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मंगलवार, 19 जनवरी 2016

Sachin Tendulkar के 10 सबक

Sachin Tendulkar के  10 सबक 


1) बड़ा  सोचिये :

सचिन  जब  भारतीय  टीम  का  हिस्सा  नहीं  थे  तभी  से  वे  लगातार   भारत  के  लिए खेलने  का  सपना  देखते  थे . किसी  भी  cricketer के  लिए  यही  सबसे  बड़ी  बात  हो सकती है  कि  वो  देश  के  लिए  खेले  और  उसे  जीत दिलाये . हमें  भी  अपने -अपने  interest की  field में  जो  सबसे  बड़ा  हो  सकता  है  वो  करने की सोचनी  चाहिए   और  उसे  पाने  के  लिए  जी -तोड़  मेहनत   करनी  चाहिए . In fact आज  की  अपनी  last speech में  Sachin ने  कहा  भी  है ….” सफलता   का  कोई  shortcut नहीं  है .”  So, let’s think big , work hard and achieve what we intend to.

2) संतोष  मत  करिये :

Sachin आज  तक  इतने  record बना  चुके  हैं  कि  उनकी  अलग  से  एक  record बुक  बनायीं  जा  सकती  है . सचिन  रनो  के  अम्बार  पर  खड़े  होकर  भी  हमेशा  रनो  के  लिए  भूखे  दिखे , उन्होंने  कभी  संतोष  नहीं  किया  और  दिन  प्रतिदिन  नए  records बनाते  चले  गए .

Friends, ज्यादातर  लोग  कुछ  बड़ा  achieve करने  के  बाद  satisfy हो  जाते  हैं  कि  चलो  मैंने  इतना  बड़ा काम कर लिया , पर  अगर  Sachin से  सीख  ली  जाए  तो  हमें  खुद  को  और  stretch करना  चाहिए  और  अपनी  क्षमता  को  बढ़ाते  हुए  नयी  उपलब्धियां  हासिल  करनी  चाहिए .

3) अपना  Focus  बनाये  रखिये :

Sachin ने  लगातार  24 सालों  तक  international level पे  cricket खेली  है . ये  करना  बिना  100% focus के  असम्भव  है . Sachin media की  आँखों  का  तारा  होने  के  बावजूद  कभी  cricket से  भटके  नहीं . कभी  उन्हें  फिल्मों  में  काम  करने के   तो  कभी  राजनीति  में  आने  के  offer मिले  पर  Sachin clear थे……  चौबीस  साल  से  उनका  focus बाइस  गज  की  pitch पर  ही  था  और  इसलिए  वे  सर पर उम्मीदों का पहाड़ होते हुए भी किसी  और cricketer से  कहीं  अधिक  लम्बे  समय  तक  और  बेहतर  खेल  पाये .

अगर हम भी  कुछ  बड़ा  करना  चाहते  हैं  तो  हमें भी अपना   focus किसी  एक  चीज  पर  लम्बे   समय  तक बनाये  रखना  होगा।

4) Bounce back कीजिये :

हर  खिलाडी  या  व्यक्ति  के  जीवन  में  बुरा  दौर  आता  है , Sachin भी  कई  बार  out of form हुए  हैं , तो  कभी  किसी  चोट  की  वजह  से  team से  बाहर  बैठे  हैं .  पर  हर  बार  उन्होंने  bounce back किया  है .

मुझे  याद  है  Jan 2006 में  Times of India में  बड़ी  सी  headline आयी  थी….

ENDULKAR….  जिसका  मतलब  था  Sachin’s career is over…पर  उसी   paper को   24 Feb 2012 को  एक  नयी  headline देनी  पड़ी ….

.हमें  क्रिकेट  के  इस  भगवान्  से  सीख  लेनी  चाहिए ,कितनी  ही  बार  हमारी  life में  problems आती  हैं  और  हम  उनके  सामने  घुटने  टेकने को  तैयार  हो  जाते  हैं  … let’s not do that…Sachin से  सीख  लेते  हुए  हमें  भी  तमाम  मुश्किलों  के  बावजूद  हर  बार  बाउंस – बैक   करना  चाहिए   और  अपने  लक्ष्य  को प्राप्त  करना  चाहिए .

