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रविवार, 15 अक्तूबर 2017

धनतेरस के दिन समृद्धि प्राप्ति उपाय

Dhanteras ke upay


धनतेरस के दिन समृद्धि प्राप्ति के लिए किया गया कोई भी उपाय ज्यादा फलदायी होता है। ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे उपाय बताएं गए है जिन्हें यदि धनतेरस के दिन किसी भी शुभ समय में किया जाए तो घर में स्थिर लक्ष्मी का निवास होता है। आइये जानते है धनतेरस को करने योगय कुछ ऐसे ही उपाय-

लक्ष्मी को अर्पित करें लौंग : धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद लक्ष्मी या किसी भी देवी को लौंग अर्पित करें। यह काम दीपावली के दिनों में रोज करें। आर्थिक लाभ होता रहेगा।

सफेद चीजों का करें दान : धनतेरस पर सफेद पदार्थों जैसे चावल, कपड़े, आटा आदि का दान करने से आर्थिक लाभ का योग बनता है।

सूर्यास्त के बाद न करें झाड़ू-पोंछा : दीपावली के दिनों में और हो सके तो रोज ही शाम को सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू-पोंछा न करें। ऐसा करने से घर में लक्ष्मी चली जाती है।

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गरीब की आर्थिक सहायता करें : धनतेरस पर किसी गरीब, दुखी, असहाय रोगी को आर्थिक सहायता दें। ऐसा करने से आपकी उन्नति होगी।

किन्नर को धन करें दान : धनतेरस के दिन किसी किन्नर को धन दान करें और उसमें से कुछ रुपए वापस अनुरोध करके प्राप्त कर लें। इन रुपयों को सफेद कपड़े में लपेटकर कैश तिजोरी में रख लें, लाभ होगा।

मंदिर में लगाएं केले के पौधे : धनतेरस के दिन किसी भी मंदिर में केले के दो पौधे लगाएं। इन पौधों की समय-समय पर देखभाल करते रहें। इनके बगल में कोई सुगंधित फूल का पौधा लगाएं। केले का पौधा जैसे-जैसे बड़ा होगा, आपके आर्थिक लाभ की राह प्रशस्त होगी।

मोर की मिट्टी की करे पूजा : धनतेरस पर यदि पूजा के समय किसी ऐसे स्थान की मिट्टी जहां मोर नाचा हो लाकर और पूजा करें। इस मिट्टी को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से घर पर हमेशा लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी।
गाय का भोजन जरूर निकालें: धनतेरस और दीपावली के दिन रसोई में जो भी भोजन बना हो, सर्वप्रथम उसमें से गाय के लिए कुछ भाग अलग कर दें। ऐसा करने से घर में स्थिर लक्ष्मी का निवास होगा।

चमगादड़ के पेड़ की टहनी रखे पास :धनतेरस के दिन किसी भी शुभ समय में किसी ऐसे पेड़ की टहनी तोड़ कर लाएं, जिस पर चमगादड़ रहते हों। इसे अपने बैठने की जगह के पास रखें, लाभ होगा।


दक्षिणावर्ती शंख में लक्ष्मी मंत्र का जप : धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद दक्षिणावर्ती शंख में लक्ष्मी मंत्र का जप करते हुए चावल के दाने व लाल गुलाब की पंखुड़ियां डालें। ऐसा करने से समृद्धि का योग बनेगा।
मंत्र- श्रीं

लघु नारियल का उपाय : धन तेरस पर पूजा के समय धन, वैभव व समृद्धि पाने के लिए 5 लघु नारियल पूजा के स्थान पर रखें। उन पर केसर का तिलक करें और हर नारियल पर तिलक करते समय 27 बार नीचे लिखे मंत्र का मन ही मन जप करते रहें- ऐं ह्लीं श्रीं क्लीं
11 लघु नारियल को मां लक्ष्मी के चरणों में रखकर ऊं महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नीं च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् मंत्र की 2 माला का जप करें। किसी लाल कपड़े में उन लघु नारियल को लपेट कर तिजोरी में रख दें व दीपावली के दूसरे दिन किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। ऐसा करने से लक्ष्मी चिरकाल तक घर में निवास करती है।
यदि आप चाहते हैं कि घर में कभी धन-धान्य की कमी न रहे और अन्न का भंडार भरा रहे तो 11 लघु नारियल एक पीले कपड़े में बांधकर रसोई घर के पूर्वी कोने में बांध दें।

घर लाए चांदी के गणेश, चांदी की लक्ष्मी: लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय, व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है। इस दिन भगवान धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है।

सूखे धनिया के बीज का भी महत्व: ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि करता है। दीपावली के दिन इन बीजों को बाग, खेत खलिहानों में लागाया जाता है ये बीज व्यक्ति की उन्नति व धन वृ्द्धि के प्रतीक होते है।

धनतेरस के दिन करे कुबेर को प्रसन्न : शुभ मुहूर्त में धनतेरस के दिन धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करने के बाद निम्न मंत्र का जाप करें- इस मंत्र का जाप करने से भगवन कुबेर बहुत खुश होते हैं, जिससे धन और वैभव की प्राप्ति होती है।

“यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।”सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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दिवाली पर लक्ष्मी जी को खुश करने के उपाय

हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का सबसे अधिक महत्तव है। इस पर्व पर धन की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की लिए उनका पूजन किया जाता है। यदि इस दिन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में सही विधि-विधान से लक्ष्मी का पूजन कर लिया जाए तो अगली दीपावली तक लक्ष्मी कृपा से घर में धन और धान्य की कमी नहीं आती है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जो दीपावली के दिन करने पर बहुत जल्दी लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त की जा सकती है। यहां लक्ष्मी कृपा पाने के लिए 51 उपाय बताए जा रहे हैं और ये उपाय सभी राशि के लोगों द्वारा किए जा सकते हैं। यदि आप चाहे तो इन उपायों में से कई उपाय भी कर सकते हैं या सिर्फ कोई एक उपाय भी कर सकते हैं।

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1. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गांठ भी रखें। पूजन पूर्ण होने पर हल्दी की गांठ को घर में उस स्थान पर रखें, जहां धन रखा जाता है।


2. दीपावली के दिन यदि संभव हो सके तो किसी किन्नर से उसकी खुशी से एक रुपया लें और इस सिक्के को अपने पर्स में रखें। बरकत बनी रहेगी।


3. दीपावली के दिन घर से निकलते ही यदि कोई सुहागन स्त्री लाल रंग की पारंपरिक ड्रेस में दिख जाए तो समझ लें आप पर महालक्ष्मी की कृपा होने वाली है। यह एक शुभ शकुन है। ऐसा होने पर किसी जरूरतमंद सुहागन स्त्री को सुहाग की सामग्री दान करें।

4. दीपावली की रात में लक्ष्मी और कुबेर देव का पूजन करें और यहां दिए एक मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें।
मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रववाय, धन-धान्यधिपतये धन-धान्य समृद्धि मम देहि दापय स्वाहा।

5. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटी बजाना चाहिए। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता बाहर चली जाती है। मां लक्ष्मी घर में आती हैं।

6. महालक्ष्मी के पूजन में गोमती चक्र भी रखना चाहिए। गोमती चक्र भी घर में धन संबंधी लाभ दिलाता है।


7. दीपावली पर तेल का दीपक जलाएं और दीपक में एक लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें। किसी मंदिर हनुमान मंदिर जाकर ऐसा दीपक भी लगा सकते हैं।

8. रात को सोने से पहले किसी चौराहे पर तेल का दीपक जलाएं और घर लौटकर आ जाएं। ध्यान रखें पीछे पलटकर न देखें।


9. दीपावली के दिन अशोक के पेड़ के पत्तों से वंदनद्वार बनाएं और इसे मुख्य दरवाजे पर लगाएं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाएगी।

10. किसी शिव मंदिर जाएं और वहां शिवलिंग पर अक्षत यानी चावल चढ़ाएं। ध्यान रहें सभी चावल पूर्ण होने चाहिए। खंडित चावल शिवलिंग पर चढ़ाना नहीं चाहिए।


11. अपने घर के आसपास किसी पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय दीपावली की रात में किया जाना चाहिए। ध्यान रखें दीपक लगाकर चुपचाप अपने घर लौट आए, पीछे पलटकर न देखें।

