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शनिवार, 16 दिसंबर 2017

तांबे की अंगूठी पहनने से फायदे



ग्रहों का राजा सूर्य है और सूर्य की धातु है तांबा। हिन्दू धर्म में सोना, चांदी और तांबा, ये तीनों धातुएं पवित्र मानी गई हैं। इसीलिए पूजा-पाठ में इन धातुओं का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा इनकी अंगूठी भी काफी लोग पहनते हैं। यहां जानिए तांबे की अंगूठी पहनने से कौन-कौन से लाभ मिलते हैं…


1. सूर्य के साथ ही तांबे की अंगूठी से मंगल के अशुभ असर भी कम हो सकते हैं।

2. तांबे की अंगूठी सूर्य की उंगली यानी रिंग फिंगर में पहननी चाहिए। इससे कुंडली में सूर्य के दोषों का असर कम हो सकता है।

3. तांबे की अंगूठी के प्रभाव से सूर्य का बल बढ़ता है, जिससे हमें सूर्य देव की कृपा से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलता है।

4. तांबे की अंगूठी लगातार हमारे शरीर के संपर्क में रहती है। जिससे तांबे के औषधीय गुण शरीर को मिलते हैं। इससे खून साफ होता है।


5. जिस प्रकार तांबे के बर्तन में रखा पानी स्वास्थ्य को लाभ पहुंचात है, ठीक उसी प्रकार तांबे की अंगूठी से भी फायदा मिलता है।

6. तांबे की अंगूठी के असर से पेट से जुड़ी बीमारियों में भी राहत मिल सकती है।


7. तांबा लगातार त्वचा के संपर्क में रहता है, जिससे त्वचा की चमक बढ़ती है।

8. आयुर्वेद के अनुसार तांबे के बर्तनों का उपयोग करने से हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यही लाभ तांबे की अंगूठी पहनने से भी मिलता है।

9. तांबे की अंगूठी पेट से संबंधित सभी समस्याओं में काफी फायदेमंद है यह पेट दर्द, पाचन में गड़बड़ी और एसिडिटी की समस्याओं में फायदा पहुंचाती है। इसके अलावा अगर आप पेचिश की समस्या से परेशान हैं तो तांबे की अंगूठी इस समस्या में आपकी काफी मदद कर सकती है।

10. तांबे की अंगूठी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। ये हाई ब्लड प्रेशर या लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसके अलावा इस अंगूठी को पहनकर आप शरीर के सूजन को भी कम कर सकते हैं।

11. तांबे की अंगूठी शरीर की गर्मी को कम करने में मदद करता है। इसे पहनने से शारीरिक और मानसिक तनाव कम होता है। इसके साथ ही गुस्से पर नियंत्रण होता है. ये अंगूठी तन और मन दोनों को शांत रखने में मदद करता है।
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बुधवार, 13 दिसंबर 2017

सुख-शांति और धन पाने के उपाय

सुख-शांति और धन पाने के उपाय


सुबह उठकर सबसे पहले घर की मालकिन अगर एक लोटा पानी घर के मुख्य द्वार पर डालती है तो घर में लक्ष्मी देवी के आने का रास्ता खुल जाता है।

अगर आप चाहते हैं कि घर में सुख-शांति बनी रहे तो हर एक अमावस के दिन घर की अच्छी तरह सफाई करके (बेकार सामान घर में न रखें) कच्ची लस्सी का छींटा देकर 5 अगरबत्ती जलाइए।

महीने में 2 बार किसी भी दिन घर में उपला जलाकर लोबान व गूगल की धूनी देने से घर में ऊपरी हवा का बचाव रहता है तथा बीमारी दूर होती है।


घर में कर्ज व बीमारी कभी समाप्त नहीं होती है तो इससे बचने के लिए इस कोने में एक लाल बल्ब जला दें, जो हर वक्त जलता रहे।

घर में पैसा, सोना और बेशकीमती सामग्री रखने वाली अलमारी का मुंह उत्तर की तरफ रखें, ऐसा करने से घर में लक्ष्मी बढ़ती है।


किसी रोज संध्याकाल में गाय का कच्चा दूध मिट्टी के किसी बर्तन में भरकर बाएं हाथ से घर के सबसे छोटे बच्चे के सिर से सात बार उतारकर चौराहे पर रख आएं या किसी कुत्ते को पिला दें।

घर से किसी भी कार्य या यात्रा के लिए निकलते समय पहले विपरीत दिशा में 4 पग जाएं, इसके बाद कार्य या यात्रा पर चले जाएं, यात्रा सफल होगी और कार्य जरूर बनेगा।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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सोमवार, 11 दिसंबर 2017

दूध के इन उपाय से सब परेशानी दूर



dudh

प्राचीन तांत्रिक ग्रंथों में बताए गए दूध के ऐसे ही टोने-टोटकों के बारे में जिन्हें करते ही असर दिखता है और आपकी समस्या तुरंत दूर होने लगती हैं।

अगर कुंडली में कोई भी ग्रह बुरा असर दे रहा है तो सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठें।

उसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान आदि कर अपने आसपास के शिव मंदिर में जाएं तथा वहां शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं। लगातार सात सोमवार तक इस उपाय को करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही कुंडली में कोई भी ग्रह बुरा असर दे रहा होता है, वो भी टल जाता है।

नजर दूर करने तथा अमीर बनने के लिए रविवार की रात सोते समय 1 गिलास में दूध भरकर अपने सिर के पास रखकर सो जाएं। ध्यान रखें, यह दूध फैलना नहीं चाहिए। अगले दिन सुबह उठने के बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर इस दूध को किसी बबूल के पेड की जड़ में डाल दें। ऐसा हर रविवार रात करें। जिस आदमी पर इस उपाय को करेंगे, उसकी नजर दूर होगी और उसके सारे काम बनते चले जाएंगे। 

घर में लक्ष्मी के स्थाई वास के लिए एक लोहे के बर्तन में जल, चीनी, दूध तथा घी मिला लें। इसे पीपल के पेड़ की छाया के नीचे खड़े होकर पीपल की जड़ में डाले। इससे घर में लक्ष्मी का वास होता है। 

अगर कुंडली में गुरु ग्रह अपना बुरा असर दे रहा हो तो वक्री हो तो दूध में चीनी तथा केसर या हल्दी मिला कर शाम के समय शिवलिंग पर ऊँ नमः शिवायः का जाप करते हुए चढ़ाएं। गुरु अपना अशुभ असर त्याग कर शुभ फल देने लगेगा
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गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

चावल का एक ऐसा उपाय को करने से कुछ ही दिनों में धन लाभ



पूजा की विभिन्न सामग्रियोंमनी प्रॉब्लम दूर करने के लिए करे पीले चावलों का यह उपाय में से ही एक है अक्षत यानि चावल। चावल का उपयोग हर छोटी से लेकर बड़ी पूजा या हवन सामग्री में होता है। यही कारण है की ज्योतिषीय उपायों में भी चावल का बहुत महत्व है आइए जानते हैं चावल का एक ऐसा उपाय जो पैसों से जुड़ी हर तरह की दिक्कतों को खत्म कर सकता है।

किसी भी शुभ दिन, जैसे शुक्रवार या किसी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें। नहाने के बाद मां महालक्ष्मीजी की तस्वीर या मूर्ति के सामने अपना आसन लगा लें।अब कुल 21 पीले चावल लें और उसे लाल रंग के रेशमी कपड़े में बांधकर छोटी-सी पोटली बना लें। इस पोटली को पूजा के दौरान लक्ष्मी मां के सामने रख दें।


पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी जी की पूजा खत्म करने के बाद यह पोटली अपने पर्स में या फिर घर के उस स्थान पर रख दें जहां धन रखा जाता हो और धन की देवी से यह प्रार्थना करें कि आपको कभी पैसे की कोई कमी ना हो।एक बात का ध्यान रखें कि चुने गए 21 चावल अखंडित हो।
चावलों को पीला करने के लिए हल्दी में थोड़ा जल मिलाएं और फिर उस हल्दी को चावलों पर लगाकर कुछ देर सूखने के लिए रख दें। इसके बाद ही इन चावलों का उपयोग पोटली बनाने के लिए करें।मान्यता है कि इस उपाय को करने से कुछ ही दिनों में धन लाभ होता है और साथ ही धन से जुड़ा कोई भी बड़ा नुकसान भी टल जाता है।

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सोमवार, 4 दिसंबर 2017

लाफिंग बुद्धा पूरी करेंगे आपकी मनोकामना

Laughing Buddha


जिस प्रकार भारत में वास्तु है, ठीक उसी प्रकार चीन में फेंगशुई है। भारत में कुबेर देव धन के देवता हैं और चीन में लाफिंग बुद्धा। फेंगशुई की मान्यता है कि घर में लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति रखने से सौभाग्य बढ़ता है। इसीलिए भारत में भी काफी लोग अपने-अपने घरों में और दुकानों में इनकी मूर्तियां रखते हैं। यहां जानिए आखिर लॉफिंग बुद्धा कौन थे और घर में इनकी मूर्ति कैसे रखनी चाहिए…

महात्मा बुद्ध के शिष्य थे लॉफिंग बुद्धा
महात्मा बुद्ध के कई शिष्यों में से एक थे जापान के होतेई। मान्यता के अनुसार होतेई बौद्ध बने और जैसे ही उन्हें आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई तो वे जोर-जोर से हंसने लगे। इसके बाद उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था लोगों को हंसाना और सुखी बनाना। होतेई जहां भी जाते वहां लोगों को हंसाते और लोग उनके साथ काफी खुश रहते थे। इसीकारण जापान में लोग उन्हें हंसता हुआ बुद्धा यानी लॉफिंग बुद्धा कहने लगे। धीरे-धीरे उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई, एक देश से दूसरे देश और अब पूरी दुनिया में उन्हें मानने वालों करोड़ों लोग हैं।

जबकि चीन में प्रचलित मान्यता के अनुसार लॉफिंग बुद्धा चीनी देवता हैं। चीन में इन्हें पुताइ के नाम से जाना जाता है। वे एक भिक्षुक थे और उन्हें मौज-मस्ती करना, घुमना-फिरना बहुत पसंद था। वे जहां भी जाते थे, वहां अपना बड़ा पेट और विशाल बदन दिखाकर सभी को हंसाते थे। तभी से लोग इन्हें देवता की तरह मानने लगे और इनकी मूर्तियां घर में रखने लगे।
लाफिंग बुद्धा के उपाय
फेंगशुई के अनुसार सही जगह पर लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति रखने से घर की नकारात्मकता खत्म होती है और घर में सकारात्मकता बढ़ती है। जिससे सुख-समृद्धि का आगमन घर में होता है। जानिए घर में लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति कहां कैसे रखना चाहिए…

1. लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति मुख्य दरवाज़े के सामने न रखे।

2. लाफ‌िंग बुद्धा को घर या दफ्तर में जहां भी रखें इस बात का ध्यान रखें क‌ि उसकी ऊंचाई आपकी आंखों के बराबर तक हो। यानी लाफ‌िंग बुद्धा इस तरह हो क‌ि आते आते आपकी सीधी नजर उस पर पड़े। अध‌िक ऊंचाई या नीचे इसे नहीं रखना चाह‌िए।


3. जो लोग पैसा इकठ्ठा नहीं कर पा रहे हैं उन्हें धन की पोटली लिए हुए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति घर में रखनी चाहिए। इससे धन संबंधी कामों में लाभ मिल सकता हैं।

4. अगर कामों में सफलता नहीं मिल पा रही है तो दोनों हाथों में कमंडल लिए हुए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति घर में रखनी चाहिए।


5. क‌िसी भी घर में पूर्व द‌िशा को पर‌िवार के भाग्‍य और सुख शांत‌ि का स्‍थान कहा जाता है। आप अपने घर के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और तालमेल बढ़ाना चाहते हैं तो एक लाफ‌िंग बुद्धा पूर्व द‌िशा में रखें जो अपने दोनों हाथों को उठाकर हंस रहे हों।

6. फेंगशुई के न‌ियम के अनुसार लाफ‌िंग बुद्धा को अपने घर में दक्ष‌िण पूर्व द‌िशा में रखें तो इस द‌िशा की सकारात्‍मक उर्जा बढ़ जाती है जो धन औ सुख को आकर्ष‌ित करती है। घर में रहने वालों की आमदनी बढ़ती है। नौकरी व्यवसाय आपके व‌िरोध‌ियों से आप परेशान हैं तो इसमें भी यह राहत द‌िलाता है।

7. सामान्यतौर पर लाफिंग बुद्धा की मूर्ति मिट्टी से बनी होती है लेकिन आप धातु का लाफिंग बुद्धा भी रख सकते हैं। लेकिन इसका प्रभाव अलग होता है। ऐसे व्यक्ति जो कभी निर्णय नहीं ले पाते, जिनकी निर्णय क्षमता बहुत कमजोर होती है वे धातु से बने, हंसते हुए बुद्धा की प्रतिमा अपने घर या ऑफिस में रख सकते हैं। इससे आपकी निर्णय क्षमता और अधिक बढ़ जाएगी।

8. अगर आपके घर में कोई बीमार है लेकिन किसी भी परीक्षण में यह साबित नहीं हो पा रहा कि दरअसल बीमारी क्या है तो हाथ में वु लु लिए लाफिंग बुद्धा को बीमार व्यक्ति के तकिए के पास रख देना चाहिए। जल्द ही जांच में उसकी बीमारी का पता चल जाएगा। वु लु एक प्रकार का चीनी फल है जो पीले रंग का होता है।

9. अगर आपको लगता है कि आपके घर में कोई जादू-टोना करता है या किसी की बुरी नजर आपके घर के सदस्यों पर पड़ी है तो आपको ड्रैगन पर बैठे, दिव्य शक्तियों के स्वामी लाफिंग बुद्धा को अपने घर में रखना चाहिए।

10. धन की पोटली अपने कांधे पर टांगे लाफिंग बुद्धा किसी भी घर या ऑफिस के लिए शुभ माने गए हैं, वहीं बच्चों के साथ बैठे लाफिंग बुद्धा संतान प्राप्ति के लिए रखे जाते हैं।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

कुछ सरल उपाय और टोटके



कुछ सरल उपायों, टोटकों और मंत्रों से सफलता मिलने की संभावना बन सकती है। यदि बेरोजगारी का घटाटोप हो रहा हो तो रोजगार का प्रकाश पाने के लिए इन टोटकों को कर के देखें।

कमाल का लेकिन है सात्त्विक टोटका
तीन सौ ग्राम काले उड़द का आटा लेकर, बिना छाने इसको गूंथकर खमीर उठा लें। तत्पश्चात् इसकी एक-एक रोटी तैयार करके मामूली-सी आंच पर सेंक लें, ताकि इसकी आसानी से गोलियां बन सकें। इस रोटी में से एक चौथाई भाग तोड़कर काले रंग के कपड़े में बांध लें, शेष पौन रोटी की 101 छोटी-छोटी गोलियां बनाकर, किसी ऐसे जलाशय के पास जायें, जिसमें मछलियां हों। जलाशय में एक-एक कर सारी गोलियां मछलियों को खिला दें। अब कपड़े में बंधी रोटी को मछलियों को दिखाते हुए एक साथ पानी में प्रवाहित कर दें। इस प्रकार 40 दिनों तक नियमित रूप से यह क्रिया करें। इससे बेरोजगारी अवश्य दूर होगी तथा कोई नौकरी, व्यापार अथवा उदर-पूर्ति के लिए कुछ न कुछ व्यवस्था जरूर हो जायेगी।

दूसरा चमत्‍कारी टोटका
बृहस्पतिवार को एक नर कौए को पकड़कर कर ले आयें, पिंजरे में बंद कर दें। खाने के लिए दाना-पानी दें। रविवार की सुबह उसे दही में चीनी मिलाकर खिलाएं और दोपहर को चावलों के भात में दूध व दही मिलाकर खाने को दें। इसके बाद सोमवार के दिन, जहां से काम हासिल करने का खयाल हो, वहां जायें। उस जगह के मुखय दरवाजे में दाखिल होते वक्त दायें पांव को पहले रखें। इस तरह से वहां पहुंचने के साथ ही आपको काम मिल जायेगा।
प्रयोग : यह प्रयोग स्फटिक मणिमाला पर किया जाता है। सामने पीला वस्त्र बिछाकर उस पर 108 मनकों की मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठा युक्त स्फटिक मणिमाला रख दें और केसर से उसका पूजन करें। सामने अगरबत्ती या दीपक जला दें। यह दीपक शुद्ध घृत का हो। फिर उपर्युक्त मंत्र का इक्कीस बार उच्चारण करें। इस प्रकार 11 दिन तक करने से वह माला विजय माला में परिवर्तित हो जाती है। जब किसी इंटरव्यू या साक्षात्कार में जायें तो उस माला को बुशर्ट अथवा कुर्ते के नीचे पहनकर जायें, ऐसा करने पर साक्षात्कार में अवश्य ही सफलता प्राप्त होती है।
नौकरी प्राप्त करने का सुलेमानी मंत्र
• सामग्री : जलपात्र, तेल का दीपक, लोवान, धूप आदि।
• माला : मूंगे की माला
• समय : दिन का कोई भी समय
• आसन : किसी भी प्रकार का आसन
• दिशा : पूर्व दिशा
• जप संखया : नित्य ग्यारह सौ

• अवधि : चालीस दिन मंत्र : ऊँ या मुहम्मद दीन हजराफील भहक अल्लाह हो। यह मुसलमानी प्रयोग है तथा किसी भी शुक्रवार को प्रारंभ किया जा सकता है। प्रातः उठकर बिना किसी से बातचीत किये सवा पाव उड़द के आटे की रोटी बनायें और उसे आंच पर अपने हाथों से सेकें इसके बाद रुमाल पर रोटी के चार टुकड़े करके रख दें। उसमें से एक टुकड़े को नदी या तालाब में ले जाकर डाल दें, जिससे कि मछलियां उनको खा जायें। शेष रोटी के जो तीन भाग बचेंगे, उनमें से एक भाग कुत्ते को खिला दें, दूसरा भाग कौवे को खिला दें और तीसरा भाग रास्ते में फेंक दें। इस प्रकार चालीस दिन नित्य प्रयोग करें, तो मनोवांछित नौकरी या रोजी प्राप्त होती है और आगे जीवन में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आती है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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बुधवार, 22 नवंबर 2017

पत्नी को रखना चाहिए इन बातों का खास ध्यान



1- जो स्त्री अपने पति को बाहर से आते देख अन्न, जल आदि से उसकी सेवा करती है, मीठे वचन बोलती है, वह तीनों लोकों को संतुष्ट कर देती है। पतिव्रता स्त्री के पुण्य पिता, माता और पति के कुलों की तीन-तीन पीढिय़ों के लोग स्वर्गलोक में सुख भोगते हैं।

