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रविवार, 4 अक्तूबर 2015

दही चावल खिलाकर करते हैं शुभारंभ

दोधी मोंगोल रश्म


बंगाली समाज में शादी वाले दिन सुबह ब्रह्मा मुहूर्त में दोधी मोंगोल नमक रश्म निभाई जाती हैं। इसमें सात सुहागिन महिलाए मिलकर वधु को पारम्परिक चूड़िया पहनाती है, जिसे शाखा पोला कहते हैं। शंख से बनी इन खास चूड़ियों में एक जोड़ी लाल चूड़ी और एक जोड़ी सफ़ेद चूड़ी होती हैं। चूड़ियों को हल्दी के पानी में डुबोकर रखा जाता हैं। इन सात महिलाओ को ईश्वर  का प्रतीक माना जाता हैं। दोधी का मतलब दही होता हैं और मोंगोल का अर्थ आने वाले जीवन के लिए शुभकामनाए व आशीर्वाद। इसलिए महिलाएं दुल्हन को चूड़िया पहनाने के बाद दही और चावल खिलाती हैं। महिलाएं यह रश्म निभाकर दुल्हन को सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती हैं । दुल्हन के लिए यही पुरे दिन का भोजन होता हैं क्योंकि इसके बाद उसका व्रत होता हैं । उसके माता - पिता भी उपवास रखते हैं। 

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