12. यदि संभव हो सके तो दीपावली की देर रात तक घर का मुख्य दरवाजा खुला रखें। ऐसा माना जाता है कि दिवाली की रात में महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के घर जाती हैं।

13. महालक्ष्मी के पूजन में पीली कौड़ियां भी रखनी चाहिए। ये कौडिय़ा पूजन में रखने से महालक्ष्मी बहुत ही जल्द प्रसन्न होती हैं। आपकी धन संबंधी सभी परेशानियां खत्म हो जाएंगी।

14. दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा करते समय एक थोड़ा बड़ा घी का दीपक जलाएं, जिसमें नौ बत्तियां लगाई जा सके। सभी 9 बत्तियां जलाएं और लक्ष्मी पूजा करें।

15. दीपावली की रात में लक्ष्मी पूजन के साथ ही अपनी दुकान, कम्प्यूटर आदि ऐसी चीजों की भी पूजा करें, जो आपकी कमाई का साधन हैं।

16. लक्ष्मी पूजन के समय एक नारियल लें और उस पर अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि अर्पित करें और उसे भी पूजा में रखें।

17. दीपावली के दिन झाड़ू अवश्य खरीदना चाहिए। पूरे घर की सफाई नई झाड़ू से करें। जब झाड़ू का काम न हो तो उसे छिपाकर रखना चाहिए।

18. इस दिन अमावस्या रहती है और इस तिथि पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने पर शनि के दोष और कालसर्प दोष समाप्त हो जाते हैं।

19. प्रथम पूज्य श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित करें। दूर्वा की 21 गांठ गणेशजी को चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। दीपावली के शुभ दिन यह उपाय करने से गणेशजी के साथ महालक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।

20. दीपावली से प्रतिदिन सुबह घर से निकलने से पहले केसर का तिलक लगाएं। ऐसा हर रोज करें, महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी।

21. यदि संभव हो सके तो दीपावली पर किसी गरीब व्यक्ति को काले कंबल का दान करें। ऐसा करने पर शनि और राहु-केतु के दोष शांत होंगे और कार्यों में आ रही रुकावटें दूर हो जाएंगी।

22. महालक्ष्मी के पूजन में दक्षिणावर्ती शंख भी रखना चाहिए। यह शंख महालक्ष्मी को अतिप्रिय है। इसकी पूजा करने पर घर में सुख-शांति का वास होता है।

23. महालक्ष्मी के चित्र का पूजन करें, जिसमें लक्ष्मी अपने स्वामी भगवान विष्णु के पैरों के पास बैठी हैं। ऐसे चित्र का पूजन करने पर देवी बहुत जल्द प्रसन्न होती हैं।

24. दीपावली के पांचों दिनों में घर में शांति बनाए रखें। किसी भी प्रकार का क्लेश, वाद-विवाद न करें। जिस घर में शांति रहती है वहां देवी लक्ष्मी हमेशा निवास करती हैं।

25. दीपावली पर ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करते समय नहाने के पानी में कच्चा दूध और गंगाजल मिलाएं। स्नान के बाद अच्छे वस्त्र धारण करें और सूर्य को जल अर्पित करें। जल अर्पित करने के साथ ही लाल पुष्प भी सूर्य को चढ़ाएं। किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज का दान करें। अनाज के साथ ही वस्त्र का दान करना भी श्रेष्ठ रहता है।

26. दीपावाली पर श्रीसूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। रामरक्षा स्तोत्र या हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी किया जा सकता है।

27. महालक्ष्मी को तुलसी के पत्ते भी चढ़ाने चाहिए। लक्ष्मी पूजा में दीपक दाएं, अगरबत्ती बाएं, पुष्य सामने व नैवेद्य थाली में दक्षिण में रखना श्रेष्ठ रहता है।

28. महालक्ष्मी के मंत्र: ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम:, इस मंत्र का जप करें। मंत्र जप के लिए कमल के गट्टे की माला का उपयोग करें। दीपावली पर कम से कम 108 बार इस मंत्र का जप करें।

29. दीपावली से यह एक नियम रोज के लिए बना लें कि सुबह जब भी उठे तो उठते ही सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों का दर्शन करना चाहिए।

30. दीपावली पर श्रीयंत्र के सामने अगरबत्ती व दीपक लगाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठें। फिर श्रीयंत्र का पूजन करें और कमलगट्टे की माला से महालक्ष्मी के मंत्र: ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम: का जप करें।

31. किसी में मंदिर झाड़ू का दान करें। यदि आपके घर के आसपास कहीं महालक्ष्मी का मंदिर हो तो वहां गुलाब की सुगंध वाली अगरबत्ती का दान करें।

32. घर के मुख्य द्वार पर कुमकुम से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। द्वार के दोनों ओर कुमकुम से ही शुभ-लाभ लिखें।

33. लक्ष्मी पूजन में सुपारी रखें। सुपारी पर लाल धागा लपेटकर अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि पूजन सामग्री से पूजा करें और पूजन के बाद इस सुपारी को तिजोरी में रखें।

34. दीपावली के दिन श्वेतार्क गणेश की प्रतिमा घर में लाएंगे तो हमेशा बरकत बनी रहेगी। परिवार के सदस्यों को पैसों की कमी नहीं आएगी।

35. यदि संभव हो सके तो इस दिन किसी तालाब या नदी में मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं। शास्त्रों के अनुसार इस पुण्य कर्म से बड़े-बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं।

36. घर में स्थित तुलसी के पौधे के पास दीपावली की रात में दीपक जलाएं। तुलसी को वस्त्र अर्पित करें।

37. स्फटिक से बना श्रीयंत्र दीपावली के दिन बाजार से खरीदकर लाएं। श्रीयंत्र को लाल वस्त्र में लपेटकर तिजोरी में रखें। कभी भी पैसों की कमी नहीं होगी।

38. दीपावली पर सुबह-सुबह शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। जल में यदि केसर भी डालेंगे तो श्रेष्ठ रहेगा।

39. जो लोग धन का संचय बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें तिजोरी में लाल कपड़ा बिछाना चाहिए। इसके प्रभाव से धन का संचय बढ़ता है। महालक्ष्मी का ऐसा फोटो रखें, जिसमें लक्ष्मी बैठी हुईं दिखाई दे रही हैं।

40. उपाय के अनुसार दीपावली के दिन 3 अभिमंत्रित गोमती चक्र, 3 पीली कौडिय़ां और 3 हल्दी गांठों को एक पीले कपड़ें में बांधें। इसके बाद इस पोटली को तिजोरी में रखें। धन लाभ के योग बनने लगेंगे।

41. यदि धन संबंधियों परेशानियों का सामना कर रहे हैं तो किसी भी श्रेष्ठ मुहूर्त में हनुमानजी का यह उपाय करें।

42. उपाय के अनुसार किसी पीपल के वृक्ष एक पत्ता तोड़ें। उस पत्ते पर कुमकुम या चंदन से श्रीराम का लिखें। इसके बाद पत्ते पर मिठाई रखें और यह हनुमानजी को अर्पित करें। इस उपाय से भी धन लाभ होता है।

43. एक बात का विशेष ध्यान रखें कि माह की हर अमावस्या पर पूरे घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई की जानी चाहिए। साफ-सफाई के बाद घर में धूप-दीप-ध्यान करें। इससे घर का वातावरण पवित्र और बरकत देने वाला बना रहेगा।

44. सप्ताह में एक बार किसी जरूरतमंद सुहागिन स्त्री को सुहाग का सामना दान करें। इस उपाय से देवी लक्ष्मी तुरंत ही प्रसन्न होती हैं और धन संबंधी परेशानियों को दूर करती हैं। ध्यान रखें यह उपाय नियमित रूप से हर सप्ताह करना चाहिए।

45. यदि कोई व्यक्ति दीपावली के दिन किसी पीपल के वृक्ष के नीचे छोटा सा शिवलिंग स्थापित करता है तो उसकी जीवन में कभी भी कोई परेशानियां नहीं आएंगी। यदि कोई भयंकर परेशानियां चल रही होंगी वे भी दूर हो जाएंगी। पीपल के नीचे शिवलिंग स्थापित करके उसकी नियमित पूजा भी करनी चाहिए। इस उपाय से गरीब व्यक्ति भी धीरे-धीरे मालामाल हो जाता है।

46. पीपल के 11 पत्ते तोड़ें और उन पर श्रीराम का नाम लिखें। राम नाम लिखने के लिए चंदन का उपयोग किया जा सकता है। यह काम पीपल के नीचे बैठकर करेंगे तो जल्दी शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। राम नाम लिखने के बाद इन पत्तों की माला बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें।

47. कलयुग में हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माने गए हैं। इनकी कृपा प्राप्त करने के लिए कई प्रकार उपाय बताए गए हैं। यदि पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए तो यह चमत्कारी फल प्रदान करने वाला उपाय है।

48. शनि दोषों से मुक्ति के लिए तो पीपल के वृक्ष के उपाय रामबाण हैं। शनि की साढ़ेसाती और ढय्या के बुरे प्रभावों को नष्ट करने के लिए पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाकर सात परिक्रमा करनी चाहिए। इसके साथ ही शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक भी लगाना चाहिए।

49. दीपावली से एक नियम हर रोज के लिए बना लें। आपके घर में जब भी खाना बने तो उसमें से सबसे पहली रोटी गाय को खिलाएं।

50. शास्त्रों के अनुसार एक पीपल का पौधा लगाने वाले व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार को कोई दुख नहीं सताता है। उस इंसान को कभी भी पैसों की कमी नहीं रहती है। पीपल का पौधा लगाने के बाद उसे नियमित रूप से जल अर्पित करना चाहिए। जैसे-जैसे यह वृक्ष बड़ा होगा आपके घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती जाएगी, धन बढ़ता जाएगा। पीपल के बड़े होने तक इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए तभी आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त होंगे।

51. दीपावली पर लक्ष्मी का पूजन करने के लिए स्थिर लग्न श्रेष्ठ माना जाता है। इस लग्न में पूजा करने पर महालक्ष्मी स्थाई रूप से घर में निवास करती हैं।-पूजा में लक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र और श्रीयंत्र रखना चाहिए। यदि स्फटिक का श्रीयंत्र हो तो सर्वश्रेष्ठ रहता है। एकाक्षी नारियल, दक्षिणावर्त शंख, हत्थाजोड़ी की भी पूजा करनी चाहिए।

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शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

धनतेरस के दिन क्यों होती है लक्ष्मी जी की पूजा



धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि के दिन पूरी श्रद्धा व विश्वास के साथ मनाया जाता है। धनवन्तरि के अलावा इस दिन, देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की भी पूजा करने की मान्यता है। इस दिन के बारे में एक दूसरी कहानी भी प्रचलित है।

एक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे तब लक्ष्मीजी ने भी उनसे साथ चलने का आग्रह किया। तब विष्णु जी ने कहा कि यदि मैं जो बात कहूं तुम अगर वैसा ही मानो तो फिर चलो। तब लक्ष्मीजी उनकी बात मान गईं और भगवान विष्णु के साथ भूमंडल पर आ गईं। कुछ देर बाद एक जगह पर पहुंच कर भगवान विष्णु ने लक्ष्मीजी से कहा कि जब तक मैं न आऊं तुम यहां ठहरो। मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत आना। विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी के मन में कौतुहल जागा कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या रहस्य है, जो मुझे मना किया गया है और भगवान स्वयं चले गए।

लक्ष्मीजी से रहा न गया और जैसे ही भगवान आगे बढ़े लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं। कुछ ही आगे जाने पर उन्हें सरसों का एक खेत दिखाई दिया जिसमें खूब फूल लगे थे। सरसों की शोभा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार करने के बाद आगे बढ़ीं। आगे जाने पर एक गन्ने के खेत से लक्ष्मीजी गन्ने तोड़कर रस चूसने लगीं।

उसी क्षण विष्णु जी आए और यह देख लक्ष्मीजी पर नाराज होकर उन्हें शाप दे दिया कि मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था, पर तुम न मानी और किसान की चोरी का अपराध कर बैठी। अब तुम इस अपराध के जुर्म में इस किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो। ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए। तब लक्ष्मीजी उस गरीब किसान के घर रहने लगीं।

एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तब तुम जो मांगोगी मिलेगा। किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया। पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया। लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया। किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए। फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं।

विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया। तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है, यह तो चंचला हैं, कहीं नहीं ठहरतीं। इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके। इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं। तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है। किसान हठपूर्वक बोला कि, नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूंगा।

तब लक्ष्मीजी ने कहा कि हे किसान तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं वैसा करो। कल तेरस है। तुम कल घर को लीप-पोतकर स्वच्छ करना। रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना और सायंकाल मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपए भरकर मेरे लिए रखना, मैं उस कलश में निवास करूंगी। किंतु पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी। इस एक दिन की पूजा से वर्ष भर मैं तुम्हारे घर से नहीं जाऊंगी। यह कहकर वह दीपकों के प्रकाश के साथ दसों दिशाओं में फैल गईं। अगले दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कथानुसार पूजन किया। उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया।

इसी वजह से हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मीजी की पूजा होने लगी।


घर के लिए वास्तु टिप्स

 Vastu Tips

घर के लिए वास्तु टिप्स 

 घर के बाहर या अंदर आशीर्वाद मुद्रा में देवी-देवता की मूर्ति अथवा चित्र लगाएं। ध्यान रहे, उनका मुंह भवन के बाहर की तरफ हो। सिर्फ गणेश का मुंह भवन के भीतर होना चाहिए क्योंकि गणेश के पीछे दरिद्रता रहती है।
 घर के ड्राइंगरूम में मोर, बंदर, शेर, गाय, मृग आदि के चि‍त्र या मूर्ति रूप में किसी एक का जोड़ा रखें जिसका मुंह एक-दूसरे की तरफ हो तथा मुंह घर के अंदर हो, शुभ रहेगा।

 दक्षिण दिशा में घोड़ा (अश्व) रखना सर्वोत्तम है।

स्फटिक के शिवलिंग की पूजा करें। स्फटिक असली हो तो प्रभाव में वृद्धि होगी।

 भवन निर्माण में दरवाजे और खिड़कियां सम संख्या में हों तथा सीढ़ियां विषम संख्या में हों।

टॉयलेट और किचन एक पंक्ति (कतार) में या आमने-सामने होना दोषकारक है।

घर में गणेशजी की एक से अधिक मूर्ति हो तो कोई फर्क नहीं, परंतु पूजा एक ही गणेशजी की हो। घर में गणपति की मूर्ति, रंगोली, स्वस्तिक या ॐ का चिह्न बुरी आत्माओं के प्रभाव को नियंत्रित करता है।

असली स्फटिक बॉल, श्रीयंत्र, पिरामिड या कटिंग बॉल को आप कहीं भी रख सकते हैं। (श्रीयं‍त्र को केवल घर के मंदिर में रखें।)
धन-समृद्धि के लिए धन की पेटी (कैश बॉक्स) में तीन सिक्के रखें, जो भाग्य की अभिवृद्धि में सहायक होंगे।

 घोड़े की नाल पश्चिमी देशों तथा हमारे देश में भी बहुत भाग्यशाली और शुभ मानी जाती है। अपनी सुरक्षा और सौभाग्य के लिए इसे अपने घर के मुख्य द्वार के ऊपर चौखट के बीच में लगा सकते हैं।

बीम के नीचे बिंदु चिप्स लगाकर बीम के दोष को दूर कर सकते हैं।

संपत्ति तथा सफलता के लिए अपने बैठक कक्ष में पिरामिड को उत्तर-पूर्व में रखें।
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बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

दीपावली पर करें सरल उपाय



धार्मिक शास्त्रों व ज्योतिष में पीतल के पात्रों का बहुत महत्व बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सुवर्ण व पीतल की ही भांति पीला रंग देवगुरु बृहस्पति को संबोधित करता है तथा ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार पीतल पर देवगुरु बृहस्पति का आधिपत्य होता है।

