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शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

शीघ्र विवाह के लिए करें कोई एक उपाय



1. शीघ्र विवाह के लिए सोमवार को 1200 ग्राम चने की दाल व सवा लीटर कच्चे दूध का दान करें। यह प्रयोग तब तक करते रहना है, जब तक कि विवाह न हो जाए।

2. जिन लड़कों का विवाह नहीं हो रहा हो या प्रेम विवाह में विलंब हो रहा हो, उन्हें शीघ्र मनपसंद विवाह के लिए श्रीकृष्ण के इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए । 'क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा।'

3. कन्या जब किसी कन्या के विवाह में जाए और यदि वहां पर दुल्हन को मेहंदी लग रही हो, तो अविवाहित कन्या कुछ मेहंदी उस दुल्हन के हाथ से लगवा ले, इससे विवाह का मार्ग शीघ्र प्रशस्त होता है।

4. विवाह वार्ता के लिए घर आए अतिथियों को इस प्रकार बैठाएं कि उनका मुख घर में अंदर की ओर हो, उन्हें द्वार दिखाई न दे।

5.विवाह योग्य युवक-युवती जिस पलंग पर सोते हों उसके नीचे लोहे की वस्तुएं या कबाड़ का सामान कभी भी नहीं रखना चाहिए।

6. यदि विवाह के पूर्व लड़का-लड़की मिलना चाहें, तो वह इस प्रकार बैठें कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो।

7. कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके घर के लोग जब भी किसी के यहां जाएं, तो कन्या खुले बालों से, लाल वस्त्र धारण कर हंसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिला कर विदा करे। विवाह की चर्चा सफल होगी।

8. पूर्णिमा को वट वृक्ष की 108 परिक्रमा देने से भी विवाह बाधा दूर होती है।

9. जिन व्यक्तियों

को शीघ्र विवाह की कामना हों, उन्हें गुरुवार को गाय को दो आटे के पेड़े पर थोड़ा हल्दी लगाकर खिलाना चाहिए। तथा इसके साथ ही थोड़ा सा गुड़ व चने की पीली दाल का भोग गाय को लगाना अतिशुभ होता है।

10. यदि कन्या की शादी में कोई रुकावट आ रही हो, तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ति या फोटो के आगे रख कर 'ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नाम:' मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढ़ा दें ! विवाह की बाधाएं अपने आप दूर होती जाएंगी !

11. प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर 'ऊं सोमेश्वराय नम:' का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढ़ाए और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नजर आएगी।

12. विवाह योग्य लोगों को शीघ्र विवाह के लिये प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए। इसके अलावा भोजन में केसर का सेवन करने से विवाह शीघ्र होने की संभावनाएं बनती हैं।

13. गुरुवार की शाम को पांच प्रकार की मिठाई, हरी ईलायची का जोड़ा तथा शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिए। यह प्रयोग लगातार तीन गुरुवार को करना चाहिए,इससे शीघ्र विवाह के योग निस्संदेह बनते हैं।

14. गुरुवार को केले के वृ्क्ष पर जल अर्पित करके शुद्ध घी का दीपक जलाकर गुरु के 108 नामों का उच्चारण करने से जल्दी ही जीवनसाथी की तलाश पूर्ण हो जाती है । बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है इनकी पूजा से विवाह के मार्ग में आ रही सभी अड़चनें स्वत: ही समाप्त हो जाती हैं। इनकी पूजा के लिए गुरुवार का विशेष महत्व है।

15. यदि किसी का विवाह कुंडली के मांगलिक योग के कारण नहीं हो पा रहा है, तो उस व्यक्ति को मंगल वार के दिन चण्डिका स्तोत्र का पाठ तथा शनिवार के दिन सुंदर काण्ड का पाठ करना चाहिए। इससे भी विवाह के मार्ग की बाधाओं में कमी होती है।

16. जिन व्यक्तियों की विवाह की आयु हो चुकी है,मगर विवाह में बाधा आ रही है उन व्यक्तियों को यह उपाय करना चाहिए। इस उपाय में शुक्रवार की रात्रि में आठ छुआरे जल में उबाल कर जल के साथ ही अपने सोने वाले स्थान पर सिरहाने रख कर सोएं तथा शनिवार को प्रात: स्नान करने के बाद किसी भी बहते जल में इन्हें प्रवाहित कर दें।

17. यदि आपको प्रेम विवाह में अड़चने आ रही हैं,तो शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ति या फोटो के आगे 'ऊं लक्ष्मी नारायणाय नम:' मंत्र की रोज तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें ! इसे शुक्ल पक्ष के गुरुवार से ही शुरू करें। तीन महीने तक हर गुरुवार को मंदिर में प्रशाद चढ़ाएं और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें।

18. शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार को सात केले, सात गौ ग्राम गुड़ और एक नारियल लेकर किसी नदी या सरोवर पर जाएं। अब कन्या को वस्त्र सहित नदी के जल में स्नान कराकर उसके ऊपर से जटा वाला नारियल ऊसारकर नदी में प्रवाहित कर दें। इसके बाद थोड़ा गुड़ व एक केला चंद्रदेव के नाम पर व इतनी ही सामग्री सूर्यदेव के नाम पर नदी के किनारे रखकर उन्हें प्रणाम कर लें। थोड़े से गुड़ को प्रसाद के रूप में कन्या स्वयं खाएं और शेष सामग्री को गाय को खिला दें। इस टोटके से कन्या का विवाह शीघ्र ही हो जाएगा।

19. शादी वाले दिन से एक दिन पहले एक ईंट के ऊपर कोयले से 'बाधायें' लिखकर ईंट को उल्टा करके किसी सुरक्षित स्थान पर रख दीजिये और शादी के बाद उस ईंट को उठाकर किसी पानी वाले स्थान पर डाल कर ऊपर से कुछ खाने का सामान डाल दीजिये। विवाह के समय और विवाह के बाद में वर/वधु के दाम्पत्य जीवन में बाधाएं नहीं आएंगी, यह काम वर -वधु या उनके घर का कोई भी सदस्य कर सकता है, लेकिन यह काम बिल्कुल चुपचाप करना चाहिए ।

20. यदि किसी कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा है, तो वह कन्या विवाह की कामना से भगवान श्रीगणेश को मालपुए का भोग लगाएं, तो शीघ्र ही उसका विवाह हो जाता है।

21. यदि किसी युवक के विवाह में परेशानियां आ रही हैं, तो वह भगवान श्रीगणेश को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाए, तो उसका विवाह भी जल्दी हो जाता है।

रविवार को करें रोटी-गुड़ का ये एक छोटा-सा अचूक उपाय, जल्द बन जाएगा खुद का घर

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 On Sunday, it was a little of the bread and molasses sure way

हर कोई चाहता है उसका अपना खुद का घर हो, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद घर नहीं बन पाता। दरअसल, भूमि लाभ ग्रहों के शुभ फल पर निर्भर है। यदि कुंडली में मंगल, सूर्य कमजोर हैं...नीच के हैं या उन पर किसी पाप ग्रहों की नजर है, तो घर नहीं बनने देते। अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ लोगों के एक नहीं, बल्कि कई घर होते हैं...कई प्लॉट होते हैं। ऐसे लोगों के ग्रह बली होते हैं। वैसे भी मौजूदा दौर में मकान बनाना बहुत मुश्किल हो रहा है। यदि आप सालों से किराए के मकान में रह रहे हैं।



खुद का घर नहीं बन रहा है। वैसे ऐसा तो नहीं होगा कि आप घर खरीदने या बनाने के बारे में सोचते न हो या प्लालिंग न करते हों, लेकिन कोई न कोई अड़चन आ जाती है, जिसके चलते सारी योजना धरी की धरी रह जाती है। इसका मतलब यह है कि आपकी कुंडली में ग्रह अशुभ हैं, जो खुद के घर का सुख नहीं दे रहे हैं। ऐसे में एक ऐसा अचूक उपाय है, जिसे करने से मंगल और सूर्य मजबूत होंगे और घर बनने या खरीदने में आ रही बाधाएं स्वत: ही दूर हो जाएंगी।

यदि कुंडली में गुरु नीच

का है, मंगल दुश्मन घर मेें बैठा है और सूर्य पर राहु-केतु की नजर है, तो निश्चित ही घर बनने में बाधा आएगी। ऐसे में ग्रहों को शुभ बनाने के लिए आपको कम से कम लगातार 21 रविवार को एक उपाय करना होगा। रविवार को सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर सबसे पहले भगवान सूर्य को अद्र्ध दें। तांबे के लोटे में शुद्ध जल, थोड़ा गंगाजल, अक्षत, लाल गुलाब की पंखुडिय़ां, हल्का सिंदूर, चीनी मिलाकर सूर्य को अद्र्ध दें। ध्यान रहे कि अद्र्ध जब दें, तो आपकी नजरें लोटे से नीचे की ओर गिर रही धार पर हो ना कि सूर्य भगवान की ओर...। ये भी ध्यान रखें कि पानी के छींटें पैरों पर न आएं। अद्र्ध देते समय ओम घृणि सूर्याय नम: मंत्र बोलते रहें।

इसके बाद घर में एक ताजे आटे की रोटी बनवाएं। रोटी जब ठंडी हो जाए, तो उसमें पुराने गुड़ की एक साबुत भेली रख लें और किसी गौशाला में जाकर लाल गया को खिला दें। ध्यान रखें रोटी-गुड़ गाय के सामने फेंके नहीं, बल्कि हाथ से गाय को खिलाएं। इसके बाद हाथ जोड़कर गाय को प्रणाम करें और गाय के पैर पड़ें। यह उपाय लगातार करें। आप देखेंगे कि अचानक आपके घर बनने की योजना शुरू होगी और कोई बाधा भी नहीं आएगी। इस उपाय का एक और फायदा यह है कि यदि आपका घर इस उपाय के करने से बनता है, तो आपकों घर के लिए आर्थिक तंगी का सामना कभी नहीं करना पड़ेगा। यदि आप लोन लेकर घर बनाएंगे या बना हुआ खरीदेंगे, तो इसके लोन चुकाने में भी आपकों कभी कोई परेशानी नहीं आएंगी। तो देर किस बात की, कल है रविवार और बेहद शुभ मुहूर्त भी हैं। आप यह उपाय शुरू कर सपनों के आशियानें की नींव रख सकते हैं।



हर समस्या और टोने-टोटके की काट हैं ये प्रयोग, लेकिन बार-बार न करें

हर समस्या और टोने-टोटके की काट हैं ये प्रयोग, लेकिन बार-बार न करें


यदि आपको लगता है कि किसी ने आप पर कुछ तादू-टोना या टोटका करवा दिया है तो उसे सहज ही नहीं काटा जा सकता। इसके लिए आपको विशेष प्रयोग करने होते हैं जो सरल होने के साथ-साथ ढ़ंग से नहीं होने पर उल्टा असर नहीं भी नहीं दिखाएं।
वैसे तो तंत्रशास्त्र में ऐसे कई प्रयोग बताए गए हैं, फिर भी साबर मंत्रों को उपयोग बहुत ही अच्छा माना गया है। इनमें भी गायत्री मंत्र का प्रयोग सर्वश्रेष्ठ है परन्तु उसके लिए मन में पूर्ण आस्था का होना जरूरी है। इसके लिए एक साबर मंत्र भी बताया गया है। इस मंत्र का प्रयोग करने के लिए किसी विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं है, केवल जाप से भी काम चल सकता है। मंत्र निम्न प्रकार है, मंत्र में रिक्त स्थान पर अपने ईष्ट देव का नाम लिख लें और नीचे दिए तरीसे से प्रयोग करें:
ऊँ नमो आदेश गुरु का,
एक ठौ सरसों सोला राई,
मोरो पठवल कोरो जाय,
जे करै ते मरै, उलट विद्या ताहि पै पड़ै,
शब्द साँचा पिण्ड काँचा, फुरो मंत्र ईश्वरी वाचा,
दुहाई श्री ....... की।।
प्रयोग निम्न प्रकार हैं:
सोलह दाने राई (लाल सरसों) के और 3, 5 या 7 डलियां नमक की लें और जिस दिशा में बैठ कर आप पूजा करते हों, उसी दिशा में मुंह करके राई और नमक को मुठ्ठी में बंद करके सात बार मंत्र पढ़े। हर बार मंत्र पढ़कर मुठ्ठी में फूंक मारें। सात बार मंत्र पढ़कर फूंक मारने के बाद सिर और सीने के सामने सात बार घुमाकर जलती आग में डाल दें। इससे आप पर किया गया टोना-टोटका तुरंत ही वापस लौट जाएगा और जिसने किया है उसी पर उल्टा असर डालेगा। इस प्रयोग से भूत-प्रेत भी भगाए जा सकते हैं और किसी दूसरे की नजर भी उतारी जा सकती है।

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

कब होगा आपका भाग्योदय, बताएंगे आपके मूलांक

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 When will your stroke, tell your radix,shine number
आप जानते हैं कि आपका भाग्योदय कब होगा? शायद नहीं। अपने मूलांक और नंबर के अनुसार आपके अच्छे दिनों को पहचाना जा सकता है।मूलांक-1: मूलांक 1 का सहयोगी अंक 4 है। अतः वर्ष 2020 भी इनके लिए लकी साबित होगा। किसी भी कैलेंडर वर्ष का जनवरी, अप्रैल, अक्तूबर महीना भी इनके लिए उपयुक्त है। ये इनके भाग्य का उज्ज्वल पक्ष सामने लाएंगे। 

मूलांक-2:
 इनके लिए 2018 विशेष भाग्योदयकारी हैं। ये वर्ष इनके जीवन में उन्नति के अद्भुत द्वारा खोलेंगे। इनका कैरियर इस काल में नवीन ऊंचाइयों को छूएगा। मूलांक 2 के सहयोगी अंक हैं 3 तथा 7। इस कारण इनके लिए वर्ष 2019 भी लाभकारी रहेगा। इनका कार्य क्षेत्र अंक 2 अर्थात् चंद्रमा के क्षेत्र का, जैसे लेखन, प्रकाशन, वस्त्र-व्यवसाय, कला-जगत आदि है तो उक्त वर्षों में इन्हें विशेष सफलता मिलेगी।

मूलांक-3: वर्ष 2019 इनके लिए उत्कृष्ट फलदायी हैं। यदि ये कोमल तथा सजावटी वस्तुओं, प्रकाशन अथवा गुरु से संबंधित अन्य वस्तुओं का व्यवसाय कर रहे हैं तो इस साल में विशेष लाभ होगा। किसी भी कैलेंडर वर्ष का मार्च, जून अथवा दिसंबर महीना इनके लिए उत्तम है। मूलांक-4: वर्ष 2020 इनके लिए विशेष भाग्योदयकारी हैं। 

मूलांक 4 के सहयोगी अंक हैं 1 तथा 8 । अतः इनके लिए वर्ष 2017 भी अच्छा रहेगा। यदि ये तांबे, चमड़े, बीज आदि के व्यवसाय में हैं अथवा सरकारी कार्यों के ठेके लेते हैं तो उक्त वर्ष इन पर अधिक कृपालु होंगे। इनके लिए कैलेंडर वर्ष का जनवरी, अप्रैल, अगस्त या अक्तूबर का महीना भी शुभ है।


मूलांक-5: वर्ष 2021 इनके लिए भाग्यवर्द्धक हैं। मूलांक 5 के सहयोगी अंक हैं। ये यदि कांसे, किराने, मूंगफली, रबड़ अथवा स्टेशनरी के व्यवसाय में हैं तो उक्त वर्ष इन पर मेहरबान रहेंगे। इनके लिए कैलेंडर वर्ष का जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अक्तूबर या दिसंबर महीना भी अनुकूल है। 

मूलांक-6: 2022 इनके लिए भाग्योदयकारी हैं। मूलांक 6 के सहयोगी अंक हैं 3 तथा 9। अतः इनके लिए 2019 का साल भी श्रेष्ठ रहेगा। यदि ये हीरे, सुगंधित द्रव्य, सौंदर्य प्रसाधन या चांदी के व्यवसाय में हैं तो उक्त वर्ष इनके लिए विशेष शुभ फलदायी सिद्ध होंगे। इनके लिए कैलेंडर वर्ष का मार्च, जून, सितंबर या दिसंबर महीना भी शुभ है।

मूलांक- 7: मूलांक 7 के सहयोगी अंक हैं 2 तथा 4 । अतः वर्ष 2018 तथा 2020 भी इनके भाग्य के अनुकूल हैं। यदि ये कांच, चावल, वस्त्र, शराब आदि के व्यवसाय में हैं तो उक्त वर्ष इनके व्यवसाय के प्रसार के लिए बहुत उपयुक्त हैं। इनके लिए कैलेंडर का फरवरी, अप्रैल, जुलाई या नवंबर महीना राहत प्रदान करने वाला है। 

मूलांक-8: मूलांक 8 के सहयोगी अंक हैं 2 तथा 4 । वर्ष 2018 इनके लिए श्रेष्ठ रहेगा। यदि ये लकड़ी, लोहे, कोयले, खनन, तेल या पुराकालीन चीजों के व्यवसाय से जुड़े हैं तो उक्त वर्ष इनके लिए अधिक अनुकूल सिद्ध होंगे। इनके लिए कैलेंडर वर्ष का फरवरी, अप्रैल, अगस्त, या नवंबर महीना भी राहत देने वाला होगा।

मूलांक-9: मूलांक 9 के सहयोगी अंक हैं 3 तथा 6 । अतः इनके लिए वर्ष 2019 श्रेष्ठए रहेगा। यदि ये भूमि शराब, भवन-निर्माण, चिकित्सकीय सामग्री, शस्त्र आदि के व्यवसाय में हैं तो उक्त वर्षों की इन पर विशेष कृपा दृष्टि रहेगी। इनके लिए कैलेंडर वर्ष का मार्च, जून, सितंबर या दिसंबर महीना भी शुभ है। जो भी करना है, इस दौरान कर लें।

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

क्या आपको पता है वैलेंटाइन मनाने के पीछे का राज

Do you know the secret behind the observance of Valentine


फूलों से गुलजार वसंत महीने में चारों तरफ प्यार और उल्लास का महीना होता है। वैलेंटाइन डे हर साल 14 फरवरी को मनाया जाता है। यह रोम के संत वैलेंटाइन की याद में मनाया जाता है। माना जाता है कि वह सामाजित कुरीतियों को दूर कर लोगों के बीच प्यार व सद्भाव का प्रचार-प्रसार करते थे, वह 269 ईस्वी में शहीद हो गए और 14 फरवरी 269 को वह फ्लेमेनिया में दफनाए गए। उनके अवशेष रोम के सेंट फ्रेक्स्ड चर्च और डबलिन (आयरलैंड) के स्ट्रीट कामिलेट चर्च में रखे हुए हैं।

एक अन्य बिशप टर्नी को भी वैलेंटाइन का सूत्रपात करने वाला माना जाता है, जो 197 ईस्वी में सम्राट ऑरोलियन के उत्पीड़न से शहीद हो गए थे, लेकिन रोम के वेलेंटाइन की समाधि से उन्हें अलग दफनाया गया। समाज के लोगों के बीच आपसी प्यार व सद्भाव की कामना से शुरू हुआ वैलेंटाइन अब मुख्य रूप से प्रेमी जोड़ों के प्यार के त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा है। 


भारत में 1992 के आसपास वैलेंटाइन डे मनाने का प्रचलन शुरू हुआ। वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धा और पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से भारतीय युवाओं ने भी वेलेंटाइन को धूमधाम से मनाना शुरू कर दिया।

वेलेंटाइन डे के मौके पर बाजारों में अलग ही रौनक छाई रहती है, दिल के आकार वाले हीरे के पेंडेंट से लेकर टेडी बीयर, हार्ट शेप के कार्ड्स, चांदी का गुलाब, आई लव यू लिखे चांदी के पायल और कई गिफ्ट आइटम धड़ल्ले से बिकते हैं। इस दौरान 15-20 रुपये में बिकने वाला एक लाल गुलाब 30 से 80 रुपये में बिकता है।


ऐसा शक्तिशाली मंत्र कि सुनने से ही किस्मत बदल जाए

Astrology
मंत्रों में अथाह शक्ति है। मंत्रों के जाप से संन्यासियों ने देवों से भी मनचाहे वर प्राप्त् किए हैं। ऐसे में आपको बता रहे हैं एक ऐसा शक्तिशाली मंत्र जिसको सुनने भर से किस्मत के ताले खुल जाते हैं और किस्मत बदल जाती है। 

शास्त्रों 
में ब्रह्मा जी को सृष्ष्टि का सृजनकार, महादेव को संहारक और भगवान विष्णु को विश्व का पालनहार कहा गया है। हिंदू धर्म में विष्णु सहस्रनाम सबसे पवित्र स्त्रोतों में से एक माना गया है। मान्यता है कि इसके पढ़ने-सुनने से इच्छाएं पूर्ण होती हैं। ये स्त्रोत संस्कृत में होने से आम लोगों को पढ़ने में कठिनाई आती है इसलिए इस सरल से मंत्र का उच्चारण करके वैसा ही फल प्राप्त कर सकते हैं जो विष्णु सहस्रनाम के जाप से मिलता है -


नमो स्तवन अनंताय सहस्त्र मूर्तये,
सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे,
सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते,
सहस्त्रकोटि युग धारिणे नम:..
जीवन में आने वाली किसी भी तरह कि बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए प्रतिदिन सुबह इस मंत्र का जाप करें। कहते हैं कि महाभारत में जब भीष्म पितामह बाणों की शय्या पर थे उस समय युधिष्ठिर ने उनसे पूछा कि, “कौन ऐसा है, जो सर्व व्याप्त है और सर्व शक्तिमान है?” तब उन्होंने भगवान विष्णु के एक हजार नाम बताए थे।


भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया था कि हर युग में इन नामों को पढ़ने या सुनने से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यदि प्रतिदिन इन एक हजार नामों का जाप किया जाए तो सभी मुश्किलें हल हो सकती हैं।

सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

जीवन में सब कुछ ठीक नहीं तो, जानिएं कौनसा ग्रह कर रहा है गडबड!

 Everything else in life, what planet is disarray Read!


Interesting Facts


हमारे जीवन में कई बार ऐसी घटनाएं होने लगती हैं जिन पर हमारा बस नहीं चलता लेकिन इनमें से कुछ घटनाओं को देखकर अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है कि इन सबके पीछे किस ग्रह की चाल है या फिर कौन से ग्रह की कुचाल से गडबड हो रही है। आइए जानें-

सूर्य: यदि जातक को सरकारी नौकरी या सरकारी कार्यों में परेशानी हो, सिर दर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग, अस्थि रोग, चर्म रोग, पिता से अनबन आदि होने लगे तो समझिए कि सूर्य देव आपसे थोडा नाराज हैं। उनको मनाने के उपायों पर काम करना शुरू कर दीजिए।




बुध: जातक के गले, नाक और कान के रोग, स्मृति रोग, व्यवसाय में हानि, मामा से अनबन आदि होने लगे तो समझिए आपका बुध आपसे नाराज है। उनकी शांति के उपायों से ही आपको राहत मिल सकती है।

गुरु: किसी को धन व्यय, आय में कमी, विवाह में देरी, संतान में देरी, उदर विकार, गठिया, कब्ज, गुरु व देवता में अविश्वास होने लगे तो समझिए कि गुरू आपको परेशान कर रहा है। इन कामों में शांति के लिए गुरू को शांत किया जा सकता है।




शुक्र: जीवन साथी के सुख में बाधा, प्रेम में असफलता, भौतिक सुखों में कमी व अरुचि, नपुंसकता, मधुमेह, धातु व मूत्र रोग आदि होने लगे तो मान लें कि शुक्र की आप पर कुदृष्टि है। इनकी शांति के उपाय करने लगें।

शनि: यदि किसी को वायु विकार, लकवा, कैंसर, कुष्ठ रोग, मिर्गी, पैरों में दर्द, नौकरी में परेशानी आदि होने लगे तो शनिग्रह आपसे प्रसन्न नहीं है। शनिदेव को मनाने के प्रयास करेंगे तो आपकी सभी समस्याएं दूर होने लगेंगी।




राहु: किसी को अगर त्वचा रोग, कुष्ठ, मस्तिष्क रोग, भूत प्रेत वाधा, दादा से परेशानी आदि हो तो समझिए कि राहू आपके पीछे पडा हुआ है। ऐसे में राहू की शांति के प्रयास करने चाहिए।

केतु: अगर किसी को नाना से परेशानी, भूत-प्रेत, जादू टोने से परेशानी, रक्त विकार, चेचक आदि की परेशानी होने लगे तो समझिए कि केतु ने आपको परेशानी कर रखा है। ऐसे में केतु की शांति के उपाय करने चाहिए।

शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

भूलकर भी नहीं करें जीवन में ये 4 काम

Interesting Facts,
रामायण, महाभारत, गरुड़ पुराण आदि ग्रंथों में कई ऐसे काम बताए गए हैं जो पूरी तरह वर्जित माने गए हैं। इन्हें करने से न केवल हमारे सम्मान में कमी आती है बल्कि हमें अपयश भी मिलता है।

यदि
 कोई व्यक्ति संतान के पालन-पोषण में अनदेखी करता है तो संतान बिगड़ जाती है। संतान संस्कारी नहीं है और गलत काम करती है तो इससे अपमान ही प्राप्त होता है। जब घर के बड़ों की अनदेखी होती है तो संतान असंस्कारी हो सकती है। अत: माता-पिता को संतान के अच्छे भविष्य के लिए उचित देखभाल करनी चाहिए। संतान को अच्छे संस्कार मिले इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

जो लोग धनी हैं, लेकिन घर-परिवार की जरुरतों पर खर्च नहीं करते हैं, धन के लिए लालच करते हैं, उन्हें समाज में सम्मान प्राप्त नहीं हो पाता है। धन को जरूरतों पर भी खर्च न करने या कंजूस होने पर धन की लालसा और अधिक बढ़ती है। इससे व्यक्ति और अधिक पैसा कमाने के लिए गलत काम कर सकता है। बड़ी-बड़ी मछलियां भी छोटे से मांस टुकड़े के लालच में फंसकर अपने प्राण गवां देती है। इसी प्रकार इंसान भी धन के लोभ में फंसकर कई परेशानियों का सामना करता है।

जो लोग अपनी आय से अधिक खर्च करते हैं, अत्यधिक दान करते हैं, वे कई प्रकार की परेशानियों का सामना करते हैं। आय से अधिक दान करते हैं, आमदनी कम होने या धन अभाव होने पर भी शौक पूरे करना, मौज-मस्ती करना, फिजूलखर्च करना पूरे परिवार को संकट में फंसा सकता है। इस काम से अपमान ही मिलता है।

अच्छी या बुरी संगति का असर हमारे जीवन पर होता है। यदि हमारी संगत गलत लोगों के साथ है तो कुछ समय तो सुख की अनुभूति होगी, लेकिन परिणाम बहुत बुरा हो सकता है। बुरी संगत से बचना चाहिए।



शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

माघी पूर्णिमा, करें माँ लक्ष्मी की पूजा

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आज 10 फरवरी को माघी पूर्णिमा है। हिंदू धर्म में माघ महीने का बहुत ही खास महत्व होता है। पौराणिक मान्यता है कि इस मास का हर दिन पवित्र होता है। लेकिन पूर्णिमा का महात्मय सबसे श्रेष्ठ माना गया है। माघ मास की पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है । हिंदू पंचाग के अनुसार पूर्णिमा चंद्र मास का अंतिम दिन होता है। मघा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होने के कारण ही इस मास को माघ मास कहा जाता है। 10 फरवरी को माघी पूर्णिमा पर जमकर दान करें क्योंकि यह दान आपके जीवन में न केवल सुख-समृद्धि लाएगा बल्कि इससे सभी पाप भी नाश होंगे।
माघी पूर्णिमा को 10 फरवरी शुक्रवार को है। ज्योतिषियों के अनुसार इस पूजा को करने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। पद्म पुराण के अनुसार पूर्णिमा तिथि को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से पूरे साल के पुण्य का लाभ मिलता है। इस दिन वस्त्र, अन्न, तिल, गुड, मूंगफली और इससे बने नैवेद्य का दान किया जाता है। इस दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी लग रहा है लेकिन इसका प्रभाव विश्व में कहीं भी नहीं पडेगा। पूर्णिमा तिथि 10 फरवरी की सुबह 6.51 लगी जो अगले दिन सुबह 5.50 तक रहेगी। सौभाग्य योग नौ फरवरी की देर रात 2.49 बजे से दस फरवरी की मध्यरात्रि 12.33 बजे तक रहेगा। ऐसे में सौभाग्य योग में स्नान और दान कई गुणा फल प्रदाता है। इस दिन सुबह 7.15 तक पुष्य नक्षत्र और इसके बाद आश्लेषा नक्षत्र लग रहा है। कहा जाता है कि इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

माघ मास की पूर्णिमा को मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए बह्म मुहूर्त में स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस दिन शाम को मां लक्ष्मी की पूजा करें और शाम को खीर बनाकर मां लक्ष्मी को भोग लगाएं। कहते हैं इस दिन रात को घर के मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में आगमन कती हैं। इसके अलावा इस दिन पीपल के पेड की पूजा करनी चाहिए। पीपल के पेड पर दीपक जलाकर मिष्ठानों का भोग लगाना चाहिए और जल चढाना चाहिए।

क्या है इस दिन का महत्व

माघी पूर्णिमा स्नान का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व है। मान्यता है कि सभी देवता माघ मास में गंगा स्नान के लिये पृथ्वी पर आते हैं। मानव रूप में वे पूरे मास भजन-कीर्तन करते हैं और यह देवताओं के स्नान का अंतिम दिन होता है। यही कारण है कि कल्पवास को बहुत ईष्टकारी माना गया है। एक मान्यता यह भी है कि द्वापर युग में दानवीर कर्ण को माता कुंती ने माघी पूर्णिमा के दिन ही जन्म दिया था। इसी दिन कुंती ने उन्हें नदी में प्रवाहित किया था। इस दिन गंगा, यमुना सहित अन्य धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करने से दैहिक, दैविक, भौतिक आदि सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। वैसे तो धार्मिक ग्रंथों में पूरे महीने स्नान करने का महत्व बताया गया है लेकिन यदि कोई पूरे मास स्नान नहीं भी कर पाता है तो माघी पूर्णिमा से लेकर फाल्गुनी दूज तक स्नान करने से पूरे माघ मास स्नान करने के समान ही पुण्य की प्राप्ति की जा सकती है।

माघ पूर्णिमा की पूजा में भगवान विष्णु की पूजा जाती है। पूजा के लिये सामग्री के तौर पर केले के पत्ते, फल, पंचामृत, पान-सुपारी, तिल, मोली, रोली, कुमकुम, दूर्वा आदि का उपयोग किया जाता है। किसी विद्वान ब्राह्मण से भगवान सत्यनारायण की कथा करवाना भी इस दिन शुभ रहता है।

शास्त्रों में माघ स्नान एवं व्रत का विशेष महत्व है। माघ की प्रत्येक तिथि पुण्यपर्व है उनमें भी माघी पूर्णिमा को विशेष महत्व दिया गया है। माघ मास की पूर्णिमा तीर्थस्थलों में स्नान दानादि के लिए काफी फलदायी बताई गई है। माघी पूर्णिमा के दिन आप मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के विशेष उपाय कर सकते है। इस पूर्णिमा की रात लगभग 12 बजे महालक्ष्मी की भगवान विष्णु के साथ पूजा करें व रात को घर के मुख्य दरवाजे पर घी का दीपक लगाएं। माघी पूर्णिमा की सुबह पास के किसी लक्ष्मी मंदिर में जाएं और 11 गुलाब के फूल अर्पित करें। इससे माता लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। माघी पूर्णिमा की सुबह माता सरस्वती की भी पूजा की जाती है। इस दिन माता सरस्वती को सफेद फूल चढाएं व खीर का भोग लगाएं। इन सभी उपायों से मां जल्दी प्रसन्न होती है और आपको विशेष कृपा मिलेगी।


गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

चीनी वाली रोटी के तीन उपाय, बदल जाएगी आपकी तकदीर



 Three measures of Chinese bread, will change your destiny

Jyotish Upay,

व्यापार में मंदी और नौकरी में परेशानी को दूर करने के लिए चार मीठी रोटी बनाकर उसमें अच्छेद से घी भरें और पीडित व्यीक्ति पर उसारकर किसी भूखे व्यक्ति को खिलाएं। खिलाने के बाद उसे 11 रूपए भी दें। ऐसा करने से न केवल नौकरी में तुरंत फायदा मिलेगा बल्कि व्यवसाय में भी दिन दौगुना लाभ होगा।

प्रतिदिन खाना खाने से पहले एक रोटी अपने पितरों के नाम से निकाल कर सुबह के समय किसी गाय को खिला दें। देखते ही देखते आपके बुरे दिन दूर होकर धन, सुख, संपत्ति की प्राप्ति होती है।

अगर प्रतिदिन मीठी रोटियों को चींटियों के बिल पर डालें तो बड़ी से बड़ी समस्या भी चुटकी बजाते ही दूर हो जाती है। इस उपाय से राहू अपनी पूरी शक्ति के साथ आपकी मदद करता है और आपके बड़े से बड़े दुर्भाग्य को भी सौभाग्य में बदल देता है।