2- रजोनिवृत्ति के बाद शुद्धता पूर्वक स्नान करके सबसे पहले अपने पति का चेहरा देखना चाहिए, अन्य किसी का नहीं। अगर पति न हो तो भगवान सूर्य देव के दर्शन करना चाहिए।

3- पतिव्रता स्त्रियों को चरित्रहीन स्त्रियों के साथ बात नहीं करनी चाहिए। पति से द्वेष रखने वाली स्त्री का कभी आदर नहीं करना चाहिए। कभी अकेले नहीं खड़ा रहना चाहिए।

4- पतिव्रता स्त्री को अपने पति की आज्ञा के बिना कहीं नहीं जाना चाहिए। पति के बिना मेले, उत्सव आदि का भी त्याग करना चाहिए यानी नहीं जाना चाहिए। पति की आज्ञा के बिना व्रत-उपवास भी नहीं करना चाहिए।


5- पतिव्रता स्त्री को प्रसन्नतापूर्वक घर के सभी कार्य करना चाहिए। अधिक खर्च किए बिना ही परिवार का पालन-पोषण ठीक से करना चाहिए। देवता, पितर, अतिथि, सेवक, गाय व भिक्षुक के लिए अन्न का भाग दिए बिना स्वयं भोजन नहीं करना चाहिए।

6- धर्म में तत्पर रहने वाली स्त्री को अपने पति के भोजन कर लेने के बाद ही भोजन करना चाहिए। जब पति खड़ा हो तो पत्नी को भी खड़ा रहना चाहिए। उसकी आज्ञा के बिना बैठना नहीं चाहिए। पति के सोने के बाद सोना चाहिए और जागने से पहले जाग जाना चाहिए।


7- रजस्वला होने पर पत्नी को तीन दिन तक अपने पति को मुंह नहीं दिखाना चाहिए अर्थात उससे अलग रहना चाहिए। जब तक वह स्नान करके शुद्ध न हो जाए तब तक अपनी कोई बात भी पति के कान में नहीं पडऩे देना चाहिए।

8- मैथुन काल के अलावा किसी अन्य समय पति के सामने धृष्टता यानी दु:साहस नहीं करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री को ऐसा काम करना चाहिए, जिससे पति का मन प्रसन्न रहे। ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे कि पति के मन में विषाद उत्पन्न हो।


9- पति की आयु बढऩे की अभिलाषा रखने वाली स्त्री को हल्दी, रोली, सिंदूर, काजल, मांगलिक आभूषण, केशों को संवारना, हाथ-कान के आभूषण, इन सबको अपने से दूर नहीं करना चाहिए यानी पति की प्रसन्नता के लिए सज-संवरकर रहना चाहिए।

10- पतिव्रता स्त्री को सुख और दु:ख दोनों ही स्थिति में अपने पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए। यदि घर में किसी वस्तु की आवश्यकता आ पड़े तो अचानक ये बात नहीं कहनी चाहिए बल्कि पहले अपने मधुर वचनों से उसे पति को प्रसन्न करना चाहिए, उसके बाद ही उस वस्तु के बारे में बताना चाहिए।


11- पति बूढ़ा या रोगी हो गया हो तो भी पतिव्रता स्त्री को अपने पति का साथ नहीं छोडऩा चाहिए। जीवन के हर सुख-दु:ख में पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए। अपने पति की गुप्त बात किसी को नहीं बताना चाहिए।

12- पत्नी को बिना सिंगार किए अपने पति के सामने नहीं जाना चाहिए। जब पति किसी कार्य से परदेश गया हो तो उस समय सिंगार नहीं करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री को कभी अपने पति का नाम नहीं लेना चाहिए। पति के भला-बुरा कहने पर भी चुप ही रहना चाहिए।

13- पति के बुलाने पर तुरंत उसके पास जाना चाहिए और पति जो आदेश दे, उसका प्रसन्नतापूर्वक पालन करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री को घर के दरवाजे पर अधिक देर तक नहीं खड़ा रहना चाहिए।
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शनिवार, 18 नवंबर 2017

सुखी जीवन के लिए कुछ वास्तु टिप्स

Vastu Tips


वास्तु दोष के कारण जीवन कष्टमय हो सकता है। यहां हम सुखी जीवन के लिए कुछ वास्तु टिप्स बता रहे हैं।

घर के आगे का भाग टूटा हुआ, प्लास्टर उखड़ा हुआ, दीवारों में दरार हों अथवा दीवारें खराब हों तो उस घर की महिलाओं में मानसिक अशांति, डिप्रेशन, तनाव या दूसरी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए घर के भाग हमेशा सही दशा में रखना जरूरी है।

पति-पत्नी के बीच प्रगाढ़ संबंधों को बनाये रखने के लिए सोने के कमरे में बतख का जोड़ा अवश्य रखना चाहिए। जिस स्थान पर बतख का जोड़ा रखा जाए वहां पर्याप्त प्रकाश होना जरूरी है।

घर में चेहरा देखने वाले शीशा के लिए उपयुक्त स्थान पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार है। छत या फर्श में शीशा नहीं लगवाना चाहिए। सोने के कमरे में शीशायुक्त ड्रेसिंग टेबल को इस तरह रखें कि उसमें सोते समय प्रतिबिम्ब न दिखाई दे अन्यथा पति-पत्नी में संबंध तनावपूर्ण बने रहेंगे।

उत्तर दिशा जल तत्व का प्रतीक है। इस दिशा में घर की महिलाओं के रहने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए वरना उनमें मानसिक तनाव और दूसरे रोग सकते हैं।

सोने के कमरे में पलंग को दक्षिण दिशा की दीवार से लगाकर इस प्रकार रखें कि सोते समय सिरहाना पश्चिम या दक्षिण दिशा में हो। ऐसा करने से घर के स्वामी को सुख एवं आरोग्य लाभ मिलता है। उत्तर दिशा में सिर करके सोना ह्रदय रोग का कारण हो सकता है।

दक्षिण दिशा में पानी की निकासी के लिए नालियां होने से घर के मालिक को कष्ट, रोग एवं समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए घर की निकास नालिया सदैव उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए।


घर का मुख्य दरवाजा अंदर के अन्य दरवाजों की तुलना में बड़ा होना चाहिए। इसके विपरीत होने से घर के मालिक को आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। समाधान के लिए घर के द्वार पर घंटियों की झालर, क्रिस्टल बॉल या लाल रंग का फीता लगाना चाहिए।

घर की छत पर बीम हो तो उसके नीचे बैठना, सोना, पढ़ना-लिखना या अन्य काम करना मानसिक तनाव और क्लेश को जन्म देता है। बचाव के लिए छत पर बीम के दोनों साइड में एक-एक लकड़ी की बांसुरी लटका देनी चाहिए।

बच्चों की पढ़ाई के लिए घर में उपयुक्त दिशा पूर्व या उत्तर होती है। इस दिशा की तरफ मुख करके पढ़ने वाले बच्चों की स्मरणशक्ति और बुद्धि का स्तर बेहतर रहता है। पढ़ने के कमरे की दीवारों में हल्का पीला, हल्का गुलाबी, हल्का हरा या हल्का आसमानी रंग किया जा सकता है।


भोजन करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। दक्षिण की ओर मुख करके भोजन करना स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देता है।

घर में किचन और बाथरूम का आमने-सामने या आसपास होना वास्तु दोष है। इससे नकारात्मक ऊर्जा आती है। बचाव के लिए बाथरूम में कांच के बर्तन में थोड़ा नमक रखकर उसे हर सप्ताह बदलते हुए पुराने नमक को जल में बहा देना चाहिए।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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मंगलवार, 14 नवंबर 2017

मंदिर-मठ आदि अक्सर पहाड़ों पर ही क्यों मौज़ूद होते हैं

मंदिर-मठ आदि अक्सर पहाड़ों पर ही क्यों मौज़ूद होते हैं


1. पर्वतीय क्षेत्र

पर्वतीय क्षेत्र
जब भी हमें छुट्टियों का समय मिलता है तो हम निकल जाते हैं कहीं घूमने-फिरने। यदि आप भारतीय जमीन पर रहते हैं तो अधिकतम लोग छुट्टियां मिलते ही किसी पर्वतीय क्षेत्र में जाना पसंद करते हैं।

2. हरा-भरा माहौल

हरा-भरा माहौल
जहां आसपास हरियाली हो, सुंदर पहाड़ हो और आसपास ऐसी जगहें बनी हों जहां रुक कर प्रकृति का आनंद उठाया जाए। और जब भारत जैसे देश में हम पर्वतीय क्षेत्र की बात करते हैं हिमाचल प्रदेश जैसा अच्छा स्थान नहीं हो सकता। यह वह स्थान है जहां पहुंचने पर शायद हर किसी के मुंह से एक बार ‘जन्नत’ शब्द तो जरूर निकलता होगा।

3. मौका पाते ही जाते हैं हम

मौका पाते ही जाते हैं हम
स्कूल, कॉलेज या ऑफिस से यदि 2-3 दिन की राहत भी मिल जाए तो सुंदर पहाड़ियों पर समय काटने के लिए काफी होती हैं। चलिए आप ही बताएं यदि आपको यह मौका मिले तो आप हिमाचल जैसे पर्वतीय क्षेत्र में किस तरह से छुट्टियां मनाते हैं?

4. आप क्या करते हैं?