बृहस्पति ग्रह की शांति हेतु पीतल का उपयोग किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह शांति व ज्योतिष अनुष्ठानों में दान हेतु भी पीतल के बर्तन दिए जाते हैं। इस वर्ष दीपावली 19 अक्टूबर 2017, गुरुवार के दिन आ रही है, अत: इस दिन लक्ष्मी पूजन में अगर पीतल के बर्तनों का उपयोग किया जाए तो निश्चित ही आपके जीवन के समस्त परेशानियां दूर होंगी तथा सौभाग्य की प्राप्ति होकर जीवन अनंत सुख-समृद्धियों से भरा रहेगा।

तो आइए इस दीपावली पर करें निम्न सरल उपाय, निश्चित ही आपकी किस्मत चमकेगी और जीवन के सभी कष्टों की समाप्ति भी होगी।

1. लक्ष्मी की प्राप्ति हेतु वैभवलक्ष्मी का पूजन कर पीतल के दीये में शुद्ध घी का दीपक करें।

2. दुर्भाग्य से मुक्ति पाने हेतु पीतल की कटोरी में दही भरकर कटोरी समेत पीपल के नीचे रखें।

3. सौभाग्य प्राप्ति हेतु पीतल के कलश में चना दाल भरकर विष्णु मंदिर में चढ़ाएं।

4. भाग्योदय हेतु पीतल की कटोरी में चना दाल भिगोकर रातभर सिरहाने रखें व सुबह चना दाल पर गुड़ रखकर गाय को खिलाएं।

5. अटूट धन प्राप्ति हेतु भगवान श्रीकृष्ण पर शुद्ध घी से भरा पीतल का कलश चढ़ाकर निर्धन विप्र को दान करें।

सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

कार्तिक मास में क्या करें, क्या न करें



कार्तिक मास लगते ही पूर्णिमा से लेकर कार्तिक उतरते की पूर्णिमा तक प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व ही पवित्र नदियों गंगा, यमुना, गोदावरी आदि में स्नान करके तुलसी, पीपल, बरगद, आंवला आदि वृक्षों पर जल अर्पित करने की परंपरा है। इसके अलावा पांच ईंट या पांच पत्थर के टुकड़ों को रखकर पथवारी बनाते हैं, जिसकी जल, मौली, रोली, चंदन, अक्षत, फल,प्रसाद, धूप, दीपक आदि से पूजा की जाती है। कार्तिक मास में प्रतिदिन व्रत रखकर रात्रि में तारों को अर्घ्य देकर भोजन किया जाता है। अंतिम दिन सुराही, भोजन,वस्त्र, धन आदि का दान बड़े-बुजुर्गों को करके उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

कार्तिक मास में क्या करें, क्या न करें --

चूंकि कार्तिक मास को पवित्र और भक्ति भाव से पूर्ण माना गया है, इसलिए इस मास में कोई भी अपवित्र या वर्जित कार्य नहीं करना चाहिए। इस मास में नमक, शहद, इत्र, गजरे आदि के प्रयोग से बचना चाहिए।

अकारण ही रोना या विलाप करना तथा घर में कलह करना निषिद्ध माना गया है। क्षमाशीलता, विनम्रता, दयाभाव, संतोष, सत्यवादिता जैसे सद्गुणों को अपनाकर शुद्ध ह्रदय भाव के साथ जीवन बिताना चाहिए।

कार्तिक मास में शैया पर शयन न करके धरती पर ही शयन करना उचित रहता है। इस मास में जौ, तिल का तेल, आंवला, श्री खंड और तुलसी दल का सेवन करना अच्छा माना गया है।

कार्तिक मास में प्रतिदिन तुलसी का पूजन, विष्णु और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ, आंवला और कदली वृक्ष को जल से सींचना तथा सात परिक्रमा देना और ॐ विष्णवे नमः मंत्र का जप करना भी शुभ फलदायी होता है।

कार्तिक मास में देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन विष्णु भगवान चार मास की निद्रा से जागते हैं, इसलिए इस दिन व्रत और तुलसी विवाह का विशेष महत्व है।

इस मास में उत्तर पूर्व भारत में सूर्य षष्टी का पर्व भी होता है। यह पर्व आस्था, विश्वास एवं संकल्प से जुड़ा है तथा शरीर और मन, दोनों की पवित्रता को बनाये रखने वाला है।

कार्तिक मास का है खास महत्व
कार्तिक मास को रोगनाशक, सद्बुद्धि, मुक्ति, पुत्र-पौत्र, और धन-धान्य आदि प्रदान करने वाला मास बताया गया है। इस मास में गंगा स्नान, दान, जप-तप, यज्ञ, हवं, अनुष्ठान आदि करने से मनुष्य को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस मास में भगवान विष्णु, लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती, हनुमान जी, धन्वंतरि, माता दुर्गा आदि की पूजा आराधना से सभी प्रकार के ऋणों मुक्ति मिलती है तथा सभी देवी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कार्तिक मास में देव मंदिर, जल स्थान, देव वृक्ष, अंडकार वाले स्थान आदि पर दीप जलाने, भूमि पर शयन करने, साधू-संतों की सेवा करने, अखाद्य पदार्थों का सेवन न करने और पवित्र जीवन व्यतीत करना अत्यंत ही शुभ फलदायी होता है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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गुरुवार, 5 अक्तूबर 2017

कार्यक्षेत्र में समृद्धि लाने के लिए वास्तु



अगर आपको वास्तुशास्त्र में विश्वास है तो उसके सिद्धांतों को अपनाकर आप सुखी रह सकते हैं। यह शास्त्र कहता है कि पैसा और अन्य कीमती चीजों को उत्तर दिशा की ओर मुख वाली वाली अलमारी में रखना चाहिए। वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ गौरव मित्तल ने कार्यक्षेत्र में समृद्धि लाने के लिए वास्तु से संबंधित कुछ सुझाव दिए हैं, जो इस प्रकार हैं :

 पैसे और कीमती चीजों को उत्तर की ओर रखी अलमारी में रखना चाहिए।
 कार्यालय में मालिक की सीट के पीछे मंदिर नहीं होना चाहिए।
 मालिक को पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठना चाहिए। पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके भी बैठा जा सकता है, लेकिन दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके कभी नहीं बैठना चाहिए।
 कार्यालय के मालिक की सीट के पीछे मजबूत दीवार होनी चाहिए।
 मालिक का डेस्क आयताकार होना चाहिए।
 फैक्ट्री या कार्यालय का केंद्र स्थान (ब्रह्म स्थान) खाली होना चाहिए। वहां कोई भारी वस्तु भूलकर भी नहीं रखें।
 मैनेजर, अधिकारियों और निदेशकों के बैठने की सीट की व्यवस्था कार्यालय परिसर के दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
 वास्तु के अनुसार, अकाउंट डिपार्टमेंट को दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए।
 कार्यालय परिसर में रिसेप्शन उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए।
 मार्केटिंग डिपार्टमेंट को उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थापित करना चाहिए।

बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

शरद पूर्णिमा के उपाय



5 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा है। शास्त्रों के अनुसार हर पूर्णिमा वाले को प्रात: स्नानोपरान्त पीपल के वृक्ष के नीचे जाकर लक्ष्मी मां का पूजन करें क्योंकि मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीपल के पेड़ पर लक्ष्मी मां आती है|

मां की पूजा करने के बाद उन्हें आमंत्रित करें अपने घर में स्थान ग्रहण करने के लिए | आप पर हमेशा लक्ष्मी मां की मेहरबानी बनी रहेगी इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करें| ऐसा करने पर मन को असीम शांति मिलेगी और आपके कष्ट दूर होंगे|

पूर्णिमा को हल्दी और पानी का पेस्ट बनाकर अपने घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक और ओम बनाएं हर 
इस दिन मिश्री डाल कर साबूदाने की खीर बनाएं और भोग लगाएं।

मां लक्ष्मी को की कृपा से धन की प्राप्ति होगी | मोती शंख पर केसर से स्वास्तिक बनाएं 108 अक्षत लेकर एक एक अक्षत महालक्ष्मी मंत्र बोलकर चढ़ाएं...फिर उस अक्षत को लाल कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी या कैश बॉक्स में रखें। मंत्र है- ओम श्रीं ओम , ओम ह्रीं ओम महालक्ष्मये नम :।

चावल चंद्रमा का प्रतीक और शंख लक्ष्मी स्वरुप है। ये उपाय आप रात 9 बजे से लेकर आधी रात 12:30 तक कर सकते हैं। घर में लक्ष्मी के स्थायी निवास के लिये, पूर्णिमा की शाम से लेकर सुबह तक अखंड दीप जलायें।

