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सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

तन के साथ अपने मन, मस्तिष्क और आत्मा को भी बनाएं शुद्ध


तन के साथ अपने मन, मस्तिष्क और आत्मा को भी बनाएं शुद्ध



मन स्वस्थ और स्वच्छ हो तो शरीर उसी प्रकार संचालित होता है। परन्तु मन को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के लिए शरीर का स्वस्थ होना भी जरूरी है। इसमें खान पान, व्यायाम और योग शामिल है। जब व्यक्ति शरीर से स्वस्थ होता है तो मन प्रफुल्लित रहता है। इसलिए प्रात: उठें, ईश्वर का ध्यान करें, शुद्ध एवं शाकाहारी भोजन लें, योग के साथ राजयोग करें।
योग से शरीर और मन को स्वस्थ रखने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन आत्मा की स्वच्छता के लिए राजयोग जरूरी है। राजयोग अर्थात आत्मा का परमात्मा से मिलन। इसके लिए जरूरी है कि ध्यानाभ्यास किया जाए। ऐसा नहीं है कि ध्यानाभ्यास केवल बैठकर एक निश्चित समय पर ही करना जरूरी है। परन्तु यह हर समय किया जा सकता है। सही मायने में देखा जाए तो स्वच्छता का दर्पण मनुष्यात्माओं को उज्जवल भविष्य की रोशनी और सही रास्ता दिखाने का आधार होता है।
मन की स्वच्छता के लिए लगातार प्रयास करते रहने की जरूरत है। हमेशा मन पर नजर रखने की आवश्यकता है ताकि मन की समस्याओं के अम्बार को रोका जा सके। यही एक प्रक्रिया है कि हम मन और आत्मा को स्वच्छ और स्वस्थ बना सकते हैं। इससे ही मनुष्य का सही विकास होगा और हम एक बेहतर कल की ओर अग्रसर होंगे।

















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18 साल बाद पंचग्रही, शिव योग में मनेगी महाशिवरात्रि



18 साल बाद पंचग्रही, शिव योग में मनेगी महाशिवरात्रि




महाशिवरात्रि इस बार सात मार्च को पंचग्रही व शिव योग में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस दिन कुंभ राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र व केतु, पांच ग्रह मिलन (युति) करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार स्थिर राशि कुंभ में पांच ग्रहों का यह योग महाशिवरात्रि पर चारों प्रहर की पूजा करने वाले शिव भक्तों को स्थिर लक्ष्मी व आरोग्यता प्रदान करेगा।
इस बार शैव और वैष्णव दोनों मतों के लोग एक ही दिन शिवरात्रि का पर्व मनाएंगे। ज्योतिषाचार्य पंडि़त चंद्रमोहन दाधीच के अनुसार महाशिवरात्रि पर पंचग्रही योग 18 साल बाद बन रहा है। इससे पूर्व यह विशेष योग 25 फरवरी 1998 में बना था। इसके बाद 9 मार्च 2024 को यह योग बनेगा।
भगवान शिव को प्रसन्न करने की रात
शैव व वैष्णव दोनों मतों के लोगों के एक ही दिन यह पर्व मनाने के कारण चार प्रहर की पूजा भी इसी दिन की जाएगी। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हर प्रहर में गन्ना, डाब (कुशा), दुग्ध, खस आदि का अभिषेक किया जाएगा। साथ ही रुद्र पाठ, शिव महिमन और तांडव स्त्रोत का पाठ होगा। षोड्षोपचार पूजन के साथ भगवान शिव को आक, धतूरा, भांग, बेर, गाजर चढ़ाया जाएगा। किसी व्यक्ति की कुंड़ली में राहु-केतु के मध्य में आने पर बनने वाला कालसर्प योग के निवारण के लिए� भी विशेष पूजा की जाएगी।
चार प्रहर पूजन का समय
प्रथम प्रहर : सायंकाल 6.27 से रात्रि 9.32 बजे तक
द्वितीय प्रहर : रात्रि 9.33 से 12.37 बजे तक
तृतीय प्रहर : मध्यरात्रि 12.38 से 3.42 बजे तक
चतुर्थ प्रहर : मध्यरात्रि बाद 3.43 से प्रात: 6.47 बजे तक
निशीथ काल : मध्यरात्रि 12.13 से 1.02 बजे तक















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इस गांव में होती है चमगादड़ों की पूजा, माना जाता है लक्ष्मी का प्रतीक


इस गांव में होती है चमगादड़ों की पूजा, माना जाता है लक्ष्मी का प्रतीक





वैसे तो आपने चमगादड़ों को देखा होगा, लेकिन बिहार के वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड के सरसई (रामपुर रत्नाकर) गांव में चमगादड़ों की न केवल पूजा होती है, बल्कि लोग मानते हैं कि चमगादड़ उनकी रक्षा भी करते हैं। इन चमगादड़ों को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। यहां लोगों की मान्यता है कि चमगादड़ समृद्धि की प्रतीक देवी लक्ष्मी के समान हैं।
सरसई गांव के एक बुजुर्ग गणेश सिंह का मानना है कि चमगादड़ों का जहां वास होता है, वहां कभी धन की कमी नहीं होती। ये चमगादड़ यहां कब से हैं, इसकी सही जानकारी किसी को भी नहीं है। सरसई पंचायत के सरपंच और प्रदेश सरपंच संघ के अध्यक्ष अमोद कुमार निराला बताते हैं कि गांव के एक प्राचीन तालाब (सरोवर) के पास लगे पीपल, सेमर तथा बथुआ के पेड़ों पर ये चमगादड़ बसेरा बना चुके हैं।
उन्होंने बताया कि इस तालाब का निर्माण तिरहुत के राजा शिव सिंह ने वर्ष 1402 में करवाया था। करीब 50 एकड़ में फैले इस भूभाग में कई मंदिर भी स्थापित हैं। उनके अनुसार रात में गांव के बाहर किसी भी व्यक्ति के तालाब के पास जानं के बाद ये चमगादड़ चिल्लाने लगते हैं, जबकि गांव का कोई भी व्यक्ति के जाने के बाद चमगादड़ कुछ नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि यहां कुछ चमगादड़ों का वजन पांच किलोग्राम तक है।
सरसई पंचायत के मुखिया चंदन कुमार बताते हैं कि सरसई के पीपलों के पेड़ों पर अपना बसेरा बना चुके इन चमगादड़ों की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है। गांव के लोग न केवल इनकी पूजा करते हैं, बल्कि इन चमगादड़ों की सुरक्षा भी करते हैं। यहां के ग्रामीणों का शुभ कार्य इन चमगादड़ों की पूजा के बगैर पूरा नहीं माना जाता।
जनश्रुतियों के मुताबिक, मध्यकाल में वैशाली में महामारी फैली थी, जिस कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में यहां चमगादड़ आए और फिर ये यहीं के होकर रह गए। इसके बाद से यहां किसी प्रकार की महामारी कभी नहीं आई।
स्थानीय आर. एन. कॉलेज के प्रोफेसर एसपी श्रीवास्तव का कहना है कि चमगादड़ों के शरीर से जो गंध निकलती है, वह उन विषाणुओं को नष्ट कर देती है जो मनुष्य के शरीर के लिए नुकसानदेह माने जाते हैं। उनके अनुसार इतनी बड़ी संख्या में चमगादड़ों का वास न केवल अभूतपूर्व है, बल्कि मनमोहक भी है, लेकिन यहां साफ -सफाई और सौंदर्यीकरण की जरूरत है।















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रोचक कहानी

रोचक कहानी


एक संत की कथा में एक बालिका खड़ी हो गई।
चेहरे पर झलकता आक्रोश...
संत ने पूछा - बोलो बेटी क्या बात है?
बालिका ने कहा- महाराज हमारे समाज में लड़कों
को हर प्रकार की आजादी होती है।
वह कुछ भी करे, कहीं भी जाए उस पर कोई खास
टोका टाकी नहीं होती।
इसके विपरीत लड़कियों को बात बात पर टोका
जाता है।
यह मत करो, यहाँ मत जाओ, घर जल्दी आ जाओ
आदि।
संत मुस्कुराए और कहा...
बेटी तुमने कभी लोहे की दुकान के बाहर पड़े लोहे
के गार्डर देखे हैं?
ये गार्डर सर्दी, गर्मी, बरसात, रात दिन इसी
प्रकार पड़े रहते हैं।
इसके बावजूद इनका कुछ नहीं बिगड़ता और इनकी
कीमत पर भी कोई अन्तर नहीं पड़ता।
लड़कों के लिए कुछ इसी प्रकार की सोच है समाज
में।
अब तुम चलो एक ज्वेलरी शॉप में।
एक बड़ी तिजोरी, उसमें एक छोटी तिजोरी।
उसमें रखी छोटी सुन्दर सी डिब्बी में रेशम पर
नज़ाकत से रखा चमचमाता हीरा।
क्योंकि जौहरी जानता है कि अगर हीरे में जरा भी
खरोंच आ गई तो उसकी कोई कीमत नहीं रहेगी।
समाज में बेटियों की अहमियत भी कुछ इसी प्रकार
की है।
पूरे घर को रोशन करती झिलमिलाते हीरे की तरह।
जरा सी खरोंच से उसके और उसके परिवार के पास
कुछ नहीं बचता।
बस यही अन्तर है लड़कियों और लड़कों में।
पूरी सभा में चुप्पी छा गई।
उस बेटी के साथ पूरी सभा की आँखों में छाई नमी
साफ-साफ बता रही थी लोहे और हीरे में फर्क।।।






















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शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

7 मार्च को है सूर्य ग्रहण, जानिए किन लोगों को होगा महिलाओं से खतरा


7 मार्च को है सूर्य ग्रहण, जानिए किन लोगों को होगा महिलाओं से खतरा




इस वर्ष चार बार ग्रहण पड़ेंगे। इनमें से दो सूर्य ग्रहण तथा दो चंद्र ग्रहण होंगे। वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण 7 मार्च 2016 को होगा। यह भारत में स्पष्ट दिखाई देगा जबकि अन्य तीन ग्रहण हमारे यहां नहीं दिखाई देंगे।

ज्योतिष मठ संस्थान के पं. विनोद गौतम ने बताया कि साल का पहला सूर्य ग्रहण लगभग 24 मिनट तक ग्रस्तोदय स्थिति में देखा जा सकेगा। यह ग्रहण पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र कुंभ राशि पर रहेगा। इसकी अवधि सुबह 5 बजकर 37 मिनट से 9:07 मिनट तक रहेगी, जो भोपाल में सुबह 6:38 बजे से 7:02 बजे तक ग्रस्तोदय स्थिति में देखा जा सकेगा।

इस ग्रहण के चलते सभी राशियों पर असर पड़ेगा। जहां कुछ राशियों के लिए विशेष लाभ के अवसर बन रहे हैं वही कुछ राशियों के लिए बहुत ही संभल कर चलने का समय है।

मेष (Aries) (चू, च, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)

यह वर्ष सामान्य रहेगा। किसी महत्वपूर्ण निर्णय पर विचार कर सकते हैं। सोच समझ कर निर्णय लें। किसी मित्र की मदद लेना आपके हित में होगा। नए मित्र भी बनेंगे। परिवार के साथ विदेश जाने का योग बन सकता है। आपके साथ नुकसान या धोखा हो सकता है, सजग रहें। ज्यादा भरोसा किसी पर भी न करें।

प्रोफेशन - अपने काम में अनुशासन लाएं। अपने टारगेट पर फोकस करें।
प्रेम - पुराने रिश्ते का अंत होकर कोई नया पार्टनर मिल सकता है।

अनुकूल सलाह- समय रहते परिवर्तन करने से व्यावसायिक लाभ की संभावना है।


वृषभ (इ, उ, ए, ओ, वा, वि, वू, वे, वो)

यह वर्ष मौज-मस्ती में बीतेगा। मांगलिक कार्य होंगे। सगे-संबंधियों के साथ समय बिताएंगे। मेहमानों से परिवार का माहौल सुखद होगा। अगर किसी काम में अड़चन आ रही हो तो इस वर्ष वह दूर होगी। परिणाम आपके पक्ष में ही होगा। शादी की बात भी पक्की हो सकती है।

प्रोफेशन - पदोन्नति के योग बन रहे हैं। समय आपके अनुकूल है, पूरा फायदा उठाएं।
प्रेम - रिश्ते में परेशानियां इस वर्ष दूर होगी। रिश्ता और मधुर बनेगा।

अनुकूल सलाह- प्रयासों में वरिष्ठों की सलाह व्यावसायिक लाभ देगी।



मिथुन (का, की, कू , घ, ड, छ, के, को, हा)

यह वर्ष जोखिम भरा हो सकता है। नए काम न करें। जितना हो सके परिवार में और दोस्तों के बीच बहस करने से बचें। झगड़े की परिस्थितियां बन सकती हैं। भावनात्मक रूप से बहुत कमजोर महसूस करेंगे। माता के साथ वाद-विवाद हो सकता है। महिला से नुकसान हो सकता है, भरोसा न करें।

प्रोफेशन - सहकर्मियों के जरिए आप पर झूठा इल्जाम लगाया जा सकता है। सावधान रहें।
प्रेम - साथी से झगड़ा हो सकता है। दूसरे की भावनाओं की कद्र करें।

अनुकूल सलाह- प्रबंधन तथा सफलता के मध्य निर्णय क्षमता मजबूत करें। 


कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

इस वर्ष आर्थिक समस्या से परेशान हो सकते हैं। जहां से पैसा मिलने वाला था, वहां से निराशा ही मिलेगी। जरूरी काम अटक सकता है। कमजोरी महसूस होगी। मन उदास रहेगा। बेचैनी रहेगी। सब्र रखें। परिवार में किसी की तबीयत भी खराब हो सकती है।

प्रोफेशन - अपना काम जिम्मेदारी के साथ पूरा करें। कार्य क्षेत्र में लापरवाही न दिखाएं।
प्रेम - इस वर्ष आपका ब्रेकअप हो सकता है। बहस करने से बचें।

अनुकूल सलाह- संगठन को मजबूत बनाने की कोशिश लाभ देगी।


सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

इस वर्ष खुद को बहुत सकारात्मक पाएंगे। एक नई ऊर्जा के साथ कामों को अंजाम देंगे और उनमें सफलता भी मिलेगी। अध्यात्म की ओर झुकाव होगा। असंभव कामों को पूरा करने के लिए नई दिशा मिलेगी। अपनों का प्यार भी मिलेगा। खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे। जरूरी काम करने की कोशिश करें।

प्रोफेशन - नई जिम्मेदारियां ऑफिस में मिल सकती हैं मन लगा के उन्हें पूरा करें।
प्रेम - पार्टनर के साथ कहीं घूमने जाएंगे, समय अच्छा बीतेगा।

अनुकूल सलाह- अपने कैलिबर को समझते हुए निर्णय क्षमता बढ़ाएं।


कन्या (Virgo) (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे,पो)

इस वर्ष नए कार्य की योजना बना सकते हैं लेकिन उसे पूरा करने के लिए एक सही मार्गदर्शन की जरूरत है। वास्तविकता को सामने लेकर चलें। जो काम शुरू किया है उसे पूरा करें। अपनी कमजोरियों को पहचान कर उन्हें पूरा करने की कोशिश करें। बड़ों की सलाह मानें। हर वक्त आप ही सही हैं यह मानसिकता दिमाग से निकालें।

प्रोफेशन - अपने काम में उत्साहपूर्वक माहौल बनाएं और काम करें।
प्रेम- पार्टनर से इमोशनली ब्लैकमेल होने से बचें।

अनुकूल सलाह- अवसरों को अपने अनुकूल बनाने का यह सही समय है।

तुला (रा, री, रू, रे, री, ता, ती, तू, ते)

यह वर्ष तुला राशि वालों के लिए सामान्य रहेगा। किसी बात को ज्यादा न सोचें। समय रहते सब ठीक हो जाएगा। परिस्थितियां आपके पक्ष में होंगी। अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें। झूठे और धोखेबाज लोगों की बातों में न आएं। लोगों को परखना सीखें। किसी महिला से झगड़ा हो सकता है।

प्रोफेशन - अपनी जिम्मेदारी को अच्छे से निभाएंगे। आपका काम आगे बढ़ेगा।
प्रेम- पार्टनर के साथ समय गुजरेगा।

अनुकूल सलाह- हड़बड़ाहट में बड़ा नुकसान हो सकता है, ध्यान रखें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

आप अपने और पराए में भेद करना सीखें। जरूरत से ज्यादा लोगों की मदद न करें। भावनात्मक रूप से आपको दु:ख पहुंचेगा। अपनी सेहत का ध्यान रखें। परिवार में किसी बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ सकती है। कोई जरूरी कार्य करने जा रहे हैं तो बुजुर्गों की सलाह और आर्शीवाद जरूर लें।

प्रोफेशन - आपके जरिए किए गए काम को अनदेखा किया जा सकता है।
प्रेम- कार्यक्षेत्र में अपने पार्टनर की सलाह पर ध्यान दें।

अनुकूल सलाह- शान्ति के साथ अपने कार्य कलापों पर नीति बनाएं।


धनु (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)

यह वर्ष सभी तरह के कामों के लिए शुभ है। शादी की बात चल रही है तो बात बनेगी। नए दोस्त बनेंगे और उनसे लाभ भी होगा। अगर बिजनेस किसी महिला के साथ शुरू करने का प्लान बना रहे हैं तो वो आपके लिए शुभ होगा। समाज में सम्मान मिलेगा। धार्मिक आयोजन हो सकते हैं।

प्रोफेशन - नए बिजनेस की शुरुआत हो सकती है। समय अनुकूल है।
प्रेम- पार्टनर के साथ संबंध मधुर होंगे।

अनुकूल सलाह- महिला मित्र की बातों पर नीतिगत दृष्टिकोण अपनाएं।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)

इस राशि वालों को हर काम सोच समझकर करने की जरूरत है। गलत लोगों की संगत से बचें। मन की बात हर किसी से न करें। कुछ लोग आपका फायदा उठा सकते हैं। हो सकता है आप किसी गलत संगत में पड़ जाएं।

प्रोफेशन - आपकी सलाह को लोग अपने हित के लिए मानेंगे।
प्रेम- आपका पार्टनर आपके मन की बात नहीं समझ पाएगा जिससे मन निराश होगा।

अनुकूल सलाह- सफलता को प्राप्त करने के लिए प्रबंधन पर ध्यान दें।

कुंभ (Aquarius) (गू, गे, गो, सा, सी, सू,से, सो,दा)

ये वर्ष आपके लिए नई उम्मीद लेकर आएगा। नई योजना बनेगी। आपको फायदा होगा। रुका हुआ काम इस वर्ष पूरा होगा। आप आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। किसी काम के लिए आपको इनाम मिल सकता है। सामाजिक जीवन अच्छा होगा।

प्रोफेशन - नौकरी में निश्चित तरक्की के योग हैं।
प्रेम - पार्टनर के साथ कहीं घूमने जाएं अच्छा समय बीतेगा।

अनुकूल सलाह- समय पक्ष का है वरिष्ठों के माध्यम से लाभ लें।

मीन (दी, दु, थ, दे, दो, चा, ची)

इस वर्ष मीन राशि वालों ने जो काम हाथ में लिया है उसे बीच में न छोडें और न ही काम के प्रति लापरवाही बरतें। काम बिगड़ सकता है। इस वर्ष भाग-दौड़ हो सकती है। कोई भी कार्य अच्छी तरह योजना बनाकर ही करें। चापलूसों से बचें। नई शुरूआत हो सकती है।

प्रोफेशन- आपके ऊपर नई जिम्मेदारी आएगी।
प्रेम- पार्टनर के व्यवहार से मन विचलित रहेगा। बाद में सब अच्छा होगा।

अनुकूल सलाह- संबंधों को नियंत्रित करते हुए रणनीति बनाएं।

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ज्योतिष के इन उपायों से आपके 'वो' मानते हैं आपकी हर बात

ज्योतिष के इन उपायों से आपके 'वो' मानते हैं आपकी हर बात




पति, बॉयफ्रेंड का गुस्सा ऐसे करें दूर

अगर कोई व्यक्ति बहुत अधिक गुस्सा करता हो तथा अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड के साथ शराफत से पेश नहीं आता है तो उसे इस उपाय से तुरंत ही लाभ होता है। इस उपाय के अनुसार जब वह व्यक्ति (पति अथवा बॉयफ्रेंड) गहरी नींद में सो रहा हो तब एक नारियल, सात गोमती चक्र और थोड़ा का गुड़ लेकर उन सब को एक पीले कपड़े में बांध कर पोटली जैसा बना लेना चाहिए।

अब इस पोटली को सोते हुए आदमी के ऊपर से सात बार फिरा कर (उसार कर) पानी में बहा देना चाहिए तथा साथ ही प्रतिदिन सुबह स्नान कर सूर्य को अर्ध्य देना चाहिए। इससे उस व्यक्ति का गुस्सा तुरंत ही दूर हो जाएगा। 

बहुत बार हम किताबें पढ़कर या दूसरों से सुनकर ज्योतिष संबंधी टोने-टोटके आजमाते हैं। परन्तु किसी विद्वान ज्योतिषी से पूछे बिना ऐसा करना आपके लिए जानलेवा भी हो सकता है अगर आपकी कुंडली में ग्रह-गोचर सही नहीं चल रहे हों तो। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में जो आपको सोच-समझ कर ही करने चाहिए



कबूतरों को दाना डालना

अक्सर ज्योतिषियों द्वारा लोगों को कबूतरों को ज्वार (दाना) डालने का उपाय बताया जाता है। परन्तु यह उपाय कभी भी अपने घर की छत पर नहीं करना चाहिए। इस उपाय को या तो अपने आंगन में या घर से बाहर ही डालना चाहिए, घर की छत पर नहीं अन्यथा इससे बहुत बडा़ नुकसान भी हो सकता है।

वास्तव में जिनकी जन्मकुडंली में बुध और राहू की गलत युति बन जाती है या दोनों किसी तरह से आपस में योग बनाकर व्यक्ति को कष्ट देने लगते हैं तो यह कबूतरों को छत पर ज्वार डालने का उपाय उनके लिए मारक उपाय बन जाता है। इसका कारण है कि घर की छत और उड़ने वाले पक्षी दोनों ही राहू माने गए हैं।

जब कबूतर घर की छत पर आकर दाना चुगते हैं तो वे वहां पर बीट भी कर देते हैं जिससे छत गंदी हो जाती है, ऐसा होते ही जन्मकुंडली का खराब राहू प्रबल हो जाता है और व्यक्ति को अधिक कष्ट देने लगता है। अतः ऐसे में यही बेहतर है कि कबूतरों के लिए निर्धारित स्थान पर ही दाना डाले अथवा घर की छत को नियमित रूप से पानी से धोते रहे इससे इसका बुरा असर समाप्त हो जाता है।


न लोगों को कराएं भोजन

महाभारत में लिखा है 

पितृन् देवानृषीन् विप्रानतिथींश्च निराश्रयान्।
यो नरः प्रीणयत्यन्नैस्तस्य पुण्यफलं महत्।।

श्राद्ध पक्ष में सुबह भोजन करने के पहले अपने घर के पितृगणों को भोग लगाने से घर परिवार से जुड़ी सभी समस्याएं समाप्त हो जाती है। पंड़ितों तथा ऋषियों को भोजन करवाने से उनका आशीर्वाद मिलता है। इससे मनुष्य के घर-परिवार पर आने वाली जानी-अनजानी समस्याओं का निवारण हो जाता है। घर आए मेहमानों को जलपान करवाने तथा उनका आदर-सत्कार करने से देवता प्रसन्न होते हैं। जिन घरों में घर आए मेहमानों को भोजन करवाया जाता है वहां रहने वालों पर भाग्यलक्ष्मी सदा प्रसन्न रहती है। इसके अलावा भिखारियों, भूखे जानवरों तथा अन्य जरूरतमंदों को भी समय-समय पर अन्न-जल का दान करते रहने से घर की सभी समस्याएं दूर होती है। -


चावल के दानों का उपाय

किसी भी दिन जब शुभ मुहूर्त हो, सुबह जल्दी उठ कर एक लाल रेशमी कपड़े में चावल के 21 दाने बांधें। चावल के सभी दाने अखंडित होने चाहिए। इसके बाद मां महालक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें तथा इस पोटली को उन्हें समर्पित करें। पूजा के बाध इस लाल कपड़े की पोटली को अपने पर्स में छिपाकर रख दें। इससे जीवन में कभी भी पैसे की कमी नहीं आती और उस आदमी के पैसे से संबंधित सभी कार्य अपने आप बनते चले जाते हैं। इस प्रयोग में एक बात की विशेष ध्यान रखें कि उस पर्स में कभी भी कोई भी अशुद्ध और अधार्मिक वस्तु (जैसे अश्लील चित्र) न रखें।

कर्जा चुकाने का उपाय

अगर आप के उपर भारी कर्जा है और आप उसे चुका नहीं पा रहे हैं तो इन उपायों से भी आपका कर्जा जल्दी ही चुक जाएगा और घर में पैसे की आवक भी शुरू हो जाएगी। कर्जा केवल शुक्रवार या सोमवार को ही लेना चाहिए, इसके साथ ही कर्जे की पहली किस्त मंगलवार को ही चुकानी चाहिए, इससे तुरंत ही सारा कर्जा दूर हो जाता है। यदि किन्हीं कारणों से ऐसा नहीं हो पाया तो निम्न उपाय करना चाहिए ताकि आपकी आर्थिक तंगी तुंरत ही दूर हो सकेः

उपाय 1- पांच गुलाब के पूरी तरह से खिले हुए फूलों को गायत्री मंत्र पढ़ते हुए डेढ़ मीटर सफेद कपड़ें में बांध दे तथा इसे नदी में प्रवाहित कर दीजिए। इससे आपका कर्जा चुकना शुरू हो जाता है।
उपाय 2- कच्चे आटे की लोई में थोड़ा सा गुड़ भरकर उसे नदी में प्रवाहित कर दें।
उपाय 3- पांच गुलाब के फूल, चांदी का छोटा सा टुकड़ा, चावल और गुड, सफ़ेद कपड़े में रख कर 21 बार गायत्री मन्त्र का पाठ करें तथा मां गायत्री से मन ही मन आर्थिक संकट जल्दी से जल्दी दूर करने की प्रार्थना करें। बाद में इस पूरी सामग्री को नदी में प्रवाहित कर दें। 

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घर में कभी नहीं रखनी चाहिए ये 6 चीजें

घर में कभी नहीं रखनी चाहिए ये 6 चीजें



भारतीय वास्तु विज्ञान चाइनीज फेंगसुई से काफी मिलता-जुलता है। यह प्राकृतिक शक्तियों को मनुष्य के लिए उपयोगी बनाने का एक कलात्मक परंपरा है। हम अक्सर सुनते आए हैं कि घर में क्या रखना अच्छा होता है और क्या रखना बुरा। आइए आज आपको बताते हैं कि घर में कौनसी 6 चीजें कभी नहीं रखनी चाहिए।
1 महाभारत की तस्वीरें या प्रतीक : महाभारत को भारत के इतिहास का सबसे भीषण युद्ध माना जाता है। कहते हैं कि इस युद्ध के प्रतीकों, मसलन तस्वीर या रथ इत्यादि को घर में रखने से घर में क्लेश बढ़ता है। यही नहीं, महाभारत ग्रंथ भी घर से दूर ही रखने की सलाह दी जाती है।
2 नटराज की मूर्ति : नटराज नृत्य कला के देवता हैं। लगभग हर क्लासिकल डांसर के घर में आपको नटराज की मूर्ति रखी मिल जाती है। लेकिन नटराज की इस मूर्ति में भगवान शिव श्तांडव नृत्य की मुद्रा में हैं जो कि विनाश का परिचायक है। इसलिए इसे घर में रखना भी अशुभ फलकारक होता है।
3. ताजमहल : ताजमहल प्रेम का प्रतीक तो है, लेकि न साथ ही वह मुमताज की कब्रगाह भी है। इसलिए ताजमहल की तस्वीर या उसका प्रतीक घर में रखना नकारात्मकता फैलाता है। माना जाता है कि ऎसी चीजें घर पर रखी होने से हमारे जीवन पर बहुत गलत असर पड़ सकता है। यह सीधे-सीधे मौत से जुड़ा है इसलिए इसे घर पर न रखें।
4 डूबती हुई नाव या जहाज : डूबती नाव अगर घर में रखी हो तो अपने साथ आपका सौभाग्य भी डुबा ले जाती है। घर में रखी डूबती नाव की तस्वीर या� कोई शोपीस सीधा आपके घर के रिश्तों पर आघात करता है। रिश्तों में डूबते मूल्यों का प्रतीक है यह चिह्न। इसे अपने घर से दूर रखें।
5 फव्वारा : फव्वारे या फाउन्टन आपके घर की खूबसूरती तो बढ़ाते हैं लेकिन इसके बहते पानी के साथ आपका पैसा और समृद्धि भी बह जाती है। घर में फाउन्टन रखना शुभ नहीं होता।
6 जंगली जानवरों का कोई प्रतीक : किसी जंगली जानवर की तस्वीर या शो पीस घर पर रखना भी अच्छा नहीं माना जाता। इससे घर में रहने वालों का स्वभाव उग्र होने लगता है। घर में क्लेश और बेतरतीबी बढ़ती है।



















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10 भारतीय परंपराएं जो अनूठी होने के साथ उपयोगी भी हैं



10 भारतीय परंपराएं जो अनूठी होने के साथ उपयोगी भी हैं




भारत अपने आप में एक अनूठा देश है जहां हर चीज को धर्म और समाज के साथ जोड़ दिया गया है। हालांकि ऊपर से देखने पर इनका कोई विशेष महत्व नहीं दिखाई पड़ता परन्तु सूक्ष्म रूप से ये हमें मानसिक, शारीरिक तथा आध्यात्मिक रूप से प्रभावित करते हैं। इसी कारण से हमारे पूर्वजों ने कुछ ऐसे धार्मिक नियम बनाएं जो सामाजिक रूप से समाज में उपयोगी तो थे ही, साथ में हमारे शरीर पर भी उनका अच्छा असर होता है। आइए जानते हैं ऐसी ही 10 परम्पराओं के बारे में...

पुरुषों के सिर पर चोटी क्यों

यदि आप यह मानते हैं कि सिर्फ भारतीय पुरुष ही चोटी रखते हैं तो सबसे पहले यह जान लें कि अन्य एशियाई देशों यथा चीन, कोरिया तथा जापान में भी पुरुषों के सिर पर चोटी रखने की परंपरा है। इसके पीछे भी एक वैज्ञानिक कारण बताया जाता है। सुश्रुत ऋषि के अनुसार सिर हमारे सिर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां सहस्त्रार चक्र में शरीर की सभी नसें आकर मिलती है जिसे ब्रह्मरंध्र भी माना गया है। इसी ब्रह्मरंध्र को जागृत करने के लिए पुरुषों में शिखा बंधने की परंपरा शुरू हुई। शिखा रखने से मस्तिष्क का यह हिस्सा सक्रिय हो जाता है और हमारी शक्तियों को बढ़ा देता है।


हमें मंदिर जाकर भगवान की परिक्रमा क्यों करनी चाहिए

भारतीय मंदिरों को वास्तु के विशेष नियमों का पालन करते हुए बनाया जाता है। इसमें मंदिर के गर्भगृह (अथवा मूलस्थान) को इस प्रकार से बनाया जाता है कि वहां पर पृथ्वी की अधिकतम चुंबकीय ऊर्जा उत्पन्न हो सके। गर्भगृह में ही मूर्ति स्थापित की जाती है। साथ ही ईश्वर प्रतिमा के चरणों में तांबे से बने यंत्र, घंटियां, कलश आदि वस्तुएं स्थापित की जाती हैं। तांबा एनर्जी का सुचालक होने के कारण पृथ्वी की सकारात्मक ऊर्जा को प्रतिमा की तरफ आकर्षित करता है। इससे प्रतिमा के चारों तरफ आभामंडल बन जाता है। जब हम प्रतिमा के चारों तरफ परिक्रमा करते हैं तो यह शक्ति हमारे शरीर के अंदर भी प्रवेश करती है। हालांकि यह प्रक्रिया बहुत ही धीमे और अदृश्य रूप में होती है परन्तु लंबे समय तक किसी मंदिर में जाकर परिक्रमा करने पर इसका लाभ स्पष्ट अनुभव किया जा सकता है।



भारतीय व्रत क्यों करते हैं

आयुर्वेद में बताया गया है कि हमारा शरीर प्रकृति द्वारा बनाई गई स्वसंचालित मशीन है जो 24 घंटे, सातों दिन मृत्यु तक लगातार बिना रूके काम करती रहती है। हमारा पाचन संस्थान भी इसी का एक हिस्सा है। लगातार भोजन करने और उसे पचाने से हमारे पाचन संस्थान पर दबाव पड़ता है जिससे उसमें टॉक्सिक पदार्थ पैदा हो जाते हैं। सप्ताह में एक दिन व्रत करने पर हमारा पेट स्वयं ही इन पदार्थों को बाहर निकाल देता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार नियमित रूप से व्रत करने के कई फायदे हैं, शोध के अनुसार व्रत करने से कैंसर, कार्डियोवस्कुलर डिजीडेज, डायबिटीज, पाचन संबंधी बीमारियां दूर रहती हैं।



सुबह के समय सूर्य नमस्कार तथा सूर्य को अर्ध्य चढ़ाना

सूर्य नमस्कार करने के लिए कुछ नियम बताए गए हैं, यथा इसे सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही करना चाहिए। इसके पीछे भी कई वैज्ञानिक कारण हैं। सबसे पहला सुबह का समय ब्रह्ममूहूर्त माना जाता है इस समय मस्तिष्क की सक्रियता सर्वाधिक होती है, अत: इस समय किया गया कार्य अधिक एकाग्रता तथा मनोयोग से होता है जिससे उसमें सफलता की संभावना बढ़ जाती है। सुबह सूर्य को अर्ध्य चढ़ाते समय गिरते हुए जल से सूर्य के दर्शन करना हमारी आंखों के लिए अच्छा रहता है। इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके साथ-साथ सुबह के समय सूर्य नमस्कार करने से पूरे शरीर का योगाभ्यास हो जाता है तथा शरीर को दिन भर के लिए आवश्यक ऊर्जा शक्ति मिल जाती है।


हम चरण स्पर्श क्यों करते हैं

भारतीयों में अपने से बड़ों के चरण छूकर प्रणाम करने की परंपरा है, इसके प्रत्युत्तर में बड़े भी हमारे सिर पर अपना हाथ रखकर आशीर्वाद देते हैं। सबसे पहले तो इस तरह चरण छूने से हम अपने बड़ों के प्रति अपनी भावनाएं तथा आदर दिखाते हैं। इसके साथ ही जब हम अपने हाथों से उनके पैर छूते हैं तथा वो अपना हाथ सिर पर रखकर आशीर्वाद देते हैं तो यह तरह का प्राकृतिक सर्किट बन जाता है जिससे उनकी ऊर्जा का प्रवाह हमारे अंदर होने लगता है। उस समय हमारे हाथ की ऊंगलियां तथा सिर रिसेप्टर का कार्य करने लगती हैं तथा हम उनमें मौजूद जैविक ऊर्जा को ग्रहण करने लगते हैं। यही कारण है कि सभी लोग अपने से बड़े विशेष तौर पर साधु-संतों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लेना चाहते हैं।

हम तुलसी की पूजा क्यों करते हैं

तुलसी के पेड़ का आयुर्वेद में बहुत महत्व बताया गया है। इसकी पत्तियों में पारा होता है जिसके कारण इसमें बैक्टीरिया को मारने की क्षमता है। प्रतिदिन एक तुलसी का पत्ता खाने से शरीर स्वस्थ रहता है तथा छोटी-मोटी बीमारियों का शरीर पर असर नहीं होता। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि तुलसी के निकट सांप, मच्छर तथा मक्खियां जैसे हानिकारण जीवन नहीं आते। ऐसे में इसे घर में रखने पर जहां इन जीवों से बचाव होता है वहीं आवश्यकता पडऩे पर तुलसी की पत्तियों का उपयोग भी किया जा सकता है। परन्तु तुलसी की पत्तियों को कभी भी दांतों से नहीं चबाना चाहिए वरन उसे पानी के साथ निगल लेना चाहिए अन्यथा दांतों के खराब होने का खतरा बना रहता है।

हम पीपल की पूजा क्यों करते हैं

यदि उपयोग की दृष्टि पीपल का पेड़ आम व्यक्ति के लिए साधारण हो सकता है परन्तु आयुर्वेद के अनुसार इसका दवाईयों में बहुत प्रयोग होता है। परन्तु पीपल का पेड़ ही एक ऐसा पेड़ है जो रात में भी ऑक्सीजन का निर्माण करता है। पीपल के इसी गुण के चलते हिंदू इसे भगवानस्वरूप मानते हैं तथा इसकी पूजा करते हैं।

महिलाएं हाथों में चूडिय़ां क्यों पहनती हैं

हाथों की कलाई में नसों का जाल होता है जहां हाथ कर आदमी की धड़कन देखी जाती है। यहां पर सही तरह से दबाव देकर शरीर के रक्तचाप को नियमित किया जा सकता है। इसी कारण से औरतों के लिए चूडियां पहनना अनिवार्य किया गया। इससे कलाईयों पर चूडियों का घर्षण होता है और उनकी नसों पर दबाव पड़ता है फलस्वरूप उनका स्वास्थ्य ठीक रहता है।

विवाहित स्त्रियां मांग में सिंदूर क्यों भरती हैं

विवाहित स्त्रियों द्वारा मांग में सिंदूर भरने का कारण उनके वैवाहिक जीवन से जुड़ा हुआ है। सिंदूर को टर्मेरिक लाइम तथा पारे से मिलाकर बनाया जाता है। पारा जहां शरीर के ब्लडप्रेशर को नियमित करता है वहीं औरतों की कामेच्छा को भी उत्तेजित करता है। इससे मस्तिष्क का तनाव भी दूर होता है। इसी कारण से विधवाओं तथा कुंवारी महिलाओं के लिए मांग में सिंदूर लगाना निषेध किया गया है। परन्तु सिंदूर का पूरा फायदा उठाने के लिए ललाट के ठीक बीच में लगाना

हम नाक और कान क्यों छिदवाते हैं

भारतीय महिलाओं में प्रचलित इस परंपरा का संबंध पूरी तरह से शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। भारतीय चिकित्साशास्त्रियों के अनुसार कान और नाक की कुछ नसों का सीधे दिमाग के सोचने वाले प्रतिक्रिया करने वाले भाग से संबंध होता है। नाक-कान छिदवाने से दिमांग की इन नसों पर दबाव पड़ता है जिससे मस्तिष्क की अतिसक्रियता समाप्त होकर नियंत्रण में आती है।


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ऎसी 10 आदतों वाले लड़के रह जाते हैं कुंवारे

ऎसी 10 आदतों वाले लड़के रह जाते हैं कुंवारे




ऎसे युवक जो शादी के बंधन में बंध जाने को पूरी तरह तैयार हैं और अपने लिए योग्य लड़की की तलाश में हैं। जैसे ही कि सी लड़की ने मिलने का मौका दिया, आव देखा ना ताव, कह दिया "आई लव यू"!! इतने पर ही नहीं रूके और शादी कहां होगी, कौन आएगा, हनीमून कहां होगा, बच्चे किस स्कूल में पढ़ेंगे, सब तय कर लिया। 

ऎसे लोगों से लड़कियां जल्दी ही अपना पिंड छुड़ा लेती हैं। ए क-दूसरे को जाने बिना, समझे बिना, जल्दबाजी में इतना कुछ कह जाना जिसकी संभावना अभी है ही नहीं, किसी को भी अखर सकता है।


आपका पार्टनर बेहद रोमांटिक है और वह हर पल आपके साथ गुजारना चाहता है, लेकिन जब भी आप उससे किसी काम में मदद करने को कहतीं हैं, वह कोई ना कोई बहाना बनाकर कन्नी काट लेता है। इतना ही नहीं, वह आपको जीवन के हर काम में सपोर्ट करने से बचता है। ऎसे लोगों को भी वैवाहिक जीवन में प्रवेश करने में दिक्कत आती है। 


किसी भी क्षेत्र का या हर क्षेत्र का थोड़ा-थोड़ा ज्ञान होना अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ ही आपको यह भी पता होना च ाहिए कि इस ज्ञान का इस्तेमाल कहां और कैसे करना है। अक्सर अपनी गर्लफ्रेंड की बात को काट कर अपने ज्ञान का बाजा बजाने वाले लोग पसंद नहीं किए जाते हैं। ऎसे लोगों को  किसी भी जगह तवज्जो नहीं मिलती है जो हर बात में कमी निकाले या अपनी समझ का ढोल पीटना शुरू कर दें। ऎसे लोगों को लड़कियां अच्छा लाइफ पार्टनर नहीं मानती हैं

तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं" का नारा सार्वजनिक जीवन में तो लुभावना हो सकता है, लेकिन निजी जीवन में यह खतरनाक साबित होता है। आपके पार्टनर को उसकी हां में हां मिलाने वाले मिठ्ठू नहीं चाहिए होता है बल्कि उसकी योजना का सही-सही विश्लेषण कर सही राय देने वाले सच्चा साथी चाहिए होता है। अपने पार्टनर के हर कदम पर साथ देने की सोच से हां में हां और ना में ना कहने वाले लोग जीवन साथी के रूप में नहीं चुने जाते। 


हर गलती, सफलता और बात में अपने आप की ही महिमा का बखान करने वाले और खुद को सर्वश्रेष्ठ समझने वाले युवक की शादी का कार्ड छपना थोड़ा मुश्किल ही होता है। साथ ही में ऎसे लोग अपनी गलती को स्वीकार करने से भी कतराते हैं। लड़कियों का मानना है कि ऎसे लोग जो अपनी गलती स्वीकार करने से डरते हैं और अपनी बात को सही साबित करने में  किसी भी तरह का झूठ बोलने से नहीं हिचकते, वे अच्छे जीवन साथी साबित नहीं हो सकते हैं।


काम की तलाश करना, नौकरी छोड़ देना या फिर नौकरी से निकाल दिए जाना तो कोई अजीब बात नहीं, लेकिन ये कार्यकम हमेशा ही चलता रहे, तो बात चिंताजनक है। इससे यह साबित होता है कि वह युवा काम करना ही नहीं चाहता। उसे अपने कॅरियर को आगे बढ़ाने की जरा भी चिंता नहीं है। ऎसे लड़कों के साथ कैसे कोई लड़की पूरा जीवन बिताने की सोच सकती है। लगातार बेरोजगारी भी संबंधों में अस्थिरता लाती है।

अपनी बात को ज्यादा जोरदार ढंग से रखने के लिए ओवरए क्टिंग का सहारा लेना बुरी बात नहीं, लेकिन ये तरीका हर जगह और हर मौके पर सही नहीं होता है। इससे लोग आपको अलग-थलग कर देते हैं क्योंकि आपका व्यवहार उनके स मझ से परे होता है। लड़कियां भी ऎसे लोगों को अपनी पसंद से बाहर रखती हैं।

ऎसे लोगों को क्या कहा जाए जो अपनी चिंता को भी अपने पार्टनर की झोली में डाल देते हैं। बजाय अपनी पार्टनर की समस्याओं को सुनने, समझने और हल करने के, वे अपना ही राग अलापते रहते हैं। रिलेशनशिप में एक-दूसरे पर निर्भर होना बुरी बात नहीं है, लेकिन पूरी तरह से किसी पर बोझ बन जाना गलत है। ये आपके व्यवहार से आसानी से मालूम चल जाता है। ऎसे लड़कों को लड़कियां सिरे से ही नकार देती हैं।

जिन लोगों का मानना है कि वादा हमेशा टूट जाने के लिए ही होता है, उनका मालिक तो भगवान भी नहीं होता है, तो फिर लड़कियां कैसे करेंगी। विश्वास दिलाना और करना दोनों संबं धों को मजबूत बनाते हैं, लेकिन अगर आप वादा तोड़ देते हैं और ऎसा लगातार करते हैं। ऎसे में आपको कोई लाइफ पार्टनर के रूप में चुन ले, इसकी संभावना बेहद कम है।

किसी जोक पर या कॉमेडी सीन पर मुंह फाड कर हंसना गंवारा हो सकता है, लोग उसे स्वाभाविक रिऎक्शन ही समझेंगे, लेकिन अपनी गर्लफ्रेंड की गलती या बेवकूफी पर मुंह फाड़ कर हंसना भारी पड़ सकता है। उनको लगता है कि आप उनका सम्मान नहीं करते और आपको कुंवारा ही रहना पड़ेगा।

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अगर सुबह दिखे ये सपने तो समझ लीजिए आज लॉटरी लगेगी



अगर सुबह दिखे ये सपने तो समझ लीजिए आज लॉटरी लगेगी



ज्योतिष के मुताबिक हमारी नींद में दिखाई देने वाले सपनों से भी हमें निकट भविष्य में होने वाली घटनाओं का पता चलता है। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 शुभ तथा 5 अशुभ सपनों के बारे में जिनके दिखाई देने पर हमें निकट भविष्य में या तो अथाह धन की प्राप्ति होती है अथवा हम राजा से भिखारी बन सकते हैं-

सपने में किसी शिशु को चलते हुए देखना अथवा फल की गुठली देखने से जल्दी ही धन मिलने का संयोग बनता है।


अगर स्वप्न में किसी स्त्री से खुद को मैथुन करते हुए दिखाई दे तो जल्दी ही बहुत बड़ी धनराशि अथवा कॉन्ट्रेक्ट मिलने का संकेत होता है। ज्योतिषयों के अनुसार निकट भविष्य में कोई बड़ी लॉटरी भी लग सकती है। परन्तु यदि सपने में कोई गढ़ा हुआ धन देखे तो जल्दी ही लॉटरी से करोड़पति बनने का संकेत है।

खाई देखना

सुबह के समय खाई देखने से भी जल्दी ही धन की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त यदि आसमान में बिजली चमकते हुए दिखाई दे तो इसका अर्थ है कि व्यापार में बहुत बड़ी सफलता मिलने वाली है।

विदाई समारोह

इसी तरह यदि किसी कन्या का विदाई समारोह दिखाई दे अथवा मांस दिखाई दे या खुद को दस्ताने पहने देखें तो जल्दी ही करोड़पति बनने का योग होता है। इसी तरह खेत में गेहूं की फसल पकते हुए दिखाई देना भी जल्दी ही सौभाग्य लाता है।

हरा-भरा जंगल देखना

अगर सपने में किसी को धन उधार दे या दियासलाई जलाते हुए दिखाई दे या गाय को गोबर करते हुए देखें तो जल्दी ही धन की प्राप्ति होती है। इसी तरह हरा-भरा जंगल देखने या फूलों से भरी क्यारी भी शुभ मानी जाती है।

बंद दरवाजा देखना

अगर आपको सपने में किसी दरवाजे को बंद होता देखें या कोई आपको कमरे से बाहर निकाल कर दरवाजा बंद करते दिखाई दें तो समझ जाएं कि जल्दी ही आपका धन जाने वाला है।



छोटा जूता देखना

अगर सपने में खच्चर दिखाई दे तो तुरंत ही सावधान हो जाना चाहिए। ऐसा सपना दिखना धनहानि होने का योग बताता है। जबकि छोटा जूता पहनना या ऐसा सपना देखना कि आपके पैर में जूता नहीं आ रहा है तो किसी स्त्री से झगड़ा होने के बाद आर्थिक नुकसान होने की संभावना रहती है।

खाली बैलगाड़ी

अगर आप खाली बैलगाड़ी या कोई वाहन जाते देखें तो समझ जाए कि जल्दी ही व्यापार में कोई बड़ा नुकसान होने वाला है। परन्तु यदि सपने में लाठी दिखाई दे तो धन के साथ साथ यश भी फैलता है।

चंद्रग्रहण देखना

अगर आपको सपने में चंद्रमा टूटते हुए दिखाई दे या चन्द्रग्रहण दिखे तो समझ लेना चाहिए कि कोई बड़ी आकस्मिक समस्या आने वाली है, यह कोई बीमारी, एक्सीडेंट या किसी निकट विश्वस्त द्वारा धोखा देना भी हो सकता है जिसके चलते धन का नुकसान होगा।

खुद को हथकड़ी पहने देखना

अगर सपने में पतला-दुबला बैल दिखें, या खुद को हथकड़ी पहने हुई दिखाई दे अथवा खुद को किसी के आगे भीख मांगते हुए देखें तो तुरंत ही सावधान हो जाएं। ऐसा सपना दिखने पर उस व्यक्ति को भविष्य में बड़ा भारी संकट आने की संभावना रहती है। यह आर्थिक, शारीरिक या मानसिक भी हो सकता है।

सावधानियां

स्वप्न ज्योतिष के शकुन तथा अपशकुन पर विचार करते समय कुछ अन्य बातें भी ध्यान रखनी चाहिए जैसे कि सपना कब देखा जा रहा है। यदि सपना सुबह 3.30 से 5.00 के बीच आता है तो ऐसा सपना एक सप्ताह के अंदर ही सच हो जाता है परन्तु इससे पहले के सपना आने पर सपने के सच होने का समय एक महीना हो जाता है। परन्तु आधी रात से पहले के सपने कम ही सच होते हैं। वे अधिकतर मन की दबी हुई इच्छाएं या तर्क होते हैं जो गहरी नींद आने पर दिखाई देने लगते हैं।

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एक रोटी का यह उपाय बांध देता है बुरे ग्रहों को, देता है सौभाग्य का वरदान



एक रोटी का यह उपाय बांध देता है बुरे ग्रहों को, देता है सौभाग्य का वरदान



अगर आपका समय ठीक नहीं चल रहा है तथा रोज नई-नई मुसीबतें सामने आ रही हैं। आप चारों तरफ से दुश्मनों से घिरे हुए हैं और कोई भी रास्ता नजर नहीं आ रहा है तो यह छोटा सा उपाय आपकी किस्मत को हमेशा के लिए बदल सकता है।
सुबह रोटी बनाते समय एक रोटी अलग से बनाएं। इसे 4 बराबर हिस्सों में बांट लें। इसके बाद चारों टुकड़ों पर कुछ मीठा जैसे गुड़ या चीनी रख दें। इनमें पहला टुकड़ा गाय को खिलाते हुए पितृगणों तथा भगवान से अपनी समस्याओं के निवारण की प्रार्थना करें।
दूसरा टुकड़ा कुत्ते को खिला दें तथा मन ही मन प्रार्थना बोले- यमराज के मार्ग का अनुसरण करने वाले जो श्याम और शबल नाम के कुत्ते हैं, मैं उनके लिए यह अन्न का भाग देता हूं। वे इस बलि (भोजन) को ग्रहण करें।
रोटी का तीसरा हिस्सा कौओं को खिला देना चाहिए तथा मन ही मन कहना चाहिए- पश्चिम, वायव्य, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में रहने वाले जो पुण्यकर्मा कौए हैं, वे मेरी इस दी हुई बलि को ग्रहण करें।
अंत में रोटी के बचे हुए आखिरी हिस्से को भूत-प्रेतों के नाम से किसी चौराहे के एक-तरफ रख दें तथा घर वापस आ जाएं।
इस पूरी क्रिया को करने से सृष्टि की सभी देवशक्तियों को भोग लगता है जिससे वे प्रसन्न होकर आपकी इच्छाएं पूर्ण करने का आशीर्वाद देती है। अगर आपकी कोई समस्या नहीं भी हो तो भी इस उपाय को नियमित रूप से करने पर आपके घर में कभी भी दुर्भाग्य का प्रवेश नहीं हो पाता है तथा जीवन के सभी सुख-आनंद प्राप्त होते हैं।







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शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

घर से निकलने के पहले जरूर रखना चाहिए इन बातों का ध्यान




घर से निकलने के पहले जरूर रखना चाहिए इन बातों का ध्यान


ज्योतिष शास्त्र में शकुन तथा अपशकुन के ऊपर कई ग्रंथ रचे गए हैं। इन ग्रंथों में कई इस प्रकार के प्रयोग बताए गए हैं जिनके उपयोग से आपके सभी काम सहज ही बन जाएंगे। इनमें ऐसी कई छोटी-छोटी बातें बताई गई हैं जिनका ध्यान रखने पर कार्य में सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

उदाहरण के लिए प्रत्येक दिन डेढ़ घंटे राहू काल का समय होता है। इस समय के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। अन्यथा उस कार्य में निश्चित रूप से हानि होती है। परन्तु जो काम इस समय से पूर्व ही शुरु हो चुका है उसे बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। जानिए किस वार को कब राहूकाल होता है।

सोमवार - प्रातः 7.30 बजे से 9.00 बजे तक 
मंगलवार - दोपहर 3.00 बजे से 4.30 बजे तक
बुधवार - दोपहर 12.00 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक
गुरुवार - दोपहर 1.30 बजे से 3.00 बजे तक
शुक्रवार - प्रातः 10.30 बजे से 12.00 बजे तक
शनिवार - प्रातः 9.00 बजे से 10.30 बजे तक
रविवार - सायंकाल 4.30 बजे से 6.00 बजे तक

इसके साथ ही घर से निकलते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे कि हमारा प्रत्येक कार्य सफल हो। आइए जानते हैं कि यात्रा को सफल बनाने के लिए किस दिन घर से निकलते समय क्या करना चाहिए.

सोमवार को यात्रा पर रवाना होने से पहले दर्पण में अपना मुंह देख लेना चाहिए। इससे जिस भी काम के लिए यात्रा पर निकल रहे हैं, वह कार्य अवश्य पूर्ण होता है। 

मंगलवार को घर से बाहर कदम रखने के पहले कुछ मीठा यथा गुड़ खाकर निकलना चाहिए।

बुधवार को साबुत धनिया खाकर निकलना शुभ रहता है।

गुरुवार को घर से बाहर कदम रखने के पहले थोड़ा सा जीरा मुंह में रख लेना चाहिए, इससे पूरा दिन अच्छा बीतता है

शुक्रवार को मीठा दही खाकर घर से बाहर निकलना अत्यन्त शुभ रहता है। 

शनिवार को घर से निकलने के पहले अदरक के ताजा काटे हुए एक-दो टुकड़े मुंह में रखने से काम मे सफलना मिलने के अवसर बढ़ जाते हैं। 

रविवार को घर से निकलने के पहले घर से पान खाकर निकलना शुभ होता है




















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भागवत पुराण- इसलिए होता है महिलाओं को मासिक धर्म


भागवत पुराण- इसलिए होता है महिलाओं को मासिक धर्म



क्या आप जानते हैं कि महिलाओं को होने वाले मासिक धर्म का पुराणों में उल्लेख शामिल है? उन्हें मासिक धर्म क्यों होता है इस पर एक पौराणिक कथा भी मौजूद है जो इन्द्र देव से सम्बन्धित है। भागवत पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार एक बार ‘बृहस्पति’ जो देवताओं के गुरु थे, वे इन्द्र देव से काफी नाराज़ हो गए। इस के चलते असुरों ने देवलोक पर आक्रमण कर दिया और इन्द्र को अपनी गद्दी छोड़ कर भागना पड़ा।
Pauranik katha about Menstruation
असुरों से खुद को बचाते हुए वे सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे और उनसे मदद मांगने लगे। तब ब्रह्मा जी ने उन्हें बताया कि उन्हें एक ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा करनी चाहिए, यदि वह प्रसन्न हो जाए तभी उन्हें उनकी गद्दी वापस प्राप्त होगी। आज्ञानुसार इन्द्र देव एक ब्रह्म-ज्ञानी की सेवा में लग गए। लेकिन वे इस बात से अनजान थे कि उस ज्ञानी की माता एक असुर थी इसलिए उसके मन में असुरों के लिए एक विशेष स्थान था।
इन्द्र देव द्वारा अर्पित की गई सारी हवन की सामग्री जो देवताओं को चढ़ाई जाती है, वह ज्ञानी उसे असुरों को चढ़ा रहा था। इससे उनकी सारी सेवा भंग हो रही थी। जब इन्द्र देव को सब पता लगा तो वे बेहद क्रोधित हो गए और उन्होंने उस ब्रह्म-ज्ञानी की हत्या कर डाली।
एक गुरु की हत्या करना घोर पाप था, जिस कारण उन पर ब्रह्म-हत्या का पाप आ गाया। ये पाप एक भयानक राक्षस के रूप में इन्द्र का पीछा करने लगा। किसी तरह इन्द्र ने खुद को एक फूल के अंदर छुपाया और एक लाख साल तक भगवान विष्णु की तपस्या की।
तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इन्द्र देव को बचा तो लिया लेकिन उनके ऊपर लगे पाप की मुक्ति के लिए एक सुझाव दिया। इसके लिए इन्द्र को पेड़, जल, भूमि और स्त्री को अपने पाप का थोड़ा-थोड़ा अंश देना था। इन्द्र के आग्रह पर सब राज़ी तो हो गए लेकिन उन्होंने बदले में इन्द्र देव से उन्हें एक वरदान देने को कहा।
सबसे पहले पेड़ ने उस पाप का एक-चौथाई हिस्सा ले लिया जिसके बदले में इन्द्र ने उसे एक वरदान दिया। वरदान के अनुसार पेड़ चाहे तो स्वयं ही अपने आप को जीवित कर सकता है।
इसके बाद जल को पाप का हिस्सा देने पर इन्द्र देव ने उसे अन्य वस्तुओं को पवित्र करने की शक्ति प्रदान की।
यही कारण है कि हिन्दू धर्म में आज भी जल को पवित्र मानते हुए पूजा-पाठ में इस्तेमाल किया जाता है।
तीसरा पाप इन्द्र देव ने भूमि को दिया इसके वरदान स्वरूप उन्होंने भूमि से कहा कि उस पर आई कोई भी चोट हमेशा भर जाएगी।
अब आखिरी बारी स्त्री की थी। इस कथा के अनुसार स्त्री को पाप का हिस्सा देने के फलस्वरूप उन्हें हर महीने मासिक धर्म होता है। लेकिन उन्हें वरदान देने के लिए इन्द्र ने कहा की “महिलाएं, पुरुषों से कई गुना ज्यादा काम का आनंद उठाएंगी”।
इस दौरान वे ब्रह्म-हत्या यानी कि अपने गुरु की हत्या का पाप ढो रही होती हैं, इसलिए उन्हें अपने गुरु तथा भगवान से दूर रहने को कहा जाता है। यही कारण है कि प्राचीन समय से ही मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को मंदिर जाने की मनाही थी।






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14 साल बाद जिन्दा लौट आया युवक


सत्य घटना – सांप ने काटा, डाकटरों ने मृत घोषित किया, घरवालों ने गंगा में बहाया, 14 साल बाद जिन्दा लौट आया युवक 



कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाये घट जाती है  जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है।  ऐसी ही एक घटना हाल ही में बरेली के देबरनिया थाना क्षेत्र के भुड़वा नगला गांव में घटी जब उस गाँव का मृत लड़का 14  साल बाद जिन्दा घर लौट आया। लड़के का नाम  छत्रपाल व उसके पिता का नाम नन्थू लाल है। नन्थू लाल के घर बेटे को देखने वालों की भीड़ जमा हो रही है। लड़के के परिजन और गाँव वाले उसको पहचान चुके है। हर जगह छत्रपाल चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस चमत्कार को नमस्कार करने पर मजबूर हैं। आइये अब हम आपको छत्रपाल के मरने से लेकर वापस लौटने कि घटना को विस्तारपूर्वक बताते है।
Snake Story
छत्रपाल
घटना  कुछ इस प्रकार है कि  आज से 14 साल पहले  छत्रपाल अपने पिता नन्थू लाल के साथ खेत में काम कर रहा था जहा पर उसे एक ज़हरीले सांप ने डस लिया।  सांप का ज़हर तेजी से उसके शारीर में फैलने लगा।  उसे तुरंत नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया पर तब तक देर हो चुकी थी, डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन उसके शव को लेकर वापस घर आ गए और उसके अंतिम  संस्कार कि क्रिया शुरू कर दी। हिंदू मान्यता के मुताबिक, पवित्र व्यक्ति, बच्चे, गर्भवती, कुष्ठ रोग और सांप के काटे जाने वाले व्यक्ति का दाह संस्कार नहीं किया जाता है। इन सभी को नदी में बहा दिया जाता है। अतः लड़के के परिजनो ने उसका अंतिम संस्कार करते हुए उसके शव को गंगा में बहा दिया। बहता हुआ छत्रपाल हरि सिंह सपेरे को मिला, जिसने उसका जहर उतार कर उसे फिर से जिन्दा कर दिया। छत्रपाल के साथ हरी सिंह भी उसके गाँव आया हुआ है।
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छत्रपाल व हरी सिंह
सपेरे हरी सिंह ने बताया की उसने यह विद्या अपने गुरु से सीखी थी, क्योंकि वह भी मर कर ही जिन्दा हुआ था। उनके भी शव का अंतिम संस्कार कर गंगा में बहा दिया गया था। बहते हुए वह बंगाल पहुंच गए, जहां पर एक गुरु ने उनको जिन्दा किया। हरी सिंह कहते हैं की एक परंपरा है कि यदि हम किसी को जिन्दा करते हैं तो चौदह साल तक उसे हमारे पास शिष्य बन कर रहना पड़ता है। सिर्फ छत्रपाल ही नहीं बल्कि कई ऐसे शिष्य हैं जो मरकर जिन्दा हुए हैं और उनके साथ घूम रहे हैं।
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हरी सिंह
उन्होंने कहा कि वह सर्पदंश से मरे हुए लोगों की निशुल्क मदद करते हैं और इसके लिए वह जगह-जगह घूमते रहते हैं। साथ ही लाइलाज बीमारियों का भी फ्री में इलाज करते हैं। सांप के काटने से मर चुके दर्जनों लोगों को इन्होने जीवन दान देकर उनके परिजनों को बगैर कीमत वसूले सौंपे हैं। मौत के बाद छत्रपाल को जीवन दान देकर सपेरा हरी सिंह अपने कबीले की परंपरा को बताते हुए कहते हैं कि जिन्दा किया हुआ इंसान कम से कम चौदह वर्ष तक हमारे साथ रहता है। उसके बाद वह अपनी या परिजनों की मर्जी से अपने घर जा सकता है नहीं तो वह जीवन भर हमारे साथ रहे और हमारी तरह बीन बजाय और गुरु शिक्षा ग्रहण करते हुए साधू रूपी जीवन जिए।
सपेरे हरी सिंह दावा करते हैं कि सांप का काटा हुआ इंसान मर जाए और उसके नाक, कान औऱ मुंह से खून नहीं निकला हो तो वह एक महीने दस दिन बाद भी उसे जिन्दा कर लेते हैं। इसी तरह जिन्दा किए हुए कई लोग आज अपने परिवार के साथ जिंदगिया जी रहे हैं। सांप के काटे का इलाज सबसे आसान है। इस इलाज में इस्तेमाल में लाने वाला मुख्य यंत्र साइकिल में हवा डालने वाला पम्प होता है। इसी पम्प और कुछ जड़ी बूटियों से वह मरे हुए लोगों को फिर से जीवन दान देते हैं। बहरहाल जो भी हो यहां सब कुछ फ़िल्मी अंदाज में हुआ। मरे हुए इंसान का दोबारा जिन्दा होकर आना अपने आप में चमत्कार है।





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ज्यादातर लोग देखते है ये सपने, जानिए क्या होता है इनका अर्थ

ज्यादातर लोग देखते है ये सपने, जानिए क्या होता है इनका अर्थ





हम सभी लोग अक्सर सोते हुए सपने देखते है।  वैसे तो सभी को अलग अलग सपने दिखाई देते है लेकिन कुछ सपने ऐसे होते है जो अधिकतर लोगों देखते है।  आइए जानते है कौनसे है वो सपने और स्वपन शास्त्र के अनुसार क्या होता है उनका अर्थ –
1. खुद की मृत्यु का सपना
Most common dreams and their meanings (interpretation) in Hindi
इस सपने को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं, क्योंकि यह इशारा है कि अब आप आगे बढ़ेंगे और सफलता पाएंगे। यदि किसी प्रिय की मृत्यु का सपना देखे,तो समझ जाएं कि जल्द ही उनके जीवन में कुछ नया और अच्छा होने वाला है।
2. कोई पीछा कर रहा है
Most common dreams and their meanings (interpretation) in Hindi
इसका अर्थ है की अवचेतन मन इशारा कर रहा है कि आप किसी अहम रिश्ते या स्थिति को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहे है, पर उसके ख्याल से उबर भी नही प् रहे है। समस्या से भागने के बजाय उसका सामना करना ही उपाय है।
3. सपने में पानी देखना
Most common dreams and their meanings (interpretation) in Hindi
सपने में पानी देखना बहुत आम है। यदि आप ठहरा हुआ पानी जैसे झील या तालाब देखते है, तो यह जीवन की एकरसता की ओर इशारा है। नदी, यानी गतिमान जल देखने का तात्पर्य है कि आपकी जिंदगी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
4. ऊंचाई से गिरना
Most common dreams and their meanings (interpretation) in Hindi
यह सपना जीवन के गलत काम या असंतुष्टि की भावना की ओर इशारा करता है। सम्भव है की किसी बात के डर के कारण आपको बार-बार ऐसे सपने आ रहे हो। इस स्थिति में सबसे पहले अपनी परेशानी की वजह ढूंढे, फिर उसका उपाय करे।
5. टूट गए दांत
Most common dreams and their meanings (interpretation) in Hindi
दांतो का संबंध आत्मविश्वास से है। जो लोग अपनी खूबसूरती को लेकर बहुत ज्यादा सजग होते है,उन्हें इस तरह के सपने आते है। यदि आपको महसूस हो कि सामने वाला आपके बारे में अच्छा नहीं सोच रहा होगा, तब भी ऐसे सपने आते है।
6. सपने में समुद्र दिखना
Most common dreams and their meanings (interpretation) in Hindi
सपने में समुद्र दिखाई दे, तो इसका मतलब है कि आपकी किसी परेशानी का जल्द ही अंत होने वाला है। झरने में भीगने का दृश्य भी निकट भविष्य के शुभ समाचार का संकेत देता है। गंदा पानी दिखे तो गलत संगत में फंस सकते है।
7. देर होना या ट्रेन छूटना
Most common dreams and their meanings (interpretation) in Hindi
देर होने का सपना बताता है कि किसी विशेष काम गड़बड़ हो जाने की आशंका से आप परेशान है। कई बार देर हो जाने के कारण ट्रेन छूटने का सपना भी दिखता है। यह किसी काम की असफलता की ओर इशारा करता है।
8. धोखा खाना अच्छा है
Most common dreams and their meanings (interpretation) in Hindi
यदि सपने में स्वयं को धोखा खाते हुए देखते है तो समझ लीजिये कि आपकी किसी बड़ी परेशानी का जल्दी ही अंत होने वाला है। यह भी सम्भव है कि अापको परेशान करने वाला व्यक्ति आपसे दूर जाने वाला हो। जीवन में सुख आने वाला है।











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