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बुधवार, 30 दिसंबर 2015

रोचक जानकारी:-

रोचक जानकारी:-
प्रश्न 1. `फोर्थ स्टेट` किसे कहतें हैं ?
उतर – समाचार-पत्र
प्रश्न 2. प्रसिद्ध चिकित्सा प्रद्धति `होम्योपैथी` के जन्म दाता कौन हैं ?
उतर – हैनीमैन 
प्रश्न 3. दशमलव प्रणाली का जनक कौन-सा देश हैं ?
उतर – दशमलव प्रणाली भारत की देन हैं 
प्रश्न 4. 5 अंडे यदि 10 मिनट में उबलते हैं, तो दो अंडे कितनी देर में उबलेंगे ?
उतर – दस मिनट में 
प्रश्न 5. ताजमहल को कितनें कारीगरों ने कितनें समय में बनाया ?
उतर – ताजमहल को 20,000 कारीगरों ने 20 वर्ष में  बनाया, इसके बनाने में उस समय चार करोड़ रूपयें का खर्च आया था ?
प्रश्न 6. अंधे लोग लिखते-पढ़ते कैसे है ?
उतर – ब्रेल लिपि के प्रयोग से, जिसका विकास सन 1824 में फ़्रांस के लूई ब्रेल ने किया था |
प्रश्न 7. संगीत में कितनें स्वर होते हैं ?
उतर – सात स्वर – सा, रे, ग, म, प, ध, नि | 
प्रश्न 8. सबसे अधिक  देर तक एक पांव पर खडें होने का रिकॉर्ड किसके नाम हैं ?
उतर – श्रीलंका के कुमार आनन्द (33 घंटे)
प्रश्न 9. भारत के किस राज्य में देश का एकमात्र, अभयारण्य स्थित हैं ?
उतर – गुजरात

सोमवार, 28 दिसंबर 2015

दिमाग से संम्बंन्धित रोचक तथ्य

दिमाग से संम्बंन्धित रोचक तथ्य

1. जब आप जाग रहे होते है तब आपका दिमाग 10 से 23 वाट तक की बिजली उर्जा छोड़ता है जो कि एक बिजली के बल्ब को भी चला सकती है.
2. मनुष्य के दिमाग में दर्द की कोई भी नस नही होती इसलिए वह कोई दर्द नही महसूस नही करता.
3. हमारा दिमाग 75% से ज्यादा पानी से बना होता है.
4. आपका दिमाग 5 साल की उम्र तक 95% बढ़ता है और 18 तक पहुँचते-पहुँचते 100% विकसित हो जाता है ओर उसके बाद बढ़ना रूक जाता है.
5. एक गर्भवती महिला के दिमाग के न्युरॉनज़ की गिणती 2,50,000 न्युरॅान प्रति मिनट के हिसाब से बढ़ती है.
6. आप अपने दिमाग में न्युरॉनज़ की गिणती दिमागी क्रियाएँ करके बढ़ा सकते हैं क्योंकि शरीर के जिस भी भाग की हम ज्यादा उपयोग करते है वह और विकसित होता जाता है.
7. पढ़ने और बोलने से एक बच्चो का दिमागी विकास ज्यादा होता है.
8. जब आप एक आदमी का चेहरा गौर से देखते है तो आप अपने दिमाग का दायां भाग उपयोग करते है.
9. हमारे शरीर के भिन्न हिस्सों से सुचना भिन्न रफतार से और भिन्न न्युरॉन के द्वारा हमारे दिमाग तक पहुँचती है. सारे न्युरॅान एक जैसे नही होते कई ऐसे न्युरॅान भी होते है जो सुचना को0.5 मीटर प्रति सैकेंड की रफतार से दिमाग तक पहुँचाते है और कई ऐसे भी होते है जो सुचना को 120 मीटर प्रति सैकेंड की रफतार से दिमाग तक पहुँचाते है.
10. आपके दिमाग की Right side आपकी body के left side को जबकि दिमाग की left side आपकी body के Right side को कंट्रोल करती है.
11. जो बच्चे पाँच साल का होने से पहले दो भाषाएँ सीखते है उनके दिमाग की संरचना थोड़ी सी बदल जाती है.
12. आप के दिमाग में हर दिन औसतन 60,000 विचार आते हैं.
13. अकसर ऐसा कहा जाता है कि हम दिन में 20,000 बार पल्क झपकते है और इसके कारण हम दिन में 30 मिनट तक अंन्धे रहते हैं. पर असल में हम दिन में 20,000 बार पलक जरूर झपकते है पर 30 मिनट तक अन्धे नही रहते. क्योंकि हमारा दिमाग इतने कम समय में वस्तु का चित्र अपने आप बनाए रखता है. हमारे पलक झपकने का समय 1 सैकेंड के 16वे हिस्से से कम होता है पर दिमाग किसी भी वस्तु का चित्र सैकेंड के 16वे तक बनाए रखता है.
14. हँसते समय हमारे दिमाग के लगभग 5 हिस्से एक साथ कार्य करते हैं.
15. दिमाग का आकार और वजन दिमागी शक्ती पर कोई प्रभाव नही डालता . Albert Einstein के दिमाग का वजन 1230 ग्राम था जो कि सामान्य मनुष्य से कहीं कम था.
16. एक जिन्दा दिमाग बहुत नर्म होता है और इसे चाकु से आसानी से काटा जा सकता है.
17. दिमाग में 1,00,000 मील लंम्बी रक्त वाहिकाएँ होती हैं.
18. दिमाग को 4 से 6 मिनट तक ऑक्सीजन न मिलने पर भी यह रह सकता है पर 5 मे 10 मिनट तक न मिलने पर brain damage पक्की है.
19. मनुष्य का दिमाग का वजन लगभग 1500 ग्राम तक होता है.
20. हमारे दिमाग में न्युरॅान की गिणती 100 अरब ( जितने आकाशगंगा में तारे होते है) होते हैं और हर न्युरॅान में 1,000 से 10,000 synopses होते है.
21. दिमाग का सतही क्षेत्रफल लगभग 1,500 से 3,000 वर्ग सैटीमीटर तक होता है.
22. वैज्ञानिक मानते हैं कि ब्रह्माण्ड में सबसे जटिल और रहस्मई चीज मनुष्य का दिमाग है.
23. हैलमेट पहनकर दिमाग को चोट लगने की संम्भावना फिर भी 80% रहती ही है.
24. मानव दिमाग के अंदर एक सैकेंड में 1 लाख रसायनिक प्रतिक्रियायें होती हैं.
25. दिमाग शरीर का सबसे ज्यादा चर्बी वाला अंग है.
26. मस्तिष्क में प्रत्येक वस्तु (सूचना) संग्रहित होते जाता है – तकनीकी रूप से मस्तिष्क के पास अनुभव, अवलोकन, पठन, श्रवण आदि प्रत्येक वस्तु (सूचना) को संग्रह करने की क्षमता होती है। जन्म के बाद से प्रत्येक वस्तु उसमें संग्रहित होते जाती है, कुछ भी नहीं छूटता। यह अलग बात है कि मनुष्य में अपने ही मस्तिष्क में सग्रहित किसी अनेक वस्तुओं (सूचनाओं) तक वापस पहुँचने याने कि अनेक घटनाओं को स्मरण रख पाने की क्षमता नहीं होती।
27. दिमाग शरीर का लगभग 2% है परन्तु यह कुल ऑक्सीजन का 20% खपत करता है और खून भी 20% उपयोग करता हैं.
28. जब मनुष्य दो साल का होता है तो उसके दिमाग में किसी और समय के इलावा Brains cells की गिणती सबसे ज्यादा होती है.
29. दिमाग के बारे में सबसे पहला उल्लेख 6000 साल पहले सुमेर से मिलता है.
30. सोधो से पता चला है कि पुरूषों और महिलायों के दिमाग की संरचना भिन्न होती है.
31. अगर हमारी चमड़ी और मेहदे की तरह हमारे दिमाग के cell भी बदल जाए तो हम अपनी याददाशत गवा सकते हैं.
32. मनुष्य के दिमाग की left side बोलने को कंटरोल करती है और पंक्षियों के दिमाग की left side उनकी चहचहाना कंटरोल करती है.
33. मनुष्य दिन की अपेक्षा रात को ज्यादा बढ़ते हैं. यह दिमाग के एक छोटे से भाग pituiary ग्रंथी के कारण होती है जो रात को सोते समय एक बढ़ने वाला हारमोन छोड़ती है.
34. बजन के लिहाज से अब तक सबसे भारी दिमाग एक रूसी लेखक ‘Ivan turgenew’ का था. उसके दिमाग का वजन लगभग 2.5 किलो था और उसकी मृत्यु 1883 में हुई थी.
35. दिमाग में 40% भाग का रंग grey है और 60% भाग का रंग सफेद है. grey भाग में न्युरॉन होते है जो संचार का काम करता हैं.
36. 30 साल की आयु के बाद हमारा दिमाग सुकड़ने लगता है.
37. अगर शरीर के आकार को ध्यान में रखा जाए तो मनुष्य का दिमाग सभी प्रणीयों से बड़ा हैं. हाथी के दिमाग का आकार उसके शरीर के मुकाबले सिर्फ 0.15% होती है जबकि मनुष्य का 2 प्रतीशत.
38. मानव का दिमाग computer से भी ज्यादा तेज प्रतिक्रिया करता है.
39. आपका अवचेतन मन(दिमाग) आपके चेतन मन से 30,000 गुना शक्तिशाली होता है.

बुधवार, 23 दिसंबर 2015

दुनिया अजब गजब

दुनिया अजब गजब

क्या आप जानते हैं कि कहने को तो सब जीव जंतु के खून का रंग लाल होता है पर टिड्डी एक ऐसा कीटहै जिसका रक्त का रंग सफ़ेद होता है ..

तितली की स्वाद ग्रंथि उसके पिछले पैरों में होती है

हाथी के दांत दो या तीन बार नहीं पूरे जीवन काल में यह छः बार निकलते हैं
शहद आपको अच्छा लगता है पर इसको इकठ्ठा करने में सिर्फ़ एक पाउंड शहद बनाने में बीस लाख फूलोंसे पराग इकठ्ठा करती है मधुमखी.... कितनी मेहनत का काम है 

खटमल तीन सालों तक बिना भोजन किए जीवित रह सकता है .क्या यह किसी और के लिए संभव हैकिसी भी पक्षी का दसवां अंडा सभी नौ अण्डों से बड़ा होता है यह बहुत बार देखा गया है .. 

सभी
 पक्षी पेड़ पोधों के साथ धरती पर बैठते उड़ते रहते हैं ..पर हीरल चिडिया एक ऐसी चिडिया है जोकभी भी किसी भी अवस्था में कहीं नही बैठती है और चलते चलते इंसान की बात ..

क्या
 आप जानते हैं कि फ्रांसीसी लोगो का प्रिय भोजन है मेंढक की टाँगे...फ्रांस को अपनी खपत का अधिकतर भाग आयत करना पड़ता है.... बीते दशक में सम्पूर्ण यूरोप में६२०० तन मेढक की टाँगे आयत की गयीं... इस में ४४ % फ्रांस ४२बेल्जियम और लक्ज्म बर्ग और१४इटली द्वारा खरीदी गयीं ..और बाकी तुर्की .चीन एनी देश से भी फ्रांस ३००० से ४००० टन मेढककी टाँगे आयत करता है अकेले भारत वर्ष ने सिर्फ़ १९८१ में साढ़े चार हजार टन मेढक की टाँगे निर्यातकरी थी ..जिनसे हमें लगभग एक करोड़ डालर की विदेशी मुद्रा मिली थी ..यह निर्यातइतना बढ़ गया थाकि कोलकाता के आस पास के क्षेत्रं से मेंडक के समूल नस्त हो गए थे और अंत में १९८७ में देश में मेंढककी टांगो के निर्यात पर रोक लगानी पड़ी

जीव जंतु की रोचक जानकारी

जीव जंतु की रोचक जानकारी 


1. विश्व में कौन सा पक्षी था जो हाथी जैसे विशाल जानवर को पंजे में दबाकर उड़ जाता था, उसका क्या नाम था और कहाँ पाया जाता था?

उत्तर : सह्दुल या उकात पंछी (सोवियत रूस)
REET 2017-18 25,000 TEACHER VACANCY FOR THIRD TEACHER IN RAJASTHAN


प्रश्न 2. विश्व में कौनसा देश है जहा सफेद हाथी पाए जाते है?

उत्तर : थाईलैंड

प्रश्न 3. सबसे बड़ा बन्दर कहा पाया जाता है और उसका क्या नाम है?

उत्तर : मद्रिल (पश्चिम अफ्रीका का भू -मध्य रेखीय)

प्रश्न 4. वह कौनसा जीव है जो अपनी जिन्दगी में केवल एक ही बार बच्चे पैदा करता है और उसके तुरंत बाद मर जाता है?

उत्तर : बिच्छू



प्रश्न 5. ऐसा कौनसा जन्तु है जो जिन्दगी भर बिना पानी पिए जीता है?

उत्तर : अमेरिका का कंगारू रैट

प्रश्न 6. कौन सी ऐसी मछली है जो पानी में तेरती है, जमीन पर चलती है और हवा में उड़ती है? उसका क्या नाम है?

उत्तर : गरनाई मछली

प्रश्न 7. विश्व में कौनसी चिड़िया के पंख नो रंग के होते है और कहा पाई जाती है?

उत्तर : पिट्टा चिड़िया (ऑस्ट्रेलिया )

प्रश्न 8. विश्व में ऐसा कौनसा पक्षी है जो बाघ की तरह आवाज़ निकालता है और कहाँ पाया जाता है?

उत्तर : बिटर्न पक्षी (दक्षिण अमेरिका)

प्रश्न 9. विश्व में काले रंग के हंस किस देश में पाए जाते है?

उत्तर : ऑस्ट्रेलिया

प्रश्न 10. कौनसा ऐसा पंछी है जो जमीन पर कभी पैर नहीं रखता और कहाँ पर पाया जाता है उसका क्या नाम है ?

उत्तर : हरियल नाम का पंछी है जो भारत में पाया जाता है…!!


मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

ऊं को क्यों माना जाता है महामंत्र, इसे बोलने के फायदे

ऊं को क्यों माना जाता है महामंत्र, इसे बोलने के फायदे



सनातन धर्म और ईश्वर में आस्था रखने वाला हर व्यक्ति देव उपासना के दौरान शास्त्रों, ग्रंथों में या भजन और कीर्तन के दौरान ऊं महामंत्र को कई बार पढ़ता, सुनता या बोलता है। धर्मशास्त्रों में यही ऊं प्रणव नाम से भी पुकारा गया है। असल में इस पवित्र अक्षर व नाम से गहरे अर्थ व दिव्य शक्तियां जुड़ीं हैं, जो अलग-अलग पुराणों और शास्त्रों में कई तरह से बताई गई हैं। खासतौर पर शिवपुराण में ऊं के प्रणव नाम से जुड़ी शक्तियों, स्वरूप व प्रभाव के गहरे रहस्य बताए हैं। ,

शिव पुराण के अनुसार - प्र यानी प्रपंच, न यानी नहीं और व: यानी तुम लोगों के लिए। सार यही है कि प्रणव मंत्र सांसारिक जीवन में प्रपंच यानी कलह और दु:ख दूर कर जीवन के सबसे अहम लक्ष्य यानी मोक्ष तक पहुंचा देता है। यही वजह है कि ऊं को प्रणव नाम से जाना जाता है।

- दूसरे अर्थों में प्रनव को 'प्र' यानी प्रकृति से बने संसार रूपी सागर को पार कराने वाली नव यानी नाव बताया गया है।