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

How To Be Successful

Interesting Facts

एक गाँव में एक गरीब लड़का रहता था जिसका नाम मोहन था। मोहन बहुत मेहनती था लेकिन थोड़ा कम पढ़ा लिखा होने की वजह से उसे नौकरी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे ही एक दिन भटकता भटकता एक लकड़ी के व्यापारी के पास पहुँचा। उस व्यापारी ने लड़के की दशा देखकर उसे जंगल से पेड़ कटाने का काम दिया।



नयी नौकरी से मोहन बहुत उत्साहित था, वह जंगल गया और पहले ही दिन 18 पेड़ काट डाले। व्यापारी ने भी मोहन को शाबाशी दी , शाबाशी सुनकर मोहन और गदगद हो गया और अगले दिन और ज्यादा मेहनत से काम किया। लेकिन ये क्या ? वह केवल 15 पेड़ ही काट पाया। व्यापारी ने कहा – कोई बात नहीं मेहनत करते रहो।


तीसरे दिन उसने और ज्यादा जोर लगाया लेकिन केवल 10 पेड़ ही ला सका। अब मोहन बड़ा दुखी हुआ लेकिन वह खुद नहीं समझ पा रहा था क्युकी वह रोज पहले से ज्यादा काम करता लेकिन पेड़ कम काट पाता। हारकर उसने व्यापारी से ही पूछा – मैं सारे दिन मेहनत से काम करता हूँ लेकिन फिर भी क्यों पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है। व्यापारी ने पूछा – तुमने अपनी कुल्हाड़ी को धार कब लगायी थी। मोहन बोला – धार ? मेरे पास तो धार लगाने का समय ही नहीं बचता मैं तो सारे दिन पेड़ कटाने में व्यस्त रहता हूँ। व्यापारी – बस इसीलिए तुम्हारी पेड़ों की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है।

मित्रों यही बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है , हम रोज सुबह नौकरी पेशा करने जाते हैं , खूब काम करते हैं पर हम अपनी कुल्हाड़ी रूपी Skills को Improve नहीं करते हैं। हम जिंदगी जीने में इतने ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं कि अपने शरीर को भी कुल्हाड़ी की तरह धार नहीं दे पाते और फलस्वरूप हम दुखी रहते हैं।

मित्रों कठिन परिश्रम करना कोई बुरी बात नहीं है पर Smart Work , Hard Work से ज्यादा अच्छा होता है।

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

इन 10 टोटकों से रहेंगे आजीवन स्वस्थ, नहीं पडेंगे बीमार


अच्छा स्वास्थ्‍य मनुष्य़ की सबसे बडी जीत है। व्यायाम और अच्छी डाइट से हालांकि अच्छी सेहत पाई जा सकती है लेकिन ज्योतिष की मानें तो केवल 10 टोटकों से अच्‍छी सेहत और स्वास्थ्‍य पाया जा सकता है। 

हमेशा हैल्दी बने रहने के लिए रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पीकर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है।

हृदय विकार, रक्तचाप के लिए एकमुखी या सोलहमुखी रूद्राक्ष श्रेष्ठ होता है। इनके न मिलने पर ग्यारहमुखी, सातमुखी अथवा पांचमुखी रूद्राक्ष का उपयोग कर सकते हैं। इच्छित रूद्राक्ष को लेकर श्रावण माह में किसी प्रदोष व्रत के दिन, अथवा सोमवार के दिन, गंगाजल से स्नान करा कर शिवजी पर चढाएं, फिर सम्भव हो तो रूद्राभिषेक करें या शिवजी पर “ॐ नम: शिवाय´´ बोलते हुए दूध से अभिषेक कराएं।

इस प्रकार अभिमंत्रित रूद्राक्ष को काले डोरे में डाल कर गले में पहनें। जिन लोगों को 1-2 बार दिल का दौरा पहले भी पड़ चुका हो वे एक पाचंमुखी रूद्राक्ष, एक लाल रंग का हकीक, 7 साबुत (डंठल सहित) लाल मिर्च को, आधा गज लाल कपड़े में रख कर व्यक्ति के ऊपर से 21 बार उसार कर इसे किसी नदी या बहते पानी में प्रवाहित कर दें।

घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है। 

रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है।

घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है। 

रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है।

घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है। 

रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है।
पीपल के वृक्ष को प्रात: 12 बजे के पहले, जल में थोड़ा दूध मिला कर सींचें और शाम को तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। ऐसा किसी भी वार से शुरू करके 7 दिन तक करें। बीमार व्यक्ति को आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा।


सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

इस ट्राइब में शादी से पहले संबंध बनाना है जरूरी, बच्चा होने पर ही कर सकते है शादी, जानिए क्यों?

Parampara



भारत के अलग अलग हिस्सों में रहने वाली जनजातियों की कुछ परम्पराएं बहुत ही अमेज़िंग है। ऐसी ही एक जनजाति है “गरासिया” (Garasia Tribe) जो की मुख्यतः राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सो में निवास करती है। इस ट्राइब के युवा पहले पसंद की लड़की के साथ लिव-इन में रहते हैं। बच्चे पैदा होने के बाद ही दोनों को शादी के बंधन में बंधने की अनुमति मिलती है। यदि दोनों के लिव-इन में रहने के बावजूद भी बच्चे नहीं हुए तो वे अलग-अलग हो जाते हैं। फिर किसी और के साथ लिव-इन में रह बच्चे पैदा करने की कोशिश करते हैं।




राजस्थान के उदयपुर, सिरोही और पाली जिले में गरासिया जनजाति (Garasia Tribe) रहती है। इस जनजाति की अनोखी परंपरा आज के मॉडर्न सोसाइटी की लिव-इन से मिलती-जुलती है। यहां जवान होने के बाद लड़के-लड़कियां आपसी सहमति से एक दूसरे के साथ लिव-इन में रहते हैं।


The tribe is important in relationships before marriage, can do so only when the child marriage, Know Why?

इसके बाद बच्चे पैदा हो जाने पर ये शादी करते हैं। अधिकांश बार बच्चे पैदा होने के बाद परिवार की जिम्मेदारियों के चलते ये शादी को टालते रहते हैं। कई बार 50 या इससे अधिक की उम्र में ये इस रिश्ते को अमली जामा पहनाते हैं। इस दौरान कई बार जवान बेटे और पोते भी इनकी बारात में शामिल होते हैं।

The tribe is important in relationships before marriage, can do so only when the child marriage, Know Why?

हाल ही में एक 80 साल के बुजुर्ग पाबुरा ने अपनी 70 वर्षीय लिव-इन पार्टनर रुपली से शादी की है। इस शादी में पाबुरा के पड़पोते तक बारात में शामिल हुए थे।


The tribe is important in relationships before marriage, can do so only when the child marriage, Know Why?

ऐसे बनी लिव-इन की ये धारणा…
सालों पहले गरासिया जनजाति के चार भाई कहीं और जाकर बस गए। इनमें से तीन ने शादी की और एक समाज की कुंवारी लड़की के साथ लिव-इन में रहने लगा। शादीशुदा तीनों भाइयों के कोई औलाद नहीं हुई बल्कि लिव-इन में रहने वाले भाई के बच्चे हुए और उसी से वंश आगे बढ़ा। बस इसी धारणा ने समाज के लोगों के जेहन में इस परंपरा को जन्म दिया। कहते हैं इन जनजाति में ये ट्रेडिशन 1 हजार साल पुराना है। यह परम्परा दापा प्रथा कहलाती है।

The tribe is important in relationships before marriage, can do so only when the child marriage, Know Why?

राजस्थान और गुजरात में इस समाज का दो दिन का ‘विवाह मेला’ लगता है, जिसमें टीनएजर एक-दूसरे से मिलते हैं और भाग जाते हैं। भागकर वापस आने पर लड़के-लड़कियां बिना शादी के पति-पत्नी की तरह साथ रहने लगते हैं। इस दौरान सामाजिक सहमति से लड़की वाले को कुछ पैसे लड़के वाले दे देते हैं। हालांकि, बच्चे पैदा होने के बाद वे अपनी सहूलियत से कभी भी शादी कर सकते हैं।




इतना ही नहीं यदि औरत चाहे तो किसी और मेले में दूसरा लिव इन पार्टनर भी चुन सकती हैं। इसके लिए नए लिव इन पार्टनर को पहले पार्टनर की तुलना में ज्यादा पैसा देना होता है। कई लोगों की शादी तो बूढ़े होने पर उनके बच्चे करवाते हैं। इसके अलावा कई बार बच्चे अपने मां बाप के साथ मिलकर शादी करते हैं। इतना ही नहीं दूल्हे के घरवाले शादी का खर्चा उठाते हैं और शादी भी दूल्हे के ही घर में होती है।

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

एकादशी के द‌िन चावल और चावल से बनी चीजें क्यों नहीं खानी चाह‌िए?

