Adsense responsive

रविवार, 6 दिसंबर 2015

दूल्हे को घोड़ी पर ही क्यों बिठाया जाता है

दूल्हे को घोड़ी पर ही क्यों बिठाया जाता है 

विवाह के मोके पर दूल्हे को घोड़ी पर ही क्यों बिठाया जाता है, किसी और जानवर पर क्यों नहीं ? इसकी वजह यह है कि भगवान श्री राम और सीता का स्वयंवर हो या फिर श्री कृष्ण और रुक्मणी का विवाह । पत्नी को पाने के लिए युद्ध के हालात बने । यह युद्ध घोड़े पर बैठकर ही किया गया । इसलिये विवाह के मौके पर वधु रूपी स्त्री धन को घोड़ी पर लाने की परम्परा शुरू हुई । घोड़े को जहां शौर्य और वीरता का प्रतीक माना  गया है वहीं घोड़ी को उत्पत्ति का कारक माना गया । ऐसी के चलते दूल्हे को घोड़ी पर बैठाकर कर बारात ले जाने की परम्परा प्रचलन में आई । एक और प्रसंग है कि जब सूर्य और उनकी चार संताने यम ,यमी ,तपती ,शनैशचर उत्पत्ति हुई ,उस समय सूर्य की पत्नी रूपा ने घोड़ी का ही रूप धारण किया था । बस इन्हीं पौराणिक मान्यताओँ की वजह से घोड़ी को विवाह में महत्वपूर्ण स्थान मिला । 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें