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शुक्रवार, 24 मार्च 2017

ये है दुनिया के 5 सबसे रहस्मय खजाने, जो भी खोजने गया वो वापस नहीं आया



ये है दुनिया के 5 सबसे रहस्मय खजाने, जो भी खोजने गया वो वापस नहीं आया



दुनिया के सबसे हॉन्टेट प्लेसेज में शुमार 5 पांच ऐसी जगहें हैं जहां अकूत खजाने भरे पड़े हैं, लेकिन ये बेहद डरावने हैं। माना जाता है कि इन रहस्यमय खजानों को खोजने में कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके अलावा कई लोगों को खजाने का कुछ हिस्सा भी मिला, लेकिन वो जिंदा नहीं लौट सके।



द अंबेर रूम का निर्माण 1707 ईस्वी में पर्सिया में किया गया था। यह एक पूरी तरह से एक सोने का चेंबर है। 1941 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नाजियों ने इस पर कब्जा कर लिया था। इस खजाने को सुरक्षित रखने के लिए इसे अलग-अलग भागों में बांट दिया। इसके बाद 1943 में इसे एक म्यूजियम में प्रदर्शन के लिए रखा गया। लेकिन आश्चर्य तो यहां है कि उसके बाद ये पूरा चेंबर ही गायब हो गया। इसके बाद आज तक चेंबर का पता नहीं चला और जो इसकी तलाश में गए उनकी मौत हो गई।..

ओक आइलैंड (oak island) के रहस्य को सबसे 1795 में कुछ लड़कों द्वारा उजागर किया गया था। इन लड़कों को कनाडा के नोवा स्कोटिया तट के पास एक छोटे से द्वीप पर हल्की रोशनी दिखी थी। इसके बाद जब ये वहां पहुंचे तो उन्होंने पाया कि किसी ने यहां खुदाई की है। इसके बाद जब इन्हीं लड़कों ने वहां और खुदाई की तो उन्हें लकड़ी और नारियल की परतें मिली। इन लड़कों को यहां एक पत्थर भी मिला जिस पर लिखा था कि 40 फीट की गहराई पर दो मिलियन पाउंड गड़े हैं। इसके बाद बहुत से लोगों ने इस खजाने को खोजने के कोशिश की और आज भी खोज कर रहे हैं, लेकिन किसी को अभी तक कुछ नहीं मिला। बल्कि खजाना खोजते समय अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है।...

अमरीका के दक्षिण-पश्चिम इलाके में सोने की खदान (the lost dutchman mine) थी। 1510-1524 के बीच स्पेन के फ्रांसिस्को वास्क डी कोरोनाडो ने इस खदान को खोजने की कोशिश की। इस खजाने को खोजने के लिए उन्होंने जिन लोगों को इस काम में लगाया उनकी एक के बाद एक मौत हो गई। हालांकि यहां 1845 में डॉन मिगुएल पेराल्टा को कुछ सोना मिला, लेकिन स्थानीय अपाचे आदिवासियों ने उनको मौत के घाट उतार डाला। 1931 में इसी खजाने को खोजने के चक्कर में एडोल्फ रूथ लापता हो गए और इसके 2 साल बाद उनका कंकाल मिला था। 2009 में भी डेनवर निवासी जेस केपेन ने यह खजाना खोजने की कोशिश की थी लेकिन 2012 में उनका शव मिला।

मैक्सिको के राष्टपति बेनिटो जुआरेज ने 1864 अपने सैनिकों को खजाने के साथ सेन फ्रांसिस्को भेजा था। इसमें सोने के सिक्के और कीमती जेवरात भरे थे। इसके बाद एक सैनिक की रास्ते मौत हो गई तो बाकी सैनिकों इस खजाने को रास्ते में ही गाड़ दिया। सैनिकों को ऐसा करते हुए डियागो मोरेना ने देख लिया था और उसने बाद में इस खजाने को निकाला और दूसरी जगह गाड़ दिया। लेकिन इसके कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि डियागो की मौत के बाद एक दोस्त जीसस मार्टिनेज ने इस खजाने को पाना चाहा लेकिन उसकी भी मौत हो गई। 1885 में बास्क शेफर्ड को इस खजाने का कुछ हिस्सा मिला था, लेकिन वो ही बाद में उसकी मौत का कारण बना। इसके बाद 1939 में इस खजाने की खुदाई की गई, लेकिन कुछ भी नहीं मिला। इस खजाने को खोजने के वालों में से 9 लोगों की मृत्यु हो गई।


अमरीका में मिलफोर्ड के पास एक छोटा द्वीप (charles island) है। लेकिन इस द्वीप को शापित माना जाता है। कहा जाता है कि 1721 में मैक्सिकन सम्राट गुआजमोजिन का खजाना चोरी कर चोरों ने इस द्वीप पर छुपा दिया था। इसके बाद 1850 में कुछ लोग यहां पर खजाने की तलाश में आए लेकिन उनकी भी मौत हो गई। इसके बाद जो भी इस खजाने को खोजने गया उसकी मौत हो गई।






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गुरुवार, 23 मार्च 2017

These miraculous signs are indicative of receipts

धनप्राप्ति के संकेत देते है ये चमत्कारी लक्षण

प्रकृति कई बार धनप्राप्ति के संकेत देती है लेकिन हम उनको प्रहचान नहीं पाते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे ही संकेतों के बारे में जो लक्ष्मी (धन) आगमन के बारे में हमें पहले से ही सूचित कर देते हैं।

1- अगर आपके शरीर के दाहिने भाग में या सीधे हाथ में लगातार खुजली हो, तो समझ लेना चाहिए कि आपको धन लाभ होने वाला है।
2- यदि कोई सपने में देखे कि उस पर कानूनी मुकदमा चलाया जा रहा है, जिसमें वह निर्दोष छूट गया है, तो उसे अतुल धन संपदा की प्राप्ति होती है।
3- लेन-देन के समय यदि पैसा आपके हाथ से छूट जाए, तो समझना चाहिए कि धन लाभ होने वाला है।
4- जो व्यक्ति सपने में मोती, मूंगा, हार, मुकुट आदि देखता है, उसके घर में लक्ष्मी स्थाई रूप से निवास करती है।

5- जिसे स्वप्न में कुम्हार घड़ा बनाता हुआ दिखाई देता है, उसे बहुत धन लाभ होता है।
6- दीपावली के दिन यदि कोई किन्नर संज-संवर कर दिखाई दे, तो अवश्य ही धन लाभ होता है। ये धन लाभ अप्रत्याशित रूप से होता है।
7- सोकर उठते ही सुबह-सुबह कोई भिखारी मांगने आ जाए, तो समझना चाहिए कि आपके द्वारा दिया गया पैसा (उधार) बिना मांगे ही मिलने वाला है। इसलिए भिखारी को अपने द्वार से कभी खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।
8- यदि कोई सपने में स्वयं को कच्छा पहनकर कपड़े में बटन लगाता देखता है, तो उसे धन के साथ मान-सम्मान भी मिलता है।

9- यदि कोई स्वप्न में किसी को चेक लिखकर देता है, तो उसे विरासत में धन मिलता है तथा उसके व्यवसाय में भी वृद्धि होती है।
10- गुरुवार के दिन कुंवारी कन्या पीले वस्त्रों में दिख जाए, तो इसे भी शुभ संकेत मानना चाहिए। ये भी धन लाभ होने के संकेत है।
11- अगर आप धन संबंधित काम के लिए कहीं जाने के लिए कपड़े पहन रह हैं और उसी समय आपकी जेब से पैसे गिरें, तो यह आपके लिए धन प्राप्ति का संकेत है।
12- यदि कोई सपने में दियासलाई जलाता है, तो उसे अनपेक्षित रूप से धन की प्राप्ति होती है।

9- यदि कोई स्वप्न में किसी को चेक लिखकर देता है, तो उसे विरासत में धन मिलता है तथा उसके व्यवसाय में भी वृद्धि होती है।
10- गुरुवार के दिन कुंवारी कन्या पीले वस्त्रों में दिख जाए, तो इसे भी शुभ संकेत मानना चाहिए। ये भी धन लाभ होने के संकेत है।
11- अगर आप धन संबंधित काम के लिए कहीं जाने के लिए कपड़े पहन रह हैं और उसी समय आपकी जेब से पैसे गिरें, तो यह आपके लिए धन प्राप्ति का संकेत है।
12- यदि कोई सपने में दियासलाई जलाता है, तो उसे अनपेक्षित रूप से धन की प्राप्ति होती है।

17- जो व्यक्ति सपने में फल-फूलों का भक्षण करता है, उसे धन लाभ होता है। जो स्वप्न में ध्रुमपान करता है, उसे भी धन प्राप्ति होती है।
18- कुत्ता यदि अचानक धरती पर अपना सिर रगड़े और यह क्रिया बार-बार करे तो उस स्थान पर गढ़ा धन होने की संभावना होती है।
19- यदि यात्रा करते समय किसी व्यक्ति को कुत्ता अपने मुख में रोटी, पूड़ी या अन्य कोई खाद्य पदार्थ लाता दिखे, तो उस व्यक्ति को धन लाभ होता है।
20- यदि कोई यात्री घर को लौट रहा हो और गधा उसके बाईं ओर रेंके तो उसे थोड़े समय बाद धन लाभ होता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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बुधवार, 22 मार्च 2017

लाल किताब के 13 टोटके, उपाय करते ही दिखता है असर



लाल किताब के 13 टोटके, उपाय करते ही दिखता है असर


व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे सभी कर्मों का फल उसके भाग्य के रूप में मिलता है। अच्छे कर्मों पर अच्छा तथा बुरे कर्मों पर बुरा भाग्य बनता है। हालांकि ज्योतिष के कुछ विशेष उपायों (तांत्रिक टोने-टोटकों सहित) को अपना कर व्यक्ति अपने भाग्य में कुछ हद तक परिवर्तन कर सकता है परन्तु पूरी तरह बदलना केवल ईश्वर कृपा और अच्छे कर्मों से ही संभव हो पाता है। इस पोस्ट में हम आपके लिए लाएं हैं ऐसे ही कुछ विशेष टोने-टोटके जो आपके भाग्य को पूरी तरह तो नहीं बदल सकते परन्तु आपकी समस्या का तुरंत निराकरण अवश्य कर देंगे, 


रोगों से मुक्ति पाने के लिए

(1) कोई असाध्य रोग हो जाए तथा दवाईयां काम करना बंद कर दें तो पीडि़त व्यक्ति के सिरहाने रात को एक तांबे का सिक्का रख दें तथा सुबह इस सिक्के को किसी श्मशान में फेंक दें। दवाईयां असर दिखाना शुरू कर देंगी और रोग जल्दी ही दूर हो जाएगा।
(2) यदि व्यक्ति चिड़चिढ़ा हो रहा है तथा बात-बात पर गुस्सा हो रहा है तो उसके ऊपर से राई-मिर्ची उसार कर जला दें। तथा पीडि़त व्यक्ति को उसे देखते रहने के लिए कहें।
(3) सुबह कुल्ला किए बिना पानी, दूध अथवा चाय न पिएं। साथ ही उठते ही सबसे पहले सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों के दर्शन करें। इससे स्वास्थ्य तो सही रहेगा ही, भाग्य भी चमक उठेगा।
(4) यदि किसी के साथ बार-बार दुर्घटना होती हैं तो शुक्ल पक्ष (अमावस्या के तुरंत बाद का पहला) के प्रथम मंगलवार को 400 ग्राम दूध से चावल धोकर बहती नदी अथवा झरने में प्रवाहित करें। यह उपाय लगातार सात मंगलवार करें, दुर्घटना होना बंद हो जाएगा।
(5) यदि कोई पुराना रोग ठीक नहीं हो रहा हो तो गोमती चक्र को लेकर एक चांदी की तार में पिरोएं तथा पलंग के सिरहाने बांध दें। रोग जल्दी ही पीछा छोड़ देगा।
(6) सूर्य जब मेष राशि में प्रवेश करें तो नीम की नवीन कोपलें, गुड़ व मसूर के साथ पीस कर खाने से व्यक्ति पूरे वर्ष निरोग तथा स्वस्थ रहता है।