चंद्रलोक में मां लक्ष्मी दीप रुप में विराजमान हैं। अखंड दीप की रोशनी से मां लक्ष्मी खिंची चली आयेंगी।

लक्ष्मी के तांत्रिक उपाय में आप छोटे नारियल की पूजा करके उसे पूजा स्थान पर स्थापित करें। अष्ट लक्ष्मी पर 8 कमल चढ़ाकर महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ने से भी मां लक्ष्मी निर्धनों के जीवन में प्रवेश करती हैं।

दक्षिणावर्ती शंख से मां लक्ष्मी का अभिषेक करें और धूप,दीप ,फूल से पूजा करें, दक्षिणावर्ती शंख भी पूर्णिमा के दिन ही प्रकट हुआ था। श्रीसूक्त का पाठ करने से भी मिलता है धन।

पूर्णिमा को लक्ष्मी सहस्त्रनाम, लक्ष्मी अष्टोत्र नावामली ,सिद्धिलक्ष्मी कवच, श्रीसूक्त, लक्ष्मी सूक्त, महालक्ष्मी कवच, कनकधारा के पाठ से भी आपको मां लक्ष्मी की कृपा मिलेगी।

पूर्णिमा को आंवला की पूजा से भी लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है। चांदनी रात में रखे आंवले में औषधीय शक्ति भी आती है।

पूर्णिमा पर महालक्ष्मी को खीर, छुहाड़े की खीर, मेवे की खीर का भोग लगायें। गाय के दूध में महालक्ष्मी का वास है, इसीलिये उन्हें खीर बहुत प्रिय है।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

भारत के अनोखे रीति रिवाज



 
आग पर चलने का रिवाज
आपको बता दें कि यह रिवाज तमिलनाडु में निभाया जाता है जहां पर अंगारों पर लोग चलते हैं। यह माना जाता है कि महाभारत रामायण मैं भी इस प्रकार की प्रक्रियाओं को निभाया जाता था। इस रिवाज को निभाने के लिए 2 से 3 महीने का अभ्यास किया जाता है और उसके बाद इस प्रक्रिया को बड़े जोर शोर से निभाया जाता है।

बालों को खींचकर निकालने का रिवाज
इस प्रक्रिया को केश लोचन कहा जाता है और यह मुख्य तौर पर जैन समाज में की जाती है। जैन समाज में जब भी किसी व्यक्ति को धर्म गुरु की उपाधी दी जाती है तो उसके बालों को खींच-खींच कर सर से निकाला जाता है। यह बेहद ही दर्दनाक प्रक्रिया है लेकिन फिर भी इसे एक रिवाज के तौर पर किया जाता है। यह माना जाता है कि आप अपने दर्द को सह कर ही ऊपर उठ सकते हैं।

बच्चों को छत पर से फेंकना
यह रिवाज महाराष्ट्र और कर्नाटक में काफी प्रचलित है लेकिन यह बच्चों की जिंदगी के लिए बेहद ही खतरनाक है। इस रिवाज के अनुसार बच्चों को छत पर से फेंका जाता है। आपको बता दें कि बाबा उमर दरगाह जो कि शोलापुर के पास है वहां पर इस प्रकार के रिवाज को निभाया जाता है। ऐसा ही रिवाज श्री संकेश्वर टेंपल कर्नाटक में भी होता है कई बार इस प्रकार की प्रक्रिया पर सवालिया निशान भी उठे मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जानवरों से विवाह का रिवाज़
पूरे भारत में इस प्रकार की प्रक्रिया निभाई जाती है कहीं पर इसे मंगल दोष हटाने के लिए किया जाता है तो कहीं पर भूत पिशाच हटाने के लिए। लेकिन यह प्रक्रिया आपको पूरे देश में कई राज्यों में देखने के लिए मिल जाएगी। इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी जानवर से इंसान की शादी करा दी जाती है और यह माना जाता है कि आपके सारे दोष उस जानवर पर आ जाएंगे। कभी हम यह सुनते हैं कि मेंढक से शादी कराई गई तो कभी मुर्गे से यहां तक कि पेड़ से भी लोगों की शादी करा दी जाती है।

बानी उत्सव आंध्र प्रदेश
यह एक विचित्र प्रकार का उत्सव है जिसमें लोग एक दूसरे को डंडों से पीटते हैं। इस प्रक्रिया में कई लोगों की जान भी चली जाती है लेकिन यह उत्सव देवरागट्टू टेंपल में किया जाता है।

अपने शरीर को छेदना
तमिलनाडु जिले में भगवान मुरगन की आराधना में यह एक विशेष प्रकार का रिवाज निभाया जाता है जिसमें लोग अपने शरीर को सुईयों और सलाखों से छेद लेते हैं। यह बेहद ही दर्दनाक रिवाज है लेकिन लोग इसे निभाते हैं।

सर पर नारियल तुड़वाने का रिवाज
यह बात सुनकर ही आपको बेहद दुख हो रहा होगा लेकिन यह रिवाज तमिलनाडु में निभाया जाता है जिसमें लोग अपने सर पर नारियल तुड़वाते हैं। यह नारियल यहां के पुजारी इन लोगों के सर पर तोड़ते हैं और यह माना जाता है कि जिसके सर पर नारियल टूट गया वह बेहद ही भाग्यशाली है।

हुक के सहारे खुद को लटकाना
यह खतरनाक उत्सव केरल में मनाया जाता है जिसके अंदर इंसान अपनी चमड़ी के अंदर हुक फसाकर उससे लटकता है यह उत्सव मुख्य तौर पर Garuda थुकं नामक जगह पर मनाया जाता है और यह भगवान विष्णु और काली माता की आराधना के दौरान किया जाता है।

गायों से खुद को कुचलवाना
एक विशेष प्रकार की पूजा है जो मध्यप्रदेश में की जाती है दिवाली के अगले दिन भीवडावाद गांव के लोग गायों को सजा कर उन्हें एक साथ भगाते हैं और उनके नीचे लेट जाते हैं। गाय इन्हें कुचल कर आगे निकल जाती हैं और यह माना जाता है कि जिस व्यक्ति पर से गाय निकल गयी है उसे भगवान का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है लेकिन इस प्रक्रिया में कई लोगों की जानें भी जाती है।

अग्नि खेली रिवाज
यह विशेष प्रकार का रिवाज बैंगलोर में निभाया जाता है जिस में आग लगी हुई रस्सियों को लोग अपने शरीर पर मारते हैं इसमें कई लोग दुर्घटना का शिकार भी होते हैं।


रविवार, 1 अक्तूबर 2017

तोरण मारने की रस्म कैसे शुरू हुई

REET 2017-18 25,000 TEACHER VACANCY FOR THIRD TEACHER IN RAJASTHAN


हिन्दू समाज में शादी में तोरण मारने की एक आवश्यक रस्म है, जो सदियों से चली आ रही है। लेकिन अधिकतर लोग नहीं जानते कि यह रस्म कैसे शुरू हुई। इसके पीछे एक गहरा राज है जो बहुत कम लोगों को ही पता है-

प्राचीन दंत कथा के अनुसार कहा जाता है कि तोरण नाम का एक राक्षस था, जो शादी के समय दुल्हन के घर के द्वार पर तोते का रूप धारण कर बैठ जाता था। जब दूल्हा द्वार पर आता तो वह उसके शरीर में प्रवेश कर दुल्हन से स्वयं शादी रचाकर उसे परेशान करता था।

एक बार एक साहसी और चतुर राजकुमार की शादी के वक्त जब दुल्हन के घर में प्रवेश कर रहा था अचानक उसकी नजर उस राक्षसी तोते पर पड़ी और उसने तुरंत तलवार से उसे मार गिराया और शादी संपन्न की। बताया जाता है कि उसी दिन से ही तोरण मारने की परंपरा शुरू हुई।

आपने कभी गौर किया हो तो आपको पता लगेगा कि इस रस्म में दुल्हन के घर के दरवाजे पर लकड़ी का तोरण लगाया जाता है, जिस पर एक तोता (राक्षस का प्रतीक) होता है। बगल में दोनों तरफ छोटे तोते होते हैं। दूल्हा शादी के समय तलवार से उस लकड़ी के बने राक्षस रूपी तोते को मारने की रस्म पूर्ण करता है।