आप क्या करते हैं?
किसी प्रसिद्ध जगह पर जाकर, पर्वतों से संबंधित कुछ रोचक एक्टीविटीज करके या फिर जैसे कि कुछ लोग हिमाचल के आसपास धार्मिक स्थानों के दर्शन करते हैं वैसे? खैर आप हिमाचल में किसी धार्मिक स्थल के मकसद से जाएं या ना जाएं लेकिन फिर भी आपको रास्ते में कई धार्मिक स्थान मिल जाएंगे।

5. धार्मिक स्थल

धार्मिक स्थल
कुछ तो ऐतिहासिक होंगे, लेकिन कुछ ऐतिहासिक ना होकर भी लोगों की मान्यता एवं श्रद्धा के अनुसार बनाए गए हैं। रास्ते से गुजरते हुए शायद आपको हर 2 किलोमीटर के अंतर पर कोई ना कोई धार्मिक स्थल, जैसे कि छोटे-छोटे मंदिर, मान्यता पर आधारित धार्मिक पीठ, इत्यादि।

6. यहीं क्यों!

यहीं क्यों!
लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि हिमालय जैसे इलाके में ही यह मंदिर-पीठ इत्यादि क्यों बनाए जाते हैं? भारी मात्रा में धार्मिक स्थल इन्हीं क्षेत्रों में क्यों पाए जाते हैं? शायद आपको यह बात अजीब लग रही हो लेकिन यह सच है कि भारत में यदि किसी जगह अधिकतम धार्मिक स्थल हैं तो वह हिमालय में ही हैं।

7. एक सवाल

एक सवाल
परंतु ऐसा क्यों! किसी भी अन्य राज्य की तुलना में पर्वतीय क्षेत्र में ही सबसे अधिक मंदिर-पीठ होने का क्या महत्व है? प्रसिद्ध कवि रविंद्र नाथ टैगोर ने अपनी एक पुस्तक ‘साधना- दि रियलायज़ेशन ऑफ लाइफ’ में इसी मुद्दे को उठाया है।

8. साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान

साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान
उन्होंने बताया कि भारत में जब-जब साधना एवं भक्ति के लिए जगह की खोज की जाती है, तो किसी शांत, हरियाली से भरे माहौल को ही चुना जाता है। एक ऐसे स्थान को चुनने पर तवज्जो दी जाती है जहां आसपास का शांत पर्यावरण मन एवं दिमाग को शांति पहुंचाए।

9. हर किसी के लिए सही

हर किसी के लिए सही
लेकिन टैगोर ने यह भी बताया कि यह बात केवल भारतीय सीमा तक ही लागू नहीं होती। उन्होंने बताया कि क्रिश्चियनिटी में भी गिरिजाघर एवं मोनास्ट्री के लिए ऐसी ही हरी-भरी जगहों का चयन किया जाता है।

10. सुखमय स्थान

सुखमय स्थान
यह जगहें आत्मा को सुख प्रदान करती है, प्रकृति का यह रूप हमारी आत्मा को परमात्मा से मिलाने में सहायक सिद्ध होता है। शायद इसीलिए प्राचील काल से अब तक जब-जब ऋषि-मुनियों के मन में तपस्या का ख्याल आया है उन्होंने हिमालय की सुंदर वादियों की ओर ही रुख किया है।

11. हर किसी के लिए परफेक्ट

हर किसी के लिए परफेक्ट
पर आप इस गहतफहमी में ना रहिए कि केवल ऋषि-मुनि ही ऐसी वादियों पर जाकर परमात्मा से मिलने वाले सुख को प्राप्त करते हैं। स्वयं हम भी जब इन सुंदर वादियों में प्रवेश करते हैं तो अपने दिमाग को शांत पाते हैं। हमारी आंखें एक अजब-सी ठंडक को महसूस करती हैं और यही ठंडक हमारी आत्मा को शांत करती है।

गुरुवार, 9 नवंबर 2017

जन्म वार के अनुसार स्वभाव और भविष्य


ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति का जन्म जिस वार को होता है, उस वार के कारक ग्रह का प्रभाव भी जीवनभर बना रहता है। ज्योतिष के अनुसार रविवार का कारक ग्रह सूर्य है, सोमवार का कारक ग्रह चंद्र है, मंगलवार का मंगल, बुधवार का बुध, गुरुवार का गुरु, शुक्रवार का शुक्र और शनिवार का कारक ग्रह शनि है। यहां जानिए आपके जन्म वार के अनुसार स्वभाव और भविष्य से जुड़ी कुछ बातें…

सोमवार – सोमवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति हंसमुख और मीठा बोलने वाले होते थे। सुख हो या दुःख हमेशा सामान्य रहते है। ग्यानी, कलाकार और बहादुर होते हैं। ये लोग कफ संबंधी रोगों से परेशान रहते हैं। बीमारियों के कारण कमजोरी बनी रहती हैं। इन्हें जीवन में सभी सुख सुविधाएं प्राप्त होती हैं।

उपाय – शिवलिंग पर दूध अर्पित करें।

मंगलवार – जिन लोगों का जन्म मंगलवार को हुआ है, वे उग्र स्वभाव के होते हैं। इसी कारण इनका अपने आसपास रहने वाले कई लोगों से वाद-विवाद होता रहता हैं। इन्हें खून और त्वचा से सम्बंधित रोग हो सकते हैं। इनके जीवन में परेशानियां आती जाती रहती हैं।
उपाय – हनुमानजी को सिंदूर और बना हुआ पान चढ़ाएं।

बुधवार – बुधवार को जन्म लेने वाले लोग धर्म- ध्यान लगाने वाले होते हैं। ये बुद्धिमान और मीठा बोलने वाले होते हैं। माता-पिता से विशेष प्रेम रखते हैं। इन्हें शरीर की अपेक्षा दिमाग से सम्बंधित कामों में अधिक लाभ होता है। इन्हें मुर्ख बनाना आसान काम नहीं है।

उपाय- श्री गणेश को 11 दूर्वा की गाँठ हर बुधवार अर्पित करें।

गुरुवार – जिन लोगों का जन्म गुरुवार को हुआ है, वे बुद्धिमान और साहसी होते हैं। ये लोग किसी भी मुश्किल समय का सामना बड़ी ही समझदारी के साथ करते हैं। इन लोगों के मित्र अच्छी संगत वाले होते हैं। मित्रों की और से सदैव प्रसन्न रहते हैं। इन लोगों को भाग्य का साथ भी मिलता हैं।
उपाय – गुरुवार को चने की दाल, बेसन के लड्डू का भोग शिवजी को लगाएं।

शुक्रवार – शुक्रवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति हंसमुख और बुद्धिमान होते हैं। अपनी बातचीत से दूसरों को प्रभावित करते हैं। सहनशीलता के कारण कठिन समय का सामना भी बहुत ही अच्छे ढंग से कर लेते हैं। कला के क्षेत्र में ये लोग ख़ास मुकाम हासिल करते हैं।

उपाय – हर शुक्रवार शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाना चाहिए।

शनिवार – जिन लोगों का जन्म शनिवार को हुआ हैं, वे कृषि, व्यापार या तकनिकी क्षेत्र में अधिक लाभ प्राप्त करते हैं। इन्हें छोटी आयु में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं। इन लोगों को मित्रता में सावधान रहने की आवश्यकता होती हैं। माता-पिता, भाई-बहनों की ओर से सुख प्राप्त नहीं हो पाता हैं।
उपाय – हर शनिवार शनिदेव के नाम पर तेल का दान करें।

रविवार – रविवार को जन्म लेने वाले लोगो को भाग्य का साथ मिलता है। इनकी आयु भी अधिक रहती है और ये कम बोलना पसंद करते है। ये लोग कला और शिक्षा के क्षेत्र में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। साथ ही, इनकी रुची धर्म में भी रहती है। घर-परिवार के सदस्यों को खुश रखने का प्रयास करते हैं।
उपाय- सूर्य को रोज़ जल चढ़ाना चाहिए।
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भारत में शादी से जुड़ी कुछ अजब-गजब परंपरायें

भारत में शादी से जुड़ी कुछ अजब-गजब परंपरायें



भारत विभन्नताओं का देश है,कहा जाता है कि हर सौ मीटर पर यहां बोली और रिवाज बदल जाते हैं। इतना अलग होते हुए भी यह देश प्यार और एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। आपको पता है कि अलग-अलग जाति और धर्म को मानने वाले इस देश में शादी को लेकर भी बड़ी अजीब-अजीब और अलग-अलग परंपरायें हैं। 

शादी की अजब-गजब परंपरायें और रीति-रिवाज आईये आपको बताते हैं ऐसी ही भारत की कुछ अजब-गजब परंपराओं के बारे में... 
1. वर का पानी: हिंदू शादियों में कई जगह शादी होने से पहले दुल्हन को वर का पानी यानी कि दूल्हे का नहाया हुआ पानी भेजा जाता है ताकि दुल्हन उस पानी से नहा सके और जीवन भर दूल्हे के ऊपर आने वाली हर मुसीबत को खुद पहले झेलने के लिए तैयार रहे। 



2. बारात जाने से पहले मां का गुस्सा: हिंदू शादियों में कहीं-कहीं पर बारात जाने से पहले लड़के की मां लड़के से नाराज होकर बारात ले जाने रोकती है और कहती है कि वो कुएं में कूद जायेगी, वो तब तक गुस्सा रहती है जब तक उसका बेटा उससे वादा नहीं कर लेता कि पत्नी के आने के बाद भी वो उसका पूरा ख्याल रखेगा। फिलहाल .ह परंपरा है जो वक्त के साथ नये रूप में चल रही है क्योंकि अब कुआं तो हर जगह मिलता नहीं है इसलिए लड़के की मां अब बाल्टी के पानी और कटोरे में पानी का प्रयोग कर लेती है। 

3. झाड़ू देना: कुछ जगहों पर लड़की की शादी के बक्से के साथ झाडू रखने का रिवाज है, ताकि लक्ष्मी उसके साथ हमेशा रहें। 