धन की प्राप्ति के लिए

(1) सोमवार को शिव-मंदिर में जाकर दूध मिश्रित जल शिवलिंग पर चढ़ाएं तथा रूद्राक्ष की माला से 'ऊँ सोमेश्वराय नम:' का 108 बार जप करें। साथ ही पूर्णिमा को जल में दूध मिला कर चन्द्रमा को अध्र्य देकर व्यवसाय में उन्नति की प्रार्थना करें, तुरन्त ही असर दिखाई देगा।
(2) यदि बेहद कोशिशों के बाद भी घर में पैसा नहीं रूकता है तो एक छोटा सा उपाय करें। सोमवार या शनिवार को थोड़े से गेहूं में 11 पत्ते तुलसी तथा 2 दाने केसर के डाल कर पिसवा लें। बाद में इस आटे को पूरे आटे में मिला लें। घर में बरकत रहेगी और लक्ष्मी दिन दूना रात चौगुना बढऩे लगेगी।
(3) घर में लक्ष्मी के स्थाई वास के लिए एक लोहे के बर्तन में जल, चीनी, दूध व घी मिला लें। इसे पीपल के पेड़ की छाया के नीचे खड़े होकर पीपल की जड़ में डाले। इससे घर में लक्ष्मी का स्थाई वास होता है।
(4) घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए एक मिट्टी के सुंदर से बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के लाल कपड़े में बांधकर रखें। इसके बाद बर्तन को गेहूं या चावल के भर कर घर के वायव्य (उत्तर-पश्चिम) कोने में रख दें। ऐसा करने से घर में धन का कभी कोई अभाव नहीं रहेगा।


ससुराल में सुखी रहने के लिए

(1) साबुत काले उड़द में हरी मेहंदी मिलाकर जिस दिशा में वर-वधू का घर हो, उस और फेंक दें, दोनों के बीच परस्पर प्रेम बढ़ जाएगा और दोनों ही सुखी रहेंगे।
(2) यदि कन्या 7 साबुत हल्दी की गांठें, पीतल का एक टुकड़ा, थोड़ा सा गुड लेकर ससुराल की तरफ फेंक दें तो वह कन्या को ससुराल में सुख ही सुख मिलता है।
(3) शादी के बाद जब कन्या विदा हो रही हो तो एक लोटे में गंगाजल, थोड़ी सी हल्दी, एक पीला सिक्का लेकर कन्या के सिर के ऊपर से 7 बार उसार कर उसके आगे फेंक दें। उसका वैवाहिक जीवन सदा सुखी रहेगा। 











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गुरुवार, 16 मार्च 2017

इन चीजों का दान करना चाहिए

इन चीजों का दान करना चाहिए

दान के तीन प्रकार बताये गए हैं। निःस्वार्थ भाव से बिना किसी लोभ-लालच के किया गया दान सात्विक, फल प्राप्ति की आशा से किया गया दान राजस तथा श्रद्धा भाव के बिना कुपात्र को किया गया दान तामस प्रकृति का होता है। तीनों प्रकार के दान में सात्विक दान सर्वश्रेष्ठ होता है। वैसे तो दान कहीं भी और किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु धार्मिक एवं तीर्थस्थल, मंदिर, गौशाला, गुरुद्वारा, पूजा या धर्मस्थल आदि पर दान देना विशेष शुभ माना गया है। क्योंकि इन स्थानों पर मन एवं ह्रदय के इष्टदेव में रम जाने से अहंभाव नहीं आता हा जो कि दान की सार्थकता के लिए आवश्यक है।




दान के लिए उचित अवसर की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। जब भी ह्रदय में दान की भावना जागृत हो, तत्काल उसे पूरा करना चाहिए। परिवार में किसी नए सदस्य का जन्म होने, जन्म दिवस या विवाह समारोह होने, पूर्णिमा, संक्रांति, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, त्रयोदशी संस्कार अथवा श्राद्ध कर्म के समय किया गया दान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है।

मृत्यु का आभास होने पर भी किया दान इहलोक के साथ परलोक के लिए भी कल्याणकारी माना गया है। दान हमेशा सुपात्र को ही दिया जाना चाहिए। कुपात्र एवं अयोग्य व्यक्ति को अशुभ फल देने वाला होता है। विद्वान, वेदपाठी, धर्मनिष्ठ, सत्यनिष्ठ और सांसारिक विरक्त व्यक्ति क पूर्ण श्रद्धा के साथ सां करने से दान का प्रभाव और फल कई गुना अधिक सार्थक हो जाता है।




किसी जरूरतमंद, भूख-प्यास से व्याकुल याचक को उसकी ज़रुरत के अनुसार कोई उपयोगी वास्तु, वस्त्र, खाद्यान, भोजन आदि का दान भी शुभ माना गया है। नवग्रहों उस ग्रह से संबंधित वार क करना अधिक शुभ है। दान रविवार क, चंद्र का सोमवार को, मंगल मंगलवार को, बुध का बुधवार को, गुरु का ,शुक्र का शुक्रवार को तथा शनि ग्रह शनिवार को ही करना चाहिए। नवग्रहों के अशुभ प्रभाव को शुभ करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में अशुभ ग्रहों से संबंधित वस्तुओं का दान किया जा सकता है।

वस्तुओं का दान करते समय कुछ धन भी श्रद्धापूर्वक देना चाहिए। सूर्य ग्रह के लिए लाल-पीला वस्त्र, गेहूं, तांबा, माणिक्य, मसूर की दाल, लाल पुष्प या फल, लाल चंदन, स्वर्ण आदि का दान किया जा सकता है। चंद्र के लिए श्वेत वस्त्र, दूध, दही, शंख, मोती, चांदी, चीनी, चावल, मंगल के लिए स्वर्ण, गुड़, सिंदूरी वस्त्र, मूंगा, लाल मिठाई लाल मसूर, लाल गेहूं, तांबा, रक्त चंदन, बुध के लिए स्वर्ण, पन्ना, कांसा, हरा वस्त्र, हरा फल, हरी मूंग, और गुरु ग्रह के लिए पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, पुखराज या सुनैला, धान, गौघृत, धार्मिक पुस्तक, स्वर्ण, शहद आदि का दान किया जा सकता है




इसी तरह शुक्र गृह का दोष निवारण करने के लिए चावल, घी, हीरा, कपूर, चीनी, मिश्री, दही, श्वेत चंदन, श्वेत वस्त्र, शनि के लिए काला वस्त्र, साबुत उरद की दाल, लोहा, काले चने, काले फल, नीलम, भैंसा, काले तिल, सरसों का तेल, काला कंबल जूते, राहु के लिए तलवार, गौमेद, लोहा, कंबल, स्वर्ण मिश्रित नाग, तांबे का बर्तन, काली सरसों, राई, शीशा केतु के लिए सात प्रकार के अनाज, काजल, स्वर्ण, चांदी या तांबे का सर्प, लहसुनिया रत्न, मिठाई, कस्तूरी, ऊनी वस्त्र आदि का दान किया जा सकता है।





शनिवार, 11 मार्च 2017

गर्भवती महिलाओं को किन जगहों पर नहीं जाना चाहिए?


गर्भवती महिलाओं को किन जगहों पर नहीं जाना चाहिए?


गर्भवती महिला को बच्चे के जन्म से पहले अनेक सावधानियां रखनी होती हैं। जिससे बच्चे के जन्म के बाद जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ्य रहें। इसलिए हमारे यहां बच्चे के जन्म के पूर्व की भी अनेक परंपराएं हैं जिनका गर्भवती महिला को पालन करना होता है। ऐसी ही एक परंपरा है कि गर्भवती स्त्री को सातवें महीने के बाद नदी व नाले पार नहीं करना चाहिए या उनके पास नहीं जाना चाहिए ताकि माता और उसके गर्भ में पल रहा शिशु दोनों की सुरक्षा और सेहत अच्छी बनी रहे।


आजकल के अधिकांश लोग इस परंपरा का पालन नहीं करते हैं, क्योंकि वे इसे सिर्फ अंधविश्वास मानते हैं। मगर ये मान्यता अंधविश्वास नहीं है। दरअसल, इसके पीछे कुछ कारण छुपे हैं। ऐसा माना जाता है कि नदी और नाले जैसे जो क्षेत्र रहते हैं वहां नकारात्मक ऊर्जा का निवास होता है। इसलिए श्मशान भी नदी के किनारे बनाए जाते हैं और ऐसे स्थानों पर ही तंत्र साधना की जाती है।जब कोई स्त्री गर्भवती होती है तो उसके शरीर में बहुत सारे परिवर्तन होते हैं। उनका शरीर सामान्य से अधिक संवेदनशील होता है।

ऐसे में नदी या नाले को पार करने से या उनके पास जाने से होने वाले बच्चे पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा इसका एक अन्य कारण यह भी है कि एक बार जब गोद भराई करके होने वाले शिशु की मां को मायके भेज दिया जाता है तो वो वहां अच्छे से आराम करे और यात्राएं ना करे ताकि होने वाली संतान स्वस्थ्य हो क्योंकि सातवे महीने के बाद गर्भवती महिलाओं को यात्रा करने पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।


एक ही गौत्र में क्यों नहीं करते हैं शादी?


हिंदू धर्म में शादी से पहले गौत्र मिलान और कुंडली मिलान की भी परंपरा है कुछ लोग इस प्रथा को अंधविश्वास मानकर टाल देते हैं तो कुछ लोग इसे सही मानते हैं। दरअसल, यह कोई अंधविश्वास नहीं है। इसके पीछे धार्मिक कारण ये है कि एक ही गौत्र या कुल में विवाह होने पर दंपत्ति की संतान अनुवांशिक दोष के साथ पैदाहोती है।

ऐसे दंपत्तियों की संतान में एक सी विचारधारा, पसंद, व्यवहार आदि में कोई नयापन नहीं होता। ऐसे बच्चों में रचनात्मकता का अभाव होता है। विज्ञान द्वारा भी इस संबंध में यही बात कही गई है कि सगौत्र शादी करने पर अधिकांश ऐसे दंपत्ति की संतानों में अनुवांशिक दोष यानी मानसिक विकलांगता, अपंगता, गंभीर रोग आदि जन्मजात ही पाए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार इन्हीं कारणों से सगौत्र विवाह पर प्रतिबंध लगाया था।



दुल्हन के लिए लाल रंग ही खास क्यों?

हिंदू शादियों में दूल्हा-दुल्हन को काले कपड़े नहीं पहनने दिए जाते हैं, क्योंकि ये मान्यता है कि काला रंग अशुभ होता है। दुल्हन की हर चीज में लाल रंग को अधिक महत्व दिया जाता है। अधिकतर लोग इसे अंधविश्वास मानकर इस बात को नहीं मानते हैं, क्योंकि आजकल अनेक रंगो के वेडिंग ड्रेस फैशन में है इसलिए शादी में दूल्हा- दुल्हन और उनके रिश्तेदार भी इस बात को अंधविश्वास मानकर टाल देते हैं।

लेकिन ज्योतिष के अनुसार भी शुभ काम व शादी में लाल, पीले और गुलाबी रंगों को अधिक मान्यता दी जाती है, क्योंकि लाल रंग सौभाग्य का प्रतीक है। इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य यह है कि लाल रंग ऊर्जा का स्त्रोत है। साथ ही, ये सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है। इसके विपरीत जब नीले, भूरे और काले रंगों की मनाही करते हैं क्योंकि ये रंग नैराश्य का प्रतीक है और ऐसी भावनाओं को शुभ कामों में नहीं आने देना चाहिए। जब पहले ही कोई नकारात्मक विचार मन में जन्म ले लेंगे तो रिश्ते का आधार मजबूत नहीं हो सकता। इसलिए शादी में दुल्हन के लिए लाल रंग खास माना गया है।



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शुक्रवार, 10 मार्च 2017

पति से प्रेम करने वाली महिलाएं इन 4 कार्यों को करने से बचें

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1. गरुड़ पुराण के नियम
इसमें कोई संदेह नहीं है कि हिन्दू ग्रंथ एवं शास्त्रों में मनुष्य के जानने योग्य काफी जानकारी उल्लिखित है। यदि मनुष्य चाहे तो इस प्रत्येक जानकारी को अपने जीवन में अमल कर सफलता के कदम चूम सकता है। जीवन को सही मार्ग दिखाने से लेकर सुख-शांति भी दिलाती हैं शास्त्रों की ये बातें।

2. पत्नियों के लिए नियम



आज हम आपको गरुड़ पुराण की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी से परिचित कराने जा रहे हैं। यह जानकारी विशेष तौर से उन महिलाओं के लिए है जो विवाहित हैं और अपने पति के प्रति कुछ कर्तव्य निभाने की आस्था रखती हैं।

3. गरुड़ पुराण में दर्ज नियम



हम आपको गरुड़ पुराण में दर्ज कुछ विशेष नियम बताने जा रहे हैं जिन्हें हर महिला को अपने वैवाहिक जीवन पर लागू करना चाहिए, ताकि उन्हें पति का सम्पूर्ण प्रेम एवं सम्मान हासिल हो सके और दोनों का वैवाहिक जीवन सुखी बीते।

