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बुधवार, 1 अप्रैल 2015

कुमकुम का तिलक क्यों?

कुमकुम का तिलक क्यों? 

                    कुमकुम हल्दी का ही चूर्ण होता है जो नींबू के रस में मिलान से लाल हो जाता है। हल्दी संयोजक और त्वचा शोधन के लिए सर्वोत्तम पदार्थ है। आयुर्वेद में इसके अनेक गुण लिखे गए हैं। अतः कुमकुम के तिलक से त्वचा शुद्धि और मस्तिष्क स्नायुओं का संयोजन नैसर्गिक हो जाता है। 
          
                    मांग के जिस स्थान पर सिंदूर लगाया जाता है व स्थान ब्रह्मरन्ध्र और अध्मि नामक मर्म के ठीक ऊपर का भाग है। स्त्री के शरीर मे यह भाग पुरूष की अपेक्षा अधिक कोमल होता है। अतः उसकी सुरक्षा के लिए शास्त्रकारों ने सिन्दूर का विधान किया। सिन्दूर में पारा जैसी अलभ्य धातु बहुत मात्रा में होती है। यह स्त्री शरीरस्थ वैद्युतिक उत्तेजना को ही नियंत्रित नहीं रखती अपितु मर्मस्थान को बाह्य दुष्प्रभाव से बचाती है।
























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