4. जूठी सुपाड़ी: हिंदू शादियों में कुछ जगह दूल्हे को दुल्हन की जूठी उस सुपाड़ी को खाने को दिया जाता है जो कि वो सुबह से मुंह पर रखी होती है, ताकि जूठा खाने से प्यार बढ़े। 


5. पुड़ी पर पैर रखना: कुछ जगहों पर जब दुल्हन शादी करके ससुराल आती है तो उसे पूड़ियों पर से पैर रखकर गुजरना होता है, इसके पीछे यह माना जाता है कि लड़की के आने से घर-भर हमेशा भरा रहेगा।

6. एमपी के कुछ आदिवासी परिवारों में शादी से पहले लड़के वाले लड़की के घर पर सांप वाली पेटी पहुंचाते है और लड़की वाले उस पेटी को जंगल में छोड़ आते हैं, ऐसा करने के पीछे माना जाता है कि लड़की को अपनाने वाले लड़के अपने घर से हर जहर को निकाल देते हैं,ताकि लड़की का जीवन खुशहाल रहे।
7. पहाड़ी इलाकों में रिवाज है कि लड़का, लड़की के पैर का नाखून छूकर कसम खाता है कि वो उसके नाखून तक की रक्षा करेगा।

8. शादी के बाद पहली रात में जब लड़के-लड़की मिलते हैं तो उनके तकिये के नीचे चाकू रखा जाता है ताकि दोनों का रिश्ता नजर लगने से बचे।

9. कुछ जगह मंडप में लड़के-लड़की को रक्षा धागा बांधा जाता है ताकि दोनों को नजर ना लगे लेकिन जब तक धागा दोनों के हाथ में होता है तब तक दोनों एक-दूसरे का चेहरा भी नहीं देख सकते।


10. बंगाल के कुछ इलाकों में दुल्हन को दूध से और दूल्हे को तेल की मालिश दी जाती है ताकि शादी के बाद दुल्हन अपने वैवाहिक जीवन में दूध जैसी पौष्टिकता और ताजगी लाये और दूल्हा अपने रिश्ते में विश्वास लाये।



11. राजस्थान की शादियों में कुछ जगह शादी के बाद दुल्हन अपने पति को छड़ी से मारती है, यह प्रथा पति के धैर्य का टेस्ट लेने के लिए होता है।


12. बिहार में कुछ जगहों की शादियों में जब दुल्हन घर आती है तो उसके सामने पीतल की थालियां रख दी जाती हैं और यह थालियां पारिवारिक सदस्यों के नाम की होती हैं, दुल्हन से कहा जाता है कि वो इन्हें बिना आवाज किये उठाये अगर गलती से किसी के नाम की थाली में आवाज आ जाती है तो कहा जाता है कि भविष्य में उस व्यक्ति से दुल्हन का टकराव होगा।


13. मध्य भारत में कहीं-कहीं सास, बहू को छड़ी से मारती है यह देखने के लिए कि बहू के अंदर कितना धैर्य है?


सोमवार, 6 नवंबर 2017

सुबह इनको देखें आपका पूरा दिन हर्षपूर्ण बीतेगा



सुबह-सवेरे जागते ही यदि शंख, घंटा, भक्ति संगीत आदि का स्वर सुनाई दे तो अत्यंत शुभ होता है। मान लीजिए कि आपका पूरा दिन हर्षपूर्ण बीतेगा।
यदि आंखें खोलते ही सबसे पहले दही या दूध से भरे पात्र पर निगाह पड़े तो भी शुभ समझा जाता है।
अगर अल सुबह कोई भिखारी मांगने आ जाए तो यह समझिये कि आपका फंसा हुआ या उधार दिया हुआ धन आपको शीघ्र ही वापस मिलेगा।
यदि घर से किसी कार्य से बाहर जाते हुए तो आपके सामने सुहागन स्त्री अथवा गाय आ जाए तो कार्य में पूर्ण सफलता मिले का योग बनता है।
किसी कार्य से जाते हुए आपके सामने कोई व्यक्ति गुड़ ले जाता हुआ दिखे तो बहुत अधिक लाभ होता है।
यदि रास्ते में कोई प्राणी सुन्दर फूल या हरी घास लेकर जाता मिले या आपको किसी दुकान में यह नज़र आ जाये तो बहुत शुभ होता है।
यदि जाते समय मार्ग में कोई भी स्त्री/पुरुष दूध या पानी से भरा बर्तन लेकर दिख जाये तो यह बहुत ही शुभ शकुन होता है।
यात्रा में जाते समय यदि प्रभु की आरती ,भजन आदि सुनाई दे तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है, आपकी यात्रा के सफल होने के पूरे योग हैं।
यदि मार्ग में हंसता खेलता हुआ बालक और फल फूल बेचने वाला कोई नज़र आ जाये तो आपको निसंदेह लाभ की प्राप्ति होगी ।
किसी भी कार्य के लिए जाते समय जब आप कपड़े पहने और आपकी जेब से पैसे गिर जाएं तो यह धन प्राप्ति का संकेत है। और यदि कपड़े उतारते समय भी ऐसा ही हो तो भी यह शुभ शकुन होता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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बुधवार, 25 अक्तूबर 2017

कुछ शुभ अशुभ संकेत


 कुछ चीज़े ऎसी होती हैं जो शुभ और अशुभ का संकेत देती हैं जैसे घर से बाहर निकलते वक़्त यदि बिल्ली रास्ता काट जाए तो काम सफल नही होता हैं, वेसे ही कही सारी बातें ऎसी भी हैं जो शुभ समाचार का संकेत देती हैं तो आइए जानते हैं कुछ शुभ अशुभ बातों के बारे मे। 


नाल :-
शनिवार के दिन सडक पर काले घोडे की नाल मिले तो उसकी अंगुठी बनवाकर धारण करने पर शनि का प्रकोप कम हो जाता है। इस प्रकार की नाल को अपने घर के दरवाजे के ऊपर मध्य में लगा देना शुभ माना गया है। शकुन शास्त्रानुसार ऎसे घर में लक्ष्मी सदा विराजती है।

यज्ञोपवीत :-
यदि यज्ञोपवीत धारण कर रखा है तो नियमों का पालन करें। नहीं करते हैं तो उतारकर कुएं में डाल दे। नियम पालन न करते हुए यज्ञोपवीत का धारण करना अशुभ फल देता है।

लंगूर :-
काले मुंहवाला लंगूर सुबह-सुबह दिखना अशुभ कहा गया है। ऎसा बन्दर दिखाई पडे और कोई शुभ कार्य करना हो तो गंगाजल छिडक लें। अशुभ न होगा।

अंडा :-
घर से बाहर निकलते समय अंडा दिखने कार्य के लिए जाना है , वह सफल होता है। मार्ग में कुछ दूरी पर फुटा अंडा या छिलके मिलें या दिखें तो कार्य न बनना और कार्य में असफलता का संकेत है।

अग्नि :-
घर से बाहर निकलतक ही अग्नि दिखाई पडे तो कार्य सर्वोत्तम ढंग से सफल होने का शकुन है। लेकिन अंगारे मात्र दिखना अपशकुन है।

अपान वायु :-
घर से बाहर कदम रखते ही अपान वायु का निकलना अच्छा शकुन है , और यह कार्य लाभ का लक्षण है । किसी का हंस पडना या मुस्करा देना इस फल को नष्ट कर देता है । ऎसा कहा गया है ।

कटहल :-
मार्ग में कोई कटहल ले जाता दिखे तो शुभ शकुन माना गया है। पर वह कटहल कटा हुआ नहीं होना चहिए।

चिडिया :-
चिडिया की बीट सिर पर गिरना शुभ पर कबूतर की बीट गिरना अशुभ माना गया है

नाग :-
नाग मारना अशुभ है। नाग का जोडा देखना शुभ है। उसी समय दूर जाना भी शुभ है। अधिक देर रूकने पर खतरा है। जोडा सांपों को देखते ही तत्काल भाग जाने की बात शकुन शास्त्र में भी कही गई है।

नागशुद्धि :-
फलित ज्योतिष के अनुसार नया घर या मकान बनवाने में नागों की स्थिति पर विचार किया जाता है। कहा जाता है कि भादों, क्वार, कार्तिक इन तीन महीनों में नागों का सिर पूरब की ओर अगहन, पूस तथा माघ में दक्षिण की ओर फाल्गुन चैत्र , बैशाख में पश्चिम की ओर जेठ , आषाढ, सावन में उत्तर की ओर रहता है । आरम्भ में नींव डालते समय यदि नागों के मस्तक पर आघात पडा तो मकान बनवाने वाले की मृत्यु हो जाती है। पेट पर आघात पडना शुभ समझा जाता है।

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सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

Reeti -Rivaaj va Rasmen

रीति -रिवाज व रस्में

1. लगभग हर समुदाय और धर्म की दुल्हन शादी के बाद अगर अपने बाएं पैर को पहले बढाकर अपने ससुराल में प्रवेश करती है तो इससे कहीं ना कहीं अपशगुन माना जाता है और दाहिने पैर के जरिए ही घर में प्रवेश करने को शगुन माना जाता है.

2. ऐसा माना जाता है कि शादी में फेरों के बाद दुल्हन अपनी जिस सहेली अथवा रिश्तेदार के सिर पर अपना कलीरा तोड़ती है तो उस रिश्तेदार अथवा सहेली की शादी जल्दी होने के योग बन जाते हैं.