4. पति या प्रेमी से अधिक दूर ना रहें



गरुड़ पुराण के अनुसार एक पत्नी को अपने पति से या एक प्रेमिका को अपने प्रेमी से अधिक दिनों तक दूर नहीं रहना चाहिए। क्योंकि जीवनसाथी से दूरी स्त्री को मानसिक रूप से कमजोर बनाती है।

5. अधिक दूरी ना बनाये



पति और पत्नी दोनों ही एक-दूजे के लिए समर्पित रहते हैं, दोनों के लिए यह साथ बेहद महत्वपूर्ण है। एक-दूसरे से दूर रहना उनके लिए सामाजिक परेशानियां भी उत्पन्न करता है। इसी तरह से प्रेमी-प्रेमिका के रिश्ते को भी मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों का साथ बेहद आवश्यक है।


6. बुरे चरित्र के लोगों से बचें



स्त्रियों को ऐसे लोगों से सम्पर्क या मित्रता नहीं बनानी चाहिए जिनका चरित्र बुरा हो, क्योंकि ‘सेब के ढेर में पड़ा एक खराब सेब, बाकी सभी सेबों को भी खराब कर देता है’। बुरे व्यक्ति के स्वभाव का असर उस महिला पर भी हो जाता है।

7. ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में ना आए



इसके अलावा ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में ना आए जो आपके पति के विरुद्ध हो। जो आपके पति के बारे में बुरा बोलता हो, उसकी निंदा करता हो और उसे हानि पहुंचाने की भी कोशिश करे। ऐसे लोगों की बुरी नीयत को पहचानकर उनसे दूरी बनाना ही पत्नी के लिए सही है।

8. अपनों का तिरस्कार ना करें



मीठा बोलने वाली और सबका भला सोचने वाली स्त्री ही गुणी स्त्री कहलाती है और ऐसी ही स्त्री की ओर आकर्षित होते हैं पुरुष। लेकिन कई बार अपनों की बातों के चलते जब ठेस पहुंचती है तो मुख से कटु वचन आना स्वाभाविक है। परंतु जो स्त्री खुद के क्रोध पर नियंत्रण करती है वही समाज में मिसाल कायम करती है।

9. पराए घर में ज्यादा देर ना ठहरें



अपना घर अपना ही होता है और वहीं रहने से सबसे अधिक सम्मान प्राप्त होता है। यह केवल कहने वाली बात नहीं है, बल्कि सामाजिक रूप से जांच-परखा उदाहरण है। इसलिए कहते हैं कि एक स्त्री को पराए घर में अधिक समय नहीं रहना चाहिए।

10. मान-सम्मान



जो मान-सम्मान वह अपने घर में पाती है, जिस प्रकार की जायज स्वतंत्रता उसे अपने घर में है, वह उसे पराए घर में कभी हासिल नहीं होगी। इसके अलावा पराए घर में अधिक रुकने से समाज में वह निंदा की पात्र भी बनती है।

बुधवार, 8 मार्च 2017

होली दहन की लपट बताती है, कैसा रहेगा आने वाला


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शकुन शास्त्र में होलिका दहन के समय वायु प्रवाह की दिशा से जन जीवन पर पडने वाले प्रभावों का फलित निर्णय किया जाता है तथा आगामी वर्ष कैसा रहेगा, इसका निष्कर्ष भी निकाला जाता है।

दिशा के अनुसार होली की लौ (झल) का फलाफल शकुन शास्त्र में इस प्रकार बताया गया है।

पूर्व दिशा की ओर - सुखद
आग्नेय की ओर - आगजनी कारक
दक्षिण दिशा की ओर - दुर्भिक्ष एवं पशु पीडाकारक
नैऋत्य - फसल हानि
पश्चिम - सामान्यतया तेजीप्रद
वायव्य - चक्रवात, पवनवेग, आंधीकारक
उत्तर एवं ईशान कोण में - मेघगाज, अच्छी बारिश की सूचक

चारों दिशाओं में धूमने पर - संकट का परिचायक। होली की झल ऊंचे आकाश को जाए तथा वायु शांत हो तो उत्पाद सूचक है। यदि इस दिन मेघ गाज, बारिश, आंघी तथा तेज वायु वेग हो, तो आगामी वर्ष में धन-धान्य, गल्ला, कार्य व्यवसाय तथा व्यापार में लाभ होता है।



मंगलवार, 7 मार्च 2017

भीम में कैसे आया 10 हज़ार हाथियों का बल?





भीम में कैसे आया 10 हज़ार हाथियों का बल?




पाण्डु पुत्र भीम के बारे में माना जाता है की उसमे दस हज़ार हाथियों का बल था जिसके चलते एक बार तो उसने अकेले ही नर्मदा नदी का प्रवाह रोक दिया था।  लेकिन भीम में यह दस हज़ार हाथियों का बल आया कैसे इसकी कहानी बड़ी ही रोचक है।
कौरवों का जन्म हस्तिनापुर में हुआ था जबकि पांचो पांडवो का जन्म वन में हुआ था।  पांडवों के जन्म के कुछ वर्ष पश्चात पाण्डु का निधन हो गया। पाण्डु की मृत्यु के बाद वन में रहने वाले साधुओं ने विचार किया कि पाण्डु के पुत्रों, अस्थि तथा पत्नी को हस्तिनापुर भेज देना ही उचित है। इस प्रकार समस्त ऋषिगण हस्तिनापुर आए और उन्होंने पाण्डु पुत्रों के जन्म और पाण्डु की मृत्यु के संबंध में पूरी बात भीष्म, धृतराष्ट्र आदि को बताई। भीष्म को जब यह बात पता चली तो उन्होंने कुंती सहित पांचो पांण्डवों को हस्तिनापुर बुला लिया।
How to get Bheema 1000 Elephants Power
हस्तिनापुर में आने के बाद पाण्डवों केवैदिक संस्कार सम्पन्न हुए। पाण्डव तथा कौरव साथ ही खेलने लगे। दौडऩे में, निशाना लगाने तथा कुश्ती आदि सभी खेलों में भीम सभी धृतराष्ट्र पुत्रों को हरा देते थे। भीमसेन कौरवों से होड़ के कारण ही ऐसा करते थे लेकिन उनके मन में कोई वैर-भाव नहीं था। परंतु दुर्योधन के मन में भीमसेन के प्रति दुर्भावना पैदा हो गई। तब उसने उचित अवसर मिलते ही भीम को मारने का विचार किया।
दुर्योधन ने एक बार खेलने के लिए गंगा तट पर शिविर लगवाया। उस स्थान का नाम रखा उदकक्रीडन। वहां खाने-पीने इत्यादि सभी सुविधाएं भी थीं। दुर्योधन ने पाण्डवों को भी वहां बुलाया। एक दिन मौका पाकर दुर्योधन ने भीम के भोजन में विष मिला दिया। विष के असर से जब भीम अचेत हो गए तो दुर्योधन ने दु:शासन के साथ मिलकर उसे गंगा में डाल दिया। भीम इसी अवस्था में नागलोक पहुंच गए। वहां सांपों ने भीम को खूब डंसा जिसके प्रभाव से विष का असर कम हो गया। जब भीम को होश आया तो वे सर्पों को मारने लगे। सभी सर्प डरकर नागराज वासुकि के पास गए और पूरी बात बताई।
तब वासुकि स्वयं भीमसेन के पास गए। उनके साथ आर्यक नाग ने भीम को पहचान लिया। आर्यक नाग भीम के नाना का नाना था। वह भीम से बड़े प्रेम से मिले। तब आर्यक ने वासुकि से कहा कि भीम को उन कुण्डों का रस पीने की आज्ञा दी जाए जिनमें हजारों हाथियों का बल है। वासुकि ने इसकी स्वीकृति दे दी। तब भीम आठ कुण्ड पीकर एक दिव्य शय्या पर सो गए।
जब दुर्योधन ने भीम को विष देकर गंगा में फेंक दिया तो उसे बड़ा हर्ष हुआ। शिविर के समाप्त होने पर सभी कौरव व पाण्डव भीम के बिना ही हस्तिनापुर के लिए रवाना हो गए। पाण्डवों ने सोचा कि भीम आगे चले गए होंगे। जब सभी हस्तिनापुर पहुंचे तो युधिष्ठिर ने माता कुंती से भीम के बारे में पूछा। तब कुंती ने भीम के न लौटने की बात कही। सारी बात जानकर कुंती व्याकुल हो गई तब उन्होंने विदुर को बुलाया और भीम को ढूंढने के लिए कहा। तब विदुर ने उन्हें सांत्वना दी और सैनिकों को भीम को ढूंढने के लिए भेजा।
उधर नागलोक में भीम आठवें दिन रस पच जाने पर जागे। तब नागों ने भीम को गंगा के बाहर छोड़ दिया। जब भीम सही-सलामत हस्तिनापुर पहुंचे तो सभी को बड़ा संतोष हुआ। तब भीम ने माता कुंती व अपने भाइयों के सामने दुर्योधन द्वारा विष देकर गंगा में फेंकने तथा नागलोक में क्या-क्या हुआ, यह सब बताया। युधिष्ठिर ने भीम से यह बात किसी और को नहीं बताने के लिए कहा।















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सोमवार, 6 मार्च 2017

हर काम में सफलता पाने के लिए करें ये पांच काम



जीवन में कई बार ऐसे कुयोग बनने लगते हैं कि कोई भी काम चाहकर भी पूरे नहीं हो पाते। सभी कामों में पूर्णता और सफलता पाने के लिए घर से निकलने से पहले अगर ये पांच काम कर लिए जाएं तो सफलता आपके कदम चूम सकती है।

घर से शुभ कार्य के लिए बाहर निकल रहे हों तो थोडा गुड खाकर पानी पीना शुभ होता है। इससे कार्य में बाधा नहीं आती और जिस कार्य के लिए बाहर जा रहे है वह पूरा हो जाता है।


शुभ कार्य के लिए घर से बाहर निकलते वक़्त 2 मिनट का समय निकाल कर घर के मंदिर या भगवान की मूर्ति के सामने माथा जरुर टेके। इससे कार्य में बाधाएं नहीं आती और कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होता है।

शुभ कार्य के लिए घर से निकलने से पहले एक बर्तन में पक्षियों के लिए दाना पानी निकाल कर रख दे या किसी गाय या कुत्ता जो भी जीव दिखे उसको रोटी खिलाकर बाहर निकलने से कार्य पूर्ण होने के साथ सफलता भी मिलती है।




हिन्दू धर्म में कुछ शब्दों को घर से निकलते वक़्त बोलने से शुभ मानते है, जैसे दही मच्छी, विजयभवः, श्री गणेशाय नम, सब शुभ हो, और मंगल यात्रा हो. इसलिए शुभ कार्य के लिए घर से बाहर निकलते वक़्त यह जरुर बोल कर भेजे।

शुक्रवार, 3 मार्च 2017

हनुमानजी की पूजा कब और कैसे करें!



हनुमान जी, हिन्दू धर्म के महत्त्वपूर्ण ग्रंथ रामायण में एक पौराणिक चरित्र है। शिव पुराण के अनुसार हनुमान जी को, भगवान शिव का दसवां अवतार माना जाता है। साधारणतया हनुमान प्रतिमा को चोला चढ़ाते हैं। हनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए मंगलवार को तथा शनि महाराज की साढ़े साती, अढैया, दशा, अंतरदशा में कष्ट कम करने के लिए शनिवार को चोला चढ़ाया जाता है।





साधारणतया मान्यता इन्हीं दिनों की है, लेकिन दूसरे दिनों में रवि, सोम, बुध, गुरु, शुक्र को चढ़ाने का निषेध नहीं है। चोले में चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर प्रतिमा पर लेपन कर अच्छी तरह मलकर, रगडक़र चांदी या सोने का वर्क चढ़ाते हैं।

इस प्रक्रिया में कुछ बातें समझने की हैं। पहली बात चोला चढ़ाने में ध्यान रखने की है। अछूते (शुद्ध) वस्त्र धारण करें। दूसरी नख से शिख तक (सृष्टि क्रम) तथा शिख से नख तक संहार क्रम होता है। सृष्टि क्रम यानी पैरों से मस्तक तक चढ़ाने में देवता सौम्य रहते हैं। संहार क्रम से चढ़ाने में देवता उग्र हो जाते हैं। यह चीज श्रीयंत्र साधना में सरलता से समझी जा सकती है। यदि कोई विशेष कामना पूर्ति हो तो पहले संहार क्रम से, जब तक कि कामना पूर्ण न हो जाए, पश्चात सृष्टि क्रम से चोला चढाया जा सकता है। ध्यान रहे, पूर्ण कार्य संकल्पित हो। सात्विक जीवन, मानसिक एवं शारीरिक ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।हनुमानजी के विग्रह का पूजन एवं यंत्र पूजन में काफी असमानताएं हैं। प्रतिमा पूजन में सिर्फ प्रतिमा का पूजन तथा यंत्र पूजन में अंग देवताओं का पूजन होता है। हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण सर्वसाधारण के लिए सरल उपाय हैं। सुन्दरकांड का पाठ भी अच्छा है, समय जरूर अधिक लगता है। हनुमानजी के काफी मंत्र उपलब्ध हैं।

आवश्यकता के अनुसार चुनकर साधना की जा सकती है। शाबर मंत्र भी हैं, लेकिन इनका प्रयोग गुरुदेव की देखरेख में करना उचित है। एकदम जादू से कोई सिद्धि नहीं मिलती अत: धैर्य, श्रद्धा, विश्वास से करते रहने पर देवकृपा निश्चित हो जाती है।शास्त्रों में लिखा है- ‘जपात् सिद्धि-जपात् सिद्धि’ यानी जपते रहो, जपते रहो, सिद्धि जरूर प्राप्त होगी। कलयुग में साक्षात देव हनुमानजी हैं। हनुमानजी की साधना से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष सभी होते हैं। इति

गुरुवार, 2 मार्च 2017

शनिवार को भूलकर भी ना करें ये काम वरना हो जाएंगे कंगाल

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हिंदु धर्म में कहा जाता है कि शनिवार को ये ना करो वो ना करों ऐसी कई तरह की बातें आपने कई लोगों के मुंह से सुना होगा। साथ ही यह भी कहा जाता है कि शनि देव जिससे खुश होते हैं उसे राजा बना देते हैं और जिससे नाराज हो जाएं, वह रंक बन जाता है। इसलिए गलती से भी शनि भगवान को नाराज नहीं करना चाहिए। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे काम जिन्हें भूलकर भी शनिवार के दिन नहीं करना चाहिए। आज के दिन आप अपने घर में ऐसी कोई वस्तु ना लाए जिससे आप कंगाल हो सकत जाए।



नमक
शनिवार के दिन भूलकर भी नमक ना खरीदें। कहते हैं कि शनिवार के दिन नमक खरीदने से घर पर कर्ज बढ़ता है।


काली वस्तु
शनिवार को काली चीजों से दूर रहना चाहिए। इस दिन गलती से भी काले जूते ना खरीदें। जो लोग इस दिन काले जूते खरीद के पहनते हैं उन्हें काम में असफलता मिलती है।

काला तिल
शनिवार को काला तिल नहीं खरीदना चाहिए। काला तिल खरीदने से कार्यों में बाधा आती है और काम नहीं होते।





लोहा
इस दिन लोहा खरीदने से बचें। लोहे का सामान खरीद कर आप शनि देव को नाराज कर सकते हैं।

झाडू
इस दिन झाडू भी नहीं खरीदना चाहिए। इस दिन झाड़ू खरीदने से घर में दरिद्रता आती है।




सरसों का तेल
इस दिन सरसों का तेल भी ना खरीदें। शनिवार के दिन तेल दान करना चाहिए लेकिन इसे खरीदना नहीं चाहिए।

लकड़ी से बनी वस्तु
लकड़ी या लकड़ी से बना कोई सामान भी शनिवार के दिन नहीं खरीदना चाहिए। इस दिन लकड़ी खरीदना अशुभ माना जाता है।

बुधवार, 1 मार्च 2017

यहां मुसीबत आने से पहले इस मूर्ति से बहने लगते हैं आंसू



हिमाचल प्रदेश के चप्पे-चप्पे पर देवी देवताओं का वास है। देवभूमि के नाम से विख्यात इस प्रदेश में देवी देवताओं से कई रोचक बातें भी जुड़ी हुई हैं। ऐसी ही एक रोचक कड़ी शक्तिपीठों में से एक बज्रेश्वरी देवी माता मंदिर कांगड़ा से भी जुड़ी है। इस मंदिर में देवी के साथ भगवान भैरव की भी एक चमत्कारी मूर्ति है। कहते हैं जब भी इस जगह पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो भैरव की मूर्ति से आंसू और पसीना बहने लगता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां पर ये चमत्कार कई बार देखा है।



विपत्ती आने पर मूर्ति से बहने लगते हैं आंसु
मंदिर परिसर में ही भगवान लाल भैरव का भी मंदिर है। यहां विराजे भगवान लाल भैरव की यह मूर्ति करीब पांच हजार वर्ष पुरानी बताई जाती है। कहते हैं कि जब भी कांगड़ा पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो इस मूर्ति की आंखों से आंसू और शरीर से पसीना निकलने लगता है। तब मंदिर के पुजारी विशाल हवन का आयोजन कर मां से आने वाली आपदा को टालने का निवेदन करते हैं और यह बज्रेश्वरी शक्तिपीठ का चमत्कार और महिमा ही है कि आने वाली हर आपदा मां के आशीर्वाद से टल जाती है। बताया जाता है कि ऐसा यहां कई बार हुआ है।।


कई बार देखा गया है भैरव मूर्ति का चमत्कार
स्थानीय लोगों के अनुसार, भैरव की यह मूर्ति बहुत पुरानी है। कहते हैं कि वर्ष 1976-77 में इस मूर्ति में आंसू व शरीर से पसीना निकला था। उस समय कांगड़ा बाजार में भीषण अग्निकांड हुआ था। काफी दुकानें जल गई थीं। उसके बाद से यहां ऐसी विपत्ति टालने के लिए हर वर्ष नवंबर व दिसंबर के मध्य में भैरव जयंती मनाई जाती है। उस दौरान यहां पाठ व हवन होता है। यह मूर्ति मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही बाईं तरफ है।



यहां गिरा था देवी सती कादाहिना वक्ष
कांगड़ा का बज्रेश्वरी शक्तिपीठ देवी के 51 शक्तिपीठों में से मां की वह शक्तिपीठ हैं जहां सती का दाहिना वक्ष गिरा था और जहां तीन धर्मों के प्रतीक के रूप में मां की तीन पिंडियों की पूजा होती है। मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित पहली और मुख्य पिंडी मां बज्रेश्वरी की है। दूसरी मां भद्रकाली और तीसरी और सबसे छोटी पिंडी मां एकादशी की है।

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017

यदि घर में रखा है एक्वेरियम तो जरूर जानिए ये बातें



वास्तु शास्त्र में ऐसी मान्यता है की मछलियां घर के सदस्यों के ऊपर आने वाली मुसीबतों को टालती हैं और घर में धन-संपत्ति को भी बनाए रखती हैं। अगर वास्तु और फेंगशुई की आसान बातों को ध्यान में रखकर, घर में एक्वेरियम रखा जाए तो इसके कई फायदे आपको मिल सकते हैं। आइए जानते है ऐसी ही कुछ वास्तु टिप्स –

यहां न रखे एक्वेरियम
एक्वेरियम को कभी भी बेडरूम या किचन में नहीं रखना चाहिए। इससे घर की सम्पति और बिज़नेस को नुकसान पहुंचता है।


कहां रखा एक्वेरियम होगा शुभ
एक्वेरियम को पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। घर के सदस्यों में आपसी प्यार बनाए रखने के लिए इसे मेन गेट की बाएं ओर रखे।

रखनी चाहिए किस रंग की मछली
सही रंग की मछलियां रखने पर घर के लोगों पर आने वाली हर परेशानी अपने आप खत्म हो जाएगी। एक्वेरियम में 8 मछलियां लाल-सुनहरी और 1 मछली काले रंग की होनी चाहिए।


क्यों ख़ास है काले रंग की मछली
मान्यता है कि जब भी एक्वेरियम में रखी काले रंग की मछली मर जाती है तो उसने घर के किसी सदस्य पर आने वाली मुसीबत को खुद पर झेल लिया और अब घर के सभी सदस्य सुरक्षित हैं।

मरने पर तुरंत ले आए नई मछली
जब कभी कोई मछली मर जाएं तो उसे तुरंत एक्वेरियम से निकाल दें और उसकी जगह नई मछली लाकर रख दें। ध्यान रखें कि जिस रंग की मछली मरी हो नई मछली उसी रंग की हो।


सुबह उठते ही करे मछली के दर्शन
सुबह उठने के बाद परिवार के सभी सदस्यों को सबसे पहले एक्वेरियम में रखी मछलियों को देखना चाहिए। इससे पॉज़िटिव एनर्जी मिलती है और दिनभर के कामों में सफलता मिलती है।

बच्चों के लिए यहां रखें एक्वेरियम
बच्चों में अच्छे संस्कार, पढाई व करियर में सुधार के लिए एक्वेरियम को घर की पूर्वोत्तर दिशा में रखना चाहिए। यहां रखा एक्वेरियम बच्चों के लिए फायदेमंद होता है।

सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

खुशियों के लिए सरल वास्तु टिप्स


Simple Tips for architectural joys
वास्तु एक प्राचीन विज्ञान है, जो हमें बताता है कि घर, ऑफिस, व्यवसाय इत्यादि में कौन सी चीज होनी चाहिए और कौन सी नहीं. साथ हीं हमें यह भी बतलाता है कि किस चीज के लिए कौन सी दिशा सही होगी. यह हमें बताता है कि वास्तु दोषों का निवारण कैसे किया जा सकता है. यह मिथक या अन्धविश्वास पर आधारित बातें नहीं बताता है. कौन-सा कमरा किस दिशा में ज्यादा अच्छा रहेगा, कौन से पौधे आपको घर में लगाने चाहिए और कौन से नहीं इत्यादि. तो आइए जानते हैं कि वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के लिए क्या-क्या सही है और क्या-क्या गलत. vastu tips
घर के लिए कुछ महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स :
पूजा घर उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण में बनाना सबसे अच्छा रहता है. अगर इस दिशा में पूजा घर बनाना सम्भव नहीं हो रहा हो, तो उत्तर दिशा में पूजा घर बनाया जा सकता है. लेकिन ध्यान रखें कि ईशान कोण सर्वश्रेष्ठ दिशा है.
पूजा घर से सटा हुआ या पूजा घर के ऊपर या नीचे शौचालय नहीं होना चाहिए.
पूजा घर में प्रतिमा स्थापित नहीं करनी चाहिए क्योंकि घर में प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति का ध्यान उस तरह से नहीं रखा जा सकता है जैसा कि रखा जाना चाहिए. अतः छोटी मूर्तियाँ और चित्र हीं पूजा घर में लगाने चाहिए.
सीढ़ी के नीचे पूजा घर नहीं बनाना चाहिए.
फटे हुए चित्र, या खंडित मूर्ति पूजा घर में बिल्कुल नहीं होनी चाहिए.
पूजा घर और रसोई या बेडरूम एक हीं कमरे में नहीं होना चाहिए.
घर के मालिक का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए. अगर इस दिशा में सम्भव न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प है.
गेस्ट रूम उत्तर-पूर्व की ओर होना चाहिए. अगर उत्तर-पूर्व में कमरा बनाना सम्भव न हो, तो उत्तर पश्चिम दिशा दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प है.
उत्तर-पूर्व में किसी का भी बेडरूम नहीं होना चाहिए.
रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा सबसे अच्छी होती है.
शौचालय और स्नानघर दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना सर्वश्रेष्ठ है.



घर की सीढ़ी सामने की ओर से नहीं होनी चाहिए, और सीढ़ी ऐसी जगह पर होनी चाहिए कि घर में घूसने वाले व्यक्ति को यह सामने नजर नहीं आनी चाहिए.
सीढ़ी के पायदानों की संख्या विषम 21, 23, 25 इत्यादि होनी चाहिए.
सीढ़ी के नीचे शौचालय, रसोई, स्नानघर, पूजा घर इत्यादि नहीं होने चाहिए. सीढ़ी के नीचे कबाड़ भी नहीं रखना चाहिए.
सीढ़ी के नीचे कुछ उपयोगी सामान रख सकते हैं और सीढ़ी के नीचे रखे हुए सामान सुसज्जित होने चाहिए.
घर का कोई भी रैक खुला नहीं होना चाहिए. उसमें पल्ले जरुर लगाने चाहिए.
घर में कबाड़ नहीं रखना चाहिए.



कमरे की लाइट्स पूर्व या उत्तर दिशा में लगी होनी चाहिए.
घर के ज्यादातर कमरों की खिड़कियाँ और दरवाजे उत्तर या पूर्व दिशा में खुलने चाहिए.
सीढ़ी पश्चिम दिशा में होनी चाहिए.
घर का मुख्य दरवाजा दक्षिणमुखी नहीं होना चाहिए. अगर मजबूरी में दक्षिणमुखी दरवाजा बनाना पड़ गया हो, तो दरवाजे के सामने एक बड़ा सा आईना लगा दें.
घर के प्रवेश द्वार में ऊं या स्वस्तिक बनाएँ या उसकी थोड़ी बड़ी आकृति लगाएँ.
पूजा घर या उत्तर-पूर्व दिशा में जल से भरकर कलश रखें.
शयनकक्ष में भगवान की या धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी तस्वीर नहीं लगानी चाहिए.



ताजमहल एक मकबरा है, इसलिए न तो इसकी तस्वीर घर में लगानी चाहिए. और न हीं इसका कोई शो पीस घर में रखना चाहिए.
जंगली जानवरों के फोटो घर में नहीं रखने चाहिए.
पानी के फुहारे को घर में नहीं लगाना चाहिए. क्योंकि इससे धन नहीं ठहरता है.
नटराज की तस्वीर या मूर्ति घर में नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इसमें शिवजी ने विकराल रूप लिया हुआ है.
महाभारत का कोई भी चित्र घर में नहीं रखना चाहिए. क्योंकि इससे कलह कभी खत्म नहीं होता है.
हमें जरुर बताएं कि आपको हमारा लेख कैसा लगा.

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

महाशिवरात्रि पर शिवजी को प्रसन्न करने के उपाय


महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस तिथि पर शिवजी और मां पार्वती का विवाह हुआ था। शिवजी की कृपा से सभी देवी-देवताओं की कृपा मिलती है और रुके हुए सभी काम पूरे हो जाते हैं। आइए जानते है शिवरात्रि पर शिवजी को प्रसन्न करने योग्य कुछ ज्योतिष उपाय…



1. महाशिवरात्रि पर छोटा सा पारद (पारा) शिवलिंग लेकर आएं और घर के मंदिर में इसे स्थापित करें। शिवरात्रि से शुरू करके रोज़ इसकी पूजा करें। इस उपाय से घर की दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मी कृपा बनी रहती है।


2. शिवरात्रि पर रात में किसी शिव मंदिर में दीपक जलाएं। शिवपुराण के अनुसार कुबेर देव ने पूर्व जन्म में रात के समय शिवलिंग के पास रोशनी की थी। इसी वजह से अगले जन्म में वे देवताओं के कोषाध्यक्ष बने।

3. यदि आप चाहें तो शिवरात्रि पर स्फटिक के शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं। घर के मंदिर में जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से इस शिवलिंग को स्नान कराएं। मंत्र – ॐ नमः शिवाय। मंत्र जप कम से कम 108 बार करें।


4. हनुमानजी भगववान शिव के ही अंशावतार माने गए हैं। शिवरात्रि पर हनुमान चालीस का पाठ करने से हनुमानजी और शिवजी की प्रसन्नता प्राप्त होती हैं। इनकी कृपा से भक्त की सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

5. किसी सुहागिन को सुहाग का सामान उपहार में दें। जो लोग यह उपाय करते हैं, उनके वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर हो सकती हैं। सुहाग का सामान जैसे- लाल साडी, लाल चूड़ियां, कुमकुम आदि।


6. महाशिवरात्रि पर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज और धन का दान करें। शास्त्रों में बताया गया है कि
गरीबों को दान करने से पुराने सभी पापो का असर खत्म हो सकता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

7. जो लोग शिवरात्रि पर किसी बिल्व वृक्ष के नीचे खड़े होकर खीर और घी का दान करते हैं, उन्हें महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे लोग जीवनभर सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं और कार्यों में सफल होते हैं।


8. शिवपुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष महादेव का रूप हैं। इसलिए इसकी पूजा करें। फूल, कुमकुम, प्रसाद आदि चीज़ें विशेष रूप से चढ़ाएं। इसकी पूजा से जल्दी शुभ फल मिलते हैं। शिवरात्रि पर बिल्व के पास दीपक जलाएं।

9. जल चढ़ाते समय शिवलिंग को हथेलियों से रगड़ना चाहिए। इस उपाय से किसी की भी किस्मत बदल सकती हैं।

10. जल में केसर मिलाएं और ये जल शिवलिंग पर चढ़ाएं। इस उपाय से विवाह और वैवाहिक जीवन से जुडी समस्याएं खत्म होती हैं।

11. यदि आप बहुत जल्दी सफलता पाना चाहते हैं तो रोज़ पारे से बने छोटे से शिवलिंग की पूजा करें। पारद शिवलिंग बहुत चमत्कारी होता हैं।

12. यदि आप लंबी उम्र चाहते हैं तो शिवलिंग पर रोज़ दूर्वा चढ़ाएं। इससे शिवजी और गणेशजी की कृपा से सुख-समृद्धि भी बढ़ती हैं।

13. चावल पकाएं और उन चावलों से शिवलिंग का श्रृंगार करें। इसके बाद पूजा करें। इससे मंगलदोष शांत होते हैं।

14. समय-समय पर शिवजी के निमित सवा किलो या सवा पांच किलो या 11 किलो या 21 किलो गेहूं या चावल का दान करें।

15. शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय काले तिल मिलाएं। इस उपाय से शनि दोष और रोग दूर होते हैं।

16. बीमारियों के कारण परेशानियां खत्म ही नहीं हो रही हैं तो पानी में दूध और काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। ये उपाय रोज़ करें।

17. मनचाही गाडी चाहते हैं तो शिवलिंग पर रोज़ चमेली के फूल चढ़ाएं और शिव मंत्र (ॐ नमः शिवाय) का जप 108 बार रोज़ करें।

18. 11 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नमः शिवाय या श्रीराम लिखें। इसके बाद इन पत्तों की माला बनाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।

19. शिवलिंग पर रोज़ धतूरा चढाने से घर और संतान से जुडी समस्याएं दूर होती हैं। ये उपाय संतान को सभी कार्यों में सफलता दिलवाता है।

20. नियमित रूप से आंकड़े के फूलों की माला बनाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

21. लक्ष्मी की स्थायी कृपा पाना चाहते हैं तो शिवलिंग पर रोज़ चावल चढ़ाएं। चावल पूरे यानी अखंडित होने चाहिए।


महाशिवरात्रि व्रत पूजन विधि

देवों के देव भगवान भोले नाथ के भक्तों के लिये श्री महाशिवरात्रि का व्रत विशेष महत्व रखता हैं। यह पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है। वर्ष 2017 में यह शुभ उपवास, 24 फरवरी – शुक्रवार के दिन का रहेगा। इस दिन का व्रत रखने से भगवान भोले नाथ शीघ्र प्रसन्न हों, उपवासक की मनोकामना पूरी करते हैं। इस व्रत को सभी स्त्री-पुरुष, बच्चे, युवा, वृद्धों के द्वारा किया जा सकता हैं।



24 फरवरी – 2017 के दिन विधिपूर्वक व्रत रखने पर तथा शिवपूजन,रुद्राभिषेक, शिवरात्रि कथा, शिव स्तोत्रों का पाठ व “उँ नम: शिवाय” का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता हैं। व्रत के दूसरे दिन यथाशक्ति वस्त्र-क्षीर सहित भोजन, दक्षिणादि प्रदान करके संतुष्ट किया जाता हैं।


*चार प्रहर पूजन अभिषेक विधान*

प्रथम प्रहर- सायं 6:00 से रात्रि 9:00तक


द्वितीय प्रहर- रात्रि 9:00 से रात्रि 12:00 तक

तृतीय प्रहर- रात्रि 12:00 से रात्रि 3:00 तक


चतुर्थ प्रहर- रात्रि 3:00 से प्रातः 6:00 बजे तक

*शिवरात्री व्रत की महिमा*


इस व्रत के विषय में यह मान्यता है कि इस व्रत को जो जन करता है, उसे सभी भोगों की प्राप्ति के बाद, मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी पापों का क्षय करने वाला है, व इस व्रत को लगातार 14 वर्षो तक करने के बाद विधि-विधान के अनुसार इसका उद्धापन कर देना चाहिए।

*महाशिवरात्री व्रत का संकल्प*

व्रत का संकल्प सम्वत, नाम, मास, पक्ष, तिथि-नक्षत्र, अपने नाम व गोत्रादि का उच्चारण करते हुए करना चाहिए। महाशिवरात्री के व्रत का संकल्प करने के लिये हाथ में जल, चावल, पुष्प आदि सामग्री लेकर शिवलिंग पर छोड दी जाती है।

*महाशिवरात्री व्रत की सामग्री*

उपवास की पूजन सामग्री में जिन वस्तुओं को प्रयोग किया जाता हैं, उसमें पंचामृत (गंगाजल, दुध, दही, घी, शहद), सुगंधित,चावल, रोली, कलावा, जनेऊ, फूल, शुद्ध वस्त्र, बिल्व पत्र,धतूरा, समीपत्र, आक पुष्प, दूर्वा, धूप, दीप, नैवेध, चंदन का लेप, ऋतुफल,नारियल और अभिषेक के लिए दूध आदि।

*महाशिवरात्री व्रत की विधि*

महाशिवरात्री व्रत को रखने वालों को उपवास के पूरे दिन, भगवान भोले नाथ का ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। इसके ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर शिव का पूजन धूप, पुष्पादि व अन्य पूजन सामग्री से पूजन करना चाहिए।

इस व्रत में चारों पहर में पूजन किया जाता है। प्रत्येक पहर की पूजा में “उँ नम: शिवाय” व ” शिवाय नम:” का जाप करते रहना चाहिए। अगर शिव मंदिर में यह जाप करना संभव न हों, तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर जाकर इस मंत्र का जाप किया जा सकता हैं। चारों पहर में किये जाने वाले इन मंत्र जापों से विशेष पुन्य प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त उपावस की अवधि में रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते है।

*शिव अभिषेक विधि*

महाशिव रात्रि के दिन शिव अभिषेक करने के लिये सबसे पहले एक मिट्टी का बर्तन लेकर उसमें पानी भरकर, पानी में बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किये जाते है। व्रत के दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए और मन में असात्विक विचारों को आने से रोकना चाहिए। शिवरात्रि के अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।

*पूजन करने का विधि-विधान*

महाशिवरात्री के दिन शिवभक्त का जमावडा शिव मंदिरों में विशेष रुप से देखने को मिलता है। भगवान भोले नाथ अत्यधिक प्रसन्न होते है, जब उनका पूजन बेल- पत्र आदि चढाते हुए किया जाता है। व्रत करने और पूजन के साथ जब रात्रि जागरण भी किया जाये, तो यह व्रत और अधिक शुभ फल देता है। इस दिन भगवान शिव की शादी हुई थी, इसलिये रात्रि में शिव की बारात निकाली जाती है। सभी वर्गों के लोग इस व्रत को कर पुन्य प्राप्त कर सकते हैं।



एक बार एक गाँव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधवश साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि की कथा भी सुनी। संध्या होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया।






अपनी दिनचर्या की भाँति वह जंगल में शिकार के लिए निकला, लेकिन दिनभर बंदीगृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार करने के लिए वह एक तालाब के किनारे बेल वृक्ष पर पड़ाव बनाने लगा। बेल-वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढँका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला।


पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियाँ तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरीं। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए।

एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी मृगी तालाब पर पानी पीने पहुँची। शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, मृगी बोली, ‘मैं गर्भिणी हूँ. शीघ्र ही प्रसव करूँगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं अपने बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे सामने प्रस्तुत हो जाऊँगी, तब तुम मुझे मार लेना। ‘ शिकारीने प्रत्यंचा ढीली कर दी और मृगी झाड़ियों में लुप्त हो गई। प्रत्यंचा चढ़ाने तथा ढीली करने के वक्त कुछ बिल्व पत्र अनायास ही टूट कर शिवलिंग पर गिर गए। इस प्रकार उससे अनजाने में ही प्रथम प्रहर का पूजन भी सम्पन्न हो गया।


कुछ ही देर बाद एक और हिरणी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख हिरणी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, ‘हे शिकारी! मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूँ। कामातुर विरहिणी हूँ। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूँ। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊँगी।’ शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। इस बार भी धनुष से लग कर कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर जा गिरे तथा दूसरे प्रहर की पूजन भी सम्पन्न हो गई।

शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। तभी एक अन्य मृगी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर न लगाई, वह तीर छोड़ने ही वाला था कि मृगी बोली, ‘हे पारधी! मैं इन बच्चों को पिता के हवाले करके लौट आऊँगी. इस समय मुझे मत मार।


शिकारी हँसा और बोला, ‘सामने आए शिकार को छोड़ दूँ, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूँ. मेरे बच्चे भूख-प्यास से तड़प रहे होंगे।

उत्तर में मृगी ने फिर कहा, ‘जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी, इसलिए सिर्फ बच्चों के नाम पर मैं थोड़ी देर के लिए जीवनदान माँग रही हूँ। हे पारधी! मेरा विश्वास कर मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूँ।


मृगी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के आभाव में बेलवृक्ष पर बैठा शिकारी बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य करेगा।

शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला,’ हे पारधी भाई! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि उनके वियोग में मुझे एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े, मैं उन मृगियों का पति हूँ। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण जीवनदान देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे सामने उपस्थित हो जाऊँगा।

मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटना-चक्र घूम गया। उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा, ‘मेरी तीनों पत्नियाँ जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएँगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूँ।

उपवास, रात्रि जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया था। उसमें भगवद् शक्ति का वास हो गया था। धनुष तथा बाण उसके हाथ से सहज ही छूट गए। भगवान शिव की अनुकम्पा से उसका हिंसक हृदय कारुणिक भावों से भर गया। वह अपने अतीत के कर्मों को याद करके पश्चाताप की ज्वाला में जलने लगा।

थोड़ी ही देर बाद मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसके नेत्रों से आँसुओं की झड़ी लग गई। उस मृग परिवार को न मारकर शिकारी ने अपने कठोर हृदय को जीव हिंसा से हटा सदा के लिए कोमल एवं दयालु बना लिया।

देव लोक से समस्त देव समाज भी इस घटना को देख रहा था। घटना की परिणति होते ही देवी-देवताओं ने पुष्प वर्षा की. तब शिकारी तथा मृग परिवार मोक्ष को प्राप्त हुए।

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2017

8 अजीबोगरीब भारतीय मान्यताएं- आस्था या अन्धविश्वास?



8 अजीबोगरीब भारतीय मान्यताएं- आस्था या अन्धविश्वास? 


भारत त्योहारों, उत्सवों और आस्था का देश है। यहां विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के लोग रहते हैं। सबकी अपनी-अपनी मान्यताएं और धार्मिक विश्वास हैं लेकिन कभी-कभी यही आस्था और विश्वास अंधविश्वास में बदल जाता है। आस्था के नाम पर भारत में कई अजीबोगरीब मान्यताएं हैं, जिन्हें सुनकर इंसान के रोंगटे खड़े हो जाएं। आज इस लेख में हम आपको ऐसी ही  8  मान्यताओं के बारे में बता रहे है।
1. अच्छे भाग्य के लिए छत से फेंकते हैं बच्चों को
महाराष्ट्र के शोलापुर में बाबा उमर दरगाह और कर्नाटक के इंदी स्थित श्री संतेश्वर मंदिर में तो बच्चों को छत से नीचे फेंका जाता है। यहां ऐसी मान्यता है कि बच्चे को ऊंचाई से नीचे फेंकने पर उसका और उसके परिवार का भाग्योदय होता है। इसके साथ ही बच्चा स्वस्थ रहता है। यहां करीब 50 फीट की ऊंचाई से बच्चे को फेंका जाता है, जहां नीचे खड़े लोग उसे चादर से पकड़ते हैं। पिछले 700 सालों से यहां बड़ी संख्या में हिंदू और मुस्लिम अपने बच्चों को लेकर पहुंचते हैं।

2. बारिश के लिए मेंढकों की शादी
हमारे देश के ही कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश के लिए मेंढक और मेंढकी की शादी पूरे रीति-रिवाज से कराई जाती है। दरअसल असम और त्रिपुरा के आदिवासी इलाकों में लोग बारिश के लिए मेंढकों की शादी कराते हैं। यहां ऐसी मान्यता है कि मेंढकों की शादी कराने से इंद्र देवता प्रसन्न होते हैं और उस साल भरपूर बारिश होती है।
3. चर्म रोगों से बचने के लिए फूड बाथ
कर्नाटक के कुछ ग्रामीण इलाकों में स्थित मंदिरों में भोज के बाद बचे हुए खाने पर लोटने की परंपरा है। यहां ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से चर्म रोग और बुरे कर्मों से मुक्ति मिल जाती है। दरअसल मंदिर के बाहर ब्राह्मणों को केले के पत्ते पर भोजन कराया जाता है। बाद में नीची जाति के लोग इस बचे हुए भोजन पर लोटते हैं। इसके बाद ये लोग कुमारधारा नदी में स्नान करते हैं और इस तरह यह परंपरा पूरी होती है।
4. विकलांगता से बचाने के लिए गले तक जमीन में
उत्तरी कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बड़ी अजीब परंपरा है। यहां बच्चों को शारीरिक और मानसिक विकलांगता से बचाने के लिए उन्हें गले तक जमीन में गाड़ दिया जाता है। यह अनुष्ठान सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण शुरू होने के 15 मिनट पहले शुरू होता है। ऐसी मान्यता है कि बच्चों को कुछ घंटे के लिए जमीन में दबाने से उन्हें शारीरिक और मानसिक अपंगता से छुटकारा मिलता है।
5. चेचक से बचने को छेदते हैं शरीर
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में हनुमान जयंती के अवसर पर होने वाले पारंपरिक उत्सव में लोग अपने शरीर को छेदते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि ऐसा करने से वो माता (चेचक) के प्रकोप से बच जाते हैं। मार्च के आखिरी या अप्रैल की शुरुआत में आने वाली चैत्र पूर्णिमा के दिन लोग ऐसा करते हैं। शरीर को छेदने के बाद ये लोग खुशी से नाचते-गाते हैं।
6. खौलते दूध से बच्चों को नहलाना
उत्तरप्रदेश में वाराणसी और मिर्जापुर के कुछ मंदिरों में ‘कराहा पूजन’ की अनोखी परंपरा है। यहां नवजात बच्चों को खौलते दूध से नहलाया जाता है और यह काम बच्चे का पिता ही करता है। बाद में वह खुद खौलते दूध से नहाता है। यह उत्सव मनाने के दौरान मंत्र और श्लोक भी पढ़े जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान प्रसन्न होकर बच्चे को अपना आशीर्वाद देते हैं। नवरात्रि पर भी ‘कराहा पूजन’ किया जाता है, जिसमें पुजारी खौलती खीर से नहाते हैं।
7. गायों के पैरों से कुचलना 
भारत में मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के कुछ गावों में एक अजीब सी परम्परा का पालन सदियो से किया जा रहा है।  इसमें लोग जमीन पर लेट जाते हैं और उनके ऊपर से दौड़ती हुए गाये गुजारी जाती हैं। इस परंपरा का पालन दीवाली के अगले दिन किया जाता है जो कि एकादशी का पर्व कहलाता है। इस दिन उज्जैन जिले के Bhidawad और आस पास के गाँव के लोग पहले अपनी गायों को रंगों और मेहंदी से अलग-अलग पैटर्न से सजाते हैं। उसके
बाद लोग अपने गले में माला डालकर रास्ते में लेट जाते है और अंत में दौड़ती हुए गायें उन पर से गुजर जाती हैं।
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8. बच्चियों की कुत्तों से शादी 
इसे परम्परा ना कहकर कुरुति कहा जाए तो ज्यादा उपयुक्त होगा। इसमें भूतों का साया और अशुभ ग्रहों का प्रभाव हटाने के नाम पर बच्चियों की शादी कुत्तों से करवाई जाती है।  हालाकि ये शादी सांकेतिक होती हैं, पर होती हैं असली हिन्दू तरीके और रीती रिवाज़ से। लोगों को शादी में आने का निमंत्रण दिया जाता है। पंडित, हलवाई सब बुक किये जाते है। बाकायदा मंडप तैयार होता है और पुरे मन्त्र विधान से शादी सम्पन कराई जाती है। इस शादी में एक असली शादी जितना ही खर्चा बैठता है और उससे भी बड़ी बात कि समाज एवं रिश्तेदार भी इसमें बढ़ चढ़ के  हिस्सा लेते है। शायद आपको एक बार तो यकीन ही नहीं होगा कि ऐसा भी हो सकता है। लेकिन यह बिलकुल सत्य है। हमारे देश में झारखण्ड राज्य के कई इलाकों में परंपरा के नाम पर ऐसी शादियां सदियों से कराई  जा रही है।








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बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

शिव की इस खास पूजा से दोगुनी हो जाएगी आपकी आमदनी



 This will double your income by special worship of Shiva

यूं तो महादेव को केवल ओम नम शिवाय मंत्र से भी प्रसन्न किया जा सकता है लेकिन शास्त्रों के अनुसार अगर कुछ खास मंत्रों का उच्चा‍रण लंबे समय तक किया जाए तो न केवल आपकी आमदनी में जबरदस्त बढोतरी होने लगती है बल्कि मां लक्ष्मी भी प्रसन्न रहती है।

इस पूजा से कमाई हो जाएगी डबल-

महादेव के जरिए लक्ष्मी को प्रसन्न करवाने के लिए किसी भी दिन घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी यथा विधि पूजन करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें-ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं। उसके बाद 3 महीनों में ही आपके घर पैसों की साक्षात बारिश होने लगेगी। प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं, बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें तथा उसे अपने पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन उसकी पूजा करें। कुछ ही दिनों में आपको असर दिखने लगेगा।



शिव महिम्न स्त्रोत से जलाभिषेक देगा संतान सुख-महादेव की खास पूजा-अर्चना से संतान सुख भी मिलने लगता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव का पूजन करें, इसके पश्चात गेहूं के आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। अब प्रत्येक शिवलिंग का शिव महिम्न स्त्रोत से जलाभिषेक करें। इस प्रकार 11 बार जलाभिषेक करें, उस जल का कुछ भाग प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार 100 दिनों संतान के योग बनने लग जाते हैं।

अच्छा स्वास्थ्‍य भी देती है शिवाराधना -
सोमवार को पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें, अभिषेक के लिए तांबे के बर्तन को छोड़कर किसी अन्य धातु के बर्तन का उपयोग करें। अभिषेक करते समय ॐ जूं स: मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद भगवान शिव से रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें और प्रत्येक सोमवार को रात में सवा नौ बजे के बाद गाय के सवा पाव कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने का संकल्प लें। इस उपाय से बीमारी ठीक होने में लाभ मिलता है।

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

दीपक जलाने से पहले, इसके रहस्य भी जानें, हैरान रह जाएंगे आप

Astrology, tone totke, 

भगवान की पूजा-आराधना करते समय अक्सर हम लोग पूजा की थाली में कपूर और दीपक जलाते हैं। इस दौरान दीपक अथवा थाली को किस प्रकार पकड़ना चाहिए या कितने दीपक जलाने से कौनसे देव प्रसन्न होते हैं, इन सभी का वर्णन पुराणों में मिलता है। दीपकों के रहस्यों से परदा हटाता यह विशेष आलेख-

केले
 के पेड़ के नीचे बृहस्पतिवार को घी का दीपक प्रज्ज्वलित करने से कन्या का विवाह शीघ्र हो जाता है ऐसी भी मान्यता है। इस प्रकार बड़, गूलर, इमली, कीकर आंवला और अनेकानेक पौधों व वृक्षों के नीचे भिन्न-भिन्न प्रयोजनों से भिन्न-भिन्न प्रकार से दीपक प्रज्ज्वलित किए जाने का विधान है।


मान्यता है कि असाध्य व दीर्घ बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति के पहने हुए कपड़ों में से कुछ धागे निकालकर उसकी जोत शुद्ध घी में अपने इष्ट के समक्ष प्रज्ज्वलित की जाए तो रोग दूर हो जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि चौराहे पर आटे का चौमुखा घी का दीपक प्रज्ज्वलित करने से चहुंमुखी लाभों की प्राप्ति होती है। 

नजर व टोटकों इत्यादि के निवारण के लिए भी तिराहे, चौराहे, सुनसान अथवा स्थान विशेष पर दीपक प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। पूर्व और पश्चिम मुखी भवनों में मुख्य द्वार पर संध्या के समय सरसों तेल के दीपक प्रज्ज्वलित किए जाने का विधान अत्यंत प्राचीन है। इसके पीछे मान्यता यह है कि किसी भी प्रकार की दुरात्मा अथवा बुरी शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर सकतीं।


