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गुरुवार, 28 जनवरी 2016

रिश्ता खत्म होने का साफ संकेत देती हैं ऐसी बातें

रिश्ता खत्म होने का साफ संकेत देती हैं ऐसी बातें


प्यार

रिश्ते बनाना आसान है, शायद उन्हें तोड़ना भी आसान ही है लेकिन रिश्ते बनाकर उन्हें हर पल टूटने से बचाना काफी कठिन है। उन सभी के लिए जो उस रिश्ते का हिस्सा हैं, यह एक विशेष कार्य बन जाता है कि किस तरह से रिश्ते को मजबूत बनाया जाए।

रिश्ता

रिश्ता चाहे कोई भी हो, मां-संतान का, पिता और संतान का, भाई-बहन का या पति-पत्नी का... सभी के बीच तकरार तो आती ही है। लेकिन रिश्ते की मजबूती इसी बात में है जब बड़ी से बड़ी चोट लगने पर भी उसके ज़ख्म प्यार के मरहम से भर दिए जाएं। लेकिन तब क्या जब हज़ारों दफा मरहम लगाने पर भी ज़ख्म ना भरे?

रिलेशनशिप

प्रेमी-प्रेमिकाओं के रिश्ते में ऐसी दिक्कत काफी आती है, एक लंबे अरसे से रिलेशनशिप चलाने के बाद एक दौर ऐसा आता है जब छोटी-छोटी बातें एक बड़े झगड़े में तब्दील हो जाती हैं। और चाहकर भी उन्हें सॉल्व करने का रास्ता नहीं मिलता। हल निकालना तो दूर की बात है, कई बार झगड़ा किस बात पर है यह ही पता नहीं लगता।

रिश्ते की कमज़ोरी

इसलिए आज हम यहां आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो एक रिश्ते की कमज़ोरी को दर्शाती हैं। यह बातें बताती हैं कि चाहे आप कितनी ही कोशिश कर लें, यह रिश्ता अपने आखिरी चरम सीमा पर आ गया है और खत्म हो जाने की कगार पर है। यदि आप भी लव रिलेशनशिप में हैं, एवं आगे की स्लाइड्स में बताई जा रही एक-एक बात आपको भी अपने रिश्ते में नज़र आती है तो सावधान हो जाइए। क्योंकि यह बातें आपके रिश्ते के जल्द ही खत्म हो जाने के संकेत देती हैं

जब केवल रूठना मनाना हो

कभी-कभी साथी का रूठ जाना और फिर उसे प्यार से मनाना, यह रिश्ते की खूबसूरती होती है। लेकिन तब क्या जन साथी बार-बार, बिना किसी विशेष कारण के रूठ जाए और बात ना करे? तब भी रिश्ते को बनाए रखने की होड़ में लोग साथी को मनाते हैं, गलती ना होते हुए भी माफी मांगते हैं लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं होता।

रूठने-मनाने का सिलसिला

यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है, दिन में एक या दो बार नहीं बल्कि हर थोड़ी देर बाद उसे मनाना पड़ रहा है तो यह रूठने-मनाने का सिलसिला हमेशा के लिए खत्म कीजिए। क्योंकि इससे आपको कोई लाभ नहीं मिलेगा। आप केवल और केवल अपने आत्म सम्मान की धज्जियां उड़ाएंगे।

केवल समझौता

जब रिश्ते में प्यार के बजाय पल-पल का समझौता होने लगे, तो वह रिश्ता किसी काम का नहीं रहता। उनके हिसाब से आप उठें, उनके हिसाब से सो जाएं, वे कहें तो आप कहीं घूमने का प्लान बनाएं नहीं तो घर बैठे रहें। कुछ भी ऐसा ना करें जिससे वे नाराज़ हों, तो यह कोई रिश्ता नहीं वरन् गुलामी है।

चिक-चिक होने लगे

कुछ समय पहले मैंने सोशल मीडिया पर एक जबर्दस्त मैसेज पढ़ा था, वह कुछ इस प्रकार था – यदि आपका रिलेशनशिप आपको हरदम दर्द दे, आपको रुलाए तो शांति से एक जगह बैठ जाएं और तसल्ली से खुद से पूछें कि आप एक इंसान के साथ रिश्ता निभा रहे हैं या फिर एक प्याज़ के साथ? जो आपको रोज़-रोज़ रुला रहा है।

एक बड़ी चोट

यदि आप भी इस बात से सहमत हैं और अगर आपको भी लग रहा है कि आप एक इंसान को नहीं बल्कि शायद एक प्याज़ को डेट कर रहे हैं तो उसे तुरंत रास्ते से हटा दें। पल-पल मरने से अच्छा एक ही बार में एक बड़ी चोट लगाना होता है, कम से कम कुछ समय के बाद आप उस दर्द से उभर जाएंगे।

