ख़ासी निराशा होती है.कई बार तो लोग सालों तक याद रहने वाली बातें जैसे किसी फ़िल्म स्टार से मुलाक़ात, भी लोग भूल जाते हैं.लेकिन आप अपनी याददाश्त को बेहतर बना सकते हैं, वो भी बेहद सामान्य तरीके से, महज 40 सेकेंड की कोशिश के साथ.ससेक्स यूनिवर्सिटी के क्रिस बर्ड के शोध के मुताबिक अगर कुछ सेकेंड निकालकर आप अपनी कल्पनाशीलता से थोड़ा काम लें, तो याददाश्त को बेहतर बना सकते हैं.बर्ड ने अपने छात्रों से ब्रेन स्कैनर के सामने लेटने को कहा और उन्हें यूट्यूब के शॉर्ट क्लिप दिखाए. इनमें ऐसे वीडियो भी शामिल थे जैसे पड़ोसी एक दूसरे को लतीफ़े सुना रहे थये वीडियो दिखाए जाने के बाद, छात्रों के एक ग्रुप को 40 सेकेंड का समय दिया गया ताकि वे उन दृश्यों को अपने दिमाग में रीप्ले कर लें और जो उन्होंने देखा, उसके बारे में ख़ुद को बताएं.दूसरे ग्रुप को एक के बाद एक दूसरे वीडियो दिखाए जाने लगे. अपने दिमाग में वीडियोज़ को दोहराने वाले लोगों में सप्ताह, दो सप्ताह के बाद भी देखे गए दृश्यों को याद रखने की संभावना दूसरे ग्रुप के मुकाबले दोगुनी देखी गई.इससे जाहिर है कि किसी घटना को जब हम दिमाग में दोहराते हैं तो उसे याद रखने की संभावना दो गुना बढ़ जाती है. ये प्रयोग आप खुद भी कर सकते हैं.बर्ड ने अपने प्रयोग में ये भी देखा कि ब्रेन के स्कैन भी इस तरह से याददाश्त के पुख़्ता होने की तस्दीक करते हैं.जिन छात्रों ने इन दृश्यों या घटनाओं को अपनी दूसरी यादों से जोड़ा, उनमें इनको याद रखने की संभावना और भी बढ़ गई.दूसरे शब्दों में कहें तो अगर आप किसी चीज़ को लंबे समय तक याद रखना चाहते हैं तो फिर आप एक मिनट का समय निकाल कर उसे ख़ुद से दोहराएँ.उसका जितना शानदार और दिलचस्प वर्णन आप ख़ुद से करेंगे, उसके याद रहने की संभावना उतनी ही ज़्यादा होगी.बर्ड ने ये भी देखा कि किस तरह अदालती गवाहियों के दौरान ये तरीका महत्वपूर्ण हो जाता है. वो बताते हैं, “नतीजे ये बताते हैं कि किसी भी स्थिति में आप इस तरीके के जरिए घटना को याद कर सकते हैं. चाहे वो किसी घटना या अपराध की गवाही देने के वक्त ही क्यों ना हो.”वे बताते हैं, “कोई घटना तभी बेहतर ढंग से याद रहती है जब आप घटना के तुरंत बाद उसका विवरण ख़ुद को बताते हैं.”वैसे किसी भी घटना को याद करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं


















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