5) कभी  घमंड  मत  करिये  : “Sachin ने  इतने records बनाने  के  बाद  भी  कभी इतना  attitude  show  नहीं  किया जितना लोग  उनके records  याद  कर  के  show करते  हैं .”

Sachin इतना  कुछ  achieve कर  चुके  हैं  फिर  भी  वो  next door guy ही लगते  हैं . ये  आसान  नहीं  है , और भी नहीं जब लोग आपको इंसान से भगवन बना दें…और लोग ही क्यों सचिन की तो उनके साथी खिलाड़ी भी तारीफ  करते नहीं थकते , ऑस्ट्रलियाई बल्लेबाज Matthew Hayden ने तो यहाँ तक कह दिया- ” मैंने भगवान् को देखा है, वो टेस्ट मैचों में इंडिया की तरफ से नंबर चार पर बैटिंग करते हैं.”
हम  रोज  देखते  हैं किस  तरह  से  थोडा पैसा आने और  media attention मिलने  से  लोगों  का  दिमाग  सातवें  आसमान  पर  पहुँच  जाता  है  पर  Sachin तो  Sachin हैं , perhaps देश  के  सबसे  बड़े  icon होने  के  बाद  भी  वे  इतने  simple, sober और  down to Earth हैं  कि  अपने  आप  ही  उनके  लिए  मन  में  respect पैदा  हो  जाती  है . इसलिए , हमें  भी कभी success को अपने सर पर सवार नहीं होने देना चाहिए और नयी बुलंदियों को  छूते हुए भी  अपने   पैर  ज़मीन  पर  रखने  चाहिएं .

6) Team player बनिए :

Sachin ने  अपने  career में  Krishnamachari Srikanth से  लेकर  Dhoni तक  बहुत  से  captains के  साथ  खेले ,  और  हर  किसी  के  साथ  उनकी  relation बहुत  अच्छी  रही . इतना  बड़ा  खिलाडी  होने  के  बावजूद  उनके  साथ  किसी  तरह  की  ego problem नहीं  देखने  को  मिली .
सचिन  एक  सम्पूर्ण  team player हैं  जो अपने  हितों  से  पहले  team के  हित  को  रखता  है  और  जिसके  लिए  उसके  personal achievements से  कहीं  ज़रूरी  Team की  जीत  है.
जब सुनील गावस्कर से पूछा  गया कि सचिन को सबसे ज्यादा अफ़सोस किस बात का रहेगा तो उन्होंने कहा, ” उस समय का जब सचिन ने रन बनाये और भारत हार गया और उस समय का जब सचिन ने रन नहीं बनाये और भारत हार गया। ” , इसी से पता चलता है कि सचिन किनते बड़े टीम प्लेयर थे और उनसे सीख लेते हुए हमें भी as a team player काम करना चाहिए .

7 ) अपनी  कमियों  को  मानिये  :

एक  समय  ऐसा  आया  जब  Sachin को  कप्तानी  सौंपी  गयी , पर  as a captain वो अच्छा  नहीं  कर  पा  रहे  थे . ऐसे  में   Sachin ने  खुद  को  पीछे  रखते  हुए  किसी  और  को  कप्तान  बनाया  जाना  उचित   समझा . उन्होंने  ये  सब  बड़ी  सहजता  के  साथ  किया  और  अपना  ध्यान  उसपर  लगाया   जो  वो  सबसे  अच्छे  ढंग   से  करते  हैं – बल्लेबाजी .
पर  captain न  होने  के  बावजूद  वे  एक  अच्छे   leader बने  रहे  और  साथी  कप्तानों  और  खिलाडियों  को  अपने  अनुभव  के  आधार  पर  हमेशा  guide करते  रहे .
ये  एक  fact है  कि  सबके  अंदर  कुछ  कमियां  होती  हैं , ज़रूरी  है  उन्हें  acknowledge करना  और  उनसे  पार  पाना . Friends, problem का  solution ज़रूरी  है , चाहे  वो  आप  खुद  करें  या  किसी  और  के  through करा  लें .  Sachin की  तरह  हमें  भी  अपनी  कमियों  को  समझना  चाहिए  और  उनका solution खोजना चाहिए  .