- इसी तरह ऋषि-मुनियों की दृष्टि से'प्र - प्रकर्षेण,'न - नयेत् और व: युष्मान् मोक्षम् इति वा प्रणव: बताया गया है। इसका सरल शब्दों में मतलब है हर भक्त को शक्ति देकर जनम-मरण के बंधन से मुक्त करने वाला होने से यह प्रणव है।

- धार्मिक दृष्टि से परब्रह्म या महेश्वर स्वरूप भी नव या नया और पवित्र माना जाता  है। प्रणव मंत्र से उपासक नया ज्ञान और शिव स्वरूप पा लेता है। इसलिए भी यह प्रणव कहा गया है।

 शिवपुराण की तरह अन्य हिन्दू धर्मशास्त्रों में भी प्रणव यानी ऊं ऐसा अक्षर स्वरूप साक्षात् ईश्वर माना जाता है और मंत्र भी। इसलिए यह एकाक्षर ब्रह्म भी कहलाता है। धार्मिक मान्यताओं में प्रणव मंत्र में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और शिव की सामूहिक शक्ति समाई है। यह गायत्री और वेद रूपी ज्ञान शक्ति का भी स्त्रोत माना गया है।

- आध्यात्मिक दर्शन है कि प्रणय यानी ऊं बोलने या ध्यान से शरीर, मन और विचारों पर शुभ प्रभाव होता है। वैज्ञानिक नजरिए से भी प्रणव मंत्र यानी ऊं बोलते वक्त पैदा हुई शब्द शक्ति और ऊर्जा के साथ शरीर के अंगों जैसे मुंह, नाक, गले और फेफड़ो से आने-जाने वाली शुद्ध वायु मानव शरीर के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। अनेक हार्मोन और खून के दबाव को नियंत्रित करती है। इसके असर से मन-मस्तिष्क शांत रहने के साथ ही खून के भी स्वच्छ होने से दिल भी सेहतमंद रहता है। जिससे मानसिक एकाग्रता व कार्य क्षमता बढ़ती है। व्यक्ति मानसिक और दिल की बीमारियों से मुक्त रहता है।

 सुखासन में बैठकर चालीस मिनट प्रतिदिन ऊं का जप किया जाए तो सात दिन में ही अपनी प्रकृति में बदलाव आता महसूस होने लगता है। छह सप्ताह में तो पचास प्रतिशत तक बदलाव आ जाता है। ये लोग उन दो प्रतिशत लोगों में शुमार हो जाते हैं , जो संकल्प कर लें तो अपने से पचास गुना ज्यादा लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव ला सकते हैं।

- एक अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि व्यक्ति के इस स्तर तक पहुंचने में मंत्र जप और स्थिरता पूर्वक बैठने के दोनों ही कारण बराबर उपयोगी हैं। दोनों में से एक भी गड़बड़ हुआ तो कठिनाई हो सकती है। हमारे यहां तो पालथी लगाकर सब लोग बहुत आसानी से बैठ जाते हैं, जबकि बाहर के देशों में भी ध्यान की कक्षा में प्रवेश करने वाले व्यक्ति दीक्षा लेने के बाद जप और ध्यान सीखते समय ही बैठने की इस तकनीक का अभ्यास शुरू कर देते हैं।

 सुखासन में बैठकर मंत्र जप करने से या विधिवत अजपा करने से (मन में लगातार जप)। उसके कामयाब होने के लक्षण दिखार्ई देने लगते हैं। वे लक्षण यह है कि मंत्र जिस देवता की आराधना में है, उसकी विशेषताएं साधक में दिखाई देने लगती हैं।

- दार्शनिक पाल ब्रंटन ने अपनी पुस्तक इन द सर्च ऑफ सीक्रेट इंडिया में उन साधु संतों के बारे में और उनकी साधना विधियों के बारे में लिखा है। पाल ब्रंटन ने लिखा है कि सिद्धों और चमत्कारी साधुओं की शक्ति सामथ्र्य का रहस्य बहुत कुछ उनके स्थिरता पूर्वक बैठने में था।

सोमवार, 21 दिसंबर 2015

पौराणिक कथा - गणेश चतुर्थी को क्यों नहीं करने चाहिए चंद्र दर्शन ?

पौराणिक कथा - गणेश चतुर्थी को क्यों नहीं करने चाहिए चंद्र दर्शन ?


हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं करने चाहिए क्योंकि इस रात्रि को चंद्र दर्शन करने से झूठे आरोप लगते हैं। इस सम्बन्ध में हमारे धर्म ग्रंथों में दो कथाएं है। पहली कथा यह बताती है की चंद्र दर्शन क्यों नहीं करना चाहिए जबकि दूसरी कथा को सुनने से भूलवश हुए चंद्र-दर्शन का दोष नहीं लगता है।

श्रीगणेश ने दिया था चंद्रमा को श्राप :भगवान गणेश को गज का मुख लगाया गया तो वे गजवदन कहलाए और माता-पिता के रूप में पृथ्वी की सबसे पहले परिक्रमा करने के कारण अग्रपूज्य हुए। सभी देवताओं ने उनकी स्तुति की पर चंद्रमा मंद-मंद मुस्कुराता रहा। उसे अपने सौंदर्य पर अभिमान था। गणेशजी समझ गए कि चंद्रमा अभिमान वश उनका उपहास करता है। क्रोध में आकर भगवान श्रीगणेश ने चंद्रमा को श्राप दे दिया कि- आज से तुम काले हो जाओगे। चंद्रमा को अपनी भूल का अहसास हुआ।

उसने श्रीगणेश से क्षमा मांगी तो गणेशजी ने कहा सूर्य के प्रकाश को पाकर तुम एक दिन पूर्ण होओगे यानी पूर्ण प्रकाशित होंगे। लेकिन आज का यह दिन तुम्हें दंड देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। इस दिन को याद कर कोई अन्य व्यक्ति अपने सौंदर्य पर अभिमान नहीं करेगा। जो कोई व्यक्ति आज यानी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर झूठा आरोप लगेगा। इसीलिए भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं किया जाता।

भगवान श्रीकृष्ण पर लगा था चोरी का आरोप :सत्राजित् नाम के एक यदुवंशी ने सूर्य भगवान को तप से प्रसन्न कर स्यमंतक नाम की मणि प्राप्त की थी। वह मणि प्रतिदिन स्वर्ण प्रदान करती थी। उसके प्रभाव से पूरे राष्ट्र में रोग, अनावृष्टि यानी बरसात न होना, सर्प, अग्नि, चोर आदि का डर नहीं रहता था। एक दिन सत्राजित् राजा उग्रसेेन के दरबार में आया। वहां श्रीकृष्ण भी उपस्थित थे। श्रीकृष्ण ने सोचा कि कितना अच्छा होता यह मणि अगर राजा उग्रसेन के पास होती।     

किसी तरह यह बात सत्राजित् को मालूम पड़ गई। इसलिए उसने मणि अपने भाई प्रसेन को दे दी। एक दिन प्रसेन जंगल गया। वहां सिंह ने उसे मार डाला। जब वह वापस नहीं लौटा तो लोगों ने यह आशंका उठाई कि श्रीकृष्ण उस मणि को चाहते थे। इसलिए सत्राजित् को मारकर उन्होंने ही वह मणि ले ली होगी। लेकिन मणि सिंह के मुंह में रह गई। जाम्बवान ने शेर को मारकर मणि ले ली। जब श्रीकृष्ण को यह मालूम पड़ा कि उन पर झूठा आरोप लग रहा है तो वे सच्चाई की तलाश में जंगल गए।

वे जाम्बवान की गुफा तक पहुंचे और जाम्बवान से मणि लेने के लिए उसके साथ 21 दिनों तक घोर संग्राम किया। अंतत: जाम्बवान समझ गया कि श्रीकृष्ण तो उनके प्रभु हैं। त्रेता युग में श्रीराम के रूप में वे उनके स्वामी थे। जाम्बवान ने तब खुशी-खुशी वह मणि श्रीकृष्ण को लौटा दी तथा अपनी पुत्री जाम्बवंती का विवाह श्रीकृष्ण से करवा दिया।  श्रीकृष्ण ने वह मणि सत्राजित् को सौंप दी। सत्राजित् ने भी खुश होकर अपनी पुत्री सत्यभामा का विवाह श्रीकृष्ण के साथ कर दिया।

एक गांव, जहां धूप गला देती है लोगों की त्वचा

एक गांव, जहां धूप गला देती है लोगों की त्वचा


ब्राजील के साओ पाउलो का एक गाँव है अरारस।  यह गाँव त्वचा की एक बहुत ही अजीबो गरीब और दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है।  इसे एक्सोडेरमा पिगमेंटोसम यानी एक्सपी कहते है।  इस बीमारी में धुप के कारण स्किन गल जाती है।  वैसे तो यह बीमारी लाखों लोगो में से किसी एक को होती है पर इस गाँव में 3% आबादी इस बीमारी से पीड़ित है।

स्किन की इस बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए धूप में निकलना सजा की तरह है। धूप में निकलने से सूरज की किरणें झुलसा देती हैं। एक्सपी बीमारी बहुत ज्यादा संवेदनशील होने पर स्किन कैंसर का रूप ले लेती है और त्वचा को धूप से पहुंचने वाले नुकसान को सही करना नामुमकिन हो जाता है। धूप के चलते स्किन लाल और रूखी पड़ जाती है और चेहरा भद्दा दिखने लगता है।

अरारस में ज्यादातर खेती से जुड़े समुदाय रह रहे हैं। ऐसे में वो धूप में काम करने से बच नहीं सकते। कुछ लोगों के पास तो धूप में काम करने के सिवा और कोई चारा भी नहीं है। इसका नतीजा ये हो रहा है कि स्किन की इस भयानक बीमारी के चलते लोगों की जिंदगी मुश्किल होती जा रही है। 

इस गांव में 800 लोगों में से 20 लोग इस बीमारी के शिकार हैं। मतलब ये हुआ कि हर चालीस लोगों में एक आदमी इस बीमारी से पीड़ित है, जबकि अमेरिका में 10 लाख लोगों में कोई एक शख्स ही इस बीमारी का शिकार है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यहां अनुवांशिकता बताई जा रही है।

अरारस में रहने वाले जालमा एन्टोनियो कई साल से इस बीमारी से पीड़ित हैं। एन्टोनियो खेती किसानी से जुड़े हैं इसलिए उन्हें हमेशा धूप में काम करना पड़ा। लिहाजा, उनकी स्किन की हालत हर दिन बिगड़ती गई। एन्टोनियो जब नौ साल के थे तभी उन्हें इस बीमारी के लक्षण नजर आने लगे थे। उनके चेहरे पर चकत्ते और छोटा दाने होने लगे थे। वो कहते हैं कि अगर वो खुद को धूप से बचा पाए होते, तो आज हालात कुछ और होते। 

