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सोमवार, 1 जून 2015

बूमरैंग लौटकर क्यों आता है ?


बूमरैंग लौटकर क्यों आता है ?

बूमरैंग सख्त लकड़ी की एक मुड़ी हुई छड़ होती है, जो ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों में शिकार या लड़ाई के काम आती है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण किस्म वह होती है, जो निशाना चूकने पर वापस फेंकने वाले के पास आ जाती है। इसका विकास ऑस्ट्रेलिया के लोगों ने किया था और इसकी लम्बाई 12 से 30 इंच तक होती है। इस बूमरैंग का वजन 340 ग्राम होता है। जब इसे उरई शक्ति के साथ फेंका जाता है तो यह 45 मीटर की ऊंचाई पर चक्क्र काटता है और फिर कुछ छोटे - छोटे चक्कर काटने  के बाद फेंकने वाले के पास वापस आ जाता है। इसके वापस लौटने का कारण यह माना जाता था कि हवा इसके निचले सपाट हिस्से पर दबाव डालती हुई ऊपरी सतह पर निकलती है और इसी दबाव के कारण यह वापस लौटता है। बाद में एक स्कॉटिश शोधकर्ता ने पाया कि इसे फेंकने का तरीका और वायुदाब, दोनों ही इसे वापस लाने का काम करते हैं बूमरैंग हमेशा हाथ को कंधों से नीचे रख फेंका जाता है। फिर इसे फेंकते समय कलाई को भी कुछ इस तरह घुमाया जाता है कि बूमरैंग पर हवा के दाब के साथ ही इसका दाब भी बनता है और इसी दाब के कारण यह वापस लौटता है।













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