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सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

तन के साथ अपने मन, मस्तिष्क और आत्मा को भी बनाएं शुद्ध


तन के साथ अपने मन, मस्तिष्क और आत्मा को भी बनाएं शुद्ध



मन स्वस्थ और स्वच्छ हो तो शरीर उसी प्रकार संचालित होता है। परन्तु मन को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के लिए शरीर का स्वस्थ होना भी जरूरी है। इसमें खान पान, व्यायाम और योग शामिल है। जब व्यक्ति शरीर से स्वस्थ होता है तो मन प्रफुल्लित रहता है। इसलिए प्रात: उठें, ईश्वर का ध्यान करें, शुद्ध एवं शाकाहारी भोजन लें, योग के साथ राजयोग करें।
योग से शरीर और मन को स्वस्थ रखने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन आत्मा की स्वच्छता के लिए राजयोग जरूरी है। राजयोग अर्थात आत्मा का परमात्मा से मिलन। इसके लिए जरूरी है कि ध्यानाभ्यास किया जाए। ऐसा नहीं है कि ध्यानाभ्यास केवल बैठकर एक निश्चित समय पर ही करना जरूरी है। परन्तु यह हर समय किया जा सकता है। सही मायने में देखा जाए तो स्वच्छता का दर्पण मनुष्यात्माओं को उज्जवल भविष्य की रोशनी और सही रास्ता दिखाने का आधार होता है।
मन की स्वच्छता के लिए लगातार प्रयास करते रहने की जरूरत है। हमेशा मन पर नजर रखने की आवश्यकता है ताकि मन की समस्याओं के अम्बार को रोका जा सके। यही एक प्रक्रिया है कि हम मन और आत्मा को स्वच्छ और स्वस्थ बना सकते हैं। इससे ही मनुष्य का सही विकास होगा और हम एक बेहतर कल की ओर अग्रसर होंगे।

















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