धूप में उनकी नाक, होंठ, गाल और आंख सब गल कर बिगड़ गया। इस दौरान उनकी 50 से ज्यादा सर्जरी हो चुकी है। अब वो अपने चेहरे को धूप से बचाने के लिए ओरेंज मास्क और टोपी पहनते हैं, जिससे उन्हें बीमारी को काबू में करने में थोड़ी मदद मिल रही है।

एन्टोनियो जैसी ही हालत गांव के बाकी पीड़ितों की भी है। हालांकि अब इस बीमारी से बचने के लिए गांव में लोगों को जागरुक किया जा रहा है। बच्चों को इसके शुरुआती लक्षणों के बारे में बताया जा रहा है और उन्हें धूप में कम से कम निकलने की सलाह दी जा रही है।

रोचक जानकारी

रोचक जानकारी 

1. कुत्ते और बिल्लीयाँ भी मनुष्य की तरह leftया right-handed होते है.
2. बिल्लीया लगभग 1,000 तरह की आवाजें निकालसकती हैं जबकि कुत्ते सिर्फ 10 प्रकारकी आवाजे ही निकाल सकते हैं.
3. हर साल लोग अपने पालतु कुत्तों औरबिल्लियों की खुराकपर 3 लाख 57 अरब रूपएकी राशि खर्च कर देते हैं.
4. बिल्लीयां अपनी पुंछ की लंम्बाई से 7गुना ज्यादा ऊँचाई तक कूद सकती है.
5. जितनी जनसंख्या इस धरती पर मनुष्यों की हैउतनी ही मुर्गो की है.
6. ज्यादातर गांय गाना सुनते समय ज्यादा दुध देती हैं.
7. एक गाय एक मनुष्य से एक दिन में 200गुना ज्यादा गैस पैदा करती है.
8. डायनासोरो ने खत्म होने से पहले धरती पर लगभग16.5 करोड़ साल तक राज किया है.
9. हर साल लोग हवाई हादसों से ज्यादा गधों द्वारा मारेजाते हैं.
10. जिराफ घोड़ो से तेज भाग सकते हैं और ऊट सेज्यादा दिनों तक पानी के बिना रह सकते हैं.
11. Giraffes एक दिन में सिर्फ 20 मिनट तक सोतेहैं. परन्तु कई बार वह 2 घंटे तक भी सो जाते है परन्तुऐसा बहुत कम होता है.
12. एक कंगारू तभी कूदेगा जब इसकी पुंछ धरती को छुरही होगी.
13. आस्ट्रेलिया में पाए जाने वाला पशु कंगारू औरपक्षी एमू केवल आगे की ओर ही चल या दौड़ सकतेहैं, पीछे की ओर नहीं.
14. शेर 2 साल की उम्र तक दहाड़ नही सकते.
15. पेंग्विन के शरीर में खारे पानी को स्वच्छ जल मेंबदल लेने की अद्भुत क्षमता होती है.
16. समुद्री घोघें एक बार में तीन साल से ज्यादा तकसोते हैं.
17. ऊठ के दूध से दही नही बनती.
18. ऊँठ 3 मिनट से भी कम समय में 94 लीटरपानी पी जाते है.
19. एक बिल्ली के कान में 32 मासपेशीयां होती हैं.
20. सुमंदरों में पाई जाने वाली algae(ऐलगी)दुनिया की 50 प्रतीशत ऑक्सीजन पैदा करती है.
21. पैदा होते समय झींगे नर होते है मगर धीरे-धीरे यहमादा में बदल जाते है.
22. सापों की कोई 5100 प्रजातियाँ पाई जाती हैं. इनमेंसे 725 के पास विषदंत होते हैं तथा 250प्रजातियाँ ऐसी हैं जो एक ही दंश मेंमनुष्यों को मार देने की क्षमता रखती हैं.
23. साप लगातार 3 साल तक सो सकते है
पोस्ट पढने के लिए धन्यबाद।please like comment करते रहें इससे हमारा लिखने का होंसला बढ़ता रहेगाऔर हम अच्छे से अच्छा post प्रस्तुत करते रहेंगे। 

क्या ऎसी भी हो सकती है रेलवे लाईन ??


क्या ऎसी भी हो सकती है रेलवे लाईन ??




यह है जर्मनी के शहर फ़्रेंक फ़ुर्त के रेलवे स्टेशन से 
मामुली आगे का चित्र... केसा भी मोसम हो लेकिन 
आप की ट्रेन कभी भी लेट नही आयेगी..... ओर कभी 
लेट आई तो आप को आप का पुरा हर्जाना मिलेगा , 
ओर टिकट के पेसे वापिस.

चाहे धुंध हो या मुसलाधार बरसात, या फ़िर बहुत बर्फ़ 
बारी लेकिन याता यात पर कोई असर नही पडता, 
क्योकि यहा कोई बहाना नही चलता.