मान्यता है कि असाध्य व दीर्घ बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति के पहने हुए कपड़ों में से कुछ धागे निकालकर उसकी जोत शुद्ध घी में अपने इष्ट के समक्ष प्रज्ज्वलित की जाए तो रोग दूर हो जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि चौराहे पर आटे का चौमुखा घी का दीपक प्रज्ज्वलित करने से चहुंमुखी लाभों की प्राप्ति होती है। 

नजर व टोटकों इत्यादि के निवारण के लिए भी तिराहे, चौराहे, सुनसान अथवा स्थान विशेष पर दीपक प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। पूर्व और पश्चिम मुखी भवनों में मुख्य द्वार पर संध्या के समय सरसों तेल के दीपक प्रज्ज्वलित किए जाने का विधान अत्यंत प्राचीन है। इसके पीछे मान्यता यह है कि किसी भी प्रकार की दुरात्मा अथवा बुरी शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर सकतीं।


पीपल के वृक्ष के नीचे प्रज्ज्वलित किए जाने वाले दीपक अनेक मान्यताओं से जुड़े हैं। कहा जाता है कि पीपल पर ब्रह्मा जी का निवास है इसलिए पीपल को काटने वाला ब्रह्म हत्या का दोषी कहलाता है। शनिदेव को इसका देवता माना गया है और पितरों का निवास भी इसी में है ऐसी मान्यता है

सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

आपके नाम का पहला अक्षर बताएगा की आपका व्यक्तित्व कैसा है

आपके नाम का पहला अक्षर बताएगा की आपका व्यक्तित्व कैसा है

यह बात शत-प्रतिशत सही है कि जब तक हम किसी व्यक्ति को नजदीकी से जान नहीं लेते तब तक हम उसके स्वभाव और चरित्र को परख नहीं सकते। दो मुलाकातों में ही व्यक्ति के मिलनसार स्वभाव का तो पता चल जाता है लेकिन इस बात का अंदाजा कदापि नहीं लग सकता कि वास्तव में उसका व्यवहार और मानसिकता क्या होगी। यह तो व्यक्ति को समझने का सामाजिक पहलू हुआ लेकिन ज्योतिष शास्त्र में ऐसी बहुत सी विधाएं हैं जो व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ी पोल खोल सकती हैं। इन्हीं में से एक विधा है नाम के पहले अक्षर को जानकर किसी के व्यक्तित्व का पता लगाना। अगर आप भी इस विधा को परखना चाहते हैं और नाम के पहले अक्षर को जानकर व्यक्ति के स्वभाव को जानना चाहते हैं तो चलिए हम आपकी थोड़ी सहायता कर देते हैं। आगे के 26 पृष्ठों में आपको अंग्रेजी के 26 अक्षरों से शुरू हुए नामो के लोगो की प्रकृति के बारे में पता लगेगा

A


अक्षर से नाम वाले लोग काफी मेहनती और धैर्य वाले होते हैं। इन्हें अट्रैक्टिव दिखना और अट्रैक्टिव दिखने वाले लोग ज्यादा पसंद होते हैं। ये खुद को किसी भी परिस्थिति में ढाल लेने की गजब की क्षमता रखते हैं। इन्हें वैसी चीज ही भाती है, जो भीड़ से अलग दिखता हो।
अध्ययन या करियर की बात करें तो किसी भी काम को अंजाम देने के लिए चाहे जो करना पड़े ये करते हैं, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ये कभी हारकर बैठते नहीं।
ए से नाम वाले लोग रोमांस के मामले में जरा पीछे रहना ही पसंद करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे प्यार और अपने करीबी रिश्तों को अहमियत नहीं देते। बस, इन्हें इन चीजों का इजहार करना अच्छा नहीं लगता।A- चाहे बात रिश्तों की हो या फिर काम की, इनका विचार बिल्कुल खुला होता है। सच और कड़वी बात भी इन्हें खुलकर कह दी जाए तो ये मान लेते हैं, लेकिन इशारों में या घुमाकर कुछ कहना-सुनना इन्हें पसंद नहीं।A- ए से नाम वाले लोग हिम्मती भी काफी होते हैं, लेकिन यदि इनमें मौजूद कमियों की बात करें तो इन्हें बात-बात पर गुस्सा भी आ जाता है।

B


जिनका नाम बी अक्षर से शुरू होता है वे अपनी जिंदगी में नए-नए रास्ते तलाशने में यकीन रखते हैं। अपने लिए कोई एक रास्ता चुनकर उसपर आगे बढ़ना इन्हें अच्छा नहीं लगता।
बी अक्षर वाले लोग ज़रा संकोची स्वभाव के होते हैं। काफी सेंसिटिव नेचर के होते हैं ये। जल्दी अपने मित्रों से भी नहीं घुलते-मिलते। इनकी लाइफ में कई राज होते हैं, जो इनके करीबी को भी नहीं पता होता। ये ज्यादा दोस्त नहीं बनाते, लेकिन जिन्हें बनाते हैं उनके साथ सच्चे होते हैं।
रोमांस के मामले में ये थोड़े खुले होते हैं। प्यार का इजहार ये कर लेते हैं। प्यार को लेकर ये धोखा भी खूब खाते हैं। इन्हें खुद पर कंट्रोल रखना आता है। खूबसूरत चीजों के ये दीवाने होते हैं।

C


सी नाम के लोगों को हर क्षेत्र में खूब सफलता मिलती है। एक तो इनका चेहरा-मोहरा भी काफी आकर्षक होता है और दूसरा कि काम के मामले में भी लक इनके साथ हमेशा रहता है। इन्हें आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता है। अच्छी सूरत तो भगवान देते ही हैं इन्हें, अच्छे दिखने में ये खुद भी कभी कोई कसर नहीं छोड़ते।
C- सी नाम वाले दूसरों के दुख-दर्द के साथ-साथ चलते हैं। खुशी में ये शरीक हों या न हों, लेकिन किसी के ग़म में आगे बढ़कर ये उनकी मदद करते हैं।
C- सी नाम वालों के लिए प्यार के महत्व की बात करें तो ये जिन्हें पसंद करते हैं उनके बेहद करीब हो जाते हैं। यदि इन्हें अपने हिसाब के कोई न मिले तो मस्त होकर अकेले भी रह लेते हैं। वैसे स्वभाव से ये काफी इमोशनल होते हैं

D

डी नाम वाले लोगों को हर मामले में अपार सफलता हाथ लगती है। कभी भाग्य साथ न भी दे तो उन्हें विचलित नहीं होना चाहिए, क्योंकि उनकी जिंदगी में आगे चलकर सारी खुशियां लिखी होती हैं। लोगों की बात पर ध्यान न देकर अपने मन की करना ही इन्हें भाता है। जो ठान लेते हैं ये, उसे कहके ही मानते हैं। इन्हें सुंदर या आकर्षक दिखने के लिए बनने-संवरने की जरूरत नहीं होती। ये लोग बॉर्न स्मार्ट होते हैं।
D- किसी की मदद करने में ये कभी पीछे नहीं रहते। यहां तक ये भी नहीं देखते कि जिनकी मदद के लिए उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ाया है वह उनके दुश्मन की लिस्ट में हैं या दोस्त की लिस्ट में।
D- डी नाम के लोग प्यार को लेकर काफी जिद्दी होते हैं। जो इन्हें पसंद हो, उन्हें पाने के लिए या फिर उनसे रिश्ता निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। रिश्तों के मामले में इनपर अविश्वास करना बेवकूफी होगी।

E


ई या इ से नाम वाले मुंहफट किस्म के होते हैं। हंसी-मजाक की जिंदगी जीना इन्हें पसंद है। इन्हें अपने इच्छा अनुरूप सारी चीजें मिल जाती हैं। जो इन्हें टोका टाकी करे, उनसे किनारा भी तुरंत हो लेते हैं।E- ई या इ नाम वाले लोग जिंदगी को बेतरतीव जीना पसंद नहीं करते। इन्हें सारी चीजें सलीके और सुव्यवस्थित रखना ही पसंद है।
E- ई या इ से नाम वाले लोग प्यार को लेकर उतने संजीदा नहीं रहते, इसलिए इनसे रिश्ते पीछे छूटने का किस्सा लगा ही रहता है। शुरुआत में ये दिलफेंक आशिक की तरह व्यवहार करते हैं, क्योंकि इनका दिल कब किसपर आ जाए कह नहीं सकते। लेकिन एक सच यह भी है कि जिन्हें ये फाइनली दिल में बिठा लेते हैं उनके प्रति पूरी तरह से सच्चे हो जाते हैं।

F


नाम वाले लोग काफी जिम्मेदार किस्म के होते हैं। हां, इन्हें अकेले रहना काफी भाता है। ये स्वभाव से काफी भावुक होते हैं। हर चीज को लेकर ये बेहद कॉन्फिडेंट होते हैं। सोच-समझकर ही खर्च करना चाहते हैं ये। जीवन में हर चीज इनका काफी बैलेंस्ड होता है।
F से शुरू होने वाले नाम के लोगों के लिए प्यार की काफी अहमियत होती है। ये खुद भी सेक्सी और आकर्षक होते हैं और ऐसे लोगों को पसंद भी करते हैं। रोमांस तो समझिए कूट-कूटकर इनमें भरा होता है।

G

G से शुरू होनेवाले नाम वाले लोग दूसरों की मदद के लिए हमेशा ही खड़े होते हैं। ये खुद को हर परिस्थितियों में ढाल लेते हैं। ये चीजों को गोलमोल करके पेश करना पसंद नहीं करते, क्योंकि इनका दिल बिल्कुल साफ होता है। अपने किए से जल्द सबक लेते हैं और फूंत-फूंककर कदम आगे बढ़ाते हैं ये।
G से नाम वाले प्यार को लेकर ईमानदार होते हैं। प्यार के मामले में ये समझदारी और धैर्य से काम लेते हैं। कमिटमेंट से पहले किसी पर बेवजह खर्च करना इनके लिए बेकार का काम है।

H


H से नाम वाले लोगों के लिए पैसे काफी मायने रखते हैं। ये काफी हंसमुख स्वभाव के होते हैं और अपने आसपास का माहौल भी एकदम हल्का-फुल्का बनाए रखते हैं। ये लोग दिल के सच्चे होते हैं। काफी रॉयल नेचर के होते हैं और मस्त मौला होकर जीवन गुजारना पसंद करते हैं। झटपट निर्णय लेना इनकी काबिलियत है और दूसरों की मदद के लिए आधी रात को भी ये तैयार होते हैं।
प्यार का इजहार करना इन्हें नहीं आता, लेकिन जब ये प्यार में पड़ते हैं तो जी जीन से प्यार करते हैं। उनके लिए कुछ भी कर गुजरते हैं ये। इन्हें अपने मान-सम्मान की भी खबह चिंता होती है।

I


I से शुरू होने वाले नाम के लोग कलाकार किस्म के होते हैं। न चाहते हुए भी ये लोगों के आकर्षण का केन्द्र बने रहते हैं। हालांकि मौका पड़े तो इन्हें अपनी बात पलटने में पल भर भी नहीं लगता और इसके लिए वे यह नहीं देखते कि सही का साथ दे रहे हैं या फिर गलत का। इनके हाथ तो काफी कुछ लगता है, लेकिन उन चीजों के हाथ से फिसलने में भी देर नहीं लगती।
I से नाम वाले लोग प्यार के भूखे होते हैं। आपको वैसे लोग अपनी ओर खींच पाते हैं जो हर काम को काफी सोच-विचार के बाद ही करते हैं। स्वभाव से संवेदनशील और दिखने में बेहद सेक्सी होते हैं।

J


J से नाम वाले लोगों की बात करें तो ये स्वभाव से काफी चंचल होते हैं। लोग इनसे काफी चिढ़ते हैं, क्योंकि इनमें अच्छे गुणों के साथ-साथ खूबसूरती का भी सामंजस्य होता है। जो करने की ठान लेते हैं, उसे करके ही मानते हैं ये। पढ़ने-लिखने में थोड़ा पीछे ही रहते हैं, लेकिन जिम्मेदारी की बात करें तो सबसे आगे खड़े रहेंगे ये।
j से नाम वाले लोगों के चाहने वाले कई होते हैं। हमसफर के रूप में ये जिन्हें मिल जाएं समझिए खुशनसीब हैं वह। जीवन के हर मोड़ पर ये साथ निभानेवाले होते हैं।

