Adsense responsive

रविवार, 8 फ़रवरी 2015

क्या राहु केतु का वर्णन वेदों में मिलता है?

क्या राहु केतु का वर्णन वेदों में मिलता है? 

ऋग्वेद में राहु को ‘स्वभानु‘ के नाम से पुकारा गया जो सूर्य व चंद्र के प्रकाश को रोकता है। ऋग्वेद साम या यजुर्वेद के बाद अथर्ववेद (13.2, 16-28) में केतु का वर्णन विस्तार से मिलता है। साथ ही आधुनिक धूमकेतु का वर्णन भी, ‘अथर्ववेद‘ के बहुत से मंत्रों में मिलता है।
राहु केतु का वर्णन पुराणों में ज्यादा मुखरित हुआ है। परवर्ती ज्योतिषाचार्यो ने सात ग्रहों के बाद राहु को आठवां एवं केतु को नवें ग्रह के रूप में स्वीकार कर लिया। इसका उल्लेख विंशोत्तरी व अष्टोत्तरी दोनों दशा साधन में मिलता है। अष्टोत्तरी दशा में नियमित रूप से गतिशील सात खगोलीय पिंडों के साथ राहु के लिए 12 वर्ष, विशोत्तरी दशा में 18 वर्ष का समय नियत किया गया है।






कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें