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रविवार, 22 फ़रवरी 2015

तेल का वास्तविक अर्थ

तेल का वास्तविक अर्थ क्या है? 

संस्कृत व्याकरणानुसार तिलों से निकाली हुई चिकनाई का नाम ही तेल है। आज कल सरसों, गिरी, मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन आदि सभी वस्तुओं से निकलने वाली चिकनाई को तेल कह देने की परिपाटी चल निकली है।
संस्क्ृत साहित्य में सरसों से निकलने वाले स्नेह (चिकनाई) को ‘सार्षप’ कहते हैं। कहा गया है-
सार्षपं गंधतैलं च यत्तेलं पुष्पवासितम्।
अन्यद्र व्ययुतं तेलं न दुष्यति कदाचन्।
अर्थात् सरसों का तेल, सुगंधयुक्त तेल, फूलों से वासित तेल और अन्य द्रव्य जिसमें मिलाया गया हो, ऐसे सब तेल सब दिन लगाए जा सकते हैं।









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