मधुमक्खियाँ: बिना पढ़ी लिखी अभियंता

मधुमक्खियाँ: बिना पढ़ी लिखी अभियंता



हम फिर से आ गए हैं, इस बार आपको मधुमक्खियों के छत्ते में से कुछ विज्ञान की बातें बताने। मधुमक्खियाँ फूलों के रस से शहद का निर्माण करती हैं और उससे अपने छत्ते में जमा करके रखती हैं, जिससे सर्दी के मौसम में उनके पास खाने-पीने की कमी न हो। मधुमक्खियों का छत्ता मोम से बनता है और १ ग्राम मोम बनाने के लिए मधुमक्खी १६ ग्राम शहद का प्रयोग करती हैं। यह छत्ता मधुमक्खियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके प्रत्येक कोष्ठ का प्रयोग मधुमक्खियाँ अपने बच्चों (लार्वा) को रखने और शहद को जमा करने के लिए करतीं हैं।
इस चित्र को ध्यान से देखिये, ये मधुमक्खी का छत्ता है। इसमें हरेक कोष्ठ की दीवारें इस प्रकार बनी होतीं हैं की वे एक दूसरे को १२० डिग्री के कोण पर काटती हैं और एक व्यापक षट्कोण सममिति के साथ छत्ता बनाती हैं। सराहना योग्य बात ये है की मधुमक्खियाँ हरेक कोष्ठ को बिल्कुल सही दूरी पर और एकदम सटीक कोण पर बनाती हैं। ये वाकई में प्रशंसनीय है। मधुमक्खियाँ बिना इंजीनियरिंग पढ़े हुए भी अच्छी अभियंता होतीं हैं। किंतु, मधुमक्खी के छत्ते के कोष्ट षट्कोण आकार के होते क्यों हैं?
यही प्रश्न बहुत से वैज्ञानिकों के मस्तिष्क में भी आया और इस पर शोध किया गया। विज्ञानी यान ब्रोजेक के अनुसार इस प्रकार बनाया गया ढांचा, निश्चित आयतन में कम से कम मोम का उपयोग करके बनाया जा सकता है। जी हाँ!! मधुमक्खियों से मनुष्य ने सीखा कि कैसे कम से कम सामग्री का उपयोग करके अधिक से अधिक मजबूत ढाँचे बनाये जा सकते हैं। इस प्रकार बनाये गए honeycomb panels का विस्तृत अनुप्रयोग , फर्नीचर आदि उद्योगों में किया जाता है जहाँ मजबूत (आसानी से न मुड़ने वाले) और हलके तख्तों की आवश्यकता होती है।

तो ये था मधुमक्खियों से सीखा हुआ सबक। आगे भी आपको ऐसी ही जानकारियों से अवगत कराते रहेंगे। यदि आपको ये जानकारी रोचक लगी हो तो जरूर बताइयेगा।

7 धार्मिक स्थल जहाँ महिलाओं के प्रवेश पर है पाबंदी

7 धार्मिक स्थल जहाँ महिलाओं के प्रवेश पर है पाबंदी

स्त्री-पुरुष समानता की जोर-शोर से बात करने वाले हम भारतीयों की इससे बड़ी विडंबना क्या होगी की हमारे भारत में स्त्री-पुरुषों में भेदभाव धार्मिक स्थलों पर भी होता है। प्रत्येक इंसान उस भगवान की संतान है फिर भी हमारे देश में कई ऐसे धार्मिक स्थल है जहाँ स्त्रियों के प्रवेश पर पाबंदी है। आज इन लेख में हम आपको भारत के 7 ऐसे ही धार्मिक स्थलों के बारे में बता रहे है।

1. पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल  (Padmanabhaswamy Temple, Kerala) - 
पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत के केरल राज्य के तिरुअनंतपुरम में स्थित भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है। भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल यह ऐतिहासिक मंदिर तिरुअनंतपुरम के अनेक पर्यटन स्थलों में से एक है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर विष्णु-भक्तों की महत्वपूर्ण आराधना-स्थली है। मान्यता है कि सबसे पहले इस स्थान से विष्णु भगवान की प्रतिमा प्राप्त हुई थी। जिसके बाद उसी स्थान पर इस मंदिर का निर्माण किया गया है। इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। इस मंदिर की एक अन्य विशेषता यह है की यह भारत का सबसे अमीर मंदिर है।

2. सबरीमला श्री अयप्पा केरल (Sabarimala Sri Ayyappa Temple)-सबरीमला श्री अयप्पा केरल के सबसे प्राचीन और भव्य मंदिरों में से एक है। अयप्पा मंदिर में देश ही नहीं विदेशों से भी हर साल भारी संख्या में श्रृद्धालु आते हैं, लेकिन इस मंदिर के भीतर 10 से 50 साल तक की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।

3. कार्तिकेय मंदिर, पुष्कर, राजस्थान (Kartikaye Temple, Pushkar, Rajastahn) -
राजस्थान का प्रसिद्ध तीर्थस्थल पुष्कर शहर वैसे तो ब्रह्माजी के एक मात्र मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां का कार्तिकेय मंदिर भी बहुत दर्शनीय है। इस मंदिर में भी महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।

4. मुक्तागिरी जैन मंदिर, मध्यप्रदेश (Muktagiri Jain Temple, Madhy Pradesh)-मुक्तागिरी तीर्थ मध्यप्रदेश राज्य के गुना शहर में स्थित है। यह जैनों का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। इस मंदिर में कोई भी महिला पाश्चात्य परिधान पहनकर प्रवेश नहीं कर सकती। मंदिर परिसर में ऐसे पहनावे पर पूर्ण प्रतिबंध है।