8) पुराने लोगों  को मत भूलिए   :

अभी  एक -दो  दिन  पहले  ही  Sachin के  गुरु   Shri Ramakant Achrekar का  statement आया , “ सचिन  उन्हें  गुरु  मानता  है …ये  उसकी  महानता  है. ”
Sachin जब  भी  कोई  series या  tournament खेलने  जाते थे  तो  उससे  पहले  अपने  गुरु  से  ज़रूर  मिलते  थे  और  उनका  आशीर्वाद  लेते  थे . इतने  खिलाडी   हैं  देश  में पर  मैंने  और  किसी  में  अपने  गुरु  के  लिए  इतनी  respect नहीं  देखी . सच  में   सचिन  महान  हैं  उनके  अंदर  बहरतीय  मूल्यों  को  समावेश   साफ़  दीखता  है .
Sachin सिर्फ  अपने  गुरु  के  लिए  ही  ऐसे  नहीं  हैं , वे  आज  भी  अपने  पुराने  यार -मित्रों  और  साथी  खिलाडियों   के  लिए  वही  पुराना  सचिन  हैं , और  समय  समय  पर  उनकी  मदद   करते  रहते हैं.
सचिन ने आज अपनी फेयरवेल स्पीच में कहा भी , ” दोस्तों के बिना ज़िन्दगी अधूरी है ! “
हमें  भी कामयाब होने के बाद उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए जो कहीं न कहीं हमारे सफ़र का हिस्सा रहे हैं .

9) अपने  काम  से  अपना  जवाब  दीजिये :

Sachin पर  ना  जाने  कितनी  बार  retire होने  का  pressure आया , कितनी  ही  बार  आलोचकों  ने  उनके  खेल  में  कमियां  निकालीं  और  जो   लोग  cricket का  ‘C’ भी  नहीं  जानते  वे  भी  नसीहत  देने  में  पीछे  नहीं  रहे  . पर  सचिन  ने  कभी  भी आलोचकों को  मुंह  से   जवाब  नहीं  दिया , वे   हर  बार  मैदान  पर  गए  और  उनके बल्ले ने बात की .
आपके  profession में  भी  ऐसा  वक़्त  आ  सकता  है  जब  चीजें  आपके  अनुकूल  न  हों , ऐसे  में  अपने  temper lose करने  से  और  औरों  को  भला -बुरा  कहने  से  बेहतर  होगा  कि  सचिन  की  तरह  हम  भी  अपने  काम  के  ज़रिये  लोगों  का  मुंह  बंद  करें।

10) कुछ  और  बनने  से  पहले  एक  अच्छा  इंसान  बनिए :

सचिन  को  आज  जो  सम्मान  , जो  प्यार  मिल  रहा  है  , वो  सिर्फ  उनके  खेल  की  वजह  से  नहीं  है . सचिन  एक  महान  खिलाड़ी  होने  के  साथ – साथ  एक  बहुत अच्छे  इंसान  भी  हैं . वो  high officials से  लेकर  support staff तक  को  बराबर  सम्मान  देते   हैं . कभी  किसी  विवादों  में  नहीं  पड़ते  और  समय -समय  पर  सामजिक  कार्यों  में  भी  हिस्सा  लेते  रहे  हैं .
Friends, सचिन सही मायने में  “भारत  रत्न ” हैं  औऱ आज उनके  retire होने  के  साथ ही क्रिकेट का  एक  बहुत  बड़ा  अध्याय  ख़त्म  हो  गया  है   और  साथ  ही  ख़त्म  हो  गया  है  करोड़ों  हिन्दुस्तानियों   द्वारा  पूछे  जाने  वाला वो सवाल —सचिन  ने  कितने  रन  बनाये ?

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