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मंगलवार, 26 मई 2015

अपने हाथ से गुदगुदी क्यों नहीं होती ?

अपने हाथ से गुदगुदी क्यों नहीं होती ?

अगर गलती से किसी व्यक्ति का हाथ हमें अनजाने में छू जाये, तो हमें गुदगुदी होने लगती है। लेकिन यदि अगर हम स्वयं अपने शरीर को गुदगुदाते है तो किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं होती है। हमारे दिमाग में कुछ  इस तरह से प्रोग्राम होता है कि उसमें बाहरी संवेग और आंतरिक संवेगों को अलग करने में महारत हासिल होती है। दिमाग सबसे पहले उन संकेतों की अनदेखी करता है, जो आंतरिक होते है, यानि जो व्यक्ति स्वयं अपने शरीर पर करता है। जब भी कोई व्यक्ति हमें गुदगुदी मचाता है, तो हमें हंसी उसके कारण होने वाले आकस्मिक भय का ही रूप होती है। जब हम स्वयं अपने को गुदगुदाते हैं तो हमें किसी भी प्रकार का भय नही रह जाता है। अपने आप को गुदगुदाने पर यह प्रतिक्रिया दिमाग के जिस हिस्से के कारण नहीं हो पाती है, उसे 'सेरेबेलम' कहते है और यह दिमाग के पिछले हिस्से में होता है। यह दिमाग के अन्य हिस्सों को मिलने वाले संवेदात्मक संकेतों को नियंत्रित करता है।


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