एकादशी के द‌िन चावल और चावल से बनी चीजें क्यों नहीं खानी चाह‌िए?


एकादशी व्रत का शास्‍त्रों और पुराणों में बड़ा महत्व बताया गया है। इस व्रत को लेकर कई न‌ियम और मान्यताएं भी हैं इनमें चावल नहीं खान भी शाम‌िल है। इसके पीछे धार्म‌िक कारण के साथ ही साथ वैज्ञान‌िक कारण भी बताया जाता है।

धार्मिक कारण 
धार्म‌िक दृष्ट‌ि से एकादशी के दिन चावल खाना अखाद्य पदार्थ अर्थात नहीं खाने योग्य पदार्थ खाने का फल प्रदान करता है।

पौराणिक कथा के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है।

जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया, उस दिन एकादशी तिथि थी। इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया। मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाना महर्षि मेधा के मांस और रक्त का सेवन करने जैसा है।

वैज्ञानिक कारण 
वैज्ञानिक तथ्य के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। जल पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है इससे मन विचलित और चंचल होता है। मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है। एकादशी व्रत में मन का निग्रह और सात्विक भाव का पालन अति आवश्यक होता है इसलिए एकादशी के दिन चावल से बनी चीजें खाना वर्जित कहा गया है।

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

धन प्राप्ति के अचूक उपाय |

                      धन प्राप्ति के अचूक उपाय |

1- शनिवार (saturday) के दिन पीपल का एक पत्ता तोड़कर उसे गंगाजल से धोकर उसके ऊपर हल्दी तथा 
दही के घोल से अपने दाएं हाथ की अनामिका अंगुली से ह्रीं लिखें। इसके बाद इस पत्ते को धूप-दीप दिखाकर
अपने बटुए में रखे लें। प्रत्येक शनिवार को पूजा के साथ वह पत्ता बदलते रहें। यह उपाय करने से आपका
बटुआ (purse) कभी धन से खाली नहीं होगा। पुराना पत्ता किसी पवित्र स्थान पर ही रखें।

2- काली मिर्च के 5 दाने अपने सिर पर से 7 बार उतारकर 4 दाने चारों दिशाओं में फेंक दें तथा पांचवें दाने 
को आकाश (air-clouds) की ओर उछाल दें। यह टोटका करने से आकस्मिक धन लाभ होगा।

3- अचानक धन प्राप्ति के लिए सोमवार (monday) के दिन श्मशान में स्थित महादेव मंदिर जाकर दूध में 
शुद्ध शहद मिलाकर चढ़ाएं।

4- अगर धन नहीं जुड़ रहा हो तो तिजोरी में लाल वस्त्र (red cloth) बिछाएं।

5- तिजोरी में गुंजा के बीज रखने से भी धन की प्राप्ति होती है।

6- जिस घर में प्रतिदिन (every day) श्रीसूक्त का पाठ होता है, वहां लक्ष्मी अवश्य निवास करती हैं।

बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

जीवन खुश रहने के आसान तरिके

Interesting Facts
जीवन खुश रहने के आसान तरिके
अपने अतीत से बाहर निकलकर अपने वर्तमान में रहो.
आपका धन आपकी ख़ुशी से मापा जाता है नाकि आपके बैंक बैलेंस से.
अपने लिए जियो ना की दूसरों के लिए.
आलोचनाओं का सामना करके आगे बढ़ें.
अपने जीवन में लोगों को मूल्य दें.

वह काम करो जिसे आप प्यार करते हो, ना की वह जो आपको अच्छा नहीं लगता.
प्रेरणा ही सब कुछ है, लेकिन यह अर्थहीन है अगर आप इससे सीखते नहीं.
वर्तमान में रहें. आपको इस जीवन के प्रति आभारी होना चाहिए.
दूसरों के जीवन के बारे में भी जानने की इच्छा रखें. क्योंकि आपको उनकी जिंदगी से भी कुछ अच्छा सीखने के लिए मिल सकता है.
खुश लोगों के साथ हमेशा खुश रहो.
अपनी गलतियों को गले लगाओ और उनसे सीखो.
हर दिन अपने आप को कुछ ना कुछ चुनौती देते रहो.
गुणवत्ता मात्रा को हरा देती है.
भौतिक चीजों से अपने आप को ज्यादा न जोड़कर रखें.
आपके द्वारा अच्छी तरह से व्यतीत किया जीवन दूसरों के लिए भी सबक बनता है.
जीवन में आगे क्या होने वाला है कोई भी नहीं जानता.
“मैं नहीं जानता” कहने में आपको कोई शर्म नहीं करनी चाहिए.
संपत्ति आपकी मालिक नहीं है बल्कि आप संपत्ति के मालिक हैं.
घर से बाहर निकलो और दूसरों के लिए कुछ करने की ठान लो.
कुछ समय अपने लिए भी निकालो.
आप हर किसी को खुश नहीं कर सकते.
अपनी गलतियों से सीखो.

अपने सबसे अच्छे दोस्त से शादी करें. अगर आपको अपने मित्र के साथ समय बिताना सबसे अच्छा लगता है तो उसी से शादी कर लें.
हमेशा जिंदगी में कुछ ना कुछ सीखते रहना चाहिए. अगर आप सीखना छोड़ देंगे तो आप जिंदगी में हमेशा असफलता का सामना करेंगे.
जितना संभव हो सके दूसरों की गलतियों को माफ़ करते रहना चाहिए.
हमेशा पैसे के लिए ही काम मत करो.
समय आपकी सोच से भी तेज गुजर जाता है. इसका सावधानी से इस्तेमाल करें.
जिंदगी में कुछ बातों को सीखा नहीं जाता उन्हें सिर्फ अनुभव ही किया जा सकता है.
धन अपेक्षाकृत महत्वहीन है.
अपने आप से झूठ मत बोलो.
सनस्क्रीन लगायें.
ज्यादा मत सोचो बल्कि करो.
जब भी संभव हो सके नाचो और गाओ.
आपको किसी चीज की कीमत तब तक नहीं पता चलेगी जब वह चीज आपसे दूर हो जाएगी.
अपने घमंड को छोड़ कर माफ़ी मांगो.
लोग अकेले होकर भी अकेले नहीं होते.
आपकी जिंदगी की सारी जरूरत प्यार नहीं है. यदि आपकी जिंदगी में प्यार नहीं होगा तो आपकी जिंदगी अर्थहीन है.
जिंदगी बहुत ज्यादा आसान हो जाती है जब आप लोगों में उनकी बुराई को छोड़कर उनकी अच्छाईयों को देखते हैं.
जो आपके पास है उसी में खुश रहना सीखें.
पैसा ही सब कुछ नहीं है यह सिर्फ एक साधन है.
कोई भी आपकी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता. आप ही अपनी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं.
आपका बुद्धिमान होना व्यर्थ है अगर आप समाज में अपना योगदान नहीं कर रहे.
लोग आपके सबसे बड़े संसाधन हैं.
चीजों को बार बार करने से ही काम आता है.
ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है.
जादा सुनना और कम बात करना.
आपका दृढ़ संकल्प आपको हर समय विजयी बनाएगा.
अपने अंदर की मानवता को हमेशा याद रखें.
विनम्र रहने का अभ्यास करें.
ख़ुशी आपके अंदर से आती है ना कि बाहर से.



