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शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार शुभ और अशुभ



पौराणिक शास्त्रों के अनुसार शुभ और अशुभ के बारे में कई बार हम पढ़ते आए हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं वास्तुशास्त्र के अनुसार भी कुछ ऐसे संकेत हैं, जिन्हें बेहद अशुभ माना जाता है। दरअसल इन संकेतों का दिखना बताता है कि जिस काम को आप करने जा रहे हैं, वह असफल रहेगा और साथ ही ये आपके आने वाले बुरे समय की ओर भी इशारा करते हैं। चलिए जानें, कौन से है वह अशुभ संकेत...

वास्तुशास्त्र के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि जिस भी घर में प्रचूर मात्रा में काली चींटियां झुंड में आती हैं, वहां धन वर्षा होने लगती है। लेकिन अगर यह चींटियां काली ना होकर लाल हैं तो यह बड़े नुकसान के होने का संकेत है। इसके साथ ही अगर आपके घर में दीमक आ गई है या मधुमक्खी ने अपना छत्ता बना लिया है तो यह दर्शाता है कि गृहस्वामी को कोई असहनीय शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है।

अगर आपका घर बहुत पथरीली या टेढ़ी-मेढ़ी जमीन पर बना हुआ है तो यह इस बात का संकेत है कि घर में रहने वाले लोगों को हर समय किसी ना किसी परेशानी का सामना पड़ सकता है। इसके साथ ही अगर घर में अचानक से ही काले चूहों का आना-जाना शुरू हो जाए या उनकी संख्या में अचानक से वृद्धि हो तो यह आने वाली विपत्तियों की ओर इशारा करता है।

भवन-निर्माण के लिए अगर आप किसी भूमि की खुदाई कर रहे हैं और वहां कोई मृत जीव, खासकर सर्प दिख जाए यह अशुभ है। यह दर्शाता है कि बुरा समय आपके बहुत नजदीक है। वहीं अगर भूमि की खुदाई करते हुए राख या हड्डी जैसी वस्तुएं मिलती हैं तो यह पहचान है कि आपके ऊपर कोई अनजाना खतरा मंडरा रहा है। जिसके लिए आपको जल्द ही शांति पूजा करवा लेनी चाहिए।

भवन-निर्माण के लिए अगर आप किसी भूमि की खुदाई कर रहे हैं और वहां कोई मृत जीव, खासकर सर्प दिख जाए यह अशुभ है। यह दर्शाता है कि बुरा समय आपके बहुत नजदीक है। वहीं अगर भूमि की खुदाई करते हुए राख या हड्डी जैसी वस्तुएं मिलती हैं तो यह पहचान है कि आपके ऊपर कोई अनजाना खतरा मंडरा रहा है। जिसके लिए आपको जल्द ही शांति पूजा करवा लेनी चाहिए।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

महाशिवरात्रि पर महादेव को मनाने के कुछ उपाय

महाशिवरात्रि पर महादेव को मनाने के कुछ उपाय

महाशिव रात्रि अपने आप में विशेषकर पुण्यदायक साधना पर्व है क्योंकि शिव वही है, जिन्होंने रावण को अटूट बल दिया। मार्कण्डेय को अपना कर यमराज से मुक्ति दिलवाई। परशुराम को बलशाली बनाया और समस्त दीन-दुखियों, दरिद्र प्राणियों, संकटग्रस्त जीवों, लावारिसों आदि समस्त प्राणियों के जीवन की रक्षा कर उन्‍हें समृद्ध बनाते हैं।

शिव का अर्थ मंगलमय और मंगलदाता है। शिव के इस मंगलमय रूप की उपासना समस्त जातकों, सिद्धों और साधकों के लिए मंगलमय है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से साधुओं को मोक्ष प्राप्ति, रोगियों को रोगों से मुक्ति, सभी साधकों को मनवांछित फल प्राप्ति होती है। भगवान शिव की पूजा गृहस्थ जातकों के लिए जरूरी कही जा सकती है। इस दिन पूजा करने से गृहस्थ जीवन में चल रहा मतभेद, पूर्व गृहस्थ सुख, अखंड सौभाग्य की प्राप्ति आदि शुभ फलों की प्राप्ति होती है। भगवान शिव कई रूपों में जातक की मनोकामना पूरी करते है। वहीं महामृत्युंजय रूप में शिव अनेक रोगों का भी हरण करते हैं। शिव एक मात्र ऐसे परमबह्म हैं, जो साधक की कामना से क्षण भर में प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्राप्ति का वर दे देते हैं।

शारीरिक पीड़ा, अकाल मृत्यु दूर करने के लिए
अनेक जातकों की कुंडली में कुछ ऐसे अशुभ योग होते हैं, जिनके कारण उनकी आकस्मिक मृत्यु या उन्हें आकस्मिक मृत्युतुल्य कष्ट होता है। ऐसी स्थिति में शिवपूजा से ही समस्त बाधाओं का निवारण किया जा सकता है। शिवरात्रि के दिन शिव भगवान की प्रतिमा और महामृत्युंजय यंत्र को लाल रंग के वस्त्र पर बिछाकार रखें, उसके बाद विधि-विधान से उसकी पूजा अर्चना कर इस मंत्र का जाप करें- ओम हौं जूं: स: ओम भूर्भव: स्व: ओम त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम् पुष्टिवद्र्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्युर्मुक्षीय मामृतात्। ओम स: भूर्भव: भू: ओम स: जूं: हौम ओम । मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 

व्यापार बाधा की समाप्ति के लिए 
अक्सर यह देखने में आता है कि किसी जातक का अच्छा चलता हुआ व्यवसाय रूक जाता है। कभी-कभी व्यवसाय में विशेष हानि हो जाती है। इन समस्त समस्याओं का निवारण शिवरात्रि के दिन शिव के आशीर्वाद स्वरूप से ही हो जाता है। इसके लिए व्यापार वृद्धि यंत्र लगाकर पूजा करें। इस मंत्र की एक माला का जाप करें। ओम हृीं क्लीं नित्य दर्शनाय क्लीं हृीं ओम । माला जपने के बाद व्यापार वृद्धि यंत्र को व्यापार क्षेत्र में स्थापित करें।

मानसिक बाधा, चिंता दूर करने के लिए 
आज के दौर में ज्यादातर लोग डिप्रेशन, मानसिक चिंता और सिरदर्द जैसे कई रोगों से परेशान रहते हैं। मानसिकता का संकीर्ण होना किसी कार्य में मन नहीं लगना, दिन भर व्यर्थ में घूमना। इस तरह के विकारों से बचने के लिए शिव पूजा करना अति श्रेष्ठ होता है। इसके लिए पारद शिवलिंग की पूजा करें। उसके बाद निम्न मंत्र की एक माला का जाप करें। ओम सदाशिव भव फट। एक माला जप करने के बाद पारद शिवलिंग को पूजाकक्ष में स्थापित करें। नित्य प्रति शिवपूजा करें। ऐसा करने से अशुभ फलों से निवारण संभव होता है। 

मुकदमेबाजी और कलह से छुटकारा 
कभी-कभी अनायास ही कुछ लोग मुकदमेबाजी में फंस जाते हैं। केसबाजी में कई लोगों को कभी-कभी बेहद तकलीफ भी उठानी पड़ती है। पारिवारिक या पैतृक सम्पत्ति के लिए घर में कलह होता है, मुकदमेबाजी होती है। यदि कोई जातक इस तरह की भयानक समस्या से पीडि़त हो तो पांचमुखी रूद्राक्ष की माला का प्रयोग करके निम्न मंत्र से शिव की पूजा करना अतिश्रेष्ठ होता है। ओम क्रीं नम: शिवाय क्रीं । इस मंत्र की माला जप पांचमुखी रूद्राक्ष माला से करें और फिर उसे गले में धारण करें। सभी अशुभ फलों में कमी होकर शुभ फल प्राप्त होंगे।




कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए 
कालसर्प दोष की मुक्ति के लिए शिवरात्रि के दिन भोर के समय शिवमंदिर में जाकर शिवलिंग पर सबसे पहले दूध और फिर जल से स्नान करवाएं। शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। पूजा की आखिर में धतूरा चढ़ाते हुए निम्न मंत्र की एक माला का जाप करें। नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गराय महेश्वराय, नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नम: शिवाय। इससे कालसर्प के अशुभ दोष से मुक्ति मिलती है। 

