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शनिवार, 23 जनवरी 2016

आज भी हनुमान जी धरती पर

ये सबूत गवाह है की आज भी हनुमान जी धरती पर है और इस खास मन्त्र के जाप से वो हो जाते है प्रगट


ये बात तो सब जानते है की कलियुग में एकमात्र हनुमान जी ऐसे देवता है जो धरती पर है, पर सवाल ये उठता है की अगर वो धरती पर है तो कहा क्योंकि मूर्ति में तो आप हर देवता के दर्शन करते है l हम आज ये बताने जा रहे है की पवनपुत्र हनुमान सिर्फ मूर्ति में ही नहीं हकीक़त में धरती में विराजमान है और ऐसा माना जाता है की वो हिमालय के जंगलो में वास करते है !

त्रेतायुग के अंत में जब भगवान् राम बैकुंठ धाम को पधार गए थे उस वक़्त कोई था जो कलियुग के अंत तक धरती पर भगवान् राम की भक्ति और जन कल्याण हेतु रुका l कलियुग में एकमात्र भगवान् बजरंग बली है जिनका अस्तित्व आपको इस धरातल पर मिलेगा जो आपको बताएगा की हिन्दू धर्म कितना प्राचीन और महत्वपूर्ण है l
आप जो अब पढने जा रहे है वो न ही सिर्फ दिलचस्प है बल्कि अविश्वसनीय भी, इसे पढने और जानने के बाद आपका भगवान् के प्रति श्रधा व विश्वास और दृढ होगा….जय बजरंग बली !
आगे जानिये की रामायण काल खत्म होते ही हनुमान जी  कहा और किस जगह साक्षात भ्रमण करते रहे और उन्होंने कौन सा ऐसा मन्त्र दिया जिसके जाप से वो स्वयं प्रगट हो जाते है पर उस मन्त्र के जाप के लिए भी आपको 2 शर्ते पूरी करनी पड़ती है, और आज के वक़्त को देखते हुए हर किसी में इतना सामर्थ्य नहीं की वो ये दो शर्ते पूरी कर पाए अगर वो शर्ते या नियम कोई पूरी करता है तो वो प्रजाति श्री लंका के जंगलो में रहती है और हर ४१ साल बाद उनकी पीढ़ी हनुमान जी के दर्शन प्राप्त करती है l 
बजरंग बली अमर है उन्हें वरदान है की वो इस कलियुग में धरती पर राम भक्तो के कल्याण के लिए रहेंगे जहाँ कही भी राम कथा और राम कीर्तन होगा वो वो वहां अदृश्य रूप से प्रस्तुत रहेंगे l लेकिन ये तो बात हुई अदृश्यता की अब बात करते है उनके साक्षात् स्वरूप की l त्रेतायुग के बाद जब द्वापरयुग आया जिसमे भगवान् कृष्ण के काल के समय भी कई जगह हनुमान जी का प्रसंग सुनने को मिला l कलियुग में सन 1300 में संत माधवाचार्य के आश्रम में हनुमान जी का आगमन हुआ था उसके बाद सन 1600 वो तुलसीदास जी को रामायण का हिंदी अनुवाद लिखने के लिए कहने आये थे, यहाँ पर सिलसिला थमा नहीं रामदास स्वामी , राघवेन्द्र स्वामी, श्री सत्य साईं बाबा इन सब ने पवनपुत्र हनुमान के साक्षात्कार किये है l
आगे जानिये की श्री लंका में वो कौन सी कम्युनिटी है जो आधुनिकीकरण से खुद को काटे रखा और और अपने पूर्वजो द्वारा निर्देश दिए हुए नियमो से बजरंग बली का आवाहन करती है ! 

धरती पर जहा जहा भी हनुमान ने विचरण किया वहा पर उनके चरण चीन्ह देखे जा सकते है l 

ये है वो मंदिर जो बजरंग बली के रहने के स्थान के नाम से जाना जाता है, यह स्थान तमिलनाडू राज्य के रामेश्वरम के  नज़दीक गंद्मादना पर्वत पर स्थित है और ऐसा माना जाता है की ये ही वो स्थान है जो हनुमान जी का रेजिडेंस प्लेस कहलाता है l
क्या आप ये जानते है की वो आज भी लोगो की मदद करने के लिए आते है पर अदृश्य रहते है, दृश्य सिर्फ एक ख़ास समुदाय के लोगो को है जो श्री लंका के जंगलो में रहते है l हनुमान जी ने एक मन्त्र दिया था उन लोगो को जिसके ज़रिये वो पवनपुत्र हनुमान का आवाहन करेंगे और उनके दर्शन प्राप्त कर सकेंगे पर उस मन्त्र का कोइ दुरूपयोग न करे इसके लिए हनुमान जी ने 2 शर्ते या कहे नियम रखे जिसका सही अर्थ केवल इसी प्रजाति के लोग ही समझते है 

