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रविवार, 22 फ़रवरी 2015

स्नान के पहले क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए

बिना स्नान खाएं क्यों नहीं?

आज के सभ्य व शिक्षित समाज में बिस्तर पर ही चाय-बिस्कुट एवं बिना स्थान किए नाश्ता-भोजन करने की आदत-सी पड़ गई है। अतः पाश्चात्य संस्कृति में आकण्ठ डूबे लोग ही प्रश्न करते हैं कि बिना स्था किए खा लिया तो क्या हुआ? शास्त्र कहते हैं- ‘अस्नायी समलं भुक्ते’ बिना स्थान किए भोजन खाना मल खाने के तुल्य है।

इसके पीछे  वैज्ञानिक कारण क्या है ?

शरीर वैज्ञानिक कहते हैं कि जब तक स्वाभाविक क्षुधा अच्छी तरह से जागृत न हो जाए, तब तक हमें भोजन नहीं करना चाहिए। स्थान करने पर शरीर में शीतलता आती है एवं नई स्फूर्ति जागृत होती है। जिससे स्वाभाविक क्षुधा भी जागृत होती है। उस समय किए गए भोजन का रस हमारे शरीर में पुष्टिवर्धक साबित होता है। स्नान के पूर्व यदि हम कोई वस्तु खा लें तो हमारी जठराग्नि उसे पचाने का कार्य में लग जाती है। उसके बाद स्नान करने पर, शरीर के शीतल हो जाने पर उदर की पाचन-शक्ति मंद हो जाएगी। जिसके फलस्वरूप हमारा आंत्रशोध कमजोर होगा, हमें कब्ज की शिकायत होगी, मलत्याग कठिनता से होगा एवं मनुष्य नाना प्रकार के अन्य रोगों से संत्रस्त हो उठेगा।

क्या भूख लगने पर स्नान के पूर्व कुछ खाने का विधान है? 

 इक्षुराजपयोमूलं फलं ताम्बूलमौषधम्।
भुक्त्वा पीत्वापि कर्तव्या स्नानदानादिकाः क्रियाः।।
अर्थात् गन्ने का रस, पानी, दूध, फल, मूल, पान और औषधि इन वस्तुओं को खा-पीकर भी स्नान-दान और ध्यान की क्रिया की जा सकती है। ये सभी वस्तुएं शीघ्र सुपाच्य हैं।













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