भविष्य, जिसकी जिम्मेदारी है सिर्फ आपकी

जब एक रिश्ते को दो लोग आरंभ करते हैं तो उसे सफलतापूर्वक चलाने से लेकर उसे निभाना और उसे भविष्य में एक नाम देना भी दोनों की जिम्मेदारी होती `है। यदि यह काम केवल कोई एक करने लगे तो उस रिश्ते का कोई भविष्य नहीं।

प्लानिंग

घर वालों से बात कैसे करनी है, क्या बात करनी है, शादी कैसे होगी, शादी करने के लिए क्या प्लानिंग हो, यह सभी बातें यदि दोनों की बजाय केवल आप ही सोच रहे हैं तो मान लीजिए कि आगे चलकर दिक्कत होगी। यदि ऐसे इंसान के साथ शादी हो भी गई तो खुशियों के लिए भी आपको अकेले ही संघर्ष करना होगा।

जब रिश्ता बोझ बन जाए

शायद रिश्ते में आ रही यही दरारें रिश्ते को एक बोझ बना देती हैं। कई बार लोग इन समस्याओं का समझदारी से हल निकालकर, रिश्ते को वापस ट्रैक पर लाने की कोशिश भी करते हैं। लेकिन फायदा क्या? जब तक रिलेशनशिप में दोनों ही खुशियों को पाने की कोशिश ना करें, तब तक रिश्ता कामयाब नहीं होता।

खुद को झूठा दिलासा ना दें

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने साथी से बहुत दिनों बाद मिलने वाली खुशी को भी बड़ी खुशी मान लेते हैं। और भूल जाते हैं कि वह असल खुशी नहीं है। खुद को धोखा ना दें, रिश्ते का असल अहमियत क्या रह गई है उसे पहचानें।

सवाल लेकिन कोई जवाब नहीं

रिश्ते में बार-बार परेशानी आने पर हमारे मन में कई सवाल आते हैं। ऐसा क्यों हो रहा है, पहले जैसा कुछ क्यों नहीं है? अंत में हम फिर साथी से सीधा सवाल कर भी लेते हैं, क्या परेशानी है? ढंग से बात क्यों नहीं करते? दिक्कत कहां आ रही है?

सवाल लेकिन कोई जवाब नहीं

रिश्ते में बार-बार परेशानी आने पर हमारे मन में कई सवाल आते हैं। ऐसा क्यों हो रहा है, पहले जैसा कुछ क्यों नहीं है? अंत में हम फिर साथी से सीधा सवाल कर भी लेते हैं, क्या परेशानी है? ढंग से बात क्यों नहीं करते? दिक्कत कहां आ रही है?

सवालों का जवाब ना मिले

लेकिन जब इतने सारे सवालों का जवाब ना मिले तब? ता मान लीजिए कि आपका पार्टनर आपको महत्व नहीं दे रहा। उसको आपके सारे सवाल फिजूल लगते हैं। यदि ऐसा है तो उसे अपना महत्व समझाओ और उसके हाल पर छोड़ दो।

जब बात तुम और मैं पर आ जाए

नए-नए रिश्ते में हम मेरा और तुम्हारा से ‘हमारा’ पर आ जाते हैं। अपनी बातें, चीज़ें और हर भावना बांटते हैं। दो रुह एक जान मानते हैं, लेकिन कुछ समय के बाद सब बदल जाता है।

रिश्ते में प्यार नहीं बचा

जब छोटे-छोटे झगड़ों के बाद बात मेरे-तुम्हारे पर आ जाए तब मान लीजिए कि रिश्ते में प्यार नहीं बचा। यानि अब आप के बीच दरार आ गयी है और आप उसे चाहे जितना पाटें ये बढ़ती ही जायेगी। ऐसे कल के अफसाने  को एक खूबसूरत मोड़ देकर भूलना ही अच्‍छा है।

बस शिकायतें!

बहस, तकरार और शिकायतें... जब रिश्ते में प्यार की बजाय केवल इन तीन चीज़ों पर जोर आने लगे तब समझ जाएं कि रिश्ता खराब हो गया है। झगड़ा किस बात पर हुआ है, उसकी क्या जड़ है और उसे कैसे हल किया जाए... जब इसे छोड़कर केवल एक-दूसरे को शिकायत करन और इल्ज़ाम लगाना एक कमज़ोर रिश्ते की निशानी है।

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