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बुधवार, 27 मई 2015

क्या अंधे लोग भी सपने देख सकते हैं ?

 
क्या अंधे लोग भी सपने देख सकते हैं ?

जब हम सो रहे होते हैं तो हमारे मस्तिष्क के वह भाग जो कार्य को निभाते हैं, अक्रिय हो जाते हैं। इन्हें विज़ुअल कोर्टेक्स कहते हैं। लेकिन जब हम सपने देखते हैं तो ये भाग अक्रिय होने के बजाय सक्रिय होते हैं, हालांकि उस समय हम सो रहे होते हैं। सामान्यतः सपनों में वही चीजें दिखायी देती हैं, जो हमने देख रखी होती है या जो देखी जा सकती हैं। कोई भी स्वेछा से अनायास हुई क्रिया जब चित्रित होने लगती है तो हम स्वप्न देखते हैं। इसलिए नींद में लगातार स्वप्न दिखाई नहीं देते। स्वप्न हमारी नींद की एक ख़ास अवस्था में ही दिखाई देते हैं। इस समय अगर कोई स्वप्न देख रहे व्यक्ति की आँखें देखें तो वह तेज़ी से हरकत करती हुई दिखाई देती है। ये बातें तो रहीं स्वप्न के बारे में , जिसे आँखों वाले देखते हैं। लेकिन नेत्रहीन भी स्वप्न देखते हैं या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी अंधता की क्या स्थिति है ? आँख का कौनसा भाग खराब है। आँखों के खराब होने के एक से अधिक कारण हो सकते हैं ; जैसे रेटिना के ख़राब होने से, दृश्य तंत्रिकाओं के अक्रिय होने से तथा विज़ुअल या दृश्य कोर्टेक्स के ख़राब होने से, जो लोग अंधे हुए हैं, उन्हें दिखाई तो नहीं देता ; लेकिन उनकी विज़ुअल कोर्टेक्स सक्रिय होती है। ऐसे अंधे लोगों को सपने दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इनको दिखाई देने वाले सपने विभिन्न आकृतियों की सरल झपकियों जैसे होते हैं। जिनके विज़ुअल कोर्टेक्स भी खराब होता हैं, उन्हें सपने दिखाई नहीं दे सकते।


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मंगलवार, 26 मई 2015

अपने हाथ से गुदगुदी क्यों नहीं होती ?

अपने हाथ से गुदगुदी क्यों नहीं होती ?

अगर गलती से किसी व्यक्ति का हाथ हमें अनजाने में छू जाये, तो हमें गुदगुदी होने लगती है। लेकिन यदि अगर हम स्वयं अपने शरीर को गुदगुदाते है तो किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं होती है। हमारे दिमाग में कुछ  इस तरह से प्रोग्राम होता है कि उसमें बाहरी संवेग और आंतरिक संवेगों को अलग करने में महारत हासिल होती है। दिमाग सबसे पहले उन संकेतों की अनदेखी करता है, जो आंतरिक होते है, यानि जो व्यक्ति स्वयं अपने शरीर पर करता है। जब भी कोई व्यक्ति हमें गुदगुदी मचाता है, तो हमें हंसी उसके कारण होने वाले आकस्मिक भय का ही रूप होती है। जब हम स्वयं अपने को गुदगुदाते हैं तो हमें किसी भी प्रकार का भय नही रह जाता है। अपने आप को गुदगुदाने पर यह प्रतिक्रिया दिमाग के जिस हिस्से के कारण नहीं हो पाती है, उसे 'सेरेबेलम' कहते है और यह दिमाग के पिछले हिस्से में होता है। यह दिमाग के अन्य हिस्सों को मिलने वाले संवेदात्मक संकेतों को नियंत्रित करता है।


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सर्दियों में गर्म पानी से नहाने पर ठण्ड और ठन्डे पानी से नहाने से गर्मी क्यों लगती है ?

सर्दियों में गर्म पानी से नहाने पर ठण्ड और 

ठन्डे पानी से नहाने से गर्मी क्यों लगती है ?

गर्मी और ठंडक तुलनात्मक अनुभूतियाँ हैं। तापमान जो भी हो, जब हम किसी कम तापमान से अधिक की और जाते  हैं तो हमें गर्मी लगती है, और जब अधिक तापमानं से कम की और आते हैं तो ठंडक लगती है। यही अनुभूति गर्म अथवा ठन्डे पानी से नहाने पर शरीर के तापमान में हुए परिवर्तन के कारण होती है। 
प्रायः सर्दी के मौसम में वातावरण का तापमान बहुत कम होता है, अतः ठंडक से बचने के लिए लोग जब गर्म पानी से नहाते हैं तो गर्म पानी के कारण कुछ समय के लिए हमारी त्वचा का तापमान कमरे या बाथरूम के तापमान से अधिक हो जाता है। अतः हमारे शरीर की ऊर्जा कम होनी प्रारम्भ हो जाती है और हमें ठंडक लगने लगती है। लेकिन जब हम ठन्डे पानी से नहाते हैं तो हमारे शरीर की त्वचा का तापमान हमारे आस - पास के वातावरण की ऊष्मा हमारे शरीर की ओर आने लगती है, जिसके कारण हमें थोड़ी - सी गर्मी लगने लगती है। 



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पानी से भरी बाल्टी कुएं में हल्की और बाहर भरी क्यों हो जाती है ?


पानी से भरी बाल्टी कुएं में हल्की और बाहर भरी क्यों हो जाती है ?

वास्तविकता तो यह है कि पानी से बाल्टी का भार हवा में और पानी में बराबर ही होता है। लेकिन फिर भी वह हवा में भारी और पानी के अंदर हल्की लगती है। आर्कमिडीज का सिद्धांत कहता है कि जब कोई भी वस्तु किसी द्रव में पूरी तरह या आंशिक रूप से डुबोई जाती है तो उसके भार में कुछ कमी आ जाती है यह कमी बराबर होती है उस वस्तु के द्वारा हटाये गए द्रव के भार के। 
इसलिए जब बाल्टी पानी में डुबी होती है तो बाल्टी द्वारा हटाये गए आयतन के भार के बराबर उसके भार मे कमी महसूस होती है, लेकिन जब बाल्टी पानी से बाहर हवा में होती है ,जो उसके नीचे की ओर खींचने लगता है इसके परिणामस्वरूप पानी से भरी बाल्टी कुएं के पानी से बाहर आने पर भारी लगने लगती है। अतः हम कह सकते हैं कि द्रवों के उछाल बल के कारण बाल्टी हल्की और पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण बाल्टी अधिक भारी लगता है।


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दलदल जानलेवा क्यों होते हैं ?


दलदल जानलेवा क्यों होते हैं ?

दलदल में फंसे जाने पर उससे निकल पाना प्रायः आसान  नहीं होता। इसमें फंसे लोग अक्सर इसमें धँसकर डूब जाते  हैं और मर जाते हैं। दलदल उन स्तनों में बनते हैं जन्हा की मिट्टी चिकनी और रेतीली होती हैं। जब इन स्थानों पर पानी जमा हो जाता है और निकल नहीं पाता तो वहां कीचड़ बनाने लगता है। चिकनी मिट्टी पानी को नीचे जमीन में भी नहीं जाने देती और नीची जमीन के कारण वर्षा आदि का पानी आकर जमा हो जाता है परन्तु निकल नहीं पाता। अब धीरे - धीरे पानी और मिट्टी मिलकर लपसी की तरह गहरे कीचड़ में बदल जाते हैं। देखने पर यह सूखी भूमि की तरह लगते हैं लेकिन वास्तव में गहरे कीचड़ होते हैं। इसमें जो भी वस्तु या प्राणी किसी तरह आ जाते हैं वे ढीली कीचड़ में धंसने लगते हैं और बाहर निकलने के लिए जितने हाथ - पैर चलाते हैं, उतने ही इसमें धँसकर डूबते जाते हैं। 
पानी के स्त्रोतों, नदियों के किनारों तथा समुद्र - तटों के आस - पास की भूमियों में लहरों का पानी आकर भर तो जाता है लेकिन वापस नहीं जा पाता। यदि वहां के मिट्टी चिकनी हो और उसमें रेत की मात्रा अधिक हो, जो प्रायः समुद्र तथा नदियों आदि के किनारे होती है , तो पानी और मिट्टी के सड़ते रहने से कालांतर में ये स्थान दलदल बन जाते हैं। अतः ऐसे स्थानों पर सावधानीपूर्वक जाना चाहिए,अन्यथा दलदल में फंसकर जानलेवा विपत्ति की चपेट में आ सकते हैं।