3. भारत में लगभग हर धर्म में ही दुल्हन का चेहरा शादी के समय ढका जाता है या उसके चेहरे के आगे एक पर्दा डाल दिया जाता है. ऐसा माना जाता है कि ऐसा करना उसे बुरी नजर और दुर्भाग्य से बचाता है. क्योंकि शादी की दुल्हन को दुनिया की सबसे सुंदर स्त्री माना जाता है और इसीलिए उसे किसी की नजर ना लगे या फिर कोई उसकी तरफ गलत नजर ना डालें इसलिए उसका चेहरा ढक दिया जाता है.

4. कई हिंदू परिवार में लड़की की सगाई होने के बाद और शादी होने से पहले उसे एक छोटा चाकू अपने पास रखने के लिए दिया जाता है. इसका अर्थ यह माना जाता है की लड़की बुरी नजर और दुर्भाग्य से बची रहेगी तथा जरूरत पड़ने पर वह अपनी रक्षा भी कर सकेगी.

5. भारतीय रीति-रिवाजों के अनुसार अगर शादी वाले दिन बारिश हो जाती है तो इसे बहुत ही ज्यादा शुभ माना जाता है और यह माना जाता है कि यह शादी अवश्य ही सफल होगी. यह बात अलग है कि बारिश होने से व्यवस्थाएं खराब हो सकती है.

6. आमतौर पर भारतीय शादियों में लड़की पक्ष वालों की तरफ से लड़के पक्ष को अपनी तरफ से कुछ राशि अथवा तोहफे दिए जाते हैं, जिसे दहेज कहा जाता है. लेकिन मुस्लिम समाज में इसका उल्टा है इसमें लड़के वालो की तरफ से लड़की वालों को एक विशेष रकम दी जाती है जिसे मेंहर कहा जाता है.

7. भारत के पंजाबी समुदाय में विवाह के समय लड़कियां चूड़ा पहनती हैं, इनका रंग लाल और सफेद होता है जो उन्हें कई महीनों तक पहनना होता है. कहा जाता है कि यह चूड़ा सौभाग्य और वृद्धि का संकेत है जिससे ससुराल में खुशहाली और वृद्धि आती है.

8. ईसाई धर्म में भी कुछ विशेष परंपराएं होती है. इसमें एक रिवाज होता है जिसमें दुल्हन की सहेलियां और मेहमान उसे चारों तरफ से घेर कर रखते हैं और उसे तरह-तरह के उपहार दिए जाते हैं. इसके बदले में दुल्हन उन्हें गुलाबी रंग का केक खिलाती है जिसके अंदर एक अंगूठी छुपी होती है. कहते हैं कि जिस लड़की के हिस्से में वह अंगूठी वाला केक आ जाता है उसकी शादी जल्दी ही हो जाती है.

9. पुराने समय में केरल में एक विशेष शादी का चलन था. वैसे तो यह शादी नकली शादी मानी जाती थी लेकिन यह ज्योतिषिय तौर तरीकों पर आधारित होती थी तथा विशेष कामों के लिए ही इस नकली शादी का आयोजन किया जाता था और शादी के बाद दूल्हा और दुल्हन अपने-अपने घर वापस चले जाते थे तथा शादी को बाद में नकार दिया जाता था.

10. भारतीय परंपराओं में मंगला स्नान का सदा से ही विशेष महत्व रहा है. हम आपको मंगला सनान के बारे में संक्षेप में बता देते हैं कि सूर्य की पहली किरण के साथ ही जो स्नान किया जाता है उसे मंगला स्नान कहते हैं और कुछ लोग इसे शुद्धि स्नान भी कहते है. शादी के बाद कई भारतीय समाजों में दूल्हा और दुल्हन को विशेष मंगला स्नान करवाया जाता है जिससे शादी के रीती रिवाज शुरू हो जाते हैं.शादी की रसमें

11. सिख धर्म के लोग जब शादी होने के बाद दुल्हन अपने ससुराल आती है तो ससुराल में दूल्हे की बहने एक लम्बी साड़ी में कई गांठे लगा देती है और वह गांठे दूल्हा दुल्हन को खोलने के लिए दी जाती है. यह माना जाता है कि जितनी जल्दी दूल्हा और दुल्हन इन गांठो को खोल देंगे उनके जीवन में उतनी ही जल्दी और उतनी ही ज्यादा खुशहाली आएगी.

12. आमतौर पर भारत में विदाई के समय लड़की की आंखों में आंसू आ ही जाते हैं लेकिन समय के साथ-साथ यह एक परंपरा भी हो गई है और इस परंपरा को लोगों ने अपने अपने अनुसार कई अर्थ भी दे दिए हैं. जैसे कि कहा जाता है की विदाई के समय दुल्हन जितना रोएगी, शादी के बाद जिंदगी में उसे कभी रोना नहीं होगा.

13. गुजराती समाज में शादी के वक्त एक विचित्र परंपरा निभाई जाती है. इस परंपरा के अनुसार दुल्हन की मां दूल्हे की नाक को पकड़ती है और उसे इस बात का एहसास दिलाया जाता है कि वह अपनी जान से ज्यादा प्यारी बेटी की जिम्मेदारी उसे सौप रहे हैं तथा भविष्य में उसकी बेटी की खुशियों और उसकी आवश्यकताओं को पूरा करना उसकी जिम्मेदारी है.

14. सिखों में शादी से एक रात पहले एक विशेष रस्म निभाई की जाती है जिसे “वतना” कहते हैं. वैसे यह रस्म केवल सिख ही नहीं बल्कि लगभग हर हिंदू शादी में की जाती है. शादी की इस रस्म के अनुसार घर की औरतें लड़की के शरीर पर हल्दी और बेसन का लेप लगाती है तथा पारंपरिक गाने गाती है.

15. इस परंपरा का बहुत ही ज्यादा विशेष महत्व मना गया है. हल्दी में आकर्षण का गुण सदा से ही माना गया है तथा हल्दी एवं बेसन लगाने से त्वचा में तो निखार आता ही है तथा बीमारी में भी बचाव होता है तथा दूल्हे दुल्हन के बीच में आकर्षण भी बढ़ता है.

16. हिंदू परंपराओं में जब लड़की अपने ससुराल में कदम रखती है तो वह घर की दहलीज पर ही वह चावल से भरे एक कलश को अपने पैरों से गिरा कर प्रवेश करती है, इसका अर्थ यह रहता है की आने वाली लड़की के पैर इतने शुभ हो की दुर्भाग्य की रेखाएं मिट जाएं और घर में धन धान्य बना रहे.

17. मंगला स्नान केवल हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि मुस्लिम धर्म में भी किया जाता है. मुस्लिम धर्म में इसे एक शुद्धि स्नान की तरह किया जाता है. इसमें निकाह से पहले दुल्हन को घर की औरते गाने और संगीत के साथ स्नान करवाती है तथा इसे एक त्यौहार की तरह ही मनाया जाता है.

18. इसाई धर्म में एक विशेष विश्वास माना जाता है, इस विश्वास के अनुसार अगर शादी के वक्त दुल्हन को मकड़ा दिख जाए तो उसकी शादीशुदा जिंदगी में खुशहाली आती है और पति पत्नी के बीच मनमुटाव नहीं होता.सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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रविवार, 15 अक्तूबर 2017

धनतेरस के दिन समृद्धि प्राप्ति उपाय

Dhanteras ke upay


धनतेरस के दिन समृद्धि प्राप्ति के लिए किया गया कोई भी उपाय ज्यादा फलदायी होता है। ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे उपाय बताएं गए है जिन्हें यदि धनतेरस के दिन किसी भी शुभ समय में किया जाए तो घर में स्थिर लक्ष्मी का निवास होता है। आइये जानते है धनतेरस को करने योगय कुछ ऐसे ही उपाय-

लक्ष्मी को अर्पित करें लौंग : धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद लक्ष्मी या किसी भी देवी को लौंग अर्पित करें। यह काम दीपावली के दिनों में रोज करें। आर्थिक लाभ होता रहेगा।

सफेद चीजों का करें दान : धनतेरस पर सफेद पदार्थों जैसे चावल, कपड़े, आटा आदि का दान करने से आर्थिक लाभ का योग बनता है।

सूर्यास्त के बाद न करें झाड़ू-पोंछा : दीपावली के दिनों में और हो सके तो रोज ही शाम को सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू-पोंछा न करें। ऐसा करने से घर में लक्ष्मी चली जाती है।

REET 2017-18 25,000 TEACHER VACANCY FOR THIRD TEACHER IN RAJASTHAN


गरीब की आर्थिक सहायता करें : धनतेरस पर किसी गरीब, दुखी, असहाय रोगी को आर्थिक सहायता दें। ऐसा करने से आपकी उन्नति होगी।

किन्नर को धन करें दान : धनतेरस के दिन किसी किन्नर को धन दान करें और उसमें से कुछ रुपए वापस अनुरोध करके प्राप्त कर लें। इन रुपयों को सफेद कपड़े में लपेटकर कैश तिजोरी में रख लें, लाभ होगा।

मंदिर में लगाएं केले के पौधे : धनतेरस के दिन किसी भी मंदिर में केले के दो पौधे लगाएं। इन पौधों की समय-समय पर देखभाल करते रहें। इनके बगल में कोई सुगंधित फूल का पौधा लगाएं। केले का पौधा जैसे-जैसे बड़ा होगा, आपके आर्थिक लाभ की राह प्रशस्त होगी।

