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सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

प्रेम एक कला है जो जीना ही जीवन है

प्रेम एक कला है जो जीना ही जीवन है



प्रेम एक कला है जो जीवन को बनाती है जीवन को चलाती है जीवन की उन सभी जरूरतो को पूरा करती है सोचने का नजरिया बदलती है हमे सिखाती है की जीवन को केसे जिया जा सकता है प्रेम सिखाता है प्रेम जगता है प्रेम रुलाता है प्रेम हशता है प्रेम खिलाता है प्रेम जिलाता है सोचो प्रेम ना हो तो जीवन मे रस ही नही होता है ओर रस ही भावनाये होती है हम कई वर्सो से सुनते आये है की रस ही एक एसी विधि होती है जिसके दुवारा मनुस्य की विचार शक्ति चलती है















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