5. हाजी अली दरगाह, मुंबई  (Haji Ali Dargah, Mumbai)-
बाबा हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह पूरे विश्व के श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। इस दरगाह पर सभी धर्मों के लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए बाबा से मन्नते मांगते हैं। ये दरगाह सांप्रदायिक सद्भाव के लिए प्रसिद्ध है। दरगाह से युक्त ये मस्जिद मुंबई के वर्ली समुद्र तट के छोटे द्वीप पर स्थित है। हाजी अली दरगाह का सबसे भीतरी हिस्से में औरतों का प्रवेश वर्जित है। दरगाह श्राइन बोर्ड की मानें तो इस्लाम शरीयत कानून के अनुसार किसी भी पवित्र कब्र के निकट महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। हाजी अली ट्रस्ट की स्थापना 1916 में कुट्ची मेमन समुदाय के सदस्यों द्वारा की गई। यह ट्रस्ट ही दरगाह के रखरखाव का कार्य करता है।

6. हजरत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह, दिल्ली (Hazrat Nizamuddin Auliya Dargah, Delhi)-दक्षिणी दिल्ली में स्थित हजरत निज़ामुद्दीन औलिया (1236-1325) का मकबरा सूफी काल का एक पवित्र दरगाह है। इस दरगाह में औरतों का प्रवेश निषेध है। हजरत निज़ामुद्दीन चिश्ती घराने के चौथे संत थे। इस सूफी संत ने वैराग्य और सहनशीलता की मिसाल पेश की। कहा जाता है कि 1303 में इनके कहने पर मुगल सेना ने हमला रोक दिया था, इस प्रकार ये सभी धर्मों के लोगों में लोकप्रिय बन गए।

7. जामा मस्जिद, दिल्ली (Jama Masjid, Delhi)-भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक जामा मस्जिद में भी सूर्यास्त के बाद महिलाओं का प्रवेश निषेध है।

दैवीय चमत्कार- 50 लाख लीटर पानी से भी नहीं भरा शीतला माता के मंदिर में स्तिथ ये छोटा सा घडा़, वैज्ञानिक भी हैरान

दैवीय चमत्कार- 50 लाख लीटर पानी से भी नहीं भरा शीतला माता के मंदिर में स्तिथ ये छोटा सा घडा़, वैज्ञानिक भी हैरान

राजस्थान के पाली जिले में हर साल, सैकड़ों साल पुराना इतिहास और चमत्कार दोहराया जाता है। शीतला माता के मंदिर में स्तिथ आधा फीट गहरा और इतना ही चौड़ा घड़ा श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ के लिए खोला जाता है।करीब 800 साल से लगातार साल में केवल दो बार ये घड़ा सामने लाया जाता है। अब तक इसमें 50 लाख लीटर से ज्यादा पानी भरा जा चुका है। इसको लेकर मान्यता है कि इसमें कितना भी पानी डाला जाए, ये कभी भरता नहीं है। ऐसी भी मान्यता है कि इसका पानी राक्षस पीता है, जिसके चलते ये पानी से कभी नहीं भर पाता है। दिलचस्प है कि वैज्ञानिक भी अब तक इसका कारण नहीं पता कर पाए हैं।

साल में दो बार हटता है पत्थर
ग्रामीणों के अनुसार करीब 800 साल से गांव में यह परंपरा चल रही है। घड़े से पत्थर साल में दो बार हटाया जाता है। पहला शीतला सप्तमी पर और दूसरा ज्येष्ठ माह की पूनम पर। दोनों मौकों पर गांव की महिलाएं इसमें कलश भर-भरकर हज़ारो लीटर पानी डालती हैं, लेकिन घड़ा नहीं भरता है। फिर अंत में पुजारी प्रचलित मान्यता के तहत माता के चरणों से लगाकर दूध का भोग चढ़ाता है तो घड़ा पूरा भर जाता है। दूध का भोग लगाकर इसे बंद कर दिया जाता है। इन दोनों दिन गांव में मेला भी लगता है।

वैज्ञानिकों को भी नही पता कहां जाता है पानी
दिलचस्प है कि इस घड़े को लेकर वैज्ञानिक स्तर पर कई शोध हो चुके हैं, मगर भरने वाला पानी कहां जाता है, यह कोई पता नहीं लगा पाया है।

मान्यता के अनुसार राक्षस पीता है इस घड़े का पानी
ऐसी मान्यता है कि आज से आठ सौ साल पूर्व बाबरा नाम का राक्षस था। इस राक्षस के आतंक से ग्रामीण परेशान थे। यह राक्षस ब्राह्मणों के घर में जब भी किसी की शादी होती तो दूल्हे को मार देता। तब ब्राह्मणों ने शीतला माता की तपस्या की। इसके बाद शीतला माता गांव के एक ब्राह्मण के सपने में आई। उसने बताया कि जब उसकी बेटी की शादी होगी तब वह राक्षस को मार देगी। शादी के समय शीतला माता एक छोटी कन्या के रूप में मौजूद थी। वहां माता ने अपने घुटनों से राक्षस को दबोचकर उसका प्राणांत किया। इस दौरान राक्षस ने शीतला माता से वरदान मांगा कि गर्मी में उसे प्यास ज्यादा लगती है। इसलिए साल में दो बार उसे पानी पिलाना होगा। शीतला माता ने उसे यह वरदान दे दिया। तभी से यह मेला भरता है।