इच्छित कार्य की पूर्ति के लिए 
मनोकामना पूरी करने के लिए शिवरात्रि के दिन हल्दी की तीन पुडिय़ा बनाएं। शिव-पार्वती की तस्वीर के सामने अपनी समस्या के निवारण के लिए संकल्प करें। उसके बाद एक पुडिय़ा पार्वती माता के चरणों में रखें। दूसरी पुडिय़ा को जल में प्रवाहित करें। तीसरी पुडिय़ा हमेशा अपने पास रखें। ऐसा करने से निश्चित रूप से समस्त इच्छित कार्यो की पूर्ति होगी। इच्छा पूर्व होने के बाद पार्वती मां के चरणों में रखी पुडिय़ा और स्वयं के पास रखी पुडिय़ा, दोनों को मिलाकर जल में प्रवाहित करें।










बुधवार, 31 जनवरी 2018

चंद्रग्रहण 2018 किन 9 राशि के जातक पर भारी पड़ेगा



Chandra Grahan 2018: आज साल 2018 का पहला चंद्रग्रहण हो रहा है। आज के इस चंद्रग्रहण पर एक विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन 176 साल बाद पुष्य नक्षत्र का योग बन रहा है। साथ ही इस दिन चांद सामान्य से 14 प्रतिशत बड़े आकार में और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिखाई देगा। इस ग्रहण से 12 राशियों पर अलग-अलग असर पड़ेगा। लेकिन 9 राशियों पर इसका असर ज्यादा रहेगा। आइए जानते हैं किन 9 राशि के जातक पर भारी पड़ेगा यह चंद्रग्रहण-

1. मिथुन- मिथुन राशि के जातक को आज के दिन थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। आज आपको पैसों की तंगी से परेशान होना पड़ सकता है। आर्थिक निवेश करने के लिए आज का समय अनुकूल नहीं है। किसी जरुरी काम से बाहर जा सकते हैं लेकिन वह काम पूरा नहीं हो पाएगा।

2. कर्क – कर्क राशि के जातक को आज सावधान रहना होगा। आज वाहन चलाते समय सावधानी अधिक बरतें। आज के दिन आपको चोट लग सकती है या किसी अन्य बीमारी की चपेट में आ सकते हैं इसलिए आज इन बातों का ध्यान रखें। जल्दबाजी से बचें।


3. सिंह – चंद्र ग्रहण से सिंह राशि के जातक को आर्थिक परेशानी हो सकती है। मानसिक परेशानी हो सकती है। परिवार में अशांति का माहौल रहेगा। किसी के साथ झगड़ा हो सकता है। आर्थिक नुकसान हो सकता है।

4. तुला – तुला राशि के लिए ग्रहण ठीक नहीं होगा। किसी काम को पूरा करने के लिए आज आपको अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। पारिवारिक समस्याएं हो सकती है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। मानसिक तनाव से ग्रस्त रहेंगे।

5. वृश्चिक – ग्रहण के प्रभाव से आपको परेशानी हो सकती है। आपके कार्य में बाधा आ सकती है। गलतफहमी का शिकार हो सकते हैं। भाग्य के भरोसे रहने से काम में देरी या असफल हो सकते हैं।


6. धनु – ग्रहण से धनु राशि के जातक को काम में अनेक चुनौतियां का सामना करना पड़ सकता है। आज आकस्मिक धन हानि हो सकती है। कानूनी मामलों में परेशानी हो सकती है या मुश्किलें में घिर सकते हैं।

7. मकर – मकर राशि के जातक पर ग्रहण का असर उनके दांपत्य जीवन पर पड़ेगा। नौकरी में समस्याएं आ सकती है। कारोबार में नुकसान हो सकता है। आर्थिक परेशानी आ सकती है। जीवनसाथी के साथ मनमुटाव हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।

8. कुंभ – कुंभ राशि के जातक की आज सेहत खराब हो सकती है। आर्थिक तंगी से परेशान होना पड़ सकता है। कार्य में अधिक परिश्रम करना पड़ेगा।

9. मीन – आज आपके खर्चे बढ़ सकते हैं। नौकरी में कार्यभार बढ़ सकता है। आर्थिक नुकसान हो सकता है। किसी से वाद-विवाद होने की संभावना है। किसी से विश्वासघात मिल सकता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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मंगलवार, 30 जनवरी 2018

अष्टभुजा धाम इस मंदिर में बिना सिर वाली मूर्तियों की होती है पूजा



उत्तरप्रदेश के एक ऐसे मंदिर के बारे में, जहां देवी-देवताओं की ज्यादातर मूर्तियों पर सिर ही नहीं है। वैसे तो लोग खंडित मूर्तियों की पूजा नहीं करते हैं, लेकिन यहां इन मूर्तियों को 900 सालों से संरक्षित किया जा रहा है और इनकी पूजा भी की जाती है।

यह मंदिर उत्तरप्रदेश की राजधानी से 170 किमी दूर प्रतापगढ़ के गोंडे गांव में स्तिथ है। यह मंदिर लगभग 900 साल पुराना हैं। अष्टभुजा धाम मंदिर की मूर्तियों के सिर औरंगजेब ने कटवा दिए थे। शीर्ष खंडित ये मूर्तियां आज भी उसी स्थिति में इस मंदिर में संरक्षित की गई हैं।

ASI के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, मुगल शासक औरंगजेब ने 1699 ई. में हिन्दू मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया था। उस समय इसे बचाने के लिए यहां के पुजारी ने मंदिर का मुख्य द्वार मस्जिद के आकार में बनवा दिया था, जिससे भ्रम पैदा हो और यह मंदिर टूटने से बच जाए।

मुगल सेना इसके सामने से लगभग पूरी निकल गई थी, लेकिन एक सेनापति की नजर मंदिर में टंगे घंटे पर पड़ गई। फिर सेनापति ने अपने सैनिकों को मंदिर के अंदर जाने के लिए कहा और यहां स्थापित सभी मूर्तियों के सिर काट दिए गए। आज भी इस मंदिर की मूर्तियां वैसी ही हाल में देखने को मिलती हैं।

मंदिर की दीवारों, नक्काशियां और विभिन्न प्रकार की आकृतियों को देखने के बाद इतिहासकार और पुरातत्वविद इसे 11वीं शताब्दी का बना हुआ मानते हैं। गजेटियर के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण सोमवंशी क्षत्रिय घराने के राजा ने करवाया था। मंदिर के गेट पर बनीं आकृतियां मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर से काफी मिलती-जुलती हैं।

इस मंदिर में आठ हाथों वाली अष्टभुजा देवी की मूर्ति है। गांव वाले बताते हैं कि पहले इस मंदिर में अष्टभुजा देवी की अष्टधातु की प्राचीन मूर्ति थी। 15 साल पहले वह चोरी हो गई। इसके बाद सामूहिक सहयोग से ग्रामीणों ने यहां अष्टभुजा देवी की पत्थर की मूर्ति स्थापित करवाई।

इस मंदिर के मेन गेट पर एक विशेष भाषा में कुछ लिखा है। यह कौन-सी भाषा है, यह समझने में कई पुरातत्वविद और इतिहासकार फेल हो चुके हैं। कुछ इतिहासकार इसे ब्राह्मी लिपि बताते हैं तो कुछ उससे भी पुरानी भाषा का, लेकिन यहां क्या लिखा है, यह अब तक कोई नहीं समझ सका।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

समस्याओं को दूर करने के ज्योतिषीय उपाय

समस्याओं को दूर करने के ज्योतिषीय उपाय 


व्यक्ति के जीवन में कुछ न कुछ समस्याएं जरूर रहती हैं। कभी कोई समस्या जल्दी खत्म हो जाती है तो कोई समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। कुछ लोग इसे अपना दुर्भाग्य समझने लगते हैं। इन समस्याओं का निदान छोटे-छोटे ज्योतिषीय उपाय करने से हो सकता है। जरूरत है तो बस उन पर पूरी तरह विश्वास करने की। आज हम आपको ऐसे ही छोटे-छोटे उपायों के बारे में बता रहे हैं जो आपके दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकते हैं।

1. लगातार धन हानि हो रही हो और असफलता पीछा नहीं छोड़ रही हो तो परेशान व्यक्ति के सिर से पैर तक एक लाेटा पानी 7 बार उतारें। कर पानी सहीत वो लोटा श्मशान में गाड़ दें।
2. किसी काम के लिए घर से निकलते वक्त पहले विपरीत यानी उल्टी दिशा में 4 कदम चलें।
3. सोमवार या शुक्रवार को मछलियों के लिए आटे की गोलियां बना कर नदी या तालाब में डालें
4. रोज हनुमान जी की मूर्ति के बाएं पैर का सिंदूर सिर पर लगाएं। रोज न हो पाए तो मंगलवार और शनिवार को करें।
5. सरसों के तेल में मीठे भजिए तलें और गरीबों को बांट दें।
6. अपने खाने की थाली में से एक रोटी गाय और एक कुत्ते के लिए निकालें।
7. आधे सुखे नारियल में चीनी भरकर कच्ची जमीन में दबा दें। सारी परेशानियां खत्म हो जाएंगी।जिस बर्तन से घर के लोग पानी पीते हैं उसमें से थोड़ा-सा पानी लेकर उसमें गंगा जल मिलाकर घर के चारों कोनों में छींट दें। बचा हुआ पानी घर के बीच वाले स्थान पर डाल दें। ये उपाय सूर्योदय के समय करें।