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हम पीछे की ओर तेज़ क्यों नहीं दौड़ पाते ?


हम पीछे की ओर तेज़ क्यों नहीं दौड़ पाते ?

चलने या दौड़ने में पैरों के अलावा शरीर के अन्य अंगों के मुड़ने, झुकने आदि का भी महत्व होता है। हमारी रीढ़ की हड्डी आगे की ओर ही मुड़ पाती है। अतः हमारा शरीर आगे की ओर ही झुक सकता है। इससे हमें दौड़ते समय संतुलन बनाये रखने में सहायता मिलती है। जब हम चलते या दौड़ते हैं तो हमारे पैरों के घुटनों के जोड़ आगे की ओर चलने के लिए ही मुड़ते हैं पीछे के लिए नहीं। इसी तरह हमारे पैरों की बनावट भी ऐसी है जिससे एड़ियां और पंजे आगे चलने में सहायक होते हैं। चलते समय हमें आगे का रास्ता भी देखना होता है। हमारी आँखों की बनावट और शरीर में उनका स्थान आगे की ओर ऐसी जगह होता हैं की वह पीछे की ओर ही आसानी से देख पाती हैं। इस तरह हमारे शरीर की बनावट और चलने या दौड़ने के लिए आवश्यक सुविधाएँ हमें आगे चलने हेतु ही सहायक होतीं हैं। इनका हमारी चलने की गति पर बहुत प्रभाव पड़ता है। हम पीछे की ओर भी चल सकते हैं लेकिन तेज़ गति से दौड़कर नहीं। इसलिए हम आगे की और दौड़ पाने की तुलना में पीछे की ओर नहीं दौड़ पाते हैं। 


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पतले कांच का गिलास गरम पानी डालने पर आसानी से क्यों चटक जाता है ?


पतले कांच का गिलास गरम पानी डालने पर 

आसानी से क्यों चटक जाता  है ?

 ऊष्मा से धातुएं आदि फैलने लगती हैं। इसमें इनका ऊष्मा के प्रति सुचालक होने का अधिक प्रभाव पड़ता है। कांच ऊष्मा का कमजोर सुचालक होता है। अतः कांच के गिलास में गर्म पानी डालने पर गिलास से ऊष्मा धीरे - धीरे बाहर आती है। पतले कांच के गिलास का कांच पतला होने से  जल्दी गरम हो जाता है , जबकि मोटे कांच के गिलास, का कांच मोटा होने से देर गरम होता है। मोटे कांच के गिलास की भीतरी सतह गरम पानी से गरम हो जाने से बढ़ने लगती है; लेकिन बाहरी परत गरम न हो पाने से बढ़ नहीं पाती। इसलिए गिलास की भीतर और बाहर की परतों के अनियमित बढ़ने से गिलास चटक जाता है और पतले कांच का गिलास एक समान गर्म होने से भीतर - बाहर एक समान बढ़ता है, अतः चटकने से बच जाता है।  



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"नमक" के भी सात अद्बुध फायदे


"नमक" के भी सात अद्बुध फायदे 

नमक का स्वाद खाने का जायका बढ़ा भी सकता है और उसे खराब भी कर सकता है। ठीक यही फॉर्मूला नमक का सेहत के साथ भी है। ज्यादा नमक खाने से भी कई प्रकार की समस्याएं शुरू हो सकती हैं और कम नमक का सेवन भी नुकसानदायकक है। वैसे तो किसी भी चीज की संतुलित मात्रा ही शरीर के विकास से लेकर उसके ग्रोथ तक में मददगार होती है। नमक कई सारी हेल्थ प्रॉब्लम्स की वजह है। हाई सोडियम डाइट यानी ज़्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर की दिक्कत शुरू हो जाती है और स्ट्रोक की भी संभावना बढ़ जाती है। वैसे तो नॉर्मल डाइट में 1500 मिलीग्राम नमक काफी है, लेकिन लोग इसका ज़्यादा ही इनटेक कर लेते हैं। वो ये भूल जाते हैं कि वो पैकेज्ड फूड, ब्रेड और नट्स के द्वारा भी नमक खा रहे हैं। इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि रोजाना कितने नमक का सेवन किया जाना चाहिए। आज पहले बात होगी नमक का किन चीजों में कैसे उपयोग कर सकते हैं। उसके बाद नमक की अधिक मात्रा को कैसे कम किया जा सकता है, इसके बारे में जानेंगे।
1. सलाद को फ्रेश रखने के लिए
पार्टी में या खाना खाने से पहले हम सलाद काटकर रख देते हैं, लेकिन खाना खाते वक्त सलाद फ्रेश नहीं लगता। इसके लिए आप सलाद परोसने से पहले नमक डाल दें। इससे सलाद फ्रेश भी रहेगा और टेस्ट भी बढ़ जाएगा।
2. कपड़ों से दाग हटाने के लिए
कपड़ों पर वाइन का दाग पड़ने पर उस जगह थोड़ा नमक लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दें। नमक वाइन के दाग को कम कर देता है और अगर आपके कपड़ों पर पसीने के दाग रह जाते हैं, तो एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक डालकर पसीने के दाग पर लगाकर ब्रश या हाथ से रगड़ें। दाग अपने आप खत्म हो जाएंगे।
3. जूतों की स्मेल को दूर करने के लिए
अगर आपके जूतों से बिना मोजे पहने हुए भी गंदी स्मेल आती है, खासकर सर्दियों में, तो इसके लिए आप हल्का-सा नमक अपने जूतों के ऊपर छिड़क दें। नमक जूतों की नमी सोख लेता है और दिनभर स्मेल नहीं आने देता।

4. अंडे की फ्रेशनेस चेक करने के लिए
अगर आप अंडे को चेक करना चाहते हैं कि वो फ्रेश है या नहीं, तो इसके लिए बहुत ही आसान तरीका है। एक बाउल में ठंडे पानी में 2 बड़े चम्मच नमक डालें। अगर अंडा पूरी तरह से पानी में डूब जाता है, तो फ्रेश है और आप यूज़ कर सकते हैं। अगर नहीं डूबता, तो इसका मतलब है कि अंडा खराब हो गया है। इसके अलावा, अंडे हमेशा नमक के पानी में उबालने चाहिए। इससे छीलने में आसानी रहती है।
5. मधुमक्खी के काटने पर
मधुमक्खी के काटने पर पहले डंक को निकालें, उसके बाद नमक और पानी का पेस्ट बनाकर उस जगह पर लगाएं। पेस्ट लगाने पर कुछ देर के लिए उसे सूखने दें। इससे पेस्ट जहर को सोख लेगा। इसे दर्द और सूज़न कम हो जाएगी। इसी तरह, आप किसी और कीड़े के काटने पर भी नमक का इस तरह उपयोग कर सकते हैं।

6. कॉफी के टेस्ट को सही करना
ज़्यादा कॉफी डालने या उबालने से कॉफी का टेस्ट कड़वा हो जाता है। इसके लिए आप कॉफी में एक चुटकी नमक मिलाएं। इससे कॉफी की कड़वाहट कम हो जाएगी। दरअसल, नमक कॉफी की कड़वाहट को कम करता है। इसे पीने पर कॉफी कड़वी नहीं लगती है। इसी तरह, कॉफी का दाग कपड़ों और पॉट से हटाने के लिए नमक का यूज़ करें।
7. झाड़ू को साफ रखना
प्लास्टिक का झाड़ू जल्दी खराब न हो, इसके लिए आप गर्म पानी और नमक डालकर साफ करें। एक बाल्टी में गर्म पानी के साथ नमक डालें और उसमें झाड़ू को 20 मिनट के लिए रखें। इससे आपका झाडू लंबे समय तक चलेगा और साफ भी रहेगा।



हेलीकॉप्टर हवा में स्थिर हो जाता है, तो हवाईजहाज क्यों नहीं हो पाता ?


हेलीकॉप्टर हवा में स्थिर हो जाता है, तो हवाईजहाज क्यों नहीं हो पाता ?

हेलीकॉप्टर तथा हवाईजहाज हवा में तब ऊपर उठते हैं, जब उनकी बॉडी तथा पंखो पर नीचे से ऊपर को उठान बल मिलता है। हवाईजहाज हवाईपट्टी पर दौड़कर यह बल प्राप्त करता है और ऊपर उठता है, अतः वह स्थिर होने पर यह बल प्राप्त नहीं कर सकता, इसलिए चलता ही रहता है और स्थिर नहीं हो पाता। जबकि हेलीकॉप्टर तब ऊपर उठता है, जब उसके ऊपर लगे रोटर ब्लेड तेज़ गति से चक्कर लगाकर यह बल पैदा करते हैं। एक ख़ास गति पर हेलीकॉप्टर का भार और रोटर ब्लेडों से उठान बल संतुलित हो जाता हैं। इसके बाद लगने वाले बल से हेलीकॉप्टर ऊपर उठने लगता है। हवा में उड़ने पर जब रोटर ब्लेडों की गति से पायलेट उठान बल और हेलीकॉप्टर के भार बल में संतुलन पैदा कर देता है, तभी वह उस स्थान पर स्थिर हो जाता है। ऐसा हवाईजहाज में नहीं हो सकता, इसलिए वे एक स्थान पर स्थिर नहीं हो सकते।








धीरे से दूध गिराएं, तो वह गिलास पर बाहर की ओर चिपककर क्यों चलने लगता है ?

धीरे से दूध गिराएं, तो वह गिलास पर बाहर की ओर 

चिपककर क्यों चलने लगता है ?

गिलास पतली चादर या शीट के बने होते हैं। इसलिए गिलास के किनारे बहुत पतली दीवार के होते हैं। अतः पतली दीवार के संपर्क में आई तरल पदार्थ की परत किनारे से दूर की परत की अपेक्षा जल्दी गोलाकार मुड़ जाती है। इससे तरल की भीतरी परत पर दबाव कम हो जाता है। बाहर की परत पर वायुमंडलीय दबाव कार्य कर रहा होता है, यह तरल की धारा को दीवार की ओर दबाता  है, जिससे तरल दूध गिलास की बाहरी सतह पर बहने लगता है.ऐसा केवल दूध के ही साथ नहीं होता;बल्कि यह क्रिया किसी भी तरल के साथ हो सकती है। 
यहाँ  यह बात याद रखने की है कि यदि हम गिलास से जल्दी और बड़ी तेज़ी के साथ दूध गिराएं, तो दोनों परतों के दबाव में शायद ही कोई अंतर होता है। इसलिए दूध एक समूची धार के रूप में गिलास से बाहर निकलने लगता है, अतः इस स्थिति में गिलास की बाहरी परत पर दूध चिपककर नहीं चल पाता।










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शुक्रवार, 22 मई 2015

गर्म पानी की थैली से सेंकने पर दर्द कम क्यों हो जाता है ?


