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शुक्रवार, 22 मई 2015

कक्षा में घूमते हुए अंतरिक्ष यात्री भारहीनता क्यों अनुभव करते है ?


कक्षा में घूमते हुए अंतरिक्ष यात्री भारहीनता क्यों अनुभव करते है ?

जब कोई अंतरिक्षयान अंतरिक्ष में कक्षा की परिक्रमा कर रहा होता है, तो अंतरिक्ष में उसकी रफ़्तार धरती के गुरुत्वाकर्षण बल को पूरी तरह से प्रतिसंतुलित कर रही होती है। अर्थात पृथ्वी के चारों और घूम रहे अंतरिक्षयान की गति से उत्पन्न हुआ अपकेन्द्री बल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव को प्रतिसंतुलित करता है। इस तरह से दो विपरीत बलों के प्रतिसंतुलित होने से अंतरिक्षयान की गुरुत्वाकर्षण अवस्था शून्य हो जाती है। इसी  शून्य गुरुत्वाकर्षण अवस्था के कारण अंतरिक्षयान में बैठे अंतरिक्षयात्री भारहीनता का  करते हैं। 










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