शनिवार, 13 जनवरी 2018

लोहडी क्यों और कब मनाई जाती है इसकी कुछ रोचक बाते

लोहडी क्यों और कब मनाई जाती है इसकी कुछ रोचक बाते


 लोहडी को पंजाबी और हरियाणवी लोग बहुत उल्लास से मनाते हैं। पारंपरिक तौर पर लोहडी फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुडा एक विशेष त्यौहार है। यह मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति की पूर्वसंध्या पर इस त्यौहार का उल्लास रहता है। इन दिनों देशभर में पतंगों का ताता लगा रहता हैं। देश में भिन्न-भिन्न मान्यताओं के साथ इन दिनों त्योहार का आनंद लिया जाता है। इस दिन सभी अपने घरों और चौराहों के बाहर लोहड़ी जलाते हैं। आग का घेरा बनाकर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाते हुए रेवड़ी, मूंगफली और लावा खाते हैं। इस दिन सब एक-दूसरे से मिलकर इस खुशी को बाटते है।

कब मनाया जाता हैं लोहडी का त्योहार
लोहडी पौष माह की अंतिम रात को एवम मकर संक्राति की सुबह तक मनाया जाता हैं यह 12 अथवा 13 जनवरी को प्रति वर्ष मनाया जाता हैं। इस साल 2018 में यह त्यौहार 13 जनवरी, दिन शनिवार को मानाया जायेगा।

कैसे मनाते हैं लोहड़ी--
पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुडा एक विशेष त्यौहार है। इस दिन अलाव जलाकर उसके इर्दगिर्द डांस किया जाता है। लउके भांगडा करते है और लडकियां और महिलाएं गिद्धा करती है। इस दिन विवाहिता पुत्रियों को मां के घर से त्योहार (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है। वहीं, जिन परिवारों में लडक़े का विवाह होता है या जिन्हें पुत्र प्राप्ति होती है, उनसे पैसे लेकर मुहल्ले या गांव भर में बच्चे ही रेवड़ी बांटते हैं।

क्यों मनाया जाता लोहडी है-
यह त्योहार सर्दियों के जाने और बंसत के आने का संकेत है। इसलिए लोहड़ी की रात सबसे ठंडी मानी जाती है। इस दिन पंजाब में अलग ही रौनक देखने को मिलती है। लोहड़ी को फसलों का त्योहार भी कहते हैं क्योंकि इस दिन पहली फसल कटकर तैयार होती है। पवित्र अग्नि में कुछ लोग अपनी रवि फसलों को अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से फसल देवताओं तक पहुंचती है।

कहां से आया लोहड़ी शब्द--
अनेक लोग मानते हैं कि लोहड़ी शब्द लोई (संत कबीर की पत्नी) से उत्पन्न हुआ था, लेकिन कई लोग इसे तिलोडी से उत्पन्न हुआ मानते हैं, जो बाद में लोहडी हो गया। वहीं, कुछ लोग यह मानते है कि यह शब्द लोह’ से उत्पन्न हुआ था, जो चपाती बनाने के लिए प्रयुक्त एक उपकरण है।

पौराणिक एवम एतिहासिक कथा--
पुराणों के आधार पर इसे सती के त्याग के रूप में प्रतिवर्ष याद करके मनाया जाता हैं। कथानुसार जब प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के पति महादेव शिव का तिरस्कार किया था और अपने जामाता को यज्ञ में शामिल ना करने से उनकी पुत्री ने अपनी आपको को अग्नि में समर्पित कर दिया था। उसी दिन को एक पश्चाताप के रूप में प्रति वर्ष लोहडी पर मनाया जाता हैं और इसी कारण घर की विवाहित बेटी को इस दिन तोहफे दिये जाते हैं और भोजन पर आमंत्रित कर उसका मान सम्मान किया जाता हैं। इसी खुशी में श्रृंगार का सामान सभी विवाहित महिलाओ को बांटा जाता हैं।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शनिवार, 6 जनवरी 2018

भगवान शिव को क्यों कहते है नीलकंठ

भगवान शिव को क्यों कहते है नीलकंठ

भगवान शिव का ध्यान करने से ही एक ऐसी छवि उभरती है जिसमें वैराग है। इस छवि के हाथ में त्रिशूल, वहीं दूसरे हाथ में डमरु, गले में सांप और सिर पर त्रिपुंड चंदन लगा हुआ है। किसी भी शिव मंदिर या मूर्ति में भगवान शिव के पास ये चार चीजें हमेशा मिलती हैं। कई सवाल इसके साथ जुड़े हैं कि भगवान शिव के साथ ही ये सब चीजें प्रकट हुई थी। इन सवालों का ये भी उत्तर हो सकता है कि समय के साथ और अलग-अलग घटनाओं के साथ भगवान शिव के साथ ये सब जुड़ता गया हो। भगवान शिव की जटाओं में अर्ध चंद्रमा, सिर से निकलती गंगा आदि ऐसी कितनी बातें हैं जो भगवान शिव को रहस्यमयी बनाती हैं। इसी के साथ भगवान शिव का कंठ नीला पाया जाता है और उन्हें नीलकंठ नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव के नीले कंठ वाले बनने के पीछे एक कथा प्रचलित है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि क्षीरसागर के मंथन के समय कई महत्वपूर्ण वस्तुएं प्रकट हुई थी जैसे कल्पवृक्ष, कामधेनु गाय आदि प्रकट हुए और उन्हें देवों और राक्षसों के बीच बांटा गया। क्षीरसागर से अमृत प्राप्त होने पर देवताओं ने चलाकी से उसे ले लिया था। मंथन के दौरान सागर में से भयंकर विष निकला, ये इतना शक्तिशाली था कि उसकी एक बूंद से पूरा संसार नष्ट हो सकता था। इससे सभी देवता और राक्षस डर गए और उनमें प्राण बचाने के लिए खलबली मच गई थी। इसका हल पाने के लिए सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना करी।

संसार की समस्या से निपटने के लिए भगवान शिव ने विष का पान कर लिया। इस विष को गले से नीचे ना जाने देने के लिए माता पार्वती भगवान शिव के गले में विराजमान हो गई। जिसके कारण भगवान शिव का गला नीला हो गया और उसके बाद से उन्हें नीलकंठ के नाम से जाना जाने लगा। संपूर्ण मानव जाति की रक्षा के लिए भगवान शिव ने विष को ग्रहण कर लिया था।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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धन की कमी दूर करने के उपाय



शास्त्रानुसार प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रात: दस बजे पीपल वृक्ष पर मां लक्ष्मी का फेरा लगता है। इसलिए जो व्यक्ति आर्थिक रूप से परेशान हो, वो इस समय पीपल के वृक्ष के पास जाये, उसका पूजन करें, जल चढ़ाये और लक्ष्मी जी की उपासना करे और कम-से-कम कोई भी एक लक्ष्मी मंत्र की एक माला करके आएं।
किसी भी शुभ मुहूर्त या अक्षय तृतीया या पूर्णिमा या दीपावली या किसी अन्य मुहूर्त में सुबह जल्दी उठें। सभी आवश्यक कार्यों से निवृत्त होकर लाल रेशमी कपड़ा लें। अब उस लाल कपड़े में चावल के 21 दानें रखें। ध्यान रहें चावल के सभी 21 दानें पूरी तरह से अखंडित होना चाहिए यानि कोई टूटा हुआ दान न रखें। उन दानों को कपड़े में बांध लें। इसके बाद धन की देवी माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजन करें। पूजा में यह लाल कपड़े में बंधे चावल भी रखें। पूजन के बाद यह लाल कपड़े में बंधे चावल अपने पर्स में छुपाकर रख लें। ऐसा करने पर कुछ ही समय में धन संबंधी परेशानियां दूर होने लगेंगी।

ध्यान रखें कि पर्स में किसी भी प्रकार की अधार्मिक वस्तु कतई न रखें। इसके अलावा पर्स में चाबियां नहीं रखनी चाहिए।
सिक्के और नोट अलग-अलग व्यस्थित ढंग से रखे होने चाहिए। किसी भी प्रकार की अनावश्यक वस्तु पर्स में न रखें। इन बातों के साथ ही व्यक्ति को स्वयं के स्तर भी धन प्राप्ति के लिए पूरे प्रयास करने चाहिए।

पैसों का कोई जुगाड़ न बन रहा हो तथा घर में दरिद्रता का वास हो तो एक पानी भरे घड़े में राई के पत्ते डालकर इस जल को अभिमंत्रित करके जिस भी किसी व्यक्ति को स्नान कराया जाएगा उसकी दरिद्रता रोग नष्ट हो जाते हैं।

किसी भी सप्ताह के रविवार को एक गिलास दूध का तांत्रिक उपाय करेंगे तो आप पैसों का सुख प्राप्त करने लगेंगे। यह तांत्रिक उपाय करने के लिए आपको रविवार की रात को सोते समय 1 गिलास में दूध भरकर अपने सिर के पास रखकर सोना है। इसके लिए ध्यान रखें कि नींद में दूध ढुलना नहीं चाहिए। सुबह उठने के बाद नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद इस दूध को किसी बबूल के पेड़ की जड़ में डाल दें। ऐसा हर रविवार की रात की करें। यह एक तांत्रिक उपाय है और इससे आपके ऊपर लगी बुरी नजर दूर होगी। नकारात्मक शक्तियों का असर खत्म होगा और कार्यों में सफलता मिलने लगेगी। पैसों की कमी दूर हो जाएगी।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

Some Vastu Tips



धार्मिक ग्रंथों के अनुसार फल खूब खाओ लेकिन उसके छिलके कूडादान में ना डालें बल्कि बाहर फेंकें। हालांकि ऐसा करना अच्छा नहीं माना जाता लेकिन ऐसा करने से मित्रों का भरपूर सहयोग मिलने लगता है।

माह में एक बार किसी भी दिन घर में मिश्री युक्त खीर जरुर बनाकर परिवार सहित एक साथ खाएं अर्थात जब पूरा परिवार घर में इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं तो मां लक्ष्मी की जल्दी कृपा होती है।

माह में एक बार अपने कार्यालय में भी कुछ मिष्ठान जरुर ले जाएं, उसे अपने साथियों के साथ या अपने अधीन नौकरों के साथ मिलकर खाए तो धन लाभ होगा।

रात में सोने से पहले रसोई में बाल्टी भरकर रखें इससे क़र्ज़ से शीघ्र मुक्ति मिलती है और यदि बाथरूम में बाल्टी भरकर रखेंगे तो जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधा नहीं आएगी।

वृहस्पतिवार के दिन घर में कोई भी पीली वस्तु अवश्य खाएं हरी वस्तु ना खाएं तथा बुधवार के दिन हरी वस्तु खाएं लेकिन पीली वस्तु बिलकुल ना खाएं इससे सुख समृद्धि बढ़ेगी।

कभी भी अपने मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान ना रखें, इससे आपके पड़ोसी भी आपके शत्रु होने लगेंगे और आपका नुकसान करेंगे।

ध्यान रखें कि सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध, दही या प्याज मांगने पर ना दें इससे घर की बरकत समाप्त हो जाती है और दरिद्रता का वास होता है।

शास्त्रों के अनुसार घर की छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं। इनको सुखा जरूर सकते हैं। कहते हैं कि ऐसा करने से ससुराल से सम्बन्ध खराब होने लगते हैं।

रात्रि को झूठे बर्तन कदापि ना रखें इसे पानी से निकाल कर रख सकते है हानि से बचोगें।

स्नान के बाद गीले या एक दिन पहले के प्रयोग किये गये तौलिये का प्रयोग ना करें इससे संतान हठी व परिवार से अलग होने लगती है अपनी बात मनवाने लगती है अतः रोज़ साफ़ सुथरा और सूखा तौलिया ही प्रयोग करें।

कभी भी यात्रा में पूरा परिवार एक साथ घर से ना निकलें आगे पीछे जाएँ इससे यश की वृद्धि होग।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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रविवार, 24 दिसंबर 2017

नारियल को पूजा में क्यों चढ़ाया जाता है और इसे फोडऩे का कारण

नारियल को पूजा में क्यों चढ़ाया जाता है और इसे फोडऩे का कारण


हिन्दू धार्मिक के अनुसार प्रयोग किये जाने वाली वस्तु जैसे चावल, रोली, आम के पत्ते, तिल, इत्र, नारियल आदि हर एक वस्तु का अपना महत्व है। कोई भी व्यक्ति जब अपना नया व्यवसाय शुभारंभ करते है तो वह मूर्ति के सामने नारियल फोडते। चाहे शादी हो, त्योहार हो या फिर कोई महत्वपूर्ण पूजा, पूजा की सामग्री में नारियल आवश्यक रूप से रहता है। भारतीय सभ्यता में, पूजा-पाठ में नारियल को शुभ और मंगलकारी माना गया है।

संस्कृत में नारियल को ‘श्रीफल’ कहते है जिसमे ‘श्री’ का अर्थ लक्ष्मी। हिन्दू धर्म की पौराणिक परम्परा के अनुसार, लक्ष्मी के बिना कोई भी शुभ कार्य पूरा नही होता है। संस्कृत में नारियल के पेड़ को ‘कल्पवृक्ष’ कहते है। माना जाता है कि ‘कल्पवृक्ष’ सभी की मनोकामनाओ को पूरा करता है इसलिए शुभ कार्यो और पूजा में नारियल का उपयोग होता है पूजा के बाद नारियल को फोड़ कर सबको प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

पंडितो का कहना है कि नारियल को तोडना मानव के अहंकार को तोडना जैसा बताया गया है। नारियल का बाहर का खोल अहंकार की तरह ठोस और कडक़ होता है। खोल को जब तक तोड़ नही दिया जाये तो न वो किसी गुण को अंदर जाने देता है और न ही बाहर आने देता है। 

अपने कभी ध्यान दिया होगा कि नारियल की ऊपर के हिस्से पर तीन निशान होते है। माना है कि ये भगवान शिव की तीन आँखे है और लोगों का माना है कि ये ब्रह्मा, विष्णु, महेश है। और नारियल को तांबे के लोटे पर रखकर उस पर लाल कपड़ा चढ़ा कर त्रिदेवो की पूजा करते है। भगवान से प्रार्थना करते है कि अपनी दृष्टी और कृपा हम पर बनाये रखे।

भगवान के चरणों में नारियल चढ़ाने से बुरी शक्ति, राहु और शनि की महादशा, वित्तीय समस्याएं, काला जादू आदि शक्ति का नाश होता है। पूजा के बाद नारियल का प्रसाद इसलिए बांटा जाता कि भगवान के चरणों में आने से नारियल पवित्र हो जाता है और जब कोई भक्त उसे ग्रहण करता है उसका मन पवित्र हो जाता है।

नारियल को हमारे सिर का प्रतीक माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य करने पहले हम नारियल को फोडक़र अहंकार को चूर कर भगवान से प्रार्थना करते है कि दुनिया भर की अच्छाइयां को देख सके और ज्ञान का विकास हो।
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गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

बजरंग बाण के कुछ ख़ास उपाय


 बजरंगबली बड़ी ही जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता है और इनकी पूजा आराधना करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। चाहे समस्या कितनी भी बड़ी हो अगर हनुमानजी की सच्चे मन से स्मरण करें तो हर समस्या सुलझ सकती है। बजरंग बाण का पाठ करने से कई तरह के कष्टों से मुक्ति मिल सकती है, आइए जानते है बजरंग बाण के कुछ ऐसे ही ख़ास उपाय।
1. विवाह में आ रही बाधा खत्म करने के लिए
कदली वन, या कदली वृक्ष के नीचे बजरंग बाण का पाठ करने से विवाह की बाधा खत्म हो जाती है। यहां तक कि तलाक जैसे कुयोग भी टलते हैं बजरंग बाण के पाठ से।

2. ग्रहदोष समाप्ति के लिए
अगर किसी प्रकार के ग्रहदोष से पीड़ित हों, तो प्रात:काल बजरंग बाण का पाठ, आटे के दीप में लाल बत्ती जलाकर करें। ऐसा करने से बड़े से बड़ा ग्रह दोष पल भर में टल जायेगा।


3. साढ़ेसाती-राहु आदि के दोष दूर करने के लिए
अगर शनि,राहु,केतु जैसे क्रूर ग्रहों की दशा,महादशा चल रही हो तो उड़द दाल के 21 या 51 बड़े एक धागे में माला बनाकर चढ़ायें। सारे बड़े प्रसाद के रुप में बांट दें। आपको तिल के तेल का दीपक जलाकर सिर्फ 3 बार बजरंगबाण का पाठ करना होगा।

4. बजरंगबाण से कारागार से मुक्ति
अगर किसी कारणवश जेल जाने के योग बन रहे हों, या फिर कोई संबंधी जेल में बंद हो तो उसे मुक्त कराने के लिए हनुमान जी की पूंछ पर सिंदूर से 11 टीका लगाकर 11 बार बजरंग बाण पढ़ने से कारागार योग से मुक्ति मिल जाती है। अगर आप हनुमान जी को 11 गुलाब चढ़ाते हैं या फिर चमेली के तेल में 11 लाल बत्ती के दीपक जलाते हैं तो बड़े से बड़े कोर्ट केस में भी आपको जीत मिल जायेगी।


5. सर्जरी और गंभीर बीमारी टालने के लिए
कई बार पेट की गंभीर बीमारी जैसे लीवर में खराबी, पेट में अल्सर या कैंसर जैसे रोग हो जाते हैं, ऐसे रोग अशुभ मंगल की वजह से होते हैं। अगर इस तरह के रोग से मुक्ति पानी हो तो हनुमान जी को 21 पान के पत्ते की माला चढ़ाते हुए 5 बार बजरंग बाण पढ़ना चाहिये। ध्यान रहे कि बजरंगबाण का पाठ राहुकाल में ही करें। पाठ के समय घी का दीप ज़रुर जलायें।

6. छूटी नौकरी दोबारा प्राप्त करने के लिए
अगर नौकरी छूटने का डर हो या छूटी हुई नौकरी दोबारा पानी हो तो बजरंगबाण का पाठ रात में नक्षत्र दर्शन करने के बाद करें। इसके लिए आपको मंगलवार का व्रत भी रखना होगा। अगर आप हनुमान जी को नारियल चढ़ाने के बाद, उसे लाल कपड़े में लपेट कर घर के आग्नेय कोण रखते हैं तो मालिक स्वयं आपको नौकरी देने आ सकता है।


7. वास्तुदोष दूर करने के लिए
कई बार घर में वास्तुदोष के चलते कई समस्या हो जाती है। तो घर में वास्तुदोष दूर करने के लिए 3 बार बजरंगबाण का पाठ करना चाहिए। हनुमान जी को लाल झंडा चढ़ाने के बाद उसे घर के दक्षिण दिशा में लगाने से भी वास्तुदोष से मुक्ति मिलती है। घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा घर के मुख्य द्वार पर लगायें।

8. बजरंग बाण से दवा असर करे
कई बार गंभीर बीमारी में दवा फायदा नहीं करती। दवा फायदा करे इसके लिए 2 बार बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। साथ ही साथ संजीवनी पर्वत की रंगोली बनाकर उस पर तुलती के 11 दल चढ़ाने से दवा धीरे धीरे असर करने लगती है।

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शनिवार, 16 दिसंबर 2017

तांबे की अंगूठी पहनने से फायदे



ग्रहों का राजा सूर्य है और सूर्य की धातु है तांबा। हिन्दू धर्म में सोना, चांदी और तांबा, ये तीनों धातुएं पवित्र मानी गई हैं। इसीलिए पूजा-पाठ में इन धातुओं का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा इनकी अंगूठी भी काफी लोग पहनते हैं। यहां जानिए तांबे की अंगूठी पहनने से कौन-कौन से लाभ मिलते हैं…


1. सूर्य के साथ ही तांबे की अंगूठी से मंगल के अशुभ असर भी कम हो सकते हैं।

2. तांबे की अंगूठी सूर्य की उंगली यानी रिंग फिंगर में पहननी चाहिए। इससे कुंडली में सूर्य के दोषों का असर कम हो सकता है।

3. तांबे की अंगूठी के प्रभाव से सूर्य का बल बढ़ता है, जिससे हमें सूर्य देव की कृपा से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलता है।

4. तांबे की अंगूठी लगातार हमारे शरीर के संपर्क में रहती है। जिससे तांबे के औषधीय गुण शरीर को मिलते हैं। इससे खून साफ होता है।


5. जिस प्रकार तांबे के बर्तन में रखा पानी स्वास्थ्य को लाभ पहुंचात है, ठीक उसी प्रकार तांबे की अंगूठी से भी फायदा मिलता है।

6. तांबे की अंगूठी के असर से पेट से जुड़ी बीमारियों में भी राहत मिल सकती है।


7. तांबा लगातार त्वचा के संपर्क में रहता है, जिससे त्वचा की चमक बढ़ती है।

8. आयुर्वेद के अनुसार तांबे के बर्तनों का उपयोग करने से हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यही लाभ तांबे की अंगूठी पहनने से भी मिलता है।

9. तांबे की अंगूठी पेट से संबंधित सभी समस्याओं में काफी फायदेमंद है यह पेट दर्द, पाचन में गड़बड़ी और एसिडिटी की समस्याओं में फायदा पहुंचाती है। इसके अलावा अगर आप पेचिश की समस्या से परेशान हैं तो तांबे की अंगूठी इस समस्या में आपकी काफी मदद कर सकती है।

10. तांबे की अंगूठी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। ये हाई ब्लड प्रेशर या लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसके अलावा इस अंगूठी को पहनकर आप शरीर के सूजन को भी कम कर सकते हैं।

11. तांबे की अंगूठी शरीर की गर्मी को कम करने में मदद करता है। इसे पहनने से शारीरिक और मानसिक तनाव कम होता है। इसके साथ ही गुस्से पर नियंत्रण होता है. ये अंगूठी तन और मन दोनों को शांत रखने में मदद करता है।
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बुधवार, 13 दिसंबर 2017

सुख-शांति और धन पाने के उपाय

सुख-शांति और धन पाने के उपाय


सुबह उठकर सबसे पहले घर की मालकिन अगर एक लोटा पानी घर के मुख्य द्वार पर डालती है तो घर में लक्ष्मी देवी के आने का रास्ता खुल जाता है।

अगर आप चाहते हैं कि घर में सुख-शांति बनी रहे तो हर एक अमावस के दिन घर की अच्छी तरह सफाई करके (बेकार सामान घर में न रखें) कच्ची लस्सी का छींटा देकर 5 अगरबत्ती जलाइए।

महीने में 2 बार किसी भी दिन घर में उपला जलाकर लोबान व गूगल की धूनी देने से घर में ऊपरी हवा का बचाव रहता है तथा बीमारी दूर होती है।


घर में कर्ज व बीमारी कभी समाप्त नहीं होती है तो इससे बचने के लिए इस कोने में एक लाल बल्ब जला दें, जो हर वक्त जलता रहे।

घर में पैसा, सोना और बेशकीमती सामग्री रखने वाली अलमारी का मुंह उत्तर की तरफ रखें, ऐसा करने से घर में लक्ष्मी बढ़ती है।


किसी रोज संध्याकाल में गाय का कच्चा दूध मिट्टी के किसी बर्तन में भरकर बाएं हाथ से घर के सबसे छोटे बच्चे के सिर से सात बार उतारकर चौराहे पर रख आएं या किसी कुत्ते को पिला दें।

घर से किसी भी कार्य या यात्रा के लिए निकलते समय पहले विपरीत दिशा में 4 पग जाएं, इसके बाद कार्य या यात्रा पर चले जाएं, यात्रा सफल होगी और कार्य जरूर बनेगा।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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सोमवार, 11 दिसंबर 2017

दूध के इन उपाय से सब परेशानी दूर



dudh

प्राचीन तांत्रिक ग्रंथों में बताए गए दूध के ऐसे ही टोने-टोटकों के बारे में जिन्हें करते ही असर दिखता है और आपकी समस्या तुरंत दूर होने लगती हैं।

अगर कुंडली में कोई भी ग्रह बुरा असर दे रहा है तो सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठें।

उसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान आदि कर अपने आसपास के शिव मंदिर में जाएं तथा वहां शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं। लगातार सात सोमवार तक इस उपाय को करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही कुंडली में कोई भी ग्रह बुरा असर दे रहा होता है, वो भी टल जाता है।

नजर दूर करने तथा अमीर बनने के लिए रविवार की रात सोते समय 1 गिलास में दूध भरकर अपने सिर के पास रखकर सो जाएं। ध्यान रखें, यह दूध फैलना नहीं चाहिए। अगले दिन सुबह उठने के बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर इस दूध को किसी बबूल के पेड की जड़ में डाल दें। ऐसा हर रविवार रात करें। जिस आदमी पर इस उपाय को करेंगे, उसकी नजर दूर होगी और उसके सारे काम बनते चले जाएंगे। 

घर में लक्ष्मी के स्थाई वास के लिए एक लोहे के बर्तन में जल, चीनी, दूध तथा घी मिला लें। इसे पीपल के पेड़ की छाया के नीचे खड़े होकर पीपल की जड़ में डाले। इससे घर में लक्ष्मी का वास होता है। 

अगर कुंडली में गुरु ग्रह अपना बुरा असर दे रहा हो तो वक्री हो तो दूध में चीनी तथा केसर या हल्दी मिला कर शाम के समय शिवलिंग पर ऊँ नमः शिवायः का जाप करते हुए चढ़ाएं। गुरु अपना अशुभ असर त्याग कर शुभ फल देने लगेगा
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गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

चावल का एक ऐसा उपाय को करने से कुछ ही दिनों में धन लाभ



पूजा की विभिन्न सामग्रियोंमनी प्रॉब्लम दूर करने के लिए करे पीले चावलों का यह उपाय में से ही एक है अक्षत यानि चावल। चावल का उपयोग हर छोटी से लेकर बड़ी पूजा या हवन सामग्री में होता है। यही कारण है की ज्योतिषीय उपायों में भी चावल का बहुत महत्व है आइए जानते हैं चावल का एक ऐसा उपाय जो पैसों से जुड़ी हर तरह की दिक्कतों को खत्म कर सकता है।

किसी भी शुभ दिन, जैसे शुक्रवार या किसी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें। नहाने के बाद मां महालक्ष्मीजी की तस्वीर या मूर्ति के सामने अपना आसन लगा लें।अब कुल 21 पीले चावल लें और उसे लाल रंग के रेशमी कपड़े में बांधकर छोटी-सी पोटली बना लें। इस पोटली को पूजा के दौरान लक्ष्मी मां के सामने रख दें।


पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी जी की पूजा खत्म करने के बाद यह पोटली अपने पर्स में या फिर घर के उस स्थान पर रख दें जहां धन रखा जाता हो और धन की देवी से यह प्रार्थना करें कि आपको कभी पैसे की कोई कमी ना हो।एक बात का ध्यान रखें कि चुने गए 21 चावल अखंडित हो।
चावलों को पीला करने के लिए हल्दी में थोड़ा जल मिलाएं और फिर उस हल्दी को चावलों पर लगाकर कुछ देर सूखने के लिए रख दें। इसके बाद ही इन चावलों का उपयोग पोटली बनाने के लिए करें।मान्यता है कि इस उपाय को करने से कुछ ही दिनों में धन लाभ होता है और साथ ही धन से जुड़ा कोई भी बड़ा नुकसान भी टल जाता है।

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सोमवार, 4 दिसंबर 2017

लाफिंग बुद्धा पूरी करेंगे आपकी मनोकामना

Laughing Buddha


जिस प्रकार भारत में वास्तु है, ठीक उसी प्रकार चीन में फेंगशुई है। भारत में कुबेर देव धन के देवता हैं और चीन में लाफिंग बुद्धा। फेंगशुई की मान्यता है कि घर में लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति रखने से सौभाग्य बढ़ता है। इसीलिए भारत में भी काफी लोग अपने-अपने घरों में और दुकानों में इनकी मूर्तियां रखते हैं। यहां जानिए आखिर लॉफिंग बुद्धा कौन थे और घर में इनकी मूर्ति कैसे रखनी चाहिए…

महात्मा बुद्ध के शिष्य थे लॉफिंग बुद्धा
महात्मा बुद्ध के कई शिष्यों में से एक थे जापान के होतेई। मान्यता के अनुसार होतेई बौद्ध बने और जैसे ही उन्हें आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई तो वे जोर-जोर से हंसने लगे। इसके बाद उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था लोगों को हंसाना और सुखी बनाना। होतेई जहां भी जाते वहां लोगों को हंसाते और लोग उनके साथ काफी खुश रहते थे। इसीकारण जापान में लोग उन्हें हंसता हुआ बुद्धा यानी लॉफिंग बुद्धा कहने लगे। धीरे-धीरे उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई, एक देश से दूसरे देश और अब पूरी दुनिया में उन्हें मानने वालों करोड़ों लोग हैं।

जबकि चीन में प्रचलित मान्यता के अनुसार लॉफिंग बुद्धा चीनी देवता हैं। चीन में इन्हें पुताइ के नाम से जाना जाता है। वे एक भिक्षुक थे और उन्हें मौज-मस्ती करना, घुमना-फिरना बहुत पसंद था। वे जहां भी जाते थे, वहां अपना बड़ा पेट और विशाल बदन दिखाकर सभी को हंसाते थे। तभी से लोग इन्हें देवता की तरह मानने लगे और इनकी मूर्तियां घर में रखने लगे।
लाफिंग बुद्धा के उपाय
फेंगशुई के अनुसार सही जगह पर लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति रखने से घर की नकारात्मकता खत्म होती है और घर में सकारात्मकता बढ़ती है। जिससे सुख-समृद्धि का आगमन घर में होता है। जानिए घर में लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति कहां कैसे रखना चाहिए…

1. लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति मुख्य दरवाज़े के सामने न रखे।

2. लाफ‌िंग बुद्धा को घर या दफ्तर में जहां भी रखें इस बात का ध्यान रखें क‌ि उसकी ऊंचाई आपकी आंखों के बराबर तक हो। यानी लाफ‌िंग बुद्धा इस तरह हो क‌ि आते आते आपकी सीधी नजर उस पर पड़े। अध‌िक ऊंचाई या नीचे इसे नहीं रखना चाह‌िए।


3. जो लोग पैसा इकठ्ठा नहीं कर पा रहे हैं उन्हें धन की पोटली लिए हुए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति घर में रखनी चाहिए। इससे धन संबंधी कामों में लाभ मिल सकता हैं।

4. अगर कामों में सफलता नहीं मिल पा रही है तो दोनों हाथों में कमंडल लिए हुए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति घर में रखनी चाहिए।


5. क‌िसी भी घर में पूर्व द‌िशा को पर‌िवार के भाग्‍य और सुख शांत‌ि का स्‍थान कहा जाता है। आप अपने घर के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और तालमेल बढ़ाना चाहते हैं तो एक लाफ‌िंग बुद्धा पूर्व द‌िशा में रखें जो अपने दोनों हाथों को उठाकर हंस रहे हों।

6. फेंगशुई के न‌ियम के अनुसार लाफ‌िंग बुद्धा को अपने घर में दक्ष‌िण पूर्व द‌िशा में रखें तो इस द‌िशा की सकारात्‍मक उर्जा बढ़ जाती है जो धन औ सुख को आकर्ष‌ित करती है। घर में रहने वालों की आमदनी बढ़ती है। नौकरी व्यवसाय आपके व‌िरोध‌ियों से आप परेशान हैं तो इसमें भी यह राहत द‌िलाता है।

7. सामान्यतौर पर लाफिंग बुद्धा की मूर्ति मिट्टी से बनी होती है लेकिन आप धातु का लाफिंग बुद्धा भी रख सकते हैं। लेकिन इसका प्रभाव अलग होता है। ऐसे व्यक्ति जो कभी निर्णय नहीं ले पाते, जिनकी निर्णय क्षमता बहुत कमजोर होती है वे धातु से बने, हंसते हुए बुद्धा की प्रतिमा अपने घर या ऑफिस में रख सकते हैं। इससे आपकी निर्णय क्षमता और अधिक बढ़ जाएगी।

8. अगर आपके घर में कोई बीमार है लेकिन किसी भी परीक्षण में यह साबित नहीं हो पा रहा कि दरअसल बीमारी क्या है तो हाथ में वु लु लिए लाफिंग बुद्धा को बीमार व्यक्ति के तकिए के पास रख देना चाहिए। जल्द ही जांच में उसकी बीमारी का पता चल जाएगा। वु लु एक प्रकार का चीनी फल है जो पीले रंग का होता है।

9. अगर आपको लगता है कि आपके घर में कोई जादू-टोना करता है या किसी की बुरी नजर आपके घर के सदस्यों पर पड़ी है तो आपको ड्रैगन पर बैठे, दिव्य शक्तियों के स्वामी लाफिंग बुद्धा को अपने घर में रखना चाहिए।

10. धन की पोटली अपने कांधे पर टांगे लाफिंग बुद्धा किसी भी घर या ऑफिस के लिए शुभ माने गए हैं, वहीं बच्चों के साथ बैठे लाफिंग बुद्धा संतान प्राप्ति के लिए रखे जाते हैं।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

कुछ सरल उपाय और टोटके



कुछ सरल उपायों, टोटकों और मंत्रों से सफलता मिलने की संभावना बन सकती है। यदि बेरोजगारी का घटाटोप हो रहा हो तो रोजगार का प्रकाश पाने के लिए इन टोटकों को कर के देखें।

