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गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

घर में महाभारत रखने से बढ़ती है कलह! जानिए इससे जुड़े कुछ गुप्त रहस्य

घर में महाभारत रखने से बढ़ती है कलह! जानिए इससे जुड़े कुछ गुप्त रहस्य


धर्मयुद्ध की कहानी महाभारत युद्ध को दुनिया के सबसे भयानक और खौफनाक युद्ध के रूप में जाना जाता है। लगभग 16 दिनों तक चले इस युद्ध के विषय में ऐसा कहा जाता है कि इसमें इतना इंसानी खून बहा था कि आज तक कुरुक्षेत्र, जहां कौरव-पांडव का यह युद्ध हुआ था, के मैदान की मिट्टी का रंग लाल है।

महाभारत की कहानी मुख्य रूप से भले ही चचेरे भाइयों के बीच युद्ध की कहानी हो लेकिन महाभारत की शिक्षाएं जीवन के अन्य बहुत से पहलुओं के लिए भी उपयोगी हैं।

महाभारत युद्ध के पश्चात मृत्यु का इंतजार कर रहे भीष्म पितामह ने पांडवों को कुछ ऐसी शिक्षाएं प्रदान कीं, जो किसी भी इंसान को एक बेहतरीन नेता बना सकती हैं। इसके अलावा पांचों भाइयों की पत्नी होने के बावजूद द्रौपदी और पांडवों के बीच संयमित संबंध भी महाभारत का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा है।

लेकिन फिर भी राम और रावण के युद्ध की कहानी रामायण हर किसी के घर में मिलती है, यहां तक की नई-नवेली दुल्हन को भी उसके परिवारवाले रामायण देकर ही घर से विदा करते हैं परंतु महाभारत कोई भी अपने घर में नहीं रखता। क्या आप जानते हैं इसके पीछे कारण क्या है?

बहुत से लोग कहते हैं महाभारत सिर्फ युद्ध की कहानी है इसीलिए अगर इसे घर में रखा गया तो घर के भीतर भी कलह का वातावरण जन्म लेगा और परिवार में द्वेष की भावना बढ़ेगी। लेकिन यह कारण सही नहीं है।

चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर क्या कारण है जो कोई भी महाभारत अपने घर में रखने के लिए तैयार नहीं होता। इसके अलावा हम आपको महाभारत के कुछ ऐसे गुप्त रहस्यों से भी अवगत करवाएंगे जो वाकई अनोखे हैं।

महाभारत की कहानी संबंधों के उधेड़बुन की कहानी है। एक ही पिता की संतान, पांडवों का अलग-अलग देवों की वजह से जन्म हुआ था। जो वर्तमान समय के मद्देनजर किसी की भी समझ से बाहर है।

इसके अलावा द्रौपदी जिसके पांच पति थे, का अपने पतियों से संबंध भी समझ से बाहर है क्योंकि आज एक ऐसी स्त्री, जिसके एक से अधिक पति हों, को समाज वेश्या समझता है। ये दो ऐसे कारण हैं जिसकी वजह से कोई भी अपने घर महाभारत नहीं रखना चाहता।

लोग यह जानते हैं कि महाभारत को वेद व्यास ने लिखा था, लेकिन बहुत ही कम लोग इस बात से अवगत हैं कि वेद व्यास किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं है बल्कि वेदों की जानकारी रखने वाले लोगों का सरनेम होता है।

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