मंगलवार, 31 जनवरी 2017

पारंपरिक हिन्दू विवाह

पारंपरिक हिन्दू विवाह


आधुनिक विश्व में विवाह अब अनगिनत विकल्पों और समझौतों का विषय बन गया है. लड़का और लड़की एक-दूसरे को पसंद करते हैं और स्वेच्छापूर्वक संविदा में पड़ते हैं. उनके मध्य हुए समझौते की इति विवाह-विच्छेद या तलाक में होती है. लेकिन पारंपरिक हिन्दू विवाह पद्धति में विकल्पों या संविदा के लिए कोई स्थान नहीं है. यह दो परिवारों के बीच होनेवाला एक संबंध था जिसे लड़के और लड़की को स्वीकार करना होता था. इसके घटते ही उन दोनों का बचपना सहसा समाप्त हो जाता और वे वयस्क मान लिए जाते. इसमें तलाक के बारे में तो कोई विचार ही नहीं किया गया था.
बहुत से नवयुवक और नवयुवतियां पारंपरिक हिन्दू विवाह पद्धति के निहितार्थों और इसके महत्व को समझना चाहते हैं. आमतौर पर वे इसके बहुत से रीति-रिवाजों को पसंद नहीं करते क्योंकि इनका गठन उस काल में हुआ था जब हमारा सामाजिक ढांचा बहुत अलग किस्म का था. उन दिनों परिवार बहुत बड़े और संयुक्त होते थे. वह पुरुषप्रधान समाज था जिसमें स्त्रियाँ सदैव आश्रितवर्ग में ही गिनी जाती थीं. आदमी चाहे तो एक से अधिक विवाह कर सकता था पर स्त्रियों के लिए तो ऐसा सोचना भी पाप था. लेकिन इसके बाद भी पुरुषों पर कुछ बंदिशें थीं और वे पूर्णतः स्वतन्त्र नहीं थे: वे अपने परिवार और जातिवर्ग के नियमों के अधीन रहते थे. विवाह पद्धति के संस्कार अत्यंत प्रतीकात्मक थे और उनमें कृषि आधारित जीवनप्रणाली के अनेक बिंब थे क्योंकि कृषि अधिकांश भारतीयों की आजीविका का मुख्य साधन था. उदाहरण के लिए, पुरुष को कृषक और स्त्री को उसकी भूमि कहा जाता था. उनके संबंध से उत्पन्न होनेवाला शिशु उपज की श्रेणी में आता था. आधुनिक काल की महिलाओं को ऐसे विचार बहुत आपत्तिजनक लग सकते हैं.
हमारे सामने आज एक समस्या यह भी है कि हिन्दू विवाह का अध्ययन करते समय मानकों का अभाव दिखता है. प्रांतीयता और जातीयता के कारण उनमें बहुत सी विविधताएँ घर कर गयी हैं. राजपूत विवाह और तमिल विवाह पद्धति में बहुत अंतर दिखता है. मलयाली हिन्दू विवाह अब इतना सरल-सहज हो गया है कि इसमें वर और वधु के परिजनों की उपस्थिति में वर द्वारा उसकी भावी पत्नी के गले में एक धागा डाल देना ही पर्याप्त है. इस संस्कार में एक मिनट भी नहीं लगता, वहीं दूसरी ओर शाही मारवाड़ी विवाह को संपन्न होने में कई दिन लग जाते हैं. इसी के साथ ही हर भारतीय चीज़ में बॉलीवुड का तड़का लग जाने के कारण ऐसे उत्तर-आधुनिक विवाह भी देखने में आ रहे हैं जिनमें वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शैम्पेन की चुस्कियां ली जातीं हैं पर ज्यादातर लोगों को यह नागवार गुज़रता है.
परंपरागत रूप से, विवाह का आयोजन चातुर्मास अथवा वर्षाकाल की समाप्ति के बाद होता है. इसकी शुरुआत तुलसी विवाह से होती है जिसमें विष्णुरूपी गन्ना का विवाह लक्ष्मीरूपी तुलसी के पौधे के साथ किया जाता था. अभी भी यह पर्व दीपावली के लगभग एक पखवाड़े के बाद मनाया जाता है.
विवाह के रीति-रिवाज़ सगाई से शुरू हो जाते हैं. परंपरागत रूप से बहुत से विवाह संबंध वर और वधु के परिवार द्वारा तय किये जाते थे और लड़का-लड़की एक-दूसरे को प्रायः विवाह के दिन तक देख भी नहीं पाते थे. सगाई की यह रीति किसी मंदिर में आयोजित होती थी और इसमें दोनों पक्षों के बीच उपहारों का आदान-प्रदान होता था. आजकल पश्चिमी प्रभाव के कारण लोग दोस्तों की मौजूदगी में अंगूठियों की अदलाबदली करके ही सगाई कर लेते हैं.
सगाई और विवाह के बीच वर और वधु दोनों को उनके परिजन और मित्रादि भोजन आदि के लिए आमंत्रित करने लगते हैं क्योंकि बहुत जल्द ही वे दोनों एकल जीवन से मुक्त हो जायेंगे. यह मुख्यतः उत्तर भारत में संगीत की रस्म में होता था जो बॉलीवुड की कृपा से अब पूरे भारत में होने लगा है. संगीत की रस्म में परिवार की महिलायें नाचती-गाती हैं. यह सामान्यतः वधु के घर में होता है. लड़के को इसमें नहीं बुलाया जाता पर आजकल लड़के की माँ और बहनें वगैरह इसमें शामिल होने लगीं हैं.
विवाह की रस्में हल्दी-उबटन और मेहंदी से शुरू होती हैं. इसमें वर और वधु को विवाह के लिए आकर्षक निखार दिया जाता है. दोनों को हल्दी व चन्दन आदि का लेप लगाकर घर की महिलायें सुगन्धित जल से स्नान कराती हैं. इसका उद्देश्य यह है कि वे दोनों विवाह के दिन सबसे अलग व सुन्दर दिखें. इसके साथ ही इसमें विवाहोपरांत कायिक इच्छाओं की पूर्ति हो जाने की अभिस्वीकृति भी मिल जाती है. भारत में मेहंदी का आगमन अरब संपर्क से हुआ है. इसके पहले बहुसंख्यक हिन्दू आलता लगाकर अपने हाथ और पैरों को सुन्दर लाल रंग से रंगते थे. आजकल तरह-तरह की मेहंदी के प्रयोग से हाथों-पैरों पर अलंकरण किया जाने लगा है. वर और वधु के परिवार की महिलायें भी अपने को सजाने-संवारने में पीछे नहीं रहतीं.
वर और वधु को तैयार करने के बाद उनसे कहा जाता है कि वे अपने-अपने पितरों-पुरखों का आह्वान करें. यह रस्म विशेषकर वधु के लिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाह के बाद उसे अपने भावी पति के गोत्र में सम्मिलित होना है और अपने कुल की रीतियों को तिलांजलि देनी है.
सभी हिन्दू रीति-रिवाजों में मेहमाननवाज़ी पर बहुत जोर दिया जाता है. मेहमानों का यथोचित स्वागत किया जाता है, उनके चरण छूकर उन्हें नेग या उपहार दिए जाते हैं, और आदरपूर्वक उन्हें विदाई दी जाती है. पूजा के समय देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है, और विसर्जन के पहले भी उनकी पूजा होती है. उनसे निवेदन किया जाता है कि वे अगले वर्ष या अगले सुअवसर पर भी पधारें. विवाह के समय वर अतिथि होता है और हिन्दू परंपरा में अतिथियों को देवता का दर्जा दिया गया है. इसलिए उसका आदरसत्कार देवतातुल्य जानकार किया जाता है और उसे सबसे महत्वपूर्ण उपहार अर्थात वधु सौंप दी जाती है.
भारत के विभिन्न प्रदेशों में विवाह का समय अलग-अलग होता है. दक्षिण में विवाह की रस्में सूर्योदय के निकट पूरी की जाती हैं जबकि पूर्व में यह सब शाम के समय होता है. कागज़ की पोंगरी जैसी निमंत्रण पत्रिका वरपक्ष के घर भेजने के साथ ही विवाह की रस्मों की शुरुआत में तेजी आ जाती है. यह पत्रिका आमतौर पर वधु का भाई लेकर जाता है. ओडिशा में वधु के भाई को वर-धारा कहते हैं – वह, जो वर को घर तक लेकर आता है.
आमंत्रित अतिथिगण और वर का आगमन बारात के साथ होता है. राजपूत दूल्हे अपने साथ तलवार रखते हैं जो कभी-कभी उसकी भावी पत्नी द्वारा उसके लिए चुनी गयी होती है. इससे दो बातों का पता चलता है: यह कि पुरुष तलवार रखने के योग्य है और दूसरी यह कि वह अपनी स्त्री की रक्षा भी कर सकता है. उत्तर भारत में दूल्हे घोड़ी पर सवार होते हैं और उनका चेहरा सेहरे से ढंका होता है ताकि कोई उनपर बुरी नज़र न डाल सके. घोड़े के स्थान पर घोड़ी का प्रयोग यह दर्शाता है कि वह अपनी पत्नी को अपने अधीन रखना चाहता है. यह विचार भी आधुनिक महिलाओं को आपत्तिजनक लग सकता है. भारत के कई स्थानों में दूल्हे के साथियों को जमकर पीने और नाचने का मौका मिल जाता है. कई बाराती बड़े हुडदंगी होते हैं. वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती को बिहाने चले शिव की बारात के सदस्यों की तरह होते हैं. पीना और नाचना एकाकी जीवन की समाप्ति के अंतिम दिनों से पहले उड़ानेवाला मौजमजा है जो जल्द ही पत्नी और घर-गृहस्थी के खूंटे से बाँध दिया जाएगा और फिर उससे यह अपेक्षा नहीं की जायेगी कि वह चाहकर भी कभी मर्यादा तोड़ सके.
दूल्हे के ड्योढी पर आनेपर ससुर और सास उसे माला पहनाकर पूजते हैं. उसका मुंह मीठा किया जाता है, चरण पखारे जाते हैं. कई बार ससुर या उसका श्याला उसे अपनी बांहों में भरकर मंडप या स्टेज तक लेकर जाते हैं. इस बीच पंडित यज्ञवेदी पर अग्नि बढ़ाता है. पूरी प्रथा के दौरान अग्नि ही समस्त देवताओं का प्रतिनिधित्व करती है. वह स्त्री और पुरुष के सुमेल की साक्षी है.