मोर की मिट्टी की करे पूजा : धनतेरस पर यदि पूजा के समय किसी ऐसे स्थान की मिट्टी जहां मोर नाचा हो लाकर और पूजा करें। इस मिट्टी को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से घर पर हमेशा लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी।
गाय का भोजन जरूर निकालें: धनतेरस और दीपावली के दिन रसोई में जो भी भोजन बना हो, सर्वप्रथम उसमें से गाय के लिए कुछ भाग अलग कर दें। ऐसा करने से घर में स्थिर लक्ष्मी का निवास होगा।

चमगादड़ के पेड़ की टहनी रखे पास :धनतेरस के दिन किसी भी शुभ समय में किसी ऐसे पेड़ की टहनी तोड़ कर लाएं, जिस पर चमगादड़ रहते हों। इसे अपने बैठने की जगह के पास रखें, लाभ होगा।


दक्षिणावर्ती शंख में लक्ष्मी मंत्र का जप : धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद दक्षिणावर्ती शंख में लक्ष्मी मंत्र का जप करते हुए चावल के दाने व लाल गुलाब की पंखुड़ियां डालें। ऐसा करने से समृद्धि का योग बनेगा।
मंत्र- श्रीं

लघु नारियल का उपाय : धन तेरस पर पूजा के समय धन, वैभव व समृद्धि पाने के लिए 5 लघु नारियल पूजा के स्थान पर रखें। उन पर केसर का तिलक करें और हर नारियल पर तिलक करते समय 27 बार नीचे लिखे मंत्र का मन ही मन जप करते रहें- ऐं ह्लीं श्रीं क्लीं
11 लघु नारियल को मां लक्ष्मी के चरणों में रखकर ऊं महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नीं च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् मंत्र की 2 माला का जप करें। किसी लाल कपड़े में उन लघु नारियल को लपेट कर तिजोरी में रख दें व दीपावली के दूसरे दिन किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। ऐसा करने से लक्ष्मी चिरकाल तक घर में निवास करती है।
यदि आप चाहते हैं कि घर में कभी धन-धान्य की कमी न रहे और अन्न का भंडार भरा रहे तो 11 लघु नारियल एक पीले कपड़े में बांधकर रसोई घर के पूर्वी कोने में बांध दें।

घर लाए चांदी के गणेश, चांदी की लक्ष्मी: लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय, व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है। इस दिन भगवान धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है।

सूखे धनिया के बीज का भी महत्व: ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि करता है। दीपावली के दिन इन बीजों को बाग, खेत खलिहानों में लागाया जाता है ये बीज व्यक्ति की उन्नति व धन वृ्द्धि के प्रतीक होते है।

धनतेरस के दिन करे कुबेर को प्रसन्न : शुभ मुहूर्त में धनतेरस के दिन धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करने के बाद निम्न मंत्र का जाप करें- इस मंत्र का जाप करने से भगवन कुबेर बहुत खुश होते हैं, जिससे धन और वैभव की प्राप्ति होती है।

“यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।”सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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दिवाली पर लक्ष्मी जी को खुश करने के उपाय

हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का सबसे अधिक महत्तव है। इस पर्व पर धन की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की लिए उनका पूजन किया जाता है। यदि इस दिन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में सही विधि-विधान से लक्ष्मी का पूजन कर लिया जाए तो अगली दीपावली तक लक्ष्मी कृपा से घर में धन और धान्य की कमी नहीं आती है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जो दीपावली के दिन करने पर बहुत जल्दी लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त की जा सकती है। यहां लक्ष्मी कृपा पाने के लिए 51 उपाय बताए जा रहे हैं और ये उपाय सभी राशि के लोगों द्वारा किए जा सकते हैं। यदि आप चाहे तो इन उपायों में से कई उपाय भी कर सकते हैं या सिर्फ कोई एक उपाय भी कर सकते हैं।

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1. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गांठ भी रखें। पूजन पूर्ण होने पर हल्दी की गांठ को घर में उस स्थान पर रखें, जहां धन रखा जाता है।


2. दीपावली के दिन यदि संभव हो सके तो किसी किन्नर से उसकी खुशी से एक रुपया लें और इस सिक्के को अपने पर्स में रखें। बरकत बनी रहेगी।


3. दीपावली के दिन घर से निकलते ही यदि कोई सुहागन स्त्री लाल रंग की पारंपरिक ड्रेस में दिख जाए तो समझ लें आप पर महालक्ष्मी की कृपा होने वाली है। यह एक शुभ शकुन है। ऐसा होने पर किसी जरूरतमंद सुहागन स्त्री को सुहाग की सामग्री दान करें।

4. दीपावली की रात में लक्ष्मी और कुबेर देव का पूजन करें और यहां दिए एक मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें।
मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रववाय, धन-धान्यधिपतये धन-धान्य समृद्धि मम देहि दापय स्वाहा।

5. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटी बजाना चाहिए। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता बाहर चली जाती है। मां लक्ष्मी घर में आती हैं।

6. महालक्ष्मी के पूजन में गोमती चक्र भी रखना चाहिए। गोमती चक्र भी घर में धन संबंधी लाभ दिलाता है।


7. दीपावली पर तेल का दीपक जलाएं और दीपक में एक लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें। किसी मंदिर हनुमान मंदिर जाकर ऐसा दीपक भी लगा सकते हैं।

8. रात को सोने से पहले किसी चौराहे पर तेल का दीपक जलाएं और घर लौटकर आ जाएं। ध्यान रखें पीछे पलटकर न देखें।


9. दीपावली के दिन अशोक के पेड़ के पत्तों से वंदनद्वार बनाएं और इसे मुख्य दरवाजे पर लगाएं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाएगी।

10. किसी शिव मंदिर जाएं और वहां शिवलिंग पर अक्षत यानी चावल चढ़ाएं। ध्यान रहें सभी चावल पूर्ण होने चाहिए। खंडित चावल शिवलिंग पर चढ़ाना नहीं चाहिए।


11. अपने घर के आसपास किसी पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय दीपावली की रात में किया जाना चाहिए। ध्यान रखें दीपक लगाकर चुपचाप अपने घर लौट आए, पीछे पलटकर न देखें।

12. यदि संभव हो सके तो दीपावली की देर रात तक घर का मुख्य दरवाजा खुला रखें। ऐसा माना जाता है कि दिवाली की रात में महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के घर जाती हैं।

13. महालक्ष्मी के पूजन में पीली कौड़ियां भी रखनी चाहिए। ये कौडिय़ा पूजन में रखने से महालक्ष्मी बहुत ही जल्द प्रसन्न होती हैं। आपकी धन संबंधी सभी परेशानियां खत्म हो जाएंगी।

14. दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा करते समय एक थोड़ा बड़ा घी का दीपक जलाएं, जिसमें नौ बत्तियां लगाई जा सके। सभी 9 बत्तियां जलाएं और लक्ष्मी पूजा करें।

15. दीपावली की रात में लक्ष्मी पूजन के साथ ही अपनी दुकान, कम्प्यूटर आदि ऐसी चीजों की भी पूजा करें, जो आपकी कमाई का साधन हैं।

16. लक्ष्मी पूजन के समय एक नारियल लें और उस पर अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि अर्पित करें और उसे भी पूजा में रखें।

17. दीपावली के दिन झाड़ू अवश्य खरीदना चाहिए। पूरे घर की सफाई नई झाड़ू से करें। जब झाड़ू का काम न हो तो उसे छिपाकर रखना चाहिए।

18. इस दिन अमावस्या रहती है और इस तिथि पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने पर शनि के दोष और कालसर्प दोष समाप्त हो जाते हैं।

19. प्रथम पूज्य श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित करें। दूर्वा की 21 गांठ गणेशजी को चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। दीपावली के शुभ दिन यह उपाय करने से गणेशजी के साथ महालक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।

20. दीपावली से प्रतिदिन सुबह घर से निकलने से पहले केसर का तिलक लगाएं। ऐसा हर रोज करें, महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी।

21. यदि संभव हो सके तो दीपावली पर किसी गरीब व्यक्ति को काले कंबल का दान करें। ऐसा करने पर शनि और राहु-केतु के दोष शांत होंगे और कार्यों में आ रही रुकावटें दूर हो जाएंगी।

22. महालक्ष्मी के पूजन में दक्षिणावर्ती शंख भी रखना चाहिए। यह शंख महालक्ष्मी को अतिप्रिय है। इसकी पूजा करने पर घर में सुख-शांति का वास होता है।

23. महालक्ष्मी के चित्र का पूजन करें, जिसमें लक्ष्मी अपने स्वामी भगवान विष्णु के पैरों के पास बैठी हैं। ऐसे चित्र का पूजन करने पर देवी बहुत जल्द प्रसन्न होती हैं।

24. दीपावली के पांचों दिनों में घर में शांति बनाए रखें। किसी भी प्रकार का क्लेश, वाद-विवाद न करें। जिस घर में शांति रहती है वहां देवी लक्ष्मी हमेशा निवास करती हैं।

25. दीपावली पर ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करते समय नहाने के पानी में कच्चा दूध और गंगाजल मिलाएं। स्नान के बाद अच्छे वस्त्र धारण करें और सूर्य को जल अर्पित करें। जल अर्पित करने के साथ ही लाल पुष्प भी सूर्य को चढ़ाएं। किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज का दान करें। अनाज के साथ ही वस्त्र का दान करना भी श्रेष्ठ रहता है।

26. दीपावाली पर श्रीसूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। रामरक्षा स्तोत्र या हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी किया जा सकता है।

27. महालक्ष्मी को तुलसी के पत्ते भी चढ़ाने चाहिए। लक्ष्मी पूजा में दीपक दाएं, अगरबत्ती बाएं, पुष्य सामने व नैवेद्य थाली में दक्षिण में रखना श्रेष्ठ रहता है।