गर्म पानी की थैली से सेंकने पर दर्द कम क्यों हो जाता है ?

अभी तक इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है, फिर भी गर्म थैली से दर्द कम होने के बारे में कुछ मान्यताएं है। कुछ का कहना है कि हमें  किसी भी स्थान पर दर्द तब मालूम पड़ता है, जब दर्द के स्थान में गुजर रही कुछ दर्द नाड़ियों में चुनचुनाहट आदि होने लगती है। जब इसकी सूचना मस्तिष्क तक पहुँचती है ,तो हमें दर्द मालूम पड़ता हैं। अतः जब गर्म पानी की थैली दर्द के स्थान पर रखते है तो वहां की तनावपूर्ण तथा दर्द भरी पेशियों को गर्माहट के कारण कुछ राहत मिलती है और वहां रक्त का संचार बढ़ जाता हैं ,जो दर्द कम करने में सहायता करता है। लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्म थैली से दर्द की नाड़ियों और बिना दर्द की नाड़ियों में चुनचुनाहट पैदा हो जाती है और जब इन दोनों की सूचना मस्तिष्क को पहुँचती है ,तो वहां भ्रम उत्त्पन्न हो जाता हैं , अतः दर्द का अनुभव नहीं होता। इसके अतिरिक्त यह भी सम्भावना है कि दर्द होने पर उसे दूर करने के लिए मस्तिष्क द्वारा ' एंडोर्फिन ' भेजी जाती है। अतः गर्म थैली द्वारा रक्तसंचार बढ़ जाने से इसकी मात्रा भी अधिक पहुँच जाती है और दर्द में राहत मिलती है। अतः यह स्पष्ट है की दर्द के स्थान पर गर्म थैली रखने से दर्द में कुछ राहत अवश्य मिलती है।








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कक्षा में घूमते हुए अंतरिक्ष यात्री भारहीनता क्यों अनुभव करते है ?


कक्षा में घूमते हुए अंतरिक्ष यात्री भारहीनता क्यों अनुभव करते है ?

जब कोई अंतरिक्षयान अंतरिक्ष में कक्षा की परिक्रमा कर रहा होता है, तो अंतरिक्ष में उसकी रफ़्तार धरती के गुरुत्वाकर्षण बल को पूरी तरह से प्रतिसंतुलित कर रही होती है। अर्थात पृथ्वी के चारों और घूम रहे अंतरिक्षयान की गति से उत्पन्न हुआ अपकेन्द्री बल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव को प्रतिसंतुलित करता है। इस तरह से दो विपरीत बलों के प्रतिसंतुलित होने से अंतरिक्षयान की गुरुत्वाकर्षण अवस्था शून्य हो जाती है। इसी  शून्य गुरुत्वाकर्षण अवस्था के कारण अंतरिक्षयान में बैठे अंतरिक्षयात्री भारहीनता का  करते हैं। 










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बुधवार, 20 मई 2015

कुछ मजेदार तथ्य

कुछ मजेदार तथ्य 

1: फिलिपिन्स में पाया जाने वाला बोया पक्षी प्रकाश में रहने का इतना शौकीन होता है कि अपने घोंसले के चारो और जुगनु भरकर लटका देता है। 
2.वेटिकनसिटी दुनिया का सबसे छोटा देश है इसका क्षेत्रफल 0.2 वर्ग मील है और इसकी आबादी लगभग 770 है. इनमें से कोई भी इसका परमानेंट नागरिक नही है। 
3.नील आर्मस्ट्राँग ने सबसे पहले अपना बाँया पैर चँद्रमा पर रखा था और उस समय उनके दिल की धड़कन 156 बार प्रति मिनट थी। 
4.धरती के गुरूत्वाकर्षण के कारण पर्वतों का 15,000 मीटर से ऊँचा होना संभव नही है। 
5.रोम दुनिया का वो शहर है जिसकी आबादी ने सबसे पहले 10 लाख का आकड़ा पार किया था।


6.1992 के क्रिकेट विश्वकप में इंग्लैंड को हराते हुए जिम्बाब्वे ने बड़ा उल्टफेर कर दिया था. पहले बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे ने सिर्फ 134 रन बनाए और इंग्लैंड का काम आसान कर दिया लेकिन हुआ ऐसा नही, इंग्लैंड की टीम 125 रन पर ही ढेर हो गई। 
7. 269 मीटर की ऊँचाई वाले टाइटैनिक को अगर सीधा खड़ा कर दिया जाए तो यह अपने समय की हर इमारत से ऊँचा होता। 
8.टाइटैनिक की चिमनिया इतनी बड़ी थी कि इनमें से दो ट्रेने गुजर सकती थी। 
9.सिगरेट लाइटर की खोज माचिस से पहले हुई थी। 
10.हमारे ऊँगलीयों के निशानों की तरह हमारी जुबान के भी निशान भिन्न होते है। 
11.विश्व में अभी भी 30 प्रतीशत लोग ऐसे है जिन्होंने कभी मोबाइल का प्रयोग नही किया।
12.औसतन हर दिन 12 नव-जन्में बच्चे किसी ओर मां-बाप को दें दिए जाते हैं। 
13.आईसलैंड में पालतू कुत्ता रखना क़ानून के विरूद्ध है। 
14.Righted-handed लोग औसतन left-handed लोगों से 9 साल ज्यादा जीते हैं।



15.शहद एक एकलौता ऐसा खाद्य पदार्थ है जो कि हजारों सालों तक खराब नही होता। मिस्र  के पिरामिडों में फैरो बादशाह की क्रब में पाया गया शहद जब खोजी वैज्ञानिकों द्वारा चखा गया तब भी वह उतना हीस्वादिष्ट था।बस उसे थोडा गरम करने की जरूरत थी। 
16.एक औसतन लैड की पेंसिल से अगर एक लाइन खींची जाए तो वह 35 किलोमीटर लंम्बी होगी जिससे 50,000 अंग्रेजी शब्द लिखें जा सकते है। 
17.एक समुद्री केकडे का दिल उसके सिर में होता है। 
18.गोरिल्ला एक दिन मे ज्यादा से ज्यादा 14 घंटे सोते है। 
19.हर साल लोग साँपों के ज्यादा मधु मक्खियों द्वारा  काटे  जाने  से मारे जाते है। 
20.कुछ कीड़े भोजन ना मिलने पर खुद को ही खा जाते हैं। 




दैनिक जीवन में घटित होने वाले अजीब सत्य

 
दैनिक जीवन में घटित  होने वाले अजीब सत्य  

1चीनी को जब चोट पर लगाया जाता है, दर्द तुरंत कम हो जाता है। 
2जरूरत से ज्यादा टेंशन आपके दिमाग को कुछ समय के लिए बंद कर सकती है। 
392% लोग सिर्फ हस देते हैं जब उन्हे सामने वाले की बात समझ नही आती। 
4बतख  अपने आधे दिमाग को सुला सकती हैं जबकि उनका आधा दिमाग जगा रहता है। 
5कोई भी अपने आप को सांस रोककर नही मार सकता।
6स्टडी के अनुसार: होशियार लोग ज्यादातर अपने आप से बातें करते हैं। 
7सुबह एक कप चाय की बजाए एक गिलास ठंडा पानी आपकी नींद जल्दी खोल देता है। 
8जुराब पहन कर सोने वाले लोग रात को बहुत कम बार जागते हैं या बिल्कुल नही जागते।
9फेसबुक बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग के पास कोई कालेज डिगरी नही है। 
10आपका दिमाग एक भी चेहरा अपने आप नही बना सकता आप जो भी चेहरे सपनों में देखते हैं वो जिदंगी में कभी ना कभी आपके द्वारा देखे जा चुके होते हैं। 