कालतंतु कारेचरन्ति एनर मरिष्णु , निर्मुक्तेर कालेत्वम अमरिष्णु


ये वो चमत्कारी मन्त्र है जिसके पाठ और जाप से आप पवनपुत्र हनुमान के दर्शन प्राप्त कर सकते है l 
मन्त्र तो आपको पता चल गया लेकिन इसमें 2 नियम महत्वपूर्ण रखते है जो अनिवार्य है

पहली ये की आपकी अंतरात्मा को ये ज्ञात हो की उसका क्या सम्बन्ध है बजरंग बली से अर्थात वो एक भक्त का रिश्ता रखता है या शिष्य का या भाई बंधू सम्बन्ध का l सिर्फ इस मन्त्र को आजमाने के लिए ही नहीं आप उच्चारण कर सकते l

दूसरी कंडीशन ये की जिस जगह पर आप इस मन्त्र का उचारण कर रहे होंगे वहा से तकरीबन 980 मीटर की दूरी पर केवल वही मनुष्य उपस्थित होंगे जिन्होंने पहली औपचारिकता पूरी करी हो l अर्थात अगर वहा पर कोई मनुष्य उपस्थित भी हो तो केवल वो जिसकी अंतरात्मा को बजरंग बली से क्या सम्बन्ध है पता हो l
आगे जानिये की पवनसुत हनुमान ने किसकी सेवा से प्रसन्न होकर ये मन्त्र वरदान स्वरूप दिया और आज भी वो लोग जब हनुमान जी का आवाहन करते है तो आखिरी बार वो कब आये थे l

श्री लंका में एक जगह है पिदुरुथालागला जहाँ के पिदुरु पर्वत के जंगलो में एक विशेष जनजाति के लोग रहते है जिनके पूर्वजो को हनुमान जी ने ये मन्त्र वरदान स्वरूप दिया था l 

भगवान् राम के जाने के बाद हनुमान जी जंगलो में विचरण करते रहे और ऐसे ही जंगलो में वास करते रहे l

उन दिनों हनुमान जी लंका की और चले गये थे जहा रावन का भाई विभीषण राज करता था, उस वक़्त उन्होंने जंगलो में ही रहना शुरू कर दिया था जहा के कुछ समुदाय के लोगो ने उनकी सेवा करी l 

उनकी सेवा से प्रसन्न होकर पवनपुत्र ने जाते जाते कहा ” मै तुम्हारी सेवा से प्रसन्न हुआ फलस्वरूप मै तुम्हे एक मन्त्र वरदान स्वरूप देता हूँ “

कालतंतु कारेचरन्ति एनर मरिष्णु , निर्मुक्तेर कालेत्वम अमरिष्णु

“जब भी तुम्हे मेरे दर्शन प्राप्त करना हो इस मन्त्र का जाप करना और मै एक प्रकाश की तीर्व्गति के सामान तुम तक पहुच जाऊंगा

परन्तु मन्त्र प्राप्त करने के बाद उस समुदाय के मुखिया ने चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा की “प्रभु हम इस मन्त्र को सुरक्षित रखेंगे परन्तु अगर इसे किसी ने प्राप्त कर के दुरूपयोग करना चाहां तब क्या होगा ”

