Adsense responsive

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2015

शौच-लघुशंका आदि में मौन क्यों रखना चाहिए?

शौच-लघुशंका आदि में मौन क्यों रखना चाहिए? 


धर्मशास्त्र के अलावा वैज्ञालिक दृष्टि से शौच-लघुशंका के समय बोलने खांसने, हांफने आदि से मल के दूषित कीटाणु शरीर में प्रविष्ठ होंगे ही, साथ ही मलाशय शोधन के प्राकृतिक काम में अड़चन भी पड़ जाएगी, जो स्वास्थ्य के परम घातक है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें