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मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

पंचक के समय ना करें ये कार्य, झेलने पड़ सकते हैं घातक परिणाम

पंचक के समय ना करें ये कार्य, झेलने पड़ सकते हैं घातक परिणाम


16 दिसंबर, 2015 दोपहर 1 बजकर 13 मिनट से पंचक प्रारंभ हो रहा है और यह 20 दिसंबर, 2015 शाम 6 बजकर 45 मिनट चलेगा। इन पांच दिनों में कोई भी शुभ कार्य करना सही नहीं माना जाताजानकारों की मानें तो इन पांच दिनों में ना तो दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करनी चाहिए, ना घर की छत या खाट बनवानी चाहिए और ना ही ईंधन का सामान इकट्ठा करना चाहिए।ज्योतिषाशास्त्रियों के अनुसार पंचक भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं। आइए जानते हैं पंचकों के प्रकार।

अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो यह रोग पंचक कहा जाता है। इसके प्रभाव में आकर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करता है।इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ कार्य निषेध माना गया है। मांगलिक कार्यों के लिए यह पांच दिन अनुपयुक्त हैं।

सोमवार से शुरू हुआ पंचक राज पंचक होता है, यह पंचक काफी शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सरकारी कार्यों में सफलता हासिल होती है और बिना किसी बाधा के संपत्ति से जुड़े मसलों का निदान होता है।

मंगलवार से शुरू हुए पंचक के दौरान आग लगने का भय रहता है जिसकी वजह से इस पंचक को शुभ नहीं कहा जा सकता। इस दौरान औजारों की खरीददारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए।हां, इस दौरान कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों और अधिकार हासिल करने जैसे मसलों की पहल की जा सकती है, क्योंकि उनमें सफलता मिलने की संभावना होती है।

शनिवार से शुरू हुआ पंचक सबसे ज्यादा घातक होता है क्योंकि इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। अगर इस दिन किसी कार्य की शुरुआत की गई तो व्यक्ति को मृत्यु तुल्य परेशानियों से गुजरना पड़ता है।
शनिवार से शुरू हुए पंचक के दौरान कोई भी जोखिम भरा कार्य नहीं करना चाहिए। व्यक्ति को चोट लगने, दुर्घटना होने और मृत्यु तक की आशंका रहती है।

अगर पंचक बुधवार या बृहस्पतिवार से प्रारंभ हो रहे हैं तो उन्हें ज्यादा अशुभ नहीं कहा जाता। पंचक के मुख्य निषेध कर्मों को छोड़कर कोई भी कार्य किया जा सकता है। आगे की स्लाइड्स में जानते हैं क्या है पंचक के मुख्य नियम।

विद्वानों के अनुसार पंचक के समय चारपाई नहीं बनवानी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से कोई बड़ा संकट आ सकता है।
धनिष्ठा नक्षत्र के दौरान आग से जुड़े कोई भी कार्य करने से बचना चाहिए, इससे आग लगने का खतरा रहता है।दक्षिण दिशा को यम द्वार कहा जाता है। पंचक के समय दक्षिण की ओर यात्रा करना अशुभ है, ऐसा करने से हानि होना लगभग तय है।

रेवती नक्षत्र के दौरान कभी घर की छत नहीं बनवानी चाहिए, इससे धन की हानि के साथ ही साथ अन्य जोखिमों का भी भय रहता है।
गरुण पुराण के अनुसार पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करते समय किसी योग्य जानकार से पूछकर आटे या कुश (एक प्रकार की घास) के पांच पुतलों को भी अर्थी पर रखकर पूरे विधान के साथ अंतिम संस्कार करने से पंचक के दोष से मुक्ति मिलती है।
जानकारों के अनुसार पंचक को बहुत अशुभ माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद शादी-विवाह जैसे कार्य करने में किसी प्रकार की समस्या नहीं होती।
पंचक में आने वाले तीन नक्षत्र पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद व रेवती, रविवार को होने से 28 योगों में से 3 शुभ योग चर, स्थिर व प्रवर्ध, बनाते हैं। इस समय शुभ कार्यों में सफलता प्राप्त करने का विचार किया जा सकता है।
अशुभ होने के बावजूद पंचक में कई विशेष शुभ कार्य किए जा सकते हैं, जोकि अलग-अलग नक्षत्रों पर निर्भर करते हैं।घनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र चल संज्ञक माने जाते हैं, इसमें आप वाहन से जुड़ी खरीददारी या यात्रा जैसे कार्य कर सकते हैं।उत्तरभाद्रपद नक्षत्र को स्थिर संज्ञक नक्षत्र कहा गया है, इसमें आप अचल संपत्ति से जुड़े कार्य कर सकते हैं। आप नया घर खरीद सकते हैं, भूमि से जुड़े कार्य, गृह प्रवेश और खेत में बीज रोपण करने जैसे कार्य कर सकते हैं।रेवती नक्षत्र को मैत्री संज्ञक माना गया है, इस दौरान आप नए कपड़े या गहने खरीदने के साथ-साथ व्यापारिक समझौता भी कर सकते हैं।

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