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सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

दिवाली के आगमन पर यहां की जाती है पांच दिनों तक कुत्तों की पूजा

दिवाली के आगमन पर यहां की जाती है पांच दिनों तक कुत्तों की पूजा

कुछ समय पहले चीन में मनाए जाने वाले ‘यूलिन डॉग मीट फेस्टिवल’ से जुड़ी हुई खबरें सोशल नेटवर्किंग पर खूब वाइरल हो रही थी. अपने पसंदीदा कुत्ते का मांस खाने की अनोखी प्रथा सुनकर अधिकतर लोग हैरानी में पड़ गए थे. कुछ लोगों ने तो अपने ही अन्दाज में इस वफादार जानवर को खाने का जमकर विरोध किया था. भारत में तो, अपने पड़ोसी देश की इस हरकत पर कई जोक्स तक बना दिए गए थे. लेकिन भारत के ही एक और पड़ोसी देश की कहानी जरा हटकर है. हम बात कर रहे हैं नेपाल की, यहां पर कुत्तों को खाया नहीं जाता बल्कि इनकी पूजा की जाती है.

नेपाल में पांच दिवसीय ‘तिहार पर्व’ मनाया जाता है. जिसमें कुत्ते समेत कई सारे जानवरों की पूरे विधि-विधान के अनुसार पूजा की जाती है. दिवाली के आसपास अक्टूबर मास में मनाए जाने वाले इस त्योहार में कुत्तों का खासतौर पर ध्यान रखा जाता है. जिसमें उन्हें लाल रंग का तिलक लगाने के साथ मिठाईयां भी परोसी जाती है.

पांच दिन तक चलने वाले इस त्योहार के पहले दिन कौए की पूजा की जाती है जिसे यमराज के दूत के रूप में माना जाता है. जबकि दूसरे दिन कुत्ते की पूजा की जाती है. जिसे भगवान भैरव के रूप में पूजा जाता है. तीसरे दिन गाय को देवी लक्ष्मी और चौथे दिन शक्ति के देवता के रूप में बैल को पूजा जाता है.


पर्व का आखिरी दिन बहनें अपने भाईयों के सम्मान में मनाती है. मगर इन पांचों दिनों में से दूसरे दिन का बहुत महत्व है जिसमें कुत्ते का पूजन किया जाता है आम लोगों के साथ पुलिसकर्मी भीट्रेनिंग वाले कुत्तों की पूजा करके उनकी रेस करवाते हैं. तो देखा आपने दुनिया का एक हिस्सा ऐसा भी है जहां कुत्ते को वफादारी का ईनाम कुछ इस तरह दिया जाता है

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