गांवों में तोरण का निर्माण खाती करता है, लेकिन आजकल बाजार में बने बनाए सुंदर तोरण मिलते हैं, जिन पर गणेशजी व स्वास्तिक जैसे धार्मिक चिह्न अंकित होते हैं और दूल्हा उन पर तलवार से वार कर तोरण (राक्षस) मारने की रस्म पूर्ण करता है।
इसे रखें ध्यान
शास्त्रों के अनुसार तोरण पर तोते का रूप रखे का स्वेरूप होना लेकिन इन दिनों तोते की जगह गणेशजी या धार्मिक चिन्हों को बना दिया जाता है। दूल्हा भी तोरण की जगह उन पर ही बार करता है। कहते हैं भारतीय समाज में तलाक के मामले बढने के पीछे भी यही कारण है। विद्वानों को इस बात को समझकर प्रचारित-प्रसारित करना चाहिए। एक तरफ हम शादी में गणेश पूजन कर उनको रिद्धि-सिद्धि सहित शादी में पधारने का निमंत्रण देते हैं और दूसरी तरफ तलवार से वार कर उनका अपमान करते हैं, यह उचित नहीं है। तोरण की रस्म पर ध्यान रखकर परंपरागत राक्षसी रूपी तोरण ही लाकर रस्म निभाएं।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

शास्त्रानुसार ये 9 काम करने से रहती है घर में खुशहाली

शास्त्रानुसार ये 9 काम करने से रहती है घर में खुशहाली




हमारे शास्त्रों में कई ऐसे काम बताएं गए है जिनका पालन यदि किसी परिवार में किया जाए तो वो परिवार पीढ़ियों तक खुशहाल बना रहता है। आइए जानते है शास्त्रों में बताएं गए 9 ऐसे ही काम।
शास्त्र gyan- घर में शांति और समृद्धि लाने के लिए कैसे

1. कुलदेवता पूजन और श्राद्ध-

जिस कुल के पितृ और कुल देवता उस कुल के लोगों से संतुष्ट रहते हैं। उनकी सात पीढिय़ां खुशहाल रहती है। हिंदू धर्म में कुल देवी का अर्थ है कुल की देवी। मान्यता के अनुसार हर कुल की एक आराध्य देवी होती है। जिनकी आराधना पूरे परिवार द्वारा कुछ विशेष तिथियों पर की जाती है। वहीं, पितृ तर्पण और श्राद्ध से संतुष्ट होते हैं। पुण्य तिथि के अनुसार पितृ का श्राद्ध व तर्पण करने से पूरे परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

2.जूठा व गंदगी से रखें घर को दूर-

जिस घर में किचन मेंं खाना बिना चखें भगवान को अर्पित किया जाता है। उस घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती है। इसलिए यदि आप चाहते हैं कि घर पर हमेशा लक्ष्मी मेहरबान रहे तो इस बात का ध्यान रखें कि किचन में जूठन न रखें व खाना भगवान को अर्पित करने के बाद ही जूठा करें। साथ ही, घर में किसी तरह की गंदगी जाले आदि न रहे। इसका खास ख्याल रखें।

3. इन पांच को खाना खिलाएं-

खाना बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए निकालें। मछली को आटा खिलाएं। कुत्ते को रोटी दें। पक्षियों को दाना डालें और चीटिंयों को चीनी व आटा खिलाएं। जब भी मौका मिले इन 5 में से 1 को जरूर भोजन करवाएं।

4. अन्नदान –

दान धर्म पालन के लिए अहम माना गया है। खासतौर पर भूखों को अनाज का दान धार्मिक नजरिए से बहुत पुण्यदायी होता है। संकेत है कि सक्षम होने पर ब्राह्मण, गरीबों को भोजन या अन्नदान से मिले पुण्य अदृश्य दोषों का नाश कर परिवार को संकट से बचाते हैं। दान करने से सिर्फ एक पीढ़ी का नहीं सात पीढिय़ों का कल्याण होता है।

5. वेदों और ग्रंथों का अध्ययन –

सभी को धर्म ग्रंथों में छुपे ज्ञान और विद्या से प्रकृति और इंसान के रिश्तों को समझना चाहिए। व्यावहारिक रूप से परिवार के सभी सदस्य धर्म, कर्म के साथ ही उच्च व्यावहारिक शिक्षा को भी प्राप्त करें।

6. तप –

आत्मा और परमात्मा के मिलन के लिए तप मन, शरीर और विचारों से कठिन साधना करें। तप का अच्छे परिवार के लिए व्यावहारिक तौर पर मतलब यही है कि परिवार के सदस्य सुख और शांति के लिए कड़ी मेहनत, परिश्रम और पुरुषार्थ करें।

7. पवित्र विवाह –

विवाह संस्कार को शास्त्रों में सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। यह 16 संस्कारों में से पुरुषार्थ प्राप्ति का सबसे अहम संस्कार हैं। व्यवहारिक अर्थ में गुण, विचारों व संस्कारों में बराबरी वाले, सम्माननीय या प्रतिष्ठित परिवार में परंपराओं के अनुरूप विवाह संबंध दो कुटुंब को सुख देता है। उचित विवाह होने पर स्वस्थ और संस्कारी संतान होती हैं, जो आगे चलकर कुल का नाम रोशन करती हैं।

8. इंद्रिय संयम –

कर्मेंन्द्रियों और ज्ञानेन्द्रियों पर संयम रखना। जिसका मतलब है परिवार के सदस्य शौक-मौज में इतना न डूब जाए कि कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को भूलने से परिवार दु:ख और कष्टों से घिर जाए।

9. सदाचार –

अच्छा विचार और व्यवहार। संदेश है कि परिवार के सदस्य संस्कार और जीवन मूल्यों से जुड़े रहें। अपने बड़ों का सम्मान करें। रोज सुबह उनका आशीर्वाद लेकर दिन की शुरुआत करे ताकि सभी का स्वभाव, चरित्र और व्यक्तित्व श्रेष्ठ बने। स्त्रियों का सम्मान करें और परस्त्री पर बुरी निगाह न रखें। ऐसा करने से घर में हमेशा मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।




















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गुरुवार, 28 सितंबर 2017

कपूर के टोटके



रात के समय में चांदी की कटोरी में कपूर और लौंग को जलाएं। इस टोटके को कुछ दिनों तक रोज करें। यह उपाय आपको धन से मालामाल कर देगा। पैसों की कमी भी नहीं रहेगी।
जब हजार कोशिशों के बाद भी काम नहीं बनते हैं तो एैसे में कपूर आपकी किस्मत के ताले को खोल सकता है।

शनिवार के दिन कपूर के तेल की बूंदों को पानी में डालें और फिर इस पानी से रोज स्नान करें। यह टोटका आपकी बंद किस्मत को खोलता है। और आपको बीमारियों से भी बचाता है। दुर्घटना कभी भी हो सकती है। एैसे में बचाव बहुत ही जरूरी है।

आप रात के समय में कपूर को जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। इस अचूक टोटके से इंसान किसी भी तरह की प्राकृतिक व अप्राकृतिक दुर्घटना से बचता रहता है।

आपके कई काम इसलिए नहीं बनते हैं क्योंकि इसके पीछे वास्तुदोष होता है। वास्तुदोष को खत्म करने के लिए घर में कपूर की दो गोली रखें। और जब यह गल जाएं फिर दो गोलियां रख दें। एैसा आप समय समय पर करते रहें या बदलते रहें। इससे वास्तुदोष खत्म हो जाएगा।

यदि आपके घर में परेशानी रहती हो तो कपूर को घी में भिगाएं और सुबह और शाम के समय में इसे जलाएं। इससे निकलने वाली उर्जा से घर के अंदर सकारात्मक उर्जा आती है जिससे घर में शांति बनी रहती है।

यदि विवाह में किसी भी तरह की समस्या आ रही हो तो आप 6 कपूर के टुकडे और 36 लौंग के टुकडे लें। अब इसमें चावल और हल्दी को मिला लें। इसके पश्चात आप देवी दुर्गा को इससे आहुति दें। इस टोटके से शादी जल्दी होती है।
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बुधवार, 27 सितंबर 2017

क्यों होते है माला में 108 दाने, क्यों करते है मंत्र जाप के लिए माला का प्रयोग?



क्यों होते है माला में 108 दाने, क्यों करते है मंत्र जाप के लिए माला का प्रयोग?


हिन्दू धर्म में हम मंत्र जप के लिए जिस माला का उपयोग करते है, उस माला में दानों की संख्या 108 होती है। शास्त्रों में इस संख्या 108 का अत्यधिक महत्व होता है । माला में 108 ही दाने क्यों होते हैं, इसके पीछे कई धार्मिक, ज्योतषिक  और वैज्ञानिक मान्यताएं हैं। आइए हम यहां जानते है ऐसी ही चार मान्यताओ के बारे में तथा साथ ही जानेंगे आखिर क्यों करना चाहिए मन्त्र जाप के लिए माला का प्रयोग।
Kyon hote hai mala mein 108 manke (daane)
सूर्य की एक-एक कला का प्रतीक होता है माला का एक-एक दाना
एक मान्यता के अनुसार माला के 108 दाने और सूर्य की कलाओं का गहरा संबंध है। एक वर्ष में सूर्य 216000 कलाएं बदलता है और वर्ष में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है। छह माह उत्तरायण रहता है और छह माह दक्षिणायन। अत: सूर्य छह माह की एक स्थिति में 108000 बार कलाएं बदलता है।
इसी संख्या 108000 से अंतिम तीन शून्य हटाकर माला के 108 मोती निर्धारित किए गए हैं। माला का एक-एक दाना सूर्य की एक-एक कला का प्रतीक है। सूर्य ही व्यक्ति को तेजस्वी बनाता है, समाज में मान-सम्मान दिलवाता है। सूर्य ही एकमात्र साक्षात दिखने वाले देवता हैं, इसी वजह से सूर्य की कलाओं के आधार पर दानों की संख्या 108 निर्धारित की गई है।
माला में 108 दाने रहते हैं। इस संबंध में शास्त्रों में दिया गया है कि…
षट्शतानि दिवारात्रौ सहस्राण्येकं विशांति।
एतत् संख्यान्तितं मंत्रं जीवो जपति सर्वदा।।
इस श्लोक के अनुसार एक पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति दिनभर में जितनी बार सांस लेता है, उसी से माला के दानों की संख्या 108 का संबंध है। सामान्यत: 24 घंटे में एक व्यक्ति करीब 21600 बार सांस लेता है। दिन के 24 घंटों में से 12 घंटे दैनिक कार्यों में व्यतीत हो जाते हैं और शेष 12 घंटों में व्यक्ति सांस लेता है 10800 बार।
इसी समय में देवी-देवताओं का ध्यान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति को हर सांस पर यानी पूजन के लिए निर्धारित समय 12 घंटे में 10800 बार ईश्वर का ध्यान करना चाहिए,
लेकिन यह संभव नहीं हो पाता है।
इसीलिए 10800 बार सांस लेने की संख्या से अंतिम दो शून्य हटाकर जप के लिए 108 संख्या निर्धारित की गई है। इसी संख्या के आधार पर जप की माला में 108 दाने होते हैं।
108 के लिए ज्योतिष की मान्यता
ज्योतिष के अनुसार ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन 12 भागों के नाम मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं। इन 12 राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं। अत: ग्रहों की संख्या 9 का गुणा किया जाए राशियों की संख्या 12 में तो संख्या 108 प्राप्त हो जाती है।
माला के दानों की संख्या 108 संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करती है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार ऋषियों ने में माला में 108 दाने रखने के पीछे ज्योतिषी कारण बताया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं। हर नक्षत्र के 4 चरण होते हैं और 27 नक्षत्रों के कुल चरण 108 ही होते हैं। माला का एक-एक दाना नक्षत्र के एक-एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है।
इसलिए किया जाता है माला का उपयोग
जो भी व्यक्ति माला की मदद से मंत्र जप करता है, उसकी मनोकामनएं बहुत जल्द पूर्ण होती हैं। माला के साथ किए गए जप अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं। मंत्र जप निर्धारित संख्या के आधार पर किए जाए तो श्रेष्ठ रहता है। इसीलिए माला का उपयोग किया जाता है।
किसे कहते हैं सुमेरू
माला के दानों से मालूम हो जाता है कि मंत्र जप की कितनी संख्या हो गई है। जप की माला में सबसे ऊपर एक बड़ा दाना होता है जो कि सुमेरू कहलाता है। सुमेरू से ही जप की संख्या प्रारंभ होती है और यहीं पर खत्म भी। जब जप का एक चक्र पूर्ण होकर सुमेरू दाने तक पहुंच जाता है तब माला को पलटा लिया जाता है। सुमेरू को लांघना नहीं चाहिए।
जब भी मंत्र जप पूर्ण करें तो सुमेरू को माथे पर लगाकर नमन करना चाहिए। इससे जप का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
संख्याहीन मंत्रों के जप से नहीं मिलता है पूर्ण पुण्य
शास्त्रों में लिखा है कि-
बिना दमैश्चयकृत्यं सच्चदानं विनोदकम्।
असंख्यता तु यजप्तं तत्सर्व निष्फलं भवेत्।।
इस श्लोक का अर्थ है कि भगवान की पूजा के लिए कुश का आसन बहुत जरूरी है, इसके बाद दान-पुण्य जरूरी है। साथ ही, माला के बिना संख्याहीन किए गए मंत्र जप का भी पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। अत: जब भी मंत्र जप करें, माला का उपयोग अवश्य करना चाहिए।
मंत्र जप के लिए उपयोग की जाने वाली माला रुद्राक्ष, तुलसी, स्फटिक, मोती या नगों से बनी होती है। यह माला बहुत चमत्कारी प्रभाव रखती है। ऐसी मान्यता है कि किसी मंत्र का जप इस माला के साथ करने पर दुर्लभ कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं।
भगवान की पूजा के लिए मंत्र जप सर्वश्रेष्ठ उपाय है और पुराने समय से ही बड़े-बड़े तपस्वी, साधु-संत इस उपाय को अपनाते रहे हैं। जप के लिए माला की आवश्यकता होती है और इसके बिना मंत्र जप का फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
रुद्राक्ष से बनी माला मंत्र जप के लिए सर्वश्रेष्ठ होती है। रुद्राक्ष को महादेव का प्रतीक माना गया है। रुद्राक्ष में सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश करने की शक्ति भी होती है। साथ ही, रुद्राक्ष वातावरण में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करके साधक के शरीर में पहुंचा देता है।


















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सोमवार, 25 सितंबर 2017

हथेली के ये लक्षण होते हैं धन के मामले में भाग्यशाली


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हथेली के ये लक्षण होते हैं धन के मामले में भाग्यशाली 