कमाल का लेकिन है सात्त्विक टोटका
तीन सौ ग्राम काले उड़द का आटा लेकर, बिना छाने इसको गूंथकर खमीर उठा लें। तत्पश्चात् इसकी एक-एक रोटी तैयार करके मामूली-सी आंच पर सेंक लें, ताकि इसकी आसानी से गोलियां बन सकें। इस रोटी में से एक चौथाई भाग तोड़कर काले रंग के कपड़े में बांध लें, शेष पौन रोटी की 101 छोटी-छोटी गोलियां बनाकर, किसी ऐसे जलाशय के पास जायें, जिसमें मछलियां हों। जलाशय में एक-एक कर सारी गोलियां मछलियों को खिला दें। अब कपड़े में बंधी रोटी को मछलियों को दिखाते हुए एक साथ पानी में प्रवाहित कर दें। इस प्रकार 40 दिनों तक नियमित रूप से यह क्रिया करें। इससे बेरोजगारी अवश्य दूर होगी तथा कोई नौकरी, व्यापार अथवा उदर-पूर्ति के लिए कुछ न कुछ व्यवस्था जरूर हो जायेगी।

दूसरा चमत्‍कारी टोटका
बृहस्पतिवार को एक नर कौए को पकड़कर कर ले आयें, पिंजरे में बंद कर दें। खाने के लिए दाना-पानी दें। रविवार की सुबह उसे दही में चीनी मिलाकर खिलाएं और दोपहर को चावलों के भात में दूध व दही मिलाकर खाने को दें। इसके बाद सोमवार के दिन, जहां से काम हासिल करने का खयाल हो, वहां जायें। उस जगह के मुखय दरवाजे में दाखिल होते वक्त दायें पांव को पहले रखें। इस तरह से वहां पहुंचने के साथ ही आपको काम मिल जायेगा।
प्रयोग : यह प्रयोग स्फटिक मणिमाला पर किया जाता है। सामने पीला वस्त्र बिछाकर उस पर 108 मनकों की मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठा युक्त स्फटिक मणिमाला रख दें और केसर से उसका पूजन करें। सामने अगरबत्ती या दीपक जला दें। यह दीपक शुद्ध घृत का हो। फिर उपर्युक्त मंत्र का इक्कीस बार उच्चारण करें। इस प्रकार 11 दिन तक करने से वह माला विजय माला में परिवर्तित हो जाती है। जब किसी इंटरव्यू या साक्षात्कार में जायें तो उस माला को बुशर्ट अथवा कुर्ते के नीचे पहनकर जायें, ऐसा करने पर साक्षात्कार में अवश्य ही सफलता प्राप्त होती है।
नौकरी प्राप्त करने का सुलेमानी मंत्र
• सामग्री : जलपात्र, तेल का दीपक, लोवान, धूप आदि।
• माला : मूंगे की माला
• समय : दिन का कोई भी समय
• आसन : किसी भी प्रकार का आसन
• दिशा : पूर्व दिशा
• जप संखया : नित्य ग्यारह सौ

• अवधि : चालीस दिन मंत्र : ऊँ या मुहम्मद दीन हजराफील भहक अल्लाह हो। यह मुसलमानी प्रयोग है तथा किसी भी शुक्रवार को प्रारंभ किया जा सकता है। प्रातः उठकर बिना किसी से बातचीत किये सवा पाव उड़द के आटे की रोटी बनायें और उसे आंच पर अपने हाथों से सेकें इसके बाद रुमाल पर रोटी के चार टुकड़े करके रख दें। उसमें से एक टुकड़े को नदी या तालाब में ले जाकर डाल दें, जिससे कि मछलियां उनको खा जायें। शेष रोटी के जो तीन भाग बचेंगे, उनमें से एक भाग कुत्ते को खिला दें, दूसरा भाग कौवे को खिला दें और तीसरा भाग रास्ते में फेंक दें। इस प्रकार चालीस दिन नित्य प्रयोग करें, तो मनोवांछित नौकरी या रोजी प्राप्त होती है और आगे जीवन में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आती है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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बुधवार, 22 नवंबर 2017

पत्नी को रखना चाहिए इन बातों का खास ध्यान



1- जो स्त्री अपने पति को बाहर से आते देख अन्न, जल आदि से उसकी सेवा करती है, मीठे वचन बोलती है, वह तीनों लोकों को संतुष्ट कर देती है। पतिव्रता स्त्री के पुण्य पिता, माता और पति के कुलों की तीन-तीन पीढिय़ों के लोग स्वर्गलोक में सुख भोगते हैं।

2- रजोनिवृत्ति के बाद शुद्धता पूर्वक स्नान करके सबसे पहले अपने पति का चेहरा देखना चाहिए, अन्य किसी का नहीं। अगर पति न हो तो भगवान सूर्य देव के दर्शन करना चाहिए।

3- पतिव्रता स्त्रियों को चरित्रहीन स्त्रियों के साथ बात नहीं करनी चाहिए। पति से द्वेष रखने वाली स्त्री का कभी आदर नहीं करना चाहिए। कभी अकेले नहीं खड़ा रहना चाहिए।

4- पतिव्रता स्त्री को अपने पति की आज्ञा के बिना कहीं नहीं जाना चाहिए। पति के बिना मेले, उत्सव आदि का भी त्याग करना चाहिए यानी नहीं जाना चाहिए। पति की आज्ञा के बिना व्रत-उपवास भी नहीं करना चाहिए।


5- पतिव्रता स्त्री को प्रसन्नतापूर्वक घर के सभी कार्य करना चाहिए। अधिक खर्च किए बिना ही परिवार का पालन-पोषण ठीक से करना चाहिए। देवता, पितर, अतिथि, सेवक, गाय व भिक्षुक के लिए अन्न का भाग दिए बिना स्वयं भोजन नहीं करना चाहिए।

6- धर्म में तत्पर रहने वाली स्त्री को अपने पति के भोजन कर लेने के बाद ही भोजन करना चाहिए। जब पति खड़ा हो तो पत्नी को भी खड़ा रहना चाहिए। उसकी आज्ञा के बिना बैठना नहीं चाहिए। पति के सोने के बाद सोना चाहिए और जागने से पहले जाग जाना चाहिए।


7- रजस्वला होने पर पत्नी को तीन दिन तक अपने पति को मुंह नहीं दिखाना चाहिए अर्थात उससे अलग रहना चाहिए। जब तक वह स्नान करके शुद्ध न हो जाए तब तक अपनी कोई बात भी पति के कान में नहीं पडऩे देना चाहिए।

8- मैथुन काल के अलावा किसी अन्य समय पति के सामने धृष्टता यानी दु:साहस नहीं करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री को ऐसा काम करना चाहिए, जिससे पति का मन प्रसन्न रहे। ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे कि पति के मन में विषाद उत्पन्न हो।


9- पति की आयु बढऩे की अभिलाषा रखने वाली स्त्री को हल्दी, रोली, सिंदूर, काजल, मांगलिक आभूषण, केशों को संवारना, हाथ-कान के आभूषण, इन सबको अपने से दूर नहीं करना चाहिए यानी पति की प्रसन्नता के लिए सज-संवरकर रहना चाहिए।

10- पतिव्रता स्त्री को सुख और दु:ख दोनों ही स्थिति में अपने पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए। यदि घर में किसी वस्तु की आवश्यकता आ पड़े तो अचानक ये बात नहीं कहनी चाहिए बल्कि पहले अपने मधुर वचनों से उसे पति को प्रसन्न करना चाहिए, उसके बाद ही उस वस्तु के बारे में बताना चाहिए।


11- पति बूढ़ा या रोगी हो गया हो तो भी पतिव्रता स्त्री को अपने पति का साथ नहीं छोडऩा चाहिए। जीवन के हर सुख-दु:ख में पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए। अपने पति की गुप्त बात किसी को नहीं बताना चाहिए।

12- पत्नी को बिना सिंगार किए अपने पति के सामने नहीं जाना चाहिए। जब पति किसी कार्य से परदेश गया हो तो उस समय सिंगार नहीं करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री को कभी अपने पति का नाम नहीं लेना चाहिए। पति के भला-बुरा कहने पर भी चुप ही रहना चाहिए।

13- पति के बुलाने पर तुरंत उसके पास जाना चाहिए और पति जो आदेश दे, उसका प्रसन्नतापूर्वक पालन करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री को घर के दरवाजे पर अधिक देर तक नहीं खड़ा रहना चाहिए।
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शनिवार, 18 नवंबर 2017

सुखी जीवन के लिए कुछ वास्तु टिप्स

Vastu Tips


वास्तु दोष के कारण जीवन कष्टमय हो सकता है। यहां हम सुखी जीवन के लिए कुछ वास्तु टिप्स बता रहे हैं।

घर के आगे का भाग टूटा हुआ, प्लास्टर उखड़ा हुआ, दीवारों में दरार हों अथवा दीवारें खराब हों तो उस घर की महिलाओं में मानसिक अशांति, डिप्रेशन, तनाव या दूसरी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए घर के भाग हमेशा सही दशा में रखना जरूरी है।

पति-पत्नी के बीच प्रगाढ़ संबंधों को बनाये रखने के लिए सोने के कमरे में बतख का जोड़ा अवश्य रखना चाहिए। जिस स्थान पर बतख का जोड़ा रखा जाए वहां पर्याप्त प्रकाश होना जरूरी है।

घर में चेहरा देखने वाले शीशा के लिए उपयुक्त स्थान पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार है। छत या फर्श में शीशा नहीं लगवाना चाहिए। सोने के कमरे में शीशायुक्त ड्रेसिंग टेबल को इस तरह रखें कि उसमें सोते समय प्रतिबिम्ब न दिखाई दे अन्यथा पति-पत्नी में संबंध तनावपूर्ण बने रहेंगे।

उत्तर दिशा जल तत्व का प्रतीक है। इस दिशा में घर की महिलाओं के रहने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए वरना उनमें मानसिक तनाव और दूसरे रोग सकते हैं।

सोने के कमरे में पलंग को दक्षिण दिशा की दीवार से लगाकर इस प्रकार रखें कि सोते समय सिरहाना पश्चिम या दक्षिण दिशा में हो। ऐसा करने से घर के स्वामी को सुख एवं आरोग्य लाभ मिलता है। उत्तर दिशा में सिर करके सोना ह्रदय रोग का कारण हो सकता है।

दक्षिण दिशा में पानी की निकासी के लिए नालियां होने से घर के मालिक को कष्ट, रोग एवं समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए घर की निकास नालिया सदैव उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए।


घर का मुख्य दरवाजा अंदर के अन्य दरवाजों की तुलना में बड़ा होना चाहिए। इसके विपरीत होने से घर के मालिक को आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। समाधान के लिए घर के द्वार पर घंटियों की झालर, क्रिस्टल बॉल या लाल रंग का फीता लगाना चाहिए।

घर की छत पर बीम हो तो उसके नीचे बैठना, सोना, पढ़ना-लिखना या अन्य काम करना मानसिक तनाव और क्लेश को जन्म देता है। बचाव के लिए छत पर बीम के दोनों साइड में एक-एक लकड़ी की बांसुरी लटका देनी चाहिए।

बच्चों की पढ़ाई के लिए घर में उपयुक्त दिशा पूर्व या उत्तर होती है। इस दिशा की तरफ मुख करके पढ़ने वाले बच्चों की स्मरणशक्ति और बुद्धि का स्तर बेहतर रहता है। पढ़ने के कमरे की दीवारों में हल्का पीला, हल्का गुलाबी, हल्का हरा या हल्का आसमानी रंग किया जा सकता है।


भोजन करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। दक्षिण की ओर मुख करके भोजन करना स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देता है।

घर में किचन और बाथरूम का आमने-सामने या आसपास होना वास्तु दोष है। इससे नकारात्मक ऊर्जा आती है। बचाव के लिए बाथरूम में कांच के बर्तन में थोड़ा नमक रखकर उसे हर सप्ताह बदलते हुए पुराने नमक को जल में बहा देना चाहिए।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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मंगलवार, 14 नवंबर 2017

मंदिर-मठ आदि अक्सर पहाड़ों पर ही क्यों मौज़ूद होते हैं

मंदिर-मठ आदि अक्सर पहाड़ों पर ही क्यों मौज़ूद होते हैं


1. पर्वतीय क्षेत्र

पर्वतीय क्षेत्र
जब भी हमें छुट्टियों का समय मिलता है तो हम निकल जाते हैं कहीं घूमने-फिरने। यदि आप भारतीय जमीन पर रहते हैं तो अधिकतम लोग छुट्टियां मिलते ही किसी पर्वतीय क्षेत्र में जाना पसंद करते हैं।

2. हरा-भरा माहौल

हरा-भरा माहौल
जहां आसपास हरियाली हो, सुंदर पहाड़ हो और आसपास ऐसी जगहें बनी हों जहां रुक कर प्रकृति का आनंद उठाया जाए। और जब भारत जैसे देश में हम पर्वतीय क्षेत्र की बात करते हैं हिमाचल प्रदेश जैसा अच्छा स्थान नहीं हो सकता। यह वह स्थान है जहां पहुंचने पर शायद हर किसी के मुंह से एक बार ‘जन्नत’ शब्द तो जरूर निकलता होगा।

3. मौका पाते ही जाते हैं हम

मौका पाते ही जाते हैं हम
स्कूल, कॉलेज या ऑफिस से यदि 2-3 दिन की राहत भी मिल जाए तो सुंदर पहाड़ियों पर समय काटने के लिए काफी होती हैं। चलिए आप ही बताएं यदि आपको यह मौका मिले तो आप हिमाचल जैसे पर्वतीय क्षेत्र में किस तरह से छुट्टियां मनाते हैं?

4. आप क्या करते हैं?

आप क्या करते हैं?
किसी प्रसिद्ध जगह पर जाकर, पर्वतों से संबंधित कुछ रोचक एक्टीविटीज करके या फिर जैसे कि कुछ लोग हिमाचल के आसपास धार्मिक स्थानों के दर्शन करते हैं वैसे? खैर आप हिमाचल में किसी धार्मिक स्थल के मकसद से जाएं या ना जाएं लेकिन फिर भी आपको रास्ते में कई धार्मिक स्थान मिल जाएंगे।

5. धार्मिक स्थल

धार्मिक स्थल
कुछ तो ऐतिहासिक होंगे, लेकिन कुछ ऐतिहासिक ना होकर भी लोगों की मान्यता एवं श्रद्धा के अनुसार बनाए गए हैं। रास्ते से गुजरते हुए शायद आपको हर 2 किलोमीटर के अंतर पर कोई ना कोई धार्मिक स्थल, जैसे कि छोटे-छोटे मंदिर, मान्यता पर आधारित धार्मिक पीठ, इत्यादि।

6. यहीं क्यों!

यहीं क्यों!
लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि हिमालय जैसे इलाके में ही यह मंदिर-पीठ इत्यादि क्यों बनाए जाते हैं? भारी मात्रा में धार्मिक स्थल इन्हीं क्षेत्रों में क्यों पाए जाते हैं? शायद आपको यह बात अजीब लग रही हो लेकिन यह सच है कि भारत में यदि किसी जगह अधिकतम धार्मिक स्थल हैं तो वह हिमालय में ही हैं।

7. एक सवाल

एक सवाल
परंतु ऐसा क्यों! किसी भी अन्य राज्य की तुलना में पर्वतीय क्षेत्र में ही सबसे अधिक मंदिर-पीठ होने का क्या महत्व है? प्रसिद्ध कवि रविंद्र नाथ टैगोर ने अपनी एक पुस्तक ‘साधना- दि रियलायज़ेशन ऑफ लाइफ’ में इसी मुद्दे को उठाया है।

8. साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान

साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान
उन्होंने बताया कि भारत में जब-जब साधना एवं भक्ति के लिए जगह की खोज की जाती है, तो किसी शांत, हरियाली से भरे माहौल को ही चुना जाता है। एक ऐसे स्थान को चुनने पर तवज्जो दी जाती है जहां आसपास का शांत पर्यावरण मन एवं दिमाग को शांति पहुंचाए।

9. हर किसी के लिए सही

हर किसी के लिए सही
लेकिन टैगोर ने यह भी बताया कि यह बात केवल भारतीय सीमा तक ही लागू नहीं होती। उन्होंने बताया कि क्रिश्चियनिटी में भी गिरिजाघर एवं मोनास्ट्री के लिए ऐसी ही हरी-भरी जगहों का चयन किया जाता है।

10. सुखमय स्थान

सुखमय स्थान
यह जगहें आत्मा को सुख प्रदान करती है, प्रकृति का यह रूप हमारी आत्मा को परमात्मा से मिलाने में सहायक सिद्ध होता है। शायद इसीलिए प्राचील काल से अब तक जब-जब ऋषि-मुनियों के मन में तपस्या का ख्याल आया है उन्होंने हिमालय की सुंदर वादियों की ओर ही रुख किया है।

11. हर किसी के लिए परफेक्ट

हर किसी के लिए परफेक्ट
पर आप इस गहतफहमी में ना रहिए कि केवल ऋषि-मुनि ही ऐसी वादियों पर जाकर परमात्मा से मिलने वाले सुख को प्राप्त करते हैं। स्वयं हम भी जब इन सुंदर वादियों में प्रवेश करते हैं तो अपने दिमाग को शांत पाते हैं। हमारी आंखें एक अजब-सी ठंडक को महसूस करती हैं और यही ठंडक हमारी आत्मा को शांत करती है।