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शनिवार, 16 जनवरी 2016

जानिये बच्‍चों को सज़ा देना सही है के गलत

जानिये बच्‍चों को सज़ा देना सही है के गलत


जानिये बच्‍चों को सज़ा देना सही है के गलत | jaaniye bacho ko saja dena sahi hai ke galat
क्‍या बच्‍चों को सजा (punishment) देना वाकई में उन्‍हें सुधारने में कारगर होता है? वैसे, अभिभावक अक्‍सर परेशान हो जाते हैं जब बच्‍चे अपनी मनमानी करते हैं और बात नहीं सुनते हैं। ऐसे में उन्‍हें लगता है कि अब थप्‍पड़ ही मारना सही रहेगा। लेकिन क्‍या ऐसा करना सही रहेगा? ऐसा करने से बच्‍चे ड़र जाते हैं न कि आपकी सहमत होते हैं। उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और उनके मन में आपके प्रति नकारात्‍मक भावना (negative thinking) आ सकती है।
सबसे बेहतर तरीका रहता है कि आप बच्‍चों के व्‍यवहार (behavior) का अध्‍ययन करें और उनकी इच्‍छा व समस्‍या को जानने का प्रयास करें। सज़ा देना बिना सोची-समझी क्रिया होती है जिससे आप सिर्फ गुस्‍सा कर सकते हैं न कि बच्‍चे को सही से समझा सकते हैं। ऐसा करने से बच्‍चे का विकास (growth) सही तरीके से नहीं हो पाता है।
हम आपको ये नहीं कह रहे हैं कि आप अपने बच्‍चे को हमेशा पैम्‍पर करें, उसे भी अपना निर्णय लेने और अपनी बात कहने का मौका दें लेकिन उस पर हावी न हों।
आइए जानते हैं कि बच्‍चे को सज़ा क्‍यूं न दें:
1. बुरी भावना ला देता है: सज़ा, बच्‍चे में दुर्भावना ला देता है। उसे आपसे चिढ़ (irritation) होने लगती है और वह आपकी बात न सुनने के लिए खुद को मानसिक रूप (mentally prepare) से तैयार कर लेता है। ऐसा भी हो सकता है कि आपका बच्‍चा आपसे नफ़रत करने लग जाएं।
2. बच्‍चे को विद्रोही बना दे: अगर आप बच्‍चे को लगातार डांटते रहते हैं तो उसमें विद्रोह की भावना पैदा हो सकती है। उसे छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ मच सकती है और वह अपनी बात मनवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
3. डर या फोबिया पैदा कर दे: बच्‍चे को डांटने से उसमें डर या फोबिया (phobia) हो सकता है। उसके मन में भय बैठ सकता है जिसकी वजह से वह ताउम्र सही दिशा में आगे बढ़ने से कतराता रहेगा। बच्‍चे का मनोवैज्ञानिक विकास (mental growth) इस कारण से रूक सकता है।
4. हीन भावना का विकास: बच्‍चे को लगातार सज़ा देने से उसमें हीन भावना का विकास हो सकता है। उसे ऐसा लग सकता है कि वो बेकार है और अपनी जिन्‍दगी में कभी कुछ नहीं कर पाएगा। इसलिए, उत्‍तम विकल्‍प रहेगा कि आप अपने बच्‍चों को प्‍यार से हैंडल (handle with love and care) करें। सज़ा तभी दें, जब वो बहुत ऊधम मचाएं या शैतानी दें।

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