Palmistry for money in Hindi : हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार हथेली पर पाए जाने वाले चिन्हों व रेखाओं से जीवन में धन लाभ कब होगा व कितना होगा, इन बातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में….
Palmistry for money in Hindi
1. हथेली में जीवन रेखा सही गोलाई में हो। मस्तिष्क रेखा दो भागों में बंटी हो। त्रिकोण का चिन्ह बना हो। ऐसे तीनों लक्षण हथेली पर एक साथ पाया जाना धन के मामले में शुभ संकेत करता है। समय-समय पर अचानक धन का लाभ मिलता रहता है।
2. भाग्यरेखा हथेली के अंत स्थान यानी मणिबंध से शुुरू हो रही हो। साथ ही शनि पर्वत तक पंहुच रही हो। साथ ही भाग्य रेखा पर किसी प्रकार के अशुभ निशान न हो तो व्यवसाय में सफलता मिलने की ओर संकेत करता है। व्यवसाय से धन लाभ होने का योग बनता है।
3. जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा तीनों ही सही लंबाई में हो। तीनों रेखाओं पर अशुभ चिन्ह न हो। हथेली पर पाए जाने वाले ये दो लक्षण धन के मामले में लाभ करवाने वाले माने गए हैं। ऐसी रेखाओं के साथ जीवन रेखा से उदय होने वाली भाग्य रेखा कई भागों में बंटी हो यानी शाखायुक्त हो तब अपार धन संपदा का मालिक बनने का योग होता है।
4. हथेली भारी और फैली हुई हो। उंगलियां कोमल और नरम हो। ऐसी हथेली होने से बहुत धनवान होने का योग बनता है।
5. हथेली में शनि पर्वत यानी मध्यमा उंगली के पास आकर दो या इससे अधिक रेखाएं आकर ठहरती हैं, तो अनेक तरफ से धन और सुख लाभ करवाने वाली होती है।
6. शनि पर्वत अगर उठा हुआ हो। जीवन रेखा सही तरीके से घुमावदार हो। ये लक्षण हथेली में होने से धनवान बनाते हैं।
Palmistry for money in Hindi
7. मस्तिष्क रेखा सही स्थिति में हो यानी कि टूटी हुई और कटी हुई नहीं हो। साथ ही भाग्य रेखा की एक शाखा जीवन रेखा से निकलती हो। हथेलियां गुलाबी व मांसल हो तो करोड़ों में संपदा होने का योग बनता है।
8. उंगलियां सीधी और पतली हो। हृदय रेखा गुरु पर्वत तक जाए। भाग्य रेखा एक से अधिक हो। हथेली के ये लक्षण धन संपत्ति के मामले में लकी बनाते हैं। नौकरी करें या व्यवसाय आमदनी करोड़ों में होने का योग बनता है।
9. चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलकर शनि पर्वत पर पहुंचे और इस पर कहीं त्रिभुज का चिन्ह बन रहा हो तब व्यक्ति की आय सामान्य रहती है।
10. चंद्र पर्वत से कोई पतली रेखा अगर मस्तिष्क रेखा पर आकर रुक जाए तो व्यक्ति भावुकता के कारण अपने भाग्य की हानि करता रहता है। ऐसे व्यक्ति की आय भी सामान्य रहती है।
11. भाग्य रेखा शुरुआत में मोटी हो और बाद में पतली होती जाए और सीधे शनि पर्वत पर जाए। उंगलियां पतली और सीधी हों। हथेली पर गुरु, सूर्य, शनि, बुध चारों पर्वत अच्छी स्थिति में हो यानी कि सही तरीके से उभार लिए हो। हाथ का रंग साफ हो। तब अचानक धन लाभ होने से धनवान होने का योग बनता है।
रेखाओं और पर्वतों के हिन्दी नाम और इंग्लिश नाम
जीवन रेखा- Life Line
हृदय रेखा- Heart Line
मस्तिष्क रेखा- Head Line
सूर्य रेखा- Sun Line or Fame Line
भाग्य रेखा- Fate Line
शुक्र पर्वत- Venus Mount
चंद्र पर्वत- Moon Mount
गुरु पर्वत- Jupiter Mount
मंगल पर्वत- Mars Mount
शनि पर्वत- Saturn Mount
सूर्य पर्वत- Sun Mount
बुध पर्वत- Mercury Mount

















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शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

भाग्य का साथ चाहते हैं तो ध्यान रखें पेड़-पौधों से जुड़ी 7 बातें

भाग्य का साथ चाहते हैं तो ध्यान रखें पेड़-पौधों से जुड़ी 7 बातें 

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वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस प्रकार घर का हर हिस्सा हमारे जीवन को प्रभावित करता है, उसी तरह घर में सजावट के लिए रखे गए पौधे भी हमारे जीवन पर पॉजिटिव और नेगेटिव प्रभाव डालते हैं। जाने-अनजाने में हम कई बार ऐसे पौधे अपने घर में रख लेते हैं, जिनके कारण वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है।जिसका सीधा-सीधा असर हमारे जीवन पर पड़ता है। आज हम आपको बता रहे हैं घर में किस प्रकार के पौधे रखना चाहिए और कैसे नहीं।
                                                                                               Vastu shastra tips for plants and trees in Hindi
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बुधवार, 20 सितंबर 2017

घटस्थापना का खास शुभ मुहूर्त



नवरात्र शुद्धता से जुड़ा पर्व है, जिसमें नौ दिनों तक पूर्ण पवित्रता और सात्विकता बनाए रखते हुए देवी के नौ स्वरूपों की आराधना करने का विधान है। इस बार नवरात्र पूरे 9 दिन के पड़ रहे है। इन नौ दिन साधना के लिए बड़े ही फलदायी बताए गए हैं। माता दुर्गा की साधना के अलावा आप इन दिनों और देवी-देवताओं की उपासना करके भी विशेष फल प्राप्त कर सकते हैं। इन दिनों में यदि इन मुहूर्तों में पूजा-पाठ किए जाएं तो घर में धन-धान्य किसी की भी कोई कमी नहीं रह जाती है। आइए जानें खास शुभ मुहूर्त-

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त -
जिन घरों में नवरात्रि पर घट-स्थापना होती है उनके लिए शुभ मुहूर्त 21 सितंबर को सुबह 06 बजकर 03 मिनट से लेकर 08 बजकर 22 मिनट तक का है। इस दौरान घट स्थापना करना अच्छा होता है। किसी भी वक्त कलश स्थापित कर सकता है वैसे नवरात्र के प्रारंभ से ही अच्छा वक्त शुरू हो जाता है इसलिए अगर जातक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना नहीं कर पाता है तो वो पूरे दिन किसी भी वक्त कलश स्थापित कर सकता है क्योंकि मां दुर्गा कभी भी अपने भक्तों का बुरा नहीं करती हैं। अभिजीत मुर्हूत 11.36 से 12.24 बजे तक है। देवी बोधन 26 सितंबर मंगलवार को होगा। बांग्ला पूजा पद्धति को मानने वाले पंडालों में उसी दिन पट खुल जाएंगे। जबकि 27 सितंबर सप्तमी तिथि को सुबह 9.40 बजे से देर शाम तक माता रानी के पट खुलने का शुभ मुहूर्त है।




नवरात्र में मां के 9 रूपों की पूजा होती है
21 सितंबर 2017 : मां शैलपुत्री की पूजा
22 सितंबर 2017 : मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
23 सितंबर 2017 : मां चन्द्रघंटा की पूजा
24 सितंबर 2017 : मां कूष्मांडा की पूजा
25 सितंबर 2017 : मां स्कंदमाता की पूजा
26 सितंबर 2017 : मां कात्यायनी की पूजा
27 सितंबर 2017 : मां कालरात्रि की पूजा
28 सितंबर 2017 : मां महागौरी की पूजा
29 सितंबर 2017 : मां सिद्धदात्री की पूजा
30 सितंबर 2017: दशमी तिथि, दशहरा




देवी मां को रिझाने के लिए नौ दिन पहनें नौ रंगों के कपडे -
कहते हैं ऐसे में देवी के हर रूप के लिए अलग-अलग तय रंगों को अपनी वेशभूषा में यदि आप भी अपनाएं तो देवी प्रसन्न होती हैं। इस बार भी देवी के लिए नौ रंग तय हैं।
नवरात्रि के पहले दिन की प्रधान देवी शैलपुत्री हैं। इस रोज ग्रे रंग पहनने से शुभ लाभ की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी के पूजन का विधान है। इस रोज ऑरेंज रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
नवरात्रि के तीसरे दिन सफेद रंग के कपड़े पहन कर देवी चंद्रघंटा की पूजा करें।
नवरात्रि के चौथे दिन कुष्मांडा स्वरूप का पूजन करें और लाल रंग के कपड़े पहनें।

नवरात्रि के पांचवे दिन नीले रंग के वस्त्र पहन कर देवी के स्कंदमाता रूप की आराधना करें।
नवरात्रि के छटे दिन पीले रंग के कपड़े पहन कर देवी कात्यायनी की उपासना करें।
नवरात्रि की सप्तमी तिथि को हरा रंग पहन कर देवी के कालरात्रि स्वरुप की पूजा करें। महिलाओं के लिए इस दिन हरे रंग की चूड़ियां पहनना और दान करना शुभ रहेगा।
नवरात्रि में अष्टमी तिथि का महत्व सबसे अधिक होता है। इस दिन की प्रधान देवी महागौरी हैं, मोरपंखी पोशाक पहनने से देवी मां की कृपा मिलेगी।
नौवां नवरात्रि नवमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन समस्त सिद्धियों की दात्री देवी सिद्धिदात्री का पूजन होता है। नौंवे दिन जामुनी रंग के परिधान धारण करें।सरकारी नौकरियों के बारे में ताजा जानकारी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

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