चिंतित मुखिया की बाते सुनकर हनुमान जी ने उत्तर दिया की “इसे मन्त्र को जाप करने से पहले उस व्यक्ति के मेरे से सम्बन्ध पता होना अनिवार्य है “
यानी अगर कोई भी इस मन्त्र को जपता है तो वो ये दो औपचारिकताये पूरी करेगा l
लेकिन उस व्यक्ति की चिंता अभी समाप्त नहीं होती वो आगे और प्रश्न करता है जिसके फलस्वरूप उनके वंशज आज इसका लाभ उठाते है जिसे पूरी दुनिया से स्वीकार किया है 
मुखिया ने कहा “प्रभु आप ने हमे आत्मज्ञान से परिपूर्ण किया परन्तु हमारे आने वाली पीढी का क्या हम तो जान गये की हम कौन है हमारा पूर्व जन्म क्या था हम किस लिए जन्मे है और मर कर कहा जायेंगे लेकिन आने वाली पीढ़ी तो ये नहीं जानती होगी की उसका आपसे क्या सम्बन्ध है तो क्या उन्हें आत्म ज्ञान की प्राप्ति नहीं होगी “
आगे जाने फिर क्या कहा भगवान् ने ….
हनुमान जी ने कहा “मै वचन देता हूँ की मै हर 41 साल बाद इस तुम्हारे समुदाय के पास आऊंगा और उन्हें आत्मज्ञान दूंगा l वक़्त के अंत तक केवल तुम्हारी प्रजाति होगी जो इस मन्त्र का जाप करने में सक्षम होगी और मेरे दर्शन प्राप्त कर सकेगी ”  l
ये लोग आज भी  पिदुरु पर्वत के जंगलो में वास करते है और हाल ही में ये तब चर्चा का विषय बने जब इन्हें कुछ अजीबो गरीब कार्य करते देखे गए l
आगे जानिए की वो कौन से कार्य है 
ये वो लोग हो जो आज की आधुनिक दुनिया से खुद को काटे है यानी इनका अब की दुनिया से कोई वास्ता नहीं l जब इस बात का पता लगया गया की वो क्या अजीबो गरीब कार्य है जिसे उन्हें करते देखा गया तो उन्होंने बताया की वो है “चरण पूजा” जी ये वो तब करते है जब हनुमान जी साक्षात् उनके सामने प्रगट होते है l अब इससे अंदाज़ा लगाये की जिन्होंने ये काम उन्हें करते देखा वो हनुमान जी को नहीं देख पाए उन्हें लगा की ये आखिर किसके साथ कर रहे है l
इसका मतलब आप या हम जैसे आम प्राणियों को उनके दर्शन इतने आसानी से प्राप्त नहीं होंगे l
हैरानी की बात ये की 2014 में उन्हें ये करते पाया गया ….आगे जानिये पूरी कहानी 
27 मई 2014 ये वो दिन था जब उन लोगो ने 41 साल बाद हनुमान जी के दर्शन प्राप्त किये थे और उनसे आत्मज्ञान प्राप्त किया था l अंदाजा लगा लीजिये की अब पुनह ये वक़्त 2055 में दौहराया जाएगा जब वो दोबारा इस समुदाय के लोगो को ज्ञान देने आयेंगे l इसका अर्थ ये भी है की अगर इनमे से किसी को भी हनुमान जी के दर्शन प्राप्त करने होते है तो वो इस मन्त्र का जाप करके उन्हें बुलाता है l सबसे दिलचस्प बात ये की इस समुदाय का मुखिया एक बुक बनाता है जिसमे वो हनुमान जी के आगमन से लेकर उनके शब्द, उनकी क्रियाँए, उनके उपदेश सब कुछ लिखता है l
आगे जानिये 2014 में जब वो आये थे तब क्या क्या नोट किया यहाँ के समुदाय के मुखिया ने l 
ये एक बहुत ही लम्बी किताब बन चुकी है जिस पर अब सेतु एशिया नामक धार्मिक संसथान इस पर शोध कर रहा है और अब तक 6 महीने में वो इस किताब में से केवल 3 अध्याय को ही समझ पाए है जिसमे बताया गया है की जब हनुमान जी यहाँ आते है तो क्या क्या करते है यानि इस किताब में वो शब्द है जो इस समुदाय का मुखिया लिखता है l
वो तीन अध्याय

भगवान् हनुमान जी का आगमन 

इसमें उल्लेख किया गया है की पिछले साल हनुमान जी को पिदुरु के पर्वतों में देखा गया और उन्होंने एक नवजात शिशु के पूर्व जन्म के बारे में जो दो माताओं द्वारा उत्पन्न हुआ कहानी बताई l 

दूसरा अध्याय 

हनुमान जी के साथ शहद निकालना 

अगले दिन हनुमान जी जंगल के समुदाय के लोगो के साथ शहद निकालने गये जो की बेहद रोचक था l

 
तीसरा अध्याय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उन्होंने श्लोक का अर्थ बताया है 

समय के जाल में भगवान् हनुमान 

इस अध्याय में हनुमान जी ने श्लोक का पूरा सार बताया है जो वक़्त को परिभाषित करता है भगवान् की परिभाषा में, आप और हम जब टाइम की बात करते है तो हमे घडी याद आती है लेकिन हनुमान जी ने श्लोक कालतंतु कारेचरन्ति एनर मरिष्णु का अर्थ समझाते हुए कहा वो जो समय के तार के जाल में चलता है l

पूरी दुनिया को इंतज़ार है की आगे का अध्याय कब लोगो के सामने आये जिससे वो भी इस मन्त्र के औपचारिकताये को पूरा करके हनुमान जी के दर्शन प्राप्त कर सके l 




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