28. महालक्ष्मी के मंत्र: ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम:, इस मंत्र का जप करें। मंत्र जप के लिए कमल के गट्टे की माला का उपयोग करें। दीपावली पर कम से कम 108 बार इस मंत्र का जप करें।

29. दीपावली से यह एक नियम रोज के लिए बना लें कि सुबह जब भी उठे तो उठते ही सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों का दर्शन करना चाहिए।

30. दीपावली पर श्रीयंत्र के सामने अगरबत्ती व दीपक लगाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठें। फिर श्रीयंत्र का पूजन करें और कमलगट्टे की माला से महालक्ष्मी के मंत्र: ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम: का जप करें।

31. किसी में मंदिर झाड़ू का दान करें। यदि आपके घर के आसपास कहीं महालक्ष्मी का मंदिर हो तो वहां गुलाब की सुगंध वाली अगरबत्ती का दान करें।

32. घर के मुख्य द्वार पर कुमकुम से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। द्वार के दोनों ओर कुमकुम से ही शुभ-लाभ लिखें।

33. लक्ष्मी पूजन में सुपारी रखें। सुपारी पर लाल धागा लपेटकर अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि पूजन सामग्री से पूजा करें और पूजन के बाद इस सुपारी को तिजोरी में रखें।

34. दीपावली के दिन श्वेतार्क गणेश की प्रतिमा घर में लाएंगे तो हमेशा बरकत बनी रहेगी। परिवार के सदस्यों को पैसों की कमी नहीं आएगी।

35. यदि संभव हो सके तो इस दिन किसी तालाब या नदी में मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं। शास्त्रों के अनुसार इस पुण्य कर्म से बड़े-बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं।

36. घर में स्थित तुलसी के पौधे के पास दीपावली की रात में दीपक जलाएं। तुलसी को वस्त्र अर्पित करें।

37. स्फटिक से बना श्रीयंत्र दीपावली के दिन बाजार से खरीदकर लाएं। श्रीयंत्र को लाल वस्त्र में लपेटकर तिजोरी में रखें। कभी भी पैसों की कमी नहीं होगी।

38. दीपावली पर सुबह-सुबह शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। जल में यदि केसर भी डालेंगे तो श्रेष्ठ रहेगा।

39. जो लोग धन का संचय बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें तिजोरी में लाल कपड़ा बिछाना चाहिए। इसके प्रभाव से धन का संचय बढ़ता है। महालक्ष्मी का ऐसा फोटो रखें, जिसमें लक्ष्मी बैठी हुईं दिखाई दे रही हैं।

40. उपाय के अनुसार दीपावली के दिन 3 अभिमंत्रित गोमती चक्र, 3 पीली कौडिय़ां और 3 हल्दी गांठों को एक पीले कपड़ें में बांधें। इसके बाद इस पोटली को तिजोरी में रखें। धन लाभ के योग बनने लगेंगे।

41. यदि धन संबंधियों परेशानियों का सामना कर रहे हैं तो किसी भी श्रेष्ठ मुहूर्त में हनुमानजी का यह उपाय करें।

42. उपाय के अनुसार किसी पीपल के वृक्ष एक पत्ता तोड़ें। उस पत्ते पर कुमकुम या चंदन से श्रीराम का लिखें। इसके बाद पत्ते पर मिठाई रखें और यह हनुमानजी को अर्पित करें। इस उपाय से भी धन लाभ होता है।

43. एक बात का विशेष ध्यान रखें कि माह की हर अमावस्या पर पूरे घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई की जानी चाहिए। साफ-सफाई के बाद घर में धूप-दीप-ध्यान करें। इससे घर का वातावरण पवित्र और बरकत देने वाला बना रहेगा।

44. सप्ताह में एक बार किसी जरूरतमंद सुहागिन स्त्री को सुहाग का सामना दान करें। इस उपाय से देवी लक्ष्मी तुरंत ही प्रसन्न होती हैं और धन संबंधी परेशानियों को दूर करती हैं। ध्यान रखें यह उपाय नियमित रूप से हर सप्ताह करना चाहिए।

45. यदि कोई व्यक्ति दीपावली के दिन किसी पीपल के वृक्ष के नीचे छोटा सा शिवलिंग स्थापित करता है तो उसकी जीवन में कभी भी कोई परेशानियां नहीं आएंगी। यदि कोई भयंकर परेशानियां चल रही होंगी वे भी दूर हो जाएंगी। पीपल के नीचे शिवलिंग स्थापित करके उसकी नियमित पूजा भी करनी चाहिए। इस उपाय से गरीब व्यक्ति भी धीरे-धीरे मालामाल हो जाता है।

46. पीपल के 11 पत्ते तोड़ें और उन पर श्रीराम का नाम लिखें। राम नाम लिखने के लिए चंदन का उपयोग किया जा सकता है। यह काम पीपल के नीचे बैठकर करेंगे तो जल्दी शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। राम नाम लिखने के बाद इन पत्तों की माला बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें।

47. कलयुग में हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माने गए हैं। इनकी कृपा प्राप्त करने के लिए कई प्रकार उपाय बताए गए हैं। यदि पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए तो यह चमत्कारी फल प्रदान करने वाला उपाय है।

48. शनि दोषों से मुक्ति के लिए तो पीपल के वृक्ष के उपाय रामबाण हैं। शनि की साढ़ेसाती और ढय्या के बुरे प्रभावों को नष्ट करने के लिए पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाकर सात परिक्रमा करनी चाहिए। इसके साथ ही शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक भी लगाना चाहिए।

49. दीपावली से एक नियम हर रोज के लिए बना लें। आपके घर में जब भी खाना बने तो उसमें से सबसे पहली रोटी गाय को खिलाएं।

50. शास्त्रों के अनुसार एक पीपल का पौधा लगाने वाले व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार को कोई दुख नहीं सताता है। उस इंसान को कभी भी पैसों की कमी नहीं रहती है। पीपल का पौधा लगाने के बाद उसे नियमित रूप से जल अर्पित करना चाहिए। जैसे-जैसे यह वृक्ष बड़ा होगा आपके घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती जाएगी, धन बढ़ता जाएगा। पीपल के बड़े होने तक इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए तभी आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त होंगे।

51. दीपावली पर लक्ष्मी का पूजन करने के लिए स्थिर लग्न श्रेष्ठ माना जाता है। इस लग्न में पूजा करने पर महालक्ष्मी स्थाई रूप से घर में निवास करती हैं।-पूजा में लक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र और श्रीयंत्र रखना चाहिए। यदि स्फटिक का श्रीयंत्र हो तो सर्वश्रेष्ठ रहता है। एकाक्षी नारियल, दक्षिणावर्त शंख, हत्थाजोड़ी की भी पूजा करनी चाहिए।

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शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

धनतेरस के दिन क्यों होती है लक्ष्मी जी की पूजा



धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि के दिन पूरी श्रद्धा व विश्वास के साथ मनाया जाता है। धनवन्तरि के अलावा इस दिन, देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की भी पूजा करने की मान्यता है। इस दिन के बारे में एक दूसरी कहानी भी प्रचलित है।

एक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे तब लक्ष्मीजी ने भी उनसे साथ चलने का आग्रह किया। तब विष्णु जी ने कहा कि यदि मैं जो बात कहूं तुम अगर वैसा ही मानो तो फिर चलो। तब लक्ष्मीजी उनकी बात मान गईं और भगवान विष्णु के साथ भूमंडल पर आ गईं। कुछ देर बाद एक जगह पर पहुंच कर भगवान विष्णु ने लक्ष्मीजी से कहा कि जब तक मैं न आऊं तुम यहां ठहरो। मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत आना। विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी के मन में कौतुहल जागा कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या रहस्य है, जो मुझे मना किया गया है और भगवान स्वयं चले गए।

लक्ष्मीजी से रहा न गया और जैसे ही भगवान आगे बढ़े लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं। कुछ ही आगे जाने पर उन्हें सरसों का एक खेत दिखाई दिया जिसमें खूब फूल लगे थे। सरसों की शोभा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार करने के बाद आगे बढ़ीं। आगे जाने पर एक गन्ने के खेत से लक्ष्मीजी गन्ने तोड़कर रस चूसने लगीं।

उसी क्षण विष्णु जी आए और यह देख लक्ष्मीजी पर नाराज होकर उन्हें शाप दे दिया कि मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था, पर तुम न मानी और किसान की चोरी का अपराध कर बैठी। अब तुम इस अपराध के जुर्म में इस किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो। ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए। तब लक्ष्मीजी उस गरीब किसान के घर रहने लगीं।

एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तब तुम जो मांगोगी मिलेगा। किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया। पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया। लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया। किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए। फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं।

विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया। तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है, यह तो चंचला हैं, कहीं नहीं ठहरतीं। इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके। इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं। तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है। किसान हठपूर्वक बोला कि, नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूंगा।

तब लक्ष्मीजी ने कहा कि हे किसान तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं वैसा करो। कल तेरस है। तुम कल घर को लीप-पोतकर स्वच्छ करना। रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना और सायंकाल मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपए भरकर मेरे लिए रखना, मैं उस कलश में निवास करूंगी। किंतु पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी। इस एक दिन की पूजा से वर्ष भर मैं तुम्हारे घर से नहीं जाऊंगी। यह कहकर वह दीपकों के प्रकाश के साथ दसों दिशाओं में फैल गईं। अगले दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कथानुसार पूजन किया। उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया।

इसी वजह से हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मीजी की पूजा होने लगी।