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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

# बेलनाकार तने

अधिकतम वृक्षों के तने बेलनाकार क्यों होते हैं ? 

            यह सच्च है कि  अधिकतर वृक्षों का तना बेलनाकार होता है; लेकिन सभी वृक्ष बेलनाकार नहीं होते। घांस जैसे पौधों का तना  तिकोना होता है तो तुलसी एवं अन्य पौधों का तना चौकोर होता है। हम जानते हैं कि पौधे बहुत छोटी - छोटी कोशिकाओं के बने होते हैं।  कोशिकाएं अापस में सर्पिल कुंडलीदार या गोलाकार आकार मे जुडी होती हैं। पौधों की आकृति कुछ अंश तक कोशिकाओं की आकृति पर और कुछ  - कुछ इन कोशिकाओं के क्रमविन्यास पर निर्भर करती है। पौधों के तनों में संचार उत्तक होते हैं, जो जाइलम और फ्लोअम की संकरी रज्जुओं से युक्त होते है। तने के बीच केन्द्र में भीतर की ओर जाइलम काष्ठीय बेलन के भीतर निर्मित होते हैं जो पुराने होने पर मृत हो जाते हैं और तने के मध्य  को काष्ठीय बना देते हैं। इसके चारों ओर बेलनाकार आकार में फ्लोअम बढ़ते हैं और कोशिका भित्ति निर्मित करते हैं। क्योंकि तना परत दर परत बाहर की ओर त्रिज्यीय रूप में बढ़ता है अतः तने की आकृति बेलनाकार रूप ही धारण करती है।
























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