K


K से नाम वाले लोगों को हर चीज में परफेक्शन चाहिए। चाहे बेडशीट के बिछाने का तरीका हो या फिर ऑफिस की फाइलें, सारी चीजें इन्हें सेट चाहिए। दूसरों से हटकर चलना बेहद भाता है इन्हें। ये अपने बारे में पहले सोचते हैं।
पैसे कमाने के मामले में भी ये काफी आगे चलते हैं।स्वभाव से ये रोमांटिक होते हैं। अपने प्यार का इजहार खुलकर करना इन्हें खूब आता है। इन्हें स्मार्ट और समझदार साथी चाहिए और जबतक ऐसा कोई न मिले तब तक किसी एक पर टिकते नहीं ये।

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L से शुरू होने वाले नाम के लोग काफी चार्मिंग होते हैं। इन्हें बहुत ज्य़ादा पाने की तमन्ना नहीं होती, बल्कि छोटी-मोटी खुशियों से ये खुश रहते हैं। पैसों को लेकर समस्या बनती है, लेकिन किसी न किसी रास्ते इन्हें हल भी मिल जाता है।
लोगों के साथ प्यार से पेश आते हैं ये। कल्पनाओं में जीते हैं और फैमिली को अहम हिस्सा मानकर चलते हैं ये।प्यार की बात करें तो इनके लिए इस शब्द के मायने ही सबकुछ हैं। बेहद ही रोमांटिक होते हैं ये। वैसे सच तो यह है कि अपनी काल्पनिक दुनिया का जिक्र ये अपने हमसफर तक से करना नहीं चाहते। प्यार के मामले में भी ये आदर्शवादी किस्म के होते हैं।

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M नाम से शुरू होनेवाले लोग बातों को मन में दबाने वाली प्रवृत्ति के होते हैं। कहते हैं ऐसा नेचर कभी-कभी दूसरों के लिए खतरनाक भी साबित हो जाता है। चाहे बात कड़वी हो, यदि खुलकर कोई कह दे तो बात वहीं खत्म हो जाती है, लेकिन बातों को मन रखकर उस चलने से नतीजा अच्छा नहीं रहता। ऐसे लोगों से उचित दूरी बनाए रखना बेहतर है। इनका जिद्दी स्वभाव कभी-कभार इन्हें खुद परेशानी में डाल देता है।
वैसे अपनी फैमिली को ये बेहद प्यार करते हैं। खर्च करने से पहले ज्यादा सोच-विचार नहीं करते। सबसे बेहतर की ओर ये ज्यादा आकर्षित होते हैं।प्यार की बात करें तो ये संवेदनशील होते हैं और जिस रिश्ते में पड़ते हैं उसमें डूबते चले जाते हैं और इन्हें ऐसा ही साथी भी चाहिए जो इनसे जी जीन से प्यार करे।

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N से शुरू होनेवाले नाम के लोग खुले विचारों के होते हैं। ये कब क्या करेंगे इसके बारे में ये खुद भी नहीं जानते। बेहद महत्वाकांक्षी होते हैं। काम के मामले में परफेक्शन की चाहत इनमें होती है। आपके व्यक्तित्व में ऐसा आकर्षण होता है, जो सामने वालों को खींच लाता है। ये दूसरों से पंगे लेने में ज्यादा देर नहीं लगाते। इन्हें आधारभूत चीजों की कभी कोई कमी नहीं रहती और आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होते हैं ये।कभी-कभार फ्लर्ट चलता है, लेकिन प्यार में वफादारी करना इन्हें आता है। स्वभाव से रोमांटिक और रिश्तों को लेकर बेहद संवेदनशील होते हैं ये।

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O अक्षर से नाम के लोगों के स्वभाव की बात करें तो बता दें कि इनका दिमाग काफी तेज दौड़ता है। ये बोलते कम हैं और करते ज्यादा हैं, शायद यही वजह है कि ये जल्दी ही उन हर ऊंचाइयों को छू लेते हैं जिनका ख्वाब ये देखा करते हैं। इन सबके बावजूद समाज के साथ चलना इन्हें पसंद है। जीवन के हर क्षेत्र में सफल होते हैं।
प्यार की बात करें तो ये ईमानदार किस्म के होते हैं। साथी को धोखा देना इन्हें पसंद नहीं और ऐसा ही उनसे भी अपेक्षा रखते हैं। जिससे कमिटमेंट हो गया, बस पूरी जिंदगी उसपर न्योछावर करने को तैयार रहते हैं ये।

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P से शुरू होनेवाले नाम के लोग उलझनों में फंसे रहते हैं। वैसे, ये चाहते कुछ हैं और होता कुछ अलग ही है। काम को परफेक्शन के साथ करते हैं। इनके काम में सफाई और खरापन साफ झलकती है। खुले विचार के होते हैं ये। अपने आसपास के सभी लोगों का ख्याल रखते हैं और सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं।
हां, कभी-कभार अपने विचारों के घोड़े सबपर दौड़ाने की इनकी कोशिश इन्हें नुकसान भी पहुंचाती है।प्यार की बात करें तो सबसे पहले ये अपनी छवि से प्यार करते हैं। इन्हें खूबसूरत साथी खूब भाता है। कभी-कभार अपने साथी से ही दुश्मनी भी पाल लेते हैं, लेकिन चाहे लड़ते-झगड़ते सही साथ उनका कभी नहीं छोड़ते।

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Q से नाम वाले लोगों को जीवन में ज्यादा कुछ पाने की इच्छा नहीं होती, लेकिन नसीब इन्हें देता सब है। ये स्वभाव से सच्चे और ईमानदार होते हैं। नेचर से काफी क्रिएटिव होते हैं। अपनी ही दुनिया में खोए रहना इन्हें अच्छा लगता है।प्यार की बात करें तो ये अपने साथी के साथ नहीं चल पाते। कभी विचारों में तो कभी काम में असमानता इन्हें झेलना ही पड़ता है। वैसे, आपके प्रति आकर्षण आसानी से हो जाता है।

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R से नाम वाले लोग ज्यादा सोशल लाइफ जीना पसंद नहीं करते। हालांकि, फैमिली इनके लिए मायने रखती है और पढ़ना-लिखना इन्हें नहीं भाता। जो भीड़ करे, उसे करने में इन्हें मजा नहीं आता। ये तो वह काम करना चाहते हैं, जिसे कोई नहीं कर सकता। R से नाम वाले लोग काफी तेजी से आगे बढ़ते हैं और धन-दौलत की कोई कमी नहीं रहती।अपने से ऊपर सोच-समझ और बुद्धि वाले लोग इन्हें आकर्षित करते हैं। दिखने में खूबसूरत और कोई ऐसा जिसपर आपको गर्व हो उनकी ओर आप खिंचे चले जाते हैं। वैसे वैवाहिक जीवन में उठा-पटक लगा ही रहता है।

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S से नाम वाले लोग काफी मेहनती होते हैं। ये बातों के इतने धनी होते हैं कि सामने वाला इनकी ओर आकर्षित हो ही जाता है। दिमाग से तेज और सोच-विचार कर काम करते हैं ये। इन्हें अपनी चीजें शेयर करना पसंद नहीं। ये दिल से बुरे नहीं होते, लेकिन उनके बातचीत का अंदाज़ इन्हें लोगों के सामने बुरा बना देती है। प्यार के मामले में ये शर्मीले होते हैं। आप सोचते बहुत हैं, लेकिन प्यार के लिए कोई पहल करना नहीं आता। प्यार के मामले में ये सबसे ज्यादा गंभीर होते हैं।

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T से शुरू होनेवाले नाम के लोग खर्च के मामले में एकदम खुले हाथ वाले होते हैं। चार्मिंग दिखने वाले ये लोग खुशमिजाज भी खूब रहते हैं। मेहनत करना इन्हें उतना अच्छा नहीं लगता, लेकिन पैसों की कभी कमी नहीं होती इन्हें। अपने दिल की बात किसी से जल्दी शेयर नहीं करते ये।प्यार की बात करें तो रिश्तों को लेकर काफी रोमांटिक होते हैं। लेकिन बातों को गुप्त रखने की आदत भी इनमें होती है।

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U से शुरू होनेवाले नाम के लोग कोशिश तो बहुत-कुछ करने की करते हैं, लेकिन इनका काम बिगड़ते भी देर नहीं लगती। किसी का दिल कैसे जीतना है, वह इनसे सीखना चाहिए। दूसरों के लिए किसी भी तरह ये वक्त निकाल ही लेते हैं। ये बेहद होशियार किस्म के होते हैं। तरक्की के मार्ग आगे बढ़ने पर ये पीछे मुड़कर नहीं देखते।आप चाहते हैं कि आपका साथी हमेशी भीड़ में अलग नज़र आए। वह साथ न भी हो तो आप हर वक्त उन्ही के ख्यालों में डूबे रहना पसंद करते हैं। अपनी खुशी से पहले साथी की खुशियों का ध्यान रखते हैं ये।

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V से शुरू वाले नाम के व्यक्ति स्वभाव से थोड़े ढीले होते हैं। इन्हें जो मन को भाता है वही काम करते हैं। दिल के साफ होते हैं, लेकिन अपनी बातें किसी से शेयर करना इन्हें अच्छा भी नहीं लगता। बंदिशों में रखकर इनसे आप कुछ नहीं करा सकते।बात प्यार की करें तो ये ये अपने प्यार का इजहार कभी नहीं करते। जिन बातों का कोई अर्थ नहीं या यूं कहिए कि हंसी-ठहाके में कही गई बातों से भी आप काफी गहरी बातें निकाल ही लेते हैं। कभी-कभीर ये बाते आपके लिए ही मुसीबत खड़ी कर देती हैं

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W से शुरू होनेवाले नाम के लोग संकुचित दिल के होते हैं। एक ही ढर्रे पर चलते हुए ये बोर भी नहीं होते। ईगो वाली भावना तो इनमें कूट-कूटकर भरी होती है। ये जहां रहते हैं वहीं अपनी सुनाने लग जाते हैं, जिससे सामने वाला इंसान इनसे दूर भागने लगता है। हालांकि, हर मामले में सफलता इनकी मुट्ठी तक पहुंच ही जाती है।प्यार की बात करें तो ये न न करते हुए ही आगे बढ़ते हैं। हालांकि, इन्हें ज्यादा दिखावा पसंद नहीं और अपने साथी को उसी रूप में स्वीकार करते हैं जैसा वह वास्तव में है।

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X से नाम वाले लोग जरा अलग स्वभाव के होते हैं। ये हर मामले में परफेक्ट होते हैं, लेकिन न चाहते हुए भी गुस्से के शिकार हो ही जाते हैं ये। इन्हें काम को स्लो करना पसंद नहीं, फटाफट निपटाने में ही यकीन रखते हैं ये। बहुत जल्दी चीजों से बोरियत हो जाती है इन्हें। ये क्या करने वाले हैं इस बात का पता इन्हें खुद भी नहीं होता।प्यार के मामले में फ्लर्ट करना इन्हें ज्यादा पसंद है। कई रिश्तों को एकसाथ लेकर आगे चलने की हिम्मत इनमें होती है।

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Y से शुरू होनेवाले नाम के लोगों से कभी भी सलाह लें, आपकी सही रास्ता दिखाएंगे वह। खर्च के लिए कभी सोचते नहीं, बस खाना अच्छा मिले तो हमेशा खुश रहेंगे। अच्छी पर्सनैलिटी के बादशाह होते हैं। लोगों को दूर से ही पढ़ लेते हैं ये। इन्हें ज्यादा बातचीत करना पसंद नहीं। धन-दौलत नसीब तो होती है, लेकिन इन्हें पाने में वक्त लग जाता है।
बात प्यार की करें तो इन्हें अपने साथी की कोई बात याद नहीं रहती। हालांकि सच्चे, खुले दिल और रोमांटिक नेचर के होने के कारण इनकी हर गलती माफ भी हो जाती है।

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Z से नाम वाले लोग दूसरों से काफी जल्दी घुल-मिल जाते हैं। गंभीरता इनके स्वभाव में है, लेकिन बड़े ही कूल अंदाज में ये सारे काम करते हैं। जो बोलते हैं साफ बोलते हैं और जिंदगी को इंजॉय करना इन्हें आता है। न मिलने वाली चीजों पर रोने की बजाय उसे छोड़कर आगे बढ़ना इन्हें पसंद है। इन्हें दिखावा नहीं पसंद। इनकी सादगी को देख इन्हें बेवकूफ समझना बहुत बड़ी बेवकूफी होगी। स्वभाव से ये रोमांटिक होते हैं। आपकी ओर कोई भी बड़ी आसानी से अट्रैक्ट हो जाता है। अपने प्यार के सामने आप किसी को अहमियत नहीं देते।