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रविवार, 8 फ़रवरी 2015

क्या मुस्लिम लोग भी ग्रहण में विश्वास रखते हैं?

क्या मुस्लिम लोग भी ग्रहण में विश्वास रखते हैं? 

जिस वर्ष पैगम्बर मुहम्मद का जन्म हुआ 24 नवम्बर 569 उस वर्ष उस स्थान पर एक हजार किलोमीटर के दायरे में सूर्य ग्रहण की पूर्णता का पथ था।  22 जनवरी 632 को पैगम्बर के दूधमुंहे बच्चे की अकस्मात् मृत्यु हो गई। उस दिन वलयाकृति सूर्य ग्रहण था। इसके बाद 2 जुलाई 632 को पुनः वलयाकृति सूर्य ग्रहण था। उस दिन मुआवैया ने अली (पैगम्बर के दामाद) के खिलाफ बगावत कर नेतृत्व अपने हाथ में ले लिया। उसने पैगम्बर के पीठासीन को मुदीना से उठाकर राजधानी दमिश्क (सीरिया) ले जाने का फैसला किया। लेकिन पीठासीन उठाने के समय वलयाकृति सूर्य ग्रहण लगने के कारण उसे वहीं छोड़ दिया गया।
मिस्र व अन्य मुस्लिम देशों में पूर्ण सूर्य ग्रहण पुराने राजवंश का अंत और नये राजवंाश के उदय के रूप में देखा जाता है। पर कुरान व मुस्लिम धर्मग्रंथों में ग्रहण के विषय में सामग्री नहीं मिलती।






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