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11अगर कोई आप की तरफ घूर रहा हो तो आप को खुद एहसास हो जाता है चाहे आप नींद में ही क्यों ना हो। 
12दुनिया में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला पासवर्ड 123456 है। 
13लोग सोने से पहले वो सब सोचते हैं जो वो अपनी जिंदगी में करना चाहते हैं। 
14खुश रहने वालों की बजाए परेशान रहने वाले लोग ज्यादा पैसे खर्च करते हैं। 
15माँ अपने बच्चे के भार का तकरीबन सही अदांजा लगा सकती है जबकि बाप उसकी लम्बाई का। 
16पढना और सपने लेना हमारे दिमाग के अलग-अलग भागों की क्रिया है इसी लिए हम सपने में पढ नही पाते।
17अगर एक चींटी का आकार एक आदमी के बराबर हो तो वो कार से दुगुनी तेजी से दौडेगी।
18आप सोचना बंद नही कर सकते…..
19चींटीयाँ कभी नही सोती।
20हाथी ही एक एसा जानवर है जो कूद नही सकता।
21जीभ हमारे शरीर की सबसे मजबूत मासपेशी है। 
22नील आर्मस्ट्रांग ने चन्द्रमा पर अपना बायां पाँव पहले रखा था उस समय उसका दिल 1 मिनट में 156 बार धडक रहा था। 
23पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल के कारण पर्वतों का 15,000 मीटर से ऊँचा होना संभव नही है। 
24शहद हजारों सालों तक खराब नही होता।
25समुंद्री केकडे का दिल उसके सिर में होता है। 




26कुछ कीडे भोजन ना मिलने पर खुद को ही खा जाते है। 
27छींकते वक्त दिल की धडकन 1 मिली सेकेंड के लिए रूक जाती है। 
28लगातार 11 दिन से अधिक जागना असंभव है। 
29हमारे शरीर में इतना लोहा होता है कि उससे 1 इंच लंबी कील बनाई जा सकती है। 
30बिल गेट्स 1 सेकेंड में करीब 12,000 रूपए कमाते हैं। 
31आप को कभी भी ये याद नही रहेगा कि आपका सपना कहां से शुरू हुआ था। 
32हर सेकेंड 100 बार आसमानी बिजली धरती पर गिरती है। 
33कंगारू उल्टा नही चल सकते।
34इंटरनेट पर 80% ट्रैफिक सर्च इंजन से आती है। 
35एक गिलहरी की उमर 9 साल होती है। 
36हमारे हर रोज 200 बाल झडते हैं।  
37हमारा बांया पांव हमारे दांये पांव से बडा होता हैं। 
38गिलहरी का एक दांत हमेशा बढता रहता है। 
39दुनिया के 100 सबसे अमीर आदमी एक साल में इतना कमा लेते हैं जिससे दुनिया
40की गरीबी 4 बार खत्म की जा सकती है। 





41एक शुतुरमुर्ग की आँखे उसके दिमाग से बडी होती है। 
42चमगादड गुफा से निकलकर हमेशा बांई मुडती है। 
43ऊँट के दूध की दही नही बन सकता।
44एक काॅकरोच सिर कटने के बाद भी कई दिन तक जिवित रह सकता है। 
45कोका कोला का असली रंग हरा था। 
46लाइटर का अविष्कार माचिस से पहले हुआ था। 
47रूपए कागज से नहीं बल्कि कपास से बनते है। 
48स्त्रियों की कमीज के बटन बाईं तरफ जबकि पुरूषों की कमीजके बटन दाईं तरफ होते हैं। 
49मनुष्य के दिमाग में 80% पानी होता है। 
50मनुष्य का खून 21 दिन तक स्टोर किया जा सकता है। 
51फिंगर प्रिंट की तरह मनुष्य की जीभ के निशान भी अलग-अलग होते हैं।