सोमवार, 30 जनवरी 2017

मनचाही संतान के लिए यह अचूक व्रत, आजमाकर देखिए

They're looking for children unmistakable fast, try a look


अगर जातक संतानहीनता की मार से गुजर रहा हो और और सभी कोशिशों के बाद भी संतान के योग नहीं बन पा रहे हों तो केवल एक ही उपाय है। इस खास देव की पूजा-आराधना करके यदि व्रत रखा जाए तो केवल 3 महीनों में ही फल मिल जाएगा और योग्य संतान आपके आंगन में खेलने लगेगी। 
Dharmik, Pauranik, 
धार्मिक
 ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव की आराधना और उन्हें प्रसन्न करने के लिये प्रदोष व्रत का अनुष्ठान किया जाता है। यह व्रत चन्द्र मास की दोनों त्रयोदशी के दिन किया जाता है। एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है। दक्षिण भारत में प्रदोष व्रत को प्रदोषम के नाम से भी जाना जाता है। प्रदोष व्रत से कई दोष की मुक्ति और संकटों का निवारण होता है।

कहते हैं कि प्रदोष व्रत जब सोमवार को आता है तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं। मंगलवार को आने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष और शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को शनि प्रदोष कहते हैं। प्रदोष व्रत अत्यंत फलकारी होता है। संतान प्राप्ति के लिये यह व्रत किया जाता है। 

ग्रंथों के अनुसार केवल तीन महीनों से महादेव के इस व्रत को पूरी शिददत के साथ करने से संतान सुख के योग बनने लगते हैं और सौभाग्य व प्रतिष्ठा में भी बढ़ोत्तरी होती है। प्रदोष व्रत के दिन सूर्य उदय से पूर्व उठकर हो सके तो गंगा स्नान या फिर किसी नदी में स्नान करना चाहिये। अन्यथा घर में ही स्नान करके भगवान शिव की उपासना करना चाहिये।

व्रत में सिर्फ फलाहार करना चाहिये। इसके बाद सूर्यास्त से एक घंटा पहले, स्नान आदि कर श्वेत वस्त्र धारण किया जाता है। ईशान कोण की दिशा में प्रदोष व्रत की पूजा ज्यादा फलदायी होता है। पूजन स्थल को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद, गाय के गोबर से लीपकर, मंडप तैयार किया जाता है। प्रदोष व्रत कि आराधना करने के लिये कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार पूजन क्रिया की तैयारियां कर उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और भगवान शंकर का पूजन करना चाहिए।

रविवार, 29 जनवरी 2017

कभी नहाती नहीं हैं हिम्बा ट्राइब की महिलाएं, फिर भी मानी जाती है सबसे ख़ूबसूरत, जानिये इनसे जुड़े रोचक तथ्य

Interesting Facts

दुनिया में ऐसे कई ट्राइब्स हैं, जिनके काफी अनोखे रिवाज होते हैं। अफ्रीका के नार्थ नामीबिया के कुनैन प्रांत में रहने वाली हिम्बा ट्राइब की महिलाओं को नहाना मना है। फिर भी उन्हें अफ्रीका की सबसे खूबसूरत महिलाएं माना जाता है।


पानी से हाथ भी धोना है मना
कुनैन प्रांत में रहने वाले हिम्बा जनजाति में कुल 20 हजार से 50 हजार लोग हैं। हिम्बा ट्राइब की महिलाओं को अफ्रीका की सबसे खूबसूरत महिलाएं कहा जाता है। लेकिन आपको बता दें, कि इस ट्राइब की महिलाओं को नहाने की इजाजत नहीं है। इतना ही नहीं, ये महिलाएं हाथ तक धोने के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं। हालांकि, खुद को साफ-सुथरा रखने के लिए इन महिलाओं का अपना एक खास तरीका है।


खास हर्ब्स के धुंए का करती हैं इस्तेमाल
हिम्बा जनजाति की महिलाएं नहाने की जगह खास जड़ी-बूटियों को पानी में उबालकर उसके धुंए से अपनी बॉडी को फ्रेश रखती हैं। ताकि उनसे बदबू ना आए। इस हर्ब की खुशबू से इनकी बॉडी कभी ना नहाने के बाद भी अच्छी स्मेल करती है।

बॉडी पर लगाती हैं जानवर की चर्बी से बना लोशन
इस ट्राइब की महिलाएं अपनी स्किन को धूप से बचाने के लिए खास तरह के लोशन का इस्तेमाल करती हैं। ये लोशन जानवर की चर्बी और हैमाटाइट के घोल से तैयार किया जाता है। हैमाटाइट के धुल की वजह से उनके स्किन का रंग लाल हो जाता है। ये खास लोशन उन्हें कीड़ों के काटने से भी बचाता है। इन महिलाओं को रेड मैन के नाम से भी जाना जाता है।


पानी से हाथ तक नहीं धोती हैं ये महिलाएं

पानी की जगह अपनी बॉडी पर खास तरह का पेस्ट लगाती हैं महिलाएं

हिम्बा ट्राइब की महिलाओं की गिनती अफ्रीका की सबसे खूबसूरत महिलाओं में की जाती है

लेकिन इनके अजीबोगरीब तरीकों की वजह से दुनिया की नजर में आई थीं यहां की महिलाएं

नहाने की जगह खास हर्ब्स के धुंए से अपनी बॉडी को महकाती हैं ये महिलाएं

हेमटाइट डस्ट और जानवर की चर्बी से बना पेस्ट अपनी बॉडी पर लगाती हैं महिलाएं

इस पेस्ट की वजह से इनकी बॉडी का रंग लाल हो जाता है

ये पेस्ट महिलाओं को धूप और कीड़ों के काटने से बचाता है

शनिवार, 28 जनवरी 2017

समुद्र शास्त्र के अनुसार आपकी हंसी भी बताती है आपका नेचर


Interesting Facts
According to scripture also tells you your laugh ocean Nature


हंसना मनुष्य का स्वभाविक गुण है। हंसने से न सिर्फ खून बढ़ता है बल्कि इंसान की उम्र भी बढ़ती है। हर मनुष्य के हंसने का तरीका दूसरे से भिन्न होता है। कोई जोर से हंसता है तो कोई मंद-मंद मुस्कुराता है। समुद्र शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के हंसने के तरीके पर गौर किया जाए तो उसके स्वभाव के बारे में काफी कुछ जाना जा सकता है। इसी ग्रंथ के अनुसार आज हम आपको बता रहे हैं मनुष्य की हंसी के अनुरूप उसका नेचर कैसा हो सकता है।



खिलखिलाकर हंसने वाले लोग सहनशील, दयालु, सभी का अच्छा सोचने वाले तथा पढाई-लिखाई में आगे होते हैं। ऐसे लोग किसी को धोखा नहीं देते तथा अच्छे प्रेमी होते हैं।


ठहाका मारकर ऊंचे स्वर में हंसने वाले लोग अपने जीवन में सफल होते हैं। यदि ऐसी हंसी के साथ चेहरा व्यंगपूर्ण हो तो उनमे अहंकार की भावना भी होती है।

रुक-रुक कर हंसने या एक ही विषय पर कुछ देर बाद तक हंसने वाले लोगों की मानसिक शक्ति कमजोर होती है। ऐसे लोग हर काम में असफल रहते हैं।


जिन लोगों की मुस्कान शांत होती है वे अपने मन की प्रसन्नता को व्यक्त करते है तथा गंभीर, धैर्यवान, शांतिप्रिय, विश्वासी, ज्ञानी एवं स्थिर प्रवति के होते हैं।

घोड़े के समान हिनहिना कर हंसने वाले लोग धूर्त, अहंकारी, कपटी तथा निक्कमे होते हैं। ये लोगों का फायदा उठाने में माहिर होते हैं। इन पर आसानी से विश्वास नहीं किया जा सकता।